पीहूज़ ट्रेज़र प्रकृति से जुड़ा ब्रेंड है जो इको फ्रेंडली फ्यूजन गहने बनाते हैं। हम इस बात पर विश्वास करते हैं कि फैशन सबके लिए है चाहे कोई भी किसी भी जीवन शैली को क्यों न जीता हो।
हम गहने बनाने के लिए जूट, लकड़ी, कपड़े, बांस और टेराकोटा के साथ मेटल व बीड्स वर्क का इस्तेमाल करते हैं। हमारे डिजाइन अनूठे हैं और हमेशा कुछ अलग आइडियाज के साथ कस्टमर से रूबरू होते हैं।
धनबाद : नवजीवन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी धनबाद, ह्यूमन एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट सोसाइटी वाराणसी, माय ड्रीम लाइफ फाउंडेशन जमशेदपुर एवं सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट स्टडीज सिवान, बिहार के संयुक्त तत्वाधान में ‘राष्ट्रीय युवा संवाद’ ( नेशनल यूथ डायलाग) के चतुर्थ सत्र का आयोजन हाल ही में ऑनलाइन ज़ूम प्लेटफार्म पर किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप बॉलीवुड के जाने माने गीतकार डॉ सागर थे जिन्होंने ने हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी भोजपुरी रैप “बम्बई में का बा” को कलमबद्ध किया है l डॉ सागर ने अपने जीवन यात्रा के संघर्ष की बात की और ग्रामीण एवं पिछड़े प्रदेश में रहने वाले युवाओं को संगीत के दुनिया में अवसरों से परिचय कराया उन्होंने गीतों एवं संगीतों के व्यवसायीकरण को भोजपुरी एवं अन्य प्रांतीय भाषाओं के गीतों में अश्लीलता का प्रमुख कारण बताया एवं लेखकों एवं गीतकारों को मौलिक गीतों की रचना के लिए आगे आने का आह्वान किया l
पी.एम. सी.एच., धनबाद के प्रसिद्ध डाॅ. राजश्री भूषण ने भारत में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा:मुद्दे चुनौतियाँ एवं आगे का रास्ता विषय पर अपनी बात रखी l और बताया की अगर आम जनता सरकारी हॉस्पिटल एवं स्वास्थ्य सेवा पर भरोसा नहीं जताती तो आने वाले समय में निजी हस्पतालों पर निर्भर होने के लिए आम जनता को तैयार रहना पड़ेगा l उन्होंने युवाओं को खुशहाल जीवन के लिए स्वस्थ रहें मस्त रहें और व्यस्त रहें का मंत्र दिया l
एस.आर.एस.ए.टी.टी. कॉलेज, हजारीबाग की सहायक प्राध्यापिका श्यामली सलकर ने कहा कि युवाओं को प्रतिशोध के बदले परिवर्तनगामी सोच रखनी होगी क्योंकि आज का युवा ही स्वयं ही अपना पथप्रदर्शक है।बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के विधि संकाय से एल.एल. एम.किये रंजीत पासवान ने कहा कि नागरिक संहिता लागू करना आसान नहीं है किन्तु भारत जैसे लोकतंत्र के लिए यह जरुरी है l
इस पूरे कार्यक्रम के अध्यक्षता बीबीएमकेयू धनबाद के राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ अमूल्य सुमन बेक ने किया। उन्होंने ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में जागरूकता लाने में महती भूमिका निभाती है l आज के युवाओं को पढ़ने की प्रवृति को बढ़ाना होगा, अब लोगों का पुस्तकों से रिश्ता पहले सा नहीं रहा l संचालन दिल्ली के लेखक आलोक कुमार , स्वागत गीत आसनसोल की शिक्षिका अपूर्वा चौहान, स्वागत भाषण एनआरडीएस, धनबाद के सदस्य राजन कुमार , परिचय भाषण धनबाद की प्रशिक्षु शिक्षिका निशा मुखर्जी एवं धन्यवाद ज्ञापन एनआरडीएस धनबाद के सदस्य सतीश कुमार तथा तकनीकी सहयोग एनआरडीएस धनबाद के सदस्य अजय कुमार रवानी, जितेंद्र देवगन, श्रवण कुमार ने किया, पूरे कार्यक्रम के मॉडरेटर धनबाद के शिक्षक व नवजीवन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी धनबाद के संयुक्त सचिव मिथलेश दास थे।
