Monday, June 22, 2026
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यूपीएससी में राज्य टॉपर बने रौनक अग्रवाल

कोलकाता : मंगलवार को यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन (यूपीएससी) द्वारा संचालित सीविल सर्विसेज एक्जामिनेशन 2019 का रिजल्ट घोषित किया गया। मेधा सूची में शीर्ष 20 में पश्चिम बंगाल के 2 अभ्यर्थियों ने अपना स्थान बनाया है। यूपीएससी, सीविल सर्विसेज की मेधा सूची में 13वें व राज्य में पहले स्थान पर कोलकाता के निवासी रौनक अग्रवाल हैं।

वहीं मेधा सूची में 20वें नंबर पर पश्चिम बंगाल से नेहा बंद्योपाध्याय ने जगह बनाई है। नोपानी हाई स्कूल के छात्र रौनक ने उच्च शिक्षा सेंट जेवियर्स कॉलेज से प्राप्त की। कॉलेज में रौनक गोल्ड मेडलिस्ट थे। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रौनक ने सीए किया। रौनक को सिटी बैंक से नौकरी का ऑफर भी किया गया था, लेकिन उसने यूपीएससी की तैयारी करने का मन बनाया। वर्ष 2016 से रौनक ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी। अपने तीसरे प्रयास में रौनक को यह सफलता मिली। रौनक का कहना है कि उन्होंने कभी उम्मीद भी नहीं की थी कि वह देश में 13वें स्थान पर आएंगे और आईएएस बन पाएंगे। अपनी सफलता के लिए रौनक अग्रवाल अपने माता-पिता के समर्थन को श्रेय देते हैं। रौनक को पढ़ाना व कविताएं लिखने का बहुत शौक है।

(साभार – नयी आवाज डॉट कॉम)

गानों में यूडलिंग टेकनीक लेकर आए किशोर कुमार

किशोर दा के गाने आपके अंदर मस्तियां घोलते हैं. उनके गानों की तेज लहराती पिच पर आपका मूड झूमते हुए बहता है. उनके रोमैंटिक, मधुर और खिलंदड़ी अंदाज में गाए हर गाने में आप तेज और धीमी होती लहर में बहते हैं और एक रवानगी महसूस करते हैं. उनमें गानों में वैरिएशन पैदा करने की जबर्दस्त कलागरी थी. यही उनका क्लास भी था.

4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश खंडवा के बंगाली परिवार में जन्में आभास कुमार गांगुली यानी किशोर कुमार ने अपने भाई अशोक कुमार की राह पर चलते हुए एक्टिंग से करियर की शुरुआत की. इसके बाद सिंगिंग, गीत लिखने, संगीत बनाने, स्क्रीन राइटिंग, निर्माता, फिल्म डायरेक्शन, सिनेमा के लगभग हर फार्मेट में अपना कमाल साबित किया.

कहा जाता है कि बाद के गायकों में इस पिच को पाने की कुमार सानू ने बहुत कोशिश की लेकिन वो किशोर कुमार के मुकाम तक नहीं पहुंच सके. नए सिंगर अरिजित सिंह ने अपने कुछ गानों में इसका अच्छा इस्तेमाल किया है. ऐ दिल है मुश्किल  फिल्म के टाइटल गीत में उनमें से एक है. पर किशोर की यूडलिंग की अलग तासीर थी जो और कहीं नहीं. उन्हें यूडलिंग का स्टार भी कहा जाता है.

अमेरिकन गायकों से प्रेरित थी उनकी शैली

किशोर दा की यह स्टाइल अमेरिकन सिंगर और सॉन्ग राइटर जिम्मी रॉजर्स  (Jimmie Rodgers) से प्रेरित थी जिन्हें ‘द फादर ऑफ कंट्री म्यूजिक’ कहा गया. वह अपने गानों में खास लय के साथ चेंज लाने के लिए मशहूर थे. इसके अलावा वेस्टर्न आस्ट्रेलियन सिंगर टेक्स मॉर्टन  (Tex Morton) का असर था.

