मॉस्को : साइबेरिया की बर्फ में जमी हुए अवस्था में पाए गए एक पूरी तरफ से संरक्षित शेर के शावक की पुष्टि ‘मादा’ के रूप में हुई है, जिसकी मौत करीब 28,000 साल पहले हो गई थी। जीवों से जुड़े एक नए अध्ययन में इसकी जानकारी दी गई। यह अब तक पाए गए सबसे अच्छी तरह संरक्षित हिमयुग के जानवरों में से एक है। सेंटर फॉर पैलियोजेनेटिक्स, स्टॉकहोम, स्वीडन की टीम ने इसका नाम स्पार्टा (Sparta) रखा है। अभी भी पहले जैसे दांत और त्वचा
रिसर्च के मुताबिक मादा शावक की मौत के समय उसकी उम्र दो महीने से भी कम थी। वह गोल्डेन फर से ढकी हुई पाई गई। मादा शावक के दांत, त्वचा और मूछें अभी भी बरकरार हैं। इसको पर्माफ्रॉस्ट में संरक्षित किया गया था, जो जमीन पर या उसके नीचे ऐसी सतह होती है जहां का तापमान लगातार शू्न्य डिग्री सेल्सियस से कम रहता है। यह दो विलुप्त हो चुके ‘बिग कैट’ शावकों में से एक थी, जिसे सेम्युल्याख नदी के तट पर मैमथ टस्क हंटर्स ने खोजा था। दूसरा शावक 43,448 साल पुराना
अनुमान था कि यह दोनों शावक भाई-बहन थे क्योंकि वे सिर्फ 49 फीट दूर पाए गए थे। रिसर्च में सामने आया है कि स्पार्टा दूसरे शावक की तुलना में 15,000 साल बाद जीवित थी। रेडियो कार्बन डेटिंग के अनुसार, बोरिस नाम के दूसरे शावक की उम्र ज्यादा है और वह 43,448 साल का है। जब उसकी मौत हुई तो उसकी उम्र भी एक-दो महीने के बीच की थी। रूस और जापानी वैज्ञानिकों की जांच में इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि उन्हें किसी शिकारी ने मारा था। हादसे का शिकार हुए शावक
टीम ने कहा कि स्कैन में उनकी खोपड़ी और पसलियों की चोट दूसरी संभावनाओं की ओर इशारा करती है। शोधकर्ता लव डेलन ने कहा कि शायद वे किसी मडस्लाइड में मर गए होंगे या पर्माफ्रॉस्ट किसी दरार में गिर गए होंगे। 2017 और 2018 के बीच पूर्वी साइबेरिया में उनकी खोज की गयी थी।
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में मल्लावां क्षेत्र में सुनासीर नाथ मंदिर है। माना जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग की स्थापना सतयुग में देवराज इंद्र ने की थी। वैसे तो पूरे वर्ष यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन सावन महीने में यहां देश-विदेश से भी लोग पूजा-अर्चना करने आते हैं। पूर्व में इस मंदिर में सोने के कलश, दरवाजे और जमीन पर गिन्नियां जड़ी थीं, लेकिन 16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह औरंगजेब ने इस मंदिर का सोना लूट लिया और शिवलिंग पर आरी चलवाकर इसे काटने की कोशिश भी की, लेकिन नाकाम रहा, उसकी बर्बरता का सबूत आज भी मौजूद है। मल्लावां कस्बे से तीन किलोमीटर दूर इस मंदिर के विषय में पुजारी राम गोविंद मिश्र बताते हैं कि यहां के शिवलिंग की स्थापना इंद्र देव ने की थी। 16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह औरंगजेब ने मंदिर में जड़ा सोना लूटने के लिए यहां आक्रमण किया था। गौराखेड़ा के शूरवीरों ने किया डटकर मुकाबला
औरंगजेब की सेना की भनक जैसे ही क्षेत्र के गौराखेड़ा के लोगों को लगी तो वहां के शूरवीरों मुगल बादशाह की फौज के आगे चट्टान की तरह खड़े हो गए। दोनों में भीषण युद्ध हुआ। जिसमें सैकड़ों सैनिक मारे गए। मुगल बादशाह की भारी फौज के आगे गौराखेड़ा के शूरवीर ज्यादा देर नहीं टिक पाए और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इसके बाद मुगल सेना को मढ़िया के गोस्वामियों ने भी चुनौती दी, लेकिन उनको भी हार झेलनी पड़ी। मंदिर का सोना लूट लिया
