कोलकाता : प्रो. आनन्द मोहन चक्रवर्ती का निधन हो गया है। वे अमेरिका की इलिनॉएस यूनिवर्सिटी में डिस्टिंग्वस्ड प्रोफेसर थे। वर्ष 2013 में 100वें इंडियन साइंस कांग्रेस के दौरान भारत आये थे। वे भारतीय अमरीकी माइक्रोबायोलॉजिस्ट, वैज्ञानिक, शोधकर्ता थे। उनको प्लासमिड ट्रान्सफर के जरिए जेनेटिक तरीके ऑर्गेनिज्म विकसित करने के लिए जाना जाता है। इसके बाद माइक्रो ऑर्गनिज्म पर आगे चलकर कई पेटेंट हुए और उनको दुनिया में ख्याति मिली।
शख्स, जिसने स्पर्श से धीरूभाई अम्बानी को भी स्वस्थ कर दिया
आध्यात्मिक स्पर्श उपचार एक अकथनीय घटना है जो किसी भी वैज्ञानिक प्रणाली और प्रक्रियाओं से आगे की बात करती है। हैरत इस बात की है कि यह उपचार कोई डॉक्टर नहीं आम इन्सान कर रहा है और बहुत से लोगों को पीड़ामुक्त कर चुका है। स्पर्श से प्रभावित भाग में गर्मी पैदा होती है। दावा है कि इसके परिणामस्वरूप मरीज को उम्र भर दर्द और कठोरता से राहत मिलती है। यह शख्स हैं मोहन जोशी, जो डॉक्टर नहीं है और न ही भगवान का कोई अवतार। जोशी का कहना है कि वर्षों पहले उनको एक आध्यात्मिक गुरु से यह पता चला था कि वास्तव में उन्हें विशेष शक्तियां प्रदान की गई थीं, जो सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, रुमेटीइड आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस जैसे मामलों में राहत दिला सकती थीं। शुरुआत उन्होंने एक दोस्त के कहने पर उसके उपचार से की और निःशुल्क चिकित्सा प्रदान करने लगे।
उनका कहना है कि यह चिकित्सा प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत सस्ती और सुलभ है। इस आध्यात्मिक उपचार चिकित्सा से लाभान्वित होने वााले लोगों की सूची लम्बी है। इनमें प्रमुख उद्योगपति, लेखक, अभिनेता, सीए, अधिवक्ता शामिल हैं और सूची जारी होती है। आध्यात्मिक उपचार गठिया, लूम्बेगो, वैरिकाज़ नसों की सूजन, ब्रोंकोस्पज़म, ऑस्टियोपोरोसिस, स्पॉन्डिलाइटिस, पक्षाघात, पेट में ऐंठन, जमे हुए कंधे, सिर का चक्कर, तनाव, अनिद्रा जैसी कई अन्य बीमारियो में कारगर है। भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त हो चुके जोशी स्पर्श चिकित्सा की शक्ति को एक निस्वार्थ कार्य मानते हैं। जोशी 1982 से मुम्बई में आध्यात्मिक उपचार का अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने तब से अब तक लाखों रोगियों का इलाज किया है। लगभग 40 प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं ने उनके उपचार कार्य को गति दी है। उनका कहना है कि अपनी चिकित्सा से उन्होंने धीरूभाई अम्बानी, दिवंगत नेता बलराम जाखड़ तक का इलाज किया है। अम्बानी के शरीर के दाहिने हिस्से में लकवा मार गया था, जोशी के उपचार से ठीक हुए। हालाँकि वे यह भी स्वीकार करते हैं कि यह उपचार प्रणाली राहत देती है, पूर्णतया समाधान नहीं है। कोलंबो में प्रसिद्ध विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें “डॉक्टर ऑफ साइंस” की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने भारत के कई शहरों जैसे मुंबई, बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, सूरत, नवसारी, भोपाल, इंदौर, मदुरै, कोयम्बटूर, पोलाची आदि में चिकित्सा शिविरों में भी भाग लिया है। फिलहाल उनको इस काम में उनकी बेटी से मदद मिल रही है। दिल्ली के हौज खास में उन्होंने एक दिन में 125 मरीजों का उपचार किया।
