Friday, June 26, 2026
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पहली बार ट्रांसजेंडर महिला मोनिका दास बनेंगी पीठासीन अधिकारी

वे देश की ऐसी पहली ट्रांसजेंडर महिला हैं जो एक राष्ट्रीय बैंक में 2015 से कार्यरत हैं

पटना : बिहार के चुनाव में इतिहास रचने वाली ट्रांसजेंडर मोनिका दास को विधानसभा चुनाव में पीठासीन पदाधिकारी बनाया जाएगा। ऐसा देश में पहली बार होगा जब किसी ट्रांसजेंडर को मतदान कार्य के लिए पीठासीन पदाधिकारी नियुक्त किया जाएगा। मोनिका दास एक बूथ की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगी। उन्हें पीठासीन अधिकारी के तौर पर 8 अक्टूबर को ट्रेनिंग दी जाएगी। मोनिका दास पटना की रहने वाली हैं और इनकी उम्र 32 साल है। मोनिका ने स्कूली शिक्षा नवोदय विद्यालय से और पटना यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया जिसमें वे गोल्ड मेडलिस्ट हैं। उन्होंने पटना लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री भी ली है।
उनके पिता भगवान ढोली सेल्स टैक्स अफसर थे जबकि मां अनीता रानी भौमिक बीएसएनएल की रिटायर्ड कर्मचारी हैं। वे देश की पहली ट्रांसजेंडर महिला हैं जो एक राष्ट्रीय बैंक में 2015 से कार्यरत हैं। मोनिका से पहले पश्चिम बंगाल की ट्रांसजेंडर महिला रिया सरकार को पोलिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया था।
मोनिका जब तीन साल की थी तब पड़ोसियों को उनके ट्रांसजेंडर होने की जानकारी हुई। जब वे थोड़ी बड़ी हुई तो उनके बोलचाल के तरीके की वजह से कोई उनसे दोस्ती नहीं करता था। इन सबके बावजूद मोनिका ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्हें अपनी मेहनत के बल पर पीठासीन अधिकारी बनने का गौरव मिला है। फिलहाल मोनिका को अपनी इस उपलब्धि पर गर्व है। मोनिका अपनी इस उपलब्धि से काफी खुश हैं। उन्होंने कहा – ”मैं इसे ट्रांसजेंडर समुदाय की जीत मानती हूं। मैं ट्रांसजेंडर्स के प्रति लोगों का नजरिया बदलना चाहती हूं। आज भी ऐसे कई ट्रांसजेंडर हैं जो समाज में नजरअंदाज किए जाने की वजह से सामने आने की हिम्मत नहीं करते। मेरी कामयाबी उन्हें प्रोत्साहित करेगी”।

चेन्नई की निशा रामासामी बच्चों के लिए लकड़ी से बना रही हैं डेवलपमेंटल खिलौने

पांच साल पहले अपनी तीन महीने की बेटी की खातिर शुरू किया था ये काम
फिलहाल निशा के इस स्टार्टअप से 200 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है