मुगल बादशाह के सैनिक मंदिर के अंदर पहुंचकर मंदिर को लूटने लगे। मंदिर में लगे दो सोने के कलश, फर्श में जड़ी सोने की गिन्नियां और सोने के घंटे व दरवाजे सब लूट लिए। इसके बाद मुगल बादशाह ने मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया। सैनिकों ने मंदिर को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। इसके बाद सैनिक शिवलिंग को खोदने लगे और जब वह इसमें सफल नहीं हुए तो शिवलिंग पर आरी चलाकर काटने की कोशिश की। शिवलिंग से निकली बर्रैयों ने किया हमला
बताते हैं कि जब शिवलिंग पर सैनिकों ने आरी चालाई तो पहले शिवलिंग से दूध की धारा बाहर निकली और फिर असंख्य बर्रैया और ततैया निकल आईं। उन्होंने मुगल बादशाह की फ़ौज पर हमला बोल दिया। जिसके बाद सैनिक भाग खड़े हुए। बरैया और ततैयों ने शुक्लापुर गांव तक फ़ौज का पीछा किया। तब जाकर बादशाह और सैनिकों के प्राण बचे। शिवलिंग पर आरे का निशान आज भी देखा जा सकता है। (साभार – नवभारत टाइम्स)
आज भारत पूरी दुनिया में अपना परचम लहरा रहा है । 1980 के बाद भारत शीर्ष 50 देशों में शामिल हो पाया है। यानी भारत 47वें स्थान पर पहुंच गया है। सोना, चांदी और कांस्य मिलाकर भारत ने 7 पदक हासिल किए है। इस बार 128 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।
गोल्डन ब्वॉय नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक प्रतियोगिता में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया है। इस प्रतियोगिता में स्वर्ण जीतकर वो दूसरे एशियाई खिलाड़ी बन गए हैं। वहीं बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु 2 ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनी हैं।
इस बार हॉकी और भारोत्तालन में भी भारत का शानदार प्रदर्शन रहा। कोविड परिस्थिति में ओलंपिक्स गेम्स को लेकर अनिश्चितता थी लेकिन बावजूद इस बार टोक्यो में ओलंपिक्स गेम्स सफल रहा। भारत के अच्छे प्रदर्शन के बाद भारतीय एथलीट्स की आर्थिक मदद को लेकर ट्विटर पर लोग मुखर हो रहे हैं।
दरअसल, ओलंपिक्स गेम्स के दौरान ही कई तरह की खबरें हमारे कुछ एथलीट्स को लेकर सामने आई है। इन एथलीट्स ने आर्थिक तंगी में आकर खेलना छोड़ दिया। हालांकि इनमें महिला वेट लिफ्टर मीराबाई चानू अपवाद है जिन्होंने आर्थिक तंगी में भी खुद को संभाला।
हालांकि, वहीं कई एथलीट्स जिनमें कोई बॉक्सर तो कोई वेट लिफ्टर , इसके अलावा भी अन्य खेल से संबद्ध खिलाड़ियों ने तंगी से परेशान होकर इन खेलों से मुंह मोड़ लिया। इसका कारण है कि महंगे कोच का खर्च ये खिलाड़ी उठा नहीं पाते हैं।। इनमें से कईयों को खेतों में मजदूरी करते हुए देखा जा रहा है तो कुछ को पार्किंग की जगह में काम करते हुए।
अगर ये खिलाड़ी निरंतर अपनी ट्रेनिंग लेते तो शायद इनका भविष्य कुछ और होता। ये खिलाड़ी भी ओलंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर पाते और भारत के लिए और ज्यादा पदक ला पाते। इतिहास गवाह है कि भारत में जितना ध्यान और महत्व क्रिकेट को मिलता है. उतना तो हमारे राष्ट्रीय खेल हॉकी को नहीं मिलता है।
