Saturday, July 4, 2026
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भाषा सेतु : गीत चतुर्वेदी की कविताओं का बांग्ला अनुवाद

अनुवादक – रेशमी सेन शर्मा

নীমের চারা (नीम का पौधा)
এটি একটি নিমগাছের চারা,
যাকে ঝুঁকে দেখো
আরেকটু ঝুঁকে দেখো,
তো একটি প্রকান্ড নিমগাছ মনে হবে/দেখতে পাব l
আরও ঝোঁক,আরেকটু,
মাটির সঙ্গে মিশে যাও l
তুমি ওর ছায়া পাবে/ছায়ার অনুভূতি পাবে l
একটি ছোট্ট মেয়ে জল দিয়ে দিয়ে এটিকে বড় করে তুলেছে
এর সবুজ পাতাগুলিতে এমন একটি তিক্ততা আছে ,
যা মুখের ভাষা কে মিষ্টতা শেখায়
যারা উচ্চতা কে ভয় পায়
তারা এসে এর নীচতা/লঘুতা র থেকে সাহস জুটাক

नीम का पौधा
यह नीम का पौधा है
जिसे झुक कर
और झुक कर देखो
तो नीम का पेड़ लगेगा
और झुको, थोड़ा और
मिट्टी की देह बन जाओ
तुम इसकी छाँह महसूस कर सकोगे

इसे एक छोटी बच्ची ने पानी दे-देकर सींचा है
इसकी हरी पत्तियों में वह कड़ुआहट है जो
ज़ुबान को मीठे का महत्त्व समझाती है
जिन लोगों को ऊँचाई से डर लगता है
वे आएँ और इसकी लघुता से साहस पाएँ

কথা বলার আগে ,( बोलने से पहले)
বুদ্ধিমান লোকেদের মতো করে কথা বলো,
নয়তো এমন কথা বলো,
যাতে মনে হয়,যে তুমি বুদ্ধিমান l
কথা বলার আগে,
ওই তরোয়ালগুলির ব্যাপারে/কথা ভাবো,
যারা জীভ কে ক্ষত বিক্ষত করে l
এটাও ভাবো,
যে একান্ত নীরবতার মাঝে,তোমার কর্কশ স্বর,
কাউকে অস্থির করে তুলতে পারে,
বহু সমাজে,কেবল একটি বাক্যই নিয়ে আসে ঝড় l
নিজেকে খুলে দিয়োনা,
কিন্তু খুলে কথা বলো,l
নিজের বুলিকে/কথাকে এইভাবে খুলে ধরো,
যে সে তারমধ্যে মিলিয়ে যাক
সে তোমাতে মিলিয়ে যাবে,তো তুমি বেঁচে যাবে l
কথা বলার আগে অনেকবার ভাবো,
তবুও বলা হয়ে গেলে উন্মুক্ত হয়ে যাও,
তরোয়ালগুলি ভেঙে যাবে l
( बोलने से पहले)

बुद्धिमान लोगों की तरह बोलो
नहीं तो ऐसा बोलो
जिससे आभास हो कि तुम बुद्धिमान हो

बोलने से पहले
उन तलवारों के बारे में सोचो
जो जीभों को लहर-लहर चिढ़ाती हैं

यह भी सोचो
कि कर्णप्रिय सन्नाटे में तुम्हारी ख़राश
किसी को बेचैन कर सकती है
कई संसारों में सिर्फ़ एक बात से आ जाता है भूडोल

खुलो मत
लेकिन खुलकर बोलो
अपने बोलों को इस तरह खोलो
कि वह उसमें समा जाए
वह तुममें समाएगा तो तुम बच जाओगे

