हम कितने अंजान
हम कितने नादान
सब कुछ जान
फिर भी अंजान
हम आभासी इस दुनिया के
जीते जागते एक खिलौने
चाबी भी रहस्यमय ताला भी
ऋषि मुनियों ने हमें सिखाया
जीव – जगत क्षणभंगुर है
कान से बहरे बन हम
करते रहे तबाही अपनी
जंगल पेड़ नदी मैदान पहाड़ में
ईंटो की अराजकता आई
सादा जीवन जटिल हो गया
स्त्री-पुरुष में विभेद हो गया
लिंग भाषा और धर्मों में
चलने लगे युद्ध अनवरत
किस दुर्गा की बात करें
लौकिक – अलौकिक के भंवर जाल में
स्त्री को बिठा दिया मंदिर में
सृष्टि का संचालक बन
पुरुष बना सत्ता शासक
स्वयं फंस गयी स्त्री जाति
पूजा-अर्चन के जंगल में
मनुष्यता के मूल मंत्र भूल
आडंबर में हुई लीन
पुरुषों की माया में घिर
भूल गई स्त्रीत्व शक्ति को
भूल गई दुर्गा के अर्थों को
हाथ पैर मन की शक्ति को
शंख चक्र गदा शक्ति त्रिशूल धारिणी
स्त्री के ये अस्त्र-शस्त्र हैं
सृष्टि वाहिनी शक्तिशालिनी
मिट्टी की मूरत में क्यों सिमटी
फेंक सभी बाह्य आवरण
आत्म स्वरूप का ज्ञान कर
सभी रक्त बीज महिषासुर की संहारक बन
हे कल्याण दायिनी!
आभासी दुनिया से निकल
रूप जय यश को पाकर जीवित दुर्गा बन
इस नश्वर संसार को
पुरुष और प्रकृति को जी लो
आभासी इन एहसासों को पल पल भावों में भर लो
स्त्री-पुरुष एक जाति है
पुरुष और प्रकृति के बंधन को
नए अध्याय से जुड़ कर
दुर्गा में स्वयं उतर कर
जीवित जीवन के छिपे रहस्य को पहचानो
हम सब आभासी दुनिया के वरदान।
इम्यूनिटी मजबूत करता है माइक्रोग्रेन्स, 40 अधिक पोषक होता है कोलकाता : कोविड -19 जहाँ चुनौतियों से भरा समय है, वहीं सकारात्मकता से भरी ऐसी खबरें भी आ रही हैं जो मानवता के प्रति विश्वास को पुख्ता कर रही हैं। खासकर युवाओं के प्रति यह विश्वास और गहराता जा रहा है। महानगर के ला मार्टिनियर फॉर ब्वायज में दसवीं कक्षा के एक विद्यार्थी से जुड़ी यह खबर कुछ ऐसी ही है। महज 17 साल का स्वराज कोविड -19 के दौरान लोगों को कैंसर से बचाने और उनकी प्रतिरक्षात्मक शक्ति यानी इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है। उसने माइक्रो ट्रेजर्स नाम का स्टार्ट अप शुरू किया है। इस सामाजिक उद्यमी का पूरे भारत में माइक्रोग्रेन की आपूर्ति करके माइक्रोग्रेन के बारे में जागरूकता पैदा करना है। माइक्रोग्रेन भोजन में प्रयुक्त होने वाला साग होते हैं और वास्तविक सब्जियों की तुलना में 40 गुना पोषक होते हैं। माइक्रोग्रेन्स कैंसर को ठीक करने और रोकने में भी प्रभावी होते हैं क्योंकि इनमें कैंसर विरोधी गुण होते हैं। स्वराज जन स्वास्थ्य, समाजशास्त्र और स्थायी प्रौद्योगिकी के बारे में काफी उत्साहित हैं, और माइक्रो ट्रेजर्स उसके जुनून से जन्मा है।
उन्होंने माइक्रोग्रेन के बारे में जागरूकता फैलाने और अपने समुदाय की मदद के लिए माइक्रो ट्रेजर्स शुरू किए। वे पूरे भारत में माइक्रोग्रेन, बीज, ट्रे, मिट्टी और हाल ही में विटामिन और सप्लीमेंट्स की आपूर्ति करते हैं – सभी लाभ जरूरतमंदों को दान किए जाते हैं। माइक्रो ट्रेज़र सक्रिय रूप से अन्य गैर सरकारी संगठनों, अस्पतालों, वितरकों, सीएसआर नींव और संभावित सहयोग के लिए स्कूलों से भागीदारी की तलाश कर रहा है, ताकि अधिकतम लोगों तक पहुँच सके और एक साथ इस अभियान को बढ़ाया जा सके। स्वराज चाहते हैं कि हर कोई माइक्रोग्रेन का सेवन करे क्योंकि यह कैंसर से बचाता है। उनका कथन है कि रोकथाम इलाज से बेहतर है जो वास्तव में सही है।