उनकी यूडलिंग का एक जबर्दस्त इस्तेमाल म्यूजिक डायरेक्टर आरडी वर्मन के गाने ब्लॉकबस्टर मूवी कटी पतंग  में महसूस कीजिए जो राजेश खन्ना के लिए फिल्माया गया है.

तुम बिन जाऊं कहां….. इसो हॉन्टिंग यूडल का नमूना कहा जाता है.

 इसी फिल्म के एक मस्ताने गाने में इस अंदाज को महसूसिए-

ये शाम मस्तानी मदहोश किए जाए…कोई डोर मुझे खींचे, तेरी ओर लिए जाए…

उनके इस लहराते अंदाज को राजेश खन्ना की फिल्म दो रास्ते  के एक गम गाने में देखिए और आप मद्धम-मद्धम झूमते हुए बह सकते हैं.

मेरे नसीब में ऐ दोस्त तेरा प्यार नहीं…

यह अंदाज एक तेज पिच वाले खुशी के गाने में झूमता हुआ नजर आता है, जिसे आराधना फिल्म में राजेश खन्ना के लिए फिल्माया गया है. इस फिल्म के गानों के साथ ही किशोर कुमार संगीत की दुनिया में छा गए.

मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू? आई रुत मस्तानी, कब आएगी तू? बीती जाए ज़िंदगानी, कब आएगी तू?
चली आ, तू चली आ…

 जाने-माने सिंगर उनके बेटे अमित कुमार एक बातचीत में कहते हैं. इतने सालों बाद आज भी वह नंबर वन बने हुए हैं. सबसे ज्यादा गाना आज भी उन्हीं के बजते हैं.

एक ही गाने के दो वर्जन हों तो उनका गाना ज्यादा चलता था

जावेद अख्तर कहते हैं, ‘मैं एक बात बहुत झिझकते हुए कहना चाहूंगा पर कहूंगा जरूर…किशोर कुमार ने जब भी किसी के साथ गाना गाया है चाहे मेल सिंगर हो या फीमेल. तो आपको एक फर्क महसूस होगा. आपका ध्यान किशोर कुमार की आवाज पर ही जाएगा. या फिर एक गाना, जिसका मेल-फीमेल दोनों वर्जन हों या फिर दो मेल वर्जन का गाना है तो किशोर का वर्जन ही चला है दूसरा नहीं चला.’

(प्यार का मौसम 1969) तुम बिन जाऊं कहां…किशोर का यह गाना रफी के वर्जन वाले गाने से ज्यादा स्कोर किया है, मेलॉडी के टर्म में नहीं, मूड के.

1976 की फिल्म महबूबा के लिए राजेश खन्ना के लिए गाया गया गाना- मेरे नैना सावन भादो  जो लता के वर्जन से ज्यादा किशोर के वर्जन के पक्ष में गया.

रिम झिम गिरे सावन  (मंजिल 1979) नर्म अंदाज में गाया गया किशोर का गाना लता के ऊंचे पिच के गाने से ज्यादा स्कोर किया. खिलते हैं गुल यहां  (शर्मीली 1971) लता का फीमेल वर्जन में यह गाना भी कमतर साबित हुआ. (मेम साहब 1956) दिल दिल से मिलाकर देखो  किशोर के वर्जन का स्कोर आशा भोसले के वर्जन को पीछे छोड़ गया.

मन्ना डे ने अपने ऑटोबायोग्राफी में याद किया हैं, ‘उनकी गायन की एक अनूठी और अप्रभावित शैली थी, जो शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को पाने में लगे साथ में गाने वाले को… एक नुकसान में रखती थी.’

वह कहते हैं, ‘किशोर की कला की मास्टरी उनकी तत्काल बनाई गई टेकनीक और गाने के मूड पर उनकी पकड़ में मौजूद है.’

संगीतकार सलिल चौधरी कहते हैं कि बात यह नहीं कि किशोर दूसरों से बेहतर हैं. लता, रफ़ी और मन्ना ने उनसे ज्यादा पेचीदा गाने गाए. बात यह है कि जब किशोर ने गाया तो उनका मिडास (गोल्डेन) टच कैसा लगा.’

