Monday, June 22, 2026
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जब संगीतकार मदन मोहन ने वादा किया कि उनकी हर फिल्म में लता ही गाना गाएंगी

इसे मदन मोहन की मौत के बाद भी निभाया गया
लताजी के राखी भाई की दिलचस्प कहानी:
रक्षाबंधन पर बनी बॉलीवुड की फिल्में और गाने अमर हैं। बॉलीवुड में कुछ रिश्ते भी इसी राखी की डोर से सदा के लिए बंध गए। ऐसा ही एक बंधन है स्वरकोकिला लता मंगेशकर और संगीतकार मदन मोहन का। मदन मोहन, लताजी के राखी भाई थे और उन्होंने अपनी बहन से वादा किया था कि उनकी हर फिल्म में वे ही गाना गाएंगी। रक्षाबंधन के मौके पर जानिए इस रिश्ते की कहानी, जिसके लिए लताजी को दिया वचन मदन मोहन की मौत के बाद भी निभाया गया। 12 नवंबर 2004 को रिलीज हुई यश चोपड़ा की फिल्म वीर-जारा मदन मोहन के संगीत से सजी आखिरी फिल्म थी।

इस तरह जुड़ा था भाई-बहन का रिश्ता
लता और मदन मोहन के रिश्ते के जुड़ने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। उस दिन रक्षाबंधन था। मदन मोहन इस बात से बेहद दुखी थे कि उनकी पहली फिल्म में लता मंगेशकर कोई गाना नहीं गा सकी थीं। मदन मोहन, लताजी को अपने घर ले आए और एक राखी देते हुए कहा- आज राखी है। इसे मेरी कलाई पर बांध दो। इसके बाद मदन मोहन ने लताजी को याद दिलाते हुए कहा- जब हम पहली बार मिले थे तब हमने भाई-बहन का ही गीत गाया था। आज से तुम मेरी छोटी बहन और मैं तुम्हारा मदन भैया। मैं वचन देता हूँ। आज से तुम अपने भाई की हर फिल्म में गाओगी।
मरने के बाद भी निभाया गया वादा
यतीन्द्र नाथ मिश्र की किताब ‘लता सुर गाथा’ में इस वाकये का जिक्र है। लता से किया हुआ वादा मदन मोहन की मौत के बाद भी पूरा किया गया। दरअसल जब 2004 में फिल्म वीर-जारा में मदन मोहन के कम्पोजिशन का इस्तेमाल किया गया तब फिल्म के सारे गाने लता मंगेशकर ने ही गाए थे और हर बार की तरह भाई-बहन की इस जोड़ी ने कालजयी गीतों की रचना कर दी।
लताजी को मदन भैया हमेशा याद आते हैं
लताजी ने पिछले महीने मदन मोहन की पुण्यतिथि पर भी एक इमोशनल ट्वीट करते उन्हें याद किया था। लताजी ने एक गाना शेयर करते हुए लिखा था- कुछ लोग दुनिया से जल्दी चले जाते हैं, लेकिन अपनों के पास हमेशा रहते हैं। इसी तरह मदन भैया उनके बच्चों के साथ और मेरे साथ हमेशा रहते हैं। हमेशा याद आते हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

