Thursday, July 2, 2026
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एथेनॉल को पेट्रोल का विकल्प बनाने की तैयारी में है सरकार

सरकार फ्लेक्स फ्यूल इंजन पर बड़ा फैसला लेने जा रही है। ऐसे इंजन को ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अनिवार्य बनाया जाएगा। फ्लेक्स फ्यूल का मतलब हुआ फ्लेक्सिबल यानी लचीला ईंधन यानी ऐसा ईंधन जो पेट्रोल की जगह ले और वो है एथनॉल। सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि इस वैकल्पिक ईंधन की कीमत 60-62 रुपये प्रति लीटर होगी, जबकि पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से भी ज्यादा है इसलिए एथनॉल के इस्तेमाल से देश के लोग प्रति लीटर 30-35 रुपये की बचत कर पाएंगे। एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।

नितिन गडकरी ने बताया कि ब्राजील, कनाडा और अमेरिका में ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्लेक्स फ्यूल ईंधन का उत्पादन कर रही हैं। इन देशों में ग्राहकों को 100 प्रतिशत पेट्रोल या 10 परसेंट बायो एथनॉल का विकल्प मुहैया करवाया जा रहा है। नितिन गडकरी ने कहा कि मौजूदा वक्त में प्रति लीटर पेट्रोल में 8.5 प्रतिशत एथनॉल मिलाया जाता है, जो कि 2014 में 1 से 1.5 प्रतिशत हुआ करता था। एथनॉल की खरीदारी भी 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 320 करोड़ लीटर पहुँच गयी है। बताया जा रहा है कि एथनॉल, पेट्रोल से कहीं बेहतर बेहतर ईंधन है और यह कम लागत वाला, प्रदूषण मुक्त और स्वेदशी है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाला कदम है क्योंकि हमारे देश में मकई, चीनी और गेहूं का अतिरिक्त मात्रा  हैं, इनको खाद्यान्नों में रखने के लिए हमारे पास जगह नहीं है। यह देखते हुए कि खाद्यान्न का अतिरिक्त मात्रा समस्या पैदा कर रही है, हमारी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू बाजार की कीमतों से अधिक है, इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि खाद्यान्न और गन्ने का उपयोग करके एथनॉल का रस बना सकते हैं।

क्रिकेट की दुनिया में कमाल दिखा रही हैं स्नेह राणा

नयी दिल्ली : 5 साल बाद टीम इंडिया में वापसी करने वाली भारतीय महिला क्रिकेटर स्नेह राणा (Sneh Rana) इस समय अपने शानदार खेल की वजह से चर्चा का विषय बनी हुई हैं। स्नेह ने इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में 8वें नंबर पर उतरकर नाबाद 80 रन की पारी खेल मैच को ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई। देहरादून की 27 वर्षीय स्नेह डेब्यू टेस्ट में 50 प्लस स्कोर करने के अलावा और 4 विकेट हासिल करने वाली भारत की पहली जबकि ओवरऑल चौथी महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
किसान परिवार से आने वाली स्नेह का जब टीम इंडिया में चयन हुआ था उससे दो महीने पहले उनके पिता भगवान सिंह राणा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में स्नेह की बड़ी बहन रुचि ने कहा, ‘ पापा के गुजरने के बाद वह बहुत दुखी थी। लेकिन उसने ट्रेनिंग नहीं छोड़ी। दुख के समय में ट्रेनिंग उसके लिए बाम जैसा था।’
स्नेह 5 साल से टीम से बाहर थीं। नौ साल की उम्र में लिटिल मास्टर क्रिकेट अकादमी से शुरुआत करने वाली स्नेह सिनौला में टैलंट सर्च प्रोग्राम टूर्नामेंट के लि चुनी गई थीं। स्नेह को कोचिंग किरण और नरेंद्र साह ने दी। कोच किरण के पति नरेंद्र साह ने बताया, ‘उसे हमारे सामने खेलने में बहुत शर्म आती थी। हमारी अकैडमी कोच किरण ने बैटिंग के लिए उसे बहुत मनाया। वह प्रतिभा की धनी है।’
दूसरी ओर किरण ने स्नेह की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि उसने फादर्स डे से एक दिन पहले शानदार प्रदर्शन कर अपने पिता को श्रद्धांजलि दी है। यह हमारे लिए वास्तव में गर्व करने का क्षण है। स्नेह के लिए यह पिछले कई वर्षों से कड़ी मेहनत का फल है। वह नौ साल की उम्र में मेरे पास कोचिंग के लिए आई थी।’
किरण ने शुरुआती दिनों को याद कर कहा कि कैसे वह ऑलराउंडर बनीं। बकौल किरण, ‘ हमारी अकादमी में लड़कियों को बड़े लड़कों के खिलाफ पेस बोलिंग का सामना करना पड़ता था। इससे उसके क्रिकेट स्किल में निखार आया।’
स्नेह ने मैच की पहली पारी में पहले गेंदबाजी में 4 विकेट चटकाए फिर दूसरी पारी में बल्ले से कमाल दिखाते हुए शानदार अर्धशतक जड़े। स्नेह ने इसके साथ इतिहास रच दिया। वह डेब्यू टेस्ट में 4 विकेट के साथ अर्धशतक जड़ने वाली पहली खिलाड़ी बन गई है। इससे पहले टेस्ट में ये कारनामा न तो पुरष और न ही किसी महिला बल्लेबाज ने किया था।
आठवें नंबर पर बैटिंग के लिए उतरीं स्नेह ने दूसरी पारी में 154 गेंदों पर 13 चौकों की मदद से 80 रन बनाकर नाबाद लौटीं। यह महिला क्रिकेट में फॉलोऑन खेलते हुए किसी बल्लेबाज का तीसरा सर्वश्रेष्ठ स्कोर है। साल 2014 में पहली बार टीम इंडिया में जगह बनाने वाली स्नेह रेलवे के लिए चयन से पहले हरियाणा और पंजाब की ओर से अंडर-19 में खेल चुकी हैं। स्नेह ने अब तक 7 वनडे और 5 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं।