चेन्नई : 2016 में निशा रामासामी की तीन महीने की बेटी को त्वचा से जुड़ी समस्या एटोपिक डर्मेटाइटिस हुई जिसमें त्वचा लाल हो जाती है और उस पर खुजली होती है। तभी उन्हें ये भी लगा कि इस बच्ची को प्लास्टिक के खिलौनों से एलर्जी है। चेन्नई में रहने वाली निशा एक मॉन्टेसरी टीचर हैं। जब उसने अपनी बेटी को घुटनों के बल इधर-उधर चलते और कई चीजों के साथ खेलते हुए देखा तो उसे ये लगा कि क्यों न कुछ ऐसे खिलौने बनाए जाए जिससे बेटी को त्वचा एलर्जी होने का डर न रहे। अपनी इसी सोच के साथ निशा ने बढ़ई की मदद से लकड़ी के खिलौने बनाए। वैसे भी मार्केट में न्यू बोर्न से लेकर तीन साल तक के बच्चों के लिए मिलने वाले खिलौनों की संख्या काफी कम है। निशा कहती हैं – ”यही वो उम्र होती है जब एक शिशु का विकास होता है और वो बोलना सीखता है। इसलिए इस उम्र के बच्चों का खास ध्यान रखा जाना चाहिए”।
तब निशा ने नीम की लकड़ी से शिशु के लिए टीथर और रेटल्स बनाना शुरू किया। निशा के अधिकांश मिलने-जुलने वाले लोग भी पैरेंट्स हैं। उन्हें निशा का ये क्रिएशन बहुत पसंद आया। उन्होंने अपने बच्चों के लिए भी निशा को इसी तरह के खिलौने बनाने के ऑर्डर दिए। यहीं से निशा के फाउंडेशन ‘अरिरो वुडन टॉयज’ की शुरुआत हुई। निशा ने पति वसंत के साथ मिलकर 2018 में इसे शुरू किया।
अपने स्टार्ट अप को आगे बढ़ाने के लिए इस कपल ने स्वीडन, इंडोनेशिया और चीन की यात्रा कर वहां बनने वाले खिलौनों के बारे में जानकारी ली। इन्होंने ये भी जाना कि इन खिलौनों पर किस तरह का पेंट होता है और इन्हें स्टोर करके अधिक समय तक कैसे रखा जाता है। वहां से लौटने के बाद निशा ने स्थानीय कारीगरों को खिलौने बनाने से जुड़ी कई बारीकियों को सीखाया। अपने स्टार्ट अप के जरिये निशा नौनिहालों के लिए पजल्स, रेटल्स, टीथर्स, स्लाइडर्स, स्टेप स्टूल और इंडोर जिम एसेसरीज डिजाइन करती हैं। उनके बनाए प्रोडक्ट्स अमेजन और फ्लिपकार्ट सहित 20 प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। फिलहाल निशा के इस स्टार्ट अप से 200 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है।

 

21 साल पुरानी चार सहेलियों ने पैसे इकट्‌ठे करके बनाया बर्तन बैंक

उनके बर्तन बैंक में पांच सौ थालियां, गिलास एवं चम्मच हैं, जिसका पूरा हिसाब-किताब रजिस्टर में मेंटेन किया जाता है
इन महिलाओं की दोस्ती लगभग 21 साल पुरानी है। सबसे पहले उन्होंने बाजार से पन्नी में सामान लेना बंद किया था

भोपाल : भोपाल में शक्ति नगर निवासी चार महिलाएं इला मिड्ढा, श्वेता शर्मा, स्मिता पटेल और डॉ. मधुलिका दीक्षित ने मिलकर बर्तन बैंक बनाया है। उनका मकसद पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्लास्टिक और डिस्पोजल के थाली-गिलास का उपयोग नहीं करना है।
इस उद्देश्य से यहां धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों के लिए बर्तन नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं। उनके बर्तन बैंक में पांच सौ थालियां, गिलास एवं चम्मच हैं, जिसका पूरा हिसाब-किताब रजिस्टर में मेंटेन किया जाता है।
इन महिलाओं की दोस्ती लगभग 21 साल पुरानी है। सबसे पहले उन्होंने बाजार से पन्नी में सामान लेना बंद किया। वे अपने साथ घर से ही बैग लेकर जाती थीं। उन्हें यह मालूम था कि जानवर पन्नियां खाने की वजह से मर जाते हैं। इसलिए उन्होंने बर्तन बैंक शुरू किया।
इन महिलाओं ने बताया कि हम जब भी किसी कार्यक्रम में जाते थे तो वहां डिस्पोजल थालियों में खाना सर्व किया जाता था। तब हमें महसूस हुआ कि इससे हमारे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। साथ ही जानवरों को भी नुकसान हो रहा है, क्योंकि जानवर इन्हीं डिस्पाेजल थालियों को खा जाते हैं।
ये सभी महिलाएं पर्यावरण प्रेमी हैं। इन्होंने सोचा कि इतना प्लास्टिक वेस्ट इकट्ठा हो रहा है जो आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत हानिकारक है। इस बात को ध्यान में रखते हुए आपस में पैसे एकत्र कर बर्तन बैंक की शुरुआत की।
उनके इस कार्य में मीना दीक्षित और हरिप्रिया पंत ने काफी सहयोग किया। इसके बाद किसी आयोजन के लिए वे बर्तन नि:शुल्क देती हैं। खास बात यह है कि बर्तन बैंक में प्लास्टिक का कोई भी सामान यूज नहीं होता है। उनके इस काम में अशोक पटेल, रमनदीप अहलूवालिया, कल्पना सिंह और योगेश गुड्डू सक्सेना का विशेष सहयोग रहा है।
इला मिड्ढा, श्वेता शर्मा, डॉ. मधुलिका दीक्षित और स्मिता पटेल ने बताया कि बर्तन बैंक खुलने के बाद से डिस्पोजल, थर्माकोल की प्लेट और प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का उपयोग काफी हद तक बंद हो गया है। वे अपने घर से ही बर्तन बैंक संचालित कर रही हैं।
उनके इस कार्य से पर्यावरण को नुकसान नहीं होता है। कोरोना वायरस के चलते सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाता है। बर्तन देने से पहले वे सामने वालों को इतना जरूर कहते हैं कि बर्तन अच्छी तरह साफ करके वापिस करें, ताकि किसी को परेशानी न हो।

