रांची : कर्ज में फंसी एयरलाइंस कंपनी जेट एयरवेज को नये मालिक मिल गये हैं। लंदन के कालरॉक कैपिटल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएइ) के निवेशक मुरारी लाल जालान वाली कंसोर्टियम अब जेट एयरवेज की नयी मालिक होगी। जेट एयरवेज को कर्ज देने वाली क्रेडिटर्स कमिटी (सीओसी)ने इसकी मंजूरी दे दी है।
करीब एक साल पहले जेट एयरवेज को आर्थिक संकट के कारण बंद करना पड़ा था. रांची के लिए यह गर्व की बात है. गर्व इसलिए कि मुरारी लाल जालान रांची से ही अपने व्यवसाय की शुरुआत की थी. परिवार के कई सदस्य अभी भी रांची में रहते हैं. फिलहाल वह यूएइ में एमजे डेवलपर्स के मालिक हैं। जेट एयरवेज के कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत ब्रिटेन की कलरॉक कैपिटल और संयुक्त अरब अमीरात के मुरारी जालान के प्रस्ताव को शनिवार को मंजूरी दे दी। जेट एयरवेज के समाधान पेशेवर (आरपी) आशीष छावछरिया ने बीएसइ फाइलिंग में कहा कि प्रस्ताव पर इ-वोटिंग के बाद योजना को मंजूरी दी गयी। बंद हो चुकी विमानन कंपनी को दो समूहों से प्रस्ताव मिले थे। जिस समूह के प्रस्ताव को स्वीकार किया गया है, उसमें फ्लोरियन फ्रिट्च द्वारा स्थापित ब्रिटेन की कलरॉक कैपिटल और संयुक्त अरब अमीरात के मुरारी जालान शामिल हैं। एक अन्य बोली हरियाणा की फ्लाइट सिमुलेशन तकनीक केंद्र, मुंबई की बिग चार्टर और अबू धाबी की इंपीरियल कैपिटल इंवेस्टमेंट्स एलएलसी ने मिल कर प्रस्तुत की थी। मुरारी लाल जालान की कम्पनी फिलहाल इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट, माइनिंग और टूरिज्म क्षेत्र में भी कार्य कर रही हैं।
जेट एयरवेज के नये मालिक बने मुरारी जालान
काम के बोझ तले सबसे ज्यादा दबे हुए हैं कोलकाता वाले
कोलकाता : कोलकाता के लोग काम के बोझ तले सबसे ज्यादा दबे हुए हैं, जिसकी वजह से वे अपने परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे। एक संस्था की ओर से देश के 13 शहरों के नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर किए गए सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है। सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक कोलकाता के लोगों पर मानसिक दबाव क्रमशः बढ़ रहा है। कोलकाता के 65 फीसद लोग काम के दबाव के कारण अपने परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे और पेशे की प्रकृति की वजह से 59 फीसद लोग अपने शौक को पूरा नहीं कर पा रहे। इनमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल शामिल है। कोलकाता के 62 फीसद लोगों को महसूस हो रहा है कि व्यस्तता के कारण उनके पार्टनर उन्हें समय नहीं दे पा रहे अथवा वे देना ही नहीं चाहते। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कोलकाता के 66 फीसद लोग काम के दबाव के कारण अपने शरीर की न्यूनतम देखभाल भी नहीं कर पा रहे। उनके लिए जिम, फिटनेस सेंटर अथवा योगासन केंद्र जाने के लिए समय निकालना मुश्किल हो रहा है।
वहीं 43 फीसद लोग पेशागत व्यस्तता के कारण अपने बच्चों के लिए समय नहीं निकाल पा रहे। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो तकरीबन 56.5 फीसद लोगों का मानना है कि काम के दबाव के कारण वे अपना शौक पूरा करने में असमर्थ हैं जबकि 72 फीसद लोगों का मानना है कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल बढ़ने के कारण उनके पार्टनर उन्हें कम समय दे रहे हैं।
इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का
मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं। इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां, जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है । नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य वास्तव में ब्रह्माजी ने दिया था जिसे बारे में दुर्गा कवच में संदर्भ मिल जाता है। ये औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली हैं।
ये शरीर की रक्षा के लिए कवच समान कार्य करती हैं। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है।
1. प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़ – नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकार की समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है। इसमें हरीतिका (हरी) भय को हरने वाली है।
पथया – जो हित करने वाली है।
कायस्थ – जो शरीर को बनाए रखने वाली है।
अमृता – अमृत के समान
हेमवती – हिमालय पर होने वाली।
चेतकी – चित्त को प्रसन्न करने वाली है।
श्रेयसी (यशदाता) शिवा – कल्याण करने वाली।
2. द्वितीय ब्रह्मचारिणी यानी ब्राह्मी- ब्राह्मी, नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वाली और स्वर को मधुर करने वाली है। इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है।
यह मन एवं मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीड़ित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी की आराधना करना चाहिए।
3. तृतीय चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर- नवदुर्गा का तीसरा रूप है चंद्रघंटा, इसे चन्दुसूर या चमसूर कहा गया है। यह एक ऐसा पौधा है जो धनिये के समान है। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है, जो लाभदायक होती है। यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है, इसलिए इसे चर्महन्ती भी कहते हैं। शक्ति को बढ़ाने वाली, हृदय रोग को ठीक करने वाली चंद्रिका औषधि है। अत: इस बीमारी से संबंधित रोगी को चंद्रघंटा की पूजा करना चाहिए।
4. चतुर्थ कूष्मांडा यानी पेठा- नवदुर्गा का चौथा रूप कूष्मांडा है। इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है, इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं। इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक व रक्त के विकार को ठीक कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। यह शरीर के समस्त दोषों को दूर कर हृदय रोग को ठीक करता है। कुम्हड़ा रक्त पित्त एवं गैस को दूर करता है। इन बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को पेठा का उपयोग के साथ कूष्मांडा देवी की आराधना करना चाहिए।
5. पंचम स्कंदमाता यानि अलसी – नवदुर्गा का पांचवा रूप स्कंदमाता है जिन्हें पार्वती एवं उमा भी कहते हैं। यह औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह वात, पित्त, कफ, रोगों की नाशक औषधि है।
अलसी नीलपुष्पी पावर्तती स्यादुमा क्षुमा।
अलसी मधुरा तिक्ता स्त्रिग्धापाके कदुर्गरु:।।
उष्णा दृष शुकवातन्धी कफ पित्त विनाशिनी।