आरडी वर्मन ने फिल्म अमर प्रेम के चिंगारी जब भड़के  गाने का जिक्र करते हुए कहा था, ‘किशोर जब ‘चिंगारी‘ गा रहे हों तो जैसे वो बस आपके लिए गा रहे होते हैं- केवल आपके लिए.’

बदल देते थे संगीत

किशोर कुमार आर्टिस्ट नहीं, वो अपने आप में एक आर्ट थे. संगीत परंपरा से इतर उन्होंने अपनी परंपरा बनाई.

संगीतकार जतिन-ललित की जोड़ी के ललित कहते हैं, ‘गानों में मस्ती का एक्सप्रेशन बहुत मुश्किल से आता है. लेकिन किशोर दा के साथ वह नेचुरली आ जाता था. उनके गानों में इतना एक्सप्रेशन सुनाई देता था, जो हम कर नहीं पाते हैं.’

वो कहते हैं, ‘उनकी संगीत की समझ इतनी अधिक थी कि अगर संगीतकार थोड़ी खराब धुन लेकर आए तो वो उसमें जान फूंक देते थे और गाना अमर हो जाता था.’

किशोर कुल 574 से ज्यादा गाने गाए और आठ गानों के लिए फिल्म फेयर अवार्ड  मिला जो प्लेबैक सिंगिंग की श्रेणी में सबसे ज्यादा है.

तीन बड़े अभिनेता को जिनको किशोर की आवाज से पहचान मिली

किशोर कुमार की आवाज ने तीन अभिनेताओं को शिखर तक ले जाने में अहम भूमिका निभाई. पहला नाम देवानंद का है जो उनके सदाबहार नगमों से सदाबहार हीरो बने. किशोर की झूमती, मस्तानी आवाज ने राजेश खन्ना की नई अदा, स्टाइल को खूब हिट किया और बॉलीवुड के पहले सुपर स्टार बने और अमिताभ बच्चन महानायक.

स्टूडियो में साथी गायक का ध्यान भटका देते थे

यतीद्र मिश्र की किताब ‘लता सुर गाथा’ में लता मंगेशकर बताती हैं, ‘आप चाहे जितना सीरियस हों, गाते समय, जब आप अंतरों में कोई तान ले रहे हों या हरकत दिखा रहे हों तो किशोर दा झट से कोई बेवकूफी भरा इशारा करते थे, जिससे आपका ध्यान गाने से हट जाए. हम कई बार गानों को बीच में रुकवाकर उनसे मिन्नतें करते थे कि दादा पहले शांति से गाना रिकॉर्ड करा दो, फिर यह सब होगा…’

रफी ने किशोर के गानों से हटवाया था प्रतिबन्ध, होड़ की बात गलत

बताया जाता है 1975 में इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस की हालत बहुत खराब थी. इंदिरा गांधी चाहती थीं उस समय काफी मशहूर किशोर कुमार उनके लिए गाएं पर उन्होंने मना कर दिया था, जिसके बाद किशोर के गानों पर 3 साल के लिए बैन लगा दिया गया था लेकिन किसी काम से दिल्ली आए मोहम्मद रफी ने किशोर को बिना बताए इंदिरा गांधी से उनके गानों से बैन हटवा दिया.

इसके बाद किशोर ने रफी से मिलकर कहा कि आपने मेरी इतनी मदद की और बताया भी नहीं तो वह बोले यह बहुत छोटी मदद है, कभी किसी से कहना मत. रफी के मौत के बाद अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे किशोर रफी के लिए फूट-फूट कर रोये थे और वहां रफी को याद करते हुए अपने गानों से बैन हटाने की बात बताई थी. रफी ने किशोर के लिए कई फिल्मों में आवाज दी. बतौर एक्टर किशोर कुमार ने ‘चलती का नाम गाड़ी’, ‘हॉफ़ टिकेट’, ‘पड़ोसन’ और ‘झुमरू’ जैसी कई फिल्मों में काम किया.

आराधना के हिट होने के बाद किशोर कुमार संगीत के आसमान पर छा गए तो लोग रफी पर ताने मारने लगे थे. जब किशोर को पता चला तो उन्होंने कहा ऐसी बातें बंद की जाएं वह रफी साहब की पूजा करते हैं.

