आरटीआई में खुलासा, कमाये 4575 करोड़
नयी दिल्ली : कोरोना के कारण रेलवे सेवा ठप पड़ी है, राजस्व का नुकसान हो रहा है पर आप नहीं जानते है कि कोरोना काल में भी रेलवे की कमाई हो रही है और वह भी हजार करोड़ की। दरअसल, कोरोना काल में रेलवे ने केवल कबाड़ बेचकर 4575 करोड़ रुपये कमाये हैं और यह खुलासा आरटीआई में हुआ है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले एक जवाब से पता चला कि 2020-21 में रेलवे को इस मद में अब तक की सर्वाधिक 4575 करोड़ रुपये की आय हुई। इससे पहले 2010-11 में कबाड़ बेचकर 4,409 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया गया था। पटरियों का पुराना होना, पुरानी लाइन को बदलने, पुराने ढांचे को त्यागने, पुराने इंजन, डिब्बों आदि से कबाड़ सामग्री बनती है। तेजी से रेल रूट्स के विद्युतीकरण, डीजल इंजनों को बदलने और कारखानों में निर्माण के दौरान भी कबाड़ सामग्री बनती है। पिछले कुछ वर्षों में रेलवे के लिए यह आय का अच्छा खासा स्रोत रहा है।
मध्य प्रदेश के चंद्र शेखर गौड़ द्वारा आरटीआई कानून के तहत मांगी गयी सूचना के जवाब में रेलवे बोर्ड ने कहा कि कोविड-19 महामारी से प्रभावित 2020-21 में रेलवे को कबाड़ से पिछले साल की तुलना में पांच प्रतिशत अधिक आय हुई। रेलवे ने कहा कि 2019-20 में 4,333 करोड़ रुपये की कबाड़ सामग्री की बिक्री की गयी और 2020-21 में कबाड़ से 4,575 करोड़ रुपये की आमदनी हुई।
कोरोना के बीच कबाड़ बेचकर ही रेलवे हुआ मालामाल
पशुओं से खूब प्रेम करती है बहुमुखी प्रतिभा की धनी नन्ही मनस्वी
बहुत कम उम्र में उसने मां दुर्गा की आराधना शुरू कर दी है नहीं तो मुमकिन नहीं है कि इतने कठिन संस्कृत शब्द इतने सही ढंग से उच्चारित किए जा सके । मां दुर्गा तथा मां सरस्वती का आशीर्वाद है इस बच्ची पर किसे मां दुर्गा की स्तुति इतने अच्छे ढंग से याद है।आज हम बात करेंगे एक 8 वर्षीय बच्ची की जिसकी उम्र 8 साल है । कक्षा 3 में पढ़ती है। नाम मनस्वी शर्मा । पिता का नाम निर्मल शर्मा । मां लक्ष्मी शर्मा। मनस्वी शर्मा से की गयी बातचीत में उसने बताया कि उसे डांस करना अच्छा लगता है उसे संगीत सुनना और गाना दोनों ही अच्छा लगता है। नृत्य में वह कत्थक बहुत अच्छे से कर लेती है। ड्राइंग करना भी उसके शौक में शामिल है। वही किशोर कुमार के गाने उसे बहुत ज्यादा पसंद आते हैं। अपने वीडियो बनाकर यूट्यूब पर डालना भी उसका एक पसंदीदा शौक है और यह वीडियो जानवरों के साथ बनाकर व डालती है।
उसके काफी सारे वीडियो में गाय बिल्ली इनके ऊपर उसने अपने वीडियो डाले हैं। मनस्वी कहती है कि मुझे जानवरों से बहुत प्यार है मुझे जानवर अच्छे लगते हैं। घर में कम से कम पांच छह बिल्लियां पाल रखी है। उसने कहा कि मेरी मम्मी को भी बिल्लियां गाय बहुत पसंद है।
मनस्वी करीबन 3 साल की उम्र से कथक नृत्य सीखती आ रही है। खास बात यह है कि मनस्वी को भगवान की आरती भजन मंत्र भक्ति भाव से भरा हुआ संगीत बहुत पसंद आता है। उसे हनुमान चालीसा भी पूरी तरह याद है। एक तरफ जहां बच्चे सारा दिन मोबाइल फोन लेकर गेम खेलते है या फिर ऑनलाइन कार्टून देखते हैं। वही मनस्वी अपना समय अपने शौक को पूरा करने में लगाती हैं।
बेटे की साइकिल को बना दिया खेत जोतने वाला उपकरण