बालुरघाट : प्रतिभा कहीं भी निखर सकती है और इसका एक प्रमाण हैं एक मूर्तिकार। बालुरघाट में रहने वाली एक शिक्षिका जो मिनियेचर मूर्तियाँ बनाती हैं।
मूर्तियों का आकार छोटे से छोटा करना, इनका पूरा ध्यान इस पर ही है औऱ बालुरघाट में ये जाना – पहचाना नाम हैं।
सोमा मुखर्जी लगातार तीन सालों से मा दुर्गा की छोटी से छोटी प्रतिमा बनाने के लिए प्रयासरत है।
बचपन से कुछ न कुछ बनाते रहना ही उनका शौक है और मकसद है दुनिया में सबसे छोटी माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम करने का।
इस बार सोमा ने जीरो प्वाइंट 4 सेन्टीमीटर की प्रतिमा बनाई है जो माचिस की तीलियों पर निर्मित की गयी है। पर बनाई हुई है।
सोमा मुखर्जी कहती हैं, ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में नाम दर्ज कराना चाहती हूँ और मैं पूरी कोशिश कर रही हूँ।’ सोमा मुखर्जी के पति का नाम सैकत मुखर्जी है उनका एक बेटा है । जो बीएससी एग्रीकल्चर फर्स्ट ईयर में है।
शुभ सृजन नेटवर्क के कई उद्देश्यों में से एक प्रमुख उद्देश्य है – भारतीय हस्तशिल्प और कारीगरों को प्रोत्साहित करना। हमारे देश में हुनर तो है…माँग भी है औऱ बाजार भी है मगर नहीं है तो पहुँच…। इस पहुँच के न होने के कारण भी बहुत हैं…उसमें से एक अर्थ का अभाव तो है ही…पर मगर उससे भी बड़ा कारण है भाषा और अच्छी तरह प्रस्तुत न हो पाना। इस लिहाज से कहीं न कहीं एक प्रशिक्षण की जरूरत है जिससे कारीगर हो या व्यवसायी हो या घर से काम कर रही स्त्रियाँ या विद्यार्थी ही हों तो अपनी बात कह सकें…अपना सामान दिखा सकें…बेच सकें…आज सोशल मीडिया से बहुत मदद मिली है…फेसबुक पेज की कमी नहीं है औऱ न ही व्यावसायिक फेसबुक पेज की मगर यह तकनीक भी तो सबके हाथ में नहीं है…तो क्या किया जाए….हमारा आह्वान है कि आप ऐसे लोगों की आवाज बनें और हाथ बनें…खासकर युवा वर्ग जो बहुत कुछ कर सकता है। शुभादि बाजार में एक सामान्य शुल्क देकर आप अपने उत्पाद का प्रचार कर सकते हैं और हमारा प्रयास होगा कि हम आप तक सामान पहुँचा सकें मगर इसके लिए शुल्क अलग से लग सकते हैं। अगर आप एक सामान्य अनुबन्ध के तहत हमारे साथ काम करने के इच्छुक हैं या अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो हम आपकी मदद कर सकते हैं। शुभ सृजन सम्पर्क हिन्दी इन्फो डायरेक्टरी में पंजीकरण कर आप अपनी जानकारी अपलोड करते हैं तो आपको वरीयता और छूट तो मिलेगी ही…आपके या आपके ब्रांड के बारे में जानना लोगों के लिए आसान होगा। यह काम हम तीन रूपों में करेंगे –
शुभादि बाजार से सामान खरीदने के इच्छुक हैं तो हमें कमेन्ट्स बॉक्स में बता दें….या नीचे दिये गये मेल पर मेल कर दें। हम आपकी बात सम्बन्धित उद्यमी तक पहुँचा देंगे।
जरूरतमंद कारीगर – वोकल फॉर लोकल सिर्फ उत्पाद बनाने से सम्भव नहीं है…उसे बाजार तक पहुँचाना भी उतना ही जरूरी है। सोशल मीडिया की ताकत ने हाल ही यह किया है…आप अपने मोबाइल की मदद से बहुतों की सहायता कर सकते हैं..कैसे.. कारीगर और उसके सम्पर्क से जुड़ी जानकारी लीजिए…उसके 4-5 उत्पादों की तस्वीर और जानकारी लीजिए और अपलोड कर दीजिए शुभजिता पर…आपकी एक कोशिश किसी के घर को रोशन कर सकती है। दुनिया भर में न सही, उस शहर के लोग तो आपके जरिए उनकी मदद कर ही देंगे। ये आपकी एक स्टोरी होगी…शुभजिता के लिए जो आपके नाम औऱ आपकी तस्वीर के साथ जाएगी।
(सेवा निःशुल्क)
इसके अतिरिक्त इच्छुक युवा…अनुबन्ध के आधार पर हमसे इसी प्रकार जुड़ सकते हैं और अर्जन के अवसर भी प्राप्त कर सकते हैं।
बाकी सभी के लिए उत्पाद प्रदर्शन शुल्क (प्रोडक्ट डिस्प्ले चार्ज ) है। नये या उभरते उद्यमी हमसे सम्पर्क कर सकते हैं..
