नयी दिल्ली : इंस्टाग्राम भारतीय यूजर्स के लिए अपने नए फीचर रील्स (Reels) की टेस्टिंग शुरू कर दी है। टिकटॉक के विकल्प के तौर पर रील्स रोलआउट होने लगा है। बता दें कि इंस्टाग्राम का नया फीचर रील्स शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म टिकटॉक की तरह ही काम करता है। रील्स के जरिए यूजर 15 सेकेंड का वीडियो बना सकते हैं। इस वीडियो को ऑडियो, फाइल्स या म्यूजिक ट्रैक के साथ एडिट किया जा सकता है। टिकटाॅक की तरह ही इंस्टाग्राम इसे क्रिएटर्स के लिए एक अवसर के रूप में भी देख रहा है। इंस्टाग्राम पहले से ही क्रिएटर्स के साथ पार्टनरशिप में है और लॉन्च से समय यूज़र्स को सबसे पहले ये एमी विर्क, कोमल पांडेय जैसे इंफ्लुएंसर्स के पेज के ज़रिए दिखेगा, लेकिन इंस्टाग्राम के प्रोडक्ट के वीपी विशाल शाह को रील्स के जरिए से ‘भारत में अगला सुपरस्टार’ मिलने की उम्मीद है।
इंस्टाग्राम रील्स के जरिए 15 सेकेंड की शॉर्ट वीडियो बनाई जा सकती है। वीडियो की बैकग्राउंड को बदला जा सकता है वहीं टिकटॉक की तरह ही स्पीड को भी कंट्रोल किया जा सकता है। इस सर्विस में टिकटॉक का ‘Duet’ फीचर भी यूजर्स को मिलेगा। रील्स इंस्टाग्राम स्टोरीज़ की सेक्शन में भी दिखेगा। पूरी वीडियो बनाने के बाद यूजर इसे अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज में शेयर कर सकेंगे। इसके अलावा यूजर अपने फ्रेंड्स को यह वीडियो डायरेक्ट भी भेज सकेंगे।
इंस्टाग्राम ने इस फीचर में म्यूजिक के लिए भारत में सारेगामा के साथ साझेदारी की है। ऐसे में म्यूजिक के साथ कॉपीराइट को लेकर किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं होने वाली है।
इंस्टाग्राम का यह फीचर ऐसे समय में आ रहा है जब भारत सरकार ने टिकटॉक समेत 59 चाइनीज ऐप पर बैन लगा दिया है। इस बैन के बाद इन ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर और एपल ऐप स्टोर से भी हटा दिया गया है। टिकटॉक के विकल्प में लोग चिंगारी ऐप को खूब पसंद कर रहे हैं। कुछ ही समय में इसके 2 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं।
इंस्टाग्राम ने लॉन्च किया टिकटॉक जैसा फीचर Reels
यात्रा सुरक्षित होने पर ही घरेलू क्रिकेट खेला जाएगा: गांगुली
मुम्बई : भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा है कि भारतीय घरेलू सत्र तभी शुरू होगा जब युवा खिलाड़ियों का रणजी ट्रॉफी मैचों के लिए देश के अंदर यात्रा करना सुरक्षित होगा।
भारत के घरेलू टूर्नामेंटों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि कोरोना वायरस महामारी के कारण इंडियन प्रीमियर लीग अगर अक्टूबर में होती है तो सत्र में मैचों की संख्या कम करनी पड़ेगी। घरेलू सत्र 2020-2021 की शुरुआत अगस्त के अंत में विजय हजारे ट्रॉफी के साथ होनी थी जबकि इसके बाद रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का आयोजन होना था। पिछले सत्र में लॉकडाउन की शुरुआत के कारण ईरानी ट्रॉफी को रद्द किया गया था।
घरेलू और जूनियर क्रिकेट के बारे में पूछने पर गांगुली ने स्पोर्ट्स तक से कहा, ‘‘ये जरूरी हैं लेकिन कोरोना वायरस महामारी के नियंत्रित होने के बाद ही ये होंगे। हालात सुरक्षित होने के बाद ही, विशेषकर जूनियर क्रिकेट।’’
गांगुली ने कहा कि भारत बड़ा देश है और मैचों के लिए टीमों को एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करनी होती है और इसलिए घरेलू क्रिकेट तब तक शुरू नहीं होगा जब तक कि सब कुछ सुरक्षित नहीं होता।