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति ने स्कंदमाता की आराधना करना चाहिए।
6. षष्ठम कात्यायनी यानी मोइया- नवदुर्गा का छठा रूप कात्यायनी है। इसे आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका। इसके अलावा इसे मोइया अर्थात माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त, अधिक विकार एवं कंठ के रोग का नाश करती है। इससे पीड़ित रोगी को इसका सेवन व कात्यायनी की आराधना करना चाहिए।
7. सप्तम कालरात्रि यानी नागदौन – दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि है जिसे महायोगिनी, महायोगीश्वरी कहा गया है। यह नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती है। सभी प्रकार के रोगों की नाशक सर्वत्र विजय दिलाने वाली मन एवं मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली औषधि है। इस पौधे को व्यक्ति अपने घर में लगाने पर घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह सुख देने वाली एवं सभी विषों का नाश करने वाली औषधि है। इस कालरात्रि की आराधना प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को करना चाहिए।
8. अष्टम महागौरी यानी तुलसी- नवदुर्गा का अष्टम रूप महागौरी है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति औषधि के रूप में जानता है क्योंकि इसका औषधि नाम तुलसी है जो प्रत्येक घर में लगाई जाती है। तुलसी सात प्रकार की होती है- सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरुता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र। ये सभी प्रकार की तुलसी रक्त को साफ करती है एवं हृदय रोग का नाश करती है।
तुलसी सुरसा ग्राम्या सुलभा बहुमंजरी।
अपेतराक्षसी महागौरी शूलघ्नी देवदुन्दुभि:
तुलसी कटुका तिक्ता हुध उष्णाहाहपित्तकृत् ।
मरुदनिप्रदो हध तीक्षणाष्ण: पित्तलो लघु:।
इस देवी की आराधना हर सामान्य एवं रोगी व्यक्ति को करना चाहिए।
9. नवम सिद्धिदात्री यानी शतावरी- नवदुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है, जिसे नारायणी या शतावरी कहते हैं। शतावरी बुद्धि बल एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है। सिद्धिदात्री का जो मनुष्य नियमपूर्वक सेवन करता है। उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति को सिद्धिदात्री देवी की आराधना करना चाहिए।
इस प्रकार प्रत्येक देवी आयुर्वेद की भाषा में मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नौ औषधि के रूप में मनुष्य की प्रत्येक बीमारी को ठीक कर रक्त का संचालन उचित एवं साफ कर मनुष्य को स्वस्थ करती है। अत: मनुष्य को इनकी आराधना एवं सेवन करना चाहिए।
या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
(साभार – वेब दुनिया)
त्योहार के मौसम में सेल वाली खरीददारी, इन बातों का रखें ध्यान
त्योहारी सीजन में अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, मिंत्रा, पेटीएम मॉल जैसे ऑनलाइन ई-कॉमर्स ऑनलाइ सेल लेकर आई हैं। इमें प्रोडक्ट पर कई डिस्काउंट के साथ कैशबैक के साथ कई ऑफर हैं, लेकिन अगर आप ऑनलाइन सेल में खरीददारी करते हैं तो इन बातों का ध्यान रखना आपके लिए जरूरी है। सेल में कई बार लोगों के साथ धोखा भी हो जाता है और खराब प्रोडक्ट आ जाता है। बाद सामान वापस करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कई बातों का ध्यान रखना आपके लिए आवश्यक है।