इसके अतिरिक्त भविष्य में हमारी योजनाएं बहुत सी हैं…मगर फिलहाल इतना ही..
मौन-गूँज” हिन्दी भाषा की अंतर्राष्ट्रीय वेब पत्रिका (साहित्य एवं सामाजिक सरोकारों की त्रैमासिकी) तथा मौन गूँज वेबसाइट का विधिवत रूप से विमोचन दिनांक गत 18 अक्टूबर को हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक तरीके से संस्थापक एवं मुख्य सम्पादक डॉ.मीनाक्षी सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा डॉ. प्रतिभा गर्ग की सरस्वती वंदना से किया गया। तत्पश्चात सभी अतिथियों ने पत्रिका का मुखपृष्ठ दिखाते हुए विमोचन का कार्य सम्पन्न किया।
विमोचन कार्यक्रम के शुभारंभ में मुख्य संपादक एवं संस्थापक डाॅ. मीनाक्षी सिंह ने विशिष्ट अतिथियों का विस्तृत परिचय देते हुए भव्य रूप से उनका स्वागत किया। अपने स्वागत वक्तव्य में ही उन्होंने पत्रिका के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए कहा कि इस पत्रिका के दो मुख्य उद्देश्य हैं- “हिन्द के साथ, हिंदी का विकास”, साथ ही, समाज के मौन, दलित, प्रताड़ित वर्ग की पीड़ा को मुखर करने के लिए एक सशक्त तथा समर्थ कलमकार वर्ग का संगठन जो सदियों से दबे-कुचले मौन को एक शाश्वत गूँज में परिवर्तित कर सके। समाज के दबे एवं शोषित वर्ग के विचारों, भावों, वेदनाओं और संवेदनाओं को मुखर एवं गूँजायमान करने का कार्य इस पत्रिका के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “मौन सृजन है, गूँज अभिव्यक्ति है”, उन्होंने बताया कि कोई भी संस्थान किसी एक आंख का स्वप्न नहीं होता अपितु कई स्वप्नों का विराट, विशाल पुंज होता है।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में देवेन्द्र कुमार बहल, प्रधान संपादक, अभिनव इमरोज, नयी दिल्ली ने डॉ.मीनाक्षी सिंह जी को प्रसिद्ध संस्थान “हिंदी भाषा सहोदरी” द्वारा प्रदत्त की गयी उपाधि साहित्य व्योम की “परी” की सार्वजनिक रूप से घोषणा की। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथि डाॅ.अकेला भाई, सचिव, पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि यह पत्रिका समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करना चाहती है जिसकी आवाज सदियों से मौन रही है, उन्होंने मुख्य संपादक को हरसंभव सहायता का आश्वासन देते हुए कहा कि साहित्य के विकास में पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ी रहेगी।
इस कार्यक्रम में माननीय अजय भाटिया, अपर पुलिस अधीक्षक ने भी विचार व्यक्त करते हुए अपने अनुभवों को साझा किया कि साहित्य की सेवा करते हुए पत्रकारिता में किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पुलिस की नौकरी के साथ-साथ साहित्य-जगत में पत्रिका के संपादन एवं संचालन की बारीकियों को साझा किया।
इस कार्यक्रम में डाॅ. रचना निगम, संपादक एवं प्रकाशक, नारी अस्मिता, बड़ौदा, ने कहा कि यह गौरव का क्षण है कि आज हिन्दी साहित्य जगत में अंतर्राष्ट्रीय वेब पत्रिका का शुभारंभ किया गया वह भी शोषित तथा प्रताड़ित वर्ग के हित का प्रण लेकर। उन्होंने कहा कि “मौन-गूँज” का नाम ही काफी है इसके उद्देश्य को प्रकट करने के लिए। समाज के उस मौन वर्ग की आवाज को गूँजायमान करना अपने आप में परिलक्षित करता है कि पत्रिका की क्या भूमिका रहने वाली है। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर शैलेन्द्र कुमार सिंह, नेहु, शिलांग ने भारत के विभिन्न प्रांतों में हिंदी के स्वरूपों के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए “मौन गूँज” के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा पत्रिका की पंच लाइन “हिन्द के साथ, हिंदी का विकास” पर विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की।
विशिष्ट अतिथियों में “मौन गूँज” के संरक्षक एवं संपादक माननीय श्री प्रकाश सिंह का रिकॉर्डेड वक्तव्य कार्यक्रम में प्रेषित किया गया। कार्यक्रम में बोलते हुए डाॅ.घनश्याम भारती जी, अतिथि संपादक,मौन गूँज, ने पत्रिका के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम का संचालन कुशल मंच संचालक तथा प्रसिद्ध लेखिका अरुणा उपाध्याय ने “मौन गूँज” की प्रतिभाशाली सदस्य तथा लेखिका निधि अग्रवाल तथा संध्या श्रीवास्तव के सहयोग से किया। उनकी मधुर वाणी एवं प्रभावी मंच संचालन कला से सभी अतिथिगण बहुत प्रभावित हुए । कार्यक्रम में संपादक एवं संस्थापक के “मौन गूँज” की व्याख्या “मौन सृजन है, गूँज अभिव्यक्ति है, मौन स्त्रोत है, गूँज शक्ति है” ने हर वक्ता तथा श्रोता को बहुत ही गहरे तक प्रभावित किया। यह मात्र शब्दों का समूह नहीं है अपितु यह पंक्तियाँ दीपक बन पत्रिका के मार्गदर्शक सिद्धान्त के रुप में संपादन-मंडल एवं रचनाकार सदस्यों को अनवरत प्रेरित करते रहेंगे ।
सभी अतिथियों के जवाबी वक्तव्य के रूप में अपनी बात रखते हुए डॉ. मीनाक्षी सिंह ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में, पत्रिका में शामिल किए गए रचनाकारों को प्रकाशित रचनाओं का पाठ करने के लिए आमंत्रित किया गया जिनमें मुकेश पोपली, छाया वर्मा, सुषमा कनुप्रिया, निधि अग्रवाल, डॉ प्रतिभा गर्ग जी, संध्या श्रीवास्तव, बिनोद कुमार मिश्र तथा कल्पना त्रिपाठी उपस्थित रहे तथा अपने रचना पाठ के माध्यम से उन्होंने पाठकों का ध्यान आकर्षित किया।
अंततः निधि अग्रवाल तथा संध्या श्रीवास्तव के सहयोग से अरुणा उपाध्याय ने समाप्ति की ओर बढ़ते हुए कार्यक्रम का सार ज्ञापित किया एवं कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की तथा पाठकों से यह निवेदित किया कि मौन गूँज की वेबसाइट http://moungoonj.com/ पर जाकर पत्रिका ज़रूर पढ़ें तथा प्रवेशांक पर अपनी प्रतिक्रिया दें।
सबसे पहले तो शुभजिता रसोईघर प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए धन्यवाद। आपकी प्रतिक्रिया ने हमारा उत्साह बढ़ाया और हमारी निर्णायक निशा सलूजा ने इस थीम के लिए जो विजयी प्रविष्टियाँ चुनीं, वह आपके सामने है। इस थीम के लिए हमें जो प्रविष्टियाँ मिलीं…उसमें से कुछ अधूरी सी रहीं और प्रतियोगिता में शामिल नहीं की गयीं। प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अब से वे अपनी व्यंजन विधि के साथ उसकी और अपनी तस्वीर भेजना न भूलें। तस्वीर न रहने पर आपकी प्रविष्टि को स्वीकार कर पाना शुभजिता के लिए सम्भव नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही अपने बारे में, अपने किसी हुनर, योग्यता, रुचि की जानकारी भी दें। बहरहाल शुभजिता रसोईघर की पहली थीम व्रत की थाली थी और इस थीम की विजेता हैं – निभा सिंह, प्रथम उपविजेता हैं सुधा ओझा और द्वितीय उप विजेता हैं…शिखा राय…आप सभी को बहुत बधाई और धन्यवाद
निभा सिंह
विजेता – निभा सिंह
व्यंजन – मालपुआ
सामग्री – 1 कप गेहूं का आटा या मैदा, 2-3 केला मसला हुआ, 1 चम्मच सौंफ पिसी हुई, 3-4 इलायची पिसी हुई, 1 बड़ा चम्मच कद्दूकस किया नारियल, 3-4 छोटा चम्मच चीनी, 3 बड़े चम्मच दूध, आवश्यकतानुसार घी
विधि – मालपुआ बनाने के लिए सबसे पहले दूध में चीनी डालकर एक घंटे के लिए रख दें। तब तक एक बर्तन में आटा छानकर, इसमें मसला हुआ केला ,सौंफ, इलायची और कद्दूकस नारियल डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। जब दूध में चीनी घुल जाए, तो चीनी-दूध के घोल को आटे के मिश्रण में डालकर इसे एक चम्मच से फेंटते हुए मिलाएं।
इस तरह आटे का न ज्यादा गाढ़ा, न ज्यादा पतला पेस्ट तैयार कर लें. यदि पेस्ट अच्छी तरह नहीं बना, तो इसमें थोड़ा पानी डालकर फेंट लें.। अब एक कड़ाही में घी डालकर, उसे गैस पर गर्म करने रखें। घी गर्म होने के बाद गैस की आंच मध्यम करके, एक बड़े चम्मच में आटे का पेस्ट लेकर, उसे गोल पूरी के आकार में घुमाते हुए घी में डालें और पुआ फ्राई करें। मालपुआ दोनों तरफ से पलट कर लाल होने तक सेकें, इसी तरह सभी पुए बनाएं। और फिर दो तार की चाशनी बनाकर उसमें यह मालपुए टिप कर दे। रबड़ी के साथ मालपुए को माँ दुर्गा के भोग के रूप में प्रयोग कर सकते है ।
सुधा ओझा
प्रथम उपविजेता – सुधा ओझा
व्यंजन – वेजी पनीर हनी टिक्का सामग्री – 1 कप पनीर के चौकोर टुकड़े, 1 शिमला मिर्च, 1 सेब, 1खीरा (छिलके के साथ) , 1 चम्मच मधु और नींबू का रस स्वादानुसार, 1 बड़ा टमाटर, 1 छोटा चम्मच काली मिर्च, 2-3 हरी मिर्च, 1बड़ा चम्मच घी, सफेद तिल आवश्यकतानुसार, सेंधा नमक इच्छानुसार विधि – सफेद तिल को हल्का भूनकर निकाल लें। कड़ाही गर्म करें और घी डालें। गर्म होने पर पनीर के टुकड़े डालें। काजू को हल्का सुनहरा होने तक भून लें।
इसके बाद शिमला मिर्च, सेब, खीरा, अखरोट डालकर चला लें। कटी हरी मिर्च और काली मिर्च डालकर अच्छी तरह चलाती रहें। आप या सिर्फ मधु या सिर्फ चीनी इस्तेमाल कर सकती हैं। या फिर आधा मधु और आधी चीनी भी डाल सकती हैं। इस पर नींबू का रस डालें। सबसे अन्त में टमाटर डालें पर ध्यान रहे कि वह गले नहीं। नमक के बगैर भी यह व्यंजन काफी स्वादिष्ट लगेगा। अन्त में भुनी हुई सफेद तिल से सजाकर परोसें।
नोट – यह व्यंजन बगैर नमक के भी खाया जा सर आप चाहें तो सेंधा नमक भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
विधि – पहले मखाने को घी में अच्छी तरह हल्की आँच में 5 मिनट के लिए भून लें। फिर दूध को धीमी आँच पर 10 -15 मिनट के लिए उबालें। फिर उसमें इलायची डालें।
उसके बाद उसमें मखाना डालकर धीमी आँच पर 10 – 15 मिनट पकाएं और फिर उसमें शक्कर डालकर और 10 मिनट तक पकाकर बन्द कर दें। इसे कुट्टु के आटे की पूरी के साथ खाएं।
निशा सलूजा
निर्णायक निशा सलूजा
-शुभजिता रसोईघर प्रतियोगिता की निर्णायक निशा सलूजा वेज होम शेफ हैं। मिस एंस मिसेज बंगाल 2018 की विजेता रह चुकी हैं। बेस्ट फ्रेंड सोसायटी की अम्फान परियोजना की आवाज भी हैं।
कोलकाता : एम पी बिड़ला फाउंडेशन हायर सेकेंडरी स्कूल, बेहला के प्रिंसिपल शिक्षाविद् हरबर्ट जॉर्ज का निधन हो गया है। वे 75 वर्ष के थे औऱ अपने पीछे पत्नी, बेटे और बेटी को छोड़ गये हैं। भवानीपुर सिमेन्ट्ररी में उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को होगा। हरबर्ट जॉर्ज को उनकी अनुशासनप्रियता के लिए जाना जाता है। वे पिछले 30 साल से एम पी बिड़ला फाउंडेशन हायर सेकेंडरी स्कूल, बेहला से जुड़े रहे और शिक्षण संस्थान को नयी ऊँचाइयों पर ले गये। उनके नेतृत्व में स्कूल ने अकादमिक तथा अन्य गैर शैक्षणिक (को -करिकुलर) गतिविधियों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अलग पहचान बनायी। एमपीबीएफएचएसएस से जुड़ने से पहले हरबर्ट जॉर्ज डॉन बॉस्को (लिलुआ) तथा सेंट आगस्टीन्स डे स्कूल, कोलकाता से जुड़े रहे। वे एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (ए एस आई एस सी) के सदस्य भी थे।
भारतीय कम्पनी माइक्रोमैक्स एक बार फिर से बाजार में एंट्री करने की तैयारी कर रही है। इस बार कम्पनी नए ब्रांड और बिल्कुल नए कलेवर में दस्तक देगी। इसका खुलासा खुद कम्पनी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर किया है। माइक्रोमैक्स भरोसेमन्द ब्रांड रहा है और अब कम्पनी फिर फिर से बाजार में दस्तक देने की तैयारी कर रही हैं। कंपनी ने अपने सब-ब्रांड के नाम का खुलासा भी कर दिया है। माइक्रोमैक्स के सहसंस्थापक राहुल शर्मा ने घोषणा की है कि वह जल्द ही बाजार में ‘In’ ब्रांड को लेकर आने वाले हैं। कंपनी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर राहुल शर्मा ने एक वीडियो शेयर किया है और इस वीडियो में उन्होंने अपने अपकमिंग सब-ब्रांड ‘In’ का खुलासा किया है। साथ ही उसके बॉक्स की फोटो भी शेयर की है।
शेयर किए गए वीडियो में कहा गया है कि कम्पनी ने चाइनीज स्मार्टफोन्स के आने के बाद बाजार में अपना अस्तित्व कहीं खो दिया था। लेकिन अब लोग एक बार फिर से मेड इन इंडिया ब्रांड की ओर रूख कर रहे हैं। ऐसे में माइक्रोमैक्स भी आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा बनने जा रहा है। कम्पनी इस बार बिल्कुल अलग अंदाज में एक नया ब्रांड लेकर आने वाली है।
नयीदिल्ली : रसोई गैस सिलेंडर लेने के लिए अब ओटीपी की जरूरत पड़ेगी क्योंकि 1 नवम्बर से नियम बदल रहे हैं। नये नियम के अनुसार अब किसी भी उपभोक्ता को एलपीजी सिलेंडर बिना ओटीपी के नहीं मिलेगा। होम डिलिवरी के समय आपको वो कोड डिलिवरी ब्वॉय को देना पड़ेगा, उस ओटीपी या कोड के बिना अब गैस की होम डिलिवरी नहीं होगी। सूत्रों के हवाले से ऐसी जानकारी मिल रही है कि तेल कंपनियों ने इस नये नियम को लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है। इस कोड बेस्ड डिलिवरी सिस्टम का उद्देश्य गैस की हेराफेरी को रोकना है। ओटीपी नियम लागू हो जाने से गैस की चोरी रोकी जा सकेगी। तेल कंपनियों ने इस कोड बेस्ड सिस्टम को डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड नाम दिया है। सौ स्मार्ट शहरों में होगा लागू
जानकारी के मुताबिक डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड सिस्टम अभी सिर्फ सौ स्मार्ट शहरों में लागू होगा। बताया जा रहा है कि इस सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट पहले से ही जयपुर में जारी है और इसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं जिसके बाद इसे दूसरे शहरों में भी लागू करने की योजना पर काम हो रहा है। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जायेगा कोड
नये सिस्टम में उपभोक्ता जब गैस की बुकिंग करेगा तो उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर पर कोड भेजा जायेगा, जिसे डिलिवरी के वक्त उसे डिलिवरी ब्वॉय को देना पड़ेगा अन्यथा गैस की डिलिवरी नहीं होगी. ऐसे में यह जरूरी है कि अगर आपका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नहीं है, तो उसे जल्दी से अपडेट करा दें अन्यथा एक नवम्बर से आपको गैस लेने में परेशानी हो सकती है