बोलने से पहले ख़ूब सोचो
फिर भी बोल दिया तो भिड़ जाओ बिंदास
तलवारें टूट जाएँगी

কায়া/দেহ /শরীর (काया)
তুমি এতক্ষন ধরে আঁধারের দিকে চেয়েছিলে,
যে চোখের মণির রং কালো হয়ে গেছে,
বইগুলিকে এভাবে আষ্টেপৃষ্টে জড়িয়েছো,
যে শরীর যেন কাগজ হয়ে গেছে l
বলছিলে যে,
মৃত্যু আসে তো ওইভাবেই আসুক,
যেভাবে জলের কাছে আসে,
আর জল বাষ্প হয়ে যায় l
যেভাবে বৃক্ষের কাছে আসে,
আর বৃক্ষ দরজা হয়ে যায় l
যেভাবে আগুনের কাছে আসে,
আর আগুন ছাই হয়ে যায় l
তুমি গরুর থন হয়ে যেও,
আর দুধ হয়ে ঝরে পড়ো,
বাষ্প হয়ে বড়ো বড়ো ইঞ্জিন চালিয়ো l
ভাত রেঁধো ,
যেই পথ সর্বদা বন্দ থাকার জন্য অভিশপ্ত,
সেখানে দরজা হয়ে খুলো l
অসুস্থ মায়ের পালঙ্কের তলায় রাখা বাসন ছাই ঘষে মেজো
একটি দেশলাই কাঠি জ্বালিয়ো
আর সেটিকে অনেক্ষন ধরে দেখতে থেকো l

काया

तुम इतनी देर तक घूरते रहे अंधेरे को
कि तुम्हारी पुतलियों का रंग काला हो गया
किताबों को ओढा इस तरह
कि शरीर कागज़ हो गया

कहते रहे मौत आए तो इस तरह
जैसे पानी को आती है
वह बदल जाता है भाप में
आती है पेड़ को
वह दरवाज़ा बन जाता है
जैसे आती है आग को
वह राख बन जाती है

तुम गाय का थान बन जाना
दूध बनकर बरसना
भाप बनकर चलाना बड़े-बड़े इंजन
भात पकाना
जिस रास्ते को हमेशा बंद रहने का शाप मिला
उस पर दरवाज़ा बनकर खुलना
राख से मांजना बीमार माँ की पलंग के नीचे रखे बासन

तुम एक तीली जलाना
उसे देर तक घूरना

তাদের ব্যাপারে,যাদের আমি চিনিনা,
(उनके बारे में,जिन्हे मैं नहीं जानता)

আমি অনেক্ষন অবধি জেগে থাকি,
কখনো কখনো সকাল অবধি,
ঘরে পায়চারি করতে থাকি,
মেঝেতে ধূপধুপ আওয়াজ হয় l
যা নীচের ফ্ল্যাটে শোনা যায় ,
কেউ সেটা শুনে তার লয় তে ঘুমায় l
আমার জেগে থাকার ফলে/জাগরণে কেউ শান্তিতে ঘুমোতে পারে
তার ভয়,বিশ্বাস আর অন্ধকার , আমার কাছে অজ্ঞাত/অপরিচিত,
তার তৃষ্ণা আর চেষ্টাগুলিও আমার কাছে অজ্ঞাত /অপরিচিত,
তার কাশির আওয়াজে আমার ভেতরটা কেঁপে ওঠে ,
তার প্রতিটি গতি র সাথে আমার জড়তা নড়ে বসে l
কিছু জিনিষকে আটকানো যায়না,
যেমন কিছু শব্দ,বাক্য,বিচার আর রং,
কিছু হাসি কিছু রোদন,
প্রেম ও অভিমানের কিছু পৃথক মুহূর্ত,
যাদের আমরা বিশেষ চিনিনা,
তাদের চেনার প্রয়াসে,
চেনা মানুষগুলির আরও নিকটে চলে/পৌঁছে যাই,
আশেপাশে তাদের মতোই যেন কিছু খুঁজতে থাকি l
আর মনের ভেতর পুষে রাখিl
তাদের চিনে ফেলার,
এক বিনম্র ভ্রম l
उनके बारे में,जिन्हे मैं नहीं जानता

मैं जागता हूँ देर तक
कई बार सुबह तक
कमरे में करता हूं चहलक़दमी
फ़र्श पर होती है धप्-धप् की ध्वनि
जो नीचे के फ्लैट में गूँजती है
कोई सुनता है और उसकी लय पर सोता है
मेरी जाग से किसी को मिलती है सुकून की नींद