1. ज्यादा डिस्काउंट वाले उत्पादों को परखें
ज्यादा डिस्काउंट पर मिलने वाले उत्पाद अच्छी तरह से जांच कर लें। ज्यादातर डिस्काउंट दो तरह के उत्पाद पर होता है पहला है जिस प्रोडक्ट को लॉन्च किया जा रहा है ताकि उसकी मार्केटिंग हो सके या दूसरा वो उत्पाद जिनका स्टॉक खत्म करना है। ऐसे में नए उत्पाद की खरीदारी सोच-समझकर करें। उसके रिव्यू नहीं होते और आप फर्स्ट हैंड यूजर होंगे। दूसरा वह उत्पाद जो स्टॉक आउट नहीं हो रहे उनको खरीदने से पहले भी ये देख लें कि वह आपके काम का है या नहीं।
2. कैशबैक शर्त को समझें
जिस उत्पाद के साथ कैशबैक मिल रहा है उसकी शर्तों को जरूर समझें। कई बार किसी प्रोडक्ट पर कैशबैक कूपन मिलते हैं और कूपन इस्तेमाल करने की अलग शर्त और पाबन्दी होती है। कुछ उत्पाद के साथ अकाउंट में कैशबैक आता है वह ऑफर अच्छा है। कई बार किसी बैंक का क्रेडिट या डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने पर कैशबैक मिलता है।
3. जरूरी है रिटर्न पॉलिसी
कभी भी कोई वस्तु सेल में खरीदें तो यह जरूर देख लें कि उसकी रिटर्न पॉलिसी क्या है। कई बार ज्यादा डिस्काउंट देखकर लोग सामान खरीद लेते हैं लेकिन पसंद न आने पर या क्वालिटी खराब होने पर रिटर्न करने पर वह रिटर्नेबल नहीं होते।
4. शिपिंग कास्ट का रखें ध्यान
ऑनलाइन शॉपिंग वस्तु की की कीमत अलग होती है लेकिन बाद में शिपिंग चार्ज लगाने के बाद भुगतान करते समय कीमत बढ़ जाती है। ऐसे में भुगतान करने से पहले यह जरूर जांच लें कि उसमें कितनी शिपिंग कॉस्ट है। कई बार ऑनलाइन उत्पाद खरीदने पर हैंडलिंग कॉस्ट जैसे खर्चे भी बढ़ जाते हैं।
5. करें कीमत की तुलना
अगर आप ऑनलाइन सेल में कोई उत्पाद खरीद रहे हैं तो वही उत्पाद दूसरी साइट पर भी कंपेयर करें। इससे आपको उसकी कीमत और गुणवत्ता के बारे में पता चलेगा।
पुष्पम की ‘प्लूरल्स पार्टी’ ने चुनाव प्रचार के लिये अपनायी ‘खोंयछा’ परंपरा
पटना : अखबारों में इश्तेहार के जरिए बिहार की राजनीति में दस्तक देने और स्वयं को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने वाली ‘प्लूरल्स पार्टी’ की प्रमुख पुष्पम प्रिया चौधरी चुनाव प्रचार के लिये ‘खोंयछा’ परंपरा के जरिये मतदाताओं से जुड़ रही है और हर परिवार से कपड़े का एक छोटा टुकड़ा, एक मुठ्ठी अनाज और एक रुपया माँग रही हैं। लंदन स्कूल ऑफ़ इकनॉमिक्स से पढ़ाई करने वाली पुष्पम ने अपने चुनाव प्रचार के इस अभियान का नाम ‘बिहार का खोंयछा’ रखा है । पुष्पम की प्लूरल्स पार्टी अपने अभियान के दौरान एक ओर बिहार में कृषि क्रांति, औद्योगिक क्रांति और नगरीय क्रांति का खाका पेश करके युवाओं एवं पढ़े लिखे तबके तक पहुंचने का प्रयास कर रही है तो दूसरी ओर ‘खोंयछा’ अभियान के जरिये महिलाओं को जोड़ रही हैं । गौरतलब है कि मिथिला में ‘खोंयछा’ को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है । बेटियों के घर से बाहर जाने या कहीं से घर आने पर उन्हें ‘खोंयछा’ देने की परंपरा है । माना जाता है इससे घर में सुख-समृद्धि आती है । ‘खोंयछा’ में अन्न का दाना और एक रुपए का सिक्का काफी अहम होता है। पुष्पम बिहार के जदयू नेता रहे और पूर्व विधान पार्षद विनोद चौधरी की पुत्री हैं ।
बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी प्लूरल्स पार्टी ने प्रथम चरण में 35 उम्मीदवार उतारे हैं । उनका कहना है कि सभी लोग नए हैं, लेकिन ऊर्जावान हैं । उनमें जीतने का जज़्बा है और उससे भी महत्वपूर्ण बिहार को बदलने का संकल्प है । वह खुद पटना की बांकीपुर सीट और मधुबनी की बिस्फी सीट से चुनाव लड़ रही हैं । मधुबनी ज़िले का बिस्फी क्षेत्र, मैथिली कवि- महाकवि विद्यापति की जन्मस्थली है । ‘प्लूरल्स पार्टी’ के प्रत्याशियों के धर्म के कॉलम में बिहारी और जाति की जगह उनका पेशा लिखा है । प्लूरल्स पार्टी ने जिनको प्रत्याशी बनाया है, उनमें ज्यादा डॉक्टर, इंजीनियर और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं । प्लूरल्स की टीम जिस तरह से काम कर रही है, उसको देखते हुए मतदाता उनके, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मॉडल को अपनाने की चर्चा कर रहे हैं । बिहार की मुख्यमंत्री बनने पर अगले 10 वर्षों में प्रदेश को देश का सबसे विकसित राज्य बनाने का दावा करने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी ने ‘भाषा’ से कहा कि वह नहीं चाहती कि उनकी पार्टी की तुलना किसी और दल से की जाए ।
पुष्पम प्रिया ने मार्च के महीने में अपने जनसंपर्क अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा से की थी । उनका कहना है कि वह राज्य के विकास के लिए सकारात्मक राजनीति करेंगी। पुष्पम प्रिया चौधरी ने अपने फेसबुक पेज पर मतदाताओं का आह्वान करते हुए नारा दिया है, ‘‘आइए 2020 चुनाव में बिहार बदल ही देते हैं, हमेशा के लिए! ’’ बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बनाए गए फेसबुक पेज को उन्होंने नाम दिया है, ‘‘लेट्स ओपन बिहार : थर्टी ईयर्स आफ लॉकडाउन’’।
‘घर से काम’ नीति का विस्तार करेगा माइक्रोसॉफ्ट
कुछ कर्मचारियों के लिए इसे स्थायी बनाएगा
ह्यूस्टन : अमेरिका के सिएटल स्थित दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी ‘घर से काम’ नीति का विस्तार करने और कुछ कर्मचारियों के लिए इसे स्थायी बनाने का निर्णय लिया है। कम्पनी ने नया ‘‘वृहद कार्यस्थल’’ दिशानिर्देश जारी किया है जिसमें एक खाका पेश किया गया है किस प्रकार कर्मचारी विभिन्न जगहों पर रहते हुए अधिक लचीले तरीके से कामकाज कर सकते हैं और यहां तक कि वे देश में किसी अन्य स्थान पर भी जा सकते हैं । कंपनी ने कहा है कि वह महामारी के दौरान बदलती जरूरतों को समायोजित करने के लिए काम करती रहेगी। माइक्रोसॉफ्ट कर्मचारियों को उनके कामकाजी सप्ताह के 50 प्रतिशत से कम समय के लिए घर से स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति देगा। इसके साथ ही प्रबंधक दूरस्थ इलाकों से स्थायी रूप से काम करने को मंजूरी दे सकेंगे। माइक्रोसॉफ्ट की कर्मचारियों के मामलों को देखने वाली मुख्य अधिकारी कैथलीन होगन ने आधिकारिक माइक्रोसॉफ्ट ब्लॉग पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हम, कारोबारी जरूरतों को संतुलित करते हुए हर व्यक्ति की कार्य शैली के अनुसार जहां तक संभव होगा, उसका समर्थन करने का प्रयास करेंगे । साथ ही हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि हम अपनी संस्कृति के अनुसार जीवन जीते रहें ।’’ माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्य नडेला ने कहा कि उनका ध्यान तीन प्रमुख विचारों पर केंद्रित हैं कि महामारी के बीच काम की प्रकृति कैसे बदल रही है: सहयोग में काम कैसे होता है, कम्पनियों के अंदर कैसे सीखा जाता है और यह सुनिश्चित करना कि कर्मचारी कैसे बाहर परेशान न हों। कम्पनी ने यह भी कहा कि अधिकांश कर्मचारियों के कामकाजी समय में लचीलापन आया है।
बच्चों के पास नहीं थे ऑनलाइन क्लास के मोबाइल फोन, शिक्षकों ने की मुफ्त व्यवस्था
मुम्बई : कोरोना के संक्रमण से बच्चों को बचाने के लिए ऑनलाइन क्ला स को बढ़ावा दिया गया है। हालांकि ऐसे परिवार के बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में ऐसे बच्चों के लिए मुम्बई म्यूनिसिपल एंड प्राइवेट उर्दू टीचर्स यूनियन मोबाइल फोन पुस्तकालय की शुरुआत की है। यूनियन ने कक्षा 1-10 के छात्रों के लिए इमामवाड़ा क्षेत्र में एक मुफ्त मोबाइल फोन पुस्तकालय शुरू किया है। आर्थिक रूप से कमजोर छात्र, जो मोबाइल फोन नहीं खरीद सकते थे, वे अब यहां ऑनलाइन कक्षाओं में भाग ले रहे हैं। कक्षा में अब तक 22 छात्र शामिल हो चुके हैं।
केंद्र प्रभारी शाहिना सईद ने कहा कि कुछ छात्रों के पास या तो मोबाइल फोन नहीं थे या उनके परिवार में केवल एक मोबाइल फोन था। तो हमने उनके लिए ये व्यवस्था की है। उन्हें ऑनलाइन पढ़ाया गया और उनका पाठ्यक्रम पूरा किया जा रहा है। कक्षाएं सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक आयोजित की जाती हैं। कोरोना निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
शेरशाहबादी मुस्लिम : जहाँ चाहकर भी बेटियों के लिए रिश्ता नहीं खोज पाते परिवार
सुपौल : मस्तारा बानो अगले साल 50 की हो जाएंगी। लेकिन, आज भी वो अपनी उम्र 32 साल ही बताती हैं। इस उम्मीद के साथ कि शायद ऐसा करने से ही सही, उनके लिए शादी का कोई रिश्ता आ जाए। जीवन के 50 बसन्त अकेले ही गुजार देने वाली मस्तारा को डर है कि अगर वे अपनी असल उम्र बताएंगी तो शादी से जुड़ी उनकी आखिरी उम्मीद भी टूट जाएगी। उम्र के इस मुहाने पर खड़ी मस्तारा इसी तरह शादीशुदा जिंदगी में दाखिल होने के अपने सपने को जिंदा रखे हुए हैं। मस्तारा जिस पंचायत में रहती हैं वहां सैकड़ों महिलाओं का दर्द भी बिलकुल उनके जैसा ही है। पूरी जिंदगी कुंवारी रहना ही इन महिलाओं की नियति है। यह फैसला अगर इन महिलाओं ने अपनी इच्छा से लिया होता तो इसमें कुछ भी गलत नहीं था।
लेकिन, शेरशाहबादी मुस्लिम समुदाय की परंपराएं ही कुछ ऐसी हैं कि इनमें लगभग हर दस में से दो लड़कियां ताउम्र अविवाहित ही रह जाती हैं। बिहार के सुपौल जिले में नेपाल सीमा से बमुश्किल दस किलोमीटर की दूरी पर कोचगामा पंचायत है। मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में ज्यादातर मुस्लिम शेरशाहबादी समुदाय के ही हैं। इस पंचायत के साथ ही सीमांचल के कई दूसरे जिलों और नेपाल में भी शेरशाहबादी समुदाय के लोग रहते हैं। कोचगामा के ही रहने वाले महबूब आलम बताते हैं, ‘शेरशाहबादी समुदाय में लड़की के परिजन न तो अपनी बेटी के लिए रिश्ता खोजते हैं और न ही किसी से ऐसा करने को कह सकते हैं। अगर वे ऐसा करते हैं तो यह समझा जाता है कि लड़की में जरूर कोई दोष है जो खुद ही उसके लिए लड़का तलाश रहे हैं। तब लड़की की शादी और भी मुश्किल हो जाती है।’वे आगे कहते हैं, ‘लड़की वाले सिर्फ रिश्ता आने का इंतजार ही कर सकते हैं। इसलिए जिन लड़कियों के लिए रिश्ता आता है उनकी तो शादी हो जाती है, लेकिन जिनके लिए नहीं आता वो ताउम्र सिर्फ रिश्ते का इंतजार ही करती रह जाती हैं।’
