Tuesday, October 27, 2026
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कारगिल विजय दिवस कार्यक्रम

कारगिल विजय दिवस पर गत 26 जुलाई को यह कार्यक्रम आयोजित किया था। कामायनी संजय ने देशभक्ति गीतों से सजा कार्यक्रम प्रस्तुत किया था…

कफ़न भाग-2

दीपा गुप्ता

जाड़े का समय था। सूरज जल्दी ही डूब गया। माधव को जब तक होश आया तब तक चारों ओर अंधकार छा गया। पक्षी भी अपने घर को लौट चुके थे। घीसू को अब भी बेहोश देख माधव घबराते हुए उसके चेहरे पर पानी की छीटें मारने लगा। घीसू आँखें खोलते ही बोला-क्यों चिल्ला रहा है? देख नही रहा मेरा सर दर्द के मारे फटा जा है ।
“दोनों ने पहली बार शराब को होंठो से जो लगाया था।”
उन्हें याद आया कि- वे तो कफन लेने आए थे। गांव वाले उनका इंतजार कर रहे होगे और बुधिया की लाश वैसे ही पड़ी होगीं।
माधव ने घीसू से पूछा- “जब सब पूछेंगे, एक तो इतना देर ऊपर से खाली हाथ तो हम क्या बोलोंगे”
“चिंता मत कर तू… वहां कोई न होगा हमसे सवाल-जवाब करने वाला।”
दोनों जब घर पहुंचे तो वहां न लोगों की भीड़ जमा थी और न ही बुधिया की लाश थी। काफी इंतजार के बाद दोनों बाप-बेटे न आए तो लोगों ने ही बुधिया की चिता को आग दे दिया।
“आखिर किसके पास इतना समय है जो अपना काम-धंधा छोड़छाड़ उन बेशर्मों के लिए अपना कीमती समय खराब करें।”
दोनों श्मशान घाट पहुंचे। दूर-दूर तक एक परिंदा तक नजर नही आ रहा था।माधव चिता को देखते हुए बोला -“ये हमें माफ करेगी ना।” इस बार घीसू भी मौन होकर आसमान की तरफ देखने लगा।
बुधिया की चिता अभी ठंडी भी नही हुई और उन्हें पेट की चिंता सताने लगी।

घीसू आसमान की ओर देखते हुए बोला-” मालूम होता है आजकल ऊपर वाला सिर्फ अमीरों का है गरीबों का नही।” यही तो थी बिचारी जिसे हमारी फिक्र थी। हमारा पेट पाला करती थी। उसे भी छीन लिया। आज के समय में लोग अपनो से मुंह मोड़ लेते है तो हमें कौन पूछेगा।
माधव ने कहा- “कफन में मिले रुपये में से कुछ पैसे बचे है और जो अनाज मिला था वो भी पड़ा होगा। उससे कुछ दिन का गुजारा तो हो ही जाएगा पर उसके बाद का ….?”
जब मेरी औरत मरी थी,तो तू मेरे पास था इसलिए मैंने दूसरे ब्याह का सोचा नही। तेरे पास तो कोई नही है। मेरी भी उम्र हो चली है.. क्या पता कब मेरा भी बुलावा आ जाए।अकेले पहाड़ जैसे जिंदगी कैसे काटेगा। तू दूसरा ब्याह कर ले, उसके बाद मुझे कुछ हो भी गया तो मैं और बुधिया स्वर्ग में आराम से तो रहेंगे।
“शादी हो गई तो वो भी कोई न कोई काम करके दो जून की रोटी का इंतजाम कर ही लेगीं”- सोचकर माधव ब्याह के लिए हाँ बोल देता है।

