भवानीपुर कॉलेज में हिंदी पत्रकारिता और जनसंचार माध्यम की कार्यशाला
कोलकाता : भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कालेज में पत्रकारिता और जनसंचार माध्यम विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के आरंभ में दैनिक समाचार पत्र छपते छपते के प्रधान संपादक विश्वंभर नेवर ने अपने अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। सात दशकों से अपने परिश्रम और लगन से विश्वंभर नेवर आज हिंदी मीडिया में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ताजा टीवी हिंदी के निदेशक और संस्थापक नेवर ने बताया कि पत्रकारिता के क्षेत्र में एक पत्रकार को रिपोर्टिंग करने के लिए पढ़ना और लिखना बहुत जरूरी है। जब तक भाषा में धार नहीं होगी तब तक वह अच्छा पत्रकार नहीं बन सकता। वर्तमान समय में पत्रकारिता किसी भी विधा में चाहे विज्ञान, रासायनिक या फिर फिल्म क्षेत्र में की जा सकती है। हिंदी या क्षेत्रीय भाषा के अखबार अधिक पढ़े जाते हैं वनस्पत अंग्रेजी भाषा के। पत्रकारिता व्यक्ति के स्ट्रांग कॉमन सेंस का प्रतिफलन है।
भवानीपुर कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने विश्वंभर नेवर का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी की पत्रकारिता का आज विस्तार हुआ है। आज का युवा स्वयं अपना ब्लॉग, यू-ट्यूब चैनल, फेसबुक आदि पर अपना व्यक्तिगत व्यवसाय कर सकता। हिंदी पत्रकारिता पर पहली बार हो रही कार्यशाला का उद्देश्य है कि प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और वेब मीडिया में विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को किस प्रकार काम में चैनेलाइज कर सकते हैं।
कार्यशाला की संयोजक डॉ वसुंधरा मिश्र ने कोरोना महामारी के इस संकटकालीन स्थितियों में पत्रकारिता और जनसंचार माध्यम में अपनी रचनात्मक कार्यों को सही दिशा में लगाने का सबसे अच्छा जरिया बताया। पूरे विश्व में हिंदी भाषा की एक महत्वपूर्ण पहचान बनी है। कलकत्ता से ही पहला हिंदी अखबार 30 मई, सन् 1826 में निकला। आजादी के पहले निकलने वाले पत्रों में संपादकों को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता थी परंतु अब पत्रकारिता पूर्ण व्यवसाय है। पत्रकारों की तनख्वाह भी लाखों तक पहुंची है और इसी कारण नाम और पद के आकर्षण का केंद्र है।
पीत पत्रकारिता, फेक पत्रकारिता, पेड न्यूज और सेलेब्रिटी पत्रकारिता आदि क्षेत्रों में आज जिस तरह से नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, डॉ मिश्र ने बहुत सी जानकारी दी। अच्छे-बुरे सभी प्रोफेशन में मिलते हैं। पत्रकारिता का क्षेत्र कठिन डगर है। भाषा की दक्षता और शैली के साथ-साथ पत्रकार यदि ईमानदार, संयमी, सच्चा और साहसी है तो इस क्षेत्र में जा सकते हैं। अपराध, खोजी, खेल, कृषि, आर्थिक आदि पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्र हैं। प्रभात खबर की वरिष्ठ पत्रकार भारती जैनानी ने भी अपने विचार रखे।
ताजा टीवी और भारतीय भाषा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में भवानीपुर कॉलेज की कार्यशाला में 200 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया और 80 लोगों ने गूगल मीट पर भाग लिया। अंत में, एक रिपोर्टिंग प्रतियोगिता का विषय भी दिया गया जिसका परिणाम आना बाकी है। धन्यवाद ज्ञापन भारतीय भाषा परिषद की ओर से वरिष्ठ अधिकारी विमला पोद्दार ने विश्वंभर नेवर, प्रो दिलीप शाह प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, दिव्या ऊडीशी और कार्यक्रम संयोजक डॉ वसुंधरा मिश्र को दिया। वहीं कार्यशाला की तकनीकी सहयोगी गौरव किल्ला, अदिति, साक्षी को धन्यवाद दिया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।
