कोलकाता : सीबीएसई की बारहवीं की परीक्षा में महानगर के सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। परीक्षा में बैठने वाली सभी 199 छात्राएँ प्रथम श्रेणी के साथ सफल हुईं। स्कूल का प्रदर्शन औसत 89.85 प्रतिशत रहा। ये स्कूल का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। ऋति भट्टाचार्य को इकोनॉमिक्स में और सोनिया मैनाक को साइकोलॉजी में शत प्रतिशत अंक मिले। 2015 में सीबीएसई बोर्ड द्वारा जारी नियम के अनुसार ही अंक अंग्रेजी और चार सर्वश्रेष्ठ विषयों में प्राप्त अंक के आधार पर जोड़े गये।
गौरतलब है कि कोविड -19 के कारण सीबीएसई सभी परीक्षाएँ नहीं ले सका था। होम साइंस, सोशियोलॉजी, ज्योग्राफी, बिजनेस स्टडीज, इन्फॉर्मेटिक्स प्रैक्टिसेस, कम्प्यूटर साइंस और हिन्दी की परीक्षाएँ लम्बित रही। बांग्ला, जर्मन और फ्रेंच की परीक्षा रद्द कर देनी पड़ी। अंक ली गयी परीक्षाओं के आधार पर जोड़े गये। यह जानकारी स्कूल की प्रिंसिपल एस. बोस द्वारा दी गयी।
सीबीएसई की परीक्षा सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल का उत्कृष्ट प्रदर्शन
आधी रात की बारिश
प्रीति साव
उमस थी, सुबह से
कभी गर्मी का एहसास,
जब चली हवा, मिली राहत
दिन बीत गया, हुई रात।
और,आधी रात
शुरू हुई बारिश
बादल गरजे,
चमकी बिजली, जैसे
चाह रहे हों दोनों
एक दूजे से मिलना।
बादल ने जैसे पुकारा
वह चीखा, वह गरजा
तेज हवाओं में हुई और तेज
आजादी की ख्वाहिश,
और बढ़ी तड़प
बढ़ती रही मिलन की चाह।
जितनी तेज बिजली चमके
उतनी ही उठे हूक
बरसती रही ख्वाहिश।
ऐसा अद्भुत सा गर्जन,
ऐसी तेज हवा का चलना,
ऐसी बिजली चमकना,
और ये आधी रात की बारिश
और, मैं अपने शब्दों के पास
मैं टटोलती खुद को
अब तक।।
बेशर्म के फूल
लिटिल थेस्पियन की प्रस्तुति। कोविड -19 की विपरीत परिस्थिति में लिटिल थेस्पियन के नए कलाकारों ने ऑनलाइन इस कहानी का अभिनयात्मक पाठ तैयार किया है…
मानसून का चटपटा स्वाद

पनीर चिल्ली
सामग्री : आधा किलो प्याज, 250 ग्राम शिमला मिर्च, 100 ग्राम अरारोट ,200 ग्राम मैदा, 250 ग्राम पनीर, 10 हरी मिर्च, आधा लीटर रिफाइंड, 2 कली लहसुन, नमक स्वादानुसार, 1 कटोरी टमाटर सॉस, 1 चम्मच सोया सॉस, 1 चम्मच चिली सॉस, २ चम्मच पानी, खाने का रंग।
विधि : पहले प्याज और शिमला मिर्च को बड़े आकार में काट लें। पनीर के भी बड़े -बड़े टुकड़े करें। एक तरफ मैदा, अरारोट, लहसुन पेस्ट, सोया सॉस, चिल्ली सॉस, नमक मिलाकर पेस्ट बना लेंगे फिर उसमें पनीर लपेट कर उसको तल लेंगे। एक तरफ प्याज को हल्का लाल,लाल भुनेंगे और शिमला मिर्च भी हरी मिर्च रिफाइंड में प्याज महीन काटा हुआ तल लेंगे। हल्का लाल होने के बाद उसमें लहसुन का पेस्ट डालकर चलाएंगे। फिर उसे टमाटर और चिल्ली सॉस का पेस्ट डालेंगे और उसे १० मिनट चलाएंगे। इसमें पानी देकर पकने देंगे। फिर तला हुआ प्याज, शिमला मिर्च, हल्का सा गाढा करेंगे। इसमें नमक मिलाकर पनीर डालेंगे। पनीर चिल्ली का रंग पानी के साथ ही डालेंगे।
चिड़वा का कटलेट