अब मोहन जोशी यौगिक हीलिंग और उससे जुड़ने की चाह रखने वालों की सहायता करना चाहते हैं। अगर आप भी सीखना चाहते तो आप उनसे उनकी वेबसाइट पर सम्पर्क कर सकते हैं।
कॉलेजों में दाखिले की दौड़ को मुश्किल करेगा प्राप्तांक
कोलकाता : इस वर्ष उच्च माध्यमिक की परीक्षा के दौरान कोरोना वायरस का कहर बरपा और लॉकडाउन की वजह से परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया। कुल 14 ऐसे विषय थे, जिनकी परीक्षा नहीं हो सकी। इस वजह से विद्यार्थियों को अन्य वर्षों की तुलना में प्राप्तांक तो ज्यादा मिले लेकिन इससे उनकी समस्याएं आसान नहीं होने वाली हैं। अब तक सीबीएसई और सीआईएससीई काउंसिल की परीक्षाओं में अधिक प्राप्तांक के कारण अच्छे कॉलेजों में दाखिले के लिए विद्यार्थियों के बीच होड़ मच जाती थी। अब ऐसी ही परिस्थिति पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यार्थियों के बीच भी बनने वाली है।
हालांकि उच्च माध्यमिक काउंसिल के एक अधिकारी का कहना है कि सामान्य स्नातक कोर्सों के अतिरिक्त टेक्निकल और पेशेवर कई कोर्स हैं। इसलिए विद्यार्थियों को दाखिला मिलने में अधिक समस्या नहीं होनी चाहिए। दूसरी तरफ लेडी ब्रेबॉर्न कॉलेज की प्रिंसिपल शिउली सरकार का कहना है कि उच्च माध्यमिक स्कूलों की तुलना में राज्य में कॉलेज-विश्वविद्यालयों की संख्या काफी कम है। इसलिए अधिक प्राप्तांक का अधिक फायदा विद्यार्थियों को नहीं मिलने वाला। हाँ, अधिक अंक मिलने का एक नुकसान विद्यार्थियों को जरुर होगा कि स्नातक या स्नातकोत्तर विषयों में अधिक अंक नहीं मिलते हैं। खासकर कला विभाग में तो बहुत कम मिलते हैं। अंकों के अचानक कम हो जाने से विद्यार्थियों की मानसिक अवस्था पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि उच्च माध्यमिक की परीक्षा में अंक प्रदान करते समय यदि थोड़ा सोच-विचार किया जाता तो ज्यादा अच्छा होता। प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के अध्यापक गांधी कर ने कहा, ‘हमारे विश्वविद्यालय में यदि कोई विद्यार्थी रसायन विषय में दाखिला लेना चाहता है तो उसका प्राप्तांक रसायन में 75 प्रतिशत होने के साथ-साथ कुल प्राप्तांक भी कम से कम 75 प्रतिशत होना अनिवार्य है। इसलिए कई बार तो ऐसा भी देखा जाता है कि विद्यार्थी को उच्च माध्यमिक में तो बहुत अधिक प्राप्तांक मिला है, किन्तु प्रवेश परीक्षा में वह सफल नहीं हो पाता है।’ वहीं जादवपुर विश्वविद्यालय के अध्यापक श्यामंतक दास का कहना है कि इस वर्ष तो प्रवेश परीक्षा आयोजित करना संभव नहीं है। इसलिए प्राप्तांकों के आधार पर ही दाखिला देना होगा। ऐसे में कुल प्राप्तांक की तुलना में बांग्ला, अंग्रेजी, हिन्दी आदि भाषा विषयों के प्राप्तांक पर अधिक जोर देना होगा।
कोरोना काल के बाद न्यू नॉर्मल पर शिव खेड़ा का वक्तव्य
कोरोना काल के बाद न्यू नॉर्मल पर क्या कहते हैं प्रेरक वक्ता शिव खेड़ा
आनन्द महिन्द्रा से सीखें असफलता से निपटने के तरीके
डॉ. अभय गेरे, मुख्य नवाचार अधिकारी, एमएचआरडी ने महिंद्रा समूह के अध्यक्ष, श्री आनंद महिंद्रा के साथ बातचीत की …
विषय: – अफलता को कैसे संभालें?