नयी सुबह के साथ घीसू माधव के लिए लड़की ढूंढने के काम में लग गया। भला उनके विचित्र जीवन से कौन परिचित न था। घीसू जहां-जहां जाता सब रिश्ते के लिए मना कर देते और बोलते- पागल हो गया है ..जो अपनी बेटी की शादी तेरे माधव से करवाएंगे।
“सही भी था। इन बेगैरतों के घर कौन अपनी बेटी देना चाहेगा। इनके घर बेटी देना मतलब जीते-जी नर्क में झोंकने के समान।”
माधव‌ घीसू से बोला-अब तुम लड़की देखना बंद करो। कोई भी ब्याह के लिए हाँ नही बोलने वाला है इसलिए कुछ और सोचो क्योंकि कुत्तों जैसी मेहनत हमसे होने से रही।
अचानक घीसू को अपने एक दोस्त की याद आती है। तुम्हारा कोई दोस्त भी है। आजतक तो देखा नही। हाँ, और कभी हम बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे। सुना है ना कि-“जब मुसीबत आती है तो परछाई भी साथ छोड़ देती है फिर वो तो दोस्त ही था।”वो तो ठीक है पर जिसने इतने सालों में कभी तुमसे मिलने की कोशिश नही की वो भला अपनी बेटी की शादी मुझसे क्यों करवाएगा। क्योंकि लोगों से सुना है उसकी लड़की के लिए रिश्ते तो बहुत आए पर बात नही बनी। उसका रंग थोड़ा काला है इसलिए सबने ना बोल दिया।
दूसरे ही पल दोनों वहां पहुंच गए। घीसू को देखते ही उसका दोस्त सोचने लगा- “ये मुसीबत कहां से मेरे घर आ गए।” सब राम कहानी सुना कर घीसू ने सीधा माधव के लिए धनिया का हाथ मांग लिया। पुराना दोस्त होने के कारण दोनों बाप-बेटे के आदतों से भलीभाँति परिचित था। इसलिए सबकी तरह वो भी अपनी बेटी की शादी माधव से नही कराना चाहता था। पर लोगों के ताने जो धनिया का जना हराम कर रहे थे उसे याद आ गए और मजबूरी में शादी के लिए हाँ बोल दिया। हाँ सुनते ही घीसू ने चट मंगनी पट ब्याह करवा दिया और वहाँ से धनिया को अपने संग ही लेकर लौटे।
धनिया को माधव के साथ देख लोग बाते करने लगे- “एक को गए अभी पांच दिन भी न हुआ और दूसरी बुधिया आ भी गई।”
धनिया अपने संग ज्यादा कुछ तो नही बस दो रुपये और कुछ अनाज लेकर आयी। जिसे देखते ही माधव बोला-“लगता है अब लकड़ी काटने की भी मेहनत नही करनी होगी।”
कुछ दिनों के पश्चात, धनिया माधव से कहती है- सुनते हो जी! घर में अन्न का एक दाना तक नही है। तो, मुझे क्यों सुना रही है। जा अपने बाप के घर…जैसे पिछली बार रुपये…जैसे पिछली बार रुपये और अनाज लेकर आयी थी वैसे अब भी ले आ। कैसी बात कर रहे हो जी…तुम्हारे होते हुए बाबा के सामने हाथ फैलाऊं! उनसे माँग कर तुम्हारा घर चलाऊंगी तो तुम्हें और तम्हारे पिता को शर्म न आएगी।
शर्म किस बात की…चोरी करके खाने से तो मांग कर खाना अच्छा है। तू जिस लाज-शर्म की बात कर रही है वो तो हम कब का पानी में घोल कर पी लिए है। अगर तुझे मांगने में इतनी दिक्कत है तो तू भी जाकर पिसाई या घास छीलने का काम ढूंढ ले।
धनिया को घीसू-माधव के कामचोर होने की खबर तो थी पर पति के मुँह से ऐसी बातें सुनकर सोचने लगी- “पिताजी ने मुझे किस गलती की इतनी बड़ी सजा दी।”
दो दिन निकल गए पर घीसू-माधव झोपड़े से हिले तक नही। अंत में हारकर धनिया को ही काम की तलाश में निकलना पड़ा। और धनिया भी खाना बनाने का काम कर उन दोनों का पेट पालने लगी।
“अपने पिता के घर कितने आराम से थी। हाँ, रोज लोगों के ताने सुनने पड़ते थे पर दो वक़्त का खाना और तन ढकने को कपड़े तो मिलते थे।यहां तो कभी -कभी सिर्फ आँसुओं से ही पेट भरना पड़ता है।”
अचानक तबियत खराब होने पर पता चला कि धनिया माँ बनने वाली है पर इस बात ने उसकी चिंता और बढ़ा दी। यहां एक वक़्त का पेट पालना भी मुश्किल है…इसमें बच्चे के लिए दुध,तेल…इत्यादि का कहां से इन्तजाम करुँगी। बुधिया ने दोनों बाप-बेटे को आलसी बनाया था ही धनिया के आने से वो और भी अधिक आरामतलब हो गए। फिर भी धनिया ने प्रयास किया उन्हें किसी तरह काम करने को मनाने का पर कोई लाभ न हुआ।
“प्रसव-पीड़ा से तड़पती बुधिया की चीखें जब उन दोनों की आत्मा को न छू सकी तो बच्चा आने की खबर क्या बदल देता।”
माधव धनिया से बोला-” किसने कहा कि काम करने से ही बच्चे पल सकते है। क्या मैं बड़ा नही हुआ..तब भी हमारी हालत ऐसी ही थी जैसी अभी है। जैसे मैं पला वैसे वो भी पल जाएगा।”
जिन दिनों गर्भवती महिलाओं को उठने-बैठने में मुश्किलें होती है। स्नेह, देखभाल की आवश्यकता होती है…उस स्थिति में भी धनिया को काम करना पड़ रहा था। काम करते हुए उसे प्रसव-पीड़ा आरम्भ हो गयी और उसने एक कुपोषित लड़के को जन्म दिया। जिसका नाम हरिया रखा।
बेटे को गोद में लेते ही वर्षों बाद या यूं कहे पहली बार माधव के मन में सहानुभूति का अंकुरण तो फुटा पर अब भी मेहनत करने को तैयार न हुआ।

