Friday, June 26, 2026
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अभी बहुत से राज्य नहीं खोलना चाहते स्कूल

नयी दिल्ली  :  अनलॉक 5.0 के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 15 अक्तूबर से स्कूल खोलने को लेकर हरी झंडी दे दी है। मगर अब भी बहुत से राज्य ऐसे हैं जो स्कूल खोलने के पक्ष में नहीं हैं। जहां कुछ राज्य अब भी इस बात पर विचार-विमर्श कर रहे हैं कि स्कूलों को कब खोला जाए। वहीं कई त्योहारों के मौसम के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि अधिकांश राज्यों में माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। राज्यों में विभिन्न सरकारी विभागों के भीतर परामर्श जारी हैं, जिनमें से कई ने अपनी कैबिनेट बैठकों में भी इस मुद्दे को उठाया है। हितधारकों, विशेषकर माता-पिता के साथ भी बैठकें जारी हैं। कई राज्यों ने स्थिति की समीक्षा के लिए पैनल बनाए हैं। हरियाणा पहले ही स्कूलों को खोल चुका है। वहीं उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड अक्तूबर के तीसरे हफ्ते से स्कूल खोलने के लिए तैयार हैं।
उत्तर प्रदेश चरणबद्ध तरीके से स्कूल खोल रहा है। राज्य में 19 अक्तूबर से नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाओं के लिए स्कूल खोले जा रहे हैं। लेकिन उपस्थिति दर्ज करवाना अनिवार्य नहीं होगा क्योंकि छात्रों के पास ऑनलाइन कक्षाओं को जारी रखने का विकल्प होगा। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिवाली के बाद स्कूल खोलने के संकेत दिए हैं।
महाराष्ट्र ने हाल की कैबिनेट की बैठक में दिवाली खत्म होने के बाद इसपर फैसला लेने का निर्णय लिया है। गुजरात भी दिवाली का इंतजार करेगा। वहीं ओडिशा और असम ने दुर्गा पूजा खत्म होने तक स्कूल नहीं खोलने का फैसला किया है। आंध्र प्रदेश ने दो नवंबर की एक अस्थायी तिथि निर्धारित की है। दिल्ली, गोवा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने अभी तक इसपर कोई फैसला नहीं लिया है। कई राज्यों को लगता है कि स्कूल खोलने की आवश्यकता सीमित या बिना इंटरनेट की पहुंच वाले छात्रों के लिए है।

 

आर्यनंदा बाबू के सिर पर सजा ‘सारेगामापा लिटिल चैंप्स’ की विजेता का ताज

मिला पांच लाख रुपये का नकद इनाम

मुम्बई : जी टीवी के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो ‘सारेगामापा लिटिल चैंप्स’ के आठवें सीजन का शानदार समापन हुआ। इस ग्रैंड फिनाले एपिसोड में जैकी श्रॉफ, शक्ति कपूर और गोविंदा जैसे खास मेहमानों की उपस्थिति में जबर्दस्त रोमांच देखने को मिला। इस सीजन की सबसे बेहतरीन परफॉर्मर्स में से एक आर्यनंदा बाबू को सारेगामापा लिटिल चैंप्स की विजेता के रूप में चुना गया। उन्हें एक प्रतिष्ठित ट्रॉफी के अलावा नगद पुरस्कार के रूप में 5 लाख रुपए का चेक भी दिया गया। इस प्रतियोगिता में हर चुनौती को पार करते हुए आर्यनंदा को कड़ी टक्कर देने वाले फाइनलिस्ट्स – रणिता बनर्जी और गुरकीरत सिंह को क्रमशः फर्स्ट एवं सेकंड रनर अप घोषित किया गया। विजेताओं का चुनाव जनता की वोटिंग के आधार पर किया गया, जिसे दर्शकों का जबर्दस्त प्रतिसाद मिला।
अपनी जीत से बेहद उत्साहित आर्यनंदा ने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो मेरा सपना सच हो गया है! सारेगामापा लिटिल चैंप्स का यह सफर मेरे लिए सीखने का एक बढ़िया अनुभव रहा। मैं सभी मेंटर्स और जजों की आभारी हूं, जिन्होंने हमेशा मेरा सहयोग किया।