भारत आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। अगर, हमारी सरकार इन खिलाड़ियों को लेकर गंभीरता से सोचे और उनकी आर्थिक मदद की व्यवस्था करें तो शायद भारत भी अमरीका और चीन को टक्कर दे सके। अमरीका और चीन में एथलीट्स को हर संभव मदद सरकार द्वारा की जाती है। तभी दोनों देश के खिलाड़ी आज शिखर पर हैं।
मीराबाई चानू
शूटर दादी ने ट्विटर पर खिलाड़ियों को आर्थिक मदद के लिए लगाई गुहार
शूटर दादी प्रकाशी तोमर ने ट्वीट कर उन खिलाड़ियों के लिए आवाज उठाई जो आर्थिक तंगी के कारण खेल को छोड़ने के लिए बाध्य होते हैं। दादी प्रकाशी तोमर ने ट्वीट किया, “मुझे लगता है जितना खिलाड़ियों को पदक जीतने के बाद दिया जाता है, उसका एक चौथाई हिस्सा उनकी तैयारी के लिए पहले दिया जाए तो हमारे देश में ज्यादा पदक आ सकते हैं।
बता दें कि पदक जीतने के बाद खिलाड़ियों को उनकी राज्य सरकार की तरफ से करोड़ों रुपये दिए गए हैं। केंद्र सरकार भी उन्हें पुरस्कार दे रही है। दूसरी तरफ, शूटर दादी की ट्वीट पर लोगों ने भी कॉमेंट कर अपनी सहमति जताई है। अब देखना ये है कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।
अमरीका ने इस बार भी मारी बाजी, चीन दूसरे नंबर पर
इस बार भी अमरीका ने ओलंपिक्स में अपना डंका बजाया है। अमरीका ने इस बार 113 पदक हासिल किये है तो चीन ने 88 पदक बटोरे हैं। बता दें कि टोक्यो ओलंपिक्स में इस बार 11000 एथलीट्स ने हिस्सा लिया था। इस बार 340 स्वर्ण पदक गए और 338 रजत पदक जीते गए। वहीं खिलाड़ियों ने 402 कांस्य पदक जीते हैं। बताया जा रहा है कि अगले ओलंपिक्स गेम्स की मेजबानी पेरिस करेगा। 2024 में ओलंपिक्स गेम्स पेरिस में आयोजित ।
वो पहली मुलाक़ात
आज भी याद है मुझे
अजनबी थे हम दोनों
एक दूसरे के लिए
फिर भी हमारी
पहली मुलाक़ात हुईं।
बहुत लम्बा सफर था
जो तय किया था हमने
सोशल मीडिया पर हुईं
उस पहली बात से लेकर
पहली मुलाक़ात तक का।
दूरियाँ तो बहुत थी हमारे बीच
पर उन दूरियों को कम किया
उस पहली मुलाक़ात ने,
बढ़ा दी थीं मेरी धड़कनें
मैं कल्पनाओं के जाल से
हकीकत में आ रही थी
वो पहली बार था,
ज़ब आमने सामने थे हम
चुप मैं भी थे
नजरें मेरी झुकी थी तो
पलके तुम भी नहीं उठा पाए थे
बस चुप चाप बेचैन दिलों की
धड़कनें महसूस कर रहे थे हम
तुम्हारें अंदर के उमड़तें
हर जज़्बात को
समझ रहे थे हम, यूं कहें कि
इश्क़ को नजदीक से
समझ रहे थे हम
तुम्हारी हर बातों को धीरे से
दिल में बसा रहे थे हम।।
*कुछ परेशान सी हो रही थी मैं
लग रहा था जैसे ये कोई ख्वाब था,
क्या कहूंगी तुमसे और
ना जाने क्या- क्या बातें होंगी
डर भी था एक, कि क्या कभी
फिर मुलाक़ात होंगी या पहली
मुलाक़ात बस आखरी होंगी,
पर जो भी होगा, जैसे भी होगा
मेरी जिंदगी के एक पन्ने पर तेरा
जिक्र होगा, लिखूंगी तुझपर
लिखती ही रहूँगी, सालो बाद
ज़ब हम साथ होंगे……
इन लम्हों को याद कर होठों
पर हसीं और आँखों में नमी होंगी।
शाम के 6 बज बज रहे थे
दिसंबर की सर्दी
और ब्रिज के ऊपर हमदोनों
और साथ ही साथ तुम्हारी प्यारी बातें
बातों ही बातों में
वो लम्हा गुजर गया था
ऐसा लगता था जैसे,
बहुत कुछ रह गया था।
उस पहली मुलाक़ात का
हर पल बेहद ख़ास था
हाय!