हरिया के आने से माधव को अनोखा एवं पसंदीदा काम मिल गया जिसके लिए मेहनत बिल्कुल भी नही करनी पड़ती थी। बस, हरिया को रुलाता और लोगों के सामने कर अपना हाथ फैलाता… लोग सहानुभूति के नाम पर कुछ न कुछ दे ही देते।माधव हंसते हुए बोला-“ये तो बहुत बढ़िया व्यापार है… बच्चे को आगे करो और पैसा कमाओं।”
यू ही छः वर्ष निकल गए और आज भी माधव हरिया के जरिये लोगों को ठगता। अब भी उनकी स्थिति वैसी की वैसी थी। बस, हरिया के जरिये एक वक़्त के खाने का इतंजाम हो ही जाता था।
एक दिन पंडित जी ने गांव में भंडारा रखवाया। जिसमें सभी लोग आमंत्रित थे। घीसू का भी परिवार जल्दी से पहुंच गया।
माधव बोला- ‘चलो! आज भंडारा के बहाने पेट भर अच्छा खाना तो मिलेगा। धनिया आते समय थोड़ा खाना बंधवा लेना…क्या पता फिर कब नसीब हो ये छप्पन भोग।”
हरिया पहली बार इतने सारे स्वादिष्ट पदार्थों को देखते हुए बोला-” पंडित जी हमेशा भंडारा क्यों नही करवाते है। रोजाना ऐसा खाना क्यों नही मिलता।” आपलोगों ने तो कई बार ऐसा भोजन किया होगा न।
माधव बोला- कई बार तो नही पर एक बार जरुर खाया है…वो भी तेरी बड़ी मां की ही बदौलत। जब तक थी तबतक तो हमारा पेट पाला ही मरी भी तो खूब खिला-पिलाकर। कफन के लिए मिले रुपये से न केवल पेट भर करके खाया बल्कि पहली बार किसी को दान देने का भी सुख भोगा था।
माधव घीसू से बोला- “सब कहाँ से कहाँ चले गए और हम अब भी वैसे के वैसे ही है।”
क्या हो गया माधव…. इसके पहले तो कभी तुझे इतनी गहरी सोच में देखा नही।
हरिया की उसके दोस्तों के संग लड़ाई हो गई तब से ही मैं परेशान हूँ। उसका दोस्त है ना मुरली… उसके बाप ने उसे कोई खिलौना दिलाया है जिसे दिखा कर हमारे हरिया को खूब चिढ़ा रहा था और बोल रहा था कि- जब इससे खेल कर मेरा मन भर जाएगा तब तू ले लियो क्योंकि तेरे बापू तो कभी तुझे खिलौना दिला नही सकते। हरिया की वो उदासी बहोत चुभ रही है। भूल ही नही पा रहा हूं। कैसा पिता हूं ना मैं… न अपने बेटे को पेट भर भोजन दे सकता हूं और न ही खिलौने..।
इतने सालों में जो कोई न कर सका वो बेटे की उदासी और आंसू ने पल भर में कर दिया। सबेरा होते ही माधव बिना किसी को कुछ बताएं काम के तलाश में निकल गया। शाम हो गई पर कहीं काम न मिला। सब यह कहकर मजाक उड़ाते कि – “देखो भाईयों! कौन काम करने आया है।अब ये कामचोर काम करेगा।”
थक हार के माधव जमींदार के पास गया। सरकार! मुझे काम चहिए पर कोई काम पर नही रख रहा।अब आपका ही सहारा है।
इतने समय से किसी को दिखाई तक न दिया और आज काम मांगने आया है। तेरे को काम देना मतलब बैठे-बैठे अपना नुकसान करवाना।
ऐसे मत बोलिए सरकार… आप एक बार काम पर रखकर देखिए तो सही। मैं पूरी लगन के साथ काम करुंगा और समय पर भी आऊंगा।
ठीक है तो कल से आ जाना पर समय से वरना तेरी कोई जरुरत नही है ।
सबेरा होते ही माधव खेत में पहुंच गया और काम करने लगा। उसे इस तरह काम करता देख लोग बोलने लगे- अरे! ये माधव ही है ना…इसको क्या हो गया है। कल तक तो ऐसे काम से भागता था जैसे हिरण शेर को देख कर भागती है और आज ये इतनी लगन से काम कर रहा है। यह चमत्कार कैसे हो गया…!
माधव लोगों की बातों को अनसुना कर इस बात से अंजान कि यह खेत कभी घीसू का ही हुआ करता था…वो रात-दिन अपने बेटे के लिए पूरे मन से मेहनत करने लगा।
कुछ दिनों बाद माधव जमींदार साहब के आया और बोलने लगा- “साहब! थोड़े पैसे की मदद हो जाती तो बहुत उपकार होता।” जमींदार माधव से बोला- तुझे और पैसे उधार चाहिए! अब तो तेरी औरत भी खेत में तेरा हाथ बंटाती है फिर भी पैसे मांग रहा है…
साहब! अपने बेटे को पढ़ना चाहता हूँ। चाहता हूं हरिया पढ़-लिख कर बड़ा साहब बने और हमारा नाम सुधारें। उसके दाख़िला के लिए पैसे की जरूरत है। साहब! उधार समझकर दे दो, मेरे महीने में से कांट लीजिएगा। जमींदार साहब उसे 10 रुपये  लाकर दे देता है।
रूपया मिलते ही माधव सरकारी स्कूल में जाकर हरिया का दाखिला करवा देता है। शाम को घर लौटते हुए हरिया के लिए नये कपड़े और किताबें लाता है। और अपने बेटे के सर पर हाथ फिराते हुए बोला- कल से अपना हरिया भी सबके साथ स्कूल जाएगा। हरिया की खुशी देख माधव को आज एक अलग ही सुकून मिलता है। हरिया माधव से अपने नये-नये कपड़े और किताबें लेकर अपने दोस्तों को दिखाने भाग जाता है।
उनके हालत आज भी बाकी लोगों की तरह बहुत अच्छे तो नहीं थे पर अब वे पहले जैसे फटेहाल भी नहीं थे। उनकी जिंदगी की गाड़ी पटरी पर आ गई थी और धीमी गति के साथ आगे बढ़ रही है।

(दीपा शुभ सृजन युवा की सदस्य हैं और इनकी कहानियाँ कई जगह प्रकाशित हो चुकी हैं और यह कहानी पाठ भी कई मंचों पर करती रही हैं)

(वीडियो सौजन्य – हिन्दी का आंगन)

नहीं रहे राज्य के प्रथम इंजीनियर सचिव शैलपति गुप्त

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के प्रथम इंजीनियर सचिव शैलपति गुप्त का निधन हो गया है। गत 27 जुलाई को उनका देहान्त महानगर के एक निजी अस्पताल में हुआ। वे 89 वर्ष के थे। शैलपति गुप्त बी ई कॉलेज, शिवपुर में लम्बे समय तक सेवाएँ दीं। एच आर बी सी के चेयरमैन के रूप में उन्होंने द्वितीय हुगली सेतु के निर्माण कार्य को तेजी से समाप्त किया। वे आवास विभाग में सचिव रहे और फॉसेट के अध्यक्ष रहे। उन्होंने कंक्रीट की सड़कों को लेकर एक किताब भी लिखी।