महिला आईपीएल का शेड्यूल तय: यूएई में 3 टीमों के बीच 4 मुकाबले

9 नवंबर को होगा फाइनल
मिताली राज, स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर को मिली कप्तानी
मुम्बई : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने वुमन्स टी-20 चैलेंज यानी महिलाओं के आईपीएल का शेड्यूल घोषित कर दिया है। टूर्नामेंट में 3 टीमों सुपरनोवास, वेलोसिटी और ट्रेलब्लाजर्स के बीच फाइनल समेत 4 मुकाबले होंगे। फाइनल 9 नवंबर को खेला जाएगा। हरमनप्रीत कौर को सुपरनोवाज और मिताली राज को वेलोसिटी का कप्तान बनाया गया है। ट्रेलब्लाजर्स की कमान स्मृति मंधाना संभालेंगी। पहला मैच डिफेंडिंग चैम्पियन सुपरनोवाज और रनरअप रही वेलोसिटी के बीच 4 नवंबर को खेला जाएगा।

टी-20 चैलेंज का शेड्यूल

तारीख           मैच                      समय
4 नवंबर सुपरनोवास vs वेलोसिटी शाम 7.30 बजे
5 नवंबर वेलोसिटी vs ट्रेलब्लाजर्स दोपहर 3.30 बजे
7 नवंबर ट्रेलब्लाजर्स vs सुपरनोवास शाम 7.30 बजे
9 नवंबर फाइनल शाम 7.30 बजे
थाईलैंड की नाथाकन पहली बार टूर्नामेंट खेलेंगी
तीनों टीम में भारतीय खिलाड़ियों के अलावा इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, वेस्टइंडीज, बांग्लादेश न्यूजीलैंड के खिलाड़ी भी शामिल होंगे। थाईलैंड की नाथाकन चानथाम पहली बार टूर्नामेंट खेलेंगी। नाथाकन चानथाम को ट्रेलब्लेजर्स की टीम में शामिल किया गया है। बिग बैश लीग और वुमन्स चैलेंजर्स के शेड्यूल में टकराव की स्थिति बनी है। ऐसे में बिग बैश लीग खेलने वाले प्लेयर टी-20 चैलेंजर्स में नहीं खेलेंगे।
अक्टूबर के तीसरे हफ्ते यूएई जा सकती हैं टीमें
सूत्रों के मुताबिक, यदि हेल्थ से जुड़े नियमों में बदलाव नहीं किए गए, तो तीनों टीमें अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में यूएई रवाना हो सकती हैं। उन्हें वहां 6 दिन के लिए क्वारैंटाइन रहना पड़ेगा।
2018 में शुरू हुआ टी-20 चैलेंज
वुमन्स टी-20 चैलेंज पहली बार 2018 में खेला गया था। तब एक ही मुकाबला हुआ था, जिसमें सुपरनोवाज ने ट्रेल ब्लेजर्स को हराया था। 2019 में भी बीसीसीआई ने आईपीएल के दौरान महिलाओं की तीन टीमों के बीच 4 टी-20 मैच कराए थे। तब तीसरी टीम वेलोसिटी की एंट्री हुई थी।
महिला टी-20 चैलेंज 2020 के लिए तीनों टीमें:
सुपरनोवाज: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), जेमिमा रोड्रिग्स , चमारी अट्टापट्टू, प्रिया पुनिया, अनुजा पाटिल, राधा यादव, तान्या भाटिया (विकेटकीपर), शशिकला श्रीवर्धने, पूनम यादव, शकीरा सैल्मन, अरुंधती रेड्डी, पूजा कुमारी, वस्त्रकार, आयुषी सोनी, अयाबोंगा खाका, मुस्कान मलिक।
ट्रेलब्लाजर्स: स्मृति मंधाना (कप्तान), दीप्ति शर्मा (उपकप्तान), पूनम राउत, ऋचा घोष, डी हेमलता, नुजहत परवीन (विकेटकीपर), राजेश्वरी गायकवाड़, हरलीन देओल, झूलन गोस्वामी, सिमरन दिल बहादुर, सलमा खातून, सोफी एक्लेस्टोन, नाथाकन चानथाम, डींड्रा डॉटिन, काशवी गौतम।
वेलोसिटी: मिताली राज (कप्तान), शिफाली वर्मा, वेदा कृष्णमूर्ति, सुषमा वर्मा (विकेटकीपर), एकता बिष्ट, मानसी जोशी, शिखा पांडे, देविका वैद्य, दिव्यदर्शिनी, मनाली दक्षिणी, लेग कास्पेरेक, डेनियल वाइट, सुन लुस, जहांआरा आलम, एम अनाग शामिल है।