तमिलनाडु में एक किसान को भी अपने खून-पसीने की कमाई कोरोना की भेंट चढ़ गयी और अब वह साइकिल से अपना खेत जोतने के लिए मजबूर है। परिवार के सदस्य भी इस काम में किसान का हाथ बंटा रहे हैं। तमिलनाडु के अगूर में रहने वाले 37 साल के नागराज पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे। हालांकि इसमें जब नुकसान हुआ तो उन्होंने सम्मांगी/चंपक की फसल उगाने के लिए किया गया। इन फूलों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल मंदिरों में किया जाता था। फूलों से माला बनाई जाती थी।
नागराज के परिवार ने कर्ज लेकर फूलों की खेती शुरू की थी। उन्होंने खेतों को समतल किया और फिर करीब छह महीने तक पौधों के बड़े होने का इंतजार किया। हालांकि जब पौधों पर फूल आना शुरू हुए तो दुर्भाग्य से कोरोना के कारण लॉकडाउन लग गया और मंदिरों के पाट बंद कर दिए गए। मंदिरों में श्रद्धालुओं के नहीं आने से फूलों की बिक्री भी बंद हो गई। साथ ही शादी समारोहों में भी फूलों का इस्तेमाल होता था, लेकिन ऐसे समारोहों पर भी पाबंदियां लगा दी गईं। करीब एक साल तक नागराज को मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ा। कर्ज की चिंता तो थी ही साल भर में बचत भी खत्म हो गई। बावजूद इसके नागराज ने हिम्मत नहीं हारी और एक बार फिर सम्मांगी की फसल उगाने का फैसला किया।
साइकिल को बनाया खेत जोतने वाला उपकरण
नागराज ने अपने बेटे को स्कूल में मिली साइकिल की सहायता ली। स्कूली छात्रों को तमिलनाडु के स्कूलों में साइकिल मुफ्त दी जाती है। थोड़े बहुत पैसे से उसने साइकिल को खेत जोतने वाले उपकरण में तब्दील कर दिया। उनका 11 साल का बेटा ऑनलाइन पढ़ाई के साथ खेत में उनका हाथ बंटाता है। साथ ही नागराज का भाई भी खेती में सहयोग करता है।
खेती का काम करने में शर्म नहीं
उनके बेटे धनचेझियान ने कहा कि मैं हमेशा पिता और परिवार को खेत में काम करते देखता रहा हूं। जब वो थक जाते हैं तो मैं उनका हाथ बंटाता हूं। काम और मेहनत करने में परिवार के किसी भी शख्स को कोई शर्म नहीं है।
मुश्किल काम है सम्मांगी उगाना
नागराज के भाई का कहना है कि सम्मांगी को उगाना मुश्किल काम है। इसमें छह महीने कमाई की कोई उम्मीद नहीं होती है और लॉकडाउन के कारण फसल बर्बाद हो गई थी। हमें अधिकारियों से भी कोई मदद नहीं मिली है।
(साभार – लोकमत)
जानलेवा हुई गर्मी. देश में पिछले 50 साल में गर्मी ने लीं 17 हजार लोगों की मौत
नयी दिल्ली : देश में गर्मी हर साल कहर बरपाती है पर यह कितनी जानलेवा है, इसका खुलासा एक अध्ययन में हुआ है। अध्ययन के मुताबिर भारत में प्रचंड गर्मी ने 50 साल में 17000 से अधिक लोगों की जान ले ली है। 1971 से 2019 के बीच लू चलने की 706 घटनाएं हुई हैं। यह जानकारी देश के शीर्ष मौसम वैज्ञानिकों द्वारा प्रकाशित शोध पत्र से मिली है।