देश में 18 करोड़ लोग गठिया रोग से पीड़ित, अब युवा भी बन रहे शिकार

गठिया से बचने के लिए हफ्ते में 5 दिन 30 मिनट नियमित कसरत करें
अपने जोड़ों को चोट लगने से सुरक्षित रखें, गलत तरीके से उठने- बैठने और सोने की आदत न डालें
नयी दिल्ली  : भारत में गठिया के शिकार लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। देश की पूरी जनसंख्या में से करीब 15%, यानी लगभग 18 से 20 करोड़ लोग गठिया की चपेट में हैं। अभी तक यह बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन बदलते परिवेश में यह बीमारी युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। रुमेटॉएड आर्थराइटिस 25 से 30 साल के युवाओं में भी बढ़ रही है। इसके मामले पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में अधिक देखे जा रहे हैं। एम्स दिल्ली में रुमेटोलॉजी विभाग की हेड डॉ. उमा कुमार के मुताबिक गठिया कई प्रकार के होते हैं। गठिया बीमारी भी है और कई सारी बीमारियों का लक्षण भी। लेकिन हर जोड़ों का दर्द गठिया नहीं होता। कैंसर में और थॉयराइड जैसी बीमारियों में भी गठिया हो सकती है।
गठिया होने के बाद भी उसको बेअसर किया जा सकता है
डॉ. उमा कहती हैं कि डाइबिटीज के मरीजों की तरह गठिया के मरीज भी सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। लेकिन उसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। जोड़ों में दर्द और शरीर में अकड़न को नजरअंदाज बिलकुल न करें, अगर ऐसा लगातार हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह लें।
अपनी दिनचर्या को नियमित रखना जरूरी है, इसमें गैप खतरनाक हो सकता है। खाने-पीने से लेकर सोने-जगने और एक्सरसाइज समेत सबकुछ नियमित होना चाहिए।
एक्सरसाइज गठिया से लड़ने के लिए सबसे जरूरी और असरदार हथियार है। नियमित एक्सरसाइज भी बहुत जरूरी है। लेकिन जो कुछ भी एक्सरसाइज हम कर रहे हैं वह डॉक्टर की सलाह पर होनी चाहिए।
हो सकता है गठिया से बचाव
डॉ. उमा ने गठिया से बचने के लिए 11 उपाय बताए। उनके मुताबिक कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर हम इस समस्या से बच सकते हैं।
डॉक्टर उमा के मुताबिक हथेली, उंगलियों, कोहनी, घुटने कूल्हे के जोड़ को चोट लगने से सुरक्षित रखें। गलत तरीके से उठने- बैठने और सोने की आदत न डालें। मोटापे से बचें, कभी-कभी मोटापे से होने वाली बीमारी जैसे डायबिटीज और हाइपरटेंशन भी आर्थराइटिस यानी गठिया की वजह बन सकता है।
गठिया से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि स्मोकिंग यानी बीड़ी और सिगरेट से दूर रहें। कैल्शियम और विटामिन डी युक्त डाइट भी गठिया होने से बचा सकती है। एक्सरसाइज सबसे ज्यादा जरूरी है, हफ्ते में पांच दिन 30 मिनट नियमित एक्सरसाइज करनी चाहिए।
साफ-सफाई रखकर गठिया से बचा जा सकता है। स्ट्रेस यानी तनाव मुक्त रहने से भी गठिया से बचा जा सकता है, इसलिए ज्यादा न सोचें और खुश रहने का प्रयास करें। योग बहुत जरूरी है। योग के कुछ आसन करके हम अपने ऑटो इम्यून सिस्टम को अच्छा बनाए रख सकते हैं। पूरी नींद लेना भी जरूरी है।
फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही खाना चाहिए
डॉ. उमा के मुताबिक, अनुवांशिक कारणों से भी गठिया हो सकती है। यानी आपके पहले की पीढ़ी में अगर किसी को इसके लक्षण रहे हों तो, आगे की पीढ़ी में भी इसके असर दिखने की संभावना रहती है। हालांकि बेहतर खान-पान और अनुशासन ही इसकी काट है।
बार-बार वायरल और बैक्टिरियल इंफेक्शन होना भी गठिया की वजह बन सकता है। हमें वायरल और बैक्टिरियल इंफेक्शन से बचना चाहिए। सब्जियों और फलों में इस्तेमाल होने वाले पेस्टीसाइड भी गठिया के रिस्क फैक्टर में से एक हैं। हमें फलों और सब्जियों को अच्छे से धोकर ही खाना चाहिए।
गठिया रोग क्या है?
गठिया या आर्थराइटिस 100 से भी ज्यादा तरीके क्या होते हैं। गठिया रोग मूलत: प्यूरिन नामक प्रोटीन के मेटाबोलिज्म की वजह से होती है। खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। व्यक्ति कुछ देर के लिए बैठता या फिर सोता है तो यही यूरिक एसिड जोड़ों में इकट्ठा हो जाते हैं, जो अचानक चलने या उठने में तकलीफ देते हैं। ध्यान न देने पर घुटना, कूल्हा आदि इंप्लांट करने की भी नौबत आ जाती है।
(साभार – दैनिक भास्कर)