बीसीसीआई प्रमुख ने कहा, ‘‘हम युवा खिलाड़ियों को लेकर जोखिम नहीं लेना चाहते। हमारा देश इतना बड़ा है और हमारा घरेलू क्रिकेट इतना मजबूत है कि सभी को खेलने के लिए यात्रा करनी पड़ती है। इसलिए जब तक यह सुरक्षित नहीं होगा तब तक इसका आयोजन नहीं होगा।’’
इसी तरह आयु वर्ग के टूर्नामेंटों का आयोजन भी फिलहाल नहीं होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में गुरुवार को कोरोना वायरस के एक दिन में सर्वाधिक रिकॉर्ड 24,879 मामले सामने आए जिससे कुल मामलों की संख्या 7,67,296 तक पहुंच गई। इस संक्रमण से मरने वालों की संख्या 21,129 तक पहुंच गई है जिसमें 487 लोगों ने एक दिन में जान गंवाई है।
खादी इंडिया से ऑनलाइन खरीदिए मास्क
शुरूआती कीमत 30 रुपये
नयी दिल्ली : कोविड-19 महामारी के चलते फेस मास्क हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। मास्क की अहमियत को देखते हुए कई कंपनियां मास्क प्रोडक्शन में उतर गई हैं। अब खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने कोरोना महामारी के कारण मास्क की बढ़ती माँग को देखते हुए इसकी ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी है। आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने बताया कि खादी मास्क की ऑनलाइन बिक्री शुरू की गयी है। अब लोग वास्तविक खादी मॉस्क खरीद सकेंगे क्योंकि बाजार में खादी मास्क के नाम पर गलत चीजें बेची जा रही हैं।
विनय कुमार ने कहा कि मास्क की ऑनलाइन बिक्री का उद्देश्य खरीदारों को किसी भी धोखाधड़ी से बचाना है। कईं ऑनलाइन पोर्टल खादी के नाम पर ऐसे मास्क बेच रहे हैं जो न तो खादी के कपड़े हैं और न ही हाथ से बने हैं। उन्होंने बताया कि खादी सूती मास्क डबल-लेयर सूती कपड़े से बने हैं। ये मास्क तीन प्लेटों के साथ दोहरी-परत के हैं और तीन आकारों में उपलब्ध हैं। सिल्क मास्क तीन-परत वाले हैं जो कॉटन खादी की दो इंटरनल परतों और खादी सिल्क की सबसे ऊपरी परत के साथ हैं। विनय कुमार ने बताया कि उनके पास 8 लाख खादी मास्क सप्लाई के ऑर्डर आए हैं। इसमें से करीब 6 लाख मास्को की सप्लाई की जा चुकी है।
500 रुपये का ऑर्डर दिया जा सकता है
उन्होंने कहा कि खादी इंडिया कॉटन और सिल्क दोनों मॉस्क बेच रहा है। कॉटन मास्क की कीमत मात्र 30 रुपए और सिल्क मास्क 100 रुपये प्रति उपलब्ध है। मास्क की ऑनलाइन खरीद के लिए न्यूनतम 500 रुपये का ऑर्डर दिया जा सकता है। वर्तमान में ऑनलाइन बिक्री केवल देश के भीतर ही मान्य है। खादी के मास्क के लिए http://www.kviconline.gov.in/khadimask पर ऑर्डर दिया जा सकता है।
कोरोना स्पाइस जेट के यात्री टिकिट के साथ ले सकेंगे 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर
नयी दिल्ली : कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच यात्रियों को इससे सुरक्षा देने के लिए एयरलाइन कम्पनी स्पाइसजेट ने यात्रियों को कोरोना का बीमा कवरेज देने का ऐलान किया है। ये बीमा कवरेज पूरे एक साल के वैलिड होगा। स्पाइसजेट ने इस इंश्योरेंस कवर की पेशकश के लिए अपनी डिजिट इलनेस ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी के जरिए गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस के साथ साझेदारी की है।
कम्पनी के अनुसार यात्रियों के लिए अलग-अलग इंश्योरेंस पैकेज लॉन्च किए हैं। इनकी कीमत 443 से 1,564 रुपए के बीच है। इन पैकेज में यात्रियों को 50 हजार रुपए से लेकर 3 लाख रुपए तक का बीमा कवरेज मिलेगा। यात्री अपनी जरूरत के हिसाब से इंश्योरेंस पैकेज चुन सकेंगे। ये इंश्योरेंस कवर ऑप्शनल रहेगा।
क्या-क्या होगा कवर?