वह पहली मुलाक़ात जिसमें
अलग सी बात थी,
झिझकती नज़रें और
काँपते हुए हाथ
धड़कनोंं की बढ़ रही थी रफ़्तार
फिर भी ये नज़रें देखने के लिए
उनको हो रही थे बेक़रार
यूं तो कुछ पल ही साथ थे हम
पर उस पल से
आज हर पल साथ है हम
मेरी पहली मुलाक़ात !
सभी सखियों को नमस्कार। सखियों, जब हम हिंदी साहित्य के रीतिकालीन कवियों की चर्चा करते हैं तो प्रमुख और चर्चित इतिहास ग्रंथों में शायद ही किसी कवयित्री की कविताओं का उल्लेख मिलता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि स्त्रियाँ उस युग में सृजनरत नहीं थीं। बहुत सी घटनाएँ कई बार इतिहास ग्रंथों में शामिल नहीं होतीं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वे घटनाएँ घटित ही नहीं हुई हैं। इतिहासकार की दृष्टि अक्सर चमकते हुए सितारों के इर्द -गिर्द घूमती है। संभवतः इसी कारण उनके प्रकाश की चकाचौंध में कई प्रतिभाओं पर उनकी नजर नहीं पड़ती और वे अलक्षित ही रह जाती हैं। रीतिकाल में ऐसी बहुत सी कवयित्रियों ने रचना की है जिनका संपूर्ण परिचय और साहित्य पाठकों की दृष्टि से प्राय: ओझल ही रहा है। कुछ की चर्चा मैं इसके पहले कर चुकी हूँ और कुछ पर आगे भी बात करूंगी। आज मैं बात करूंगी रीतिकालीन कवयित्री ब्रजदासी रानी बंकावती जी की। उनके बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं मिलती है। इतना भर पता चलता है कि वह कछवाह वंश के राजा आनंदराम की पुत्री थीं और इनका जन्म संवत् 1760 में हुआ था। उनके किसी स्वतंत्र ग्रंथ का उल्लेख नहीं मिलता लेकिन कुछ स्फुट दोहे और कवित्त जरूर मिलते हैं।
ब्रजदासी ने भक्तिभाव से पूर्ण दोहों और कवित्त की रचना की थी। भक्तिकाव्य की अनन्य विशेषता है, गुरु की वंदना। ब्रजदासी के कवित्त में भी पहले गुरु तदुपरांत ईश्वर की वंदना मिलती है। साथ ही वेद व्यासजी की वंदना भी करती हैं जिन्होंने श्रीमद्भागवत की रचना की। इस भाव का एक कवित्त प्रस्तुत है-
“श्री गुरु-पद बन्दन करूँ, प्रथमहिं करूँ उछाह ।
दम्पति गुरु तिहुँ की कृपा, करो सकल मो चाह ।।
बारबार वन्दन करौं, श्रीवृषभानु कुँवारि ।
जय जय श्री गोपाल जू, कीजै कृपा मुरारि ।।
वन्दौं नारद, व्यास, शुक, स्वामी श्रीधर संग ।
भक्ति कृपा वन्दौ सुखद, फलै मनोरथ रंग ।।
कियो प्रगट श्रीभागवत, व्यास-रूप भगवान ।
यह कलिमल निरवार-हित, जगमगात ज्यों भान ।।
करयो चहत श्रीभागवत, भाषा बुद्धि प्रयान ।
कर गहि मोहिं समर्थ हरि, देहैं कृपा-निधान ।।”
ऐसा लगता है कि ब्रजदासी की भक्तिधारा किसी शाखा प्रशाखा के बंधन में आबद्ध हुए बिना निर्बाध गति से प्रवाहित होती थी। उन्होंने सभी देवाताओं को नमन करते हुए समान रूप से उन्हें स्मरण किया है। यहाँ तक कि द्वापर के अंतिम राजा परीक्षित के प्रति भी अपनी श्रद्धा निवेदित की है। उदाहरण देखिए-