बीएचएस में ‘चुनौतीपूर्ण समय में सकारात्मक सोच’ पर वेबिनार

कोलकाता : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर बिड़ला हाई स्कूल ने अभिभावकों के लिए विशेष कार्यक्रम किया। इस मोटिवेशनल टॉक यानी प्रेरक बातचीत का आयोजन कक्षा 6 से लेकर 12वीं के विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर किया गया था। चुनौतीपूर्ण समय में सकारात्मक सोच, विषय पर आयोजित इस वेबिनार में वक्ता प्रख्यात मनोविद् व सलाहकार उम्मीद फाउंडेशन की ट्रस्टी सलोनी प्रिया थीं। वे शिक्षा प्रबन्धन. मानवीय विकास, अभिभावकों के मार्गदर्शन के साथ जरूरतमंद बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काम करती आ रही हैं। उन्होंने इस वेबिनार में मानसिक स्वास्थ्य पर बात की और सकारात्मक रहने के तरीके भी साझा किए। उन्होंने भावनात्मक प्रबन्धन के मह्त्व को समझाया। उन्होंने कहा कि बच्चों को संरक्षण, मार्गदशन और भावनात्मक समर्थन की जरूरत है। बिड़ला हाई स्कूल की प्रिंसिपल लवलीन सैगल ने योद्धा बनने की सलाह दी। अभिभावकों ने इस कार्यक्रम में उत्साह के साथ भाग लिया।

 

 

फ्लिपकार्ट ले आया ‘द बिग बिलियन डेज़’

कोलकाता :  त्योहारों के मौसम में फ्लिपकार्ट ग्रुप देश के लाखों रिटेलरों व छोटे कारोबारों को त्योहारों के इस मौसम में प्रसन्न करने के लिए तैयार है। दिनांक 16 अक्टूबर से फ्लिपकार्ट व्होलसेल ऐप और बैस्ट प्राइस के सभी कैश-एंड-कैरी स्टोर्स पर भी ’द बिग बिलियन डेज़’ सेल लांच की जा रही है जो 21 अक्टूबर तक चलेगी।

देश के 9 राज्यों में 28 बैस्ट प्राइस कैश-एंड-कैरी स्टोर्स पर होने वाली ’द बिग बिलियन डेज़’ सेल के तहत 200 से अधिक ब्रांडों और 45 से अधिक श्रेणियों में 800 से अधिक उत्पादों पर आकर्षक ऑफर दिए जाएंगे।

बेस्ट प्राइस सदस्य सीधे स्टोर में जा सकते हैं या बैस्ट प्राइस वैबसाइट / ऐप के जरिए ऑर्डर कर सकते हैं। उन्हें पैकेज्ड फूड, होम केयर, पर्सनल केयर, इलेक्ट्राॅनिक्स व अप्लायंसिस और सामान्य वस्तुओं की विस्तृत रेंज उपलब्ध होंगी जिन पर उन्हें ऐक्सक्लूसिव डील भी मिलेगी।