सामग्री : 100 ग्राम कच्चा चिड़वा, 250 ग्राम आलू, 50 ग्राम सेंका हुआ बादाम, कसा नारियल, आधा चम्मच गरम मसाला पाउडर, सब्जी मसाला, नमक, नींबू ,अदरक , थोड़ा सा हरी मिर्च का पेस्ट, 100 ग्राम सूजी

विधि : हरी धनिया की पत्तियों को बारीक बारीक काट लेंगे। कसा हुआ नारियल, आधा चम्मच गरम मसाला पाउडर, सब्जी मसाला,नमक स्वादानुसार मिला लेंगे। सबसे पहले आलू को उबाल लेंगे। फिर उसको छील कर घिस लेंगे। भीगा चिड़वा पानी से निचोड़ लेंगे। आलू में मिला लेंगे। अदरक, हरी मिर्च का पेस्ट, धनिया, बादाम, मिक्सी में पीस लेंगे। नींबू का रस डालकर कर मिश्रण मिला लेंगे। अब सब्जी मसाला , गरम मसाला , नमक, कसा नारियल उसमें डाल देंगे। अब मिश्रण मिला लेंगे और सबको कटलेट का आकार देंगे। सूजी में लपेट- लपेट कर चारों तरफ लगायेगे। फिर फ्राई करेंगे और धनिया चटनी या सॉस के साथ सवैव करेगे
महानगर के स्कूलों के नतीजों पर एक नजर
कोलकाता : सीआईएससीई की आईसीएसई और आईएससी की परीक्षा में महानगर के स्कूलों के प्रदर्शन पर एक नजर –
राम मोहन मिशन हाई स्कूल
आईसीएसई की परीक्षा में 69 विद्यार्थियों के 90 प्रतिशत से अधिक अंक आये हैं। 98.4 प्रतिशत अंक पाकर सारांश टोंक सबसे आगे रहा।
वहीं आईएससी की परीक्षा में 19 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये हैं। साइंस में 97 प्रतिशत अंक पाकर रैना संतुआ और ह्यूमैनिटिज में 96.5 प्रतिशत अंक पाकर श्रीजा राय सबसे आगे रही। स्कूल में आईएससी और आईसीएसई, दोनों ही परीक्षाओं में परीक्षार्थियों को 60 प्रतिशत और उससे अधिक अंक मिले। स्कूल के प्रिंसिपल सुजय विश्वास ने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दीं।
एडमास इंटरनेशनल स्कूल
आईएससी की परीक्षा में 254 परीक्षार्थी बैठे और सभी सफल रहे। 72 परीक्षार्थियों को 90 प्रतिशत और उससे अधिक अंक मिले। 99.5 प्रतिशत अंक पाकर ह्यूमैनिटिज में ऋतुब्रत चक्रवर्ती, साइंस में 98 प्रतिशत अंक पाकर अनुष्का विश्वास औऱ श्रुति अग्रवाल तथा 97 प्रतिशत अंक पाकर मोहित सुराणा सबसे आगे रहा।
वहीं आईसीएसई की परीक्षा में 268 परीक्षार्थी बैठे और सभी सफल रहे। 103 परीक्षार्थियों को 90 प्रतिशत और उससे अधिक अंक मिले। 98.8 प्रतिशत अंक पाकर पृथा राय सबसे आगे रही।
सीआईएससीई : बगैर मेधा सूची के ऑनलाइन घोषित हुए आईसीएसई और आईएससी के नतीजे
नयी दिल्ली/ कोलकाता : कोरोनाकाल का असर इस साल परीक्षाओं पर ही नहीं बल्कि परीक्षा परिणाम पर भी पड़ रहा है और मौजूदा हालात के बीच मेधा सूची पर इसका असर पड़ा है। तमाम समस्याओं के बीच काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एक्जामिनेशन (सीआईएससीई) ने आईसीएसई (10वीं) और आईएससी (12वीं) के नतीजे तो घोषित कर दिये मगर इस बार मेधा सूची जारी नहीं की जा सकी है। दसवीं का रिजल्ट 99.33 प्रतिशत गया वहीं बारहवीं का कुल पास प्रतिशत गया 96.8 प्रतिशत. दसवीं यानी आईसीएसई में कुल 207902 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी जिनमें से 206525 स्टूडेंट्स ही परीक्षा पास कर पाए। काउंसिल के चीफ एक्जिक्यूटिव एवं सचिव जेरी आराथुन ने नतीजों की जानकारी दी। इस वर्ष सीआईएससीई की परीक्षा का परिणाम परंपरागत नियमों को तोड़ते हुए जारी किया गया। अन्य वर्षों की भांति संवाददाता सम्मेलन कर परीक्षा का परिणाम घोषित न करते हुए वर्ष 2020 की सीआईएससीई का रिजल्ट काउंसिल ने ऑनलाइन ही जारी कर दिया। बताया जाता है कि शुक्रवार को ही देश के सभी स्कूल अपने लॉग इन आईडी की मदद से पूरे स्कूल का परिणाम तो जान लेंगे किन्तु कोरोना परिस्थिति के कारण विद्यार्थियों को मार्कशीट व सर्टिफिकेट बाद में प्रदान की जाएगी। साथ ही अन्य वर्षों की तरह इस वर्ष ना तो देश भर के मेधावी विद्यार्थियों की सूची जारी की गयी और ना सीआईएससीई ने राज्य की मेधा सूची जारी की। सीआईएससीई काउंसिल से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष देशभर से आईसीएसई (10वीं) की परीक्षा 2, 07, 902 परीक्षार्थियों ने दी थी। इनमें से 1,12,668 परीक्षार्थी छात्र (54.19 प्रतिशत) और छात्राओं की संख्या 95,234 (45.81 प्रतिशत) रही। इनमें से 2,06,525 परीक्षार्थी सफल हुए। वहीं देशभर से आईएससी (12वीं) की परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों की कुल संख्या 88,409 रही, जिसमें से 47,429 (53.65 प्रतिशत) परीक्षार्थी छात्र और 40,980 (46.35 प्रतिशत) परीक्षार्थी छात्राएं रही। यानी आईसीएसई और आईएससी दोनों स्तरों में परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की तुलना में छात्रों की संख्या अधिक रही।
पश्चिम बंगाल की बात की जाए तो इस वर्ष आईसीएसई की परीक्षा राज्य के 382 स्कूलों और आईएससी की परीक्षा 270 स्कूलों के विद्यार्थियों ने दी थी। राज्य भर से कुल 62,316 परीक्षार्थियों ने सीआईएससीई की परीक्षा दी। इनमें से आईसीएसई (10वीं) की परीक्षा 37,258 परीक्षार्थियों ने दी थी और आईएससी (12वीं) की परीक्षा 25,058 परीक्षार्थियों ने दी थी। सीआईएससीई के कुल 61,373 परीक्षार्थी की वर्ष 2020 की परीक्षा में सफल हुए। आईसीएसई के कुल परीक्षार्थियों में 20,783 (55.78 प्रतिशत) परीक्षार्थी छात्र और 16,475 ( 44.22 प्रतिशत) परीक्षार्थी छात्राएं थीं। इस वर्ष सफल होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या 36,920 रही। वहीं आईएससी के कुल परीक्षार्थियों में 13,800 (55.07 प्रतिशत) परीक्षार्थी छात्र और 11,258 (44.93 प्रतिशत) परीक्षार्थी छात्राएं रही। राज्य में आईएससी के 24,453 परीक्षार्थी सफल रहे।
गौरतलब है कि इस वर्ष आईसीएसई की परीक्षा 26 फरवरी को शुरु होकर 28 मार्च में समाप्त होने वाली थी। वहीं आईएससी की परीक्षा 7 फरवरी को शुरु होकर 2 अप्रैल को समाप्त होने वाली थी। किन्तु इस बीच देश में कोरोना वायरस का प्रकोप फैल गया और देशव्यापी लॉकडाउन कर दिया गया। इस वजह से सीआईएससीई की परीक्षा को बीच में ही स्थगित कर दिया गया। देश में कोरोना वायरस के लगातार फैलते संक्रमण को देखते हुए केन्द्रीय मानव संसाधन विकास विभाग (एमएचआरडी) ने बाद में परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया। इसके बाद शुक्रवार को सीआईएससीई का परिणाम घोषित कर दिया गया किन्तु कोरोना काल के कारण उत्पन्न वर्तमान परिस्थिति के कारण इस वर्ष काउंसिल ने मेधा तालिका घोषित नहीं करने का निर्णय लिया।