88 दिन में 520 ऑनलाइन कोर्स करके बनाया विश्व रिकॉर्ड

तिरुअनन्तपुरम : दुनियाभर में जो लड़कियां पढ़-लिखकर अपने देश और माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं, उन्हीं में केरल की आरती रघुनाथ भी शामिल हैं। माता-पिता की इकलौती संतान आरती ने महामारी के दौरान घर में रहते हुए अपना समय पढ़ाई करने में बिताया।
आरती ने कंप्यूटर, बायोलॉजी से लेकर इकोनॉमिक्स पर आधारित अलग-अलग कोर्स किए। उन्होंने जिन यूनिवर्सिटीज से कोर्स किए उनमें जॉन हॉकिंस यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया, यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर, यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन, यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर, एमोरी यूनिवर्सिटी, कोरसेरा प्रोजेक्ट नेटवर्क और टेक्नीकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क भी शामिल हैं।
आरती कोच्चि में एलमकारा की रहने वाली हैं। वे एमईएस कॉलेज में एमएससी बायोकेमेस्ट्री की सेकंड ईयर स्टूडेंट हैं। उन्होंने 88 दिन में 520 ऑनलाइन कोर्स करके वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया। आरती ने किस तरह पढ़ाई की और उनके भविष्य की योजनाएं क्या है, जानिए खुद उन्हीं की जुबानी…
मैंने ऑनलाइन कोर्स की शुरुआत लॉकडाउन में रहते हुए जून के आखिरी हफ्ते से की। तब तक लॉकडाउन का काफी हिस्सा बीत चुका था। मुझे ये लगा कि जो वक्त बीत चुका है, उसे तो फिर से नहीं पाया जा सकता, लेकिन जो समय अभी बाकी है, उसका सही उपयोग करके ऑनलाइन कोर्स किए जा सकते हैं।
मैंने ये कोर्सेस करने में खूब मेहनत की। हालांकि मैं इतने सारे कोर्स कर पाऊंगी, इसकी मुझे उम्मीद नहीं थी, पर मेरी मेहनत रंग लाई। ऑनलाइन कोर्सेस की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे इन्हें कर सकते हैं। ये मेरी खुशनसीबी है कि 520 ऑनलाइन कोर्सेस करके मैंने वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया।
मैंने एमएससी ऑनलाइन क्लासेस करने के बाद बचे हुए समय में ऑन लाइन कोर्स किए। इनमें से जो कोर्स कंप्यूटर पर आधारित थे, वो मैं जल्दी पूरे कर लेती थी। लेकिन बायोलॉजी और साइकोलॉजी पर आधारित कोर्स करने में मुझे ज्यादा समय लगा क्योंकि उसे पढ़ने और समझने की ज्यादा जरूरत होती है।
मेरी तरह अन्य स्टूडेंट्स के लिए भी इस तरह के ऑनलाइन कोर्स करिअर को सफल बनाने में मदद कर सकते हैं। इन कोर्सेस को करने के बाद मिले सर्टिफिकेट हमारी प्रोफाइल अपडेट करने में मदद करते हैं। ये सभी कोर्सेस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त हैं जो काफी उपयोगी साबित होते हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