फ्लिपकार्ट व्होलसेल ऐप की सेवा अभी 16 शहरों में है। इसके जरिए ’द बिग बिलियन डेज़’ के लिए खास तौर पर रैड टेप, ड्यूक, नेवा, क्लोविया जैसे फैशन ब्रांड पेश किए जा रहे हैं तथा फैशन ऐक्सैसरीज़ के लिए नई श्रेणी भी प्रस्तुत की गई है। इस ऐप पर वस्त्रों व फुटवियर के 30,000 नए स्टाइल्स भी शामिल किए गए हैं जिनका ताल्लुक भारत के प्रमुख फैशन केन्द्रों से है; जैसे तिरुपुर, सूरत, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, कानपुर, लुधियाना आदि।

फैशन रिटेलरों को फ्लिपकार्ट व्होलसेल पर अपने पहले सौदे पर 10 प्रतिशत तक की बचत का लाभ मिलेगा तथा थोक खरीददारी पर अतिरिक्त फायदे भी प्राप्त होंगे।

फ्लिपकार्ट व्होलसेल और वालमार्ट इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं हैड आदर्श मेनन ने कहा, ’’अपने बी2बी कारोबारों फ्लिपकार्ट व्होलसेल व बेस्ट प्राइस स्टोर पर पहली बार ’द बिग बिलियन डेज़’ के फायदे पेश करते हुए हम बहुत उत्साहित हैं। यह अनूठी पेशकश फ्लिपकार्ट और वालमार्ट इंडिया के तालमेल का फल है, दोनों ने साथ आकर रिटेलरों की बिक्री व मुनाफा बढ़ाने का बहुत अच्छा अवसर तैयार किया है।’’

इस साल जुलाई में फ्लिपकार्ट ग्रुप ने वालमार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अधिग्रहण की घोषणा की थी जो भारत में बेस्ट प्राइस कैश-एंड-कैरी व्यापार करती है। इस अधिग्रहण द्वारा ग्रुप का उद्देश्य वालमार्ट के थोक कारोबार की मजबूती का लाभ उठाते हुए किराना तथा सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्योगों की उन्नति व समृद्धि को बल प्रदान करना है।

द बिग बिलियन डेज़ के जरिए फ्लिपकार्ट व्होलसेल (बेस्ट प्राइस स्टोर्स समेत) का लक्ष्य रिटेल ईकोसिस्टम के लिए आकर्षक ऑफर लेकर आना है ताकि त्योहारी सीज़न के दौरान पूरे देश के छोटे व्यापारियों के कारोबार को आगे बढ़ाया जाए।