स्पाइसजेट के बीमा पैकेज में अस्पताल के खर्चों के साथ 30 और 60 दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के सभी खर्चों को कवर किया जाएगा। जांच के दौरान पॉजिटिव रिपोर्ट आती है तो इलाज, दवा और प्रिसक्रिप्शन का खर्च भी इसमें कवर होगा। बीमा में अस्पताल के कमरे या आईसीयू का खर्च भी कवर होगा।
वंदे भारत मिशन के तहत उड़ानें संचालित करेगी स्पाइसजेट
कम्पनी के अनुसार जुलाई में वंदे भारत मिशन के तहत 19 और उड़ानें संचालित होंगी। इससे यूएई, सऊदी अरब और ओमान में फंसे करीब 4,500 भारतीयों को निकालने में मदद मिलेगी। स्पाइसजेट ने एक बयान में कहा कि “एयरलाइन इस महीने रास अल-खैमाह, जेद्दा, दम्माम, रियाद और मस्कट से बेंगलुरू, हैदराबाद, लखनऊ, कोझीकोड, कोच्चि, तिरुवनंतपुरम और मुंबई के लिए 19 और उड़ानें संचालित करेगी। “
भवानीपुर कॉलेज को मिला बेस्ट एजुकेशन ब्रांड अवार्ड
कोलकाता : कोलकाता का भवानीपुर कॉलेज गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी ” इकनॉमिक टाइम्स” ने शिक्षा के क्षेत्र में ब्रांड रैंकिंग में शीर्षस्थ स्थान “बेस्ट एजूकेशन ब्रैंड अवार्ड” कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह को गुल पनाग ने विडियो के द्वारा यह अवार्ड प्रदान किया । शिक्षा के स्तर पर तो भवानीपुर कॉलेज ने अपनी एक महत्वपूर्ण पहचान बनाई ही है साथ ही विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में अपने ज्ञान को बढ़ाने में भी शिक्षक गणों और मैनेजमेंट ने पूर्ण रूप से हाथ रहा है। कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहे विद्यार्थियों को लॉक डाउन से ही उनको कॉलेज से बराबर जोड़ने के लिए सेमिनार, वर्कशॉप प्रोजेक्ट, सामाजिक और सांस्कृतिक आदान प्रदान, साहित्य कला और संगीत आदि का ऑन-लाइन आयोजन करता रहा।
घटना प्रधान विडियो निर्माण प्रतियोगिता फिनोमेनन 2020 पोस्टर विडियो निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें कम्प्यूटर विभाग के प्रो. आकाश निर्णायक रहे।ट्यूटोरियल रूप में रखने के कारण पचास से अधिक विद्यार्थियों ने घटना प्रधान विडियो निर्माण में रजिस्ट्रेशन कराया। तेइस पोस्टर में से प्रथम स्थान पर आशीष लाल, द्वितीय हर्षिताष जायसवाल और तृतीय रमशा टूबा जिन्होंने क्रमशः एंटीमैटर, एस्ट्रॉनमी और मैग्नेटिक मोनोपोली पर अपने विडियो बनाए जो इनकी कल्पना को एक नया आयाम देते हैं। इस कार्यक्रम की परिकल्पना कॉलेज डीन प्रो. दिलीप शाह ने की। इस पहल ने विद्यार्थियों की कल्पना शक्ति को निश्चित ही बड़ा एक आकाश दिया।फिनोमेनन 2020 इस वर्ष साइंस कम्युनिकेटर का समूह विभिन्न घटनाओं के विडियो बनाने के कार्य में सक्रिय रूप से जुड़ा रहेगा। यह प्रथम चरण है। सभी विजेताओं को पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह जानकारी डॉ. वसुन्धरा मिश्र ने दी।
खुदीराम बोस सेन्ट्रल कॉलेज में वेब परिचर्चा व श्रुति नाटक