(साभार – द प्रिंट)

कोलकाता में 6 अगस्त से खुलेंगे कई जिम, सैनिटाइजेशन प्रक्रिया जारी

कोलकाता : हाल ही में केन्द्र की तरफ से अनलॉक-3 की घोषणा करते हुए 5 अगस्त से जिम (Gym) खोलने की इजाजत भी दे दी गयी थी। इसके लिए सरकार की तरफ से विशेष दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं जिसका सभी को सख्ती से पालन करना होगा। दूसरी तरफ 5 अगस्त यानि कल बंगाल सरकार की तरफ से लॉकडाउन की घोषणा की गयी है, इसीलिए महानगर के कुछ जिम 6 अगस्त से खुलेंगे। हालांकि प्राप्त जानकारी की माने तो कुछ जिम मालिक अभी भी जिम खोलने के लिए थोड़ा वक्त लेना चाहते हैं। दूसरी तरफ कई जिमों में तो सैनिटाइजेशन प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। साथ ही इस बात का भी खास ख्याल रखा जा रहा है कि कोरोना को लेकर जारी गाइडलाइन्स का पूरा पालन हो। इसके तहत मशीनों व अन्य चीजों के बीच पर्याप्त दूरी होना, ट्रेनर व जिम में आने वाले लोगों का मास्क पहनना अनिवार्य एवं जिम से प्रवेश से पहले थर्मल स्कैनिंग व सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया शामिल हैं। इसके साथ ही सूत्रों से मिली जानकारी की माने तो सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भी तैयार किया गया है। जिम में आने वाले लोगों को पहले यह फॉर्म भरना होगा। इसमें इस बात की पुष्टी की जायेगी कि जिम में आने वाला व्यक्ति खुद कोरोना की चपेट में या फिर अन्य कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में नहीं आया था।

(साभार – नयी आवाज डॉट कॉम)

इस तरह उठाइए अमेजन प्राइम डे सेल का ज्यादा फायदा

  • अमेज़न प्राइम डे 2020 सेल इवेंट में रेगुलर और लाइटनिंग डील्स होंगे
  • अमेज़न प्राइम डे सेल सिर्फ और सिर्फ अमेज़न प्राइम मेंबर्स के लिए

कोलकाता :  अमेजन प्राइम डे सेल का आगाज़ 6 अगस्त को होगा। यह पहला मौका है जब अमेज़न की वार्षिक सेल इवेंट एक साथ हर देश में नहीं आयोजित होगी। वजह है कोरोना वायरस महामारी।  कोविड -19  के कहर के बीच भारत में आयोजित होने वाली अमेजन प्राइम डे सेल में स्मार्टफोन, लैपटॉप, वियरेबल्स, स्मार्ट स्पीकर्स और अन्य प्रोडक्ट पर शानदार डील्स उपलब्ध होगी। इस बीच अमेज़न ने प्राइम डे 2020 सेल में उपलब्ध होने वाले चुनिंदा ऑफर्स से धीरे-धीरे पर्दा उठाना शुरू कर दिया है। अमेजन प्राइम डे 2020 जैसी बड़ी सेल में क्या खरीदें और कैसे खरीदें। इसे लेकर असमंजस तो रहता है। लेकिन प्लानिंग सही रहे तो ग्राहक के तौर पर आप काफी पैसे बचा सकते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि अमेज़न प्राइम डे सेल में किस तरह से बेहतरीन डील्स को खोजा जाए।

अमेजन प्राइम डे 2020  में बेस्ट डील्स खोजने का तरीका?
अमेज़न की प्राइम डे सेल 6 अगस्त को मध्यरात्रि ही शुरू होगी। यह 7 अगस्त तक चलेगी। 48 घंटों की इस सेल में आपके पास चुनने के लिए हजारों डील्स होंगे जो खासतर पर अमेज़न प्राइम मेंबर्स के लिए उपलब्ध होंगे। वैसे तो हम इन डील्स की जांच करके बेस्ट डील्स की सूची आपके लिए ज़रूर तैयार करेंगे। लेकिन आप नीचे दिए गए टिप्स को इस्तेमाल कर खुद भी बेस्ट डील्स की सूची तैयार कर सकते हैं।