“पचहत्तर वाली भिंडी” का लोकार्पण

कोलकाता : कोलकाता की सुपरिचित संस्था ‘साहित्यिकी’ द्वारा डॉ. नुपूर अशोक के व्यंग्य संग्रह “पचहत्तर वाली भिंडी” का लोकार्पण कार्यक्रम किया गया। गूगल मीट पर आयोजित वर्चुअल संगोष्ठी में यह पुस्तक लोकार्पण प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. प्रेम धनमेजय और उनकी धर्मपत्नी आशा जी ने किया।
कार्यक्रम के आरंभ में डॉ. नुपूर अशोक ने अपने व्यंग्य-संग्रह में से ‘पचहत्तर वाली भिंडी’ रचना का प्रभावशाली पाठ किया। पुस्तक  की समीक्षा करते हुए डॉ. रूपा गुप्ता ने कहा कि ‘व्यंग्यकार तात्कालिकता की रस्सी पर अपना संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है|’ पुस्तक हर दृष्टि से सराहनीय है| ‘पचहत्तर वाली भिंडी ‘ सत्ता के मोह और राजनीति की सड़ान्ध पर  टिप्पणी करती है| उन्होंने “ज़माना तो है फैशन का ” से लेकर “शिकार होकर चले’ तक फैले हुए बाज़ारवाद  का ज़िक्र विशेष रूप से  किया|
प्रसिद्ध व्यंग्यकार डा. प्रेम जनमेजय ने पुस्तक के मुखपृष्ठ को कलात्मक बताते हुए उसके लिए कुमार अमित की सराहना की।  प्रियदर्शन जी की लिखी भूमिका पर उन्होंने व्यंग्य को समझने की दृष्टि के लिए इसे महत्वपूर्ण बताया | उन्होंने कहा कि व्यंग्य रचनाएँ कई पगडंडियों से गुजरती हुई अपनी राह बनाती है| ‘पचहत्तर वाली भिंडी’ रचना भी जिज्ञासा से आरंभ होते हुए राजनीतिज्ञों और उसके बाद अधिकारियों के कुर्सी से चिपके रहने की आदत तक का तार्किक सफ़र तय करती हैं| उन्होंने ‘बेटा बनाम बकरा’ को सामाजिक सरोकारों की रचना बताया और कहा कि व्यंग्य विसंगतियों से गुजरकर ही साहित्य में अपना मुकाम हासिल करता है|
अपने लेखकीय वक्तव्य में नूपुर अशोक ने रचनाओं के पुस्तक बनने तक की यात्रा पर दिलचस्प ढंग से प्रकाश डालते हुए कहा कि वह वक्ताओं द्वारा दिए गए सुझावों के मद्देनजर अपनी रचनाशीलता को और भी गंभीरता से लेते हुए उन्हें निखारने का प्रयास करेंगी।
संवाद सत्र में डॉ. पूनम पाठक द्वारा पूछे गए  प्रश्न, “क्या व्यंग्यकार बनने के लिए शास्त्र पढ़ने की जरूरत होती है?” के उत्तर में प्रेम जनमेजय ने कहा, नैसर्गिक प्रतिभा व दृष्टि की जरूरत होती है| अध्यक्ष कुसुम जैन ने के सवाल  कि “व्यंग्य की आलोचना कैसे अच्छी लिखी जा सकती है?” के जवाब में प्रेम उन्होंने  गौतम सान्याल ,डॉ. रुपा गुप्ता, रविश तिवारी जैसे अच्छे आलोचको का ज़िक्र करते हुए कहा  कि व्यंग्य का विधिवत आलोचना शास्त्र नहीं होता| व्यंग्य का आधार विसंगति होता है और साहित्य की हर विधा से जुड़ने पर ही व्यंग्यकार ,साहित्यकार बन सकता है।
 अध्यक्षीय वक्तव्य में कुसुम जैन ने दिया।  कार्यक्रम का संचालन संजना तिवारी ने किया एवं  पूनम पाठक ने तकनीकी व्यवस्था को संभाला।

शुभजिता रसोईघर प्रतियोगिता

आपको खाना बनाना, खिलाना काफी अच्छा लगता है और दुनिया भर की व्यंजन विधियाँ आपने डायरी में नोट कर रखी हैं तो वक्त है कि अब आप अपना हुनर सबको दिखाइए। शुभजिता रसोईघर में समय – समय पर हम आपको एक खास थीम देंगे जो कुछ भी हो सकती है, कोई त्योहार भी हो सकता है, कोई सब्जी भी हो सकती है। आपको इस थीम पर एक शुद्ध शाकाहारी रेसिपी भेजनी है। कोई एक विजेता चुना जाएगा…और उसकी रेसिपी हम शुभजिता वेब पत्रिका में प्रकाशित करेंगे। आप वीडियो भेजना चाहती हैं तो रॉ फुटेज ही भेजें। इसके अतिरिक्त विजेता को शुभजिता की ओर से एक ई प्रमाणपत्र भी मिलेगा। इसके अतिरिक्त प्रोत्साहन के लिए 2 व्यंजन विधियाँ हम प्रकाशित करेंगे।

टाइप की गयी रेसिपी ही हम स्वीकार करेंगे इसलिए स्कैन या फोटोकॉपी न भेजें। आपके फोन में भी आप रोमन लिपि में टाइप कर सकती हैं। व्यंजन विधि हिन्दी में ही भेजें। सामग्री और अनुपात स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए। अस्पष्ट व्यंजन विधियों को स्वीकार करना शुभजिता के लिए सम्भव नहीं होगा। इसके अतिरिक्त आप टिप्स भी भेज सकती हैं। प्रविष्टि के साथ अपना नाम और सम्पर्क, अपनी और अपनी प्रविष्टि की तस्वीर देना न भूलें… ऐसा न होने पर प्रविष्टि स्वीकार नहीं की जा सकेगी।

