Saturday, June 20, 2026
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850 करोड़ के शेयर वाले बैंक के एम डी आदित्य पुरी

मुम्बई : एमडी आदित्य पुरी के नेतृत्व में एचडीएफसी  बैंक ने शनिवार को पहली तिमाही का परिणाम घोषित किया। इसमें उसे 6,658 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ। हाल में एचडीएफसी बैंक की एजीएम हुई थी। इसमें देश में किसी भी कमर्शियल बैंक में सबसे लंबे समय तक एमडी रहनेवाले आदित्य पुरी ने शुरुआती दौर को याद किया। आज की तारीख में भारत के सबसे बड़े निजी बैंक की स्थापना का श्रेय पाने वाले पुरी ने एचडीएफसी बैंक को 6 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाला बैंक बना दिए। पुरी अक्टूबर में रिटायर हो जाएंगे। एजीएम में पुरी ने कहा कि जब हमने अपने इस बैंक की स्थापना करीब 25 साल पहले की तो उसमें से हमारे कई साथी बच्चे थे। बाटा के जूते पहनने वाले कई साथी उसमें से मिडिल क्लास से आते थे। उनमें से कई तो विदेशी कंपनियों में अच्छे पदों पर काम कर रहे थे। उन सभी के दिलों में यह लालसा थी कि भारत में भी एक वर्ल्ड क्लास बैंक स्थापित हो। मुझे अच्छी तरह याद है कि जब मैं सैंडोज हाउस में लोगों को बैंक के लिए तैयार कर रहा था तो यही कहता था कि आओ और बेस्ट बैंक ऑफ द वर्ल्ड के साथ जुड़ जाओ।
25 साल पहले चूहे काट देते थे एचडीएफसी बैंक के तार
वे कहते हैं कि जब हम काम शुरू कर रहे थे, तो हमारे पास पैसे नहीं थे। इसलिए हमने कमला मिल्स में जाकर अपना कार्यालय खोला। जब हम सुबह वापस आए तो पाया कि कंप्यूटर और अन्य मशीनें ठीक से काम ही नहीं कर रही थी, क्योंकि चूहों ने उनके केबल को कुतर डाला था। हमारी स्थिति ऐसी थी कि शुरू में हमारे ट्रेनिंग केंद्र पेड़ों के नीचे हुआ करते थे। पर भगवान का शुक्र है कि हमने फैसला लिया, हम आगे बढ़े और हम वहां हैं, जहां हम हैं।
बाटा वाले आज नौकरी न भी करें तो जीवन जी सकते हैं
पुरी ने कहा कि अशोक खन्ना ने भी जांच प्रक्रिया में हिस्सा लिया था और बाद में वे मार्च 2020 को रिटायर हो गए। पुरी ने कहा कि अर्थव्यवस्था की गति में थोड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है क्योंकि लॉकडाउन के दौरान पेंट अप डिमांड में थोड़ी कमी आई है। पुरी के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक का उत्तराधिकारी हमेशा बैंक के भीतर से ही आना चाहिए। अब यह आरबीआई पर निर्भर करता है कि बैंक ने जो सिफारिश की थी, उस पर वह क्या फैसला करता है।
उन्होंने कहा कि कोरोना के निराशावादी माहौल के बावजूद न तो एचडीएफसी बैंक और न ही उसकी सहायक एचडीबी फाइनेंस ने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला। जहां उधारकर्ताओं के एक वर्ग ने दूसरे दौर के मोरेटोरियम में पहले तीन महीनों के लिए इसका लाभ उठाया था, वहीं बैंक के केवल 6% उधारकर्ताओं ने अपने लोन रीपेमेंट पर मोरेटोरियम का लाभ उठाया।
जल्द ही एचडीएफसी बैंक को मिलेगा नया एमडी 
पुरी ने एजीएम में बैंक के एमडी के रूप में अंदर के ही किसी अधिकारी को प्रमोट करने का संकेत दिया। अप्रैल में इस बैंक ने 3 अधिकारियों के नाम को आरबीआई के पास दिया था। इसमें से शशिधर जगदीशन और कायजाद भरूचा बैंक के अधिकारी हैं। शशिधर 1996 में बैंक में आए और 2008 में वे सीईओ बने। भरूचा ईडी हैं वे बैंक की स्टार्टअप टीम में हैं। तीसरा नाम सिटीबैंक के सुनील गर्ग का माना जा रहा था।
शेयरधारकों के सवालों के जवाब में पुरी ने कहा कि वे एक मजबूत प्रोसेस ड्रिवन वाले बैंक को छोड़कर जा रहे हैं। बैंक ने शनिवार को पहली तिमाही का परिणाम घोषित किया। इसमें उसे 6,658 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ।