स्वराज अपनी वेबसाइट और ऐप के माध्यम से माइक्रोग्रेन बेचता है, जो आईओएस पर उपलब्ध है, जिसे उसने ही डिजाइन किया है। स्वराज ने एक स्वतंत्र शोध अध्ययन भी किया, जिसमें उन्होंने साबित किया कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में माइक्रोग्रेन प्रभावी है और कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से भी रोकता है। यह शोध पत्र इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ट्रेंड इन साइंटिफिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट ( आईजेटीएसआरडी) में प्रकाशित हुआ है। उसने एक पुस्तक भी प्रकाशित की है जिसका नाम है – माई एंडीवर्स विद माइक्रोग्रेन्स ’जहां वह विभिन्न प्रकार के माइक्रोग्रेन, उनके लाभों और उनके विकास के बारे में बात करते हैं। उन्होंने प्रसिद्ध पोषण विशेषज्ञों और रोगियों का भी साक्षात्कार लिया है और इन साक्षात्कारों को अपनी पुस्तक में शामिल किया है। उनकी किताब ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध है। लोग जैविक उत्पादन का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं और इसके अलावा कैंसर का उपचार लागत बहुत अधिक है, यही वजह है कि स्वराज ने इन बीजों की कीमत न्यूनतम दर पर रखी है। वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी का स्वस्थ जीवन हो।
इसके अलावा, स्वराज लोगों और जरूरतमंद बच्चों के लिए नि: शुल्क कार्यशालाएं और वेबिनार आयोजित करता है जहाँ वह उन्हें सिखाता है कि उन्हें माइक्रोग्रेन कैसे उगाना है। उन्हें जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। हाल ही में, स्वराज ने नयी दिल्ली में एक सामाजिक संगठन कैन्फेम के साथ सहयोग किया, ताकि माइक्रोग्रेन और इसके लाभों के बारे में वेबिनार आयोजित किया जा सके। उन्होंने आगे बढ़कर लोगों को यह भी सिखाया कि उन्हें कैसे विकसित किया जाए। स्वराज ने नारायण सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, नयी दिल्ली के डॉक्टरों के साथ बात की और वेबिनार को 1500 से अधिक लोगों ने देखा। उन्होंने महसूस किया कि वे माइक्रोग्रेन से परिचित हो गए।
उसका यह भी मानना है कि प्रतिरक्षा यानी इम्यूनिटी सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है जो आपके पास हो सकती है और माइक्रोग्रेन इसमें मदद कर सकता है। माइक्रोग्रेन छोटे, खाद्य साग हैं जो सब्जियों और जड़ी बूटियों के बीज से उगाए जाते हैं। यद्यपि वे केवल कुछ इंच लंबे हैं, वे परिपक्व पौधों के पोषण मूल्य का लगभग चालीस गुना पोषण देते हैं।
स्वराज, उन्हें मिलने वाले दान के साथ, कोलकाता की सड़कों पर रहने वाले लोगों के लिए माइक्रोग्रेन वितरण अभियान चला रहा है। कोविड-19 महामारी के बीच में, ये लोग बिना किसी सुरक्षा स्रोत के सड़कों पर रहते हैं और सीधे वायरस के संपर्क में आते हैं। स्वराज ने चावल और दालों के साथ-साथ माइक्रोग्रेन का दान किया, जो उन्हें प्रतिरक्षा बनाने में मदद करता है और इन वायरस से लड़ता है। लॉकडाउन में, स्वराज ने 4 माइक्रोग्रेन वितरण अभियान चलाए जहाँ उसने 500 से अधिक परिवारों को माइक्रोग्रेन, दाल और चावल वितरित किए। कोरोनोवायरस से खुद को बचाने के लिए वे सभी मदद पाने के लिए खुश थे और माइक्रोग्रेन का सेवन कर रहे थे।