अगर आप विजेताओं की सूची में शामिल हैं तो कृपया प्रतियोगिता के लिए कम से कम 2 महीने के लिए अपनी प्रविष्टि न भेजें जिससे हम अधिक से अधिक नये लोगों को मौका दे सकें।

शुभजिता पर व्यंजन विधि अपलोड करने के लिए कृपया इस लिंक पर जाएं 

https://www.shubhjita.com/registration/

आप शुभजिता पर पंजीकरण करके रेसिपी अपलोड भी कर सकती हैं मगर याद रहे पब्लिश न करें…ड्राफ्ट में रहने दें। साथ व्यंजन और अपनी एक तस्वीर भी अपलोड करें या इस मेल पर भेजें –

[email protected]

परामर्श – शुभजिता एक वेब पत्रिका है जो अपडेट होती रहती है। परामर्श है कि लेखक अपनी प्रकाशित रचना की पीडीएफ प्रति सेव अस (save as) विकल्प में जाकर सुरक्षित कर लें। आप उसका प्रिंट अपने रिकॉर्ड के लिए रख सकते हैं और यह समय पड़ने पर आपके काम आ सकेगी।

आमार पूजो, आमार माँ छायांकन प्रतियोगिता

आमार पूजो, आमार माँ, दुर्गापूजा के अवसर पर आयोजित इस छायांकन यानी फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इस विषय पर तस्वीरें भेज दीजिये।
शीर्ष 12 तस्वीरें शुभजिता में प्रकाशित होंगी। 1 विजेता को मिलेगी शुभ सृजन सम्पर्क सदस्यता कार्ड (अवधि – 1 वर्ष) तस्वीरों का चुनाव आपकी कल्पनाशीलता और सृजनात्मकता के आधार पर होगा। मोबाइल फोटोग्राफी और कैमरे की फोटोग्राफी, ये दो वर्ग हैं। तस्वीर के साथ अपना पूरा परिचय देना न भूलें। अपलोड करते समय पब्लिश का विकल्प कृपया न चुनें। प्रविष्टि को ड्राफ्ट में रहने दें। अन्तिम तिथि दशमी की शाम तक है।
उसमें एक विचार और सन्देश होना चाहिये। ये 12 तस्वीरें आपके नाम के साथ शुभादि नववर्ष कैलेंडर का हिस्सा बनेंगी जो डिजिटल होगा और आप उसे हमारी वेबसाइट से अपलोड कर सकेंगे। आप हमारे इस पेज पर या इस मेल तस्वीरें भेज सकते हैं। एक प्रतिभागी अधिकतम 3 तस्वीरें भेज सकता है। प्रविष्टि भेजने की अन्तिम समय सीमा दशमी की शाम तक। सेल्फी प्रतियोगिता मे शामिल नहीं है
आप तस्वीरें इस वेबसाइट पर अपलोड भी कर सकते हैं। कृपया सबसे ऊपर रजिस्ट्रेशन में जाकर पंजीकरण करें और लॉग इन करके तस्वीर अपलोड कर दें। फोन से तस्वीर अपलोड कर रहे हैं तो इस लिंक पर जाएं
मेल भेजें – [email protected]/

जरूरतमंद बच्चों की वर्चुअल पढ़ाई हुई ‘स्नेह’ के साथ

कोलकाता  : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की समाज सेवा शाखा ‘स्नेह’ सामाजिक कार्यों में हमेशा आगे रही है। हाल ही में ‘स्नेह’ की सदस्य छात्राओं ने जरूरतमंद बच्चों के लिए साक्षरता अभियान चलाया और वर्चुअल तरीके से उनको पढ़ाया। छात्राओं ने बच्चों को पेपर बैग बनाना और ऑरिगेमी सिखायी। इसके साथ अंग्रेजी में सम्पर्क करना भी सिखाया। इसके लिए ‘स्नेह’ ने गैर सरकारी संगठन वर्ल्ड विजन औऱ प्रथम पदक्षेप से हाथ मिलाया और 1 और 2 अक्टूबर यह अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य प्लास्टिक मुक्त दुनिया बनाने के प्रति जागरूक करना था इसलिए उनको कागज के बैग बनाना सिखाया गया।