मैं नहीं जानता उसके भय, विश्वास और अंधकार को
उसकी तड़प और कोशिशों को
उसकी खाँसी से मेरे भीतर काँपता है कोई ढाँचा
उसकी करवट से डोलता है मेरा जड़त्व

कुछ चीज़ों को रोका नहीं जा सकता
जैसे कुछ शब्दों, पंक्तियों, विचारों और रंगों को
किसी हँसी किसी रुलाहट
प्यार और ग़ुस्से के पृथक क्षणों को
उन लोगों को भी जिनके बारे में हम ख़ास नहीं जानते
उन्हें जानने की कोशिश में
जाने हुए लोगों के और क़रीब आ जाते हैं
आसपास उनके जैसा खोजते हैं कुछ
और एक विनम्र भ्रांति सींचते हैं उन्हें जान चुकने की

(रेशमी विद्यार्थी हैं। प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है और अभी अनुवाद में डिप्लोमा कोर्स कर रही हैं। शुभ सृजन युवा की सदस्य रेशमी हमारी अनुवाद टीम का हिस्सा हैं।)

राज कुन्द्रा तो बॉलीवुड के घिनौने चेहरे का एक पन्ना भर हैं

बबीता माली

डबल पी से जुड़ा कुन्द्रा के आसमान पर जाने और धराशायी होने का रिश्ता

आज बिज़नेस टाइकून राज कुंद्रा सुर्खियों में छाये हुए हैं। आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के विवाद में फंसे राज कुंद्रा सोमवार को उस वक़्त फिर सुर्ख़ियों में आ गए जब मुंबई क्राइम ब्रांच ने उन्हें पॉर्नोग्राफी के मामले में गिरफ्तार किया। राज कुंद्रा का नाम उसलिए भी सुर्ख़ियों में है क्योंकि वो बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति हैं।

खैर मामला अभी एकदम गर्म है , यहाँ हम राज कुंद्रा के जीवन में ‘डबल पी ‘ के प्रभाव के बारे में बताने जा रहे हैं।  अब आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर यहाँ किस डबल ‘पी’ के बारे में बात की जा रही है।  तो में यहाँ सस्पेंस ख़त्म कर आपके जेहन में उठने वाले सवाल का जवाब पेश कर रही हूँ।

राज कुंद्रा के जीवन में डबल P यानी पश्मीना शॉल और पॉर्नोग्राफी से हैं।  पश्मीना शॉल ने जहाँ राज कुंद्रा को ऊंचाई पर पहुँचाया , मालामाल बनाया तो वहीं पॉर्नोग्राफी ने उन्हें जेल पहुँचाया। एक बस कंडक्टर का बेटा बिज़नेस टाइकून बन गया और फिर अर्श से सीधे फर्श पर पहुँच गया।

पश्मीना शॉल और राज कुंद्रा का सफर

बात उस वक़्त की है जब राज कुंद्रा केवल 18 साल के थे। वो अपने  परिवार के साथ लंदन में रहते थे। उनका परिवार मिडिल क्लास परिवार था। उनके पिता बालकृष्ण की बात करें तो वे मूल रूप से लुधियाना के रहने वाले थे लेकिन करीब 50 साल पहले वो लंदन में जा बसे।  राज कुंद्रा के पिता पहले एक कॉटन फैक्ट्री में काम करते थे और उनकी माँ एक शोरूम में काम करती थी। इसके बाद उनके पिता बस कंडक्टर बने। उनकी  उस वक़्त पटरी पर आयी जब उन्होंने किराने की दुकान खोली।  इसके बाद वो एक के बाद  दूसरे व्यवसाय करने लगे।

जब उनका एक व्यवसाय मंदा होता तब वो दूसरा व्यवसाय चुन लेते। वहीं, राज को पता था बचपन से ही उनके माता – पिता राज कुंद्रा और उनकी बहनों की परवरिश के लिए काफी मेहनत किया करते थे।  इसके कारण राज कुंद्रा को रुपये की अहमियत बचपन से ही थी। जब वो 18 साल के हुए तब उनके पिता ने उन्हें दो रास्तों में से एक चुनने को कहा। उनके पिता ने राज से कहा था , या तो वो उनके रेस्टोरेंट को ज्वाइन कर ले या 6 महीने में साबित करे कि वो खुद अपने पैरों पर खड़ा हो सकते हैं ।  राज कुंद्रा ने दूसरा रास्ता चुना और अपना बैग पैक कर निकल लिए।