किसानों को राहत : 4 माह तक कर सकेंगे लहसुन का संग्रहण

झालावाड़ : लहसुन की पैदावार होते ही उसे कम दामों में बेचने की बजाय अब 4 माह तक आसानी से संग्रहित किया जा सकता है। इसके लिए उद्यान विभाग में भंडारण संरचना के लिए योजना आई है। ओनियन रिसर्च इंस्टिट्यूट नागपुर ने लहसुन भंडारण की संरचना का डिजाइन बनाया है। इस डिजाइन को झालावाड़ में भी प्रयोग किया जा रहा है। कई किसान अब भंडारण सरंचना बनवाने के लिए कतार में लग गए हैं। हालांकि सरकार से दस किसानों के लिए ही सब्सिडी आने से बड़ी संख्या में किसानों को निराशा हाथ लगती है, फिर भी लहसुन किसानों के लिए यह काफी बेहतर साबित हो रहा है। लहसुन भंडारण संरचना बांस की बनती है। 12 फीट चौड़ाई और 45 फीट लंबाई की इस संरचना में ऊपर टिनशेड लगाते हैं, जबकि नीचे पूरा स्ट्रक्चर बांस का बनाया जाता है।
आसपास लोहे के एंगल लगाए जाते हैं, ताकि यह मजबूती से टिका रह सके। स्ट्रक्चर के अंदर की तरफ बांस की रैक बनाई जाती है, जिसमें लहसुन रखा जाता है। इन रैकों में हर तरफ से लहसुन को हवा लगती रहती है। इससे लहसुन खराब नहीं हो पाता है। करीब 4 माह तक यह आसानी से सुरक्षित रहता है।
इस दौरान बाजार में रेट बढ़ने पर किसान इस भंडारण स्कीम से बेहतर फायदा उठा सकते हैं। लहसुन भंडारण की लागत करीब 1 लाख 75 हजार रुपये आती है। यदि सरकार से सब्सिडी स्कीम में किसान का चयन होता है तो उसे 87 हजार 500 रुपए की सब्सिडी मिल जाती है। ऐसे में यह किसानों के लिए फायदे का सौदा है।
संभाग में सबसे अधिक लहसुन की पैदावार झालावाड़ जिले में ही होती है इसलिए लहसुन भंडारण स्ट्रक्चर बनवाने की डिमांड भी यहां सबसे ज्यादा है। लहसुन की पैदावार अधिक होने के चलते कई बार बाजार में इसके दाम इतने कम हो जाते हैं कि लागत भी नहीं निकल पाती है। ऐसे में यहां पर किसानों को आत्महत्या करने तक की नौबत आ जाती है।
अब भंडारण बनने से लहसुन का स्टोरेज लंबे समय तक हो पाएगा। ऐसे में बाजार दर बढ़ते ही किसानों को बेहतर फायदा मिल सकेगा। इस साल लहसुन 30 हजार 500 हैक्टेयर क्षेत्र में हुआ। यहां इस साल लहसुन का 1 लाख 58 हजार 600 एमटी उत्पादन हुआ है।
लहसुन भंडारण संरचना के लिए जिले में काफी कम लक्ष्य आए हैं। इससे यह किसानों की पहुंच से दूर है। इस साल केवल 10 किसानों के लिए ही लक्ष्य आया है। इसमें 5 सामान्य और 5 एससी एसटी को ही सब्सिडी मिलना है। ऐसे में उद्यान विभाग के पास बड़ी संख्या में किसान कतारों में खड़े हुए हैं।

अयोध्या में राम मंदिर :सरकारी दस्तावेजों में रामलला विराजमान बने 2.77 एकड़ भूमि के मालिक

बाबरी मस्जिद के पक्षकार अंसारी को भी भूमि पूजन का न्योता
अयोध्या : अयोध्या में पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भगवान राम के भव्य मंदिर की नींव रखेंगे। इससे पहले रामलला विराजमान अब सरकारी दस्तावेज में 2.77 एकड़ भूमि के मालिक बन गए हैं। जिला प्रशासन ने भूमि रामलला विराजमान के नाम से सरकारी दस्तावेजों में दर्ज कर दी है। वहीं, भूमि पूजन में शामिल होने के लिए 175 लोगों को निमंत्रण भेजा जा रहा है। सोमवार को बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से निमंत्रण सौंपा गया। इसके अलावा यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी आमंत्रित किया गया है।
अंसारी बोले- पीएम को रामचरितमानस भेंट करूंगा
इकबाल अंसारी ने कहा- यह धार्मिक नगरी है। यहां गंगा-जमुनी तहजीब कायम है। यहां कण-कण में देवता वास करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से सभी विवाद खत्म हो गए। देश के संविधान पर सभी मुस्लिमों को भरोसा है। मैं जरूर जाऊंगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रामचरित मानस भेंट करूंगा।