जमशेद जी टाटा हैं दुनिया के सबसे बड़े परोपकारी दानदाता : हुरुन रिपोर्ट

ना बिल गेट्स और ना ही मेलिंडा गेट्स, ना तो वारेन बफेट और ना ही अमेजन वाली जोफ बेजोस सदी का सबसे बड़े दानदाता है। हम भारतीयों के लिए यह गर्व की बात है कि टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी नसरवानजी टाटा ने सदी के एडेलगिव हुरुन परोपकारी लोगों में शीर्ष स्थान हासिल किया है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके दान का वर्तमान मूल्य 102.4 बिलियन डॉलर आंका गया है, जिसकी शुरुआत 1892 में हुई थी।

शीर्ष सूची में एक मात्र भारतीय कंपनी

शीर्ष 10 की सूची में टाटा ग्रुप इकलौती भारतीय कंपनी है। शीर्ष 50 में अन्य भारतीय विप्रो के पूर्व अध्यक्ष अजीम प्रेमजी हैं, जो 12वें स्थान पर हैं। बिल गेट्स और मेलिंडा फ्रेंच गेट्स, हेनरी वेलकम, हॉवर्ड ह्यूजेस और वॉरेन बफेट शीर्ष पांच में शामिल हैं। जेफ बेजोस की पूर्व पत्नी मैकेंजी स्कॉट ने चैरिटी को सीधे 8.5 बिलियन डॉलर का दान दिया, जो एक जीवित दाता एक वर्ष में दिया गया सबसे बड़ा दान है।

परोपकारी मूल्य के आधार पर दी गई रैंकिंग

यह रैंकिंग कुल परोपकारी मूल्य पर आधारित है, जिसकी गणना मुद्रास्फीति के लिए उपहार या वितरण की राशि के साथ समायोजित संपत्ति के मूल्य के रूप में की जाती है। डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों से प्राप्त किया गया था और कुछ मामलों में सीधे संस्था व फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराया गया था।

टाटा स्टील में दुनिया भर से 80, 500 लोग करते हैं काम

जमशेदजी टाटा भारत में कपड़ा व स्टील उद्योग के अगुआ रहे हैं। उन्होंने जमशेदपुर में टाटा आयरन एंड स्टील वर्क्स कंपनी (टिस्को) की स्थापना की, जिसे अब टाटा स्टील के नाम से जाना जाता है। 1907 में स्थापित, टाटा स्टील अब भारत, नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम सहित 26 देशों में काम करती है, और रिपोर्टों के अनुसार लगभग 80,500 लोग कार्यरत हैं। सेंचुरी रिपोर्ट के एडलगिव हुरुन फिलैंथ्रोपिस्ट्स ने कहा, “टाटा ग्रुप का कुल परोपकारी मूल्य टाटा संस का 66 प्रतिशत है, जिसका अनुमान 100 अरब डॉलर है, जो पूरी तरह से सूचीबद्ध संस्थाओं के मूल्य पर आधारित है।”

अजीम प्रेमजी ने फाउंडेशन को दिए हैं 2.2 बिलियन डॉलर दान

दूसरी ओर, विप्रो के प्रेमजी ने 2013 में गिविंग प्लेज पर हस्ताक्षर करके अपनी संपत्ति का कम से कम आधा हिस्सा दान देेने की घोषणा की है। उन्होंने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को 2.2 बिलियन डॉलर के दान के साथ शुरुआत की, जो भारत में शिक्षा पर केंद्रित था। उन्होंने 2020 के लिए एडेलगिव हुरुन इंडिया परोपकार सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया था।

पिछली सदी के दानदाताओं में अमेरिका शीर्ष पर

एडेलगिव हुरुन रिपोर्ट के अनुसार, पिछली शताब्दी में दुनिया के 50 सबसे उदार व्यक्ति पांच देशों से आए थे, जिनमें 39 दानताओं के साथ अमेरिका शीर्ष पर था, इसके बाद इंग्लैंड, चीन (3), भारत (2) और पुर्तगाल और स्विट्जरलैंड के 5 लोग थे। उनके दान की राशि $832 बिलियन थी, जिसमें से 503 बिलियन डॉलर आज विभिन्न फाउंडेशन में हैं जबिक लगभग 329 बिलियन डॉलर पिछली शताब्दी में वितरित किए गए।