“नमो नमा श्री हस नमो सनकादि रूप हरि ।
नमो नमो श्री नार्द ऋषि जग को सम सरि ।।
नमो नमो श्री व्यास नमो शुक्रदेव सुस्वामी ।
नमो परीक्षित राज ऋषिन में ज्ञानी नामी ।।
नमो नमो श्री सूत जू, नमो नमो सोनक सकल ।
नमो नमो श्री भागवत, कृष्ण-रूप छिति मे अटल ।।”
ब्रजदासी जी द्वारा रचित एक दोहा देखिए जिसमें वह वेदव्यास द्वारा रचित श्रीमद्भागवत के हवाले से निष्काम कर्म करने का संदेश देती हुई दिखाई देती हैं।
“अबै व्यास जू कहत है, यहै भागवत माँहि
कर्म सबै निहकाम अब, वर्णन करि सुख पाँहि।”
वेदव्यास और श्रीमद्भागवत के संदेश के आधार पर अन्य कवित्त भी मिलते हैं। एक उदाहरण देखिए जिसमें वह संसार की निस्सारता का वर्णन करती हुई प्रभु से लौ लगाने की बात करती हैं क्योंकि प्रभु अन्तर्यामी और सर्व्यापी हैं और उनकी शरण में जाकर ही संसार के छल प्रपंच तथा माया मोह से मुक्ति मिल सकती है।
“व्यास भागवत आरँभ माँही, प्रभु को आन हृदय सरसाहीं ।।
सबहिं वस्तु को प्रभु ही ज्ञाता, आप प्रकाश रूप सुखदाता ।।
हृदय बीच बिधि के जिन आय, दीने चारों वेद पढाय ।
जिन वेदन में बड्डे पंडित, मोहित होइ रहे गुन मंडित।।”
ब्रजभाषा में रचित इन कविताओं में ब्रजदासी के ह्रदय की भक्ति भावना सहज भाव से प्रस्फुटित हुई है। रीतिकालीन कवियों ने भक्तिभाव और नीति की कविताओं की रचना भी की है। ब्रजदासी की कविताओं में भक्ति और नीति का सुंदर संयोग मिलता है। मनुष्य को संसार की भौतिकता और नश्वरता के प्रति सचेत करती हुई वह उन्हें भक्ति के पथ पर चलने का संदेश देती हैं। भले ही इन कविताओं में कोई विलक्षणता नहीं है लेकिन इनकी सहज संप्रेषणीयता ही इनका विशिष्ट गुण है। साथ ही यह बात भी महत्वपूर्ण है कि मध्यकाल की स्त्री अगर तत्कालीन सामाजिक परिवेश की जड़ता का अतिक्रमण कर, अपने ह्दय की भावनाओं को कविता के माध्यम से जितना और जिस रूप में ही सही अभिव्यक्ति प्रदान कर रही थी तो उसे पढ़ा भी जाना चाहिए और सहेजा भी।
कोलकाता : भारतीय भाषा परिषद द्वारा ‘स्वतंत्रता की अवधारणा और प्रेमचंद’ विषय पर एक राष्ट्रीय वेब-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में देश के अलग अलग हिस्सों से कई विद्वानों ने हिस्सा लिया। इग्नू के पूर्व प्रोफेसर डॉ.