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अबु हिलाल बताते हैं, ‘महिलाओं के अविवाहित रह जाने की यह समस्या तब से मजबूत हुई जब से लोग दहेज के लालच में फंसना शुरू हुए। अब उन्हीं लड़कियों की शादी आसानी से होती है जो या तो खूबसूरत हों या जिनके पास दहेज देने के लिए पैसा हो। जिन लड़कियों का कद कुछ कम है, रंग गोरा नहीं है या नैन-नक्श अच्छे नहीं हैं उनकी शादी नहीं हो पाती। कई बार ऐसा भी होता है कि दो-तीन बहनों में से लड़के वाले छोटी बहन को पसंद कर लेते हैं। ऐसे में बड़ी लड़की से पहले छोटी की शादी हो जाती है और फिर बड़ी की शादी लगातार मुश्किल होती चली जाती है।’
शेरशाहबादी समुदाय में अविवाहित महिलाओं की कुल संख्या कितनी है, इसका कोई ताजा आँकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन, हाल ही में आई वरिष्ठ पत्रकार पुष्यमित्र की चर्चित किताब ‘रुकतापुर’ के अनुसार, सिर्फ कोचगामा पंचायत में ही कुछ साल पहले 35 साल से ऊपर की अविवाहित महिलाओं की संख्या 140 से ज्यादा थी। कोचगामा पंचायत के दो बार मुखिया रह चुके और साल 2010 में कांग्रेस से विधानसभा चुनाव लड़ चुके शाह जमाल उर्फ लाल मुखिया बताते हैं कि कुछ साल पहले इस समस्या को सुलझाने के लिए पूरे समुदाय ने एक बैठक बुलाई थी। करीब सात साल पहले भारत और नेपाल के अलग-अलग इलाकों में रह रहे शेरशाहबादी समुदाय के लोगों ने इस बैठक में शामिल होकर तय किया था कि अब लड़की वालों को भी रिश्ता खोजने या इसकी पहल करना शुरू कर देना चाहिए। लाल मुखिया कहते हैं, ‘इस पहल से काफी असर हुआ। अब ऐसी लड़कियों की संख्या कम है, जिनकी शादी नहीं हो रही हो। अब तो लड़कियां खुद भी लड़के को पसंद कर लेती हैं और उनकी शादी हो जाती है।’ लाल मुखिया की इस बात से गाँव के अन्य लोग सहमत नहीं हैं। अबु हिलाल कहते हैं, ‘उस बैठक के बाद भी कुछ नहीं बदला है। लोग आज भी लड़की का रिश्ता लेकर नहीं जाते।’
आज भी समुदाय की लड़कियों के लिए घर से निकलने पर सौ पहरे हैं, उन्हें काम करने या मजदूरी करने की भी इजाजत नहीं है और वे पढ़ाई भी सिर्फ मदरसों में ही कर सकती हैं। द हंगर प्रोजेक्ट के लिए काम करने वाली शाहीना परवीन ने इन महिलाओं की आवाज कई बार उठाई है। शाहीना परवीन मानती हैं कि इस समस्या से निकलने के लिए जो कदम उठाए जाने चाहिए, उनमें से एक अहम कदम लड़कियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना भी है। वे कहती हैं, ‘ये लड़कियां अगर बाहर निकलेंगी, अच्छी पढ़ाई करेंगी और नौकरियां करने लगेंगी तो निश्चित ही इस समस्या से भी निकल जाएंगी।’
लेकिन, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मुस्लिम समुदाय में ऐसा होना बहुत मुश्किल है। वहां तमाम मौलवी लड़कियों को मदरसों तक ही सीमित रखने की वकालत करते हैं और लोग उन्हीं की बात मानते हैं। बल्कि लड़कियों पर भी मौलवी के उपदेशों का ही सबसे मजबूत असर रहता है।