1.  अमेजन प्राइम डे 2020 से पहले अपने पसंदीदा प्रोडक्ट को विशलिस्ट में एड करें
पहली बात जो हम हर साल दोहराते हैं। सेल से पहले अपने पसंदीदा प्रोडक्ट को विशलिस्ट में एड करने से आप प्रोडक्ट डिस्काउंट पर नज़र रख पाएंगे। इसके अलावा आपको अमेज़न मोबाइल ऐप पर नोटिफिकेशन भी मिलेगा कि वह प्रोडक्ट प्राइम डे 2020 सेल की लाइटनिंग डील का हिस्सा है या नहीं। इसके अलावा विशलिस्ट के ज़रिए आप अपने बजट पर भी नज़र रख पाते हैं।

2. स्टॉक खत्म होने से पहले डील्स चुनें
अमेज़न प्राइम डे 2020 सेल इवेंट में रेगुलर और लाइटनिंग डील्स होंगे। लाइटनिंग डील्स में प्रोडक्ट सीमित संख्या में उपलब्ध होता है। क्योंकि डिस्काउंट ज्यादा होती है। ऐसे में प्राइम डे 2020 सेल के दौरान लाइटनिंग डील्स जल्द खत्म हो जाएगी। आप यह सुनिश्चित करें कि सेल शुरू होते ही आप अमेज़न की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर आ जाएं। यही बेस्ट डील्स पाने का बेहतरीन मौका है।

3. कंपेयर, कंपेयर, कंपेयर
अमेज़न को भारत में चुनौती मिली है Flipkart से। इस प्लेटफॉर्म पर भी प्राइम डे 2020 सेल के दौरान अपनी सेल आयोजित होगी। आप फ्लिपकार्ट से कीमत की तुलना करना ना भूलें। फ्लिपकार्ट ही क्यों, आप पेटीएम जैसे अन्य प्लेटफॉर्म के बारे में भी विचार कर सकते हैं। संभव है कि आपको अमेज़न के बजाय किसी और प्लेटफॉर्म पर ज़्यादा बेहतर डील मिल जाए।

4. बंडल्ड ऑफर्स मिस ना करें
अगर आप स्मार्टफोन या लैपटॉप जैसी महंगी चीजें खरीद रहे हैं तो बंडल्ड ऑफर्स पर एक नज़र डालना ना भूलें। ये एक्सचेंज ऑफर्स, नो कॉस्ट ईएमआई पेमेंट विकल्प, क्रेडिट व डेबिट कार्ड ऑफर्स, अमेज़न पे कैशबैक ऑफर के तौर पर उपलब्ध होते हैं।

5. एक बार सुनिए, अमेज़न प्राइम मेंबर बन जाइए
अमेज़न प्राइम डे सेल सिर्फ और सिर्फ अमेज़न प्राइम मेंबर्स के लिए है। अगर आपने अभी तक साइन अप नहीं किया है तो अब कर लें। मुफ्त ट्रायल पाना अब थोड़ा मुश्किल है। लेकिन कुछ मोबाइल ऑपरेटर्स अपने प्लान के साथ अमेज़न प्राइम का सब्सक्रिप्शन ज़रूर देते हैं। वैसे, अमेज़न प्राइम मंबर्स की वार्षिक कीमत 999 रुपये है और महीने का शुल्क 129 रुपये।

(साभार – गजट 360)

