नयी दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों का निर्माण पुन: शुरू करने के लिहाज से रविवार को मानक परिचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की घोषणा की। जावड़ेकर ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय से विचार-विमर्श करने के बाद एसओपी को अंतिम रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर जारी किए गए दिशानिर्देशों के आधार पर फिल्मों और टीवी धारावाहिकों के लिए शूटिंग शुरू की जा सकती है। एसओपी का विवरण साझा करते हुए उन्होंने कहा कि कैमरे के आगे जो लोग काम करते हैं, उन्हें छोड़कर शेष लोगों को मास्क लगाना होना। जावड़ेकर ने उम्मीद जताई कि एसओपी जारी होने से न सिर्फ फिल्मों और धारावाहिकों की शूटिंग दोबारा शुरू होगी बल्कि इससे रोजगार भी पैदा होंगे। गौरतलब है कि संक्रमण फैलने के बाद फिल्मों और टीवी धारावाहिकों की शूटिंग पर रोक लगा दी गई थी।
आरोग्य सेतु में नया फीचर, कर्मचारियों के स्वास्थ्य की स्थिति जान सकेंगी कम्पनियां
नयी दिल्ली : आरोग्य सेतु ऐप में एक नया ‘फीचर’ जोड़ा गया है, जिसके जरिये संगठनों को अपने कर्मचारियों तथा अन्य प्रयोगकर्ताओं के स्वास्थ्य की जानकारी बिना उनकी निजता का उल्लंघन किए मिल सकेगी। बयान में कहा गया है कि आरोग्य सेतु दुनिया में इस तरह की सबसे ज्यादा डाउनलोड की गई ऐप है। अब इसके प्रयोगकर्ताओं की संख्या 15 करोड़ को पार कर गयी है।
इस नए फीचर ‘ओपन एपीआई सर्विस’ से लोगों, कंपनियों तथा अर्थव्यवस्था को सामान्य स्थिति में लौटने में मदद मिलेगी। इसका मकसद कोविड-19 के भय और जोखिम को कम करना है। इस सेवा का लाभ देश में पंजीकृत ऐसे संगठन और कंपनियां ले सकेंगी जिनके कर्मचारियों की संख्या 50 से ज्यादा है। बयान में कहा गया है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों या किसी अन्य आरोग्य सेतु के प्रयोगकर्ता के स्वास्थ्य की जानकारी ले सकेंगी। इसके लिए संबंधित व्यक्ति की ओर से उसके स्वास्थ्य की जानकारी इकाई से साझा करने की सहमति लेनी होगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘यह फीचर कंपनियों तथा अर्थव्यवस्था को सुरक्षित तरीके से कामकाज की सुविधा प्रदान करेगा। ओपन एपीआई (एप्लिकेशन प्रोग्राम इंटरफेस) सर्विस के जरिये संगठन आरोग्य सेतु की स्थिति का पता लगा सकेंगे और इसे अपने विभिन्न घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) के फीचर्स से एकीकृत कर सकेंगे। बयान में कहा गया है कि ओपन एपीआई आरोग्य सेतु की स्थिति तथा आरोग्य सेतु प्रयोगकर्ता का नाम सिर्फ उनकी सहमति से उपलब्ध कराएगा। बयान में स्पष्ट किया किया है कि एपीआई के जरिये अन्य कोई निजी डेटा साझा नहीं किया जाएगा। इस नई सेवा के लिए पंजीकरण ओपनएपीआई.आरोग्यसेतु.जीओवी.इन पर किया जा सकेगा। आरोग्य सेतु ऐप को दो अप्रैल को शुरू किया गया था।
राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड:रोहित शर्मा, पैरा एथलीट थंगावेलु समेत 5 खिलाड़ियों को मिलेगा खेल रत्न
सचिन, धोनी और विराट के बाद रोहित चौथे क्रिकेटर
खेल रत्न से सम्मानित मीराबाई और साक्षी का नाम अर्जुन अवॉर्ड की सूची में नहीं