पत्रकारिता स्ट्रांग कॉमन सेंस है -विश्वंभर नेवर
जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ आदिवासी युवाओं को उद्यमी बनाने में सहयोग करेगा एसोचेम
कोलकाता : एसोचैम आदिवासी युवाओं की उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए आगे आया है। इस संगठन ने आदिवासी उद्यमशीलता विकास (ट्राइबल एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट) के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) की स्थापना की है और यह जनजातीय मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार के साथ साझेदारी में काम करेगा।
आदिवासी उद्यमिता विकास केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन लगभग भारत सरकार के आदिवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने किया । इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकारों के कई गणमान्य लोगों ने भाग लिया। अर्जुन मुण्डा ने कहा कि विभिन्न कारणों से आदिवासी समुदाय की व्यावसायिक क्षमता सामने नहीं आ सकी है। उन्होंने इस सन्दर्भ में आदिवासी धरोहरों के प्रति लापरवाही और जागरुकता के अभाव का उल्लेख करते हुए एसोचेम के प्रयासों की सराहना की। केन्द्रीय मंत्री ने उद्योग जगत से आदिवासी समुदाय की सहायता के लिए आगे आने का आह्वान भी किया।
एसोचेम खादी को स्वतन्त्र व आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बताते हुए इस बाबत एक वेबिनार भी आयोजित किया। यह चर्चा देश में आदिवासी समुदायों की उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और समर्थन करने के आग्रह पर केंद्रित थी।
अपने विचार साझा करते हुए, एसोचेम के अध्यक्ष, डॉ। निरंजन हीरानंदानी ने कहा, “अक्सर सुदूर स्थानों को देखते हुए जहां ये आदिवासी आबादी रहती है, आवश्यक सेवाओं को पहुंचाना और सुनिश्चित करना कि वे आर्थिक विकास से लाभान्वित हो सकें, देश के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। यह मानते हुए कि अनुसूचित जनजातियाँ अपने विकास के मामले में औसत भारतीय जनसंख्या से लगभग 20 वर्ष पीछे हैं, हमारी जनसंख्या के लगभग 8 प्रतिशत की संभावनाओं को पूरी तरह से विकसित और लाभान्वित किया जाना चाहिए। विश्व ट्राइबल एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम ’हमारे देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था में उनके योगदान का अनुकूलन करेगा और भारत के आत्मानबीर बनने के दृष्टिकोण का समर्थन करेगा।”
इसी तरह की भावना की गूंज, एसोचैम के महासचिव, दीपक सूद ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ’इन मुद्दों को हल करने का प्रयास करेगा, एक मजबूत आदिवासी ब्रांड पहचान बनाने और इस प्रक्रिया में पदोन्नति के रास्ते तलाशने – आदिवासी कारीगरों की उद्यमशीलता क्षमताओं का निर्माण और वृद्धि करेगा।”
सूद ने कहा कि ‘आदिवासी उद्यमिता विकास कार्यक्रम’ का उद्देश्य लाइन में अंतिम व्यक्ति को जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और आदिवासी उद्यमिता को मजबूत करना है।
आदिवासी विकास पर अपने विचार साझा करने वाले अन्य लोगों में दीपक खांडेकर, सचिव, जनजातीय मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार; डॉ. नवलजीत कपूर, संयुक्त सचिव और विनीत अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, एसोचैम।