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रामलला विराजमान को 2.77 एकड़ जमीन को मालिकाना हक
रामलला विराजमान अब सरकारी दस्तावेज में 2.77 एकड़ भूमि के मालिक बन गए हैं। जिला प्रशासन ने राजस्व रिकॉर्ड में गाटा संख्या 159, 160, नजूल गाटा संख्या 583 में रामलला विराजमान को भूमि के स्वामी के तौर पर दर्ज कर लिया गया है। इसी बीच केंद्र सरकार ने जिस 70 एकड़ जमीन अधिग्रहण किया था, वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नाम पहले ही ट्रांसफर हो चुकी है। इसे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नाम दर्ज किया गया है।
लखनऊ के 111 चौराहों पर लगेंगे भगवान राम के चित्र
लखनऊ में राष्ट्रीय पर्व एवं उत्सव समिति द्वारा भूमिपूजन के तीन दिवसीय कार्यक्रम को हर्षोल्लास से मनाएगा। यहां 111 चौराहों पर भगवान श्रीराम के चित्र और झंडे लगाए जाएंगे। चौराहे को सजाने का काम आज पूरा कर लिया जाएगा। 5 अगस्त की शाम को दीपोत्सव का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

माटी का दर्द

दीपा गुप्ता

बचपन में मां की डाँट सुनकर भी
जिस माटी के साथ खूब खेला करते थे
आज बड़े हो जाने पर
उसी माटी से दूर भागता देख
कैसा महसूस करती होगी माटी

जिस माटी की रक्षा के लिए
सीमा पर खड़े रहते जवान
आज उसी माटी को
कचरे के ढ़ेर से सजा देख
कैसा महसूस करती होगी माटी

जिस मुर्ति की सुंदरता
खींच लाती लोगों को कहां कहां से
कुछ वक्त बाद उसी मुर्ति को
कभी नदी किनारे तो
कभी सड़क किनारे यूं ही पड़ा देख
कैसा महसूस करती होगी माटी

सोचा जरा
जिन हाथों मे माटी लेकर शपथ लेते
उन्हीं हाथों से अपनी ऐसी दशा होता देख
कैसा महसूस करती होगी माटी

बेलियाघाटा आईडी में तैयार होगा कोविड अनुसंधान केन्द्र

कोलकाता : राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी  के निर्देशानुसार महानगर स्थित बेलियाघाटा आईडी में कोविड (Covid) अनुसंधान केंद्र तैयार किया जाएगा। इसके लिए देश के साथ-साथ विदेशी विशेषज्ञों की भी राय ली जा रही है। भारत में कोविड अनुसंधान के लिए तैयार होने वाला यह पहला अस्पताल भी बनेगा। गौरतलब है कि सीएम ने बेलियाघाटा आईडी को कोविड अनुसंधान केंद्र अथवा सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने के लिए घोषणा की थी। रविवार को राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बेलियाघाटा आईडी को कोविड अनुसंधान केंद्र के रूप में तैयार होने में कुछ ही समय लगेंगे। आईसीएमआर को इस बाबत आवेदन किया गया है। वहाँ से हरी झंडी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।

(साभार – नयी आवाज डॉट कॉम)

टेलिफोनिक पढ़ाई के लिए टोल फ्री नम्बर जारी

कोलकाता : 9वीं व 10वीं के विद्यार्थियों के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के साथ मिलकर राज्य के शिक्षा विभाग ने दूरभाष से होने वाली पढ़ाई यानी टेलीफोनिक स्टडी के लिए टोल फ्री नंबर जारी किया है। यह नंबर 4 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। शिक्षा विभाग सूत्रों के अनुसार विद्यार्थी टोल फ्री नंबर 1800-123-2823 पर कॉल कर टेलीफोनिक स्टडी का लाभ उठा सकते हैं। फिलहाल इस नंबर पर 10-12 लाइनों की व्यवस्था की गयी है। बाद में मांग के अनुसार इसमें वृद्धि की जा सकती है। बताया गया है कि शिक्षा के इस नयी प्रणाली के सफल होने के बाद इसे अन्य कक्षाओं के लिए भी लागू किया जाएगा। विद्यार्थी सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर में 1 बजे तक व दोपहर 2 बजे से लेकर शाम को 4 बजे तक दिये गये टोल फ्री नंबर पर फोन कर प्रश्न पूछ सकते हैं।