सारी दुनिया को अपने हुनर से हैरत में डाल रही है नन्हीं सोयेता

बबीता माली

हमेशा ही बच्चों से ये कहा जाता है कि तुम ये न करों , तुम वो न करों।  तुम बच्चे हो , तुमसे ये नहीं हो पायेगा।  मगर, यहाँ हम आपको एक ऐसी बच्ची के बारे में बताने जा रहे हैं , जिसने ये साबित कर दिया है कि बच्चों के लिए भी कोई चीज़ नामुमकिन नहीं हैं।  बच्चे चाहे तो वो चीज़ भी कर सकते हैं जो एक बड़ा भी नहीं कर सकता हैं। बंगाल की एक ऐसी ही बच्ची से आपको रूबरू करवाने जा रही हूँ जिसने न सिर्फ देश में बल्कि विश्व में अपना डंका बजा दिया हैं। पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चन्द्रकोणा की रहने वाली 5 साल 8 महीने की सोयेता दत्ता (Soyeta  Datta) ने वो कमाल किया है जिससे उसके परिवार के साथ ही बंगाल का भी नाम रोशन हुआ है।

सोयेता दत्ता स्थानीय स्कूल जाना इंटरनेशनल स्कूल में सीनियर केजी कक्षा क्लास में पढ़ती है। सोयेता दत्ता ने पक्षियों के तस्वीरों को देखकर मात्र 2  मिनट 34 सेकेंड में 111 पक्षियों के नाम बोलकर इंटरनेशनल बुक ऑफ़ रिकार्ड्स और इंडियन बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में अपना नाम दर्ज करा लिया हैं। इस उम्र में जहाँ बच्चे ठीक से अपना नाम और अभिभावकों के नाम भी नहीं बता पाते हैं उस छोटी सी उम्र में सोयेता ने 111 पक्षियों का नाम बताकर सबको चौंका दिया है। इंटरनेशल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इसे ‘यंगेस्ट टू आईडेन्टीफाई मैक्सीमम बर्ड स्पाइसेज’ औऱ इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने उसे ‘मैक्सीमम नम्बर ऑफ बर्ड आईडेन्टीफाइड बाई किड्स’ का टाइटल दिया है। बता दें कि आज तक इतने सारे पक्षियों का नाम किसी बच्चे ने नहीं बताया था।  इससे पहले महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले विवान दत्त ने 66 पक्षियों का नाम बोलकर इस रिकॉर्ड को अपने नाम किया था। विवान के रिकॉर्ड को सोयेता ने 2021 के जून महीने में तोड़ दिया। उस छोटी सी बच्ची ने बातचीत में बताया , ये रिकॉर्ड हासिल कर वो बहुत खुश है। उसे काफी अच्छा लग रहा है। उससे जब पूछा गया उसके माँ और पापा को उसका रिकॉर्ड जितना कैसा लगा, तो उसने कहा , उसके माँ और पिता भी बेहद खुश है। उसने बताया उसे नाचना और ड्राइंग करना भी बहुत अच्छा लगता है।

हारमोनियम बजाती सोयता

इसके अलावा हारमोनियम पर वो खुद से गाना भी गाया करती है।  कविता आवृत्ति भी वो बहुत अच्छे से करती है। वहीं , सोयेता को इस मुकाम पर पहुंचाने में उसके माता – पिता की भी भूमिका कुछ कम नहीं है। सोयेता बचपन से ही बहुत जिज्ञासु है? सोयेता की इस कामयाबी पर उसके पिता अभिजीत दत्ता और माँ सुदेशना दत्ता काफी खुश हैं। सोयेता के पिता एक स्कूल में मैथमेटिक्स टीचर है। उन्होंने बताया , ‘सोयेता बचपन से ही जिज्ञासु स्वभाव की है। दो साल की उम्र में ही वो एकदम अच्छे से बात करने लगी थी।  उसे दूसरों की नक़ल करना अच्छा लगता था , दरअसल , उसके सामने कोई कुछ भी करता या कहता वो तुरंत उसे सीख लेती है। उसकी स्मरणशक्ति बहुत तेज है। अगर उसने कोई बात 6 महीने पहले भी सुनी हुई होती है तो वो बातें उसे आज भी याद रहती है।  वो कोई भी चीज़ देखती है तो उसके बारे में जरूर पूछती हैं।  हर चीज़ को लेकर उसके मन में हज़ारों प्रश्न होते हैं। जिन चीज़ों के बारे में हम उतना सोचते ही नहीं हैं वो उन चीज़ों को लेकर भी प्रश्न कर बैठती है और उसके बारे में जानना चाहती है।

‘कुछ दिनों पहले का एक वाकया बताना चाहता हूँ , सोयेता अपनी माँ से पूछ रही थी कि हमारे पास दो आँखें है और वो दोनों छोटी है लेकिन फिर भी हमें सभी चीज़ बड़ी – बड़ी दिखाई देती हैं ? ऐसा क्यों ? वहीं , उसके सिर्फ प्रश्न ही नहीं होते बल्कि वो लोगों को परखना भी जानती है।  जब वो साढ़े 3  साल की थी तब एक बार उसकी दादी बाहर आँगन में थी और सोयेता घर के भीतर। बाहर बुलाने के लिए उसकी दादी ने उससे कहा , सोयेता बाहर आओ , देखो बन्दर आया है।  लेकिन वो बाहर नहीं आयी।  इसके बाद ही उसके बुआ के बेटे यानी मेरे भांजे ने सोयेता को बुलाने के लिए जब ये कहा , सोयेता बाहर आओ देखो हाथी आया है।  ये सुनकर सोयेता ने उनसे जो कहा शायद इस उम्र में कोई नहीं कहता होगा।  सोयेता ने कहा , पहले आप दोनों ये तय कर लो की कौन आया हैं ? तब जाकर में बाहर आऊँगी।’