नयी दिल्ली : खेल मंत्रालय ने पांच खिलाड़ियों को इस साल का राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार देने के फैसले पर मुहर लगा दी। इसमें रोहित शर्मा (क्रिकेट), मरियप्पन टी (पैरा एथलीट), मनिका बत्रा (टेबल टेनिस), विनेश फोगाट (रेसलिंग) और रानी रामपाल (महिला हॉकी) शामिल हैं। रोहित देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान पाने वाले चौथे क्रिकेटर होंगे। उनसे पहले सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली को यह अवॉर्ड मिल चुका है।
तेंडुलकर पहले भारतीय क्रिकेटर थे, जिन्हें 1998 में खेल रत्न दिया गया था। धोनी को 2007 और कोहली को 2018 में वेटलिफ्टर मीराबाई चानू के साथ यह पुरस्कार मिला था। इससे पहले 2016 में बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु, जिमनास्ट दीपा कर्माकर, रेसलर साक्षी मलिक और शूटर जीतू राय को दिया गया था।
कोरोना के कारण राष्ट्रीय खेल पुरस्कार समारोह नहीं होगा
कोरोना के कारण पहली बार राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 29 अगस्त को वर्चुअल तरीके से दिए जाएंगे। हर साल 29 अगस्त यानी नेशनल स्पोर्ट्स-डे के मौके पर राष्ट्रपति भवन में एक कार्यक्रम के जरिए यह पुरस्कार दिए जाते हैं।
कमेटी के सदस्यों में वीरेंद्र सहवाग भी
विजेताओं के सेलेक्शन के लिए खेल मंत्रालय ने 12 मेंबर्स की कमेटी बनाई थी। इसकी अगुआई सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस मुकुंदकम शर्मा ने की। कमेटी के सदस्य पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग, पूर्व हॉकी प्लेयर सरदार सिंह, पैरालिंपिक रजत पदक विजेता दीपा मलिक, पूर्व टेबल-टेनिस खिलाड़ी मोनालिसा बरुआ मेहता, बॉक्सर वेंकटेशन देवराजन के अलावा पत्रकार आलोक सिन्हा और नीरू भाटिया थे।
खेल रत्न पाने वाले को अब 25 लाख रुपए मिलेंगे
खेल रत्न भारत का सबसे बड़ा खेल पुरस्कार है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर इसका नाम रखा गया है। हर साल देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को यह दिया जाता है। अब तक पुरस्कार के साथ खिलाड़ी को 7.5 लाख रुपए और एक प्रतिमा दी जाती थी। लेकिन अब खेल रत्न पुरस्कार पाने वाले को 25 लाख रुपए मिलेंगे। इसमें 300 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है।
अर्जुन अवॉर्ड हासिल करने वाले को 5 की जगह 15 लाख, द्रोणाचार्य अवॉर्डी को 5 की बजाय 10 लाख और मेजर ध्यानचंद लाइफटाइम अवॉर्ड पुरस्कार पाने वाले को 5 की जगह 15 लाख रुपए दिए जाएंगे। इसका पूरा मसौदा तैयार कर लिया है। 29 अगस्त यानी खेल दिवस के दिन इसकी घोषणा की जाएगी। पिछले साल पैरालिंपियन दीपा मलिक और पहलवान बजरंग पूनिया को यह पुरस्कार मिला था।
कोचिंग में योगदान के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार
खेल रत्न और अर्जुन अवॉर्ड खिलाड़ियों को दिए जाते हैं, जबकि द्रोणाचार्य पुरस्कार कोचिंग के क्षेत्र में योगदान के लिए दिया जाता है। इसके अलावा ध्यान चंद पुरस्कार खिलाड़ियों को लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए मिलता है। इस साल के अर्जुन अवॉर्ड और खेल रत्न जनवरी 2016 से दिसंबर 2019 तक के प्रदर्शन के आधार पर दिया गया है।
डोपिंग में फंसे खिलाड़ी आवेदन नहीं कर सकते
ऐसे खिलाड़ी राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के लिए आवेदन नहीं भेज सकते हैं, जिन्हें नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी यानी नाडा ने डोपिंग का दोषी पाया हो या उनके खिलाफ जांच चल रही है।