एलोन मस्क व जेफ बेजोस को सूची में नहीं मिली जगह

हुरुन रिपोर्ट के अध्यक्ष और मुख्य शोधकर्ता रूपर्ट हुगवेरफ ने कहा, यह आश्चर्य की बात है कि जेफ बेजोस और एलोन मस्क ने इस सूची में जगह नहीं बनाई है। पिछली सदी के दुनिया के सबसे बड़े परोपकारी लोगों की कहानियां आधुनिक परोपकार की कहानी बयां करती हैं। कार्नेगी और रॉकफेलर जैसे दुनिया के शुरुआती अरबपतियों की विरासत आज के बिल गेट्स और वॉरेन बफेट के माध्यम से दिखाती है कि कैसे बनाई गई संपत्ति का पुनर्वितरण किया गया है। कई परोपकारियों ने पहली के बजाय दूसरी पीढ़ी में दान किया, जैसे कि फोर्ड फाउंडेशन की कहानी, जिसे हेनरी फोर्ड के बेटे द्वारा स्थापित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष 50 व्यक्तियों ने वार्षिक अनुदान के रूप में अपने कुल संपत्ति का सामूहिक रूप से $30 बिलियन या 6 प्रतिशत का योगदान दिया। $8.5 बिलियन के दान के साथ, मैकेंज़ी स्कॉट सबसे बड़ा वार्षिक अनुदान निर्माता है, जिसके बाद वॉरेन बफेट (2.7 बिलियन डॉलर) और बिल एंड मेलिंडा गेट्स (2.5 बिलियन डॉलर) हैं।

बीएचएस ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

कोलकाता : बिड़ला हाई स्कूल ने गत 21 जून, 2021 को ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया। सामाजिक दूरी के बजाय शारीरिक दूरी की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए, कक्षा 6-11 के छात्रों ने इस उत्सव में प्रदर्शन किया। सभी प्रतिभागियों ने अपने घर से अलग-अलग आसन किए और यह वीडियो को स्कूल के साथ साझा किया। स्कूल द्वारा इन सभी वीडियो को लेकर कोलाज वीडियो तैयार किया। आठवीं-ई कक्षा के विशेष मेहता ने उद्घाटन भाषण दिया और समापन भाषण नौवीं-बी कक्षा के आदित्य बसु द्वारा दिया गया। कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग बिड़ला हाई स्कूल फेसबुक पेज पर सुबह 7:30 बजे शुरू हुई। छात्र ने सभी छात्रों के बीच यह संदेश फैलाया कि योग उनकी प्रतिरक्षा, शारीरिक क्षमता में सुधार करने और चिंता और तनाव को दूर करने में मदद करता है।

-गौतम घोष
(विभागाध्यक्ष) शारीरिक शिक्षा विभाग

 

एसोचैम बना अंतर्राष्ट्रीय एक्सबीआरएल सम्मेलन 2021 का मेजबान

कोलकाता : एसोचैम ने हाल ही में “अंतर्राष्ट्रीय एक्सबीआरएल सम्मेलन 2021 – उभरते रुझान और अवसर” पर एक वेबिनार का आयोजन किया, जिसमें एक्सबीआरएल के आवेदन, उपयोगकर्ताओं और पेशेवरों को शिक्षित करने, इसके आवेदन को बढ़ावा देने और इसे संबोधित करने के लिए उभरते क्षेत्रों पर चर्चा और विचार-विमर्श किया गया। हितधारकों की समस्याएं और प्रश्न के समाधान पर चर्चा हुई।
वक्ता इस तथ्य पर सहमत हुए कि एक्सबीआरएल व्यावसायिक सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए विश्वसनीय वैश्विक ढांचा है जो व्यापार रिपोर्टिंग में आमतौर पर आवश्यक अर्थ अर्थ की अभिव्यक्ति की अनुमति देता है। यह व्यवसाय के प्रदर्शन की जवाबदेही और पारदर्शिता में सुधार करने में भी मदद करता है और सभी हितधारकों के लिए बहुत ही किफायती है । एक्सबीआरएल के लाभों पर प्रकाश डालते हुए कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की उप महानिदेशक गीता सिंह राठौर ने कहा, ” एक्सबीआरएल विश्व स्तर पर व्यावसायिक सूचनाओं को संग्रहीत करने और प्रसारित करने के मानक तरीके के रूप में उभरा है। यह विभिन्न हितधारकों के लिए सटीकता, विश्वसनीयता, समयबद्धता और निर्णय उपयोगिता सुनिश्चित करता है। यह सूचना और डेटाबेस के विभिन्न उपयोगकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ है।
बीएसई लिमिटेड के मुख्य नियामक अधिकारी नीरज कुलश्रेष्ठ ने अंतर्राष्ट्रीय एक्सबीआरएल सम्मेलन 2021 के आयोजन के लिए एसोचैम को धन्यवाद दिया। एसोचैम के लेखा मानकों की टास्क फोर्स के अध्यक्ष और आईसीएआई के पूर्व सचिव डॉ. अशोक हल्दिया ने कहा कि भारत को एक राष्ट्रीय डेटा रिपोर्टिंग मानक की आवश्यकता है। नेक्सजेन के निदेशक सीए विनोद कश्यप ने कहा कि भारत को एक्सबीआरएल पर अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना चाहिए और एमसीए में दायर एक्सबीआरएल टैग किए गए डेटा की गुणवत्ता में बहुत आवश्यक सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाना चाहिए। इस कार्यक्रम में आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष और एक्सबीआरएल इंटरनेशनल के सदस्य सी ए अतुल कुमार के अतिरिक्त अन्य वक्ताओं ने विचार रखे।