डॉ.अतुलचोखर, सीईओ, नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच). डॉ मनीष पांडे, निदेशक और प्रमुख, परियोजना विश्लेषण और प्रलेखन (पैड) प्रभाग, गुणवत्ता परिषद भारत; डॉ। मनु गुप्ता, सह-संस्थापक पर्यावरण और पारिस्थितिक विकास सोसायटी (एसईईडीएस) अन्य वरिष्ठ उद्योगपति शामिल थे।
एस्परेगस ने अलग अन्दाज में मनायी अपनी दसवीं वर्षगाँठ
कोलकाता : वेडिंग प्लानर कम्पनी एस्पेरेगस ने हाल ही में अपनी 10वीं वर्षगाँठ मनायी। इस मौके को खास बनाते हुए कम्पनी ने 200 पैकेट पका हुआ भोजन एनजीओ और होम्स में वितरित किया। सुजाता चाइल्ड केयर, पैलान ओल्डेज, मलिकबाजार चिल्ड्रेन कम्यूनिटी, कैनल रोड एसोसिएशन समेत कई जरूरतमंदों को इसका लाभ मिला। एस्पेरेगस के संस्थापक तथा निदेशक प्रीतम दत्त ने बताया कि बतौर वेडिंग प्रोफेशनल उनकी कम्पनी शादियों की तैयारी को युगल के लिए आसान बनाती ही है और उनकी मदद करती है।
कवि ऋतुराज की कविता ‘कन्यादान’
शिक्षिका – नीलम सिंह, वाराणसी
कन्यादान कविता में मां द्वारा बेटी को दी जा रही सीख का उल्लेख है। उसकी यह सीख परंपरागत सीख से हटकर है ।मां बेटी को जीवन पथ पर चलने के लिए प्रेरित करती है। बेटी की विदाई के समय मां का दुखी होना स्वभाविक ही है । वह ऐसा महसूस कर रही थी जैसे अपने जीवन की सारी जमा पूंजी दान में दे रही हो। सयानी ना होने के कारण उसकी बेटी अत्यंत भोली है । वह जीवन के सुख को मन में संजोए हुए है, पर दुख की अभिव्यक्ति करने उसे नहीं आता। वह छल कपट के जीवन से पूर्णतया अनजान है। बेटी को भावी जीवन के लिए तैयार करते हुए मां उसको सीख देती है पानी में झांक कर अपने रूप सौंदर्य पर सम्मोहित न होना।वह आगे बताती है कि ससुराल में वह आग का प्रयोग रोटियां सेंकने के लिए करें, दुखों से घबराकर अपनी जान देने के लिए नहीं।इसके अतिरिक्त वह बेटी को समझाती है कि वस्त्र एवं आभूषण शाब्दिक भ्रमजाल हैं, इसमें उलझकर अपने अस्तित्व को न भूलें।अंत में वह अपनी बेटी से कहती है कि लड़की के सारे उचित गुण बनाए रखना,पर अपनी कमज़ोरी मत प्रकट करना,कहने का तात्पर्य है कि जीवन में आने वाली परिस्थितियों से न घबराते हुए उसका सामना करने के लिए तैयार रहना।
(वीडियो सौजन्य – हिन्दी का आँगन)
शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान – प्रतियोगिता – टिप्पणी लेखन
नाम:- निक्की कुमारी साव ,
शिक्षण संस्थान:- रुचि:- कविताएँ पढ़ना और लिखना
हावड़ा शिवपुर आम्बिका हिन्दी हाई स्कूल ,
शरत चन्द्र बोस
शरत चन्द बोस का जन्म 6 सितम्बर 1889 में कलकत्ता में हुआ था! उनके पिता का नाम जानकी नाथ बोस तथा माता के नाम प्रभावती था ! शरत चन्द बोस सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई थे! शरत चन्द बोस की पढ़ाई कटक तथा कलकत्ता में हुई थी। उन्होंने इंग्लैंड से कानून की शिक्षा प्राप्त की और घर लौटे !
कलकत्ता के हाईकोर्ट से उन्होंने ने अपनी वकालत शुरू कर दिए! शरत की वकालत दिन पर दिन तरक्की होने लगी एवं वो आगे बढ़ने लगे! !
शरत चन्द ने सी . आर. दास के निर्देश में अपने कॅरियर की शुरुआत की!
यह एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे अहिंसा में विश्वास रखने के बावजूद शरत चन्द की कांतिकारियों के प्रति सहानुभूति थी। वे बंगाल विधानसभा में संसदीय पार्टी के नेता थे। शरत चन्द बोस वे बंगाल विभाजन के विरोध में थे, वे बंगाल भारत और पाकिस्तान दौनो से अलग राज्य बनाना चाहते थे, किन्तु वे असफल रहे!
मृत्यु:– शरत चन्द बोस की मृत्यु 12 फरबरी 1950 को कोलकाता मे पश्चिम बंगाल में हुई !!!