ऑलराउंडर सोफी डिवाइन बनीं न्यूजीलैंड महिला टीम की कप्तान
वेलिंगटन : ऑलराउंडर सोफी डिवाइन को न्यूजीलैंड महिला क्रिकेट टीम का कप्तान नियुक्त किया गया है। वह एमी सटरवेट की जगह लेंगी, जो मातृत्व अवकाश से लौटने के बाद उप कप्तान की भूमिका निभाएंगी। न्यूजीलैंड क्रिकेट (एनजेडसी) ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ”सोफी डिवाइन व्हाइट फर्न्स (न्यूजीलैंड महिला टीम) की कप्तान होंगी जबकि एमी सटरवेट मातृत्व अवकाश से लौटने के बाद उप कप्तान की भूमिका निभाएगी।
डिवाइन को पिछले सत्र में अंतरिम तौर पर न्यूजीलैंड महिला टीम की कप्तानी सौंपी गयी थी। कप्तान के तौर पर उनके शानदार प्रदर्शन से उन्हें पूर्णकालिक कप्तान बना दिया गया। इस 30 वर्षीय खिलाड़ी ने अब तक न्यूजीलैंड की तरफ से 105 वनडे और 91 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। उन्होंने इन दोनों प्रारूपों में 4954 रन बनाने के अलावा 158 विकेट भी लिए हैं।
घटाया गया सीबीएसई कक्षा 9 से 12 तक सभी विषयों का पाठ्यक्रम
कटौती केवल 2021 की बोर्ड परीक्षाओं वार्षिक परीक्षाओं के लिए की गयी
नयी दिल्ली : कोरोना के कारण केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 2020-21 सत्र के लिए कक्षा 9 से 12 तक का पाठ्यक्रम 30 प्रतिशत घटा दिया है। बोर्ड की ओर से जो संशोधित कोर्स अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया गया है उसके मुताबिक हाईस्कूल राजनीति विज्ञान से पाठ तीन लोकतंत्र एवं विविधता, पाठ चार लिंग, धर्म एवं जाति, पाठ पांच चर्चित संघर्ष एवं आंदोलन और पाठ आठ लोकतंत्र की चुनौतियां इस साल नहीं पढ़ाया जाएगा। वहीं कक्षा 12 समाजशास्त्र से भारतीय लोकतंत्र की कहानी, वैश्वीकरण एवं सामाजिक बदलाव एवं जनसंचार चार पाठ कम हुए हैं। हालांकि सीबीएसई का कहना है कि सिलेबस में कटौती केवल 2021 की बोर्ड परीक्षाओं वार्षिक परीक्षाओं के लिए की गयी है।
10वीं की भूगोल से वन्य एवं वन्य जीवन समेत तीन पाठ और इतिहास से भी दो पाठ हटाए गए हैं। कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान से जनसंख्या, लोकतांत्रिक अधिकार, भारत में खाद्य सुरक्षा आदि चैप्टर को हटाया गया है। 10वीं गणित से त्रिकोण का क्षेत्रफल समेत कई टॉपिक जबकि 9वीं से क्षेत्रफल का पूरा चैप्टर हटाया गया है। 9 व 10 की अंग्रेजी ग्रामर से पैसिव वॉयस के इस्तेमाल, प्रीपोजिशन आदि और लिटरेचर से पांच-पांच पाठ कम किए गए है। कक्षा 9 व 10 कम्प्यूटर एप्लीकेशन विषय से यूनिट चार स्क्रैच को हटा दिया गया है।
कक्षा 11 एवं 12 में क्या नहीं पढ़ना है