कोरोना महामारी और वैश्वीकरण के बीच हम
प्रीति साव
कोरोना वायरस जैसी महामारी की शुरुआत दिसम्बर से चीन के वुहान शहर से शुरू हुई लेकिन अब इसका प्रभाव पूरे देश भर में फैल चुका है पूरे विश्व में एक बहुत ही भयावह परिदृश्य बन गया है ।अब इस संकट की स्थिति में पूरे विश्व को गाँव बना देने की अवधारणा और वैश्वीकरण पर बात होनी लाजिमी है ।इस महामारी ने हमारे वैश्वीकरण को मजबूत किया है या कमजोर कर दिया ,इस पर विचार-विमर्श करना हम सबके लिए जरूरी हैं ।
व्यवसाय – कोरोना महामारी से वैश्वीकरण पर इतना नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिनके कारण कमजोर होने की तरफ अपने वैश्वीकरण को देख रहे है और इसके साथ ही हम एक विषय पर भी गौर कर सकते है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ा है। लाॅकडाउन के कारण कितनी कम्पनियाँ बंद कर दी गयी ,कितने लोग बेरोजगार हो गये । कोरोना काल में अर्थव्यवस्था में हुई इस हानि का आकलन तो यह समय बीत जाने के बाद ही होगा।
महिलाएँ – महिलाओं के लिए तो कोरोना उनकी मुसीबतें बढ़ाने वाला ही साबित हुआ है। इस महामारी से घरेलू हिंसा में भी वृद्धि हुई। जब से यह कोरोना फैला है तब से अब तक इतिहास गवाह रहा है कि युद्ध हो या महामारी हो सबसे ज्यादा महिलाओं को प्रभावित कर रही है, लेकिन यहाँ यह महामारी महिलाओं एवं पुरुषों सभी को प्रभावित कर रहा है । यह कोरोना के कहर में आधी से ज्यादा आबादी संघर्ष कर रही है ।कोरोना के कहर के कारण जहाँ एक ओर इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेसिंग की सलाह दी जा रही है, तो वही दूरी ओर लाॅकडाउन के चलते करोडों लोग अपने घरों में कैद है जिसके चलते घरेलू हिंसा बढ़ती जा रही है ।
अर्थव्यवस्था – वहीं कोरोना वायरस के दौरान हम आत्मनिर्भर बन रहे हैं ।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने खुद ऐसे संकेत दिए हैं कि बदलाव आने वाला हैं। हाल ही में उन्होंने देश के सरपंचों से हुई वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोरोना संकट ने एक नया भारत ऐसा महान देश कई सदियों से यह विचार बना रहा था कि हम आत्मनिर्भर बनें।लेकिन आज यह वायरस के दौरान अर्थव्यवस्था को खड़ा करने के लिए हमें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया हैं। हमारा भारत अब एक नयी दिशा की ओर बढ़ने के लिए तैयार हो रहा हैं।आज जैसे कि चीन की परिस्थिति है, उस आधार पर हम कह सकते हैं कि इस तरह से हमारा भारत नई-नई चीजों का आविष्कार करेंगा और हमारा भारत आगे बढ़ेगा साथ ही साथ आत्मनिर्भर भी बनेंगा ।
श्रमिक – इस महामारी के आने से प्रवासी श्रमिकों को बहुत कठिन समय का सामना करना पड़ा है। एक जगह से वह दूसरे जगह पलायन कर रहें हैं ,बहुत ही कठिनाइयों के साथ इनका इस समय जीवन व्यतीत हो रहा हैं। जो निवासी ग्रामीण व्यक्ति है, उनको शहरों में इस महामारी के कारण भी कोई साधन या माध्यम उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिनके कारण उन सभी श्रमिकों को अपने गाँव जाना पड़ा। वह मजदूर जो शहरों से गाँव आ रहे थे। वे अपनी कुछ वस्तुओं को सिर एक बोझ की तरह रख कर कड़कती धूप में नंगे पाँव अपने-अपने गाँव जाने के लिए निकल पड़े।। इन सभी मजदूरों को शहर में लाॅकडाउन होने के कारण उन्हें विभिन्न कठिन परिस्थितियों से जूझना पड़ा।
शिक्षा – हम सब इस विषय पर भी ध्यान देंगे कि इस महामारी के कारण ऑनलाइन कक्षाएँ शुरू हुईं। एक तरफ हम देखते हैं कि बच्चों के लिए यह खुशी की बात है कि स्कूल बंद है ,स्कूल बंद होने पर भी पढ़ाई चल रही है लेकिन दूसरी तरफ नजर डालें तब यह दिखता है कि बच्चों के लिए कम उम्र से ही चार-पांच घण्टे फोन में लगे रहना बहुत ही घातक साबित हो सकता है आगे चल कर उन सबके मानसिकता पर प्रभाव बुरा पड़ सकता हैं। इस समय यह वायरस का बहुत अधिक फैल जाने के कारण जो ऑनलाइन कक्षाएँ शुरू हुई है ,वहाँ पाठ्यक्रम से सम्बन्धित सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है लेकिन बात यह भी हैं कि स्कूल, काॅलेज बंद है, लेकिन फिर भी बच्चों को इस ऑलाइन माध्यमों से एक लय में रखने के लिए मदद मिल रही हैं । शिक्षकों को घर बैठे पाठ्यक्रम ऑनलाइन माध्यमों से व्यवस्थित करने में दिशानिर्देश दिए जा रहें है। बच्चों को व्हाट्सअप और स्काइप के जरिए वर्कशीट भेजकर बच्चों को होमवर्क दिया जा रहा है। शिक्षक छोटे-छोटे वीडियो बना कर भेज रहे हैं । यह सब जो रहा है, लेकिन इसका भी एक माध्यम है, जो वह है स्मार्टफोन । यह स्मार्टफोन के माध्यम से ही सब सम्भव है,लेकिन एक बात और उन सब बच्चों को सोचिए जिनके पास ऐसा कोई माध्यम उपलब्ध नहीं है, वो सभी अपनी इन कमियों को कैसे पूरा करेंगे । महामारी ने हमारी चुनौतियाँ बढ़ा दी हैं।कुछ माध्यम हैं भी तो वह सबके पास उपलब्ध नहीं हैं ।
वैश्विक सम्बन्ध – हमारे वैश्वीकरण की संरचना पर ही पूरी दुनिया यानी गरीब से अमीर तक सभी वर्ग निर्भर है। हम कह सकते हैं कि वायरस के कारण वैश्विक स्तर पर माँग और आपूर्ति पर असर पड़ना स्वाभाविक है । वैश्वीकरण के कई वर्षो बाद तमाम अर्थव्यवस्थाओं के बीच विनिर्माण, व्यापार और पर्यटनके सम्बन्ध मजबूत हुए है। इसका मतलब यह है कि एक हिस्से में उपजा संकट आसानी से हज़ारो मील दूर तक फैल सकता हैं। अगर इसी तरह इस वायरस से संक्रमित लोगों कि संख्या बढ़ती गई तब हमारे देश के लिए इस महामारी से भी खतरनाक हमारा वैश्वीकरण होगा। “हमारे देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्वीकार किया है कि कोरोना के सर्वव्यापक असर के कारण पूरा विश्व समुदाय इस निष्कर्ष पर पहुंच गया हैं कि यदि दुनिया के किसी भी भाग में लोगों के स्वास्थ पर संकट आता हैं, तो उसकी चपेट में पूरा विश्व आ सकता हैं। श्री रामनाथ कोविंद का यह वक्तव्य महत्वपूर्ण है कि स्वास्थ वैश्वीकरण की दिशा में अग्रसर होंगे।” वैश्वीकरण जैसा कि हम कह सकते हैं कि इसका प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों है। एक व्यक्तिगत स्तर पर और दूसरा मानव के जीवन और जीवन की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करती हैं लेकिन यह कोरोना महामारी वैश्वीकरण के दोनों प्रभावों को कमजोर कर रही है ।
पर्यावरण – कोरोना काल के वायरस के पहले जैसी स्थिति थी हमारा पर्यावरण सब कुछ तहस-नहस हो जाता। कोविड-19 के पहले हमारा पर्यावरण बहुत ही प्रदूषित था। चारों तरफ प्रदूषण ही प्रदूषण, वाहनों से निकले धुएं,चिमनियों से अन्य कई चीजों से फैला प्रदूषण हम सब मनुष्यों के लिए बहुत ही घातक साबित होता। कोविड-19 के पहले हम सबको साँस लेने में समस्या होती थी स्वच्छ हवा नहीं मिल पाती थी, यह हम मनुष्यों के स्वास्थ के लिए बहुत ही हानिकारक होता । नदी, झील,तालाब यह सब कोविड-19 के पहले बहुत गंदे और प्रदूषित थे । पशु -पक्षी सब लुप्त हो रहे थे। कोरोना काल का लॉकडाउन न हुआ होता तो हमारी सृष्टि के लिए बहुत ही घातक और भयावह जैसी स्थिति आने वाली होती।