राज्य ज्वाएंट इन्ट्रेंस परीक्षा के नतीजे 7 को

कोलकाता : पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा (डब्ल्यूबीजेईई) का रिजल्ट 7 अगस्त को घोषित होगा। राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने शनिवार को बताया कि (डब्ल्यूबीजेईई) का रिजल्ट ऑनलाइन घोषित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि डब्ल्यूबीजेईई बोर्ड द्वारा अनुमोदित केन्द्रों में अभ्यर्थी न केवल अपना परीक्षा परिणाम निःशुल्क देख सकेंगे बल्कि डाउनलोड भी कर सकेंगे। गौरतलब है कि इस साल गत 2 फरवरी को डब्ल्यूबीजेईई की परीक्षा हुई थी। इस बार कुल 88,800 अभ्यर्थियों ने जेईई की परीक्षा दी थी। 6 महीने के अंतराल पर WBJEE का परिणाम घोषित होने जा रहा है।

(साभार – नयी आवाज डॉट कॉम)

बता दीजिए कि हवाओं पर मालिकाना हक नहीं चला करते…..

लड़कियाँ बड़ी सन्तोषी होती हैं…जरा सा प्यार मिल जाए…कोई हँस के दो मीठे बोल भी बोल दे तो बस सब कुछ हार जाती हैं…क्यों हार जाती हैं..? नहीं हारना चाहिए उनको..इस व्यावहारिक दुनिया में सन्तोष कर लेना अच्छी बात नहीं है। जो आपका है, उसे आपके पास होना चाहिए…उस पर आपका अधिकार होना ही चाहिए….हम भंवर में फँसी रह जाती हैं तो इसकी वजह क्या है…असुरक्षा? रिश्ते बचाने के चक्कर में हम अपना अपमान क्यों सह लेती हैं….क्यों गलत को सही मान लेती हैं और अपराध को परिस्थिति का जामा पहना देती हैं…क्यों…कहीं न कहीं क्या हम जिम्मेदार नहीं हैं कि हमारे साथ गलत होता आया और हमने गलत करने वाले को सम्मान दिया…क्यों दिया? नतीजा क्या हुआ…हमारी खामोशी को लोग कमजोरी समझते रहे और हमें प्रताड़ित करना अपना अधिकार…हमारे साथ अन्याय इसलिए हुआ क्योंकि हमने अन्याय होने दिया…।
जब हमारे सामने भाई की थाली में घी से चुपड़ी रोटी दी गयी तो हमने कभी नहीं कहा कि इस रोटी पर हमारा भी अधिकार है…जब हमारे दहेज की तैयारी करने के लिए जमीन गिरवी रखी जाने लगी तो हमने यह स्वीकार किया क्योंकि समाज में परिवार की नाक रखनी थी…पर ये कभी नहीं कहा कि हमें पढ़ना है…आगे बढ़ना है…ये हमारा अधिकार है। जब हमें किसी ने छेड़ा तो हम कभी साथ नहीं आयीं….छेड़ने वाले के कारण हम घरों में कैद होती चली गयीं…किसी ने हमारी पढ़ाई छुड़वा दी तो मन मसोस कर रह गयीं…हमारी किताबों में आग लगाने की बात कहने वालों को हमने सम्मान दिया…यही तो गुनाह है…कभी सोचा है कि कम उम्र में माँ – बाप की इज्जत की खातिर अपने सपनों की बलि चढ़ाने के बाद हमें क्या मिला है….हमने गलती की है…कि हमने हमेशा खुद को नीचे रखा है…सबसे नीचे..और वह हमें धकेलते चले गये….हमें कैद कर देना….उनको अपना अधिकार लगने लगा…जब हम आगे बढ़े तो हमारी नौकरी उनकी प्रतिष्ठा और वर्चस्व के लिए खतरा बनने लगी…उन्होंने षडयंत्र किया और हमने मान लिया कि यही होता है…कभी नहीं पूछा कि ऐसा क्यों होता है…क्यों होना चाहिए…,,ये बहनें ही होती हैं जो आपकी सलामती के लिए दुआ करती हैं…गलत करती हैं….उनकी अपनी रक्षा के लिए आत्मनिर्भर बनना चाहिए…कोई किसी की हिफाजत नहीं करता…वह दरअसल खुद को बचाता है…। उन्होंने कह दिया कि हम प्रेम नहीं कर सकतीं और हमने मान लिया कि हमारे पास दिल है…हम भूल जाएँ…ये गलत है….किसी और की खुशी के लिए उसका दिल तोड़ा जो हमें इन लोगों से ज्यादा चाहता रहा होगा….आप इसे बलिदान कहते हैं…हम इसे खून कहते हैं…अपनी हत्या करना भी पाप है…किसी और के लिए आपने अपने प्रेम का गला घोंटा…ये गलत किया…कोई अपनी प्रतिष्ठा के लिए आपकी बेटी को मारता – पीटता रहा है औऱ उसकी कटी गर्दन लेकर हर जगह घूमता रहा औऱ आप खामोश रहीं…ये आपने गलत किया….