(साभार – दैनिक भास्कर)

1,000% तक उछले रबर के दस्ताने बनाने वाली मलेशिया की कम्पनियों के शेयर

 अमेरिका की टेस्ला को भी पीछे छोड़ा
नयी दिल्ली : एलन मस्क की इलेक्ट्रिक कार कपनी टेस्ला के शेयरों में इस साल 259 फीसदी के उछाल की दुनियाभर में चर्चा है। लेकिन मलेशिया की रबर ग्लब्स बनाने वाली दो कम्पनियों में इसी दौरान 1,000 फीसदी तक का उछाल दर्ज किया गया है, जिसकी जानकारी अधिक लोगों को नहीं है। कोरोनावायरस महामारी के कारण दुनियाभर में दस्तानों की माँग बढ़ने के कारण रबर के दस्ताने बनाने वाली इन कम्पनियों के शेयरों में भारी उछाल आया है।
मलेशिया में इस साल के आखिर तक शॉर्ट सेलिंग पर लगी पाबंदी से भी इन शेयरों में भारी उछाल को बल मिला है। टॉप ग्लव कॉर्प के शेयरों में इस साल अब तक 389 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। यह एमएससीआई एशिया पैसेफिक इंडेक्स में सर्वाधिक उछाल है। वहीं एक अन्य कम्पनी सुपरमैक्स कॉर्प में इस साल 1,000 फीसदी से ज्यादा उछाल दर्ज किया गया है।
मलेशिया की तीन सबसे बड़ी ग्लव्स निर्माता कम्पनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन (एमकैप) में इस साल कुल 26 अरब डॉलर (1.95 लाख करोड़ रुपए) की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। मलेशिया में किसी कम्पनी के शेयरों में इतना तेज उछाल पहले नहीं देखा गया था। आज मलेशिया के शेयर बाजार में निवेश होने वाले हर 10 रुपये में से एक रुपए से ज्यादा का निवेश ग्लव्स बनाने वाली कम्पनियों में हो रहा है।
मलेशिया की ग्लव्स बनाने वाली कम्पनियों के शेयरों में भारी उछाल की बदौलत ग्लोबल हाइजीन में मलेशिया की आज एक अलग पहचान बन गयी है। यह पहचान उसी तरह की है, जैसे सेमीकंडक्टर के मामले में दक्षिण कोरिया और ताइवान की एक अलग पहचान है। हालांकि कोरोनावायरस के वैक्सिन का विकास शेयर बाजार में इन कम्पनियों के शानदान प्रदर्शन के सामने सबसे बड़ा जोखिम है।
ऑर्डर बुक में भारी बढ़ोतरी
फिलहाल ग्लव्स बनाने वाली इन कम्पनियों के ऑर्डर बुक में भारी बढ़ोतरी हुई है। इस बीच मांग के कारण ग्लव्स की कीमत भी बेतहाशा बढ़ी है। ये कंपनियां मांग को पूरा करने के लिए बढ़चढ़कर अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

लुधियाना ने दुकान मालिक ने स्टोर का नाम रखा ”गुप्ता एंड डॉटर”