जवरीमल्ल पारख ने कहा कि प्रेमचंद सामाजिक और राजनीतिक आजादी को स्वतंत्रता की अवधारणा का अर्थ मानते थे। खिदिरपुर कॉलेज की प्रोफेसर इतु सिंह ने प्रेमचंद की रचनाओं में आए स्वराज के प्रश्नों को उठाते प्रेमचंद की ‘कर्बला’ की चर्चा की। बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर अवधेश प्रधान ने कहा कि प्रेमचंद केवल राजनीतिक स्वाधीनता नहीं बल्कि एक मुकम्मल स्वाधीनता की बात करते थे। प्रेमचंद की राष्ट्रीय चेतना यह बताती है कि हमारे देश को एक ऐसी आजादी की ओर ले जाना है जहां उसके सांस्कृतिक पक्ष का भी सम्मान सुरक्षित रहे। बीएचयू के सहायक प्रोफेसर विवेक सिंह ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं में जो स्वप्नदर्शी पात्र थे और वे देश के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगाने को तैयार थे ।आज हमें ऐसे चरित्र बहुत मुश्किल से मिलेंगे। मॉरीशस से जुड़े प्रो.वेदरमण ने कहा कि प्रेमचंद से बेहतर कौन जान सकता था कि आर्थिक आजादी क्या होती है। प्रेमचंद शिक्षा व्यवस्था को लेकर हमेशा दुखी रहते थे।वे आजादी का रास्ता शिक्षा से जोड़कर देखते हैं। वे देश की मुक्ति के साथ-साथ मनुष्य की मुक्ति का भी सपने देखते हैं। इस अवसर पर स्वागत और विषय प्रस्तुति करते हुए प्रसिद्ध लेखिका डॉ.कुसुम खेमानी ने प्रेमचंद की कई रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेमचंद ने कैसे गांधी की पुकार पर नौकरी छोड़कर आजादी की लड़ाई में साथ दिया।वे निर्भय और स्वतंत्रता के पक्षधर थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो.शंभुनाथ ने कहा आज भारतीय जनता इस कोरोना काल में आजादी की 75 वीं वर्षगांठ की ओर बड़ी उम्मीद से देख रही है। प्रेमचंद का साहित्य एक सबक है जिसमें आने वाले समय के साथ एक गहरा संबंध है। उन्होंने चर्चिल के कथन ‘भारत में हवाओं के अलावा कुछ भी स्वाधीन नहीं रह जाएगा’ का उल्लेख करते हुए प्रेमचंद के विचारों की चर्चा की।
कार्यक्रम का संयोजन और संचालन संजय जायसवाल और पूजा गुप्ता ने तथा धन्यवाद ज्ञापन संस्था के सचिव डॉ. केयूर मजमूदार ने दिया।
टीटागढ़ : अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन की पश्चिम बंगाल प्रदेश इकाई की ओर से यहां हर्षोल्लास के साथ सावन महोत्सव मनाया गया, जिसमें प्रदेश भर की वीरांगनाओं ने शिरकत की। समारोह में वीरांगनाओं ने कजरी और भगवान शिव के भजन गाकर उसमें जान फूंकी। गायत्री मंत्र का जाप भी किया। इस संगीतमय कार्यक्रम में आमंत्रित गायकों कुमार सुरजीत और साईं मोहन ने अपने गीतों से आनंद विभोर किया।