कोलकाता : खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज की ओर से पाठ्यक्रम में शामिल विषय ‘हिंदी नाटक का उदभव और विकास’ पर वेब परिचर्चा एवं दिवंगत प्रसिद्ध नाट्यकर्मी उषा गांगुली की स्मृति में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के नाटक ‘अंधेर नगरी ‘का श्रुतिनाट्य मंचन किया गया। स्वागत भाषण देते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ सुबीर कुमार दत्ता ने कहा कि कोरोना महामारी जैसे संकट के समय हमारे कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।उन्होंने व्याख्यान के लिए आमंत्रित वक्ताओं और हिंदी विभाग के सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों और संगोष्ठी में उपस्थित सभी प्रतिभागियों का स्वागत औपचारिक तौर पर स्वागत किया। विभागाध्यक्ष डॉ शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि परिचर्चा के लिए हमने पाठ्यक्रम में शामिल विषय को चुना है ताकि कलकत्ता विश्वविद्यालय के अधीनस्थ सभी कॉलेजों के हिंदी विद्यार्थी लाभांवित हो सकें. ऐसे आयोजनों का एक उद्देश्य यह भी है कि विद्यार्थियों में साहित्यिक और सांस्कृतिक अभिरुचि का विकास हो।
विषय का प्रवर्तन करते हुए उन्होंने कहा नाटक साहित्य की सबसे वैविध्यपूर्ण और प्रभावी विधा है। हिन्दी नाटक का उदभव और विकास’ विषय पर विचार रखते हुए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी की शिक्षिका डॉ वसुंधरा मिश्र ने हिंदी नाटक के उदभव और विकास की लम्बी परम्परा के बीच नाटकों के स्वरूप, कथ्य और रचना प्रक्रिया आदि पर आए बदलावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी नाटक ने साहित्य, कला और रंगमंच के बीच पुल का काम किया है।
इस अवसर पर सौरभ केशरी, साक्षी झा, प्रीति साव,बिंदी चौधरी,अंजलि पाठक, सिमरन जैसवारा ने उषा गांगुली की स्मृति में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के नाटक ‘अंधेर नगरी ‘का श्रुति नाट्य पाठ किया। प्रो किरण सिपानी ने कहा कि ऐसे आयोजन के लिए मैं हिंदी विभाग को धन्यवाद देती हूँ। प्रो संजय जायसवाल ने कहा कि विद्यार्थियों की यह उम्दा श्रुति नाट्य प्रस्तुति सही अर्थों में उषा गांगुली को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करता है। रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि ऐसे आयोजन भावी पीढ़ी को तैयार करने का काम कर रहे हैं।मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज अन्य संस्थानों को दिशा निर्देश देने का काम कर रहरहा है।
उमा झुनझुनवाला ने इस अवसर पर उषा गांगुली की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों ने अपने श्रुति पाठ से मुझे बांधे रखा। संगोष्ठी में प्रो. अरविंद मृधा, प्रो. तापसी घोष, डॉ विजया सिंह, डॉ रेणु गुप्ता, प्रो राकेश चौबे सहित काफी संख्या में विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो राहुल गौड़ और श्रुति नाटक का निर्देशन एवं संयोजन प्रो मधु सिंह ने किया।
माटी
- पीहू
ताज़ा है ज़हन में
पर बरसों पुरानी है
दास्तां लकीरों की,
खींची गई थी
आर-पार
बेशुमार यादों,
अनगिनत सपनों,
एक जस्बात,
एक रूह,
और, एक माटी के।
वे समझेंगे क्या,
जन्मभूमि से बंधी हुई पीड़ा!
जो हुए नहीं बेघर,
छुटा नहीं पीछे
जिनका सर्वस्व।
पुश्तैनी घर,
मां का चौका,
बाबूजी के खेत,
दादाजी से मुट्ठी भर मिली
सिक्कों की सौगातें,
दादी के पान का बीड़ा
बहन की बिदाई,
भाई का तबला,
महावर से रंगे
बालिका वधु के पांव,
प्रथम पद चिन्ह लल्ला के,
स्कूल की घंटी,
कीचड़ से लथपथ
यारों संग फुटबॉल।
नहीं अट पाये थे
एक बक्से
दो गठरियों के अंदर।
उस माटी को
अपनेपन से छूने का
छिन गया है आज अधिकार भी,
जब छू पाते हैं
कांप उठता है रोम-रोम
टूट जाता है दबे क्रंदन का बांध
हो जाता है प्लावित,
खोखला हो चुका उनका
अपना ही अंतःकरण।
पर शेष नहीं है जिनकी शक्ति
वे ‘वहां’ से विरले
मिलने आये आदमियों को
छूकर हाथों से
जन्मदात्री माटी को
कर लेते हैं नमन।
गुंजते हैं अब दुआओं में
इबादत के शब्द
कि युगों की धूल में
हो जाने से पहले विलीन
अमूल्य स्मृतियां
माटी की,
आगामी पीढ़ियों के लिए
किस्सों में बुर्जुगों के
महकती रहे
माटी।
रंगधारा
शुभ सृजन नेटवर्क द्वारा आयोजित पहली ऑनलाइन चित्र व कविता पोस्टर प्रदर्शनी। नमिता सिंह व संचिता सिंह के चित्र और दीपा ओझा द्वारा बनाये गये कविता पोस्टर इसमें प्रदर्शित किये गये हैं।
सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्में बनायेंगी डेविड एंड गोलिथ फिल्म्स
कोलकाता : कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समारोहों में अपने पहले और समीक्षकों द्वारा प्रशंसित लघु फिल्म ‘एवरी 68 मिनट्स’ (ऋचा शर्मा, आदिल हुसैन और तोता रॉय चौधरी द्वारा अभिनीत) के सफल प्रदर्शन के साथ सामग्री, गर्वित निर्माता लाल भाटिया और इमरान जकी अपने प्रोडक्शन हाउस, डेविड और गोलियत फिल्म्स को एक और रचनात्मक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।
निर्माता लाल भाटिया ने कहा, “हम अपनी फिल्म ‘एवरी 68 मिनट्स’ के लिए दुनिया भर में विभिन्न स्क्रीनिंग पर जिस तरह की प्रोत्साहन पा रहे हैं, उससे हम बहुत खुश और उत्साहित महसूस करते हैं।” दर्शकों तक बड़े पैमाने पर पहुँचने के लिए हम इसे यथासम्भव कई फिल्म समारोहों में ले जाएंगे। हम इस साल के अंत तक प्रदर्शित करने के लिए कुछ प्रमुख ओटीटी खिलाड़ियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके प्रोडक्शन हाउस का ध्यान सोचने पर मजबूर करने वाली समसामायिक सामाजिक मुद्दों पर आधारित वेब सीरिज और अच्छी पटकथा वाली शॉर्ट फिल्में बनाने का है।
सह-निर्माता इमरान जकी, ने कहा, “लॉकडाउन के दौरान हमने लोगों को आशा और प्रोत्साहन देने के लिए एक बहुभाषी वीडियो गीत – ‘उम्मीद’ जारी किया और इन कठिन समय में मजबूत और दृढ़ संकल्प के साथ रहने के लिए। राज्य सरकार, पुलिस विभागों और प्रमुख गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से प्रस्तुत / प्रस्तुत इस गीत को लाखों व्यूज और ढेर सारी सराहना मिली है। लोकप्रिय नामों से अभिनीत हमारी हिंदी वेब श्रृंखला में से एक का निर्माण चल रहा है और तीन प्री-प्रोडक्शन स्टेज में हैं, जिसके बारे में हम बहुत जल्द बात करेंगे। एक बार सफलतापूर्वक महामारी से बाहर आने के बाद हम पटकथा लेखकों, निर्देशकों और अभिनेताओं सहित प्रतिभाशाली तकनीशियनों के साथ अपने अगले लाइनअप की घोषणा करेंगे। हम अधिक व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं और काम करने के लिए सही लोगों की तलाश कर रहे हैं, जो लोग हमारे जैसे ही महत्वाकांक्षी और उत्साही हैं। हम अगले पांच वर्षों में इस तरह की लगभग 50 परियोजनाएँ बनाने वाले हैं। ”