सोयता को मिले पदक

डेढ़ महीने में सीखे 111 पक्षियों के नाम 

सोयेता को किसी भी चीज़ को सीखने में ज्यादा समय नहीं लगता है।  वो तुरंत ही सब कुछ सीख लेती है।  यह कहते हुए सोयेता के पिता अभिजीत दत्ता ने बताया , सोयेता खुद से मोबाइल पर वीडियो भी बनाने लगी है।  उसे वीडियो रिकॉर्ड करना ही नहीं बल्कि पॉज कर वीडियो फिर से रिकॉर्ड करना भी आता है। वहीं उन्होंने बताया , पक्षियों के नाम याद रखने के पीछे उसका जिज्ञासु मन ही है।  जब वो छत पर जाती थी तो पक्षियों को देखकर उनके नाम जानने की कोशिश किया करती थी।  कुछ साल पहले हमने पक्षियों को पाला था लेकिन बाद में लगा कि पक्षियों का असली घर खुला आसमान होता है इसलिए सारे पक्षियों को उड़ा दिए और अब से किसी भी पक्षी को भी नहीं पालते हैं। हालाँकि , सोयेता ने घर पर पक्षियों को देखा था जिससे उसका पक्षियों के प्रति प्रेम भी बढ़ गया था।  इससे उसे पक्षियों को पहचानने की ललक और तेज हो गई।  अभिजीत दत्ता ने बताया , सोयेता को 111 पक्षियों के नाम सिखाने में डेढ़ महीने का समय लगा है। उसे बता – बताकर पक्षियों के नाम याद करवाए गए। हमने विवेकानंद के मेमोरी पावर के तहत ये सब किया। सुनने से किसी भी चीज़ को याद करने में सुविधा होती है।  सोयेता अपने सभी 5 इन्द्रिय को संतुलित कर याद करने में माहिर है। वो किसी भी चीज़ को तुरंत ही अपनी मेमोरी में स्टोर कर लेती है।

किसी भी बच्चे की सफलता के लिए अच्छी परवरिश है जरुरी 

सोयेता के पिता कहते हैं , सोयेता को हमने ज्यादा से ज्यादा समय दिया है।  सोयेता को हर चीज़ खुद से करने की भी आदत है।  अगर हमने उसे कुछ सिखाया और वो गलत कर देती है तो उसे वो सुधारती भी खुद ही है।  वहीं हमने कभी भी सोयेता को किसी भी चीज़ को करने से नहीं रोका है। बचपन से ही वो एडवेंचर पसंद करती आयी है। इसके अलावा हारने से या परीक्षा देने से कभी भी नहीं डरने की सीख हमने दी है।  अभिजीत दत्ता ने ये भी बताया , एक बच्चा माँ के गर्भ से ही सीखता है।  हमारे मामले में भी ऐसा ही है , जब सोयेता अपने माँ के गर्भ में थी तब हम घर पर पॉजिटिव वातावरण रखते थे। सोयेता की माँ और मैं दोनों ही हमेशा सकारात्मक विचार रखते थे जिसका फल हमें मिला।  मेरा अन्य पेरेंट्स को यही संदेश है कि वो अपने बच्चों पर दबाओ न डालें।  अपने बच्चों पर भरोसा करें और उन्हें हर पॉजिटिव चीज़ करने के लिए प्रेरित करें। सोयेता भविष्य में आगे बढे इसके लिए उसके अभिभावक लगातार प्रयासरत है।  सोयेता के पिता अभिजीत दत्ता का कहना है , हम सोयेता का नाम भविष्य में गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में देखना चाहते हैं। सोयेता को सामान्य ज्ञान यानी जनरल नॉलेज का भी अच्छा ज्ञान है।  वो रोजाना इसका भी अभ्यास करती है।  सोयेता को सिखाने का दौर ऐसे ही चलता रहेगा।

रेलवे प्लेटफॉर्म पर बनायी पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम की 7.8 फीट ऊँची प्रतिमा

नट, बोल्ट, धातु की रस्सी और डैम्पर का किया गया इस्तमाल

बंगलुरू : कर्नाटक में यशवंतपुर रेलवे डिपो ने मिसाइल मैन और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम की स्मृति को बड़ी खूबसूरती से जीवन्त किया गया। दरअसल यशवंतपुर रेलवे स्टेशन के छह साइड के प्लेटफॉर्म पर रेलवे ट्रैक के किनारे स्थापित पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की सोने से लदी प्रतिमा सभी को लुभा रही है और रेलवे कर्मियों की के लिए प्रेरणा भी बन गयी है। यशवंतपुर कोचिंग डिपो के मेकेनिकल विभाग के इंजीनियरों ने 800 किलोग्राम स्क्रैप पर 45 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद यह प्रतिमा बनायी। इस प्रतिमा को रेलवे मंत्रालय के ट्विटर हैंडल पर शेयर किया गया। मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे के ट्विटर हैंडल ने इसे ट्वीट कर लिखा ‘मिसाइल मैन को एक सृजनात्मक श्रद्धांजलि’.
मालूम हो कि पटरियों के पास एक विशेष रूप से बनाए गए प्लेटफॉर्म पर, एयरोस्पेस वैज्ञानिक की 7.8 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा बनाई गयी है।

