Tuesday, June 30, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 373

हमें हर हाल में इस खूबसूरत दुनिया को बंजर बनने से रोकना है

प्रो. गीता दूबे

चारों ओर लाशों के ढेर हैं, कब्रिस्तानों और‌ श्मसान  घाटों के आगे कतारों में लोग खड़े हैं। हमारे आदरणीय नेता गण चुनावों की रैलियों में व्यस्त हैं। शेरों की तरह दहाड़ रहे हैं और‌ आम जनता के कलेजे खौफ से काँप रहे हैं। ऐसे भयावह वातावरण में कैसे आपका हाल पूछूं, सखियों। कैसे आपको राम -राम और प्रणाम कहूँ। आप भी जानती हैं कि शोक के समय प्रणाम पाती बंद हो जाती है। लोग आपस में दुआ -सलाम नहीं करते। आज तो घर- घर में शोक का गहरा साया छाया हुआ है। लोग डरते -डरते एक दूसरे का हाल पूछते हैं। कई बार हाल पूछते भी डर लगता है कि न जाने कहाँ से कौन सा दुसंवाद सुनने को मिल जाए। 

सखियों, इस समय पूरा देश हैरान परेशान है। हर घड़ी सीने में धुकधुकी लगी रहती है। नींद नहीं आती है और नींद आ भी जाए तो खौफनाक सपनों से सामना होता है। हर ओर हाय- हाय करते, रोते चीखते लोग दिखाई देते हैं। किसी हाल नींद आ जाए तो आंखें खोलते डर लगता है कि न जाने कौन सा बुरा समाचार हमारे जागने की प्रतीक्षा में हो। 

ऐसा नहीं सखियों कि हमारा देश और पूरी दुनिया पहली बार किसी महामारी का सामना कर रही है। इसके पहले भी महामारियों के खौफनाक आक्रमणों को हम झेल चुके हैं और विध्वंस के गवाह भी रहे हैं। लेकिन फर्क सिर्फ इतना ही है कि वह मंजर हमने इतिहास की किताबों में पढ़ा है और आज हम इस महामारी के घावों को अपने सीने पर झेल रहे हैं। अपनी आँखों के सामने अपने लोगों को दवा, इंजेक्शन, ऑक्सीजन और अस्पतालों के अभाव में दम तोड़ते देख रहे हैं। और ठीक इस भयावह समय में जब लोगों को लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए कुछ अवसरवादी बेहया लोग हर चीज का व्यापार करने में लगे हुए हैं। दवाइयों की जमाखोरी और कालाबाजारी हो रही है, वह भी खुलेआम। लगता है, सरकारी अमले और कानून के रक्षक एक लंबी छुट्टी पर हैं और उनके कानों तक जनता की चीख-पुकार नहीं पहुँचती और अगर पहुँच भी जाती है तो वे उसे बड़ी बेहयाई से नजरंदाज कर देते हैं। कहीं तोहमतों का बाजार गर्म है। सियासतदानों के बीच एक दूसरे पर कीचड़ उछालकर जनता को भरमाने और अपना स्वार्थ साधने का घृणित खेल चल रहा है। कभी- कभी लगता है कि जनता की जान क्या इतनी सस्ती हो गई है कि उसकी याद नेताओं को सिर्फ चुनावों के समय आती है, बाकी वह मरे या जीए इससे किसी को कोई मतलब नहीं। देश के मौजूदा हालात को देखते हुए ‌शायर दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां अनायास दिमाग में कौंध जाती हैं-

“इस शहर मे वो कोई बारात हो या वारदात

अब किसी भी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियाँ ।”

यह स्थिति किसी शहर की नहीं पूरे देश की है। इंसानियत की खिड़कियों के दरवाजे मजबूती से बंद हैं और सियासतदानों को सिर्फ अपनी -अपनी पड़ी है। ऐसे में आम जनता का हैरान परेशान होना लाजमी है।

सखियों, रोम के बारे में एक कहानी कही जाती है कि “जब रोम जल रहा था तो वहाँ का सम्राट नीरो बाँसुरी बजा रहा था।” लेकिन हमने इस कहानी से कुछ नहीं सीखा। हम तो इतिहास इसलिए पढ़ते हैं ताकि परीक्षा पास कर सकें। उससे सीख लेने की जहमत हम नहीं उठाते इसीलिए आज तकरीबन वही स्थिति हमारे देश की भी है। सारे देश में तबाही का आलम है। कुछ लोग करोना के कारण दम तोड़ रहे रहे हैं तो कुछ दवाओं की कमी से तो कुछ दहशत के कारण लेकिन हमारे देश में लोकतंत्र का महापर्व मनाया जा रहा है अर्थात चुनाव हो रहे हैं। चूंकि कहावत ही है कि “इश्क और जंग में सब कुछ जायज है” तो हमारे देश में चुनाव और जंग एक ही समझे जाते हैं और उसमें विजय हासिल करने के‌ लिए हर मुमकिन कोशिश की जाती है। यह जंग तो कोई न कोई जीत ही लेगा लेकिन मानवता के इतिहास में कितनों के नाम नीरो की शक्ल में दर्ज होंगे, यह तो थोड़ी भी समझदारी रखनेवाला आसानी से समझ सकता है। 

सखियों, आज के हालात को देखते हुए इतना ही कह सकती हूँ-

“हर ओर तबाही का मंजर तो देखिए

अवसरवादियों के हाथ में खंजर तो देखिए

लहूलुहान हो रही है इंसानियत भरे बाजार

नेताओं का हर हाल में कायम रहे बस राज 

लाशों के कारोबारियों की सूरत तो देखिए

इन नकली रहनुमाओं की गैरत तो देखिए।

 शर्मोहया सब बेचकर आए हैं नामुराद

 सुनेंगे भला कैसे मजलूमों की आवाज़,

आहों औ कराहों पर धरते नहीं हैं कान

उजले दिलों में फैलता बंजर तो देखिए।।”

सखियों, आज बस इतना ही कहूंगी कि अपना, अपने परिवार वालों का ध्यान तो रखिए ही, अपने और पराये का फर्क भुलाकर जितना भी हो पाए हर किसी की मदद करने की कोशिश कीजिए। मानवता को जीवित रखने की जिम्मेदारी अब आम लोगों के हाथ में है और हमें हर हाल में इस खूबसूरत दुनिया को बंजर बनने से रोकना है। हिम्मत बनाए रखिए और इस आपदा से लड़ने और इससे जीतने का हौसला कायम रखिए। हमने बहुत सी आपदाओं पर विजय हासिल की है। आज नहीं तो कल, यह जंग हम जीत ही लेंगे। बस इंसानियत पर भरोसा कायम रखिए। आज नहीं तो कल इन लाशों के कारोबारियों के तख्तोताज छिन जाएंगे या छीन लिए जाएंगे। उम्मीद है कि अगले हफ्ते तक हालात में कुछ बदलाव जरूर आएगा। तब तक अपना और बाकी सब का ध्यान रखिए।

 

युवाओं के हनुमान

शुभांगी उपाध्याय

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के सर्वोत्तम सेवक, सखा, सचिव और भक्त श्री हनुमान थे। प्रभु राम की भारतीय जनमानस में जिस प्रकार पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार उनके प्रिय सेवक हनुमान जी की भी पूजा की जाती है। राम परिवार में ऐसा कोई नहीं है जिसका स्वयं का मंदिर हो। श्री हनुमान जी को रुद्रावतार भी मन जाता है। इनकी पूजा पूरे भारत और दुनिया के अनेक देशों में इतने अलग-अलग तरीकों से की जाती है कि इन्हें ‘जन देवता’ की संज्ञा दी जा सकती है।

गोस्वामी तुलसीदास जी तो श्री हनुमान के लिए कहते हैं :

“अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं, अनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। 

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं, रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।”

अर्थात अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत के समान कांतियुक्त शरीर वाले, दैत्यरूपी वन के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्री हनुमान अतुल बल के स्वामी थे। उनके अंग वज्र के समान शक्तिशाली थे। अत: उन्हें ‘वज्रांग’ नाम दिया गया, जो बोलचाल में बजरंग बन गया। यह बजरंग केवल गदाधारी महाबली ही नहीं हैं, बल्कि विलक्षण और बहुआयामी मानसिक और प्रखर बौद्धिक गुणों के अद्भुत धनी भी हैं। यदि कोई उनसे विश्राम की बात करता तो उनका उत्तर होता था- मैंने श्रम ही कहाँ किया, जो मैं विश्राम करूं? उनके चित्र व्यायामशालाओं में जिस भक्तिभाव के साथ लगाए जाते हैं, उतनी ही श्रद्धा के साथ प्रत्येक शिक्षा और सेवा संस्थान में भी लगाए जाने चाहिए।

छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य निर्माण की विस्तृत लेकिन गहरी नींव रखने के लिए उनके गुरु समर्थ श्री रामदास द्वारा गाँवगाँव में अनगढ़े पत्थरों को सिन्दूर लगाकर श्री हनुमान के रूप में उनकी प्राण-प्रतिष्ठा की गई। आज से 300 से ज्यादा वर्षों पहले यह महान राष्ट्रीय उपक्रम हुआ।

केवल भारत ही नहीं, सारे संसार के लिए किसी आदर्श व्यक्तित्व के चयन की समस्या आ जाए तो श्री हनुमान का जीवन निश्चित रूप से सर्वाधिक प्रेरक सिद्ध हो सकता है। वे राम-सेवा अर्थात सात्विक सेवा के शिखर पुरुष ही नहीं थे बल्कि अनंतआयामी व्यक्तित्व विकास के महाआकाश थे।

अखंड ब्रह्मचर्य और संयम की साधना से जो तेजस् और ओजस् उन्होंने अर्जित किया था, वह अवर्णनीय है। बालपन से ही वे सूर्य साधक बन गए थे। सूर्य को उन्होंने अपना गुरु स्वीकार किया था। उनकी दिनचर्या सूर्य की गति के साथ संचालित होती थी। आगे जाकर सौर-अध्ययन के कारण वे एक अच्छे खगोलविद् और ज्योतिषी भी बने।

 एक शिशु के रूप में वे ज्यादा ही चंचल तथा उधमी थे। किसी शिलाखंड पर गिरने से उनकी ठुड्डी (हनु) कट गई गई थी, जिससे उनका हनुमान नाम पड़ गया। एक जैन मान्यता के अनुसार वे एक ऐसी जाति और वंश में पैदा हुए थे जिसके ध्वज में वानर की आकृति बनी रहती थी। धर्मशास्त्रों में आत्मज्ञान की साधना के लिए तीन गुणों की अनिवार्यता बताई गई है- बल, बुद्धि और विद्या। यदि इनमें से किसी एक गुण की भी कमी हो, तो साधना का उद्देश्य सफल नहीं हो सकता है। सबसे पहले तो साधना के लिए बल जरूरी है। निर्बल व कायर व्यक्ति साधना का अधिकारी नहीं हो सकता है। दूसरा, साधक में बुद्धि और विचार शक्ति होनी चाहिए। इसके बिना साधक पात्रता विकसित नहीं कर पाता है। तीसरा अनिवार्य गुण विद्या है। विद्यावान व्यक्ति ही आत्मज्ञान प्राप्त कर सकता है। 

हनुमान जी के जीवन में इन तीनों गुणों का अद्भुत समन्वय मिलता है। इन्हीं गुणों के बल पर वे जीवन की प्रत्येक कसौटी पर खरे उतरते हैं । रामकथा में हनुमानजी का चरित्र अत्यंत प्रभावशाली है। प्रभु श्रीराम के आदर्शो को मूर्त रूप देने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

रामायण में सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है। संपूर्ण रामायण कथा श्रीराम के गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती है किन्तु सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है, जो सिर्फ हनुमानजी की शक्ति और विजय का कांड है। यह अतिसुंदर है इसलिए सुंदरकांड नाम पड़ा। इस कांड में श्रीहनुमान का लंका प्रस्थान, लंका दहन और लंका से वापसी तक के घटनाक्रम आते हैं। इस सोपान के मुख्य घटनाक्रम है – 

श्री हनुमान का लंका की ओर प्रस्थान, विभीषण से भेंट, सीता से भेंट करके उन्हें श्री राम की मुद्रिका देना, अक्षय कुमार का वध, लंका दहन और लंका से वापसी।

हनुमान जी का संवाद कौशल विलक्षण है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण अशोक वाटिका में जब वे पहली बार माता सीता से मिलते हैं तब दिखाई देता है। वे अपनी बातचीत से न सिर्फ उन्हें भयमुक्त करते हैं, बल्कि उन्हें यह भी भरोसा दिलाते हैं कि वे श्रीराम के ही दूत हैं- “कपि के वचन सप्रेम सुनि, उपजा मन बिस्वास। जाना मन क्रम बचन यह, कृपासिंधु कर दास ।।” यह कौशल आज के युवा उनसे सीख सकते हैं।

इसी तरह समुद्र लांघते वक्त देवताओं के कहने पर जब सुरसा ने उनकी परीक्षा लेनी चाही, तो उन्होंने अतिशय विनम्रता का परिचय देते हुए उस राक्षसी का भी दिल जीत लिया। वह श्री हनुमान का बुद्धि कौशल व विनम्रता देख दंग रह गई और उसने उन्हें कार्य में सफल होने का आशीर्वाद देकर विदा कर दिया। यह प्रसंग सीख देता है कि केवल साम‌र्थ्य से ही जीत नहीं मिलती है, विनम्रता से समस्त कार्य सुगमतापूर्वक पूर्ण किए जा सकते हैं।

महावीर हनुमान ने अपने जीवन में आदर्शों से कोई समझौता नहीं किया। लंका में रावण के उपवन में हनुमान जी और मेघनाथ के मध्य हुए युद्ध में मेघनाथ ने ‘ब्रह्मास्त्र’ का प्रयोग किया। हनुमान जी चाहते तो वे इसका तोड़ निकाल सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि वे उसका महत्व कम नहीं करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने ब्रह्मास्त्र का तीव्र आघात सह लिया।

श्री हनुमान के जीवन से हम शक्ति व साम‌र्थ्य के अवसर के अनुकूल उचित प्रदर्शन का गुण सीख सकते हैं। तुलसीदास जी हनुमान चालीसा में लिखते हैं- ‘सूक्ष्म रूप धरी सियहिं दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा।’

सीता माता के सामने उन्होंने स्वयं को लघु रूप में रखा, क्योंकि यहां वह पुत्र की भूमिका में थे, लेकिन संहारक के रूप में वे राक्षसों के लिए काल बन गए। अवसर के अनुसार स्वयं को ढाल लेने की हनुमानजी की प्रवृत्ति अद्भुत है। जिस वक्त लक्ष्मण रणभूमि में मूर्छित हो गए, उनके प्राणों की रक्षा के लिए वे पूरा पर्वत ही उठा लाए, क्योंकि वे संजीवनी बूटी नहीं पहचानते थे। अपने इस गुण के माध्यम से वे हमें तात्कालिक विषम स्थिति में विवेकानुसार निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं।

हनुमान जी हमें भावनाओं का संतुलन भी सिखाते हैं। उनका व्यक्तित्व आत्ममुग्धता से कोसों दूर है। सीता माँ का समाचार लेकर सकुशल वापस पहुंचे श्री हनुमान की हर तरफ प्रशंसा हुई, लेकिन उन्होंने अपने पराक्रम का कोई किस्सा प्रभु राम को नहीं सुनाया। जब श्रीराम ने उनसे पूछा- ‘हनुमान ! त्रिभुवनविजयी रावण की लंका को तुमने कैसे जला दिया? तब प्रत्युत्तर में हनुमानजी ने जो कहा उससे भगवान राम भी हनुमानजी के आत्ममुग्धताविहीन व्यक्तित्व के कायल हो गए– “सो सब तव प्रताप रघुराई। नाथ न कछू मोरि प्रभुताई ।।”

भारतीय-दर्शन में सेवाभाव को अत्यधिक महत्व दिया गया है। यह सेवाभाव ही हमें निष्काम कर्म के लिए प्रेरित करता है। अष्ट चिरंजीवियों में से एक महाबली हनुमान अपने इन्हीं सद्गुणों के कारण देवरूप में पूजे जाते हैं और उनके ऊपर ‘राम से अधिक राम के दास’ की उक्ति चरितार्थ होती है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम स्वयं कहते हैं- जब लोक पर कोई विपत्ति आती है तब वह त्राण पाने के लिए मेरी अभ्यर्थना करता है, लेकिन जब मुझ पर कोई संकट आता है तब मैं उसके निवारण के लिए पवनपुत्र का स्मरण करता हूं। हनुमान जी के जीवन का एक ही मंत्र था – ‘राम काज किन्हें बिनु, मोहि कहां विश्राम…’

जिस प्रकार हनुमान जी श्रीराम के भक्त हैं उसी प्रकार हम सभी को भारत माता का सेवक बनना होगा। आज हमारा देश ही नहीं अपितु यह सारा संसार ही महामारी से ग्रसित है, पीड़ित है। ऐसे में भारत जैसे युवा देश में युवाओं की ज़िम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। संकट की इस घड़ी में समाज की रक्षा हेतु श्री हनुमान जी की भांति ही हमें भी अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए। युवा शक्ति को हनुमान जी की पूजा से अधिक उनके चरित्र को आत्मसात करने की आवश्यकता है, जिससे भारत को उच्चतम नैतिक मूल्यों वाले देश के साथ-साथ ‘कौशल युक्त’ भी बनाया जा सके। 

(शुभांगी उपाध्याय कलकत्ता विश्वविद्यालय में शोधार्थी हैं और विवेकानंद केंद्र के पश्चिम बंग प्रान्त में विभाग युवा प्रमुख भी।)

श्रीराम को समर्पित आचार्य विष्णुकांत शास्त्री की कुछ कविताएं

आचार्य विष्णुकांत शास्त्री

मैं न दहलूँगा भयानक रूप लखकर
भले उसको देख सबका मन दहल ले।
दृष्टि दी गुरु ने तुझे पहचानने की,
प्रभु – कृपा तू रूप चाहे जो बदल ले।।
——
साँस साँस में रटूँ राम मैं नाम तुम्हारा
साँस साँस में बुनूँ रूप मैं राम तुम्हारा
साँस साँस में झलकाओ तुम अपनी लीला
साँस साँस में रमो बने यह धाम तुम्हारा
—–
औरों के हैं जगत् में स्वजन, बन्धु, धन, धाम।
मेरे तो हैं एक ही सीतापति श्रीराम।।
—-

जीवन का पथ कितना दुर्गम, रह रह कर सिहरूँ,
हर ऊँची – नीची घाटी में, तुमको याद करूँ!
चूर – चूर तन, साँस धौंकनी, बढ़ता हूँ फिर भी
तुम मेरे रक्षक हो स्वामी, तब क्यों कहीं डरूँ!!
—-
राम प्राण की गहराई से तुम्हें नमन है
कृपा पा सकूँ नाथ तुम्हारी, इतना मन है
यह जग -ज्वाला क्या बिगाड़ सकती है मेरा
नाम तुम्हारा, सब तापों का सहज शमन है।।
—–
छोड़ दो, सब राम पर ही छोड़ दो
जिन्दगी का रुख उधर ही मोड़ दो।
तुम जगत् के साथ भटके हो बहुत
अब स्वयं को जगत्पति से जोड़ दो।।
—-
राम राम में रमो, रटो तुम राम – राम ही
राम राम ही जपो एक अवलम्ब नाम ही।
रूप चरित, गुण धाम उसी में सभी समाये
निहित बीज में ज्यों तरु, पत्ते फल ललाम भी।।
—–
मैं निस्साधन, दीन -हीन प्रभु, और न कोई मेरा
एक गाँठ सौ फेरे वैसे मुझे भरोसा तेरा।
काल – ब्याल मुँह बाये, जाने अगले पल क्या होगा,
अतः इसी पल अपने चरणों में दे मुझे बसेरा।।
——

तरी अहल्या जिनके पावन मृदुल स्पर्श से
प्रेम – हठीले केवट से जो गये पखारे!
जो जग का दुःख हरने काँटों से क्षत -विक्षत
राम! तुम्हारे चरण प्रेरणा स्त्रोत हमारे!!
———

मुझे शक्ति दो नाथ! कर सकूँ निज पर संयम,
काम, क्रोध को जीत सकूँ धारण कर शम-दम।
जनजीवन के मायामय आकर्षण से बच,
तुम्हें समर्पित हो पाऊँ बन निरहं, निर्मम।।
——
थोड़े सुख से सुखी, दुःख से दुखी हुआ करता है यह मन,
कैसी खोटी आदत इसकी विषयातुर रहता यह प्रतिक्षण
ठगा जा चुका बार अनेकों फिर भी सम्हल न पाता है यह
केवल कृपा तुम्हारी राघव! कर सकती है इसका शोधन।।
——
अब तक का जीवन तो बीता स्वार्थपूर्ण व्यवहार में
जिनका मुख देखे दुख उपजे उनकी ही मनुहार में
कहता कुछ था, करता कुछ था, रखना अपने मन कुछ और
राम तुम्हें अब याद कर रहा पड़ा हुआ मँझधार में।।

(सौजन्य – डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी)

जम्मू -कश्मीर में 400 कंपनियां 23 हजार करोड़ निवेश के लिए तैयार

महामारी के कारण जम्मू-कश्मीर नहीं कर पाया था इनवेस्टमेंट समिट

श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में पिछले साल से अब तक करीब 400 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से एमओयू साइन किए गए, ये कंपनियां राज्य में 18 सेक्टर्स में 23,000 करोड़ का निवेश करने वाली हैं। (सिंबॉलिक फोटो)
कोविड के दौर में जम्मू-कश्मीर से सुकून भरी खबर आ रही है। यहां अब निवेश की बाढ़ सी आ रही है। राज्य सरकार ने पिछले साल से अब तक करीब 400 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से एमओयू साइन किए हैं। ये कंपनियां राज्य में 18 सेक्टर्स में 23,000 करोड़ का निवेश करने वाली हैं। ये कंपनियां शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, आईटी, हैंडीक्राफ्ट्स, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, फार्मा, कौशल विकास, दुग्ध-पोल्ट्री-ऊन, इंफ्रास्ट्रक्चर, औषधीय पौधों, फिल्म व रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में निवेश में रुचि दिखा रही हैं।
राज्य के उद्योग व वाणिज्य विभाग के अधिकारी के मुताबिक यह कंपनियां राज्य में यूनिट्स शुरू करती हैं तो यहां के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल जाएंगे। अधिकारी के मुताबिक कुछ कंपनियों ने तो जमीन पर काम शुरू किया है, मगर ज्यादातर अभी कोरोना की परिस्थितियां ठीक होने का इंतजार कर रही हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य अगले 15 साल में राज्य में 1 लाख करोड़ रुपए का निवेश आमंत्रित करने का है।
यहां निवेश के लिए इच्छुक बड़ी कंपनियों में आत्मीय फील्डकॉन और एचपी कैपिटल भी शामिल हैं। आत्मीय फील्डकॉन यहां 650 करोड़ के निवेश से और एचपी कैपिटल 2000 करोड़ के निवेश से हेल्थकेयर फेसिलिटी बनाना चाहते हैं। आरके एसोसिएट्स यहां 500 करोड़ के निवेश से होटल खोलना चाहते हैं, जबकि नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया यहां 1700 करोड़ के निवेश से सघन प्लांटेशन और कोल्ड स्टोरेज क्लस्टर विकसित करेगा।
फ्लिपकार्ट ने स्थानीय कारीगरों के हुनर को बाजार देने में रुचि दिखाई है। अबूधाबी की कंपनी लूलू यहां फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाना चाहती है। निवेश की इच्छुक कंपनियों में रिलायंस एम्युनिशन लि., जैक्सन ग्रुप, इंडो-अमेरिकन सिनर्जी, कृष्णा हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, यूनिवर्सल सक्सेस एंटरप्राइजेस, सर्वोटेल और श्री सीमेंट भी शामिल हैं। राज्य सरकार ने पिछले साल पहली बार जेएंडके ग्लोबल इनवेस्टर समिट के आयोजन की तैयारी की थी। हालांकि कोरोना के चलते इसे स्थगित करना पड़ा। अब केंद्र ने भी यहां औद्योगिक विकास के लिए नई योजना के साथ 28,400 करोड़ का बजट रखा है।
शिक्षा में निवेश से राज्य के बच्चे बाहर जाने के लिए मजबूर नहीं होंगे
शिक्षा के क्षेत्र में भी कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है। राज्य के हजारों बच्चे अलग-अलग कोर्स में प्रवेश के लिए रूस, तुर्की, ईरान, बांग्लादेश, यूके ही नहीं, देश के दूसरे शहरों में विभिन्न संस्थानों में जाते हैं। अगर यह कंपनियां राज्य में शिक्षण संस्थान खोलें तो यहां के बच्चों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश से राज्य के लोगों को इलाज के बाहर भी नहीं जाना पड़ेगा।

कश्मीर में सेना ने बदला काफिले के झंडे का रंग

वाहनों पर घाटी में मनाए जाने वाले त्योहारों के बधाई संदेश लिखे
कश्मीर में सेना ने अपने काफिले के झंडे का रंग बदल दिया है। अब इसे लाल से बदलकर नीला कर दिया गया है। सेना का काफिला जब भी गुजरता है, तो सबसे आगे वाले वाहन पर एक झंडा लगा रहता है। यह पहले लाल रंग का हुआ करता था। सेना का मानना है कि लाल रंग हिंसा का प्रतीक है, लिहाजा इसे बदलने का फैसला लिया गया।
सेना के काफिले में शामिल वाहनों पर घाटी में मनाए जाने वाले त्योहारों के बधाई संदेश भी लिखे गए हैं। साथ ही घाटी की खूबसूरती दिखाने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। ऐसा करके सेना ने खुद को स्थानीय लोगों से जुड़ाव का संदेश दिया है।
लाठी की जगह सीटी दी गयी
पहले सैनिक काफिले के साथ लाठी लेकर चलते थे। इसे पटककर ठक-ठक की आवाज निकालते और लोगों को काफिले से दूर रहने के लिए कहते थे। अब इसे भी बदल दिया गया है। जवानों को लाठी की जगह सीटी दी गई है। इसे बजाकर भीड़ को काफिले से दूर किया जाता है।
छावनी इलाके की तस्वीर बदली
सेना ने इस मुहिम के तहत छावनी इलाके की दीवारों पर कश्मीर में ऊंचा मुकाम हासिल करने वाले लोगों की तस्वीरें बनाई जा रही हैं। काफिले में शामिल वाहनों पर भी कश्मीर के सुंदर स्थलों की चित्रकारी की गई है। बताया जा रहा है कि ऐसा करके सेना कश्मीरियों के दिल में जगह बनाना चाहती है।
धारा -370 हटाए जाने के बाद सेना की पहल
जम्मू- कश्मीर से धारा-370 हटाए जाने के बाद सेना ने स्थानीय लोगों का विश्वास जीतने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत स्थानीय लोगों की जरूरत पड़ने पर मदद करने के साथ- साथ सामाजिक कामों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना शामिल है। हाल ही में पुंछ में सेना ने एक दरगाह की मरम्मत के लिए आर्थिक मदद की थी। यहां जायरीनों के लिए एक शेड भी बनवाया है।

चाय हो या कॉफी…अन्दाज निराला जब हो ये तरह – तरह के मग्स

चाय या कॉफी पीने के शौकीन हैं तो किचन में चाहे जितने मग्स हों, कम ही लगते हैं। ये बेहद खास डिजाइन के कॉफी मग्स देखने में तो आकर्षक हैं ही, उपयोगी भी हैं।
1. कोस्टर वाला मग : इस मग के साथ अलग से कोस्टर रखने की जरूरत नहीं है। इसका डिजाइन ऐसा है कि मग का बेस टेबल पर नहीं, हवा में फ्लोट होगा।
2. वुडन कप : मिनिमलिस्ट और रस्टिक लुक के लिए बेहद खास नॉर्डिक डिजाइन मग्स ले सकते हैं। साइज थोड़ा छोटा है, इसलिए कम कॉफी पीने वालों के लिए अच्छा विकल्प है।
3. सिरेमिक मग : मार्बल्ड सिरेमिक से बने ये मग्स इन दिनों खूब पसंद किए जा रहे हैं। ये विंटेज हैंडमेड मग्स हैं जो मार्बल्ड सिरेमिक से बने हैं।
4. हैंड वोवन मग : देखने में ऐसा लगता है कि मग की वोवन डिजाइन है तो कैसे इसमें कुछ भर सकते हैं, लेकिन इसके अंदर चाय-कॉफी आसानी से पी जा सकती है।
5. मूड मग्स : अपने मूड के अनुसार अपना कॉफी मग चुन सकते हैं। इस सेट में तीन तरह के मूड दिखाई देते हैं। इसमें डबल वॉल इंसुलेशन है, इसलिए हैंडल की जरूरत नहीं है।
6. सिंकिंग मग : इस मग में कॉफी पिएंगे तो ऐसा लगेगा जैसे आपका मग टेबल पर पिघल रहा है। इसकी बनावट ही कुछ ऐसी है कि इसे सिंकिंग मग का नाम दे दिया गया है।
7. सिरेमिक स्ट्रेनर मग: चाय के शौकीन हैं तो ये मग खास हैं जो अपनी कॉफी को मग के अंदर ही ब्रू करना पसंद करते हैं उनके लिए भी ये मग काम का साबित होगा। इसके साथ स्टेनलेस स्टील स्ट्रेनर आता है।

 

तमिलनाडु के इरुवादी गांव में पीर बानो ने बनाया 350 महिलाओं को आत्मनिर्भर

तमिलनाडु के इरुवादी गांव में जब पीर बानो की शादी हुई तो उसे दहेज में सिलाई मशीन भी मिली। एक दर्जी के परिवार से संबंध रखने वाली पीर बानो के भाई ने उसे उस वक्त सिलाई सिखाई जब वह स्कूल में पढ़ती थी। इस तरह नयी-नवेली दुल्हन ने सिलाई करके अपने परिवार की आय बढ़ाने का फैसला किया। अगले कुछ सालों में उसने तीन बच्चों को भी सिलाई सिखाई। उन्हीं दिनों पीर बानो ने श्रीनिवासन सर्विस ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे बास्केट मेकिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम के बारे में सुना। उसे अपनी आय बढ़ाने का यह तरीका उचित लगा। यहां से बास्केट बनाना सीखकर पीर बानो ने 2006 में अपने बिस्मी स्व सहायता समुह की शुरुआत की। आज उनके स्व सहायता समूह की 15 महिलाएं न सिर्फ कपड़े बेचकर बल्कि केले के रेशों से बास्केट बनाकर भी अच्छी-खासी कमाई कर रही हैं।
बिस्मी स्व सहायता समूह की कई महिलाओं ने कर्ज लेकर सिलाई मशीन खरीदी। पीर बानो ने इन महिलाओं को स्कूल यूनिफॉर्म, नाइट ड्रेस और साड़ी ब्लाउज बनाने की ट्रेनिंग दी। उन्होंने अब तक 350 महिलाओं को सिलाई सिखाकर आत्मनिर्भर बनाया है। पीर बानो कहती हैं – ”मैं विधवा और गरीब महिलाओं से सिलाई सिखाने के पैसे नहीं लेती। मेरा यही प्रयास है कि वे अपने पैरों पर खड़ी हो जाएं और इज्ज्त की जिंदगी जिएं”। इसके अलावा उन्होंने अपने गांव में स्थित आंगनवाड़ी के बच्चों के लिए कुर्सियां खरीदीं। साथ ही वहां पंखे भी लगवाए। बानो यहां साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखती हैं। पीर बानो ने जितनी मेहनत गांव के उत्थान के लिए की है, उतनी ही अपने तीनों बेटों को काबिल बनाने में भी की। उनका सबसे बड़ा बेटा मुंबई में वाटर बोर्ड में इंस्पेक्टर है। उनका दूसरा बेटा मैकेनिकल इंजीनियर है जो इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन में कार्यरत है। वहीं तीसरे बेटे ने अपनी ई कॉमर्स कंपनी की स्थापना की है। वह अपनी मां की बनाई हुई चीजें बेचने में भी मदद करता है।

14 साल की उद्यमी सिमरन ने डिजाइन की ट्रैवल किट

महिलाओं और बच्चों के लिए डिजाइन की
नयी दिल्ली : दिल्ली के श्रीराम स्कूल की छात्रा सिमरन सिंह ने जब यह देखा कि जब भी उनके पेरेंट्स लंबी यात्रा पर जाते हैं तो वे सेहत और सुरक्षा से जुड़े सामान की लंबी लिस्ट बना लेते हैं। इन सामानों को खरीदने के लिए उन्हें अपने व्यस्त शेड्यूल से वक्त निकालकर कई दुकानों पर जाना पड़ता है। सिमरन ने अपने मात-पिता को इस परेशानी से बचाने के लिए फरवरी 2021 में ‘सेफ्टी नोमाडिक’ की स्थापना की। अपनी कंपनी के अंतर्गत सिमरन ने एक ऐसी ट्रैवल किट बनाई जिसमें सफर के दौरान काम करने वाली छोटी-छोटी कई चीजें हैं। सिमरन ने दो तरह की सेफ्टी किट बनाई। इनमें से एक किट बच्चों के लिए तो दूसरी महिलाओं के लिए डिजाइन की गई है। उनकी हर किट में कुछ जरूरी दवाएं, फेस मास्क, टॉयलेट सीट कवर्स, पेपर सोप, कॉटन बॉल्स और एंटीसेप्टिक आदि हैं। सिमरन ने महिलाओं के लिए बनाई किट में सैनिटरी पैड्स, डिस्पोजेबल यूरिनेशन फनल, पेपर स्प्रे और सेफ्टी अलार्म भी रखा है। सिमरन ने ये महसूस किया कि सफर के दौरान बच्चे बोर होते हैं। उन्हें बोरियत से बचाने के लिए उसने अपनी किट में ओरिगेमी पेपर, स्केच पेन, चॉकलेट जैसी चीजें भी रखीं। इस किट को लॉन्च करने के 15 दिन के अंदर ही सिमरन ने 26 किट बेच दी। जल्दी ही वे बुजुर्गों और फैमिली के लिए भी किट डिजाइन करना चाहती हैं।

सीबीएसई के बाद सीआईएससीई की 10वीं-12वीं की परीक्षाएं टलीं

नयी तारीखों पर फैसला जून के पहले सप्ताह में होगा
नयी दिल्ली : देश में लगातार बढ़ते कोरोना के मामलों के बीच सीबीएसई के बाद अब काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) ने भी आईसीएसई (10वीं) और आईएससी (12वीं) की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। बोर्ड के मुताबिक परीक्षा की नई तारीख पर जून के पहले हफ्ते में फैसला लिया जाएगा।
10वीं के विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक होगी परीक्षा
सीआईएससीई के मुख्य कार्यकारी और सचिव गेरी एराथून ने बताया कि 12वीं की परीक्षा बाद में कराई जाएगी। वहीं, 10वीं के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा वैकल्पिक होगी। 10वीं के जो छात्र परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहते हैं, उनका रिजल्ट काउंसिल एक क्राइटेरिया के आधार पर तय करेगा। इस साल 10वीं-12वीं के थ्योरी एग्जाम 4 मई 2021 से शुरू होने थे।
सीबीएसई की परीक्षाएं पहले ही स्थगित
इससे पहले केंद्र सरकार ने सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा रद्द कर दी थी। इसके पेपर 4 मई से शुरू होने वाले थे। 12वीं की परीक्षा भी टाल दी गई है। सरकार 1 जून को 12वीं की परीक्षा पर फैसला करेगी। अगर परीक्षा कराने का फैसला हुआ भी तो यह 15 जून के बाद ही होगी।

कोविड -19 : घबराने की नहीं, बस व्यवस्थित होने की जरूरत है

ऐसे में घबराने की जगह उन्हें व्यवस्थित होने की जरूरत है
घर पर चेकलिस्ट बनाकर रखें और कोविड टूल किट तैयार रखें

मुम्बई : पूरे देश में कोरोना वायरस फैल रहा है। अगर आप किसी शहर या अपने घर में अकेले रह रहे हैं और आप कोरोना पॉजिटिव आ जाते हैं। घर पर आपके माता-पिता अकेले हैं, घर पर पेट्स हैं तो क्या आपके पास कार्ययोजना है? उदाहरण के तौर पर आप बेंगलुरु में हैं और कोविड पॉजिटिव हो गए हैं। आदर्श रूप से, बीबीएमपी आपको कॉल करके आपके इलाज और आइसोलेशन की व्यवसथा करती है लेकिन बहुत से लोगों ने बताया कि उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 5 दिनों बाद तक बीबीएमपी ने उनकी कोई सुध नहीं ली।

ऐसे में लोगों को प्लान बी की जरूरत होती है। अकेले रह रहे पुरुषों और महिलाओं की आरटी-पीसीटी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनके लिए हम एक्सपर्ट्स से बात करके बता रहे हैं कि घर पर क्या तैयारी रखें।

अपनी सहायता प्रणाली को पहचानें : आपके एक-दो निकटस्थ पड़ोसियों, कुछ मित्रों, किराने का सामान बेचने वालों, मेडिकल स्टोर के लोगों से संपर्क बनाए रहें ताकि जरूरत पड़ने पर आप उनकी मदद ले सकें।

डॉक्टर: एक डॉक्टर से पहचान करें जो घर पर कोविड का प्रबंधन करने में आपकी मदद करे। अधिकांश कोविड के मामले बिना लक्षणों वाले होते हैं। अगर आपका ऑक्सिजन लेवल ठीक है और फीवर नियंत्रण में है तो घर पर ही ठीक केयर हो सकती है।

भोजन: ऐसे रसोइयों से संपर्क करें जो घर का बना ताजा खाना सप्लाई करता हो। अगर आपको जरूरत पड़ती है तो वह आपको खाना पहुंचा सकता है।

स्टॉक: आपातकालीन राशन के लिए ओट्स, उपमा और खिचड़ी जैसे रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ घर पर रखें। इसमें पीने का पानी भी शामिल है।

दवाएं: कुछ बेसिक दवाओं का स्टॉक रखें जैसे-पैरासिटामॉल, बीटाडीन (गार्गल करने के लिए) गैर-डिजिटल थर्मामीटर या बैटरी सहित थर्मामीटर, खांसी की दवाई, पल्स ऑक्सिमीटर, विटमिंस, यदि आपकी दवाएं चल रही हैं तो कम से कम एक महीने का स्टॉक रखें। यदि आप एक महिला हैं, तो घर पर पर्याप्त सैनिटरी नैपकिन रखना न भूलें।

पैसा: एटीएम कार्ड के साथ अपने खाते में पर्याप्त रुपये रखें। यदि आपका बीमा है तो उसकी पॉलिसी ध्यान से पढ़ें। जब आप बीमार हों तो एक मित्र या परिवार का पता लगाएं जिस पर आप पैसे के लेन-देन का प्रबंधन कर सकते हैं। ऐसे परिवार या दोस्त से संपर्क रखें जो आपको जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद कर सकें।

खुद को स्वस्थ रखें: शारीरिक और भावनात्मक रूप से खुद को स्वस्थ्य रखें। अगर आप तनाव महसूस कर रहे हैं तो सेल्फ केयर के बारे में पढ़ें और किसी दोस्त या प्रफेशनल काउंसलर्स से बात करें। यदि आप वर्किंग हैं तो पता करें कि क्या आपके कार्यालय में अस्पताल में भर्ती होने, ऐम्बुलेंस, ऑक्सिजन आदि की मदद देने की नीति है कि नहीं।

क्रिटिकल केयर: ऑक्सिजन, ऐम्बुलेंस जैसी क्रिटिकल केयर सर्विसेस के नंबर्स पास में रखें।

होम केयर सर्विसेस: कोविड रोगियों के लिए घर पर देखभाल करने वाले अस्पतालों पर रिसर्च करें और जानकारी रखें। याद रखें कि आप जितना ऑर्गनाइज्ड होंगे, उतना ही आसान होगा।

पेट पैरंट्स: उन दोस्तों का पता लगाएं जो आपके पालतू जानवरों को अपने पास रख सकें या किसी पेट हॉस्टल का पता लगाकर रखें।

कोविड चेकलिस्ट
1. लैपटॉप बैकपैक
2. बीमा के साथ मेडिकल फ़ाइल
3. आधार की फोटोकॉपी (प्लस मूल)
4. सभी मूल दस्तावेजों को स्कैन करें और Google ड्राइव पर एक प्राइवेट शेयर फोल्डर में अपलोड करें
5. पानी को साफ करने वाली गोलियां
6. दैनिक दवा (2 सप्ताह की आपूर्ति)
7. बुखार, पेट खराब होने आदि की दवाएं
8. बेसिक फर्स्ट एड किट
9. टॉर्च (अतिरिक्त बैटरी के साथ)
10. अपने फोन को चार्ज करने के लिए पावर बैंक
11. जिकलॉक बैग
12. प्लास्टिक जिप टाइज
13. बड़े और मध्यम कचरा बैग
14. कपड़े बदलने की व्यवस्था
15. इमरेजेंसी कंबल
16. थर्मस
17. तैयार खाना
18. साबुन

(साभार – नवभारत टाइम्स)