उस वक़्त उनके पास 2000 यूरो का क्रेडिट कार्ड था जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत करीब 170000 हज़ार के आसपास थी।  क्रडिट कार्ड लेकर राज कुंद्रा दुबई गए और वहां हीरे व्यवसायियों से मिले और बिज़नेस करने की सोची लेकिन वहां उनकी बात नहीं बनी।

इसके बाद वहां से वे नेपाल चले गए। नेपाल में पश्मीना शॉल काफी बिकते थे जिनकी कीमत भी बेहद कम थी। यही से राज कुंद्रा ने पश्मीना शॉल का व्यवसाय करने का मन बना लिया था और राज कुंद्रा को यकीन था कि पश्मीना शॉल का व्यवसाय उन्हें अर्श तक पहुँचा देगा।

राज कुंद्रा ने वहां से 100 पीस पश्मीना शॉल खरीदी और उसे लेकर लंदन गए। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड के बड़े – बड़े क्लोथिंग ब्रांड के साथ संपर्क किया और उन्हें पश्मीना शॉल दिखाई जो उन क्लोथिंग ब्रांड को बेहद पसंद आयी। इसके बाद ही राज कुंद्रा का पश्मीना शॉल का व्यवसाय शुरू हो गया।

इस व्यवसाय से वो लंदन में बिज़नेस टाइकून बन गए। इसके बाद से राज कुंद्रा को पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा।  वहीं 2009 में मॉरीशस की कंपनी की मदद से राज कुंद्रा ने आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स खरीदकर उसके मालिक बन गए।

पॉर्नोग्राफी ने कर दिया सब बर्बाद, पहुँचा दिया हवालात 

वहीं अब पॉर्नोग्राफी के मामले में राज कुंद्रा को मुंबई क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया हैं।  मुंबई क्राइम ब्रांच सूत्रों ने बताया , फरवरी 2021 में राज कुंद्रा के खिलाफ पोर्न फिल्म बनाने और फिर उसे विभिन्न ऐप के जरिये पब्लिश करने का आरोप लगाकर मामला दर्ज कराया गया था।

अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी को अक्सर महँगे तोहफे दिया करते थे कुन्द्रा

उसी मामले की जांच में एक आरोपी उमेश कामत को गिरफ्तार किया गया था।  उससे पूछताछ में राज कुंद्रा का नाम सामने आया था।  इसके बाद जांच शुरू की गयी और राज कुंद्रा के खिलाफ सबूत मिले जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा और 11  लोगों को गिरफ्तार किया गया हैं। सभी 23 जुलाई तक पुलिस हिरासत में हैं।  सूत्रों की मानें तो पिछले डेढ़ सालों से राज कुंद्रा पॉर्नोग्राफी का धंधा चला रहे थे। पिछले साल लॉक डाउन के समय उन्होंने अपन ये धंधा शुरू किया था।

आरोप है कि इस धंधे से उन्हें रोजाना 3 -4 लाख की कमाई होती थी जो बाद में बढ़कर 7 -8 लाख तक हो गई थी। अब राज कुंद्रा जेल में है। उनके साथी भी जेल की हवा खा रहे हैं।  पुलिस उनके दफ्तर में तलाशी अभियान चला रही हैं।  एक तलाशी अभियान में पुलिस को कुछ हार्डडिस्क मिली हैं जिसकी जांच की जा रही हैं।

ऐसे होता था काम 

‘हॉटशॉट ‘ नाम के ऐप के जरिये इस वीडियो को चलाया जाता था।  दरअसल , सूत्रों ने बताया , पुलिस को जाँच में पता चला मॉडल को वेब सीरीज या शार्ट फिल्म में काम दिलाने के बहाने ऑडिशन के लिए बुलाया जाता था और इसके बाद उनसे न्यूड वीडियो बनवाये जाते थे।