कोविड – 19 के बाद बदलेगा उद्योगों का चेहरा

कोलकाता : भवानीपुर कॉलेज के बीबीए विभाग द्वारा आयोजित बेविनार में कॉलेज के डायरेक्टर और अर्थशास्त्री डॉ. सुमन मुखर्जी ने कोविद 19 महामारी के बाद उद्योगों के बदलते चेहरे पर विचार विमर्श किया। इस कार्यक्रम का विषय दि चेंजिंग फेस ऑफ इंडियन सर्विस इंडस्ट्री पोस्ट कोविड 19 आउटब्रेक रक्खा गया। इस कार्यक्रम के पीछे बीबीए विभाग के विद्यार्थियों का मानना यही है कि कंपनी का उद्देश्य  उपभोक्ताओं को सेवा देना  होना चाहिए जो भारतीय परंपरा और संस्कृति के अनुकूल हो। आज कोरोना महामारी के बाद सर्विस इंडस्ट्री जैसे विभिन्न उद्योगों में आए संकटों से उभरने के लिए क्या नए बदलाव या संभावना हो सकती हैं, इस विषय पर उद्योग जगत से जुड़े  प्रमुख विशिष्ट वक्ताओं  में प्रो. चंद्र दीप मित्रा और अनूप हन को आमंत्रित किया गया।
डॉ सुमन मुखर्जी ने कार्यक्रम का आरंभ करते हुए कहा कि उद्योगों की स्थिति नदी की तरह होती है जो अवसर और परिस्थितियों के अनुकूल अपनी दिशा बदल लेते हैं। भारतीय उद्योगों के चेहरों में भी बदलाव आएगा क्योंकि समय के साथ बड़े बड़े परंपरा से चले आ रहे उद्योग भी बंद होते देखे गए हैं। आर्थिक विकास के नये रास्ते निकल आते हैं।
उद्योग जगत में प्रो. चंद्र दीप मित्रा  मार्केटिंग, ब्रैंडिंग, कम्युनिकेशन और मीडिया जैसे विभिन्न क्षेत्रों में गत बीस वर्षों से नेतृत्व कर रहे हैं। आपका मानना है कि कोविद- 19 के संकट में आज उद्योग धंधों के ट्रेक भी बदलने का समय आ गया है। आज विभिन्न प्रकार की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं और दूसरों के लिए सफलता प्राप्त करने के कई क्षेत्र हैं।
भारत एक साधन प्रदान करने वाला देश बन सकता है।
डॉ सुमन मुखर्जी के “डी” बिंदुओं का – डेटा ड्रिवन इकोनॉमी, डिस्फिरिंग इन्फर्मेशन, डोमेस्टिकेटेड मार्केटिंग और डोमिनो आदि का हवाला देते हुए  आने वाली नयी पीढ़ी को नये सिरे से उद्योगों के चरित्र को समझने की बात कही ।
श्री अनूप हन पिछले तीस वर्षों से सर्विस इंडस्ट्री में सर्टिफाइड एक्सिकयूटिव रहे और विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के दौरान सोशयल डिस्टेंस वास्तव में शारिरिक दूरी का पालन करना है। आपका मानना है कि रेस्टोरेंट और हॉस्पिटैलिटी सेवाओं में फिर से समस्याओं का पुनः मूल्यांकन और निदान पर विचार करना होगा। फेमिली कॉन्सलिंग, फेमिली बिजनेस चार्टर, संस्कृति और मौसम, लर्निंग और नवपरिवर्तन, प्रतिस्पर्द्धा के लाभ और व्यापारिक चक्र आदि पर नये सिरे से विचार विमर्श करने की आवश्यकता है। रेस्टोरेंट – होम और कॉमर्शियल उद्योगों आदि के महत्वपूर्ण कारकों को लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर करना होगा जिससे अधिक आर्थिक लाभ हो। उपभोक्ताओं को आकर्षित और सुरक्षित दोनों दृष्टि से नया वातावरण देना होगा। हाइजिन देने के लिए सामाजिक दूरी को बरकरार रखते हुए एप में बुकिंग टेबल पर क्यू आर कोड स्केनिंग हो, पेट्रान को सौंपी गई टेबल पर रोबोटिक फुड देने की व्यवस्था हो। होटलों में खुली रसोई आदि की व्यवस्था हो जिससे कस्टमर स्वयं देखकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था से आश्वस्त हो सके।
सभी विशेषज्ञों ने भवानीपुर कॉलेज के बीबीए विभाग के विद्यार्थियों को स्टार्ट – अप उद्योग की विस्तृत जानकारी दी। बीबीए विभाग के इवेंट मैनेजमेंट कमेटी की अध्यक्ष दीक्षा झा, सुयश सोमवंशी और प्रो. कौशिक बनर्जी के सद्प्रयासों से युवाओं को एक अच्छा मंच मिला जहाँ वे आने वाले समय से मुकाबला करने के लिए तैयार हो सकेंगे। इस कार्यक्रम की जानकारी  डॉ. वसुंधरा मिश्र ने दी।