इस मूर्ति को यशवंतपुर से जाने वाली ट्रेनों के यात्री देखा सकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार इस रेलवे स्टेशन से विस्टाडोम कोच और दुरंतो और संपर्क क्रांति ट्रेनों सहित दैनिक आधार पर औसतन 200 ट्रेने गुजरती है। वरिष्ठ कोचिंग डिपो अधिकारी, विकास गुरवानी ने कहा कि “डॉ. कलाम की इस प्रतिमा को मैसूर वर्कशॉप से ​​लाए गए नट, बोल्ट, धातु की रस्सी और डैम्पर को जोड़कर बनाया गया है। उन्होंने बताया कि इसे बनाने वाले मेकेनिकल डिपार्टमेंट के इंजीनियरों ने सबसे पहले एक मिट्टी का मॉडल तैयार किया था और एक प्लास्टिक ऑफ पेरिस का सांचा बनाया गया था। जिसके आधार पर इन्होंने नट, वोल्ट और धातुओं को मोल्ड कर प्रतिमा का रूप दिया।’

नहीं रहीं 105 साल की उम्र में साक्षरता परीक्षा पास करने वाली भगीरथी अम्मा

नारी शक्ति पुरस्कार से थी सम्मानित

तिरुअनंतपुरम : केरल में 2019 में साक्षरता परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली सबसे बुजुर्ग महिला भगीरथी अम्मा का निधन 107 वर्ष की उम्र में गुरुवार को हो गया। भगीरथी अम्मा के परिवार के लोगों ने शुक्रवार को उनके निधन की जानकारी दी। परिजनों के मुताबिक भगीरथी अम्मा लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थी और उन्होंने गुरुवार देर रात अपने घर पर ही अंतिम सांस ली। उन्हें केंद्र सरकार की ओर से प्रतिष्ठित नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। भगीरथी अम्मा ने 2019 में 105 वर्ष की उम्र में साक्षरता परीक्षा उत्तीर्ण की थी। भगीरथी अम्मा की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी उनकी सराहना की थी।
कोल्लम जिले के प्रक्कुलम की रहने वालीं भगीरथी अम्मा ने 2019 में राज्य द्वारा संचालित केरल राज्य साक्षरता मिशन (केएसएलएम) की चौथी कक्षा की समकक्ष परीक्षा में उत्तीर्ण होकर सबसे उम्रदराज छात्रा बनने का इतिहास रचा था। भगीरथी अम्मा राज्य साक्षरता मिशन द्वारा कोल्लम में आयोजित परीक्षा में शामिल हुई थीं और उन्होंने 275 में से 205 अंक प्राप्त कर कीर्तिमान स्थापित किया। गणित विषय में उन्हें पूरे अंक प्राप्त हुए थे।
बता दें कि, भगीरथी अम्मा को पारिवारिक परेशानियों के कारण नौ वर्ष की आयु में अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। पढ़ाई के प्रति उनके जुनून की प्रधानमंत्री मोदी ने भी प्रशंसा की थी। महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रतिष्ठित नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था

अखिल भारतीय वाद विवाद प्रतियोगिता संपन्न

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से पत्रकार राजकिशोर की स्मृति में अखिल भारतीय वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।इस प्रतियोगिता में देशभर से सौ से ज्यादा कॉलेज और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। दस राउंड तक चली इस प्रतियोगिता के फाइनल में अर्चना शेफाली (रांची विश्वविद्यालय), नुपूर श्रीवास्तव( बोंइची कॉलेज) ,सौरभ तिवारी (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय), महेश कुमार और सिद्धार्थ कुमार (दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय), प्रियंका गोप (विद्यासागर विश्वविद्यालय),आशुतोष राऊत (जयपुरिया कॉलेज), निशंक उपाध्याय ( जिंदल ग्लोबल लॉ कॉलेज), मनीष गुप्ता (प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय),षैजू के. (कोचीन विश्वविद्यालय) ने ‘कोरोना महामारी में चिकित्सा सुविधाएं रहीं दुरुस्त’ विषय के पक्ष और विपक्ष में अपनी प्रस्तुति दी। पक्ष के लिए सर्वश्रेष्ठ वक्ता षैजू के और विपक्ष के लिए सर्वश्रेष्ठ वक्ता सौरभ तिवारी को चुना गया। स्वागत वक्तव्य डॉ मिश्र ने देते हुए सभी प्रतिभागियों की प्रशंसा की। इस अवसर पर राजकिशोर के जीवन और चिंतन पर वीडियो कोलाज का प्रसारण किया गया। बतौर निर्णायक डॉ शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि सभी प्रतिभागियों ने प्रभावी और तथ्यात्मक ढंग से अपना पक्ष रखा। डॉ. गीता दूबे ने कहा कि सभी प्रतिभागी संभावनाओं से भरे हैं।
डॉ. इतु सिंह ने कहा कि यह मंच प्रतिभागियों के बौद्धिक चिंतन और वैचारिक संवाद से समृद्ध हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि इन प्रतिभागियों को सुनते हुए लगा कि भारत की युवा पीढ़ी में अपने साहित्य और समाज की गहरी समझ है। वे सजग और सह्रदय हैं। भारत का भविष्य ऐसे नौजवानों के हाथों गढ़ा जाएगा। इस प्रतियोगिता के क्वालीफाई चक्र में मृत्युंजय श्रीवास्तव, मनोज झा,मंजू श्रीवास्तव, मनीषा गुप्ता, अरुण कुमार,आनंद गुप्ता, विकास साव,मिथिलेश कुमार मिश्रा,चंचल सिंह,नारायण साव आदि ने निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन सौमित्र आनंद, उत्तम कुमार, मधु सिंह,राहुल गौड़ ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संजय जायसवाल ने देते हुए कहा कि मिशन का यह मंच सृजन,संवाद और सांस्कृतिक सहयात्रा का मंच है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विकास जायसवाल,नागेंद्र पंडित, राहुल शर्मा,पूजा गुप्ता,सुशील पांडे, पूजा सिंह, सूर्यदेव राय,रूपेश कुमार यादव,ओमकुमार चौरसिया, नेहा चौबे,गायत्री बाल्मीकि, बीरूसिंह,मुकुंद शर्मा, विनोद यादव,विशाल साव,पंकज सिंह,प्रीति साव,साक्षी झा,निशा राजभर आदि ने अपना सहयोग दिया।