किसी ने अपनी हवस के लिए किसी की अस्मत नोंच डाली और आप उसे राखी बांधती रहीं…आपने एक अपराधी का साथ दिया…अपराधी को साथ नहीं सजा मिलनी चाहिए…सजा मिलेगी तभी….सबक मिलेगा…ऐसे क्यों नहीं सोच पातीं हम लड़कियाँ? आपके पति के पीछे लड़कियाँ पड़ी हैं और आप लड़कियों के पीछे पड़ी हैं….कहीं ऐसा तो नहीं कि आपका पति लड़कियों की मजबूरी का फायदा उठा रहा हो..। आप जानती हैं कि आप जिसे दिल दे बैठी हैं औऱ आपको उम्मीद है कि तलाक के बाद वह आपका होगा….आप अपने फायदे के लिए औऱ अपनी सुरक्षा के लिए उसे नहीं छोड़ रहीं तो आप भी अपराधी हैं….ऐसे क्यों नहीं सोच पाती प्रेमिकाएँ और पत्नियाँ? वह हाथ उठाता है तो चुप क्यों रह जाती हैं लड़कियाँ?
जब भाई सम्पत्ति के लिए लड़ते हैं तो इस समाज को पाप नहीं लगता तो बहनें जब अपना हिस्सा माँगती हैं तो यह सम्मान का प्रश्न क्यों बन जाता है? क्या यह ज्यादा बेहतर नहीं होगा कि उसे दहेज में बरतन औऱ ससुराल को सजाने का सामान देने की जगह उसे पैतृक सम्पत्ति में अधिकार मिले जिससे वह आत्मनिर्भर रह सके? अपना काम शुरू कर सके…आड़े वक्त में अपनी मदद कर सके…मगर आप ऐसा नहीं करते क्योंकि आपको तो बहनों को टरकाना होता है…और आपकी पत्नियों को ननदें आँख का काँटा लगती हैं…क्योंकि बहनों का होना होना उनके बच्चों के भविष्य की राह का रोड़ा समझा जाता है.. हम लड़कियाँ कभी अपने लिए आवाज क्यों नहीं उठातीं…अब तो सेना में भी लड़कियों को स्थायी कमिशन मिल गया है…यानी देश की सीमा पर भी हम लड़कियाँ देश की रक्षा करेंगी तो आप हमारे हाथ में रक्षा सूत्र क्यों नहीं बाँधते…कभी हमारी सलामती के लिए आप भी भूखे रहिए….हमें आपके रुपये…पैसे…नहीं चाहिए….इनसे क्या आप हमारी गुजरी हुई जिन्दगी का मुआवजा दे सकेंगे? लौटा सकेंगे…हमारा वह वक्त. जब हम भी अपनी कम्पनी के निदेशक हो सकते…? आपने तो हमारे पोस्टर फाड़कर फेंक दिये…जिसे हमने अपनी मेहनत से तैयार किया था…हम आपसे किस मायने में कम हैं….ये खुलकर क्यों नहीं कहती लड़कियाँ…क्यों बार – बार कहती हैं कि मम्मी – पापा नहीं मानेंगे…भाई निकलने नहीं देगा…कभी भाई के सामने तो बहनें यह परिस्थिति नहीं लायीं…कि बहनें नहीं निकलने देंगी…कहीं सुना है? आप बहनों के नाम पर शो – पीस क्यों चाहते हैं…? क्यों चाहते हैं कि हम आपकी नाक के लिए अपनी हर खुशी आपके नाम कर दें…क्यों….? बताइए न क्यों….? एक मायके से रिश्ता रखने के लिए अपने अधिकार क्यों खो देती हैं हम लड़किया? क्यों मान लेती हैं कि हमें कुछ नहीं चाहिए…एक बार कहिए कि चाहिए…हमें….अपना अधिकार चाहिए…।
आज तक कभी सुना है कि बाप का कमरा ही बेटे का कमरा होता है? तो फिर माँ का कमरा बेटी का कमरा ही कैसे हो सकता है? अपने हिस्से का कमरा क्यों नहीं चाहतीं हम लड़कियाँ? आज हम अपने लिए माँगेंगे तो कल समाज खुद देना सीखेगा…स्वीकारना सीखेगा कि लड़कियाँ माँ की छाया नहीं होतीं….गाय नहीं होतीं…पराया धन नहीं होतीं…..उनको दान नहीं किया जा सकता…अगर पुत्र दान नहीं स्वीकार है तो अपना दान कैसे स्वीकार कर सकती हैं हम लड़कियाँ? हम सिर्फ रसोई के अन्दर क्यों रह जाती हैं…क्यों नहीं कहतीं कि हमें टेनिस भी खेलना है औऱ ड्राइविंग भी करनी हैं…क्यों कभी भाई अपनी बहनों की थाली में रोटी नहीं डाल सकता…क्यों उम्मीद की जाती है कि घरों में काम करने के लिए लिए कोई लड़की ही आगे बढ़े…क्यों लड़कों का काम करना माँओं को अपराध लगता है? क्यों माएँ अपने बेटों को बहुओं के लिए तैयार नहीं करतीं….क्यों उसके एक गिलास पानी ले लेने से खुद धन्य समझने लगती हैं..कब समझेंगी हम कि हम मनुष्य हैं…किसी की छाया नहीं. परछाई नहीं…हमारा अपना अस्तित्व है। हमारा अस्तित्व, जिसे हमसे कोई नहीं छीन सकता…क्यों इतनी सन्तोषी होती हैं हम लड़कियाँ…क्यों अपना हक छोड़ देती हैं हम लड़कियाँ?