जानिए इम्यूनिटी को मजबूत करने का तरीका
हमारे शरीर को बीमारियों से बचाने में हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि आप को स्वस्थ रहना है और कोरोना या अन्य घातक बीमारियों से स्वयं को बचाना है तो आप की इम्यूनिटी मजबूत होनी चाहिए। यदि आप की इम्यूनिटी पहले से ही कमजोर है तो इसका कारण आपका लाइफ स्टाइल है। जिसको बदल कर आप अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बना, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं। असल में आपका लाइफ स्टाइल आपके इम्यून सिस्टम की चाबी है। यदि आप एक हेल्दी लाइफस्टाइल में रहते हैं तो अधिकांश शारीरिक समस्याएं भी दूर रहती हैं।शायद आप को मालूम न हो कि आप की इम्यूनिटी आप के शरीर में एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए हर आयु वर्ग के लिए इसको स्वस्थ व मजबूत रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारा इम्यून सिस्टम सेल्स, आर्गंस व टिश्यूज़ का एक जाल होता है जो हमें इंफेक्शन आदि से बचाता है। माना कि हर बीमारी से बचना थोड़ा असम्भव है परन्तु कुछ सावधानियां बरतीं जाएं और कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए तो हम सब अपनी इम्यूनिटी को मजबूत कर हर बीमारी से लड़ सकते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक भारत में 21 प्रतिशत लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है। ऐसे लोगों को हृदय रोग या ब्लड शुगर की संभावना अधिक रहती है। प्रदूषण व आस पास का महौल देखते हुए यह बहुत जरूरी है कि हम अपनी सेहत का ख्याल रखे और पर्याप्त पोषण का सेवन करें।
पर्याप्त प्रोटीन का सेवन करें
अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने का सबसे बेहतर उपाय है पर्याप्त प्रोटीन वाली डाइट लेना। यह आप के हेल्दी शरीर की नींव है। हमारी साधारण भारतीय मील जिस में दाल, चावल, चपाती व सब्जी होती है वह हमें पर्याप्त पोषण देती है। यह सुनिश्चित करने के लिए की आप पर्याप्त पोषण ले रहे हैं, आप प्रोटीन का कोई सप्लीमेंट भी ले सकते हैं। हमेशा स्मार्ट और एक्टिव रहने के लिए व डैमेज्ड टिशू को रिपेयर करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को बूस्ट करने के लिए प्रोटीन युक्त आहार बहुत जरूरी है।
फल व हरी सब्जियां खाएं
हम ऐसे समाज में रहते हैं जिसमें जंक फूड आदि फल व सब्जियों से अधिक पसंद किया जाता है। हरी सब्जियां प्लांट बेस प्रोटीन का स्रोत होती हैं, जोकि मिनरल्स व विटामिन्स से भरपूर होती हैं। हरी व पत्तेदार सब्जियां आप के पेट के लिए भी बहुत सेहतमंद हैं और आप की इम्यूनिटी को मजबूत करतीं हैं। जैसे पालक पत्ता गोभी गाजर ब्रोकली बींस आदि। इसके अलावा वह फल जिनमें विटामिन सी होता है वह भी आप की इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं, जैसे संतरा, नींबू, नारंगी आदि। इसलिए खाने या नाश्ते में मिश्रित फल या सब्जी का सेवन करें वरना इम्यूनिटी बूस्टर रेसिपीज ट्राई करें।
प्रोबायोटिक सप्लीमेंट खाएं
यह प्राकृतिक रूप से डेयरी पदार्थों जैसे दूध, दही व योगर्ट आदि में पाया जाता है। यह प्रोबायोटिक नाम का एक बैक्टीरिया होता है जो आपके पाचन तंत्र के लिए उपयोगी होता है। अतः अपनी इम्यूनिटी को बढ़ाने का यह एक बेहतरीन तरीका है। आप के पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं ये प्रोबायोटिक्स फूड।
योग करें
अध्ययन कहते हैं की योगा करने से भी हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। इससे आप की स्ट्रेस भी कम होता है। योग एक प्राकृतिक इम्यून बूस्टर है। योग को अपने डेली रूटीन में शामिल करने से आप किसी भी प्रकार के तनाव, नींद ना आना या किसी भी शारीरिक समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं। योगा पाचन तंत्र व रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।