श्रावण विशेष : ये हैं भारत के आश्चर्य और रहस्यों से भरे प्राचीन शिव मंंदिर

सावन आ चुका है। श्रावण माह भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय है। देश में काशी विश्वनाथ मंदिर, देवघर जैसे कई प्रतिष्ठित और प्राचीन मंदिर हैं और कुछ मंदिर ऐसे हैं जो आपको आश्चर्य में डाल देते हैं और उनमें छिपा होता है रहस्य। आज ऐसे ही कुछ मंदिरों से जुड़ी जानकारी हम लाए हैं आपके लिए –

 बिजली महादेव मंदिर 

यहाँ हर 12 साल में एक बार शिवलिंग पर बिजली गिरती है

यह अनोखा मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित है कुल्लू शहर में ब्यास और पार्वती नदी के संगम स्थल के नजदीक एक पहाड़ पर शिव का यह प्राचीन मंदिर स्थित है। यहां हर 12 साल में एक बार शिवलिंग पर बिजली गिरती है। बिजली गिरने के बाद शिवलिंग चकनाचूर हो जाता है। मंदिर के पुजारी शिवलिंग के अंशों मक्खन में लपेट कर रख देते हैं। शिव के चमत्कार से वह फिर से ठोस बन जाता है। जैसे कुछ हुआ ही न हो।

निष्कलंक महादेव

पांडवों ने यहां अपने पापों से मुक्ति पाई थी इसीलिए इसे निष्‍कलंक महादेव मंदिर कहते हैं

यह मंदिर गुजरात के भावनगर में कोलियाक तट से 3 किलोमीटर अंदर अरब सागर में स्थित है। प्रतिदिन अरब सागर की लहरें यहां के शिवलिंग का जलाभिषेक करती है। ज्वारभाटा जब शांत हो जाता है तब लोग पैदल चलकर इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं। ज्वार के समय सिर्फ मंदिर का ध्वज ही नजर आता है। कहते हैं कि यह मंदिर महाभारतकालीन है और जब युद्ध के बाद पांडवों को अपने ही कुल के लोगों को मारने का पछतावा था और वे इस पाप से छुटकारा पाना चाहते थे तब वे श्रीकृष्ण के पास गए। श्रीकृष्ण द्वारिका में रहते थे। श्रीकृष्ण ने उन्हें एक काली गाय और एक काला झंडा दिया और कहा कि तुम यह झंडा लेकर गाय के पीछे-पीछे चलना। जब झंडा और गाय दोनों सफेद हो जाए तो समझना की पाप से छुटकारा मिल गया। जहां यह चमत्कार हो वहीं पर शिव की तपस्या करना।कई दिनों तक चलने के बाद पांडव इस समुद्र के पास पहुंचे और झंडा और गाय दोनों सफेद हो गया। तब उन्होंने वहां तपस्या की और भगवान शिव को प्रसन्न किया। पांचों पांडवों को शिवजी ने लिंग रूप में अलग अलग दर्शन दिए। वही पांचों शिवलिंग आज तक यहां विद्यमान हैं। पांडवों ने यहां अपने पापों से मुक्ति पाई थी इसीलिए इसे निष्‍कलंक महादेव मंदिर कहते हैं।

अचलेश्वर महादेव मंदिर

अचलेश्वर महादेव मंदिर

राजस्थान के धौलपुर में स्थित यह मंदिर दुर्गम जंगलों में स्थित है। कहते हैं कि इस मंदिर का शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है। प्रात: इस शिवलिंग का रंग लाल होता है। दोपहर में केसरिया और जैसे-जैसे शाम होती है इसका रंग सांवला हो जाता है। इस शिवलिंग की अनोखी बात यह है कि इस शिवलिंग का नीचे कोई छोर नहीं है।

 लक्ष्मेश्वर महादेव मंदिर 

ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान राम ने खर और दूषण के वध के पश्चात अपने भाई लक्ष्मण के कहने पर की थी। इसकी स्थापना स्वयं लक्ष्मण ने की थी। इस शिवलिंग में एक लाख छिद्र हैं। इसलिए इसे लक्षलिंग भी कहा जाता है। कहते हैं कि इस लाख छिद्रों में से एक छिद्र ऐसा भी है जोकि पातालगामी है। क्योंकि उसमें जितना भी पानी डालो वह सब उसमें समा जाता है और एक छिद्र ऐसा है जिसमें जल हमेशा भरा रहता है जिसे अक्षयकुंड कहते हैं।

 स्तंभेश्वर महादेव मंदिर 

मंदिर सुबह और शाम दिन में दो बार के लिए पलभर के लिए गायब हो जाता है

गुजरात में वडोदरा से 85 किमी दूर स्थित जंबूसर तहसील के कावी-कंबोई गांव का यह मंदिर अलग ही विशेषता रखता है। मंदिर अरब सागर के मध्य कैम्बे तट पर स्थित है। इस तीर्थ का उल्लेख ‘श्री महाशिवपुराण’ में रुद्र संहिता भाग-2, अध्याय 11, पेज नं. 358 में मिलता है। इस मंदिर के 2 फुट व्यास के शिवलिंग का आकार चार फुट ऊंचा है। स्तंभेश्वर महादेव मंदिर सुबह और शाम दिन में दो बार के लिए पलभर के लिए गायब हो जाता है। ऐसा ज्वारभाटा आने के कारण होता है। इस मंदिर से तारकासुर और कार्तिकेय की कथा जुड़ी हुई है। सागर संगम तीर्थ पर विश्‍वनंद स्तंभ की स्थापना की। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खासतौर से परचे बांटे जाते हैं, जिसमें ज्वार-भाटा आने का समय लिखा होता है।