‘रघुनाथ के होते कोई अनाथ कैसे होगा’

कोलकाता : राष्ट्रीय कवि संगम पश्चिम बंगाल के प्रांतीय पटल पर विगत रविवार को गंगा दशहरा एवं पितृ दिवस के अवसर पर एक भव्य कवि सम्मेलन का सफलतम आयोजन हुआ l इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल जी की उपस्थिति ने उपस्थित सभी कवियों एवं श्रोताओं का अभूतपूर्व उत्साह वर्धन करके इस कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिया था l इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता प्रांतीय अध्यक्ष डॉक्टर गिरधर राय तथा संचालन अंजनी कुमार राय द्वारा की गई थी l कार्यक्रम का संयोजन डॉ अनिरुद्ध राय द्वारा तथा कार्यक्रम का शुभारंभ रीमा पांडेय द्वारा सुमधुर गंगा वंदना से हुआ ।उपस्थित कवियों में चंद्रिका प्रसाद ‘अनुरागी’, रामपुकार सिंह, बलवंत सिंह, कामायनी संजय, रीमा पांडेय, सीमा सिंह, देवेश मिश्र, शिव शंकर सिंह, संतोष कुमार तिवारी, अशोक कुमार शर्मा, अरविंद कुमार मिश्र एवं कोमल चूड़ीवाल ने अपने काव्य स्वर द्वारा कार्यक्रम की सफलता में अपना विशिष्ट योगदान दियाl मित्तल ने यह कहकर दर्शकों और श्रोताओं का दिल जीत लिया कि “रघुनाथ के और बाबा विश्वनाथ के होते हुए कोई भी व्यक्ति अनाथ कैसे हो सकता है?” प्रांतीय अध्यक्ष गिरधर राय ने अपनी लोकप्रिय घनाक्षरी द्वारा यह उद्घोष कर कि वाम को भी दिखने लगे हैं अब राम जी” श्रोताओं को आनंद विभोर कर दिया । कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अशोक शर्मा ने किया । कुल मिलाकर यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कवि संगम के मूल “मंत्र राष्ट्र जागरण धर्म हमारा” का उद्घोष था।

सहचन की पत्तियों से चॉकलेट औऱ स्नैक्स बना रहे हैं पुणे के प्रमोद

भारत के ज्यादातर राज्यों में सहजन की खेती बड़े पैमाने पर होती है। सेहत के लिहाज से सहजन की अहमियत काफी ज्यादा है। इसमें कई तरह के मल्टी विटामिन, प्रोटीन, एमीनो एसिड्स मौजूद होते हैं। देश में पिछले कुछ सालों से हेल्थ सप्लीमेंट्स के रूप में इसकी माँग बढ़ी है। कई स्टार्टअप सहजन की प्रोसेसिंग कर नए स्वास्थ्यप्रद उत्पाद बना रहे हैं। महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाले प्रमोद पानसरे भी इसी का बिजनेस कर रहे हैं। वे पिछले दो साल से सहजन की पत्तियों और हल्दी की मदद से चॉकलेट, चिक्कियां, खाखरा, स्नैक्स तैयार कर देशभर में मार्केटिंग कर रहे हैं। फिलहाल वे हर महीने तीन लाख रुपए का बिजनेस कर रहे हैं।
30 साल के प्रमोद एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। खेती उनके परिवार में होती रही है। 2012 में फूड टेक्नोलॉजी से बीटेक करने के बाद उन्होंने नौकरी के बजाय खुद का काम शुरू करने का फैसला किया। कुछ साल उन्होंने खजूर का बिजनेस किया। हालांकि इसमें उतनी आमदनी नहीं हुई और उन्हें काम बंद करना पड़ा। चूंकि घर-परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ती जा रही थीं, परिवार में कोई और कमाने वाला नहीं था, इसलिए न चाहते हुए भी प्रमोद एक फूड कंपनी में काम करने लगे। करीब 3 साल तक उन्होंने वहां काम किया। इस दौरान अलग-अलग फूड प्रोडक्ट के बारे में उन्हें जानकारी मिली। उसकी प्रक्रिया को भी समझने में मदद मिली।

प्रमोद कहते हैं कि सहजन सेहत के लिए फायदेमंद होता है, ये तो मुझे पहले से पता था, लेकिन काम के दौरान मुझे जानकारी मिली कि इससे प्रोडक्ट बनाकर फूड सप्लीमेंट्स के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात कि इसके लिए हमें कहीं दूर जाने की भी जरूरत नहीं थी। हमारे आसपास ही भरपूर मात्रा में सहजन के प्लांट उपलब्ध हैं।
इसके बाद प्रमोद ने अपने घर पर ही इसे आजमाना शुरू किया। उन्होंने सहजन की पत्तियां और फलियों को सुखाकर एक पाउडर तैयार किया। फिर इसे लैब टेस्ट में भेजा, जहां पता चला कि इसमें हेल्थ के लिए जरूरी लगभग सभी न्यूट्रिशन भरपूर मात्रा में मौजूद हैं। उन्होंने खुद के खाने में भी इसका इस्तेमाल करना शुरू किया। कुछ दिनों बाद उन्हें इसका असर भी देखने को मिला।
प्रमोद कहते हैं- खुद इस्तेमाल करने के बाद मुझे लगा कि इसे कॉमर्शियल लेवल पर शुरू किया जा सकता है। कई लोग हैं जिन्हें हेल्दी फूड सप्लीमेंट्स की जरूरत है और वे ऐसी चीजों को लेना भी पसंद करेंगे। इसके बाद उन्होंने सहजन के पाउडर को पैक करके कुछ लोगों को इस्तेमाल के लिए दिए। वे कहते हैं कि कुछ लोगों ने इस्तेमाल के बाद पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया, लेकिन ज्यादातर लोग ऐसे थे जिन्होंने घर में इसे ले जाकर रख दिया। वे रेगुलर इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। जब हमने वजह जानने की कोशिश की तो पता चला कि पाउडर के रूप में होने और इसके टेस्ट की वजह से लोग कम पसंद कर रहे हैं। इसके बाद प्रमोद ने तय किया कि इसे पाउडर के रूप में सेल करने की जगह क्यों न प्रोडक्ट के रूप में कन्वर्ट किया जाए ताकि इसकी ब्रांड वैल्यू भी हो सके और ज्यादा से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल भी कर सकें।
साल 2018 में प्रमोद ने अपनी नौकरी छोड़ दी। करीब एक साल उन्होंने मार्केट रिसर्च पर फोकस किया। सहजन से क्या-क्या प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं, उनका प्रॉसेस क्या होगा? कितने लोग उन्हें खरीदेंगे? मार्केटिंग की अप्रोच क्या होगी? इसको लेकर उन्होंने काम किया।
इसके बाद दिसंबर 2018 से उन्होंने सहजन की पत्तियों और फलियों से चिक्कियां बनानी शुरू की। वे खुद ही इसे तैयार कर स्टॉल लगाकर बेचने लगे। प्रमोद कहते हैं कि हमने अपने प्रोडक्ट की कीमत बहुत कम रखी थी। इसलिए जो लोग हमारे स्टॉल पर आते थे, उनमें से ज्यादातर लोग प्रोडक्ट खरीद लेते थे। इस तरह कुछ महीनों तक हमने मार्केटिंग की। कुछ वक्त बाद प्रमोद को एक निवेशक मिल गया। उन्होंने 15 लाख रुपए का निवेश किया और पुणे में एक ऑफिस लेकर अपना काम शुरू किया। उन्होंने खुद की कंपनी रजिस्टर की। फिर फूड लाइसेंस सहित जरूरी डॉक्युमेंट्स जुटाए और बिजनेस शुरू कर दिया। कुछ महीनों तक उनका काम बढ़िया चला। इसके बाद 2020 में कोरोना की वजह से उनका काम प्रभावित होने लगा। लॉकडाउन लगने के बाद कुछ महीने तक उनका काम न के बराबर हुआ।
प्रमोद कहते हैं कि हमारे व्यवसाय पर कोरोना का असर तो पड़ा, कुछ नुकसान भी हुआ, लेकिन एक फायदा ये भी हुआ कि इसके बाद लोग हेल्दी फूड सप्लीमेंट्स पर जोर देने लगे। इससे हमें अपने बिजनेस का दायरा बढ़ाने में काफी मदद मिली। हमारे प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ गई।
वे कहते हैं कि इस साल जब कोरोना की सेकेंड वेव ने तबाही मचाई तो यह भी कहा जाने लगा कि तीसरी लहर भी आएगी और यह बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेगी। हालांकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। फिर भी लोग अपने बच्चों की हेल्थ को लेकर अवेयर हो रहे हैं। वे हेल्दी फूड सप्लीमेंट्स पर जोर दे रहे हैं, लेकिन एक दिक्कत यह है कि बच्चे इन चीजों को खाने में कम दिलचस्पी रखते हैं। इसलिए हमने तय किया कि एक हेल्दी चॉकलेट उतारी जाए।
प्रमोद ने इस साल की शुरुआत में इसको लेकर काम करना शुरू कर दिया और मई में चॉकलेट की मार्केटिंग करने लगे। अभी वे तीन फ्लेवर में चॉकलेट बना रहे हैं। जिसमें डार्क, व्हाइट और मिल्क फ्लेवर शामिल है। इसमें सहजन के साथ हल्दी, काली मिर्च जैसे इम्यून बूस्टर शामिल हैं।
प्रमोद कहते हैं कि शुरुआत में हम स्टॉल लगाकर अपने उत्पाद की मार्केटिंग करते थे। धीरे-धीरे जब हमारे प्रोडक्ट की माँग बढ़ने लगी, कुछ लोग जानने लगे तो हमने रिटेलर्स और बड़े-बड़े होलसेल डीलर्स से सम्पर्क किया। उन्होंने ट्रायल के बाद हमारा उत्पाद लेना शुरू कर दिया। इसके बाद हमने सोशल मीडिया की मदद ली और अपने प्रोडक्ट का प्रमोशन करने लगे। हमने वॉट्सऐप ग्रुप भी बनाया। कई लोग फोन के जरिए भी ऑर्डर करते हैं।
प्रमोद के मुताबिक हर महीने वे 2 टन चॉकलेट और चिक्कियां बना रहे हैं। इसके साथ ही बड़े लेवल पर खाखरा भी तैयार करते हैं। हर महीने 100 से ज्यादा उनके पास ऑर्डर आ रहे हैं। पिछले महीने उन्होंने श्रीलंका में भी अपना प्रोडक्ट भेजा था। जल्द ही वे खुद की वेबसाइट लॉन्च करने वाले हैं। साथ ही अमेजन और इंडिया मार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर भी वे अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करेंगे।
प्रमोद कहते हैं कि हमारे साथ करीब 15 लोग काम करते हैं। इनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं। सबसे पहले हम सहजन की पत्तियों को सुखाते हैं। फिर उसका पाउडर तैयार करते हैं। इसके बाद उसमें शुगर फ्री गुड़, मूंगफली और ग्लूकोज मिलाकर सहजन की चिक्कियां तैयार करते हैं। इसके बाद इसकी क्वालिटी टेस्टिंग और पैकेजिंग का काम करते हैं। इसी तरह चॉकलेट तैयार करने के लिए भी हमने एक फॉर्मूला तैयार किया है। उसका हमें पेटेंट भी मिल चुका है। उस फॉर्मूले के साथ हल्दी और काली मिर्च मिलाकर मिला लेते हैं। फिर उसे एक मशीन के जरिए पिघला लिया करते हैं। इसके बाद उसकी शेपिंग और फिर पैकेजिंग का काम होता है।
ऑर्गेनिक चॉकलेट की बढ़ रही है माँग
आमतौर पर चॉकलेट को लेकर यह मान्यता रही है कि इससे सेहत को नुकसान पहुंचता है। खासकर के बच्चों को। इससे बचने के लिए हाल के कुछ सालों में ऑर्गेनिक और होममेड चॉकलेट की माँग बढ़ी है। देश में ऐसे कई स्टार्टअप हैं, जो इस तरह के उत्पाद बना रहे हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

अचार बेचकर अपनी पहचान बनाने वाली यादे

यादे दुजोम पिकल क्वीन के नाम से अपनी अलग पहचान रखती हैं। वह जब 4 साल की थीं, तब उसकी मां का निधन हो गया। बचपन से अपनी नानी और सौतेली मां के दुर्व्यवहार को सहने के बाद यादे ने हारकर बैठ जाने के बजाय अपने भविष्य को संवारने की योजनाओं पर काम किया। वैसे भी ईटानगर एक ऐसी जगह है जहां बहुत कम महिलाएं काम करती हैं, वहां यादे न सिर्फ एक उद्यमी के तौर पर जानी जाती हैं, बल्कि उनका ब्रांड ‘अरुणाचल पिकल हाउस’ भी अचार के लिए कस्टमर्स की पहली पसंद बना हुआ है।
यादे कहती हैं, मेरा अब तक का जीवन संघर्ष करते हुए ही बीता। मेरी मां के न रहने पर मुझे और मेरी बड़ी बहन को नानी के घर रहना पड़ा। वह खेती करती थीं और हम दोनों भी उनके काम में मदद करते। जैसे-तैसे मेहनत करके हम दोनों बहनें कुछ बड़े हुए कि एक दिन नानी भी दुनिया छोड़कर चली गईं। तब मैंने आठवीं कक्षा पास की थी। नानी के न रहने पर दोनों बहनों को अपनी सौतेली मां और पिता के साथ रहना पड़ा। सौतेली मां के साथ रहते हुए उन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती थी। न ही पहनने को कपड़े दिए जाते थे। ऐसे हालतों में भी 12 वीं कक्षा तक यादे ने पढ़ाई की और फिर आगे की पढ़ाई के लिए वे ईटानगर आ गईं। यहां अपनी पढ़ाई जारी रखने और खुद का खर्च उठाने के लिए वे नौकरी करने लगीं। अपने व्यवसाय की शुरुआत से पहले वह सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम किया करती थीं। वह हर महीने बचत भी करने लगीं। उन्हीं दिनों यादे ने फूड प्रोसेसिंग, लेबल मेकिंग और प्रिजर्वेटिव्स से जुड़ी जानकारी इकट्‌ठा की। उसने मणिपुर की कुछ महिलाओं से अचार बनाना सीखा। उसके बाद अरुणाचल प्रदेश में इसका प्रशिक्षण लिया। इसी साल यादे ने अपने ब्रांड अरुणाचल पिकल हाउस की शुरुआत की। यहां वे गांव की कुछ महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

स्वदेशी 5जी नेटवर्क समाधान हेतु एयरटेल और टाटा ग्रुप ने मिलाया हाथ

नयी दिल्ली : देश में अगली पीढ़ी की कम्युनिकेशन सेवा यानी 5जी सेवा को लेकर सभी टेलीकॉम कंपनियां तैयारी कर रही हैं। इस बीच सुनील भारती मित्तल की भारती एयरटेल ने 5जी नेटवर्क सॉल्यूशन उपलब्ध कराने के लिए टाटा ग्रुप से हाथ मिलाया है। दोनों कंपनियों की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि इस साझेदारी के तहत टाटा ग्रुप ओपन रेडियो बेस्ड O-RAN (ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क) डेवलप और NSA/SA (नॉन-स्टैंडअलोन/स्टैंडअलोन) कोर डेवलप करेगा। इससे स्वदेशी टेलीकॉम स्टैक तैयार होगा। साथ ही टाटा ग्रुप और इसके साझीदार की क्षमता बढ़ेगी।
बयान में कहा गया है कि इस तकनीक का कमर्शियल डेवलपमेंट जनवरी 2022 से उपलब्ध होगा। बयान के मुताबिक, टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) अपने ग्लोबल सिस्टम इंटीग्रेशन एक्सपर्ट्स को साथ लाएगा और 3GPP एंड O-RAN स्टैंडर्ड का एंड-टू-एंड सॉल्यूशन उपलब्ध कराने में मदद करेगा। एयरटेल पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर इस स्वदेशी सॉल्यूशन को 5जी रोलआउट प्लान के तहत डिप्लॉय करेगा। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट जनवरी 2022 से शुरू होगा। यह मेड इन इंडिया 5जी प्रोडक्ट और सॉल्यूशन ग्लोबल स्टैंडर्ड के आधार पर तैयार किए जाएंगे।
निर्यात के अवसर भी पैदा होंगे
इस 5जी सॉल्यूशन के एयरटेल के डाइवर्स और ब्राउनफील्ड नेटवर्क में कमर्शियल परीक्षण के बाद भारत के लिए निर्यात के अवसर भी पैदा होंगे। भारत अभी वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा टेलीकॉम बाजार है। एनालिस्टों का कहना है कि टाटा ग्रुप के साथ साझेदारी से भारती एयरटेल का मनोवैज्ञानिक तौर पर मनोबल बढ़ेगा। 2016 में शुरू हुई रिलायंस जियो के कारण भारती एयरटेल पर दबाव बना हुआ था।
एयरटेल और टाटा ग्रुप में 2017 में भी हुआ था सौदा
यह साझेदारी एयरटेल और टाटा ग्रुप के बीच 2017 में हुए एक सौदे का नतीजा है। तब टाटा ग्रुप के घाटे में चल रहे कंज्यूमर मोबाइल कारोबार का मित्तल की कंपनी में विलय हो गया था। हालांकि, इस साझेदारी का उस सौदे से कोई सीधा कनेक्शन नहीं है। इस साझेदारी से नोकिया, एरिक्शन और हुवावे जैसे पारंपरिक उपकरण सप्लायर्स पर भी निर्भरता कम होगी। इस साझेदारी का मुख्य मुकाबला रिलायंस जियो से होगा।
5जी तकनीक को लेकर काफी उत्साहित
टाटा ग्रुप/टीसीएस के एन गणपति सुब्रमण्यम का कहना है कि हम 5जी तकनीक को लेकर काफी उत्साहित हैं। हम विश्वस्तरीय नेटवर्किंग उपकरण और समाधान तैयार करने की ओर देख रहे हैं। हम एयरटेल को अपने ग्राहक के रूप में पाकर काफी प्रसन्न हैं। अर्नेस्ट एंड यंग के टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम पार्टनर प्रशांत सिंघल का कहना है कि इस साझेदारी से ग्लोबल बिजनेस के अवसर पैदा होंगे। इससे स्वदेशी तकनीक को लेकर लड़ाई में तेजी आएगी।
विदेशी निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी पर जोर दे रही है सरकार
5जी तकनीक के विकास में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार स्वदेशी उपकरणों के डेवलपमेंट पर जोर दे रही है। इसके लिए सरकार ने घरेलू कंपनियों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर बल दिया है। सरकार का मकसद 5जी तकनीक में चीन और यूरोपीय देशों की महत्ता को कम करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद घरेलू इनोवेशन और सॉल्यूशंस को बढ़ावा देने की वकालत कर चुके हैं।
रिलायंस जियो ने विकसित किया स्वदेशी नेटवर्क
मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो ने स्वदेशी 5जी नेटवर्क विकसित कर लिया है। जियो ने अमेरिकी कंपनी क्वालकॉम के साथ मिलकर 5जी समाधान तैयार किया है। अमेरिका में इसका सफल परीक्षण भी हो चुका है। इंडियन मोबाइल कांग्रेस 2020 में मुकेश अंबानी ने कहा था कि रिलायंस जियो 2021 की दूसरी छमाही (जुलाई-दिसंबर) में 5 जी लॉन्च करने की योजना बना रही है। उन्होंने आगे कहा था कि देश में डिजिटल लीड को बनाए रखने, 5जी की शुरुआत करने और इससे सस्ता और सभी जगह उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है।
सरकार ने किया 5जी स्पेक्ट्रम का आवंटन
देश में 5जी सेवाएं शुरू करने के लिए सरकार ने स्पेक्ट्रम भी आवंटन कर दिया है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम ने ट्रायल के लिए देश की तीनों प्रमुख कंपनियों रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया को 5जी स्पेक्ट्रम का आवंटन कर दिया है। डीओटी ने तीनों टेलीकॉम कंपनियों को 700 मेगाहर्टज, 3.5 गीगाहर्टज और 26 गीगाहर्टज बैंड के स्पेक्ट्रम का आवंटन किया है। यह 5 जी ट्रायल एयरवेब्स 6 महीने के लिए आवंटित की गयी हैं। टेलीकॉम कंपनियों को शहरी क्षेत्र के साथ ग्रामीण और सेमी-अर्बन क्षेत्रों में भी ट्रायल करना होगा।

बैंक में रखी गृहणियों की नकद राशि पर नहीं लग सकता कर : आइटीएटी

नयी दिल्ली :   नोटबंदी के दौरान गृहिणियों की पोटली से निकली रकम को लेकर तरह-तरह के मजाक बने। उनकी छोटी बचत हड़पने और उस पर कर वसूलने के आरोप लगे, लेकिन आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आइटीएटी) की आगरा खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आय कर योग्य नहीं मानी जाएगी। ग्वालियर के किला गेट निवासी उमा अग्रवाल की अपील का निस्तारण करते हुए न्यायिक अधिकारी ललित कुमार और लेखाकार सदस्य डा. मीठा लाल मीणा की खंडपीठ ने यह व्यवस्था दी है।

खंडपीठ ने आदेश में कहा है कि विमुद्रीकरण योजना 2016 के दौरान गृहिणियों द्वारा बैंक में जमा की गई ढाई लाख रुपये से कम नकद राशि कर योग्य राशि नहीं मानी जाएगी और न उसके स्रोत के बारे में पूछा जाएगा। न्याधिकरण ने स्वीकार किया कि यह छोटी राशि पिछले कई वर्षो में परिवार द्वारा की गई विभिन्न गतिविधियों से जुटाई गई है। इस मामले की खंडपीठ में इसी 14 जून को सुनवाई शुरू हुई और 18 जून को फैसला आ गया।
यह है पीठ का फैसला
विमुद्रीकरण योजना 2016 के दौरान बैंक खाते में ढाई लाख तक की नकद जमा पर कर लगाने का कोई आदेश नहीं है। उस समय महिलाओं के पास बैंकों में राशि जमा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। महिला ने स्पष्टीकरण दिया था कि बैंक में जमा की गई राशि पिछले कई वर्षो में उसके द्वारा बचाए गए पैसे थे और आपातकालीन आवश्यकता में स्वयं और परिवार की सुरक्षा के लिए उन्हें रखा था। इसलिए माना जा सकता है कि महिला ने धारा 69ए में आवश्यक जमा के स्त्रोत को विधिवत समझाया है। आइटीएटी मानता है कि विमुद्रीकरण के दौरान गृहिणियों द्वारा नकद जमा से उत्पन्न होने वाली कार्यवाही के संबंध में यदि जमा ढाई लाख रुपये तक है, तो इस निर्णय को माना जा सकता है।रिटर्न में उल्लेख न होने पर नोटिस ग्वालियर के किला गेट निवासी उमा अग्रवाल ने रिटर्न में अपनी आय एक लाख 30 हजार 810 दिखाई थी। उनके बैंक में 211500 (दो लाख 11 हजार) रुपये जमा थे। इस पर ग्वालियर के आयकर अधिकारी ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया। उन्होंने फेसलेस योजना में कमिश्नर के यहां अपील की। वहां खारिज होने पर एटीआइटी आगरा में अपील की। उमा अग्रवाल के पति ओमप्रकाश अग्रवाल कपड़े की छोटी दुकान चलाते हैं। बेटा भरत अग्रवाल ब्रोकर का काम करता है, वही मामले को लेकर न्यायाधिकरण में आया था। उनका कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। दो लाख 11 हजार 500 रुपये मां ने कैसे-कैसे जोड़े, हम ही जानते हैं।परिवार के भविष्य के लिए जमा की धनराशि एटीआइटी में उमा अग्रवाल ने कहा था कि नोटबंदी के दौरान उन्होंने धनराशि अपने व परिवार के भविष्य के उद्देश्यों के लिए पति, बेटे, रिश्तेदारों द्वारा दी गई व बचत से एकत्र कर सहेजी थी। गृहिणियां सब्जी विक्रेताओं, दर्जी व मिश्रित व्यापारियों से सौदेबाजी करके, घर के बजट से बचाई गई नकदी ऐसे ही जमा करती हैं। त्योहारों पर रिश्तेदारों से मिलने वाले छोटे-छोटे नकद उपहारों को जोड़ती हैं और वर्षो से पति और बेटे के कपड़े धोते हुए, उसमें से निकले रुपये को उन्होंने जोड़ा। 500 और एक हजार रुपये के नोट 2016 में प्रतिबंधित हुए, तो उनके पास उस बचत को बैंकों में जमा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।