कक्षा 11 राजनीति विज्ञान से नागरिकता, राष्ट्रवाद एवं धर्मनिरपेक्षता, भारत में स्थानीय निकाय का विकास आदि जबकि 12वीं से समकालीन विश्व में सुरक्षा, पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधन, भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार से संबंध समेत अन्य दो पाठक हटा गए हैं। 11 भौतिक विज्ञान से भौतिक संसार, गति का सिद्धांत, गुरुत्वाकर्षण आदि को जबकि 12वीं मैग्नेटिज्म एवं मैटर समेत अन्य कई टॉपिक शामिल नहीं किए गए हैं। इसके अलावा गणित, अंग्रेजी, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, इतिहास आदि सभी विषयों का कम हुआ है।
ई-कॉमर्स कम्पनियों पर बिकने वाले हर उत्पाद पर लिखा मिलेगा निर्माता देश का नाम
नयी दिल्ली : अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को सरकार ने थोड़ी राहत देते हुए निर्माता देश यानी कंट्री ऑफ ओरिजिन को बताने के लिए समय सीमा 1 अगस्त तय कर दी है। ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने हर उत्पाद पर कंट्री ऑफ ओरिजिन यानी उत्पाद कहाँ बना है, इसका जिक्र करना जरूरी है। हालांकि ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं को समय सीमा सम्भव नहीं लगती है। ई-कॉमर्स कम्पनियां इसके लिए कम से कम 3 महीने का वक्त मांग रही हैं। नए नियमों के तहत पोर्टल पर मौजूद सभी प्रोडक्ट पर कंट्री ऑफ ओरिजिन जरूरी है। नई लिस्टिंग पर कंट्री ऑफ ओरिजिन नियम पहले से लागू है।
दो सप्ताह पहले मामले पर डिपॉर्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) ने बुधवार को दूसरी बैठक की, जिसमें 30 ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। डीपीआईआईटी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार 1 अगस्त तक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर नई लिस्टिंग के लिए ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ उपलब्ध करा रही है और सितंबर के अंत तक पुरानी लिस्टिंग के लिए यह उपलब्ध हो जाएगा।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मिशन को बढ़ाने के मकसद से सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस के नए फीचर लागू होने से पहले जिन सेलर्स ने अपने उत्पाद अपलोड किए हुए हैं, उनको भी कंट्री ऑफ ओरिजिन अपडेट करना होगा। सरकार उन्हें लगातार रिमाइंडर भेजेगी और इसके बाद भी प्रोडक्ट पर जानकारी अपडेट नहीं करने पर प्रोडक्ट को प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा। दरअसल दिक्कत यहीं से शुरू होती है। बैठक में कंपनियों के प्रतनिधियों ने कहा कि बदलाव पहले नए उत्पाद लिस्टिंग के लिए किए जाएं क्योंकि उनके प्लेटफार्मों पर पहले से ही बेच रहे लाखों उत्पादों के लिए ऐसा करना मुश्किल है।