घर से काम के कारण बढ़ी किराए पर ऑफिस के फर्नीचर की माँग
नयी दिल्ली : कोरोना वायरस महामारी के कारण घर से काम करने की संस्कृति बढ़ रही है जिससे किराए पर ऑफिस के फर्नीचर की मांग भी बढ़ी है। बाजार विशेषज्ञों का ऐसा आकलन है। इस तरह का काम करने वाली कंपनी फैबरेन्टो के संस्थापक सिद्धांत लांबा ने पीटीआई-भाषा से कहा कि मार्च के अंतिम सप्ताह में लगे देशव्यापी लॉकडाउन के बाद से घर से काम सामान्य चलन बन गया है लेकिन पेशेवरों को घर पर काम में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि अधिकांश के पास आरामदायक ऑफिस फर्नीचर घर पर उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा, ”जून में जैसे ही अनलॉक के पहले चरण की घोषणा हुई, हमें घर से काम के लिये डेस्क की काफी मांग मिलने लगी। डेस्क और आरामदायक कुर्सियों की भारी मांग मिल रही है।
कुछ लोग घरेलू उपकरण भी किराए पर ले रहे हैं।उन्होंने कहा कि नया फर्नीचर खरीदना कई लोगों के लिये वहनीय नहीं है, ऐसे में किराए पर इनकी मांग में तेजी आई है।नाइट फ्रैंक के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, 70 प्रतिशत से अधिक कंपनियां अपने परिसरों में सुरक्षित आपसी दूरी के प्रावधान का पालन करने के लिए अधिकांश कर्मचारियों के लिए कम से कम छह महीने तक घर से काम की नीति पर अमल करने जा रही हैं। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि घर से काम के कारण कंपनियों की उत्पादकता पर कोई असर नहीं पड़ा है। सिटी फर्निश के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीरव जैन ने कहा कि उनकी कंपनी को घर से काम करने से संबंधित सामानों जैसे टेबल, कुर्सी आदि की मांग में 40 प्रतिशत की तेजी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा घरेलू उपकरणों, आरामदायक बिस्तरों आदि की मांग में भी तेजी देखने को मिल रही है।
आईआईटी बम्बई और शिव नादर यूनिवर्सिटी अनुसंधानकर्ताओं ने बनायी किफायती बैटरी
मुम्बई : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बंबई और शिव नादर यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने पर्यावरण अनुकूल लीथियम-सल्फर (एलआई-एस) बैटरियां बनाने के लिए एक तकनीक ईजाद करने का दावा किया है जो इस समय इस्तेमाल की जा रहीं लीथियम-आयन बैटरियों की तुलना में तीन गुना अधिक ऊर्जा क्षमता वाली और किफायती होंगी।
अनुसंधानकर्ताओं के दल के अनुसार एलआई-एस बैटरी की प्रौद्योगिकी हरित रसायन विज्ञान के सिद्धांत पर आधारित है जिसमें पेट्रोलियम उद्योग के सह-उत्पादों (सल्फर), कृषि संबंधी अनुपयोगी तत्वों और कार्डेनॉल (काजू प्रसंस्करण का एक सह-उत्पाद) जैसे कोपॉलीमर्स तथा यूजीनॉल (लौंग का तेल) जैसे कैथोडिक सामग्रियों का उपयोग शामिल है।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि इस प्रौद्योगिकी में अरबों डॉलर के उद्योगों की सहायता की क्षमता है जिनमें तकनीकी गैजेट, ड्रोन, विद्युत चालित वाहन और कई अन्य उत्पादों के कारोबार हैं जो ऐसी बैटरियों पर आधारित हैं।
शिव नादर यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर बिमलेश लोहचब ने ‘पीटीआई-भाषा से कहा, ”अनुसंधान में उद्योगों और पर्यावरण की जरूरतों पर एक साथ ध्यान देने के लिए समाधान तलाशने को पर्यावरण अनुकूल रसायन विज्ञान के सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। लोहचब की टीम ने आईआईटी बंबई के प्रोफेसर सागर मित्रा के साथ मिलकर इस अनुसंधान का इस्तेमाल लीथियम-सल्फर बैटरी प्रारूप विकसित करने के लिए किया है।