पिता ने बेटी आकांक्षा के नाम पर रखा स्टोर का नाम

लुधियाना : दुकान के साइन बोर्ड पर आपने पिता के नाम के साथ ब्रदर्स या संस लिखा हुआ देखा होगा। यहां तक कि परिवार में बिजनेस बढ़ाने का काम भी पिता के बाद भाई या बेटे की जिम्मेदारी ही मानी जाती है।  इसी बीच लुधियाना की एक दुकान के मालिक मनोज कुमार गुप्ता ने अपने मेडिकल स्टोर का नाम ”गुप्ता एंड डॉटर” रखा है। उन्होंने अपनी बेटी आकांक्षा को सम्मान देने के लिए यह पहल की है।
लुधियाना के पखोवल रोड़ पर रहने वाले इस परिवार की सोशल मीडिया पर तारीफ हुई। एक यूजर ने साइन बोर्ड पर ट्विट करते हुए लिखा गुप्ता ने महात्मा गांधी की कहीं बात को सच साबित कर दिखाया है। गांधीजी ने कहा था अगर आप समाज में बदलाव चाहते हैं तो इसकी शुरुआत सबसे पहले अपने घर से ही करना होगी।
देखा जाए तो मनोज का यह प्रयास लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है। मनोज के अनुसार जब मैंने इस साइन बोर्ड पर मेरे नाम के साथ डॉटर्स का नाम लिखने का फैसला किया तो परिवार के लोग खुश हुए। लेकिन कुछ बाहर के लोगों ने नाराजगी जताई।


दूसरों की बातों को नजरअंदाज कर गुप्ता ने अपने मन की सुनी और वो कर दिखाया जो चाहते थे। इससे पहले गुप्ता ने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी की शुरुआत की थी जिसका नाम गुप्ता एंड संस रखा था। उसके तीन साल बाद जब उन्होंने अपने मेडिकल स्टोर को सेट किया तो संस के बजाय उस पर डॉटर का नाम लिखकर उसे सम्मानित किया। वे कहते हैं मुझे अपनी बेटी पर गर्व है। मैं समाज में बेटियों के नाम पर होने वाली लैंगिंक असमानता को खत्म करना चाहता हूं। मनोज के बेटे ने एमबीए किया है। वो भी अपने पिता के विचारों की कद्र करता है। मनोज अपनी पत्नी रमा को धन्यवाद देते हैं।
उनका कहना है कि रमा की सही परवरिश की वजह से ही बच्चे एक दूसरे का सम्मान करना सीख पाए। वे अपने घर का कोई बड़ा फैसला पत्नी की इजाजत के बगैर नहीं लेते हैं।

कोरोना प्रभाव : एयरपोर्ट पर बढ़ी हल्दी दूध, तुलसी, रसम, शिकंजी की माँग

नयी दिल्ली : कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी के बाद लोग पौष्टिक आहार फूड व पेय पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इन दिनों इम्यूनिटी बढ़ाने वाले उत्पादों की माँग बढ़ी है। यही वजह है कि एयरपोर्ट के लॉन्ज में भी पौष्टिक मेनू रखे जा रहे हैं। मई से घरेलू उड़ानें शुरू हैं। इस दौरान ज्यादातर एयरपोर्ट पर बेवरेज में हल्दी दूध, तुलसी मिंट शिंकजी, रसम, शैफरॉन सत्तु शेक, आंवला और पन्ना जैसे इम्यूनिटी बूस्टर उत्पादों की बिक्री में तेजी आई है। इस मामले में नॉनवेज की मांग पीछे रह गई है।
हल्दी दूध और तुलसी मिंट शिकंजी मेनू का अहम हिस्सा
महामारी के ज्यादातर यात्री घर का पका हुआ खाना ही पसंद कर रहे हैं। एयरपोर्ट लॉन्ज या रेस्तरां में सिर्फ उन्हीं आहार या बेवरेज की बिक्री हो रही है जो कि हेल्दी और इम्यून पावर को बढ़ाने में मदद करती हैं। एक अधिकारी के मुताबिक, हल्दी दूध दिल्ली हवाई अड्डे पर तीसरा सबसे अधिक बिकने वाला बेवरेज आइटम है। वहीं, कोलकाता एयरपोर्ट पर तुलसी मिंट शिकंजी है। रसम चेन्नई एयरपोर्ट पर पसंदीदा बेवरेज बना है। ऐसे में अब इम्यूनिटी बूस्टर प्रोडक्ट की मार्केटिंग के बारे में सोचा जा रहा है।
एयरपोर्ट पर दही चावल की बिक्री 20% बढ़ी
इस समय एयरपोर्ट लॉन्ज में दही चावल की माँग में तेजी देखी गयी है। यह हल्का होने के साथ ही पौष्टिक आहार भी है इस वजह से इसकी बिक्री बढ़ी है। बता दें कि कोरोना से पहले दही चावल की मात्र 2-3% बिक्री ही होती थी अब यह बढ़कर 15-20% से ज्यादा हो गयी है। यह ग्राहकों के बीच पसन्द की जा रही है। वहीं मांसाहार की माँग में कमी आई है। मेनू के साथ ही खाने का ऑर्डर देने का तरीका भी बदल गया है। अब खाना स्मार्टफोन और आईपैड पर ऑर्डर किया जा रहा है। यहां मेनू पढ़ कर, क्यूआर कोड स्कैन करके ऑनलाइन भुगतान किया जा रहा है। वहीं, प्री-पैक्ड मील की जगह अब स्पिल-प्रूफ बॉक्स न्यू नार्मल बन गया है। हालांकि अधिकांश टर्मिनल के अंदर रेस्तरां अभी भी बंद हैं।