नहीं रहे संगीतकार राजन-नागेन्द्र जोड़ी फेम राजन

कन्नड़ फिल्मों के दिग्गज म्यूजिक कंपोजर राजन-नागेन्द्र जोड़ी फेम राजन का निधन हो गया है। 87 साल के राजन ने रविवार शाम बेंगलुरु स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली। करीब 20 साल पहले राजन ने अपने छोटे भाई नागेन्द्र को खो दिया था। रिपोर्ट्स की मानें राजन-नागेन्द्र हिंदी सिनेमा की मशहूर जोड़ियों शंकर-जयकिशन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और कल्याणजी-आनंदजी के वर्ग के म्यूजिक कंपोजर थे। उन्हें कन्नड़ फिल्मों के कल्याणजी-आनंदजी कहा जाता था।
एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट से बातचीत में राजन के बेटे आर अनंत कुमार ने बताया, “वे एक दम स्वस्थ थे और ऑनलाइन म्यूजिक क्लास ले रहे थे। पिछले दो दिन से उन्हें अपच हो रही थी। रविवार रात 11 बजे घर में ही उन्होंने अंतिम सांस ली।”
राजन-नागेन्द्र की जोड़ी ने अपने 5 दशक लंबे करियर में करीब 375 फिल्मों में संगीत दिया था। इनमें से लगभग 200 कन्नड़ की फिल्में हैं। जबकि बाकी तमिल, तेलुगु, मलयालम, तुलु, हिंदी और सिंहला भाषा की फिल्में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके नाम म्यूजिक इंडस्ट्री में सबसे लंबे समय तक एक्टिव रहने वाली कंपोजर जोड़ी का रिकॉर्ड है।
राजन के छोटे भाई नागेन्द्र का निधन 4 नवंबर 2000 को बेंगलुरु में हुआ था। वे हर्निया का इलाज करा रहे थे। लेकिन बाद में उन्हें ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याएं हुईं और वे बच नहीं सके।