इतना आप तनाव कम रखेंगे उतना ही आपका शरीर बीमारियों से लड़ने के लिए मजबूत होगा। शोध बताते हैं कि भारत में हर 10 लोगों में से 9 लोग तनावग्रस्त रहते है। तनाव आप के लिए कई सारी समस्याएं जैसे हृदय रोग, बीपी व डायबिटीज आदि लाता हैं। इसलिए मेडिटेशन करें। आप अपनी परिवार के साथ समय बिताएं, किताबें पढ़ें व हर रोज 30 मिनट तक प्राणायाम, शवासन, शलभासन आदि करें, ये सुस्ती, थकान और तनाव को दूर करते हैं।
कुछ हर्बल उत्पाद और काढ़ा का प्रयोग
यदि आप हर्बल उत्पादों का प्रयोग करेंगे तो वह आप के लिए एक इम्यूनिटी बूस्टर का काम करेंगी। इन सभी प्राकृतिक उत्पादों का प्रयोग आयुर्वेद में भी किया जाता है क्योंकि यह सभी एंटिऑक्सीडेंट्स और एंटिइंफ्लेमेट्री गुणों से भरपूर है़। जैसे हर्बल चाय’ पीने से न केवल आपका शरीर रिलैक्स होगा बल्कि आप को स्ट्रेस व परेशानी से भी राहत मिलेगी। यही नहीं पेट दर्द से लेकर इम्युनिटी बढ़ाने तक कई मर्ज की दवा है तुलसी का काढ़ा। या फिर गिलोय का काढ़ा पीयें। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए गिलोय का काढ़ा बहुत फायदेमंद है।
पर्याप्त नींद लें
बच्चा हो बूढ़ा हो या युवा, सब के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत महत्त्वपूर्ण है। यदि नींद अच्छी नहीं लेते हैं तो आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है। यदि आप अपनी इम्यूनिटी को बढ़ाना चाहते हैं तो आप के लिए रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद जरूरी है। यदि आप सोएंगे नहीं तो आप पूरा दिन थके रहेंगे और आप बहुत सी बीमारियों का शिकार भी ही सकते हैं।
जानिए मां अंबे के 9 रुपों के 9 शुभ वरदान
मां अंबे, मां दुर्गा, मां भगवती…चाहे नाम कोई भी हो इन 9 दिनों में वह भरपूर आशीष देती है। 9 दिनों की 9 देवियां अपने विशेष आशीर्वाद के लिए जानी जाती हैं। आइए जानें किस देवी से मिलता है कौन सा शुभ वरदान…..
1. शैल पुत्री– मां दुर्गा का प्रथम रूप है शैल पुत्री। पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म होने से इन्हें शैल पुत्री कहा जाता है। नवरात्रि की प्रथम तिथि को शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इनके पूजन से भक्त सदा धन-धान्य से परिपूर्ण पूर्ण रहते हैं।
2. ब्रह्मचारिणी– मां दुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। मां दुर्गा का यह रूप भक्तों और साधकों को अनंत कोटि फल प्रदान करने वाली है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की भावना जागृत होती है।
3. चंद्रघंटा– मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा है। इनकी आराधना तृतीया को की जाती है। इनकी उपासना से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। वीरता के गुणों में वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य अलौकिक माधुर्य का समावेश होता है व आकर्षण बढ़ता है।
4. कुष्मांडा– चतुर्थी के दिन मांं कुष्मांडा की आराधना की जाती है। इनकी उपासना से सिद्धियों, निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु व यश में वृद्धि होती है।
5. स्कंदमाता– नवरात्रि का पांचवां दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी है। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती है।
6. कात्यायनी– मां का छठवां रूप कात्यायनी है। छठे दिन इनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है। कात्यायनी साधक को दुश्मनों का संहार करने में सक्षम बनाती है। इनका ध्यान गोधूली बेला में करना होता है।
7. कालरात्रि– नवरात्रि की सप्तमी के दिन मांं काली रात्रि की आराधना का विधान है। इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है व दुश्मनों का नाश होता है। तेज बढ़ता है।