कोरोना : मानसिक स्वास्थ्य पर आया मेडी बडी का जागरुकता वीडियो

कोलकाता : कोरोना काल में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आने वाली परेशानियों को देखते हुए मेडी बडी डॉक्स ऐप ने एक जागरुकता वीडियो जारी किया है। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ऐप पर शिकायतें मिल रही हैं जिनमें से बड़ी संख्या 21 से 30 वर्ष तक के युवाओं की है। मेडी बडी ऐप इस समस्या को देखते हुए ऑनलाइन परामर्श दे रहा है। मेडी बडी डॉक्स ऐप के सह संस्थापक और सीईओ सतीश कन्नान ने कहा कि मेडी बडी ने इसे लेकर कई वेबिनार किये हैं जिनमें बात तो करो, सम्पर्क का महत्व, नींद और तनाव प्रबन्धन, प्रमुख हैं।

मॉनसून में राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रहा है कामधेनु पेंट्स

कोलकाता : कामधेनु पेंट्स मॉनसून में अपना राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसके तहत मॉनसून को ध्यान में रखते हुए कम्पनी सोशल मीडिया के जरिए कम्पनी सम्बन्धित उत्पादों का प्रचार कर रही है तथा जागरुकता अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत कम्पनी बता रही है कि इस मौसम में घर की बाहरी दीवारों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। कामधेनु पेंट्स के निदेशक सौरभ अग्रवाल ने इस अभियान की जानकारी देते बताया कि कामधेनु ने वेदर क्लासिक मैक्स और वेदर सुप्रीम पेंट बाजार में उतारे हैं जो दीवारों को एक टिकाऊपन देंगे। यह दीवारों को पानी और सीलन से बचाएंगे। रंग दाग प्रतिरोधी हैं, इन पर धूल जल्दी नहीं चढ़ती और जल्दी फीके भी नहीं पड़ते।

एचआईटीके का पूर्व छात्र प्रशासनिक परीक्षा में तीसरे स्थान पर

कोलकाता : हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पूर्व छात्र ने राज्य की प्रशासनिक परीक्षा में सफलता पाई है। सायक दत्त नामक इस छात्र को पश्चिम बंगाल फॉरेस्ट सर्विस एक्जाम में में तीसरा रैंक मिला है। नतीजे गत 2 जुलाई को घोषित किये गये थे। सायक एचआईटीके में बी. टेक – सीएसई के वर्ष 2011 के बैच में था।

नहीं रहे प्रो. आनन्द मोहन चक्रवर्ती

कोलकाता : प्रो. आनन्द मोहन चक्रवर्ती का निधन हो गया है। वे अमेरिका की इलिनॉएस यूनिवर्सिटी में डिस्टिंग्वस्ड प्रोफेसर थे। वर्ष 2013 में 100वें इंडियन साइंस कांग्रेस के दौरान भारत आये थे। वे भारतीय अमरीकी माइक्रोबायोलॉजिस्ट, वैज्ञानिक, शोधकर्ता थे। उनको प्लासमिड ट्रान्सफर के जरिए जेनेटिक तरीके ऑर्गेनिज्म विकसित करने के लिए जाना जाता है। इसके बाद माइक्रो ऑर्गनिज्म पर आगे चलकर कई पेटेंट हुए और उनको दुनिया में ख्याति मिली।