यह शोध पत्र पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम राजीवन ने वैज्ञानिक कमलजीत रे, वैज्ञानिक एसएस रे, वैज्ञानिक आरके गिरी और वैज्ञानिक एपी डीमरी ने इस साल की शुरुआत में लिखा था। इस पत्र के मुख्य लेखक कमलजीत रे हैं। लू अति प्रतिकूल मौसमी घटनाओं (ईडब्ल्यूई) में से एक है। अध्ययन के मुताबिक, 50 सालों (1971-2019) में ईडब्ल्यूई ने 1,41,308 लोगों की जान ली है। इनमें से 17,362 लोगों की मौत लू की वजह से हुई है जो कुल दर्ज मौत के आंकड़ों के 12 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा है। इसमें कहा गया कि लू से अधिकतर मौत आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में हुईं। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना उन राज्यों में शुमार हैं, जहां भीषण लू के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं।
यह अध्ययन हाल के हफ्तों में उत्तरी गोलार्द्ध में पड़ी प्रचंड गर्मी की वजह से अहमियत रखता है। इस हफ्ते के शुरुआत में कनाडा और अमेरिका में भीषण गर्मी पड़ने से कई लोगों की मौत हो गई। कनाडा के शहर के वैंकूवर में पारा सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 49 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक हो गया। भारत के भी उत्तरी मैदानों और पर्वतों में भीषण गर्मी पड़ी है और लू चली है। मैदानी इलाकों में इस हफ्ते के शुरुआत में पारा 40 डिग्री से अधिक पहुंच गया है। मैदानी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने और पर्वतीय इलाकों में 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर किसी इलाके में लू की घोषणा की जाती है।
केएमबीएल की ‘पे योर कॉन्टेक्ट’ सुविधा
कोलकाता : कोटक महिन्द्रा बैंक (केएमबीएल) ने ‘पे योर कॉन्टेक्ट’ सुविधा शुरू की है। यह केएमबीएल के मोबाइल बैंकिंग ऐप पर एक नया फीचर है जो यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) माध्यमों का इस्तेमाल करता है और ग्राहकों को यह सुविधा देता है कि वे अपने सम्पर्क में किसी को भी पैसा भेज सकें या भुगतान कर सकें, इसके लिए उन्हें सिर्फ लाभार्थी का मोबाइल नंबर डालना करना होगा । ग्राहक अपने मोबाइल फोन में मौजूद सम्पर्कों की सूची में से किसी को चुनें, या लाभार्थी का मोबाइल नंबर डालें, फिर यूपीआई ऐप चुनें अथवा लाभार्थी के नंबर से लिंक्ड केएमबीएल अकाउंट को चुनें और सीधे कोटक मोबाइल बैंकिंग ऐप द्वारा पैसा ट्रांस्फर करें। ’पे योर कॉन्टेक्ट’ की सुविधा सभी पेमेंट ऐप्स के संग यह कारगर है तथा ऐंड्रॉएड व आईओएस दोनों पर उपलब्ध है। कोटक महिन्द्रा बैंक के प्रेसिडेंट तथा चीफ डिजिटल ऑफिसर दीपक शर्मा ने कहा कि इससे सुरक्षा भी बहुत बढ़ गई है क्योंकि किसी भी यूपीआई आईडी पर कोटक मोबाइल बैंकिंग ऐप से फंड ट्रांस्फर और भुगतान किया जा सकता है और ग्राहकों को अपने फोन पर बहुत से पेमेंट ऐप डाउनलोड करने की ज़रूरत नहीं है।
भवानीपुर कॉलेज में सकारात्मक यात्रा पर वेबिनार
कोलकाता : भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बीकॉम सांध्य विभाग ने, ‘सकारात्मक यात्रा की ओर’, विषय पर जागरूकता लाने के लिए गूगल मीट पर वेबिनार का आयोजन किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में उद्घाटन सत्र में सभी प्रमुख वक्ताओं का प्रो अरुंधति मजूमदार ने स्वागत किया और डॉ. जोयिता भादुड़ी ने सभी विशिष्ट वक्ताओं का स्वागत करते हुए कोरोना महामारी का समाज पर पड़े प्रभावों पर प्रकाश डाला। प्रमुख वक्ताओं में डॉ सुद्धादत्त चटर्जी- वरिष्ठ फिजीशियन,अंतरराष्ट्रीय मेडिसिन और रुमेटोलॉजी विभाग, अपोलो ग्लिइगल्स हॉस्पिटल लिमिटेड, कोलकाता , जूट उद्योग पुनर्उत्थान हेतु योगदान करने वाली प्रख्यात सामाजिक उद्यमी चैताली दास एवं स्टेट एंगैजमेंट ऑफिसर एन एस डी सी बिक्रम कुमार दास रहे जिन्होंने विद्यार्थियों को अपने वक्तव्यों से सकारात्मक विकास की दिशा में महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए।