सूत्रों के मुताबिक अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी कंपनियों ने प्रस्ताव को निष्पादित करने के लिए तीन महीने की समयसीमा का अनुरोध किया। अमेज़ॅन ने कहा कि उसके लाखों विक्रेता हैं, और हर उत्पाद के लिए ‘मूल देश’ का उल्लेख करने के लिए उन्हें आश्वस्त करना मुश्किल होगा। इसके लिए तीन महीने की समय मिलना चाहिए। फ्लिपकार्ट ने भी कहा कि इसे विक्रेताओं को प्रशिक्षित करने और अपने तकनीकी मंच को फिर से संगठित करने की आवश्यकता है।
साबुन और कंघी बेचते-बेचते फिल्मों में आ गए थे जगदीप
पहली फिल्म के लिए मिले थे सिर्फ 6 रुपये
फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज एक्टर जगदीप दुनिया को अलविदा कहकर चले गए। उनका बीते 8 जुलाई को निधन हो गया। जगदीप के निधन से पूरा बॉलीवुड गम में डूबा हुआ है। जगदीप ने पांच दशक से अधिक समय तक दर्शकों का मनोरंजन किया है। वह जब भी स्क्रीन पर आते थे तो दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी। जगदीप को पहली फिल्म के लिए मात्र 6 रुपये मिले थे। इसके पीछे एक दिलचस्प किस्सा है। आइये जानते हैं इसके बारे में…
मध्यप्रदेश के दतिया में जन्मे जगदीप उर्फ सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी ने बचपन के दिनों में गरीबी काफी करीब से देखी थी। जगदीप महज सात-आठ साल के थे तभी पिता का निधन हो गया। भारत-पाक बंटवारे के बाद जगदीप अपनी मां के साथ ग्वालियर से मुंबई आ गए। कहा जाता है कि जगदीप की मां यतीम खाने में खाना बनाने का काम करती थीं, जिससे वह अपने बच्चे को पढ़ा-लिखा सके और उसे पाल सके। एक दिन जगदीप ने निश्चय किया कि घर की परिवार की मदद के लिए उन्हें कुछ काम करना चाहिए। हालांकि, मां ने जगदीप को काम करने से मना किया, लेकिन वह नहीं माने। जगदीप पढ़ाई छोड़कर पतंग बनाने लगे, साबुन और कंघी बेचने का काम करने लगे।
जगदीप जहां सड़क पर काम किया करते थे। वहां एक आदमी आया और वह वैसे बच्चों को ढूंढ रहा था जो फिल्म में काम कर सके। उस शख्स ने जगदीप से फिल्मों में काम के बारे में पूछा कि क्या तुम काम करोगे? जगदीप ने उस शख्स से पूछा कि ये फिल्में क्या होती हैं। जगदीप ने उस समय तक फिल्में नहीं देखी थीं। जगदीप ने उस शख्स से पैसे की बात की उन्हें इस काम के लिए कितने मिलेंगे। जिसपर जवाब आया तीन रुपये।
जगदीप को महसूस हुआ कि जैसे उनकी लॉटरी लग गई है। जगदीप तुरंत तैयार हो गए। अगले दिन जगदीप की मां उन्हें लेकर स्टूडियो पहुंच गईं, जहां बच्चों का ही सीन चल रहा था। हालांकि, उस वक्त जगदीप को केवल चुपचाप बैठने वाला रोल मिला था, लेकिन तभी उदूर् में एक ऐसा डायलॉग आया, जिसे कोई बच्चा बोल नहीं पा रहा था। जगदीप ने किसी बच्चे से पूछा कि यदि यह डायलॉग मैंने बोल दिया तो क्या होगा, जवाब आया, पैसे ज्यादा मिलेंगे 6 रुपये। जगदीप ने सामने जाकर यह डायलॉग बड़ी ही खूबसूरती से बोल दिया और फिर यहीं से शुरू हुआ उनकी चाइल्ड आर्टिस्ट का सफर। यह फिल्म थी साल 1951 में प्रदर्शित बीआर चोपड़ा की ‘अफसाना’। इसके बाद जगदीप ने सफलता की बुलंदियों को छुआ और एक से बढ़कर एक फिल्मों में अपने लाजवाब कॉमिक अभिनय से दर्शकों को दिल जीता।