हालाँकि , इस मामले में एक प्रख्यात यूट्यूबर  ने भी खुलासा किया कि उसे भी हॉटशॉट के लिए राज कुंद्रा ने बुलाया था।  इसके अलावा उनकी गिरफ़्तारी के बाद कई और मॉडल ने राज पर आरोप लगाए हैं। इस ऐप के सब्सक्राइबर से मिलने वाले रुपये को मेंटेनेंस खर्च दिखाया जाता था और फिर विभिन्न अकाउंट से होते हुए राज कुंद्रा के अकाउंट में रुपये आते थे।

फिलहाल , पुलिस राज कुंद्रा के बैंक अकाउंट की जांच कर रही हैं।  बैंक से इस बारे में जानकारी मांगी गयी है।

बॉलीवुड में किसी ने जताया विरोध तो किसी ने किया समर्थन

वहीं बॉलीवुड से भी किसी ने विरोध जताया तो किसी ने राज कुंद्रा को सपोर्ट किया। हमेशा से मुखर होने वाली एक्ट्रेस कंगना रनौत भी इस मामले में चुप नहीं रही और उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी।  उन्होंने इंस्टाग्राम में पोस्ट कर कहा , इसलिए  मैं बॉलीवुड को गटर कहती हूँ।

हर चमकने वाली चीज़ सोना नहीं होती। मैं अपनी आगामी प्रोडक्शन फिल्म टीकू वेड्स शेरू के जरिये बॉलीवुड को बेनकाब करने जा रही हूँ। वहीं सिंगर मीका सिंह , ड्रामा क्वीन राखी सामंत सहित अन्य ने राज कुंद्रा का समर्थन किया हैं।

 