8. महागौरी– देवी का आठवांं रूप मांं गौरी है। इनका अष्टमी के दिन पूजन का विधान है। इनकी पूजा सारा संसार करता है। महागौरी की पूजन करने से समस्त पापों का क्षय होकर चेहरे की कांति बढ़ती है। सुख में वृद्धि होती है। शत्रु-शमन होता है।
9. सिद्धिदात्री– मां सिद्धिदात्री की आराधना नवरात्रि की नवमी के दिन किया जाता है। इनकी आराधना से जातक अणिमा, लघिमा, प्राप्ति,प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसांयिता, दूर श्रवण, परकाया प्रवेश, वाक् सिद्धि, अमरत्व, भावना सिद्धि आदि समस्त नव-निधियों की प्राप्ति होती है।
(साभार -वेब दुनिया)
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कोलकाता, ओडिशा और दक्षिण भारत के शहरों से 7 माह बाद बेतिया पहुँचे फूल
50,000 फूलों के पौधों की खेप पहुँची
कोलकाता : लॉकडाउन के बाद अब कोलकाता, ओडिशा, नेपाल और दक्षिण भारत के कई शहरों से बेतिया में फूलों के पौधों की आवक शुरू हो गई है। जिला मुख्यालय की नर्सरियों में एक बार फिर से हरियाली देखी जा रही है। विगत कई दशक से फूलों और होम डेकोरेटर से जुड़े ग्रीन प्लांट की उपलब्धता ग्राहकों को कराने के लिए प्रसिद्ध इरशाद आलम ने दैनिक भास्कर को बताया कि हाल ही में कोलकाता से 50,000 तरह-तरह के देसी-विदेशी फूलों के पौधों की खेप पहुंच चुकी है। इसके लिए धीरे-धीरे बिक्री का ग्राफ भी बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि चैंपियन नर्सरी में पौधों की रखरखाव के लिए फिलहाल 40 लोगों की टीम बनाई गई है, जो निर्धारित मानदेय पर फूलों की देखभाल करते हैं। ताकि ग्राहकों को ताजे रंग बिरंगे फूलों के पौधे उपलब्ध हो सके।
ओडिसा से सन ऑफ इंडिया और कोलकाता से मेरी गोल्ड, फायर बॉल की खेप पहुँची
ओडिशाै से एरिका पाम और सन ऑफ इंडिया सहित तरह-तरह के होम डेकोरेटर से जुड़े ग्रीन प्लांट्स मंगाए गए हैं। कोलकाता से मेरी गोल्ड फायर बॉल पिटूनिया बोनसाई सहित तरह-तरह के रंगों वाले फूलों के पौधे मंगाए जा चुके हैं। इरशाद ने बताया कि लॉकडाउन के समय महीनों तक नर्सरी बंद रही जिससे हजारों पौधे नष्ट हो गए और कुछ पौधों के ऊपर शेड लगाकर उनको जीवित रखा गया। लॉकडाउन के कारण फिलहाल नेपाल से ग्राहक नहीं आ रहे लेकिन उत्तर प्रदेश की सीमा सहित आसपास के कई जिलों के ग्राहक फूलों की खरीदारी के लिए आने लगे हैं। इन दिनों सबसे अधिक डिमांड मेरी गोल्ड सहित पौधों का भी है। फलदार पौधों में आम, अमरूद, आंवला, लीची सहित कई पौधे मंगाए गए हैं।
गाँव की जोकर से लेकर सुपरस्टार का सफर करने वाली कंगना
बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत छोटे शहर से ताल्लुक रखने वाली कई लड़कियों के लिए इंस्पिरेशन हैं। लाइफ से जुड़े फैक्ट्स से लेकर कंगना हर मुद्दे पर अपनी राय खुलकर रखती हैं। एक्ट्रेस के फैशन सेंस की भी चर्चाएं भी होती रहती हैं। हाल ही में कंगना रनौत ने अपनी एक पुरानी और हालिया फोटो शेयर कर फैन्स को अभी तक के सफर के बारे में बताया। उनका कहना है कि यह जर्नी उनके लिए बिलकुल भी आसान नहीं रही, लोग उनपर हंसते थे।
कंगना रनौत ने लिखा, “जब मैं छोटी बच्ची थी तब खुद को मोतियों से सजाती थी, अपने बाल खुद काटती थी, थाई हाई जुराब पहनती थी और हील्स कैरी करती थी। लोग मुझपर हंसते थे। एक गाँव की जोकर होने से लेकर लंदन, पैरिस, न्यूयॉर्क फैशन वीक में सबसे आगे की लाइन में बैठना, मुझे महसूस होता है कि फैशन एक ऐसी चीज है जिसे आप स्वतंत्रता से कहीं भी और कभी भी अभिव्यक्त कर सकते हैं।”
कंगना रनौत की फिल्म ‘थलाइवी’ की शूटिंग अभी बाकी है, जिसके लिए वह जल्द ही सेट पर वापसी करेंगी। यह फिल्म एक्ट्रेस-पॉलिटीशियन जयललिता की बायोपिक है। इसके अलावा कंगना जल्द ही फिल्म ‘तेजस’ की भी शूटिंग शुरू करेंगी। इसमें कंगना रनौत इंडियन एयर फोर्स पायलट की भूमिका निभाती नजर आएंगी। इस फिल्म का निर्देशन सर्वेश मेवारा करेंगे। शूटिंग दिसंबर के महीने से शुरू होगी।