माँगिए जो आपका है….क्यों आपके पास होगा..तभी तो आप दे सकेंगी…माँगिए क्योंकि जिस घर में आपने जन्म लिया है….वह आपका भी है…आपके बाद आने वाली किसी भी औरत और उसके बच्चों से ज्यादा….किसी को इजाजत नहीं होनी चाहिए कि वह आपके कमरे को आपसे छीन ले….माँ का कमरा ही आपका कमरा नहीं है…आपका कमरा…आपका कमरा है…आपका घर आपका घर है…आप किसी भी घर से ज्यादा जरूरी हैं….मत लीजिए किसी से कोई वचन कि वह आपकी रक्षा करेगा…आप खुद अपनी रक्षा कीजिए और जरूरत पड़े तो उसकी भी, जो आपकी रक्षा करने के दम्भ में जी रहा है और खुद को आपका मालिक समझ रहा है….बता दीजिए कि आप हवा हैं….आजाद आसमान हैं…..। बता दीजिए कि हवाओं पर मालिकाना हक नहीं चला करते…..जो हक चलाता है, वह टूटी डाल की तरह गिरता है और हवाओं पर हक जताने वालों के गिरने का समय है। आइए…उड़ जाती हैं हम लड़कियाँ..क्यों कि हमसे ही दुनिया है..हमसे ही जमीन है और हमसे ही आसमान है।

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हाशिए के प्रश्न को केंद्र में लाने वाले लेखक हैं प्रेमचंद

प्रेमचंद स्मृति व्याख्यानमाला का हुआ आयोजन
कोलकाता : खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा ‘प्रेमचंद स्मृति व्याख्यानमाला’ का आयोजन 30 जुलाई को किया गया। प्रेमचंद के  जयंती पर केंद्रित यह व्याख्यानमाला पिछले कई वर्षों से आयोजित हो रहा है। 140वीं  जयंती के अवसर पर ‘हाशिए के प्रश्न और प्रेमचंद’ विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर आमंत्रित वक्ता डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि प्रेमचंद का रचना संसार  मानव जीवन का आख्यान है ।प्रेमचंद ने दबे हुए संदर्भों को केंद्र में लाया ।औपनिवेशिक सत्ता की साम्राज्यवादी चालाकियों को प्रेमचंद ने बेनक़ाब करते हुए सामंतवाद के साथ उनके गठबंधन पर  जमकर प्रहार किया है।वे हाशिए पर चले गए किसानों  -मजदूरों, स्त्री, राष्ट्र, दलित और भाषा के प्रश्न को राष्ट्रीयता की परियोजना और सामाजिक क्रांति से जोड़कर केंद्र में स्थापित किया । उन्होंने किसानों  को राष्ट्रीय चरित्र के रूप में गढ़ने का महत्वपूर्ण काम किया ।कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुबीर कुमार दत्ता के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने हिंदी विभाग की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह विभाग निरंतर साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए विद्यार्थियों को मंच प्रदान करता है ।उन्होंने कहा कि हमें प्रेमचंद से बहुत कुछ सीखना है ।
विभागाध्यक्ष डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने व्याख्यानमाला की प्रयोजनीयता को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह आयोजन प्रेमचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करने का मंच है।इस मंच से हम प्रेमचंद के मूल्यों को विद्यार्थियों तक प्रेषित करते हैं ।विद्यार्थी प्रेमचंद के साहित्य पर विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां करते हैं ।इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों ने ‘प्रेमचंद के पात्र बोलते हैं ‘ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रेमचंद के साहित्य के प्रमुख पात्रों के जरिए संवाद शैली में अभिनयात्मक पाठ किया । विद्यार्थियों ने प्रेमचंद के कफ़न, सवा सेर गेंहू, सद्गति, बूढ़ी काकी, बड़े घर की बेटी आदि कहानियों के किरदारों के प्रमुख संवादों पर प्रभावी प्रस्तुति की। प्रस्तुति के दौरान श्रोताओं को कहानी एवं पात्रों का नाम बताना था। श्रोताओं ने भी इसमें जमकर हिस्सा लिया ।इसमें सौरभ केशरी, ज्योति मिश्रा, उजाला यादव, निशा साव, प्रीति साव, प्रीति गुप्ता, नंदनी साव, सिमरन जैसवारा, साक्षी झा, सीमा प्रजापति, अभिनव प्रसाद, बिन्दी चौधरी और विशाल दास ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में
कोलकाता और अन्य शहरों के शिक्षक, साहित्यप्रेमी एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया ।
कार्यक्रम का संयोजन एवं सफल संचालन ककरते हुए प्रो. मधु सिंह ने कहा कि भारत की आत्मा के लेखक थे प्रेमचंद । धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राहुल गौड़ ने दिया ।