महिलाओं के लिए जरूरी है सही आर्थिक सुरक्षा की तैयारी

आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आदमियों से पीछे नहीं हैं। लेकिन वित्तीय मामलों में महिलाएं पुरुषों से पीछे रह जाती हैं। महिलाओं को अपने कैरियर के साथ बचत और निवेश पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे वो भविष्य को लेकर सही प्लानिंग कर सकेंगी। हम यहां कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं, जिनका ध्यान रखकर नौकरीपेशा महिलाएं सही फाइनेंशियल प्लानिंग के सकती हैं।
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का वेतन रहता है कम
पुरुषों और महिलाओं की सैलरी एक समान नहीं होती इस कारण इनकी फाइनेंशियल प्लानिंग भी अलग-अलग होनी चाहिए। एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार 2019 में अगर पुरुष को 100 रुपए सैलरी मिलती है, तो महिला को 79 रुपए ही मिलते हैं। यानी करीब 21 फीसदी कम। इसलिए कम आय को देखते हुए महिलाओं के लिए और भी जरूरी है कि वे अच्छा निवेश पोर्टफोलियो बनाकर पैसा कमाना और जोड़ना शुरू करें। ताकि वो कम समय में अपने लिए पर्याप्त फंड जुटा सकें।
कई बार महिलाओं के करियर का ग्राफ हमेशा बढ़ता हुआ नहीं हो पाता। अलग-अलग कारणों से कई बार आपको करियर से ब्रेक लेना पड़ सकता है। कुछ शादी के बाद नौकरी छोड़ देती हैं, कुछ प्रेग्नेंसी के दौरान या उसके बाद। इससे कॅरियर ग्रोथ और आय, दोनों प्रभावित होती हैं। आपने रिटायरमेंट के लिए पैसे इकट्‌ठा करने का जो लक्ष्य रखा है, वह इससे प्रभावित हो सकता है। इस अंतर को कम या खत्म करने लिए निवेश की बेहतर प्लानिंग करना बहुत जरूरी है।
महिलाओं में कम होती है वित्तीय साक्षरता
ग्लोबल फाइनेंशियल लिटरेसी एक्सीलेंस सेंटर द्वारा 2017 में किए गए सर्वे के अनुसार दुनियाभर में केवल 20 फीसदी महिलाओं को ही फाइनेंशियल कंसेप्ट (वित्तीय साक्षरता) की समझ है। यह पुरुषों से 8 फीसदी कम है। वित्तीय साक्षरता का मतलब है किसी व्यक्ति को बजट बनाने, पैसा बचाने, खर्चों पर नियंत्रण करने, कर्ज संभालने, रिटायरमेंट की प्लानिंग करने और संपत्ति जोड़ने की बेहतर समझ हो। इसलिए जरूरी है कि आप फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में पढ़कर या किसी एक्सपर्ट से बात करें। इससे आपको बचत और निवेश की सही समझ होगी।
इमरजेंसी फंड बनाना है जरूरी
रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ने के अलावा नौकरी जाने जैसी आपातकालीन स्थितियों के लिए भी आपको तैयार रहना चाहिए। यह इमरजेंसी फंड आपके कम से कम 6 महीने के वेतन के बराबर होना चाहिए। इससे आपको कोरोना काल जैसे बुरे वक्त से निपटने में मदद मिलेगी।
अपने खर्च का रखें हिसाब
बचत या निवेश के साथ ये भी बहुत जरूरी है कि आप अपने खर्च का भी हिसाब रखें। क्योंकि महिलाओं के खर्च और जरूरतें पुरुषों से अलग होती हैं। इस वजह से उनके सामने अलग ही वित्तीय चुनौतियां भी होती हैं। खर्च का हिसाब रखने से उन्हें अपने बचत का अंदाजा लगाना आसान हो जाएगा, और आप ज्यादा बचत सकेंगे।
सही सेवानिवृत्ति योजना जरूरी
सेंसस ऑफिस के सेंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के तहत किए गए सर्वे के मुताबिक भारत में महिलाएं आदमियों की तुलना में ज्यादा जीवित रहती हैं। इस वजह से उनकी रिटायरमेंट प्लानिंग अवधि भी बढ़ जाती है। जीवनसाथी के गुजर जाने के बाद उनकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें इस समय को ध्यान में रखने हुए प्लानिंग करनी चाहिए।
लॉन्ग टर्म हेल्थ इंश्योरेंस लेना रहेगा सही
अगर आप सिंगल महिला हैं तो आपके लिए लॉन्ग टर्म हेल्थ इंश्योरेंस (केयर इंश्योरेंस) लेना भी एक अच्छा आइडिया है। ऐसा हो सकता है कि उम्रदराज होने के बाद आपको इसकी जरूरत पड़े, खासतौर पर तब, जब आपकी देखभाल के लिए कोई मौजूद न हो। हालांकि ऐसे लॉन्ग-टर्म हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम की कीमत ज्यादा होती है लेकिन इसे जितने जल्दी ले लेंगे, उतना कम कीमत पर यह मिल सकता है।
(साभार – दैनिक भास्कर)