कोविड -19 : छोटे व मध्यम उद्यमियों की मदद करेगी वाधवानी फाउंडेशन की ‘सहायता’
200 करोड़ का निवेश, 100000 रोजगार सृजन व वृद्धि का लक्ष्य
वाधवानी फाउंडेशन सहायता के तहत 200 करोड़ रुपये निवेश को प्रतिबद्ध
आशा, आंगनबाड़ी कर्मियों, नर्सों व स्वास्थ्य कर्मियों का होगा कौशल विकास
कोलकाता : वाधवानी फाउंडेशन (डब्ल्यूएफ) ने आज आर्थिक संकट के दौर से गुजरते एसएमई और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को मदद देकर कोविड-19 के बारे में उनके ज्ञान और कौशल को बेहतर बनाने के लिए ‘सहायता’ की पहल करने की घोषणा की। वाधवानी फाउंडेशन भारत और अन्य विकासशील देशों का प्रमुख गैर-आर्थिक लाभ फाउंडेशन है। इसका मिशन बड़े स्तर पर उद्यमिता के विकास, एसएमई की प्रगति और लोगों के कौशल विकास के माध्यम से रोजगार बढ़ाना है।
वाधवानी फाउंडेशन ने 200 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता की है और साझेदारों का इकोसिस्टम बना रहा है जिसमें सरकार के विभिन्न मंत्रालय और एजेंसियां, बैंक और सलाह प्रतिष्ठान शामिल होंगे जो इस बड़ी और जटिल पहल के संचालन में मदद करेेंगे। इस पहल ‘सहायता’ के तीन प्रोग्राम हैं: सहायता बिजनेस स्टैबलिटी प्रोग्राम, सहायता कोविड-19 स्किलिंग प्रोग्राम और सहायता पब्लिक हेल्थ इनोवेशन प्रोग्राम। फाउंडेशन ने 90 दिनों के अथक प्रयास से तीनों सहायता प्रोग्राम बनाए हैं और अगस्त 2020 में इन्हें तेजी से लागू किया जाएगा।
वाधवानी फाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. रोमेश वाधवानी ने कहा, “कोविड-19 से स्वास्थ्य और आर्थिक दोनों संकट पैदा हो गया है। खास कर एसएमई और लोगों के रोजगार को भारी नुकसान पहुंचा है। एसएमई क्षेत्र को वित्तीयन और उचित परामर्श के अभाव में छोटी और लंबी अवधि में भारी क्षति होगी। ‘सहायता’ में फाउंडेशन के बड़े निवेश से 10,000 एसएमई को जो स्टिमेलस पैकेज मिलेगा उससे सरकार के प्रयासों में मजबूती आएगी। उन्हें परामर्श सेवाएं देकर कारोबार बचाने, स्थिरता लाने और अंततः सफल होकर 100,000 रोजगार बचाने या बनाने में मदद मिलेगी। फाउंडेशन के अपने सलाहकार, वर्तमान में उपलब्ध और नई सामग्री, और तकनीक यह सब एसएमई को निःशुल्क प्रदान किया जाएगा।’’
सहायता बिजनेस स्टैबलीटी प्रोग्रामः एसएमई किसी अर्थव्यवस्था की बुनियाद होते हैं लेकिन कोविड-19 से उत्पन्न आर्थिक संकट ने इसे तबाह कर दिया है। सभी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विकास को बढ़ावा देते एसएमआई गहरे संकट में हैं। बड़े उद्यमों की तुलना में यह नुकसान कहीं अधिक है। बड़ी कंपनियों में ऐसे संकट से निपटने का अधिक लचीलापन होता है। बैलेंस शीट आम तौर पर बड़ी और अधिक मजबूत होती है। उन्हें पूंजी और प्रबंधन के संसाधन सुलभ होते हैं। लेकिन एमएसएमई इतने लचीले नहीं होते हैं। आज उन्हें अस्तित्व बचाने के लिए पूंजी और विशेषज्ञता दोनों चाहिए। निकट भविष्य में उनकी स्थिरता का लक्ष्य है और मध्यम और लंबी अवधि में विकास के लिए उन्हें खुद को तैयार करना होगा। हाल में भारत सरकार ने एसएमई के लिए एक व्यापक और आवश्यक क्रेडिट (वित्तीयन) प्रोग्राम शुरू किया है। लेकिन एसएमई को सही रणनीति और कार्य परचिालन का गहन ज्ञान भी चाहिए ताकि ग्राहक, सप्लाई चेन, प्रबंधन और कार्मिक बचाए रखने संबंधी तमाम चुनौतियांे से उबर पाएं।
सहायता बिजनेस स्टैबलिटी प्रोग्राम लगभग 10,000 एसएमई को व्यवसाय में बड़े बदलाव की सलाह के साथ अस्तित्व बचाने, स्थिरता लाने और प्रगति करने की विशेषज्ञता देगा। वाधवानी फाउंडेशन ने सिडबी, क्लिक्स कैपिटल, आईआईएफएल फाइनेंस, पावर 2 एसएमई और मैग्मा फिनकॉर्प से साझेदारी कर इस प्रोग्राम के लिए संयुक्त रूप से एसएमई चयन करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही अपनी आंतरिक टीम का विस्तार कर 100 एसएमई व्यवसाय सलाहकार तैयार कर रहा है। इसके अतिरिक्त फाउंडेशन की योजना केपीएमजी, फ्लेक्सींगट, ग्रोकर्व, स्ट्रैटजी गराज,बड़ा बिजनेस, परामर्श, द कैटलिस्ट, इमबाइब कंसल्टेंसी सर्विसेज़, ब्लैक ब्रिक्स सर्विसेज़, कोनेक्टअप, सीएफओब्रिज, मिडाससीएफओ, धनबढ़ाओडाॅटकाॅम और कई विषय के व्यक्तिगत विशेषज्ञ, विषय के जानकार, सलाहकार और परामर्शदाता से साझेदारी करने की है। इसके तहत वे निःशुल्क या बहुत रियायत पर एसएमई सलाहकार प्रदान करेंगे। सलाहकारों की यह संयुक्त टीम व्यवसाय में बड़े बदलाव के लिए फाउंडेशन के व्यापक और बढ़ते डिजिटल वीडियो लाइब्रेरी और सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रक्रिया की सामग्री और एसएमई के लिए फाउंडेशन के आधुनिक टेक्नोलाॅजी प्लैटफार्म का उपयोग करेगी। वाधवानी फाउंडेशन एसएमई सलाहकारों को ‘सहायता’ की सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रक्रिया, सामग्री और तकनीक का प्रशिक्षण देने के लिए एक अकादमी भी स्थापित कर रहा है।
अगस्त 2020 से शुरू सहायता प्रोग्राम में प्रति माह 50 एसएमई शालिम किए जाएंगे। यह संख्या बढ़ कर प्रति माह 500 एसएमई तक होगी। शुरू में 250 करोड़ रु. रेवेन्यू वाली बड़ीक म्पनी मॉडल को मदद देने के बाद वाधवानी फाउंडेशन मध्यम 2021 में नेक्स्ट-जेन,एआई-पावर्ड सेल्फ-सर्विस जीनी प्लेटफॉर्म लांच करेगा ताकि अधिक एसएमई जुड़ें।
भारत में केपीएमजी के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण एम. कुमार ने कहा, “हम कोविड से तबाह एसएमई की मदद के लिए वाधवानी फाउंडेशन की ‘सहायता’ पहल से जुड़कर प्रसन्न हैं। फाउंडेशन और रोमेश वाधवानी के के दूरदर्शी प्रयास से इस उद्योग की मदद करने का गर्व है जिसमें आनुपातिक रूप से ज्यादा नौकरियां और आजीविका हैं। ”
सिडबी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मोहम्मद मुस्तफा ने कहा, ‘‘कोविड-19 के संकट में हमारा मानना है कि बड़े संगठनों को एमएसएमई की मदद के लिए आपसी साझेदारी करनी चाहिए। एसएमई में जान डालने और सफल बनाने के लिए वाधवानी फाउंडेशन के बिजनेस स्टैबलीटीं प्रोग्राम के बारे में जानकर खुशी हुई। एमएसएमई के मार्गदर्शन के लिए उनसे हमारा सहमति करार रहा है। नए प्रयास से वेबिनार, डू-इट-योरसेल्फ टूल्स, सलाहकारों और मेंटर्स की मुफ्त सेवा मिलेगी। इस तरह एमएसएमई मजबूत हो कर उभरेंगे और आत्मनिर्भर भारत का राष्ट्रीय मिशन पूरा होगा।’’
क्लिक्स कैपिटल के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रमोद भसीन ने कहा, ‘‘सरकार ने एमएसएमई को सस्ती दर पर ऋण देने के विभिन्न उपाय किए हैं। पर उद्योग की विशेषज्ञता और प्रतिभा की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। वाधवानी फाउंडेशन के साथ हम एमएसएमई भागीदारों के कौशल का अभाव दूर करेंगे और इस प्रयास के परिणाम मापे जा सकते हैं।’’
सहायता कोविड-19 स्किलिंग प्रोग्राम: शहरों के अस्पतालों और क्लिनिकों के चिकित्सकों और नर्सों के अलावा भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा तंत्र में लगभग 30 लाख आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, घरेलू स्वास्थ्य कार्यकर्ता और नर्स सहयोगी और पुलिस एवं अन्य वाॅलेंटियर भी इस प्रोग्राम में शामिल हैं। कोविड-19 से लड़ाई के मोर्चे पर सभी महत्वपूर्ण हैं; हालांकि निजी सुरक्षा और कोविड-19 मरीजों के निदान और देखभाल को लेकर उनमें अधिकांश का ज्ञान सीमित है। अक्सर विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य सरकारी वेबसाइटों पर उपलब्ध जानकारी ढूंढ़ना, समझना या उपयोग करना कठिन होता है। सहायता प्रोग्राम कोविड-19 स्किलिंग प्रोग्राम इन सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को इंटरैक्टिव वीडियो फाॅर्मेट में विभिन्न डिजिटल चैनलों से आवश्यक जानकारी देगा। कोविड-19 की बुनियादी जानकारी का एक खास यूट्यूब चैनल होगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को वाट्सऐप से प्रश्नोत्तर और ज्ञान परीक्षा समेत अतिरिक्त जानकारी दी जाएगी। वाधवानी फाउंडेशन के डिजिटल प्लेटफॉर्म / पोर्टल और अन्य साझेदार एवं सरकारी पोर्टल जैसे कि आईगाॅट पर स्किलिंग कंटेंट और सर्टिफिकेशन की अधिक व्यापक जानकारी उपलब्ध होगी। अगले महीने लांच होने वाले प्रोग्राम में प्रति माह 5,000 मौजूदा और नए सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा कार्यकर्ताओं को कौशल प्रदान करने का लक्ष्य होगा और यह संख्या प्रति माह 50,000 तक बढ़ सकती है। आखिर में 500,000 से दस लाख मौजूदा और नए स्वास्थ्य कर्मचारियों को यह सेवा दी जाएगी।
सहायता पब्लिक हेल्थ इनोवेशन प्रोग्राम : कोविड-19 संकट ने महामारी से निपटने की सभी देशों की तैयारी का पर्दाफाश कर दिया है। अधिकांश देश सार्वजनिक स्वास्थ्य की बुनियादी व्यवस्था पर उचित निवेश नहीं करते इसलिए संकट आने पर आनन-फानन रोकथाम के उपाय करते हैं। हालांकि आज खास कर डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर सार्वजनिक स्वास्थ्य में इनोवेशन की असीम संभावना है। टेलीमेडिसिन, रीयल टाइम डायग्नाॅस्टिक और टेस्टिंग और मरीज की निगरानी और देखभाल से बहुत लाभ होगा। इनोवेशन की अधिकांश पहल स्टार्टअप और शुरुआती दौर में पहंुची कम्पनियां कर सकती हैं जिन्हें मिशन पूरे करने के लिए पर्याप्त पूंजी प्राप्त करने का संघर्ष रहता है। सहायता पब्लिक हेल्थ इनोवेशन प्रोग्राम भारत में स्टार्टअप और शुरुआती दौर की ऐसी 50 कम्पनियों को इनोवेशन तेज करने के लिए निवेश या अनुदान देगा। प्रत्येक निवेश 25 लाख से 1 करोड़ तक होगा। वाधवानी फाउंडेशन पहले भी कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अनुदान दिए हैं। अनुदान और निवेश की इच्छुक कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
अन्य देशों के लिए सहायता प्रोग्राम: वाधवानी फाउंडेशन अपने ग्लोबल मिशन में खास कर मैक्सिको और ब्राजील जैसे बुरी तरह कोविड प्रभावित देशों को मदद देता है। दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में फाउंडेशन की टीमें सक्रिय हैं। वाधवानी फाउंडेशन का मैक्सिको वर्जन अगस्त 2020 में शुरू होगा। इसमें मेक्सिको सिटी, जेलिस्को, चिहुआहुआ और युकाटन जैसे राज्य और सलाह प्रतिष्ठान – ईवाई, केपीएमजी, डेलाॅइट, सैंटेंडर, जीसीजी, सीसीएमएक्स, केरिंट्रा, काॅनकैमिन, कोन्फीयो, फोंडियो डायरेक्टो, फिडाएपीच और आईवाईईएम भागीदार होंगे। फाउंडेशन की योजना 2021 के आरंभ में ब्राजील और मध्य-2020 में अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया (इंडोनेशिया, फिलीपींस, बांग्लादेश) में सहायता विस्तार करने की है।