जो लड़कियां अविवाहित रह जाती हैं वो अपनी पैतृक सम्पत्ति पर भी दावा नहीं कर पाती। ऐसे में वो लड़कियां हमेशा अपने भाई पर बोझ समझी जाती हैं और माना जाता है कि वे भाई के रहम पर ही पल रही हैं और भाई उन्हें साथ रखकर उन पर अहसान कर रहा है।’बिहार में जब चुनाव होने जा रहे हैं तो शेरशाहबादी समुदाय की इन हजारों अविवाहित महिलाओं का मुद्दा किसी के लिए भी चर्चा का विषय नहीं है। जिस विधानसभा क्षेत्र में इस समुदाय की बहुलता है, वहां भी इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं है।
शाहीना परवीन कहती हैं, ‘इनमें से अधिकतर महिलाएं कुपोषण और एनीमिया से पीड़ित होती हैं क्योंकि बेहद मुश्किल से इन्हें दो वक्त का खाना नसीब होता है। रमजान में जो लोग जो दान-धर्म करते हैं उसके सहारे ही इनका पेट भरता है। पॉलिसी के स्तर पर आज तक इनके लिए कुछ नहीं किया गया। विधवा महिलाओं को जो पेंशन मिलती है ये महिलाएं उसकी भी हकदार नहीं होती जबकि देखा जाए तो इनका पूरा जीवन विधवा महिलाओं की तरह ही अकेला और बेसहारा रहकर बीतता है।’
ये अविवाहित महिलाएं अपने हालात के लिए अपनी किस्मत के अलावा किसी और को दोषी नहीं मानती। लेकिन, वे सरकार से इतना जरूर चाहती हैं कि जब पूरे देश को आत्मनिर्भर बनाने की बात हो रही है और आत्मनिर्भर भारत’ का नारा जगह-जगह गूंज रहा है तो सरकार इन्हें भी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कोई पहल करे।
देवी

कैसे करूं आराधन देवी
कैसे तुझे मनाऊं,
सूखा चंदन, बिखरी रोली
कैसे तुझे सजाऊं।
दानव का संहार करे तू
मानव का कल्याण,
सबकी झोली तू भरती है
दे करूणा का दान।
देव दनुज का फर्क मिटा अब
कैसे तुझे बताऊं,
सूजी आंखें, उखड़ी सांसें
कैसे तुझे रिझाऊं।
मानव ही दानव बन बैठा
मचा है हाहाकार
भूल गया जग की मर्यादा
औ जीवन का सार
ऐसे रौरव नरक में माता
कैसे तुझे बुलाऊं।
सूखे फूल, टूटी माला
अब क्या तुझे चढ़ाऊं।
मन बेकल, तन घायल देवी
नयन से बहती धार,
कौन सुने फरियाद हमारी
तुझ पे टिकी है आस।
एक बार फिर
बन कर काली
धर ले हाथ कृपाण,
सारे दानव करें समर्पण
या कर उन पर वार।
हर नारी के ह्रदय में कर माँ
साहस का संचार।
मुझको इतना वर दे मैया
मैं दुर्गा बन जाऊं,
हाथ खड्ग लें मैं भी सबको
अपना शौर्य दिखाऊं।
पापमुक्त कर इस धरती को
“गीत” मैया के गाऊं।
तेरा रूप धरूं माँ पहले
फिर मैं तुझे रिझाऊं।
थाल सजाकर पूजा का, माँ
तेरी बलि -बलि जाऊं।
तेरी शक्ति पाकर माता
मैं तुझ सी बन जाऊं।
तभी करूं माँ पूजा तेरी
तब ही तुझे मनाऊं।
तू मुझमें मैं तुझमें मैया
सबको यही बताऊं।
सारे जग का तम हर ले, माँ
ऐसे दीप जलाऊं।
तेरे चरणों में देवी मैं
सारे असुर सुलाऊं।।
कोविड -19 के मरीजों को मेडीबडी देगा अस्पतालों की जानकारी
कोलकाता : कोविड – 19 के मरीजों की बढ़ती संख्या और मरीजों की परेशानी देखकर मेडीबडी नयी सुविधा लाया है। हॉस्पिटल बेड एविबिलिटी चेकर नामक नया फीचर अब मेडीबडी ऐप पर उपलब्ध होगा जिसमें नजदीकी अस्पतालों की जानकारी भी मिलेगी। ऐप के इस नये फीचर से अस्पतालों में बेड की उपलब्धता, उनका पता भी जाना जा सकेगा। ऐप आईओएस और एन्ड्रॉएड मोबाइल पर डाउनलोड किया जा सकेगा। विस्तृत जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएं –




