ब्रज भाषा की उत्कृष्ट कवयित्री आनंद कुंवरी राणावत

सभी सखियों को नमस्कार। सखियों, राजस्थान के राजघराने की नारियों का साहित्य के क्षेत्र में बहुत अवदान रहा है। उनमें से कुछ के अवदान को याद रखा गया तो कुछ इतिहास के बीहड़ में गुम हो गईं। मैं सिलसिलेवार ढंग से उनके अवदान से आपको अवगत करवाने का तुच्छ प्रयास कर रही हूँ। उम्मीद है कि आप इन विस्मृत कवयित्रियों की रचनाओं का पाठ कर न केवल स्वयं इनके व्यक्तित्व से परिचित होंगी बल्कि इसे दूसरों तक पहुँचाने का प्रयास भी करेंगी।
सखियों, आज मैं राजपूताने की कवयित्री आनंद कुंवरी राणावत के साहित्य से आपको परिचित करवा रही हूँ। आनंद कुंवरी जी शाहपुरा (मेवाड़) के राजा अमरसिंह की पुत्री एवं राजा माधव सिंह की बहन थीं। उनका विवाह अलवर रियासत के महाराजा विजयसिंह के साथ हुआ था। महाराजा विजयसिंह स्वयं भी एक अच्छे कवि थे। उनका शासनकाल विक्रम संवत 1871 से 1914 तक रहा था। माना जा सकता है कि इसी कालखंड के आस पास महारानी आनंद कुंवरी ने काव्य सृजन किया होगा। उन्होंने “आनंद सागर” नामक ग्रंथ की रचना की थी जिसमें विभिन्न राग रागिनियों के आधार पर रचित 105 पद संकलित हैं। ब्रज भाषा में रचित इस ग्रंथ में श्रीराम और श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति भाव का अंकन एवं उनकी लीलाओं का गायन हुआ है। कहा जा सकता है कि इसका मूल स्वर सगुण भक्ति है लेकिन कवयित्री ने सगुण भक्ति के दोनों ही आराध्यों की अराधाना की है। किसी मतवाद के फेर में वह नहीं पड़ी हैं। उन्हें राम और कृष्ण दोनों समान रूप से प्रिय हैं। भक्ति के अतिरिक्त इन पदों में श्रृंगार और वात्सल्य के भावों का भी सुंदर समावेश मिलता है।
कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित उत्सव का वर्णन करते हुए बरवा रागिनी में रचित एक सुंदर पद दृष्टव्य है। नवजात कृष्ण को देखने के लिए ब्रज की तमाम नारियाँ सुंदर वस्त्र- आभूषणों से सज्जित होकर आती हैं। एक से बढ़कर एक बहुमूल्य गहनों- कपड़ों से सजी नारियाँ जब कृष्ण को देखती हैं तो अपने तमाम ऐश्वर्य को भूलकर कृष्ण की मनमोहक छवि पर स्वयं को न्योछावर कर देती हैं। इस पद में वात्सल्य और भक्ति आपस में घुलमिल गये हैं और ब्रजनारियों की साज सज्जा का वर्णन भी अत्यंत मोहक बन पड़ा है। पद देखिए-
“पुत्र जन्म उत्सव सुनि भारी भवन आवत ब्रिज नारी|
लहंगे महंगे मांलन के सूचि कुचि कंचुकि सिरन सुभ सारी||
बेदी भाल खौर केसर की नथ नकबेसर मांगी संवारी||१||
अलकै लखि अलि अवलि लजावत काजर काजर रेख दिए कारी|
हार हमेल हिमन बिच राजत अमित भांति भुसित सुकामारी ||२||
चाल गयंद चंद से आनन् लखि लाजति रति अमित विचारी|
मंगल मूल बस्ति सजि सुन्दरि कर कमलन लिए कंचन थारी||३||
गावति गीत पुनीत प्रीति युत आई जिहां जिहां भवन खरारी |
आनंद प्रभु को बदन देखि सब दैहि नौछावर वित्त विसारी||४||”
कृष्ण जन्मोत्सव का एक और दृश्य रानी आनंद कुंवरी की कलम का स्पर्श पाकर साकार हो उठा है। कृष्ण के जन्म का समाचार सुनकर याचक नंद बाबा के द्वार पर दौड़े आए हैं। पुत्र जन्म की खुशी में नंद बाबा मणि माणिक्य लुटा रहे हैं, बधाइयाँ बज रही हैं और यह दृश्य इतना सुंदर लग रहा है कि ब्रजभूमि के नर -नारी ही नहीं स्वर्ग के देवता भी प्रसन्नता से झूमते दिखाई दे रहे हैं। इस तरह के पदों को पढ़ते हुए सूरदास के बाललीला के पद अनायास याद आते हैं।
“पुत्र जन्म भयो सुनि जाचक जन नंद महर धरि आये|
अमित भांति करि वंश प्रशंसा बाजे विविध बजाये ||
परम पुनीत अवनि अस्थित व्है विपुल बधाई गाये|१||
रीझत सब नर नारि नौछावर दें निज चित्त भुलाये|
सिव ब्रह्मादिक सव सुर सुरतरु मेघ झरलाये||२||
नभ अरु नगर भई जय जय धुनि मुनि सुख होत सवाये|
द्वार द्वार बाजत निसानं बर गावत नारि बधाये||३||
बहु पर भूषण द्रव्य दान तैं जानकि लेत अधाये|
रहौ सदा आनंद नद सुन कहि निज सदन सिधाये||४||”
आनंद कुंवरी जी के भक्ति रस में आप्लावित पदों को पढ़ते हुए भक्तिकाव्य के महान कवियों की कविताओं की पंक्तियां सहज ही मन मस्तिष्क में कौंध जाती हैं। उदाहरणस्वरूप एक पद देखिए-
“तुम बिन को भव विपति नसावै।
कौन देव दरबार जाय तहां आरत अरज लगावै ||१||
को दलि दोस दीन के पल मै परम पुनीत कहावै|
मोसे पतितन को आनंद प्रभु हरि बिन को अपनावै||२||”
इस पद को पढ़ते हुए अनायास तुलसीदास का पद “जाऊं कहां जति चरण तिहारे..” या सूरदास का पद “प्रभु हौ सब पतितन को टीकौ..” की स्मृति मन में कौंध उठती है। वही दास्य भाव, वही विनयशीलता, वही समर्पण जिसमें पूर्णतः सराबोर कवयित्री अपने आराध्य के चरणों में स्वयं को पूर्णतः न्योछावर कर देती हैं।
सखियों, आनंद कुंवरी के पदों का पाठ करते हुए यह निसंकोच कहा जा सकता है कि वह ब्रजभाषा की एक सफल एवं उत्कृष्ट कवयित्री थीं। भाव पक्ष के साथ ही उनकी कविताओं का कलापक्ष भी काफी निखरा हुआ था।
कल से भारत सम्भालेगा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कमान
आतंकवाद पर और तेज होगा प्रहार
नयी दिल्ली : कल 1 अगस्त से एक महीने के लिए भारत के हाथों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कमान होगी। भारत 1 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता सम्भालेगा। इसका मतलब है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और मजबूत होगी। महासभा अध्यक्ष के कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने यूएन महासभा प्रमुख को भारत की अध्यक्षता के दौरान होने वाली मुख्य गतिविधियों से अवगत कराया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टी एस तिरुमूर्ति ने 15 राष्ट्रों के शक्तिशाली संयुक्त राष्ट्र निकाय की भारत द्वारा अध्यक्षता संभाले जाने की पूर्व संध्या पर एक वीडियो संदेश में कहा कि हमारे लिए उसी माह में सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभालना विशेष सम्मान की बात है जिस माह हम अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बतौर अध्यक्ष भारत का पहला कार्य दिवस सोमवार यानी 2 अगस्त होगा। तिरुमूर्ति महीने भर के लिए परिषद के कार्यक्रमों पर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में मिश्रित संवाददाता सम्मेलन करेंगे यानी कुछ लोग वहां मौजूद होंगे जबकि अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़ सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी कार्यक्रम के मुताबिक तिरुमूर्ति संयुक्त राष्ट्र के उन सदस्यों देशों को भी कार्य विवरण उपलब्ध कराएंगे जो परिषद के सदस्य नहीं हैं। बता दें कि सुरक्षा परिषद के एक अस्थायी सदस्य के रूप में भारत का दो साल का कार्यकाल 1 जनवरी, 2021 को शुरू हुआ। यह सुरक्षा परिषद के गैर स्थायी सदस्य के तौर पर 2021-22 कार्यकाल के दौरान भारत की पहली अध्यक्षता है। भारत अगले साल दिसंबर में फिर से सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करेगा।
राजा नरेन्द्रलाल खान वुमेन कॉलेज में मना वन महोत्सव
मिदनापुर : पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर स्थित राजा नरेंद्र लाल खान महिला महाविद्यालय(ऑटोनोमस) में एन.एस.एस , सैप और बलाका एल्युमिनी एसोसिएशन द्वारा संयुक्त रूप से वनमहोत्सव का आयोजन किया गया । कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. जयश्री लाहा ने सभी विभाग के शिक्षक शिक्षिकाओं और कार्यालय के कर्मचारियों के साथ मिलकर महाविद्यालय के विशाल प्रांगण को और भी सुन्दर बनाने के लिए बहुत सारे पौधें लगाएँ। कोरोना जैसी महामारी के समय वृक्षारोपण के इस कार्यक्रम ने आनेवाली पीढ़ी को एक नयी राह दिखाई है।
भवानीपुर कॉलेज ने मनाया कारगिल दिवस, याद किये गये कैप्टन विक्रम बत्रा
कोलकाता : भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की एन सी सी 31 बंगाल बीएन एनसीसी और नम्बर एक (बी) एयर स्क्वेन्ड्रान ने मिलकर ऑन-लाइन ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाया। परम वीर चक्र कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता गिरधारीलाल बत्रा और लेफ्टिनेंट सूबेदार मेजर योगेन्द्र सिंह यादव इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। योगेन्द्र सिंह यादव को सबसे कम उम्र में परमवीर चक्र मिला। कार्यक्रम के प्रारंभ में कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह और टीआईसी डॉ शुभब्रत गंगोपाध्याय ने अमर जवान ज्योति पर देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सभी शहीदों को नमन किया। प्रो. शाह ने अतिथियों का स्वागत किया। कॉलेज में होने वाले सामाजिक कार्यों की गतिविधियों पर चर्चा की। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता ने अपने शहीद बेटे की असाधारण प्रतिभा और देश के प्रति उनके जज्बातों और जुनून के विषय में बचपन से कैप्टन तक की यात्रा के विषय में विस्तार से जानकारी दी कि कैसे वीरता से वे अपने दुश्मन के सैनिकों से लड़ते हुए शहीद हुए जो आज के युवाओं के लिए प्रेरणादायी है।कैप्टन विक्रम ‘टाइगर ऑफ ड्रास’ , ‘दि लॉयन ऑफ कारगिल’ और ‘कारगिल हीरो’ के नाम से विख्यात हैं। एक पिता के रूप में वे हमेशा यही चाहते थे कि उनके बच्चे साहसी हों। कारगिल में उनके नाम से बत्रा टावर है। गिरधारी लाल बत्रा की पुस्तक ‘परमवीर विक्रम बत्रा दि शेरशाह ऑफ कारगिल ‘में कैप्टन विक्रम पर फिल्म शेरशाह भी बनी है जो 12 अगस्त को रिलीज़ भी हो रही है।
कैप्टन विक्रम ने अपने पिता से वादा किया था ‘डैडी मैं या तो तिरंगा फहरा कर आऊँगा या फिर तिरंगे में लिपट कर आऊँगा।’ पिता गिरधारीलाल खुश हैं कि उनके बेटे ने दोनों ही वादे निभाए। इस अवसर पर देश भक्ति गीत, कारगिल पर तिरंगे फहराने के पोस्टर प्रतिस्पर्धा भी हुई। 1999 में हुए कारगिल युद्ध के तीन ऑपरेशन विजय, तलवार और सफेद सागर के विषय में एनसीसी जानकारी दी।
कॉलेज की कोऑर्डिनेटर प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने 19 वर्ष की छोटी आयु में परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले लेफ्टिनेंट सूबेदार मेजर योगेन्द्र सिंह यादव का परिचय दिया और उनकी वीरता की चर्चा की। 17 गोलियों के लगने से घायल और छाती पर भी एक गोली खाने वाले योगेन्द्र सिंह ने दुश्मनों के सामने घुटने नहीं टेके। अंत तक लड़े और देश को विजय दिलाई। ऐसे वीर और जांबाज को सुनने का अवसर मिला। योगेन्द्र सिंह ने अपने वक्तव्य में कारगिल की उस पहाड़ी के विषय में जानकारी दी जहाँ दो रात चलकर पहुँचे और दुश्मन सेना से लड़े, अपने छह साथियों को खोया। फिर भी हौसला न खोते हुए पाँच दुश्मन सैनिकों को अकेले मारा। उस समय आँखों के सामने बस देश की विजय का मिशन होता है। बचपन से देश के लिए कुछ करने वाले योगेंद्र सिंह का सपना इतनी जल्दी पूरा होगा ऐसा उन्होंने नहीं सोचा था जबकि परमवीर चक्र भी मिला। हिन्दुस्तान की मिट्टी में जन्म लेना सार्थक हो गया। हर भारतवासी को माँ भारती को धन्यवाद देना चाहिए। मेजर योगेन्द्र ने कहा कि हमारे अवचेतन मन में जो बात बैठ जाती है उसमें आस्था, विश्वास और स्वाभिमान हो तो व्यक्ति ऐसे असंभव कार्य भी कर जाता है जो उसके शारीरिक सामर्थ्य से अधिक होता है। एनसीसी के कैडट और भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों को देश प्रेम के लिए प्रोत्साहित किया। कारगिल युद्ध के दौरान स्त्री योद्धाओं फ्लाइट कमांडो गुंजन सक्सेना और प्रथम हेलीकॉप्टर चलाने वाली श्री विद्या राजन की अनकही कहानी भी सुनी गयी ।
पूजा मिश्रा की देश भक्ति कविता का पाठ कैडट अंजली ने किया। कैडट कैप्टन आदित्य राज और कैडट अरित्रिका दूबे ने एनसीसी बटालियन के सभी कैडट को धन्यवाद दिया, अंत में देश भक्ति गीत की नृत्य प्रस्तुति में तिरंगा फहराया गया । एनसीसी की समन्वयक प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का संचालन कैडट सबिया ने किया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कार्यक्रम की जानकारी दी ।
खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज में प्रेमचंद स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन
कोलकाता : खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज की ओर से प्रेमचंद की 141 वीं जयंती के अवसर पर ‘प्रेमचंद का देश’विषय पर प्रेमचंद स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। यह व्याख्यानमाला विगत 12 सालों से आयोजित हो रहा है। इस बार बतौर वक्ता उपस्थित थे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं प्रसिद्ध आलोचक- कवि आशीष त्रिपाठी । कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुबीर कुमार दत्त के स्वागत भाषण से हुआ। अतिथि एवं श्रोताओं का स्वागत करते हुए उन्होंने प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपनी बातें रखी। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद अपनी अमर रचनाओं के कारण पूरे विश्व में आज भी लोकप्रिय हैं। हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने विषय -प्रस्तावना में ‘प्रेमचंद स्मृति व्याख्यानमाला’ की रूपरेखा पर चर्चा करते हुए कहा कि
प्रेमचंद का साहित्य और चिंतन हमारे लिए प्रेरक ही नहीं बल्कि अनुकरणीय भी है। प्रमुख अतिथि आशीष त्रिपाठी ने ‘प्रेमचंद का देश’ विषय पर ज्ञानवर्धक एवं सारगर्भित वक्तव्य देते हुए प्रेमचंद के साहित्य के द्वारा देश अथवा राष्ट्र संबंधी परिकल्पना को स्पष्ट किया। उन्होंने प्रेमचंद की रचनाओं को सामाजिक सरोकारों के साथ जोड़ते हुए, मानवीय संवेदना के विकास में सहायक बताया है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का भारत बहुलतावादी देश है। यहाँ साझी संस्कृति की विरासत है। प्रेमचंद बार बार सामाजिक भिन्नता को भी जीवन सौंदर्य के रूप में देखते हैं।प्रेमचंद अपनी रचनाओं में भारत को जीवितों का देश मानते हैं।
कार्यक्रम का सफल संचालन हिन्दी विभाग की शिक्षिका मधु सिंह ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन राहुल गौड़ ने दिया।इस अवसर पर देश के अलग अलग हिस्सों से श्रोताओं और साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया।
सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की छात्राओं का शानदार प्रदर्शन
कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की छात्राओं ने 12वीं की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया। सभी छात्राएँ सफल रहीं। परीक्षा में कुल 192 छात्राएँ बैठी थीं। 100 छात्राओं को प्रथम श्रेणी मिली। औसत कुल अंक 91.33 प्रतिशत रहा जो पिछले कई सालों की तुलना में अधिक है और सर्वोच्च प्राप्त अंक 99 प्रतिशत है। ध्वनि ठकरार को होम साइंस में और उषोशी दास को फिजिक्स में शत प्रतिशत अंक मिले।
बीएचएस के विद्यार्थियों का बारहवीं की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन
कोलकाता : बिड़ला हाई स्कूल के विद्यार्थियों ने एआईएसएससीई यानी 12वीं की परीक्षा में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। परीक्षा में लोकेश सोमानी (कॉमर्स) 99.2 प्रतिशत यानी 496 अंक पाकर अव्वल रहे। दूसरे स्थान पर आदित्य राय चौधरी (साइंस) 98.8 प्रतिशत यानी 494 अंक और तीसरे स्थान पर ह्यूमैनिटीज के इशान बनर्जी रहे जिन्होंने 487 यानी 97.4 अंक प्राप्त किये। कॉमर्स में लोकेश सोमानी 496 (99.2 प्रतिशत )अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया जबकि 491 (98.2 प्रतिशत) अंक पाकर यश जैन दूसरे और 490 (98.0 प्रतिशत) अंक पाकर पीयूष अग्रवाल तीसरे स्थान पर रहे। साइंस स्ट्रीम में आदित्य राय चौधरी को सबसे अधिक 494 (98.8 प्रतिशत) अंक मिले। दूसरे स्थान पर संयुक्त रूप से 490 (98 प्रतिशत) अंक पाकर बासिल लबीब और अनीश बनर्जी ने कब्जा जमाया। तीसरे स्थान पर 489 (97.8 प्रतिशत) अंक पाकर सुतीर्थ नाहा रहे। ह्यूमैनिटीज में 487 (97.4 प्रतिशत) अंक पाकर इशान बनर्जी रहे। दूसरे स्थान पर 486 (97.2 प्रतिशत) अंक पाकर आकाश नाथ और तीसरे स्थान पर 477 (95.4 प्रतिशत) अंक पाने वाले हिमाघ्न बंद्योपाध्याय रहे।
सरकार की पसंद आशा द्वारा संचालित होती है: डॉ. कृष्णमूर्ति सुब्रमनियन
कोलकाता : ऐसी स्थिति में जब भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है, भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. कृष्णमूर्ति सुब्रमनियन का मानना है कि सरकार के चयन उम्मीदों से संचालित होते हैं। यदि आप पिछले डेढ़ साल में किए गए सुधारों और मौलिक सुधारों को देखें तो आपको स्पष्ट संकेत दिखाई देंगे। डॉ. सुब्रमण्यम ने कहा कि उन्होंने पहली तिमाही की संख्या के बाद वी आकार की वसूली का सुझाव दिया था जिसमें 24 प्रतिशत की गिरावट आई थी। “हम आर्थिक विकास में वी आकार की रिकवरी को देखकर बहुत खुश हैं। वास्तव में, भारत बड़े देशों में एकमात्र देश है, जिसने लगातार दो तिमाहियों में विकास किया है, “उन्होंने एसोचैम द्वारा आयोजित” आर्थिक रिबाउंड के लिए रोडमैप “वित्तीय संसाधनों के उत्पादक उपयोग पर दूसरे राष्ट्रीय ई-सम्मेलन में कहा।
देश की समग्र अर्थव्यवस्था में कॉरपोरेट बॉन्ड के महत्व को रेखांकित करते हुए, जी. महालिंगम, पूर्णकालिक सदस्य, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कहा कि मुश्किल कोविड समय के दौरान सेबी सूचीबद्ध कंपनियों की पीड़ा को कम करने के लिए बड़ी संख्या में उपाय कर रहा है। कंपनियों और ये उपाय अनुपालन में छूट, धन उगाहने में छूट और सही मुद्दों को सुविधाजनक बनाने में छूट आदि के रूप में हैं।
उन्होंने देश की वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने के लिए देश में कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट के विकास को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ‘देश में कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को बड़े पैमाने पर विकसित करने की जरूरत है। हम कुछ समय से इस बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन मुझे पिछले कुछ महीनों में कार्रवाई की हड़बड़ी दिखाई दे रही है, जहां सरकार सक्रिय भूमिका निभा रही है, आरबीआई भी इसके पक्ष में है, जबकि सेबी ने इस दिशा में कुछ उपाय किए हैं।
एसोचैम के अध्यक्ष विनीत अग्रवाल ने कहा, “ उद्योग को विशेष रूप से सरकार द्वारा घोषित एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन भावनाओं को बढ़ावा देगा। आज बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान कोविड के आर्थिक प्रभाव के खिलाफ देश के प्रति-उपायों में सबसे आगे हैं, हमें विश्वास है कि सरकारी सुधारों और नियामक समर्थन की मदद से हम चुनौतियों से पार पा सकते हैं और दोहरे अंकों में बढ़ने के अपने सपने को प्राप्त कर सकते हैं।
एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने कहा, “देश के वित्तीय संसाधनों को उत्पादक उपयोग में लाया जाता है। 13 प्रमुख क्षेत्रों में पीएलआई योजना की घोषणा और गैर-महानगरीय क्षेत्रों और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल निवेश के लिए ₹1.1 लाख करोड़ की ताजा ऋण गारंटी सुविधा जैसी पहल देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने में एक लंबा सफर तय करेगी।
कॉन्क्लेव, जिसमें अश्विन पारेख, मैनेजिंग पार्टनर, अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी सहित उद्योग के विशेषज्ञों की भागीदारी थी। डॉ चरण सिंह, अध्यक्ष, एसोचैम नेशनल काउंसिल फॉर बैंकिंग गैर-संस्थागत उधारदाताओं द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है और हितधारकों की समस्याओं और सवालों के समाधान के लिए। सम्मेलन के दौरान एसोचैम द्वारा अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज (एपीएएस) के साथ साझेदारी में तैयार वित्तीय संसाधनों के उत्पादक उपयोग “आर्थिक रिबाउंड के लिए रोडमैप” की एक नॉलेज रिपोर्ट भी जारी की गयी।