दुनिया भर में जब भी महामारी ने अपनी दस्तक दी है,और लोगों को बुरी तरह से प्रभावित किया है,तब मनुष्य और मजबूत होकर उभरा हैl यानी जहां एक और महामारी ने लोगों को तबाह कर दिया वहीं दूसरी ओर लोगों को बेहतर तरीके से जीवन जीने के लिए आगे बढ़ाएं हैं। कोरोना वायरस एक अभिशाप होते हुए भी यह एक वरदान के रूप में भी सामने आया हैl एक और समाज में बदलाव देखने को मिला है वही अर्थव्यवस्था को भी नए तरीके से आगे बढ़ने का रास्ता मिला हैl नई खोज के लिए लोगों ने प्रयास किए हैं, और उन्हें सफलता भी मिली है l कार्य करने के नए- नए तरीके विकसित हुए हैंl
कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन में अब कंपनियां अपने कर्मचारियों से वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करवा रही है। यह कंपनियों के सोच में एक बड़ा बदलाव है क्योंकि पहले कंपनियां मानती थी कि कर्मचारी घर से काम नहीं कर सकते ।जबकि आज कर्मचारी घर से सुव्यवस्थित तरीके से काम कर रहे हैं ।वही पहले जिन सेक्टर में घर से काम करने का विकल्प नहीं होता था,वहां भी वर्क फ्रॉम होम के लिए दरवाजे खुल गए है,और ऐसी संभावना बढ़ गई है कि कोरोना के बाद भी कंपनियां इस विकल्प को अपना सकती है ।जिससे कि वह अपने ऑफिस के खर्च को कम कर सकेंगे।कर्मचारियों को अच्छा लैपटॉप, हाई स्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा देकर कंपनियां काम को और सस्ता और सुलभ बना सकती है ।एक और परिवर्तन देखने को मिला मिल सकता है कि अब वर्क फ्रॉम होम हो जाने से लैंगिक समानता को बढ़ावा मिल सकता है । बिना शॉपिंग मॉल गए भी लोग घर बैठे ही अपनी पसंद की चीजें आसानी से ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए खरीद सकेंगे ।इनका प्रचलन काफी तेजी से बढ़ जाएगा ।इंटरनेट पर ऑनलाइन चीजों को बेचने के लिए ई-कॉमर्स कंपनियों की संख्या भी बढ़ जाएगी ।
डिजिटल इवेंट्स को बढ़ावा मिलेगा।फिजिकल रूप से उपस्थित ना होते हुए भी लोग एवं इवेंट्स का आनंद ले सकेंगे ।इंटरनेट पर इस्तेमाल बढ़ जाएगा। डेटा का उपयोग बढ़ जाएगा लोग इवेंट्स में भी ऑनलाइन ही हिस्सा लेंगे।कोरोना वायरस महामारी एक सकारात्मक पक्ष लेकर आई है।लॉकडाउन हो जाने की वजह से दूसरे देशों पर निर्भरता घटेगी।कोरोना के कारण चीन से आने वाले सभी तरह के कच्चे माल की आवाजाही बंद हो जाने से देश के कई मैन्युफैक्चरिंग पाटस के बंद करना पड़ गया है ।अब कंपनियां स्वदेशी तकनीक पर ध्यान देगी, और इसके लिए जरूरी कच्चे माल के लिए बाहर के देशों पर निर्भरता को कम करेंगे ।इससे देश में उत्पादन बढ़ेगा।
लॉकडॉन की वजह से डिजिटल लेन -देन में हुई तेजी, बैंक डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दे रहे हैं,इसके कारण डिजिटल पेमेंट का चलन बढ़ गया है ।कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए आरबीआई के गवर्नर ने ग्राहकों से कहा कि जितना मुमकिन हो उतना डिजिटल बैंकिंग सुविधा का इस्तेमाल करें ।सरकार ने भी इसको बढ़ावा देने के लिए कई प्लेटफार्म को इस कार्य के लिए मंजूरी दी है ।एक तरफ से देखा जाए तो डिजिटल भारत का सपना भी हमारा पूरा हो रहा है।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी अधिक जोर दिया गया है । कोरोना के कारण देश के अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर करने का गंभीर प्रयास हुआ है ।यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा ।पब्लिक हेल्थ सिस्टम में सुधार आया।बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों और कस्बों समेत ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर होगी।
शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है ।दुनियाभर के देशों में स्कूल और विश्वविद्यालयों में इस बात पर जोर दिया जा रहा है,कि अब पढ़ाई के तरीके में बदलाव लाया जाए। लॉकडाउन के कारण ऑनलाइन या वर्चुअल कक्षाओं का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है । ऐसे में भविष्य में छात्रों को वर्चुअल कक्षाओं या ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए ही पढ़ने की आदत डालना पढ़ सकती है।
दूरदर्शन भारत का सरकारी चैनल है ।जिसे लोग प्राय भूल ही गए थे परंतु लॉकडाउन के वजह से “दूरदर्शन”पर ‘रामायण’, ‘महाभारत’ आदि कार्यक्रम पुन प्रसारित किया गया था जिसे लोग काफी ही पसंद कर रहे थे। इसका उद्देश्य सिर्फ कार्यक्रम को दिखाना नहीं बल्कि पूर्व लोक- संस्कृति ,लोकपरंपरा आदि को नई पीढ़ी से अवगत कराना है। इसका लाभ ‘दूरदर्शन’ को मिला।
लॉकडाउन की वजह से जहां देशवासियों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।वहीं कुछ फायदे भी हुए हैं जैसे -वायु प्रदूषण के स्तर में काफी गिरावट भी आई है। पश्चिम बंगाल की यदि बात करें,तो जनवरी महीने में कोलकाता में वायु प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक था ।वायु प्रदूषण में कोलकाता ने नयी दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया था और खतरनाक स्तर पर आ गया था ।’लॉकडाउन’ की वजह से सड़कें सुनसान हो गयीं, गाड़ियों और फैक्ट्रियॉ बंद हो गई । ऐसा केवल कोलकाता में ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी हुआ ।पर्यावरण में वायु शुद्ध हो गई ।वायु प्रदूषण के लिए बदनाम रहने वाले राज्य में तेजी से हालत सुधरी है ।शहरों में पक्षी की चह-चाहट सुनाई देने लगी।
आज की दुनिया में जहां छोटी-छोटी बातों को लेकर इंसान दूसरे इंसान का दुश्मन बनता जा रहा है,उसी समय में कुछ लोग धर्म ,जाति ,संप्रदाय आदि भूल कर एक दूसरे की मदद के लिए अग्रसर हो रहे हैं ।समाज में बहुत अधिक बदलाव देखने को मिला है ।लोगों में कम्युनिटी फीलिंग भर गई है। गरीबों के प्रति लोगों में सहानुभूति बढ़ गई है।साथ ही साथ वैश्विक मानवता और सहचरी का परिचय मिल रहा है ।धैर्य की शक्ति का परीक्षण भी हो रहा है।
इस दुनिया के कुछ छोटे से कोने में रहने वाले कई लोगों के दिल में जानवरों के लिए जो मोहब्बत है, वह वाकई प्रशंसनीय और प्रेरणादाई है ।पूरे देश में पिछले 1 महीने में कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन ने इंसानों से कहीं दयनीय स्थिति जानवरों की हो गई है,क्योंकि इंसान तो फिर भी बोलकर,रोकर या चिल्लाकर अपनी पीड़ा बयां कर सकता है, लेकिन यह मासूम बेजुबान पशु -पक्षी अपनी पीड़ा कहे भी तो किसे?उन्हें तो फिलहाल सुनने वाला भी कोई इंसान नहीं है, अधिकतर लोग अपने घरों के अंदर बैठे हैं ।ऐसी स्थिति में कुछ लोग इंसानियत का फर्ज निभाते हुए इन बेजुबानो की सेवा का फर्ज निभाते हुए बेजुबान की सेवा के लिए आगे आए हैं ।जिनसे हर किसी को सीख लेनी चाहिए ।