नकारात्मक स्थितियों में कोविड-19 के आने के बाद जो सकारात्मक प्रभाव पड़ा है ,वह हमारे पर्यावरण के लिए बहुत ही लाभान्वित हैं ।यह कोरोना महामारी दुनिया के लिए विकट परिस्थितियाँ है ही, लेकिन अभी हमारा पर्यावरण जैसा हुआ है ऐसा हो जाना कभी भी अनुमान नहीं लगाया जा सकता था ।इस वक्त इस महामारी के समय हमारा पर्यावरण शुद्ध, स्वच्छ और निखर गया है। लाॅकडाउन होने से हमारा पर्यावरण का स्वच्छ हो जाना,हम सबके लिए खुशी की बात है।जो पक्षियां कुछ समय पहले लुप्त हो चुकी थी, अब उनकी झलक देखने को भी मिल रही है नदी , झील, तालाब का पानी सब इतना स्वच्छ हो गया है कि इनके पानी पीने के योग्य हो चुके हैं । उन चिड़ियों की चहचहाट, हवां का साफ हो जाना ,कोयलों की मीठी-मीठी आवाजे सभी खिल उठी हैं , मानो हमारा प्राकृतिक में एक निखार सा आ गया है ।
“महामारियां तो आयी है,
लेकिन प्रकृति में निखार भी लायी है “
उच्च माध्यमिक परीक्षा में रिकॉर्ड प्रदर्शन, 90.13 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल
कोरोना संकट व लॉकडाउन के कारण इस वर्ष 3 दिन की कुल 14 विषयों की परीक्षा नहीं हो पाई थी। इसके कारण इस बार जिन विषयों की परीक्षा हुई थी उनमें जिस विषय में सर्वोच्च नंबर मिला था वही नंबर रद्द हुई परीक्षा के बदले दिया गया। इस साल रिकॉर्ड 90.13 फीसद विद्यार्थी पास हुए हैं जो पिछले साल उत्तीर्ण 86.29 फीसद की तुलना में करीब 4 फीसद अधिक है। पश्चिम बंगाल काउंसिल ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन की अध्यक्ष महुआ दास ने परीक्षा परिणाम जारी करते हुए कहा कि 12वीं बोर्ड के इतिहास में इस बार सबसे बेहतर रिजल्ट है।
सर्वर ठप, परेशान रहे परीक्षार्थी
रिजल्ट जारी होने के तुरंत बाद ही सर्वर डाउन हो गया और विद्यार्थी अपना परीक्षा परिणाम जानने के लिए विभिन्न वेबसाइटों के चक्कर काटते रहे। वेबसाइट पर “उच्च माध्यमिक का रिजल्ट” लिंक पर क्लिक करने पर ‘आवश्यक कार्यों के कारण वेबसाइट पर रिजल्ट जारी नहीं किया जा रहा है’, यह जानकारी दी जा रही थी। परीक्षा परिणाम जानने को लेकर हर विद्यार्थी के मन में एक अलग ही कौतूहल होता है। ऐसे में रिजल्ट की जानकारी देने वाले सर्वर के डाउन होने से विद्यार्थी काफी परेशान हुए। हालांकि देर शाम वेबसाइट का सर्वर सही से काम करने लगा था और विद्यार्थी अपना रिजल्ट भी देख पा रहे थे।
वैज्ञानिकों को मिली बड़ी कामयाबी, खराब फेफड़ों को 24 घंटे में दोबारा किया जिंदा
नयी दिल्ली : फेफड़ों की बीमारी मानी जा रही कोरोना के बीच वैज्ञानिकों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। कुछ वैज्ञानिकों ने फेफड़ों के खराब हो जाने के बाद भी उन्हें स्वस्थ करने का तरीका खोज निकाला है। शोधकर्ताओं ने यह तकनीक ब्रेन-डेड (मस्तिष्क मृत) मरीजों से मिले छह खराब फेफड़ों पर आजमाई थी। फेफड़ों को रेस्पिरेटर यंत्र से जोड़कर इनमें सूअर का रक्त प्रवाहित किया, जिससे ये 24 घंटों में ही ‘जिंदा’ हो उठे।
इस सफलता के बाद इंसानों में यह प्रयोग किया जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी दान में मिले अधिकांश फेफड़े चंद घंटों में खराब हो जाते हैं। नई कामयाबी के बाद अब पहले से ज्यादा फेफड़े प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध रहेंगे। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में फेफड़ा प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. जैकरी एन कोन का कहना है, यह एक परिवर्तनकारी विचार है जिससे मरीजों की जान बचेगी।
ये प्रयोग विज्ञान की कल्पना जैसा