नहीं रहे  200 से अधिक मरीजों की जान बचाने वाले आरिफ

नयी दिल्ली/गाजियाबाद : दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में अनचाने दुश्मन कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ जंग जारी है, लेकिन इसमें कई बहादुर कोरोना वॉरियर्स को अपनी जान से हाथ थोना पड़ रहा है। ताजा मामले में अपनी जान जोखिम में डालकर 200 से ज्यादा मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने वाले आरिफ खान ने दुनिया को अलविदा कह दिया। 25 साल से शहीद भगत सिंह सेवा दल के साथ जुड़े आरिफ खान कोरोना वायरस से संक्रमित थे। शनिवार की सुबह उपचार के दौरान हिंदूराव अस्पताल में निधन हो गया। आइये जानते हैं कि कौन थे आरिफ खान, जिनके निधन पर उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु और चर्चित कवि कुमार विश्वास समेत तमाम गणमान्य लोगों ने शोक जताया है।
200 से अधिक लोगों की बचाई थी जान
दिल्‍ली के सीलमपुर इलाके में रहने वाले आरिफ खान ने कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर 200 से ज्यादा मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया था। इसी के साथ 100 से अधिक शवों को अंत्येष्टि के लिए श्मशान पहुंचाया। आरिफ को जानने वालों का कहना है कि कोरोना महामारी ने एक जिंदादिल वॉरियर की जान ले ली। वह बेहद जिंदादिल शख्यिसियत थे। हमेशा मुस्कुराकर अपने काम को अंजाम देते थे।
आरिफ खान पिछले 25 साल से शहीद भगत सिंह सेवा दल के साथ जुड़े थे। आरिफ मुफ्त में एम्बुलेंस की सेवा मुहैया कराने का काम करते थे। सेवा दल से जुड़े पदाधिकारियों की मानें तो कोरोना के दिल्ली के दस्तक देने के साथ ही वह 21 मार्च से संक्रमित मरीजों को उनके आवास से अस्पताल और आइसोलेशन सेंटर तक ले जाने का काम कर रहे थे। शहीद भगत सिंह सेवा दल के संस्थापक जितेंद्र सिंह शंटी के मुताबिक, आरिफ खान ने मुस्लिम होकर भी अपने हाथों से 100 से अधिक हिंदुओं के शव का अंतिम संस्कार किया था। यह उनकी शख्सियत का दर्शाता है कि वह धर्म-जाति से ऊपर उठकर कितना नेक काम कर रहे थे।
जितेंद्र सिंह शंटी का कहना है कि आरिफ खान 24 घंटे कोरोना संक्रमितों के लिए उपलब्ध रहते थे। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने दिल्ली में रात 2 बजे कोरोना के मरीजों को घर से ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया था। इनमें से कुछ की मौत के बाद उन्हें अंतिम संस्‍कार के लिए भी लेकर गए थे। बिना किसी थकान और शिकायत के। आरिफ की हिम्मत की दाद देनी होगी, क्योंकि 3 अक्टूबर को तबीयत खराब हुई थी, लेकिन वह कोरोना संक्रमित को लेकर अस्पताल जा रहे थे। शहीद भगत सिंह सेवा दल की तरफ से अब तक कुल 623 कोरोना संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाया गया है, जिनमें 200 से ज्यादा मरीजों को आरिफ ने पहुंचाया। मुहम्मद आरिफ खान अपने परिवार के साथ वेलकम इलाके में स्थित लोहा मंडी में किराये के एक घर में रहते थे। आरिफ परिवार के मुखिया थे और परिवार का खर्च चलाने की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। बड़े बेटे आसिफ ने के मुताबिक, पिछले हफ्ते 6 अक्टूबर को अब्बू के कोरोना संक्रमित होने का पता चला था। ऑक्सीजन स्तर कम होने पर शुक्रवार को हिंदू बाड़ा राव अस्पताल में भर्ती कराया गया फिर शनिवार सुबह उनकी मौत की सूचना आई।
शहीद भगत सिंह सेवा दल के संस्थापक जितेंद्र सिंह शंटी ने बताया कि मुहम्मद आरिफ खान बहुत ही ईमानदार व सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। अगर उनके फोन पर किसी मरीज का फोन आ जाता था तो वह अपने निजी काम छोड़कर तुरंत उसकी मदद के लिए तैयार हो जाते थे। वह संक्रमित होने से पहले तक लगातार कोरोना मरीजों की सेवा में जुटे रहे। करीब साढ़े छह महीने से तो वह अपने घर भी नहीं गए थे। एंबुलेंस की पार्किंग में ही उन्होंने डेरा डाल दिया था। जब भी उन्हें घर पर जाने के लिए कहा जाता था, तो वह बस यही कहा करते थे कि अभी संक्रमण फैला हुआ है। एंबुलेंस में रोजाना कोरोना मरीजों के बीच रहते हैं। घर जाने पर परिवार को संक्रमित होने का खतरा रहेगा।

सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चितकाल के लिये कब्जा स्वीकार्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिये शाहीन बाग जैसे सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चितकाल के लिये कब्जा स्वीकार्य नहीं है। शाहीन बाग में पिछले साल दिसंबर में संशोधित नागरिकता कानून को लेकर शुरू हुआ धरना प्रदर्शन काफी लंबा चला था।
न्यायालय ने कहा कि धरना प्रदर्शन एक निर्धारित स्थान पर ही होना चाहिए और विरोध प्रदर्शन के लिये सार्वजनिक स्थानों या सड़कों पर कब्जा करके बड़ी संख्या में लोगों को असुविधा में डालने या उनके अधिकारों का हनन करने की कानून के तहत इजाजत नहीं है।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार और दूसरे लोगों के आने-जाने के अधिकार जैसे अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा।
पीठ ने कहा, ‘‘लोकतंत्र और असहमति एक साथ चलते हैं।’’पीठ ने कहा कि इसका तात्पर्य यह है कि आन्दोलन करने वाले लोगों को विरोध के लिये ऐसे तरीके अपनाने चाहिए जो ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अपनाये जाते थे। पीठ ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर विरोध प्रदर्शन के लिये अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता, जैसा कि शाहीन बाग मामले में हुआ।
न्यायालय ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पिछले साल दिसंबर से शाहीन बाग की सड़क को आन्दोलनकारियों द्वारा अवरूद्ध किये जाने को लेकर दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से फैसला सुनाते हुये पीठ ने कहा कि दिल्ली पुलिस जैसे प्राधिकारियों को शाहीन बाग इलाके को प्रदर्शनकारियों से खाली कराने के लिये कार्रवाई करनी चाहिए थी।
न्यायालय ने कहा कि प्राधिकारियों को खुद ही कार्रवाई करनी होगी और वे ऐसी स्थिति से निबटने के लिये अदालतों के पीछे पनाह नहीं ले सकते। शाहीन बाग की सड़क से अवरोध हटाने और यातायात सुचारू करने के लिये अधिवक्ता अमित साहनी ने याचिका दायर की थी।
शीर्ष अदालत ने इस याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई पूरी की थी। न्यायालय ने उस समय टिप्पणी की थी कि विरोध के अधिकार के लिये कोई एक समान नीति नहीं हो सकती है।
साहनी ने कालिन्दी कुंज-शाहीन बाग खंड पर यातायात सुगम बनाने का दिल्ली पुलिस को निर्देश देने के लिये दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने स्थानीय प्राधिकारियों को कानून व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुये इस स्थिति से निबटने का निर्देश दिया था।इसके बाद, साहनी ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। साहनी ने कहा कि व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुये इस तरह के विरोध प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘इसे 100 दिन से भी ज्यादा दिन तक चलने दिया गया और लोगों को इससे बहुत तकलीफें हुयीं। इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए। हरियाणा में कल चक्का जाम था। उन्होंने 24-25 सितंबर को भारत बंद का भी आह्वाहन किया था।’’ भाजपा के पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग ने अलग से अपनी याचिका दायर की थी, जिसमें प्रदर्शनकारियों को शाहीन बाग से हटाने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, कोविड-19 महामारी की आशंका और इस वजह से निर्धारित मानदंडों के पालन के दौरान शाहीन बाग क्षेत्र को खाली कराया गया और तब स्थिति सामान्य हुई थी।

केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन

नयी दिल्ली : देश के प्रमुख दलित नेताओं में से एक केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन गत 8 अक्टूबर को हो गया। उनके पुत्र और लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपने पिता के निधन की सूचना दी। पासवान 74 साल के थे। लोजपा के संस्थापक और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पासवान कई सप्ताह से यहां के एक अस्पताल में भर्ती थे। हाल ही में उनके हृदय की सर्जरी हुई थी।
समाजवादी आंदोलन के स्तंभों में से एक पासवास बाद के दिनों में बिहार के प्रमुख दलित नेता के रूप में ऊभरे और जल्दी ही राष्ट्रीय राजनीति में अपनी विशेष जगह बना ली। 1990 के दशक में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से जुड़े मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने में पासवान की भूमिका महत्वपूर्ण रही। खगड़िया में 1946 में जन्मे पासवान का चयन पुलिस सेवा में हो गया था लेकिन उन्होंने अपने मन की सुनी और राजनीति में चले आए। पहली बार 1969 में वह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए। वह आठ बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और कई बार हाजीपुर संसदीय सीट से सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीते।