Friday, April 10, 2026
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शुभजिता शॉपिंग बैग – नये ऑफर

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मिन्त्रा, ऑफर अवधि – 31 अक्टूबर 2020

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मामा अर्थ, ऑफर अवधि – 31 अक्टूबर 2020

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जिवामे, ऑफर अवधि – 31 अक्टूबर 2020

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न्याय

  • गीता दूबे

अंधों के दरबार में बहरे करते न्याय

जनता यूं रोए जैसे छूरी तले हो गाय।

प्रजातंत्र में हो रहा कैसा यह अन्याय

नेता चुननेवाले सब दूर खड़े पछताय।

रोज तमाशा होता है राजा के दरबार

संविधान की अस्मिता होती तार तार।

नारीपूजक देश का कैसा यह व्यवहार

बेटियों की अस्मत लुटती भरे बाजार।

रक्षक ही भक्षक बने तोड़ रहे कानून

मजलूमों के दर्द का खोया है मजमून।

दिल के सारे अरमां हो गये खूनमखून

रोटी रूखी खाने को बचा नहीं है नून।

कौन सुने फरियाद, किसे सुनाएं हाल

राजा मद में मत्त हो भूला अपनी चाल

भुला देश को नेता, चले अमीरी चाल

किलस रही है जनता बन कर कंगाल।

कौन बनेगा आज देश का तारणहार

चारों ओर मचा है, केवल हाहाकार।

जनता जब भी चेतेगी, होगी होशियार

तभी रोशनी आएगी, भागेगा अंधकार।

 

बंगाल में महिला उद्यमियों की सहायता के लिए आया डब्ल्यूबीएमसी

कोलकाता : महिला उद्यमियों की सहायता के लिए अब बंगाल में वेस्ट बंगाल मार्केटिंग काउंसिल (डब्ल्यूबीएमसी) आ गयी है। डब्ल्यूबीएमसी का डिजिटल लोकार्पण आगामी 10 अक्टूबर को किया जाना है। विमेन्स इंडियन चेम्बर ऑफ कॉमर्स (विक्की) के पूर्वी क्षेत्र के प्रयासों से इसकी शुरुआत हो रही है। इसका उद्देश्य विभिन्न पृष्ठभूमि से आने वाली महिला उद्यमियों की सहायता करना और उनको सशक्त बनाना है। डब्ल्यूबीएमसी के वर्चुअल उद्घाटन समारोह में रीच आई जी ब्रांड निर्माता व मार्केटिंग प्रोफेशनल इन्द्रनील गांगुली तथा फ्यूजर फिट एलएलपी की सह संस्थापक व स्ट्रैटेजिक ब्रांड कन्सल्टेंट वीतिका एस. बनर्जी मौजूद रहेंगी। विक्की की संस्थापक डॉ. हरबीन अरोड़ा विश्व की 100 स्थापित हस्तियों में शामिल हैं जो महिलाओं के लिए लगातार काम कर रही हैं।

कोविड -10, लॉक डाउन और पत्रकारिता

पॉपुलेशन फर्स्ट द्वारा आयोजित वेबिनार का वीडियो 

भारत में आई2प्योर ने लांच किया ‘आई2क्योर’

नयी दिल्ली : वैश्विक महामारी के मद्देनजर आई2प्योर ने आज भारत में आई2क्योर पेश किया है। जैव-प्रौद्योगिकी कंपनी ने इसमेें मोलेक्यूलर आयोडीन के जैव-रासायनिक गुणों का लाभ लिया है।
आई2क्योर डॉ. जैक केसलर (आई2क्योर के पिता) की दिमाग उपज है और यह एफडीए के नियमों का अनुपालन करता है और आईएसओ 9001ः 2015 और डब्ल्यूएचओ जीएमपी प्रमाणित प्रोडक्ट है। डॉ. जैक केसलर के आविष्कारों के लिए उनके नाम लगभग 26 पेटेंट दर्ज हैं। (इस संख्या में शामिल हैं ऐसे पेटेंट जिनके आवेदन किए गए हैं और जो संयुक्त राज्य अमेरिका के पेटेंट और ट्रेडमार्क कार्यालय (यूएसपीटीओ) से मान्यता प्राप्त हैं।)
आई2क्योर एक बायो-शील्ड एंटीसेप्टिक लोशन है। उपयोग में आसान यह सिंगल-यूज़ ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीमाइक्रोबियल है जो कोविड-19 के खिलाफ आयोडीन की सुरक्षा प्रदान करता है। अल्कोहल-आधारित सैनिटाइजर से भिन्न आई2क्योर 12-घंटे तक वायरस, बैक्टीरिया और फंगस के खतरों से संपूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त आयोडीन त्वचा को पोषण और नमी देता है जबकि अल्कोहल-आधारित प्रेडक्ट त्वचा में सूखापन और दरार पैदा करते हैं।
नयी पेशकश पर डॉ. जैक केसलर (आई 2 क्योर के आविष्कारक) ने कहा, ”आई2क्योर पेश करने का मकसद दुनिया को ऐसा प्रोडक्ट देना है जो कीटाणुओं और रोगाणुओं के खिलाफ केवल छोटी अवधि की सतही सुरक्षा नहीं दे बल्कि इससे बढ़ कर लाभदायक हो। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हम ने वर्षों के शोध से एक फाॅर्मूला तैयार किया है जो हमें हमारे अदृश्य, सूक्ष्म दुश्मन पर जीत दिलाएगा। आई2क्योर तुरत-फुरत काम आने वाले कीटाणुनाशक से भिन्न आपकी त्वचा की रक्षा के लिए त्वचा के लिए हानिकारक अल्कोहल के बजाय मोलेक्यूलर आयोडीन का उपयोग करता है। आई2क्योर का पेटेंट मोलेक्यूलर आयोडीन फाॅर्मूला वास्तव में त्वचा में समा जाता है और फिर भाप बन कर बाहर आता है जो आपके हाथों की त्वचा को 12 घंटे तक रोगाणुरोधी बना देता है।”
डगलस स्पिट्ज (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आई2क्योर) ने बताया, “हम हमारे अदृश्य, अत्यंत सूक्ष्म दुश्मनों का खात्मा करने का समाधान देने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं। कोई2क्योर में हम एक क्रांति चाहते थे। हाथों की सच्ची सुरक्षा का समाधान चाहते थे और हम ने यह कर दिखाया। हम ने सक्रिय तत्व के रूप में मोलेक्यूलर आयोडीन इस्तेमाल कर कीटाणुनाशक का विकास किया। चिकित्सा विज्ञान में आयोडीन की गिनती सबसे पुराने और सबसे प्रभावी रोगाणुरोधी एजेंटों में होती है। इसलिए हम ने आयोडीन के असर को एक कदम बढ़ा कर त्वचा के अंदर फ्री मोलेक्यूलर आयोडीन पहुंचा दिया है। इतना ही नहीं, कोई बैक्टीरिया या वायरस आयोडीन प्रतिरोधी नहीं है इसलिए इससे कोई दवा प्रतिरोधी रोगजनक नहीं पैदा होगा।”
आई2क्योर का सक्रिय एजेंट मोलेक्यूलर आयोडीन है। यह आपकी त्वचा में समाता है, और इसका दाग या गंध नहीं लगता है। इस तरह यह धुल कर या रगड़ कर हटता नहीं है।
आई2क्योर के बारे में
आई2क्योर एक जैव प्रौद्योगिकी कंपनी है जिसके प्रमोटर संयुक्त राज्य अमेरिका और सिंगापुर के विज्ञान और व्यवसाय जगत के प्रमुख लोग हैं। आई2क्योर डॉ. जैक केसलर (आई2 के पिता) की दिमाग उपज है और यह एफडीए के नियमों का अनुपालन करता है और आईएसओ 9001ः 2015 और डब्ल्यूएचओ जीएमपी प्रमाणित प्रोडक्ट है। इसके पीछे विचार दुनिया को ऐसा प्रोडक्ट देने का है जो कीटाणुओं और रोगाणुओं के खिलाफ महज थोड़ी अवधि के लिए और सतही सुरक्षा से बढ़ कर संपूर्ण सुरक्षा दे।
आई2क्योर दुनिया की पहली कम्पनी है जिसने मोलेक्यूलर आयोडीन आधारित ‘बायो शील्ड’ पेश किया है। यह हाथों के अंदर समा कर स्वच्छता देता है इसलिए न केवल असरदार बल्कि सुरक्षित भी है। साथ ही, हमारी त्वचा को पोषण भी देता है।
आई2क्योर मोलेक्यूलर आयोडीन आधारित मेक इन इंडिया ‘बायो शील्ड’ है। इसके उत्पादन केंद्र हरिद्वार, रुड़की और बद्दी (हिमाचल) में हैं

कोलकाता : पेट की घातक बीमारियों का चलेगा पता लगाएगी पायरो ब्रीद तकनीक

‘पायरो-ब्रीद’ तकनीक में सांसों के सैंपल से ही पेट के रोग की शुरुआती स्तर पर ही पहचान हो जाएगी
कोलकाता : पेट की बीमारियों का पता लगाने के लिए कोलकाता के एसएन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज के वैज्ञानिकों ने नया तरीका खोजा है। इस तकनीक से डॉक्टर मरीज की छोड़ी हुई सांस के ब्रीदप्रिंट से पता लगा लेंगे कि पेट में सामान्य संक्रमण है, अल्सर है या फिर कैंसर जैसा कोई घातक रोग है। इस तकनीक की खोज करने वाले वैज्ञानिकों ने बताया कि इस तकनीक में किसी रोगी के सांसों के सैंपल से ही पेट के रोग की शुरुआती स्तर पर ही पहचान हो जाएगी। इसे ‘पायरो-ब्रीद’ नाम दिया है।

ब्रीदप्रिंट एक तरह से फिंगरप्रिंट की तरह है, जो अनूठा होता है
सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. माणिक प्रधान ने बताया कि ‘पायरो-ब्रीद’ एक तरह का गैस एनालाइजर है, जो वापस आ रही सांस में मौजूद गैस व कणों के खास किस्म के ब्रीद-प्रिंट को स्कैन कर सकता है। ब्रीदप्रिंट एक तरह से फिंगरप्रिंट की तरह है, जो हर व्यक्ति का बिल्कुल अनूठा होता है।
एक हजार से अधिक मरीजों पर तकनीक का किया इस्तेमाल
कोलकाता के साल्टलेक स्थित एएमआरआइ अस्पताल में एक हजार से अधिक मरीजों पर इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसके परिणाम संतोषजनक आए और यह एंडोस्कोपी टेस्ट की तुलना में 96 प्रतिशत सटीक पाया गया है। वैज्ञानिकों ने इस तकनीक का पेटेंट करा लिया है और इसकी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की प्रक्रिया चल रही है। इसका व्यावसायिक उत्पादन अगले साल तक शुरू हो जाएगा।

15 अक्टूबर से खुलेंगे शिक्षण संस्थान, शिक्षा मंत्रालय ने जारी किए दिशा – निर्देश

नयी दिल्ली : कोरोना वायरस महामारी के बीच जनजीवन सामान्‍य करने की कोशिशें जारी हैं। 21 सितंबर से जहां राज्‍यों को कक्षा 9 से 12 तक के स्‍कूल खोलने की छूट दी गयी थी। तो, 15 अक्‍टूबर से सभी स्‍कूल खोलने की अनुमति दे दी है। हालांकि फिलहाल यह छूट केवल नॉन-कंटेनमेंट जोन में आने वाले इलाकों के लिए दी गयी है। स्‍कूल कब से खोले जाएं, वह तारीख राज्‍य सरकारें तय करेंगी। शिक्षा मंत्रालय ने स्‍कूल और उच्च शिक्षण संस्थानों को खोलने को लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। इसी के आधार पर राज्‍यों को अपनी गाइडलाइंस तय करनी होंगी। स्‍कूल खोलने का स्‍टैंटर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) पहले ही जारी किया जा चुका है। जिसमें कोविड से जुड़ी सावधानियों के बारे में विस्‍तार से बताया गया था। आइए जानते हैं नये दिशा – निर्देशों में क्‍या है।
स्‍कूलों, कोचिंग संस्‍थानों के लिए क्‍या हैं दिशा – निर्देश?
राज्‍य सरकारें स्‍कूल/कोचिंग प्रबन्धन  से बातचीत के बाद इन शर्तों को ध्‍यान में रखते हुए फैसला कर सकती हैं:
ऑनलाइन/डिस्‍टेंस लर्निंग को प्राथमिकता और बढ़ावा दिया जाएगा।
अगर स्‍टूडेंट्स ऑनलाइन क्‍लास करना चाहते हैं तो उन्‍हें इसकी इजाजत दी जाए।
विद्यार्थी केवल अभिभावकों की लिखित अनुमति के बाद ही स्‍कूल/कोचिंग आ सकते हैं। उनपर अटेंडेंस का कोई दबाव न डाला जाए।
स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा के लिए शिक्षा विभाग की एसओपी के आधार पर राज्‍य अपनी SOP तैयार करेंगे।
जो भी स्‍कूल खुलेंगे, उन्‍हें अनिवार्य रूप से राज्‍य के शिक्षा विभागों की एसओपी का पालन करना होगा।
कॉलेज, उच्‍च शिक्षा संस्‍थान खोलने के नियम
कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थान कब खुलेंगे, इस पर फैसला उच्‍च शिक्षा विभाग करेगा। इसके लिए गृह मंत्रालय से भी बात की जाएगी।

शिक्षा मंत्रालय के दिशा – निर्देश इस प्रकार हैं:
ऑनलाइन/डिस्‍टेंस लर्निंग को प्राथमिकता और बढ़ावा।
फिलहाल केवल शोधार्थी और पीजी के वो स्‍टूडेंट्स जिन्‍हे लैब में काम करना पड़ता है, उनके लिए ही संस्‍थान खुलेंगे। इसमें भी केंद्र से सहायता पाने वाले संस्‍थानों में, उसका हेड तय करेगा कि लैब वर्क की जरूरत है या नहीं। राज्‍यों की निजी विश्वविद्यालय तथा संस्थान अपने यहां की स्‍थानीय गाइडलाइंस के हिसाब से खुल सकते हैं।

अमेरिका में एक तिहाई महिलाएं कोविड-19 के तनाव के बीच छोड़ना चाहती हैं नौकरी

अमेरिका में 317 फर्म की 40,000 महिला कर्मचारियों पर किया गया सर्वे

अधिकांश महिलाओं को इस बात की फिक्र लगी रहती है कि घर में बच्चों की देखभाल के चलते कहीं उनकी दफ्तर में प्रदर्शन न प्रभावित हो 

वॉशिंगटन : कोविड -19 ने महिलाओं की जिन्दगी पर बुरा असर डाला है और हालत यह है कि लॉकडाउन, घर और दफ्तर के काम के तनाव से परेशान होकर नौकरी छोड़ देने की इच्छा तक जता दी है। अमेरिका में हुए एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी है। ये रिपोर्ट मानती है कि अगर भविष्य में कंपनियों की संख्या बढ़ती है तो लिंग विविधता की वजह से कई कंपनियों को काम करने के लिए महिला कर्मचारियों का मिलना मुश्किल हो जाएगा
एक रिपोर्ट के अनुसार, कोविड -19 के कारण लाखों महिलाएं अपने कॅरियर को बदलने या नौकरी छोड़ने पर विचार कर रही हैं। कोरोना काल के चलते पिछले कुछ महीनों से वर्क फ्रॉम होम करते हुए इन्हें दोहरी जिम्मेदारियों को निभाना पड़ रहा है।
एक और ऑफिस के काम का दबाव तो दूसरी ओर घर में बच्चों की देखभाल का जिम्मा भी इन्हीं पर है। ऐसे हालात में अपने पार्टनर या घर के अन्य सदस्यों की तरफ से मदद न मिलने पर वे अपना करिअर छोड़ने पर मजबूर हैं। यह सर्वे महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ‘लीन इन’ द्वारा किया गया। इसकी स्थापना फेसबुक की सीओओ शेरिल सैंडबर्ग द्वारा 2013 में हुई थी।

यह सर्वे अमेरिका में 317 फर्म की 40,000 महिला कर्मचारियों पर किया गया। इसमें ये पाया गया कि एक तिहाई महिलाएं काम के तनाव की वजह से जॉब छोड़ना चाहती हैं, वहीं अधिकांश महिलाओं को इस बात की फिक्र लगी रहती है कि घर में बच्चों की देखभाल के चलते कहीं उनकी ऑफिशियल परफॉर्मेंस प्रभावित न हो जाए। इस सर्वे के नतीजे यह भी बताते हैं कि महिलाओं के बजाय पुरुषों पर बच्चों की जिम्मेदारी कम होती है। इस वजह से उनका जॉब घर की जिम्मेदारियों के चलते प्रभावित नहीं होता है।
ये रिपोर्ट मानती है कि अगर भविष्य में कंपनियों की संख्या बढ़ती है तो लिंग विविधता की वजह से कई कंपनियों को काम करने के लिए महिला कर्मचारियों का मिलना मुश्किल हो जाएगा। पिछले छह सालों के दौरान अगर कार्यस्थल पर महिलाओं के परफॉर्मेंस की बात की जाए तो उन्होंने मैनेजमेंट के हर स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। लेकिन महिलाओं द्वारा पिछले कई सालों के दौरान अपने काम के प्रति गंभीरता को इस साल की महामारी ने कम कर दिया।
इसकी वजह उन पर पड़ने वाली दोहरी जिम्मेदारी है। महामारी के दौरान घर में रहते हुए उन्हें बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस में शामिल होना पड़ता है। इसके अलावा घर के कामों का असर ऑफिस के कामों को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में अगर वे नौकरी छोड़ने के बारे में सोचती हैं तो आर्थिक असुरक्षा की भावना के चलते उनके लिए ये फैसला लेना भी मुश्किल है। एक कंपनी की वाइस प्रेसीडेंट और दो बच्चों की मां से जब महामारी के दौरान अपनी ऑफिशियल परफॉर्मेंस के बारे में बात की गई तो वह कहने लगी – ”मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं हर मोर्चे पर असफल हो रही हूं। ऑफिशियल वर्क की वजह से मेरे पास बच्चों को देने के लिए पर्याप्त समय नहीं है, वहीं बच्चों की देखभाल करते हुए मैं ऑफिस का काम समय पर नहीं कर पा रही हूं”।
(साभार – दैनिक भास्कर)