रोहित पथिक की तीन कविताएँ

कवि रोहित प्रसाद पथिक स्थान: आसनसोल, पश्चिम बंगाल। प्रकाशन: कई प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ, कहानियाँ, पुस्तक समीक्षा व रेखाचित्रों का निरन्तर प्रकाशन। एक काव्य संग्रह ” ईश्वर को मरते देखा है !” हाल ही में प्रकाशित। संप्रति: अनुगूँज अर्द्धवार्षिक साहित्य पत्रिका के संपादक सम्पर्क: के. एस. रोड़ रेल पार डीपू पाडा क्वार्टर नम्बर:(741/सी), आसनसोल-713302( पश्चिम बंगाल) मोबाइल: 8101303434/8167879455 ईमेल: [email protected]
1
रेखाचित्र
कुछ लकीरें खींचने से
नहीं बनता है रेखाचित्र
वह
बन जाता है हमारा भविष्य ।
जिसे हम
धीरे-धीरे कागज़ पर उतार कर
रख सकते हैं
नहीं लिख सकते कोई मार्मिक कविता उस पर।
असल में
मैं मानता हूं कि
हर रेखाचित्र
एक कविता होती है।
2
  चित्रकार 
शुरू करूँ कैसे…?
क्योंकि
बंद मुट्ठी में मौजूद है कई रंग-बिरंगी दुनिया
कहूँ कैसे…?
अपने आप को रंगों में रंग कर।
एक चित्रकार तड़प रहा है
अपने सामने पड़े कैनवास को देख
वह सोच रहा है
क्या बनाऊँ कि बन जाएँ
एक स्वतंत्र न्यायालय
जिसमें सिर्फ और सिर्फ मेरी चित्रकारी की पेशी हो
और मैं न्यायधीश बनकर न्याय करूँ
अपने ही द्वारा बनाये गए चित्रों पर।
फिर सोचता हूँ
न्याय कर के भी मैं अन्याय ही करूँगा
क्योंकि मुझे नहीं पता
चित्रों के संविधान की भाषा
लौट जाता हूँ
निराश होकर उस गलियारे से
जहाँ आज भी मैं
फेंक आया हूँ मेरे अनगिनत कैनवास चित्र।
3
कविता बनाने की प्रक्रिया 
उपन्यास के साथ
एक गम्भीर मुलाकात
फिर वह बन गया लघु उपन्यास
गम्भीरता को ज़ेब में रखकर ही
मैं लिखता हूँ।
अब लघु उपन्यास में
मैं ज्यादा दिमाग़ लगाकर समझा
तो वह फिर कहानी बनता चला गया
कई बार तो मैं कहानी को पढ़कर
सिर्फ और सिर्फ हानि ही सहता हूँ,
क्या बताएं जनाब!
मेरा दिमाग़ कुछ ज्यादा ही
उपन्यासों की परिभाषा समझता है।
जब तक हम
गिरते हैं कहानियों की खाई में
तब तक एक दशक
हमारे जीवन में कई प्रश्न उठाते हैं?
अब जब कहानियाँ मुझसे असहमत होने के लिए
प्रार्थना करती है तब—
मैं लघुकथा की गोद में सो जाता हूँ,
तब तक लघुकथा मेड इन चाइना नहीं होता
वह होती है स्वदेशी
बिलकुल नशे की लत की तरह।
अन्त में
मैं लघुकथा की गोद से एकाएक जागता हूँ
तो ऐसा लगता है कि
लघुकथा अब टूकड़े-टूकड़े में बटकर
स्री के हर अंगों में समावेश हो चुकी है,
जिसे मैं
कविता बनने की प्रक्रिया मानता हूँ।

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कांकीनाड़ा आर्य विद्यालय का बेहतरीन प्रदर्शन