मित्रा ने कहा, ”हमारे लैपटॉप, मोबाइल फोन और स्मार्ट घड़ियों से लेकर बिजली से चलने वाली कार तक इन बैटरियों पर निर्भर रहती हैं।
विश्व की प्राचीनतम लिखित भाषा है संस्कृत, जिसे कहते हैं ‘देववाणी’
अनेक भाषाओं की जननी है यह भाषा
मोदी सरकार के विभिन्न कीर्ति-स्तंभों में से एक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का एक महत्वपूर्ण बिंदु है भारतीय संस्कृति की महान परंपराओं और विरासत को सहेजना। इस महान थाती की सबसे बड़ी वाहिका है भारतीय संविधान के आठवें अनुच्छेद में उल्लिखित भाषा संस्कृत, जिसमें पिछले कम से कम पांच हजार वर्षों से निरंतर लेखन होता आ रहा है। संस्कृत में न केवल हिंदू, बौद्ध, जैन आदि के प्राचीन धार्मिक ग्रंथ लिखित हैं, बल्कि इसमें साहित्य, संस्कृति व ज्ञान-विज्ञान परक लगभग तीन करोड़ पांडुलिपियां मौजूद हैं। यह संख्या ग्रीक और लैटिन की पांडुलिपियों की कुल संख्या के सौ गुना से भी ज्यादा है।
संस्कृत जिसे देववाणी भी कहते हैं, विश्व की प्राचीनतम लिखित भाषा है। आधुनिक आर्यभाषा परिवार की भाषाएं- हिंदी, बांग्ला, असमिया, मराठी, सिंधी, पंजाबी, नेपाली आदि इसी से विकसित तो हुई ही हैं, दक्षिण भारत के तेलुगु, कन्नड़ एवं मलयालम का भी संस्कृत से गहरा नाता है।
माना जाता है कि इन भाषाओं की लगभग 80 प्रतिशत शब्दावली संस्कृत से आई है। और तो और, तमिल बनाम संस्कृत की राजनीति करने वालों को भी प्रतिष्ठित तुलनात्मक भाषाविज्ञानी प्रो. थॉमसबरो के शोधकार्य लोनवड्र्स इन संस्कृत (1946) और कलेक्टेड पेपर्स ऑन द्रविड़ियन लिंग्विस्टिक्स (1968) के बारे में जानना चाहिए। प्रो. थॉमसबरो के अनुसार संस्कृत के हजारों शब्द किंचित परिवर्तनों के साथ तमिल भाषा में मिल चुके हैं, इसी तरह संस्कृत ने बड़ी संख्या में तमिल से शब्द ग्रहण किए हैं। संस्कृत की इन्हीं विशेषताओं को देखते हुए ही बाबासाहेब आंबेडकर का मानना था कि संस्कृत पूरे भारत को भाषाई एकता के सूत्र में बांध सकने में सक्षम होगी। उन्होंने संविधान सभा में इसे भारत की राजभाषा बनाने तक का प्रस्ताव दिया था।
संस्कृत एक तरफ हमें प्राचीन जड़ों से जोड़ती है तो दूसरी तरफ इसमें समकालीन और भविष्य की जरूरतों को भी साकार करने की संभावना है। नई शिक्षा नीति (एनईपी) का एक महत्वपूर्ण बिंदु है- स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा के विभिन्न प्रोग्राम में भारतीय भाषाओं को शिक्षण माध्यम के रूप में अधिकाधिक समाहित करने के प्रयास किए जाएंगे। इन आधुनिक कार्यक्रमों-पाठ्यक्रमों में पठन-पाठन सामग्री के लिए पारिभाषिक शब्दावलियों की जरूरत पड़ेगी। इस कार्य में संस्कृत बहुत मददगार साबित होगी। विभिन्न भारतीय भाषाओं की कड़ी संस्कृत से पारिभाषिक शब्दावली निर्माण करने से इन भाषाओं के ज्ञान-विज्ञान की सामग्री में एकरूपता भी आएगी।