शख्स, जिसने स्पर्श से धीरूभाई अम्बानी को भी स्वस्थ कर दिया

आध्यात्मिक स्पर्श उपचार एक अकथनीय घटना है जो किसी भी वैज्ञानिक प्रणाली और प्रक्रियाओं से आगे की बात करती है। हैरत इस बात की है कि यह उपचार कोई डॉक्टर नहीं आम इन्सान कर रहा है और बहुत से लोगों को पीड़ामुक्त कर चुका है। स्पर्श से प्रभावित भाग में गर्मी पैदा होती है। दावा है कि इसके परिणामस्वरूप मरीज को उम्र भर दर्द और कठोरता से राहत मिलती है। यह शख्स हैं मोहन जोशी, जो डॉक्टर नहीं है और न ही भगवान का कोई अवतार। जोशी का कहना है कि वर्षों पहले उनको एक आध्यात्मिक गुरु से यह पता चला था कि वास्तव में उन्हें विशेष शक्तियां प्रदान की गई थीं, जो सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, रुमेटीइड आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस जैसे मामलों में राहत दिला सकती थीं। शुरुआत उन्होंने एक दोस्त के कहने पर उसके उपचार से की और निःशुल्क चिकित्सा प्रदान करने लगे।
उनका कहना है कि यह चिकित्सा प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत सस्ती और सुलभ है। इस आध्यात्मिक उपचार चिकित्सा से लाभान्वित होने वााले लोगों की सूची लम्बी है। इनमें प्रमुख उद्योगपति, लेखक, अभिनेता, सीए, अधिवक्ता शामिल हैं और सूची जारी होती है। आध्यात्मिक उपचार गठिया, लूम्बेगो, वैरिकाज़ नसों की सूजन, ब्रोंकोस्पज़म, ऑस्टियोपोरोसिस, स्पॉन्डिलाइटिस, पक्षाघात, पेट में ऐंठन, जमे हुए कंधे, सिर का चक्कर, तनाव, अनिद्रा जैसी कई अन्य बीमारियो में कारगर है। भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त हो चुके जोशी स्पर्श चिकित्सा की शक्ति को एक निस्वार्थ कार्य मानते हैं। जोशी 1982 से मुम्बई में आध्यात्मिक उपचार का अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने तब से अब तक लाखों रोगियों का इलाज किया है। लगभग 40 प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं ने उनके उपचार कार्य को गति दी है। उनका कहना है कि अपनी चिकित्सा से उन्होंने धीरूभाई अम्बानी, दिवंगत नेता बलराम जाखड़ तक का इलाज किया है। अम्बानी के शरीर के दाहिने हिस्से में लकवा मार गया था, जोशी के उपचार से ठीक हुए। हालाँकि वे यह भी स्वीकार करते हैं कि यह उपचार प्रणाली राहत देती है, पूर्णतया समाधान नहीं है। कोलंबो में प्रसिद्ध विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें “डॉक्टर ऑफ साइंस” की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने भारत के कई शहरों जैसे मुंबई, बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, सूरत, नवसारी, भोपाल, इंदौर, मदुरै, कोयम्बटूर, पोलाची आदि में चिकित्सा शिविरों में भी भाग लिया है। फिलहाल उनको इस काम में उनकी बेटी से मदद मिल रही है। दिल्ली के हौज खास में उन्होंने एक दिन में 125 मरीजों का उपचार किया।

अब मोहन जोशी यौगिक हीलिंग और उससे जुड़ने की चाह रखने वालों की सहायता करना चाहते हैं। अगर आप भी सीखना चाहते तो आप उनसे उनकी वेबसाइट पर सम्पर्क कर सकते हैं।