समारोह को सम्बोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा कि सावन के महीने में भगवान शिव जी ने समुद्र मंथन से निकला विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। यही कारण है कि इस महीने को शिव जी का प्रिय महीना माना जाता है। वीरांगना की प्रदेश इकाई की महासचिव प्रतिमा सिंह, उपाध्यक्ष रीता सिंह, सचिव पूनम सिंह व किरण सिंह, महानगर की अध्यक्ष मीनू सिंह, महासचिव इंदु सिंह, उपाध्यक्ष ललिता सिंह, पदाधिकारी सरोज सिंह, पूनम सिंह, विद्या सिंह, सोदपुर की अध्यक्ष सुनीता सिंह, पदाधिकारी सुलेखा सिंह, मंजू सिंह, मंजू सुधीर सिंह, रीता सिंह, नीरा सिंह, नारी शक्ति वीरांगना की पदाधिकारी शकुंतला साव, अनीता साव, सुजाता साव आदि उपस्थित थे।
कोलकाता : कोलकाता की ऋषिका पाटोदिया ने अधिकतम हुलाहूप्स करके देश का नाम रोशन कर दिया है। यह किसी भी बच्चे द्वारा किया गया नया कीर्तिमान रच देने वाला प्रदर्शन भी है। ऋषिका कोलकाता के सॉल्टलेक इलाके में रहती है। महज 11 साल की ऋषिका ने 1 घंटे 52 मिनट में 24250 स्पिन किये। ऋषिका का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।
इसके पहले पुराना कीर्तिमान 1 घंटे 12 मिनट में 5990 स्पिन का है। ऋषिका की माँ आशु पाटोदिया एक प्रख्यात ग्राफिक डिजाइनर तथा उद्यमी हैं और ऋषिका की सफलता के पीछे उनका बड़ा योगदान है। उन्होंने फन्डू टीम के प्रति आभार जताया है जिसने ऋषिका को प्रेरणा दी।
नयी दिल्ली : काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एक्जामिनेशन (सीआईएससीई) ने आईसीएसई तथा आईएससी की परीक्षाओं को लेकर कम्पार्टमेंट तथा इम्प्रूवमेंट की तारीखें घोषित कर दी हैं। कम्पार्टमेंट और इम्प्रूवमेंट परीक्षाएँ 16 अगस्त से आरम्भ होंगी। आईसीएसई की परीक्षाएँ 2 सितम्बर को और आईएससी की परीक्षाएं 7 सितम्बर को समाप्त होंगी। नतीजे 20 सितम्बर को घोषित किये जाएंगे। यह जानकारी सीआईएससीई के चीफ एक्जिक्यूटिव तथा सचिव जेरी आराथून द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति से मिली।
कोलकाता : सीबीएसई की दसवीं की बोर्ड परीक्षा में बिड़ला हाई स्कूल के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। परीक्षा में कुल 181 विद्यार्थी बैठे थे और परीक्षाफल 87.49 प्रतिशत रहा। स्कूल में अव्वल रहने वाले सर्वो सरकार को 99 प्रतिशत यानी 495 अंक मिले। दूसरे स्थान पर 490 (98 प्रतिशत) अंक पाकर अर्थव चौधरी रहा। तीसरे स्थान पर संयुक्त रूप से 487 (97.4 प्रतिशत) अंक पाकर माहिर जैन और आनन्द शर्मा ने जगह बनायी। चौथे स्थान पप 486 (97.2 प्रतिशत) अंक पाकर यश अग्रवाल रहा।
सभी 181 परीक्षार्थियों को प्रथम श्रेणी मिली। 21 विद्यार्थियों को 95 प्रतिशत और उससे अधिक अंक मिले। वहीं 88 विद्यार्थियों को 90 प्रतिशत और उससे अधिक अंक मिले। 150 विद्यार्थियों को 80 प्रतिशत और उससे अधिक अंक मिले। 178 विद्यार्थियों को 70 प्रतिशत और उससे अधिक अंक मिले। 5 विद्यार्थियों को गणित में, 7 विद्यार्थियों को सोशल साइंस में शत प्रतिशत अंक मिले।