मैने खुद नयी-नयी सी रेसिपी सीखी।साथ ही साथ किचन की गतिविधियों में अपने को शामिल किया। हमने साथ मिलकर कई फूलों के पौधे लगाए। कुछ नई किताब पढी और बहुत कुछ नया लिखा भी ।इस भागती -दौड़ती जिंदगी में लॉकडाउन के रूप में जो समय मिला, इस समय हम उन रिश्तेदारों से भी बात की जिनसे जल्दी बात नहीं हो पाती है अर्थात रिश्तेदारो से भी बातें नहीं हो पाती है अर्थात रिश्ते सवारने का एक सुनहला अवसर और इसमें हम छोटी-छोटी बातों में खुश होना सीखा । कोरोना जैसे आपदा से लड़ना सीखा और मिलजुल कर रहना भी सिखाया ।बाहर की नकारात्मक और व्यस्त जीवन में से दूर परिवार के साथ स्वयं खुश रहने और एक-दूसरे को खुश रखने का प्रयास।
कोलकाता : सॉल्टलेक सांस्कृतिक संसद कमेटी और सन्मार्ग द्वारा आयोजित दशहरा उत्सव में मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ 20 फीट लंबा रावण का पुतला जलाया गया। मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतले लगभग 15 फीट लंबे थे । सेंट्रल पार्क (सॉल्टलेक), कोलकाता में आयोजित इस दशहरा उत्सव में कोलकाता नगर निगम के प्रशासनिक बोर्ड के अध्यक्ष फिरहाद बॉबी हकीम, राज्य के अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस, विधाननगर की मेयर, सॉल्टलेक सांस्कृतिक संसद के अध्यक्ष ललित बेरीवाला तथा पूर्व राज्यसभा सांसद विवेक गुप्ता समेत अन्य लोग उपस्थित थे। समारोह का उद्देश्य पश्चिम बंगाल की समृद्ध संस्कृत और परम्परा को लोगों तक पहुँचाना था।
कोविड -19 को देखते हुए हर प्रकार की सावधानी रखी गयी थी। इस आयोजन के बारे में बात करते हुए, सॉल्टलेक सांस्कृतिक संसद के अध्यक्ष ललित बेरीवाला ने कहा, “हमें समारोह आयोजित करने की अनुमति दी गई थी लेकिन सब कुछ सरल तरीके से करने के लिए कहा गया। दशहरे के दिन रावण का पुतला जलाने के लिए हमने कमर कस ली, जहाँ समिति के केवल कार्यकारी सदस्य ही मौजूद थे और जनता के लिए पूरे समारोह का सीधा प्रसारण था। हमने रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण का पुतला जलाया और भगवान से प्रार्थना की कि राज्याभिषेक भी अग्नि में जल जाए। इस बीमारी ने सब कुछ खराब कर दिया है, इसलिए यह दशहरा उम्मीद से अच्छाई के साथ-साथ इस घातक बीमारी पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होगा।
कोलकाता : लॉकडाइन के दौरान महिलाओं के प्रति हिंसा के मामले काफी तेजी से बढ़े। घर से काम करते हुए महिलाओं को शारीरिक, मानसिक और यौन उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है। ऐसी घटनाओं के खिलाफ जागरुकता लाने के उद्देश्य से शी – शगुफ्ता हनाफी इवेन्ट्स ने हाल ही में दुर्गा पूजा के दौरान विशेष कैलेंडर जारी किया जिसमें महिलाओं के दोनों ही रूपों को दर्शाया गया है। शी की संस्थापक शगुफ्ता हनाफी ने कहा कि साल भर माँ दुर्गा के आगमन की प्रतीक्षा की जाती है मगर घरों में जो दुर्गा है, उनका सम्मान नहीं किया जा रहा। महिलाओं को माँ, बहन, पत्नी के रूप में देखा जाता है मगर यह याद नहीं रहता कि वह सबसे पहले एक स्त्री है। कैलेंडर में दर्शायी गयी महिलाएं सामाजिक संस्था बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी की शुभचिन्तक हैं। इनमें प्राणिक हीलिंग विशेषज्ञ पायल वर्मा, किंग क्वीन की विजेता अजन्ता चाकलादार, उद्यमी शफाकत कमाल और किशोरी मॉडल आरुषी वर्मा शामिल हैं। कैलेंडर में महिलाओं के प्रसन्नता और दुःख, दोनों को दर्शाया गया है। इस अभियान के दौरान एक काव्य प्रतियोगिता भी थी जिसमें पूरे देश से 93 प्रविष्टियाँ आयी थीं। इसके अतिरिक्त इसी विषय पर एक नृत्य प्रतियोगिता भी थी। समारोह में अभिनेत्री पापिया अधिकारी, आईसीसीआर के क्षेत्रीय निदेशक, पूर्व गौतम दे औऱ कवि शुषमेली दत्ता भी मौजूद रहे।