नेचर मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित शोध के परिणाम को विज्ञान की कल्पना (साइंस फिक्शन) माना जा रहा है। कोलंबिया और वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता पिछले आठ साल से खराब फेफड़ों को पुनर्जीवित करने का काम कर रहे हैं। ताजा शोध में उन्होंने हरेक फेफड़े को ‘सांस’ देने के लिए प्लास्टिक के अलग-अलग बक्से में रखकर एक रेिस्परेटर से जोड़ा था। फिर इन्हें जिंदा सूअर के गले की बड़ी नलिका से जोड़ दिया, जिससे उसका रक्त वाहिकाओं के जरिए फेफड़ों में बहने लगा। फिर एक दिन में ही ये बेकार फेफड़े बेहतर हो गए और प्रयोगशाला में पूर्ण स्वस्थ पाए गए।
इंसानों में इस तरह होगा इस्तेमाल
इस तकनीक को एक्स वीवो लंग पर्फ्यूजन (ईवीएलपी) नाम दिया है जिसका प्रयोग अब इंसानों पर होगा। इसके तहत मरीज के गले में बड़ा कैथेटर डालकर फेफड़े में रक्त प्रवाहित किया जाएगा। फेफड़े का संपर्क कमरे में रखे रेस्पिरेटर से होगा। अमेरिकी लंग एसोसिएशन के मुताबिक, दान में मिले सिर्फ 28 फीसदी फेफड़े ही इस्तेमाल हो पाते हैं बाकी खराब हो जाते हैं। शोध में शामिल वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के डॉ मैथ्यू डब्ल्यू बशेटा के मुताबिक, अगर दान किए 40 फीसदी फेफड़े भी प्रत्यारोपित हो पाएं तो काफी मरीजों को प्रतीक्षा सूची में नहीं रहना पड़ेगा।
केंद्रीय विद्यालय में पहली कक्षा में दाखिले के लिए 20 जुलाई से करें ऑनलाइन आवेदन
नयी दिल्ली : केंद्रीय विद्यालय के 1168 स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 में पहली कक्षा में दाखिले के लिए आवेदन 20 जुलाई से किए जा सकेंगे। आवेदन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन विंडो 7 अगस्त शाम सात बजे बंद हो जाएगी। इस बार ऑनलाइन आवेदन के लिए विशेष मोबाइल एप भी तैयार किया गया है।
केंद्रीय विद्यालय की पहली कक्षा में इस बार संशोधित दाखिला नियमों के आधार पर केंद्र सरकार के तय आरक्षण व दाखिला नियमों के तहत सीट मिलेगी। पहली बार 27 फीसदी सीट ओबीसी छात्रों के लिए आरक्षित रहेंगी।
अब कोई भी सिफारिश या जान-पहचान के नाम पर दाखिला नहीं करवा पाएगा। क्योंकि स्कूल प्रशासन को अब बताना होगा कि सीटों का बंटवारा कैसे किया गया। मेरिट और आरक्षण के तहत सीट मिलेगी। हालांकि सांसदों व एचआरडी मंत्री का कोटा जारी रहेगा। यह कुल सीटों से अलग होगा।
इस तरह होगा सीटों का बंटवारा
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पहली कक्षा में इस बार कुल सीटों में आरटीई 15 फीसदी (10 सीट), एससी 15 फीसदी (छह सीट), एसटी 7.5 फीसदी (तीन सीट) , ओबीसी 27 फीसदी (11 सीट) और दिव्यांगजनों के लिए तीन फीसदी सीट आरक्षित रहेंगी।
प्रति सेक्शन 40 सीट निर्धारित हैं। इसके बाद प्रति सेक्शन पांच सीट कोटे की रहेंगी। इसके अलावा डिफेंस (तीनों सेनाओं), शहीद परिवार, एक्सआर्मी, केंद्रीय कर्मचारी, एचआरडी, केवी, केंद्र सरकार के विदेश में कार्यरत कर्मी या अधिकारी, नेशनल अवार्ड, रिसर्च क्षेत्रों में कार्यरत कर्मियों के बच्चों के लिए सीट आरक्षित हैं।
पहली कक्षा में दाखिला प्रवेश परीक्षा की बजाय ड्रा के आधार पर मेरिट व आरक्षण के तहत होगा। स्कूलों को अब पहली कक्षा से लेकर अन्य कक्षाओं में दाखिला सीट की जानकारी ऑनलाइन शेयर करनी अनिवार्य रहेगी।
पाँच से आठ किलोमीटर दूर हो घर
प्रमुख शहरों और शहरी इलाकों में घर से स्कूल की दूरी पांच किलोमीटर के अंदर होनी चाहिए। इसके अलावा अन्य परिस्थितियों में यह आठ किलोमीटर भी हो सकती है।