संविधान के अनुच्छेद 351 का भी यही अप्रत्यक्ष संदेश है। हालांकि यह d अनुच्छेद हिंदी के लिए है, जिसमें प्रमुख रूप से संस्कृत से पारिभाषिक शब्दावली लेने का निर्देश है। आज संस्कृत का ज्ञान इसलिए भी जरूरी है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान जैसे आयुर्वेद, वास्तुशास्त्र, निर्माण कला अथवा वैदिक गणित आदि के साथ-साथ भारतीय संस्कृति का प्रामाणिक रूप सामने आ सके। संस्कृत ज्ञान के अभाव में यूरोपीय ही नहीं भारतीय इतिहासकारों तक ने प्राचीन काल की अनेक चीजों की व्याख्या में अर्थ का अनर्थ कर दिया है। इसके अतिरिक्त भविष्य की प्रौद्योगिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए भी संस्कृत को बहुत उपयोगी माना जा रहा है।
संस्कृत में शब्दों को किसी भी क्रम में रखा जा सकता है, अर्थ बदलने की संभावना भी बहुत कम होती है। जैसे- राम: गृहं गच्छति अथवा गच्छति गृहं राम: दोनों ही सही हैं। सुस्पष्ट व्याकरण और वर्णमाला की वैज्ञानिकता के कारण भी इसकी श्रेष्ठता सर्वस्वीकृत है। पिछले दिनों गूगल ने संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाने की घोषणा की है। हमारे इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भी संस्कृत सहित विभिन्न भाषाओं में अनेक सॉफ्टवेयर विकसित किए हैं।
अंत में, किसी भी समाज- राष्ट्र की प्रतिष्ठा में उसके गौरवशाली अतीत की भी बड़ी भूमिका होती है। सर्वे भवन्तु सुखिन: एवं वसुधैव कुटुम्बकम् के उद्घोषकर्ता भारत के इस महान अतीत को प्रकाशित करने का दायित्व संस्कृत का ही होगा। यह अनायास नहीं कि स्कूली से लेकर उच्च शिक्षा तक में संस्कृत को समाहित करने की एनईपी में परिकल्पना है, क्योंकि सही अर्थों में संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि एक पूरी संस्कृति है, एक दृष्टि है, जिसमें विश्व कल्याण की कामना है।
(साभार-दैनिक जागरण)
खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी
कोलकाता : खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया। वैश्विक महामारी के दौर में पठन-पाठन की प्रक्रिया जारी रहे एवं विद्यार्थियों की सक्रियता बनी रहे इसी उद्देश्य से इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया । ‘आज की चुनौतियां और हिंदी नाटक’ विषय पर चर्चा का प्रमुख बिंदु था कि वर्तमान समय की चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में हिंन्दी नाटकों की सैद्धान्तिक ही नहीं बल्कि व्यावहारिक धरातल पर क्या उपयोगिता है। कार्यक्रम का आरंभ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुबीर कुमार दत्त के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा कि हिंदी नाटक को लेकर हिंदी विभाग की यह दूसरी संगोष्ठी है। कोरोना काल में ऐसी सक्रियता तारीफ के काबिल है। बतौर वक्ता प्रख्यात नाटककार एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रताप सहगल ने कहा कि चुनौतियां हर युग में समाज को प्रभावित करती रही हैं।हिंदी नाटक मल्टी नैरेटिव्स को लेकर हमेशा रंगमंच की ओर रुख करता है । कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सत्या उपाध्याय ने आज के संदर्भ से मल्लिका और माधवी को जोड़कर देखने की नवीनतम दृष्टि दी है ।