गहरा है नवरात्रि और ज्योतिष का सम्बन्ध

ज्योतिर्विद् सुनीता सुराणा, मुम्बई

इस महीने में नवरात्रि है हिन्दू धर्म में वर्ष में चार नवरात्र आते हैं। माघ, चैत्र, आषाढ़ और अश्विन माह। चैत्र माह की नवरात्रि को बसंत नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं। बाकी बची दो आषाढ़ और पौष-माघ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। दुर्गा पूजा में इस नवरात्रि का अभिनन्दन चार नवरात्रियों में कुल 36 होते हैं। इन दिनों में शारीरिक और मानसिक रूप से पवित्र और शुद्ध बने हुए हैं।
1) हमारे शरीर में 9 छेद हैं। दो आंख, दो कान, नाक के दो छेद, दो गुप्तांग और एक मुंह। उक्त नौ भागों को पवित्र और शुद्ध करेंगे तो मन निर्मल होगा और छठी इंद्रिय को जाग्रत करेगा। नींद में यह सभी इंद्रियां या छेद लुप्त होकर बस मन ही जाग्रत रहता है। वर्ष की 36 नवरात्रियों में उपवास रखने से अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से आंतरिक सफाई के साथ ही मन में पवित्रता का जन्म होता है।
2) इन नौ दिनों में कम से कम 9 तरह के संयम की जरूरत होती है।
1.आहार पे संयम: इसमें मांस खाना, तामसिक और राजसी भोजन करना मना है। सात्विक भोजन एक समय कर सकते हैं अन्यथा फलाहार ही लें।
2. मद्यमान: इन दिनों में किसी भी प्रकार का नशा ना करें। जैसे मद्यपान, सिगरेट, तम्बाकू आदि।
3.ब्रह्मचर्य पालन: इन दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन न करना पाप माना जाता है।
4. सकारात्मक सोच विचार: यह पवित्र दिन होते हैं। इन दिनों में पूरे नौ दिनों तक माता की भक्ति में ही रहने से किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचार नहीं आते हैं। मानसिक ध्यान करें।
5. वाणी पर संयम: कई लोग इन 9 दिनों मौन रहते हैं। मौन नहीं रह सकते हैं तो कम से कम मुंह से किसी भी प्रकार के कटु वचन, बुरे वचन या गाली का प्रयोग ना करें।
6. मानसिक संयम: नवरात्रि के नौ दिनों में क्रोध, काम, लोभ, आसक्ति, रोना, और अन्य किसी भी प्रकार के उद्वेगपूर्ण भाव नहीं रखना चाहिए। मन को संयम में रखें।
7. वर्जित साधनाएँ: नवरात्रि की इन पवित्र ९ रातों में तांत्रिक कई तरह की अघोर साधना करते हैं, जो सामान्य लोगों के लिए, उचित नहीं हैं, इसीलिए इससे बचें।
8.पूजा कर्म की विधि का ज्ञान: यदि आप माता की साधना, पूजा आदि करना नहीं जानते हैं तो भक्ति सर्वोपरि है। बेवजह की गलतियों से बचें । इसका ध्यान रखें। 9)पूजा स्थल और घर में स्वच्छता का खास ख्याल रखें।
व्रत रखने वाले व्यक्ति को गंदे या बिना स्नान किए वस्त्र नहीं पहनना चाहिए। खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। दुर्गा चालीसा, मंत्र, सप्तशती पाठ या चण्डी पाठ के नियमों का पालन करते हुए नवरात्रों में व्यक्ति को दाढ़ी, नाखून व बाल नहीं कटवाने चाहिए।

सम्पर्क – युग्म एस्ट्रो कन्सल्टेंसी

https://www.yugamastroconsultancy.in/