डॉ चटर्जी ने कोविड काल के दौरान शरीर क्रिया विज्ञान पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा किअच्छा और संतुलित भोजन, पूरी तरह से नींद लेना, व्यक्तिगत और सामाजिक स्वस्थता और स्वच्छता, व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य जिससे हम सभी कोरोना काल में उबरे हैं और आगे भी कोरोना को जीतने का एकमात्र यही महत्वपूर्ण उपाय हैं। प्रो देवदत्त सेन ने डॉ सुद्धादत्त चटर्जी का परिचय दिया।
स्ट्रेस मैनेजमेंट और भावनात्मक प्रभाव पर चैताली दास ने कहा कि शारिरिक और उससे होने वाले मानसिक तनाव के कई कारण देखे गए। कोरोना काल में सामाजिकता से कटकर रहने के कारण भूख में बदलाव, श्वास प्रक्रिया में कमी, चिड़चिड़ापन आदि आम बीमारियों को देखा गया। उन्होंने तनाव की पहचान और उसे कम करने तथा ठीक करने के विषय में जानकारी दी। प्रो रिया साहा ने चैताली दास का परिचय दिया।
बिक्रम कुमार दास ने एन एस डी सी में होने वाले कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता विषय पर विद्यार्थियों से अपने विचार साझा किया। विशेष योजनाओं, प्रोजेक्ट, स्कीम और उनके लिए क्या प्राथमिकताएं हैं जैसे वर्ल्ड स्कील, जूनियर स्कील आदि की जानकारी दी। उन्होंने सुझाव दिया कि युवा विद्यार्थी एन एस डी सी में प्रशिक्षु बन किसी विशेष हुनर को सीखने का काम एवं रोजगार में भी सहायक बन सकते हैं। प्रो देवदत्त सेन ने दास का भी परिचय दिया। इस अवसर पर 100 प्रतिभागी, फैकल्टी सदस्यों और विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। अंत में, प्रो. आत्रैय गांगुली ने विशिष्ट अतिथियों के विचारों को संक्षेप में व्यक्त करते हुए मैनेजमेंट के सदस्यों, आईक्यू ए सी, विभागाध्यक्ष और सभी विद्यार्थियों को धन्यवाद दिया। फीड बैक गूगल फार्म में विद्यार्थियों ने अपने विचार भी व्यक्त किए। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
जाति और ब्राह्मणत्व

देश तभी जागेगा जब जनता जागेगी, हम और आप जगेंगे
कोविड -19 के कारण काफी चीजें बदल गयी हैं। मुलाकात का तरीका, बातचीत का तरीका, काम का तरीका, सही है कि दूरी तो बढ़ी है और इसका असर भी बहुत ज्यादा पड़ा है। न्यू नॉर्मल को अपनाना इतना आसान भी नहीं है। तीसरी लहर की चेतावनी के बीच कोविड -19 को लेकर जागरुकता की बात की जाये, तो उंगली सरकार पर ही नहीं, जनता पर भी उठेगी। आखिर हम कब बदलने जा रहे हैं। कई राज्यों में लॉकडाउन लगा, बढ़ाया गया, पाबंदियाँ लगीं…सड़कें सूनी रहीं। ऐसा लगा कि अब लोग सजग होंगे, मास्क पहनेंगे, सामाजिक दूरी रखेंगे मगर जैसे ही लॉकडाउन में छूट मिली, पिंजरे के पंछी, पिंजरे से बाहर। कई तो आँख बचाकर छुट्टी मनाने लगे, कहने की जरूरत नहीं कि छुट्टी में मास्क जैसी कोई चीज कौन पहनता है? लापरवाही के कारण एक बार फिर कोविड -19 के मामले बढ़े. कोरोना के साथ ब्लैक, व्हाइट और यलो फंगस का खतरा बढ़ा, बहुतों को हमने खो दिया मगर