रेवेंशा विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजुमन आरा ने कहा कि स्कंदगुप्त की तमाम स्त्रियों का चरित्र गतिशील होने के साथ-साथ स्त्री स्वातंत्र्य और स्वाभिमान से जुड़ा है । नेपाल से जुड़ी, नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय की एसिस्टेन्ट प्रोफेसर प्रो. पूनम झा ने कहा कि हमें नाटक की परंपरा को समझने की जरूरत है साथ ही उसे व्यापक समाज का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है ।इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल संचालन करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि विभाग हमेशा से विद्यार्थियों को शिक्षा और सृजनात्मकता से जोड़ने का काम करता रहा है।हिंदी की लम्बी नाट्य परंपरा में संवेदना,मनुष्यता और प्रतिरोध का संस्कार देखने को मिलता है । इस अवसर पर कॉलेज के अन्य विभाग के शिक्षकों के साथ विभिन्न शहरों से शिक्षक, शोधकर्ता एवं विद्यार्थी ने भारी संख्या में भाग लिया । संगोष्ठी का संयोजन प्रो. मधु सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राहुल गौड़ ने दिया ।
माँ आशछेन : भवानीपुर 75 पल्ली में खूँटी पूजा का आयोजन
कोलकाता : दुर्गोत्सव ने आहट दे दी है और पूजा आयोजकों ने खूँटी पूजा का आयोजन शुरू कर दिया है। महानगर के प्रसिद्ध पूजा आयोजकों में शामिल भवानीपुर 75 पल्ली ने हाल ही में खूँटी पूजा आयोजित की। यह पूजा अपनी सज्जा और सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती है। इस अवसर पर कोलकाता नगर निगम के प्रशासकीय बोर्ड के अध्यक्ष. मेयर परिषद सदस्य देवाशीष कुमार, पूर्व क्रीड़ा मंत्री तथा भवानीपुर 75 पल्ली के चेयरमैन मदन मित्रा के अतिरिक्त 75 पल्ली के अध्यक्ष व समाज सेवी कार्तिक बनर्जी उपस्थित थे। इस अवसर पर एम. आर. बांगुड़ अस्पताल के एम ओ आई सी क्रिटिकल केयर यूनिट, डॉ, एस. पाल औऱ उनकी टीम को कोरोना योद्धा के रूप में सम्मानित किया गया। क्लब के सचिव सुबीर दास ने कहा कि उनकी टीम पूजा के आयोजन के लिए पूरी तरह तैयार है।
एचआईटीके के पूर्व छात्र को मिला भारत सरकार से सम्मान
कोलकाता : हेरिटेज इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी. कोलकाता (एचआईटीके) के पूर्व छात्र को एसईआरबी आईजीसीडब्ल्यू अवार्ड 2017 मिला है। एचआईटीके के बीटेक – केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के वर्ष 2011 के बैच के छात्र शौमक चटर्जी को यह पुरस्कार मिला है। यह पुरस्कार भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा ग्रीन केमिस्ट्री फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया था।
वर्तमान में, डॉ. सोमक बिट्स पिलानी में एक सहायक प्रोफेसर हैं। उनको 2018 में डीएसटी लॉकहीड मार्टिन जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। महिंद्रा एनवेट्रिक्स और जीई-आईडीसी पुरस्कार उनकी शोध उत्कृष्टता के लिए मिल चुका है। वह बिट्स पिलानी द्वारा 7.75 लाख रुपये की लागत वाले एडिशनल कम्पटेटिव रिसर्च ग्रांट के तहत एक परियोजना पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही 35000 अमरीकी डॉलर की लागत के एक कन्सल्टेंसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं जल प्रदूषण का पता लगाने के लिए एक इनलाइन सेंसर विकसित करेगी। शौमक ने अपनी पीएचडी आईआईटी खड़गपुर से पूरी की है।
अमेजन पर कीजिए टेक और टीवी खरीददारी
अगर इलेक्ट्रानिक्स उपकरण खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो आप अमेजन पर जा सकते हैं। अमेजन इलेक्ट्रानिक्स में शानदार डील के साथ तैयार है। आपको बस नजर रखनी है और उठाना है डील का फायदा। शुभजिता शॉपिंग बैग के टेक और इलेक्ट्रानिक बाजार में आज हम ऐसे ही कुछ ऑफर ले आए हैं जिन पर आप एक नजर डाल सकते हैं –
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