 भोजेश्वर मंदिर

मंदिर का विशाल शिवलिंग

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 32 किलोमीटर दूर भोजपुर (रायसेन जिला) में भोजपुर की पहाड़ी पर स्थित है। यहां का शिवलिंग अद्भुत और विशाल है। यह भोजपुर शिव मंदिर या भोजेश्वर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं। इस प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज (1010 ई-1055 ई) द्वारा किया गया था। चिकने लाल बलुआ पाषाण के बने इस शिवलिंग को एक ही पत्थर से बनाया गया है और यह विश्व का सबसे बड़ा प्राचीन शिवलिंग माना जाता है। कहते हैं कि यहां पहले साधुओं के एक समूह ने गहन तपस्या की थी।

(स्त्रोत साभार – वेबदुनिया)

‘भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना का कहर’ विषय पर वेबिनार

कोलकाता : ‘भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना का कहर’ विषय पर वेबिनार -भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के वाणिज्य विभाग सुबह के विद्यार्थियों के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था में कोरोना का कहर’ विषय से संबंधित वेबिनार का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि कलकत्ता विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की एसोसिएट प्रो. सुदक्षिणा गुप्ता ने ऑनलाइन भाग लेने वाले 75 से अधिक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए वर्तमान भारत की अर्थव्यवस्था के विषय में विस्तृत जानकारी दी। यह वेबिनार आई क्यू ए सी द्वारा स्वीकृत था जिसमें अर्थशास्त्र के विद्वानों और संकाय के शिक्षक शिक्षिकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण किया कॉलेज के डीन प्रो. दिलीप शाह ने दिया। इप्शिता चटर्जी ने विद्यार्थियों की रुचि और जिज्ञासाओं को समझते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामारी कोरोना के कारण पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा की। प्रमुख वक्ता के रूप में प्रो. सुदक्षिणा ने महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था प्रारंभिक कोविड -19 के लॉक डाउन के कारण उत्पादन बंद होने से बुरी तरह से प्रभावित हुई। केंद्रीय और राज्य के स्तर पर सरकारें कोविड से निपटने की तैयारी में लगी रहीं। अर्थव्यवस्था में थोड़ी सी राहत आनी शुरु हुई, तभी कोरोना की दूसरी लहर ने अर्थतंत्र पर प्रहार किया। इस बीच, टीकाकरण प्रक्रिया शुरू हुई। सरकार पर यह एक आर्थिक बोझ था जिसे उसने पेट्रोल और डीजल उत्पादों पर मूल्य बढ़ाकर जनता को स्थानांतरित कर दिया, इसके कारण मुद्रास्फीति पर भी बुरा असर पड़ा। 20 मार्च के अंत तक, महामारी हर जगह थीं, जिसके परिणामस्वरूप भारत में अधिकांश शैक्षणिक संस्थानों को भी बंद करना पड़ा। बहुत – सी नौकरियाँ चली गयीं। महामारी के कारण पूरे भारत में 1.5 मिलियन स्कूलों को बंद कर दिया।
उद्योग,सेवा, व्यापार, ऋण, जीडीपी, शिक्षा आदि विभिन्न क्षेत्रों की चर्चा की गयी। वर्तमान टीकाकरण ड्राइव पर भी चर्चा की गयी । प्रश्नोत्तर सत्र डॉ. दिपर्णा जाना द्वारा आयोजित किया गया। बीकॉम (सुबह) विभाग की कोआर्डिनेटर प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी ने सभी को धन्यवाद देते हुए इस कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए बहुत ही सकारात्मक बताया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

नदियों की जानकारी देगा ‘नदी को जानो’ मोबाइल एप

नयी दिल्ली : भारत की नदियों की जानकारी अब आपको आपके मोबाइल पर मिलेगी। नदियों की जानकारी देने के लिए ‘नदी को जानो’ ऐप केन्द्रीय शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने जारी किया। ‘नदी को जानो’ मोबाइल एप का उद्देश्य पूरे भारत में नदियों के बारे में जानकारी एकत्र करना है। यह पहल भारतीय नदियों पर एक डेटाबेस बनाने के उद्देश्य से पुनरुत्थान फाउंडेशन के लिए अनुसंधान का एक हिस्सा है। भारत की नदियों के बारे में हर प्रकार की जानकारी आपको इस मोबाइल एप में मिलेगी। साथ ही इस एप में छात्र नदी से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी अपलोड कर सकते हैं।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने इससे पहले मछली पालक किसानों के लिए मत्स्य सेतु एप लांच किया था। मत्स्य सेतु मोबाइल ऐप की बात करें तो इसमें अलग-अलग प्रजाति के बारे में जानने के लिए ऑनलाइन सेल्फ-लर्निंग मॉड्यूल दिया गया है। साथ ही इस ऐप में मछलियों के प्रजनन, बीज उत्पादन और ग्रो-आउट संवर्धन पर जानकारी मिलेगी। इस एप के जरिए किसानों को छोटे वीडियो के माध्यम से बेहतर प्रबंधन, जलकृषि कार्यों में भोजन और स्वास्थ्य प्रबंधन का पालन करना भी सिखाया जाएगा।