इतने पर भी लोगों को फर्क नहीं पड़ता, वह लड़ेंगे, भले ही बेवजह लड़ें पर लड़ेंगे जरूर। सवाल यह है कि यही चलता रहा तो कोविड -19 का खतरा कम तो होगा नहीं, बल्कि बढ़ेगा जरूर। याद कीजिए कैसे पराधीनता की बेड़ियों में जकड़े हमारे पूर्वजों ने अनुशासन का साथ नहीं छोड़ा. कठिनाईयाँ सहीं, अत्याचार सहे पर अपने नेतृत्वकर्ताओं की एक आवाज पर वे सब कुछ लुटाते रहे। यह स्वतन्त्रता इसी आत्मत्याग का परिणाम है। आज नेता भी ऐसे नहीं हैं…उनका समय एक दूसरे को कोसने में जाता है। चुनाव के दौरान जो हुआ, हम सबने देखा और इसके बाद जो कुछ हुआ, वह भी हमने देखा, क्या हम खुद को अनुशासित नहीं कर सकते? इस देश की बागडोर सही दिशा में तभी जायेगी जब जनता जागेगी, अनुशासित होगी, आँख बन्द करके न तो समर्थन देगी और न बात मानेगी….सवाल यह है कि क्या ऐसा होगा… और होगा तो कब होगा ? देश तभी जागेगा जब जनता जागेगी, हम और आप जगेंगे।
द हेरिटेज स्कूल ने पूरे किये शिक्षा क्षेत्र में सेवा के 20 वर्ष
कोलकाता : हेरिटेज स्कूल, कोलकाता शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवा के 20 वर्ष पूरे कर लिये हैं। स्थापना दिवस पर स्कूल ने अपने 19वें वार्षिक पुरस्कार दिवस वितरण समारोह आयोजित किया। विक्रम ए साराभाई कम्युनिटी साइंस सेंटर के कार्यकारी निदेशक दिलीप सुरकर और द हार्ट एडवाइजर्स के पार्टनर तथा शिक्षाविद् शशांक वीरा शिक्षाविद् इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे। इस दिन चार नवोन्मेषी विषय स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा की गयी। ये मौजूदा पाठ्यक्रम में बनाने का दावा करने वाले ये प्रोग्राम नये शैक्षणिक सत्र में स्कूल द्वारा पेश किए जाएंगे। यह नये विषय विद्यार्थियों के भाषा ज्ञान को समृद्ध करेंगे। इसे ‘द आर्टिकुलेट एनसेम्बल’ नाम दिया गया है जो अंग्रेजी भाषा के अध्ययन की बुनियाद को मजबूत करेगा। इसके साथ ही एक ई विज्ञान पत्रिका ‘एनिग्मा – एक ई-साइंस पत्रिका’ शुरू की गयी जिसमें मानव जाति को चकित करने वाले चुनिंदा सिद्धांत और खोजें शामिल हैं। ‘संस्कारन’, जिसमें स्कूल से जुड़ी स्मृतियाँ होंगी। संवेदना एक मनेवैज्ञानिक परामर्श से जुड़ा विषय है जो विशेष रूप से बालिकाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ‘संवेदना’ एक पहल है जो 2010 में संयुक्त राष्ट्र फाउंडेशन द्वारा प्रत्येक बालिका का समर्थन करने के लिए शुरू की गयी थी।
कार्यक्रम के दौरान दिलीप सुरकर ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के कुछ जादुई आविष्कारों से जुड़ी जानकारी साझा की और शिक्षकों से विज्ञान से संबंधित अधिक कार्यक्रम और कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया ताकि छात्रों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में कॅरियर बनाने के लिए पर्याप्त प्रेरणा मिले। शशांक वीरा ने स्कूली शिक्षा में कुछ नवीनतम शैक्षिक नवाचारों को साझा किया जो भविष्य में अनुभवात्मक शिक्षा की गहराई को बढ़ाने के लिए आ रहे हैं। वर्तमान कोविड -19 महामारी ने छात्रों को घर की चार दीवारों के भीतर बना दिया था और इन नवाचारों से स्कूलों को खुद को फिर से खोजने में मदद मिलेगी ताकि वे छात्रों के साथ जुड़ाव को बनाए रख सकें और उन्हें और मजबूत कर सकें।
इस वर्चुअल कार्यक्रम में दे हेरिटेज स्कूल की प्रबन्धन कमेटी के अध्यक्ष विक्रम स्वरूप ने स्कूल की स्थापना के बाद के कुछ यादगार पलों को याद किया। हेरिटेज ग्रुप ऑफ इन्टीट्यूशंस के चेयरमैन एच.के.चौधरी, चेयरमैन ने स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और उससे आगे तक समूह के विजन के बारे में बताया। स्कूल के अन्य ट्रस्टी सदस्यों ने भी शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों और कर्मचारियों को इस महत्वपूर्ण अवसर का जश्न मनाने के लिए एक विशेष स्कूल’ बनाने के प्रयासों के लिए बधाई दी। छात्रों ने वर्चुअल पुरस्कार वितरण समारोह का भी अनुभव किया जिसका वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। द हेरिटेज स्कूल की प्रिंसिपल सीमा सप्रू ने कहा, “हेरिटेज स्कूल मौजूदा पाठ्यक्रम को और गुणवत्तापरक बनाते हुए नये विषय ला रहा है। यह अलग – अलग क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए स्कूली शिक्षा को उत्कृष्ट बनाने में मदद करेंगे। हेरिटेज ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूशंस के सीईओ पी के अग्रवाल ने इस अवसर पर सबको बधाई दी। कार्यक्रम में द हेरिटेज स्कूल की हेडमिस्ट्रेस रूना चटर्जी, तथा द हेरिटेज स्कूल के हेडमास्टर डेरिल क्रिस्टोफर क्रिस्टेंसन समेत स्कूल के माता-पिता और शिक्षकों ने भी विचार रखे।
बीएचएस ने आयोजित किया 2021 -22 के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम
कोलकाता : बिड़ला हाई स्कूल में कक्षा 11 के शिक्षण सत्र की शुरुआत एक आभासी ओरिएंटेशन कार्यक्रम के आयोजन के साथ हो गयी। कार्यक्रम की स्कूल की प्रिंसिपल एल सैगल के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की, जिसमें उपस्थित लोगों को इस प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के सुचारू संचालन को संचालित करने वाले मार्गदर्शक लोगों से परिचित कराया गया। इसके बाद उन्होंने संबंधित कक्षा शिक्षकों, परामर्शदाताओं और विशेष शिक्षकों का परिचय कराया जो आगामी शैक्षणिक सत्र में छात्रों के लिए संपर्क का पहला बिंदु होंगे।
कोरोना से उत्पन्न कठिन परिस्थितियों को देखते हुए प्रिंसिपल सैगल ने छात्रों की जरूरतों के प्रति सशक्त होने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने समझाया कि आभासी सीखने के माहौल में, माता-पिता और शिक्षकों को छात्रों के साथ धैर्यपूर्वक बातचीत करनी चाहिए और उनकी विविध आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए। इसके साथ, उन्होंने सभी से अपनी भूमिकाओं की पहचान करने और इस शैक्षणिक वर्ष को सभी के लिए एक पुरस्कृत सत्र बनाने के लिए सहयोग करने का आग्रह किया। सीनियर सेकेंडरी सेक्शन की संयोजक, सुश्री एस मुखर्जी ने सीनियर सेक्शन के संचालन सम्बन्धी तथ्यों के साथ परीक्षा की संरचना की विस्तृत जानकारी दी जिससे विद्यार्थियों को कोई परेशानी न हो और सुनिश्चित किया कि वे क्यूमुलेटिव वेटेज पर आधारित मूल्यांकन प्रणाली, परीक्षा प्रक्रिया, ग्यारहवीं तथा बारहवीं के मार्क डिजाइन, विशेष कक्षाओं और पाठ्यक्रमों से जुड़ी जानकारी समझ सकें। इसके साथ ही स्कूल द्वारा आयोजित वेबिनारों की जानकारी भी उन्होंने दी।