कांकीनाड़ा : उत्तर 24 परगना के कांकीनाड़ा आर्य विद्यालय (उच्च माध्यमिक) के विद्यार्थियों ने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक 2020 की परीक्षा में जबर्दस्त प्रदर्शन किया। स्कूल के प्रधानाध्यापक ने बताया कि इस बार 401 बच्चे परीक्षा में बैठे थे, उसमें से 162 छात्रों और 239 छात्राओं ने माध्यमिक परीक्षा दी थी। इसका पूर्ण अंक औसतन 92.76% रहा।
162 छात्रों में से 161 छात्र सफ़ल रहे,जिसमें से सूरज साव ने 606 नंबर(86.57%) हासिल कर विद्यालय का मान बढ़ाया और टॉपर बना। वहीं 598 नंबरों(85.43%) के साथ सुमित साव दूसरे और 593 नंबरों(85.43%) के साथ दीपंकर राजभर तीसरे स्थान पर रहे।
छात्राओं का प्रदर्शन भी शानदार रहा। 239 छात्राओं में से 211 छात्राएं सफ़ल रहीं। छात्राओं में 581 नंबर(83%) के साथ रितिका साव पहले स्थान पर,578 नंबर(82.57%) के साथ कुमकुम यादव दूसरे स्थान पर जबकि 551 नंबरों(78.71%) के साथ तनिशा कुमारी साव तीसरे स्थान पर रही।
स्कूल के टीचर इंचार्ज ने बताया कि इस बार कुल उच्च माध्यमिक की परीक्षा में 272 बच्चे बैठे थे, जिसमें से 92 छात्र और 180 छात्राएं थी। इसका पूर्ण अंक औसतन 90.44% रहा।
92 छात्रों में से 88 छात्र सफ़ल रहे,जिसमें से नितिश साव ने 456 नंबर(91.20%) हासिल किया और टॉपर बना।वहीं 454 नंबरों(90.8%) के साथ अनोज कुमार मंडल ने विद्यालय में दूसरा स्थान प्राप्त किया।छात्रों का पूर्ण अंक औसतन 92.39% रहा।
180 छात्राओं में से 158 छात्राएं उत्तीर्ण हुयी। छात्राओं में शारदा कुमारी सिंह ने 442 नंबरों(88.4%) के साथ टॉप किया। छात्राओं का पूर्ण अंक औसतन 87.77% रहा।

(निखिता पांडेय की रिपोर्ट)

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मित्रा डेनिम वेयर में पुरुषों के लिए अच्छे विकल्प भी हैं और छूट भी

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कैजुअल शूज 419 रुपये से शुरू, 75 प्रतिशत तक की छूट।

बंगाल: महिलाओं ने जलकुंभी से बनाई राखी

नदिया : पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) से जुड़ी महिलाओं ने जलकुंभी के फूलों से पर्यावरण अनुकूल राखियां बनाई हैं। संगठन के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
ईको क्राफ्ट नामक गैर सरकारी संगठन के सचिव स्वप्न भौमिक ने कहा कि अपनी तरह की इस अनोखी पहल में राखियों को रंगने के लिए रासायनिक रंगों का इस्तेमाल नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि माझदिया क्षेत्र में एक स्वयंसेवी संगठन के सदस्यों ने ऐसी चार सौ से अधिक राखियां बनाई हैं। भौमिक ने कहा कि देवाशीष बिस्वास नामक कारीगर ने तालाबों से जलकुंभी एकत्र की और उन्होंने महिलाओं को राखी बनाने का प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने कहा, “जलकुंभी के उन्हीं पौधों से राखी बनाई जा सकती है जिनके तनों की लंबाई कम से कम ढाई फीट हो। पौधों को धोया जाता है, पत्तियां अलग की जाती हैं और तनों को सुखाया जाता है। इसके बाद तनों के भीतर के रेशे को निकाल कर राखी बनाई जाती है।”
भौमिक ने कहा कि हावड़ा जिले में रेलवे मजदूर संघ ने सौ जलकुंभी राखियों का ऑर्डर दिया है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हुगली जिले में स्थित बंदेल और नदिया जिले में 150-150 राखियां भेजी गई हैं।
उन्होंने कहा कि आकार के हिसाब से राखियों मूल्य पांच, दस और 15 रुपये निर्धारित किया है। भौमिक ने कहा कि इससे पहले एनजीओ ने जलकुंभी से थैले और रस्सियां बनाई थी।