Thursday, July 2, 2026
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पत्तियों से पर्यावरण के अनुकूल कपड़े बनाती हैं अरुंधति

अरुंधति कुमार का स्टार्ट अप ‘बीज’ टिकाऊ वस्तुओं यानी सस्टेनेबल मटेरियल को बढ़ावा देता है। वे अनानास, कैक्टस, कोर जैसे मटेरियल से फैशनेबल ऐसेसरीज बनाती हैं। अरुंधति की मां बंगाली हैं। वे एक भरतनाट्यम डांसर हैं जो हैंडलूम साड़ियां पहनना पसंद करती हैं। इसलिए अरुंधति ने हैंडलूम मटेरियल अपने घर में करीब से देखे। उन्होंने अजमेर के मेयो कॉलेज से अपनी पढ़ाई की। एक बार यूरोप में छुटि्टयां बिताने के बाद उन्हें जलवायु परिवर्तन की वजह से होने वाले नुकसान का अहसास हुआ। तब उन्होंने अपने स्टार्ट अप के बारे में सोचा और वहां से आकर इसकी शुरुआत की।
अरुंधति बैग, वॉलेट और क्लच जैसी एसेसरीज बनाने के लिए रिसाइकिल और बायोडिग्रेडबल वस्तुओं का उपयोग करती हैं। सबसे पहले उन्होंने उदयपुर के ताज लेक पैलेस और जयपुर के रामबाग पैलेस में नौकरी की। यहां से उन्हें लग्जीरियस लाइफ स्टाइल का पता चला। वे कहती हैं – ”राजस्थान ने मुझे हमेशा प्रभावित किया है। यहां के संगीत, नृत्य, रंग और फैब्रिक ने मेरे जीवन पर अमिट छाप छोड़ी है”। अरुंधति ने अपना 40 वां बर्थडे मनाने के बाद एक बार फिर यूरोप ट्रिप की। यहाँ जलवायु परिवर्तन के नुकसान के बारे में उन्होंने जाना। उसके बाद ईको फ्रेंडली ऐसेसरीज को बढ़ावा देने के लिए अपने स्टार्ट अप के अंतर्गत इस उद्यमी ने मैक्सिको की कंपनी में विकसित किए गए मटेरियल नोपल कैक्टस का उपयोग किया। ये बहुत मुलायम लेदर होता है जिसका उपयोग हाई एंड लग्जरी प्रोडक्ट बनाने में किया जाता है।

परिवार की सुरक्षा के लिए उनसे दूर हैं पहली महिला एंबुलेंस ड्राइवर सलीमा

पिछले एक साल से सलीना बेगम अपनी एंबुलेंस के जरिये कोविड-19 मरीजों की मदद कर रही हैं। हाल ही में उन्हें अपने इस काम के लिए 50,000 की राशि देकर सम्मानित किया गया। अपने काम के शुरुआत में वे सिर्फ गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाती थीं। लेकिन पिछले साल महामारी के गंभीर रूप लेने पर उन्होंने कोरोना पेशेंट को अस्पताल तक ले जाने की जिम्मेदारी भी संभाली। पिछले हफ्ते उन्हें राजगंज के एमएलए कृष्णा कल्याणी की ओर से यह राशि मिली। ये सम्मान उन्हें दूसरी बार मिला। इससे पहले पिछले साल भी उन्हें कोरोना वॉरियर के तौर पर सम्मानित किया जा चुका है।
सलीना ने अपनी मेहनत और साहस से कोरोना काल में इंसानियत को जिंदा रखने का काम बखूबी किया है। ऐसे माहौल में जब लोग कोरोना मरीजों को हाथ लगाना भी पसंद नहीं कर रहे, वे उन्हें घर से लेकर अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाती हैं। सलीना ने बांग्ला भाषा में एमए किया है। उसने 2016 में स्टेट गवर्नमेंट के सेल्फ हेल्प प्रोग्राम से ट्रेनिंग लेकर एंबुलेंस ड्राइविंग की शुरुआत की। इस काम से वे हर महीने 7000 से 8000 रुपए महीना कमाती हैं। इन्हीं पैसों से उनका गुजारा होता है। पिछले एक साल के दौरान अपने परिवार को कोरोना इंफेक्शन से बचाने के लिए वे हेमताबाद के हेल्थ सेंटर में अपने परिवार से दूर एक छोटे से कमरे में अकेली रह रही हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

मिसाल बनीं रीढ़ की हड्‌डी में एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित नीना नीजर

नीना रीढ़ की हड्‌डी में एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं। वे इसकी वजह से चल नहीं पाती। लेकिन तमाम मुश्किलों के बाद भी जिंदगी की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहती हैं। निबंध, पेंटिंग और वाद-विवाद प्रतियोगिता में अब तक वे कई पुरस्कार जीत चुकी हैं। नीना का जन्म दुबई के एक बिजनेसमेन अब्दुल करीम नीजर के घर हुआ। जब वे एक साल की थीं तब से ये समझ में आया कि उनकी हडि्डयां कमजोर हैं जिसकी वजह से वह चल नहीं सकती। डॉक्टरों ने बताया कि उसे विटामिन डी की कमी है। उसके बाद उसकी कई सर्जरी हुईं। लेकिन जब कोई फायदा नहीं हुआ तो वह भारत आ गईं और चेन्नई में उनका इलाज हुआ।
उसके बाद लंदन और अमेरिका में भी सर्जरी हुई लेकिन कोई फायदा न होने पर वह फिर से दुबई चली गई। वहां उसने एम फिल की डिग्री ली। वह दिव्यांग बच्चों को मोटिवेट करने में अपना वक्त बिताने लगी और उसने इन बच्चों की मोटिवेशनल क्लास शुरू की। उसके बाद उसने एक अमेरिकन लड़के से शादी की और वह दो बच्चों की मां भी बनी। लेकिन जब बच्चों को भी नीना की तरह यही बीमारी हुई तो वे अपने बच्चों को अमेरिका के जेसंस फाउंडेशन ले गई जहां उनका इलाज हुआ। इन्हीं हालातों के बीच नीना दुबई से अमेरिका शिफ्ट हुईं और यूएस यूनिवर्सिटी से एजुकेशन लीडरशिप में पीएचडी की। नीना का इलाज और संघर्ष दोनों अब भी जारी है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

मंदिर के फूलों की रिसाइक्लिंग कर पूजन सामग्री बना रहा है यह स्टार्टअप

दिल्ली स्थित सोशल इंटरप्राइज निर्मलया को सुरभि, कॉमर्स ग्रेजुएट राजीव बंसल के साथ मिलकर संभालती हैं। वह दिल्ली में 120 से अधिक मंदिरों के साथ काम करती हैं और फूलों के कचरे से अगरबत्ती, शंकु, धूप अगरबत्ती और हवन कप बनाती हैं। इसकी शुरुआत के बारे में बताते हुए राजीव कहते हैं कि अप्रैल 2019 में उन्होंने महाराष्ट्र के शिर्डी मंदिर में यह देखा कि किस तरह अर्पित किए फूलों को रिसाइकिल किया जाता है। इस पर रिसर्च करने के बाद उन्होंने सुरभि के साथ मिलकर निर्मलया की शुरुआत की।
इन दोनों ने दिल्ली के धाम कॉम्प्लेक्स में अपनी फैक्ट्री की स्थापना की। फैक्ट्री के शुरुआती दौर में यहां 40 महिलाएं काम करती थीं। लेकिन महामारी के चलते मंदिर बंद होने और प्रसाद में कमी आने की वजह से फिलहाल यहां 15 महिलाएं काम कर रही हैं। इनके द्वारा तैयार किए गए प्रोडक्ट्स की कीमत 150 से 1500 है जो ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे अमेजन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं। इस ब्रांड के प्रोडक्ट्स गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता के एयरपोर्ट पर रिटेल स्टोर्स में भी मिल जाते हैं।  70 लाख से शुरू किए गए इस स्टार्ट अप के उद्यमी सुरभि और राजीव को आने वाले कुछ महीनों में अपने काम के बढ़ने की पूरी उम्मीद है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

कन्नड़ साहित्यकार वसंत कुश्तगी का निधन

कलबुर्गी : प्रख्यात कन्नड़ साहित्यकार प्रोफेसर वसंत कुश्तगी का दिल का दौरा पड़ने से यहां एक निजी अस्पताल में शुक्रवार को निधन हो गया। वह 85 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कुश्तगी को निम्न रक्तचाप की शिकायत होने पर गुलबर्गा हार्ट फाउंडेशन ऐंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था। उन्होंने 60 से अधिक पुस्तकें लिखी थीं। कुश्तगी बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी थे और साहित्यकार के अलावा वह शिक्षक, पत्रकार और अधिकार कार्यकर्ता भी थे।

अगले कुछ माह में लागू हो सकती है श्रम संहिता

हाथ में आने वाला वेतन घटेगा, पीएफ बढ़ेगा
नयी दिल्ली : आगामी कुछ माह में चारों श्रम संहिताएं लागू हो जाएंगी। केंद्र सरकार इन कानूनों के क्रियान्वयन पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। ये कानून लागू होने के बाद कर्मचारियों के हाथ में आने वाला वेतन (टेक होम) घट जाएगा, वहीं साथ ही कंपनियों की भविष्य निधि (पीएफ) की देनदारी बढ़ जाएगी। वेतन संहिता लागू होने के बाद कर्मचारियों के मूल वेतन और भविष्य निधि की गणना के तरीके में उल्लेखनीय बदलाव आएगा।
श्रम मंत्रालय इन चार संहिताओं….औद्योगिक संबंध, वेतन, सामाजिक सुरक्षा, व्यावसायिक और स्वास्थ्य सुरक्षा तथा कार्यस्थिति को एक अप्रैल, 2021 से लागू करना चाहता था। इन चार श्रम संहिताओं से 44 केंद्रीय श्रम कानूनों को सुसंगत किया जा सकेगा। मंत्रालय ने इन चार संहिताओं के तहत नियमों को अंतिम रूप भी दे दिया था। लेकिन इनका क्रियान्वयन नहीं हो सका, क्योंकि कई राज्य अपने यहां संहिताओं के तहत इन नियमों को अधिसूचित करने की स्थिति में नहीं थे।
भारत के संविधान के तहत श्रम समवर्ती विषय है। ऐसे में इन चार संहिताओं के तहत केंद्र और राज्यों दोनों को इन नियमों को अधिसूचित करना होगा, तभी संबंधित राज्यों में ये कानून अस्तित्व में आएंगे। एक सूत्र ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘कई प्रमुख राज्यों ने इन चार संहिताओं के तहत नियमों को अंतिम रूप नहीं दिया है। कुछ राज्य इन कानूनों के क्रियान्वयन के लिए नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। केंद्र सरकार हमेशा इस बात का इंतजार नहीं कर सकती कि राज्य इन नियमों को अंतिम रूप दें। ऐसे में सरकार की योजना एक-दो माह में इन कानूनों के क्रियान्वयन की है क्योंकि कंपनियों और प्रतिष्ठानों को नए कानूनों से तालमेल बैठाने के लिए कुछ समय देना होगा।
सूत्र ने बताया कि कुछ राज्यों ने नियमों का मसौदा पहले ही जारी कर दिया है। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा, पंजाब, गुजरात, कर्नाटक और उत्तराखंड शामिल हैं। नयी वेतन संहिता के तहत भत्तों को 50 प्रतिशत पर सीमित रखा जाएगा। इसका मतलब है कि कर्मचारियों के कुल वेतन का 50 प्रतिशत मूल वेतन होगा। भविष्य निधि की गणना मूल वेतन के प्रतिशत के आधार पर की जाती है। इसमें मूल वेतन और महंगाई भत्ता शामिल रहता है।

अभी नियोक्ता वेतन को कई तरह के भत्तों में बांट देते हैं। इससे मूल वेतन कम रहता है, जिससे भविष्य निधि तथा आयकर में योगदान भी नीचे रहता है। नई वेतन संहिता में भविष्य निधि योगदान कुल वेतन के 50 प्रतिशत के हिसाब से तय किया जाएगा।

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ देगा 867 करोड़ रुपये का बोनस

नयी दिल्ली : आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए पॉलिसीधारकों को 867 करोड़ रुपये का बोनस देने की घोषणा की है। यह कंपनी द्वारा घोषित अबतक का सबसे ऊंचा वार्षिक बोनस है। कम्पनी ने बयान में कहा, ‘‘आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने 2020-21 के लिए सभी पात्र पॉलिसीधारकों को 867 करोड़ रुपये के वार्षिक बोनस की घोषणा की है। यह कंपनी द्वारा आज की तारीख तक घोषित सबसे ऊंचा बोनस है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह 10 प्रतिशत अधिक है।’’
बोनस कंपनी के भागीदार पॉलिसीधारक कोषों द्वारा जुटाए गए लाभ का एक हिस्सा होता है। 31 मार्च, 2021 तक सभी भागीदार पॉलिसियां इस बोनस को पाने की पात्र होंगी। इसे पॉलिसीधारकों के लाभ में डाला जाएगा। इससे 9.8 लाख भागीदार पॉलिसीधारकों को लाभ होगा।

पूर्वी कोलकाता दलदली क्षेत्र का होगा संरक्षण

खर्च होंगे 120 करोड़ रुपये
कोलकाता : बंगाल सरकार ने 12,500 हेक्टेयर में फैले पूर्वी कोलकाता दलदल क्षेत्र (ईकेडब्ल्यू) को संरक्षित व पोषित करने के लिए 120 करोड़ रुपये की योजना बनाई है जो पांच साल में लागू की जाएगी। पर्यावरण विभाग के शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी। दलदली भूमि वह होती है जहां पर सालभर या किसी मौसम में पानी जमा रहता है और इसकी वजह से वहां एक विशेष पारिस्थितिकी तंत्र बन जाता है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यावरण) विवेक कुमार ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने राज्य के तटीय इलाकों के संरक्षण के लिए भी कार्यक्रम बनाया है जिन्हें पिछले साल आए एम्फन तूफान और पिछले महीने आए यास तूफान से नुकसान पहुंचा हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वी कोलकाता दलदली भूमि को कई तरीकों से संरक्षित किया जाएगा, जैसे अतिक्रमण रोका जाएगा, कृषि में इस्तेमाल कीटनाशकों एवं टेनरियों के पानी से जल को प्रदूषित होने से रोका जाएगा। इसके अलावा रामसर इलाके स्थित दलदली भूमि के महत्व को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा की जाएगी।
वर्ष 1971 के रामसर सम्मेलन के तहत रामसर इलाका अंतरराष्ट्रीय महत्व का दलदली क्षेत्र है। कुमार ने बताया कि राज्य के तटीय इलाकों के सरंक्षण के लिए सरकार ने शंकरपुर-दीघा तटीय क्षेत्र सड़क एवं प्रबंधन योजना बनाई है। सरकार की योजना एम्फन तूफान से तबाह सुंदरवन इलाके में पांच करोड़ मैंग्रोव के पौधे लगाने की है और अगले आठ से 10 साल बाद हम इसके नतीजे देखेंगे।
राज्य की पर्यावरण मंत्री रत्ना दे नाग ने कहा कि झारग्राम जिले में कनकदुर्गा मंदिर से सटे इलाके में कई दुर्लभ पौधे हैं जिन्हें संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के अत्याधिक इस्तेमाल और वन क्षेत्र कम होने से हमारी जैव विविधता को खतरा है, इसकी वजह से उत्पन्न माहौल कोविड-19 के संक्रमण में सहायक रहा।

करें आभूषणों की शुद्धता की पड़ताल

आभूषणों की गलत बिक्री न हो इसलिए सरकार ने 16 जून से सभी ज्वैलर्स को हॉलमार्क वाली ज्वैलरी बेचने को कहा है। कई बार, जौहरी यह कहते हुए आभूषण बेचते हैं कि यह 22 कैरेट का है, लेकिन वास्तविकता में यह कम शुद्धता का हो सकता है। लेकिन, अगर कोई जौहरी चाहे तो हॉलमार्किंग की फर्जी जानकारी भी दे सकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि गहनों पर हॉलमार्किंग वास्तविक है, कुछ चीजें हैं जिन्हें आप देख सकते हैं।
हॉलमार्क शुद्धता का प्रमाण है। जौहरी हॉलमार्किंग केंद्रों (एएचसी) से हॉलमार्क का प्रमाणपत्र ले सकता है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) इन केंद्रों को मान्यता देता है। जौहरी को अपना माल हॉलमार्क करवाने के लिए बीआईएस से लाइसेंस भी लेना होगा। हॉलमार्क वाले गहनों का एक टुकड़ा आपको सोने की शुद्धता बताता है, चाहे वह 18 कैरेट का हो, 20 कैरेट का या 22 कैरेट का। आभूषण खरीदते समय, आपको हॉलमार्क वाले आभूषणों पर तीन निशान दिखाई देंगे- शुद्धता, परख या हॉलमार्किंग केंद्र का पहचान चिह् और जौहरी का पहचान चिह्/संख्या।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि दी गई जानकारी सही है, हमेशा बीआईएस रजिस्टर्ड जौहरी से ही खरीदारी करें। आप जौहरी से बीआईएस लाइसेंस दिखाने के लिए भी कह सकते हैं। अगला काम बिल की जांच करना है। नियमों के अनुसार जौहरी को हॉलमार्किंग शुल्क की जानकारी अलग से देनी होती है। एएचसी ₹35 प्रति पीस का शुल्क लेता है।
नियम के मुताबिक, बिल या चालान में प्रत्येक वस्तु का विवरण, कीमती धातु का शुद्ध वजन, कैरेट में शुद्धता और सुंदरता और हॉलमार्किंग शुल्क अलग-अलग होना चाहिए।
यदि आप अब भी अनिश्चित हैं, तो आप किसी भी बीआईएस-मान्यता प्राप्त एएचसी से अपने आभूषणों की जांच करवा सकते हैं। केंद्र प्रायोरिटी बेसिस पर उपभोक्ताओं के आभूषणों की जांच करते हैं। जांच के बाद एएचसी एक रिपोर्ट जारी करेगा। यदि आभूषण बिल में बताई गई शुद्धता से कम शुद्धता का है, तो एएचसी, जिसने प्रारंभिक प्रमाणीकरण किया था, को उपभोक्ता की फीस वापस करनी होगी। आप रिपोर्ट के साथ अपने जौहरी से भी संपर्क कर सकते हैं, क्योंकि ऐसे मामलों में वह ग्राहकों को क्षतिपूर्ति करने के लिए भी उत्तरदायी है।

‘मानवीय संकट के प्रश्न और समकालीन हिंदी साहित्य’ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन’

कोलकाता : हुगली मोहसिन कॉलेज और बंगीय हिंदी परिषद, कोलकाता के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “मानवीय संकट के प्रश्न और समकालीन हिंदी साहित्य” था। इस कार्यक्रम का आरंभ डॉ. रणजीत कुमार के संचालन से हुआ। इसके पश्चात परिषद के मंत्री डॉ. राजेन्द्रनाथ त्रिपाठी ने स्वागत भाषण द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. त्रिपाठी ने मुख्य वक्ता प्रो.सूरज पालीवाल, मुख्य अतिथि डॉ. बीना जैन, वक्ता डॉ. चक्रधर प्रधान , अध्यक्ष प्रो. अरुण होता, प्राचार्य प्रो. पुरुषोत्तम प्रामाणिक, अध्यक्ष प्रोफेसर राजश्री शुक्ला तथा सभी श्रोताओं का भी स्वागत किया। इसके पश्चात प्रमुख वक्ता प्रो. सूरज पालीवाल ने अपना वक्तव्य आरम्भ करते हुए समाज में फैली अराजकता को दर्शाया और साहित्य को राजनीति के आगे चलने वाली बहार बताया। इन्होंने कोरोना के संकट पर चर्चा करते हुए, इसकी दूसरी लहर की सूचना विद्वानों से प्राप्त होने के बाद भी सरकार और जनता की लापरवाही की ओर ध्यान आकर्षित किया । कोरोना के अतिरिक्त इन्होंने अन्य मानवीय संकटों में बेरोजगारी और ऐसी कठिन परिस्थितियों में लोभी, मानवता के सौदागरों का विषय उठाया और बड़े ही भावनात्मक तरीके से किसानों के मुद्दों पर भी चर्चा की। साथ ही यह भी कहा कि यह रचनाकारों की जिम्मेदारी है कि उन विषयों पर विशेष रूप से लिखें।
इसके पश्चात हुगली मोहसिन कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. चक्रधर प्रधान ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए लॉकडाउन को मानव जीवन का एक बड़ा संकट बताया। मूल विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने इसी से सम्बंधित अपने मित्र विश्वजीत के उपन्यास “लॉकडाउन एक काला युग” का उदाहरण दिया। इसके माध्यम से इन्होंने मानवीय संकटों और लॉकडाउन के दौरान की परिस्थितियों का बड़ा ही यथार्थ वर्णन किया। इनके पश्चात दिल्ली के किरोड़ीमल महाविद्यालय की प्राध्यापिका डॉ. बीना जैन ने अपने मन की बातों को बड़े ही सुंदर उदाहरणों और शब्दों में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है परंतु जिजीविषा भी उतना ही बड़ा सत्य है। आज की इन परिस्थितियों को देखते हुए इन्होंने मानव के अकेलेपन को मानव संकट का एक रूप बताया, जिसे इन्होंने ‘निर्मल वर्मा’ की रचनाओं के माध्यम से वर्णित किया। साथ ही इन्होंने कुछ कहानियों ‘धूप का टुकड़ा’ और विशेष रूप से ‘परिंदे’ पर चर्चा की । इन्होंने अपने वक्तव्य में प्रकृति की सुरक्षा और उसके प्रेम के प्रति बल दिया है।

इसके उपरांत प्रो. अरुण होता ने मानव संकट पर चर्चा करते हुए बड़ा ही सकारात्मक विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अनेक रचनाकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी मानव संकट उत्पन्न होता है, तब रचनाकार साहस के साथ समाज, देश और जन कल्याण की ओर बढ़ता है। उन्होंने कहा कि हर कलाकार चाहे वह कला के किसी भी क्षेत्र में हो वह अपनी कला के माध्यम से भावों को व्यक्त कर स्वयं को मुक्त कर लेता है। आज की परिस्थिति में भी जहां भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है वहीं कुछ अच्छे लोग भी सहायता के लिए अपना कदम बढ़ा रहे हैं। अतः हमें निराश नहीं होना चाहिए।
इसके पश्चात अंत में परिषद की अध्यक्ष प्रो. राजश्री शुक्ला ने सभी वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापन किया तथा युवा शक्ति की सराहना करते हुए सकारात्मकता की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी।
इस कार्यक्रम का संयोजन अनूप यादव और भानु प्रताप पांडेय ने किया तथा जिउतलाल प्रजापति, सिद्धार्थ त्रिपाठी, निखिता पांडेय, सुशील पांडेय, राजेश सिंह, अभिषेक पांडेय, ज़ोया अहमद और दीपा ओझा ने अपना पूरा सहयोग दिया।