टीसीएस, विप्रो, जेपीएमसी, जीवीके बायो, मिंडा और ओला ले रहे हैं मेडीबडी की सेवाएं
कोलकाता : देश में लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिविधियाँ फिर से आरम्भ हो रही हैं । इसे देखते हुए कॉरपोरेट जगत पूरी तरह सजग है और कम्पनियाँ कर्मचारियों का कोविड -19 परीक्षण करवा रही हैं। टीसीएस, विप्रो, जेपीएमसी, जीवीके बायो, मिंडा और ओला जैसी कम्पनियाँ मेडीबडी की सेवाएं ले रही हैं।
एबीएफआरएल जैसे कॉरपोरेट्स ने पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता करने के लिए मेडीबडी, हर किसी के 24 * 7 हेल्थकेयर दोस्त, को ऑनबोर्ड किया है। कॉरपोरेट घराने तेजी से एंटीजन और एंटीबॉडी परीक्षणों के लिए स्क्रीनिंग कर रहे हैं और कोरोनावायरस से अपने कर्मचारियों की रक्षा कर रहे हैं। मेडी बडी की टीम कार्यालयों का दौरा कर रही है और नमूने एकत्र करके परीक्षण में सहायता कर रही है जबकि कार्यालयों में लौटने वाले सभी कर्मचारियों का परीक्षण किया जा रहा है, मेडी बडी नियोक्ता के आधार पर अनुकूलन प्रदान करता है।
इसके अतिरिक्त, जैसे-जैसे मामले बढ़ रहे हैं, मेडी बडी इस महामारी से लड़ने के लिए प्रत्येक नागरिक को भारत भर में घरेलू अलगाव सहायता प्रदान कर रहा है। यह सेवा अलग-अलग लागतों पर 3 पैकेजों में दी जाती है और इसमें आइसोलेशन और अलगाव प्रक्रिया पर मार्गदर्शन, असीमित आहार विशेषज्ञ और फिटनेस विशेषज्ञ परामर्श, 1 महीने के लिए असीमित 24 * 7 टेलीकॉन्सेलेशन, असीमित 24 * 7 कोरोना हेल्पलाइन, लेख, मेलर्स, और जैसी सुविधाएँ हैं। सेवाओं से संबंधित युक्तियां, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से एक आइसोलेशन किट जिसमें शामिल है सैनेटाइजर, पल्स ऑक्सीमीटर, IR थर्मामीटर, और बीएमडब्ल्यू बैग। मेडी बडी की एक टीम आवश्यक स्थापित करने और वितरित करने के लिए घरों का दौरा करेगी और अलगाव प्रक्रिया पर मार्गदर्शन ऑनलाइन किया जाएगा। मरीजों को दवाओं की मुफ्त होम डिलीवरी का भी लाभ मिल सकता है। वे आईसीएमआर के दिशानिर्देशों के अनुसार सेंटर विजिट या होम सैंपल कलेक्शन के माध्यम से कोविड -19 टेस्ट की भी पेशकश करते हैं।
मेडी बडी – डॉक्सऐप के सह संस्थापक तथा सीईओ सतीश कन्नन ने कहा. ‘हमने वायरस से निपटने में मदद करने के लिए एक होम आइसोलेशन सपोर्ट प्रोग्राम की संकल्पना की। हम प्रत्येक भारतीय को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की आशा करते हैं। ”
कोलकाता : टीमएमटी बार निर्माता कम्पनी के 2 (केएवाई2) ने अपनी ब्रांड पहचान को पुख्ता करते हुए नयी तकनीक वाला प्रीमियम टीएमटी ब्रांड ‘के2जेनॉक्स’ उतारा है। कम्पनी के मुताबिक यह नया ब्रांड खास रिब डिजाइन वाला है जो हेक्सागोनल पैटर्न में कंक्रीट के साथ मजबूती से जुड़ जाता है और भूकम्प के जोखिम वाले इलाकों में बेहद उपयोगी है। 720 डिग्री हेक्सागन के इसके आन्तरिक कोण उत्कृष्ट जुड़ाव देते हैं। ‘के2जेनॉक्स’ का उपयोग करने पर स्टील की खपत 20 प्रतिशत कम होती है। ‘के2जेनॉक्स’ के निदेशक सुनील अग्रवाल को उम्मीद है कि इस नये ब्रांड से कम्पनी मजबूत होगी। कम्पनी ने 30 विनिर्माण संयंत्रों से गठबन्धन किया है औऱ देशभर में 3500 डीलरों का तगड़ा नेटवर्क है। कम्पनी को सालाना टर्नओवर 2500 करोड़ रुपये से बढ़कर 3500 करोड़ होने की उम्मीद है।