अनुमान : देश में 2030 तक 15 बिलियन डॉलर का होगा ओटीटी उद्योग

कोलकाता : भारत में ओटीटी उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2030 तक भारत में यह उद्योग 15 बिलियन अमरीकी डॉलर का हो जायेगा। माना जा रहा है कि मनोरंजन के पारम्परिक माध्यमों को यह क्षेत्र पीछे छोड़ देगा। 2020 वित्त वर्ष में ओटीटी बाजार 1.7 बिलियन अमरीकी डॉलर का था जिसमें ऑडियो और वीडियो, दोनों शामिल थे। घरेलू स्वतंत्र लेनदेन सलाहकार फर्म आरबीएसए एडवाइजर्स का मानना ​​है कि इस उद्योग में अगले 9 से 10 वर्षों में यूएस $ 15 बिलियन का उद्योग बनने की क्षमता है।
बेहतर नेटवर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन तक पहुंच के साथ, भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म ने समवर्ती आधार पर ग्राहकों को तेजी से आकर्षित किया है। डिज्नी प्लस हॉटस्टार, अमेज़ॅन प्राइम वीडियो और नेटफ्लिक्स जैसे शीर्ष पसंदीदा के अलावा, स्पेस में कई स्थानीय और क्षेत्रीय ओटीटी खिलाड़ी, जैसे -सोनी लीव, वूट, जी 5. इरोज नाउ, एएल बाला जी. होईचोई और अड्डा टाइम्स भी लोकप्रिय हैं। राजीव शाह, एमडी और सीईओ आरबीएसए एडवाइजर्स, “कोविड -19 ने दर्शकों के मीडिया का उपभोग करने के तरीके को बदल दिया है। इस अवधि में ओटीटी को अपनाने के साथ एक निर्विवाद प्रवृत्ति सामने आई। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध पसंद की सामग्री के लिए बढ़ते बाजार और उपभोक्ता की भूख ने इसे बढ़ावा दिया। तेजी। ओटीटी उपभोक्ता अनुभव से पहले कभी नहीं प्रदान करते हैं- सामग्री का विकल्प, पहुंच में आसानी, डिवाइस/माध्यमों की पसंद (हैंड फोन, लैपटॉप, टैबलेट या टीवी स्क्रीन), उदार सेंसरशिप नीति।” शाह कोरोना और लॉकडाउन को इस सफलता का श्रेय देते हैं।
एनवी कैपिटल के सह-संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर विवेक मेनन कहते हैं, “चीन में अंतरराष्ट्रीय ओटीटी खिलाड़ियों के अत्यधिक विनियमित वातावरण को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय ओटीटी खिलाड़ियों के ग्राहक आधार को बढ़ाने के लिए भारत अमेरिका के बाद अगला गढ़ है। इसके साथ ही कॉमकास्ट के स्वामित्व वाले “पीकॉक” और एचबीओ जैसे कई अंतरराष्ट्रीय प्रवेशकर्ता भारत में अपनी पहचान बनाने के लिए बाड़ पर बैठे हैं। इस प्रवृत्ति के साथ-साथ घरेलू ओटीटी प्रदाताओं के तेजी से बढ़ने को देखते हुए, यह उद्योग आने वाले वर्षों में अपनी मजबूत विकास गति को जारी रखेगा।
सामग्री की गुणवत्ता हमेशा उपभोक्ता वृद्धि का एक महत्वपूर्ण चालक बनी रहेगी। हाल के वर्षों में, हमने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली मूल सामग्री में भारी वृद्धि देखी है। मूल सामग्री बनाने और द्वि घातुमान देखने की सुविधा के अलावा, नेटवर्क और प्रोडक्शन हाउस ने भी लाइव इवेंट और प्रदर्शन के अधिकार प्राप्त करने में मूल्य देखना शुरू कर दिया है। भारत में दर्शकों ने हाल ही में फिल्मफेयर और स्ट्रीमिंग सोशल नेटवर्क्स को पहली बार ओटीटी पुरस्कारों के लिए शामिल होते देखा। यह भारत के मीडिया और मनोरंजन उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक घटना थी।
ओटीटी सेवाओं जैसे नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन, डिज़नी + हॉटस्टार और अन्य द्वारा मूल और साथ ही अधिग्रहित सामग्री में किए गए बड़े निवेश से सब्सक्रिप्शन वीडियो-ऑन-डिमांड को कुल ओटीटी राजस्व का एक बड़ा हिस्सा बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, ओटीटी परिदृश्य में विकास की अगली लहर टियर 2,3,4 शहरों और भारतीय भाषा बोलने वाली आबादी से आएगी।
ओटीटी उद्योग की सफलता के कारक
• भारत में दुनिया में ऑनलाइन वीडियो की प्रति व्यक्ति खपत दूसरे स्थान पर है
• दुनिया में सबसे सस्ता मोबाइल डेटा 18.5/GB (2015 – INR313/GB) पर
• ग्रामीण इंटरनेट पहुंच में वृद्धि
• भारत में स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या खगोलीय दर से बढ़ रही है। मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडिया ट्रैफिक इंडेक्स (एमबिट) 2021 के अनुसार, भारत में प्रति उपयोगकर्ता औसत मासिक डेटा उपयोग दिसंबर 2020 में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़कर 13.5 जीबी हो गया, क्योंकि भारतीयों ने स्मार्टफोन पर रोजाना लगभग पांच घंटे बिताए।
• किफायती डेटा वाले स्मार्टफोन ने टियर 2, 3, 4 शहरों से 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं के जीवंत देशी वक्ताओं को भी ऑनलाइन ला दिया है और एक व्यापक अवसर पैदा किया है।
• ओटीटी परिदृश्य में विकास की अगली लहर हमारे अपने टियर 2,3,4 शहरों और भारतीय भाषा बोलने वाली आबादी से आएगी।
• पिछले कुछ वर्षों में भारतीय उपभोक्ताओं की देखने की आदतों में काफी वृद्धि हुई है। एक ओर जहां स्मार्टफोन और सोशल प्लेटफॉर्म पर शॉर्ट-फॉर्म वीडियो कंटेंट की खपत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म पर द्वि घातुमान शो देखना भी आम हो गया है।

बेटा केन्द्रीय राज्यमंत्री और स्वाभिमानी माता – पिता करते हैं मजदूरी

पड़ोसियों से मिली बेटे के मंत्री बनने की खबर
कोलकाता : हाल ही में मोदी मंत्रिमण्डल का विस्तार हुआ है और कई नये चेहरे दिखे हैं। इनमें से एक चेहरा है भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष एल मुरुगन का, जिनको राज्यमंत्री बनाया गया है। 44 वर्षीय के मुरुगन ने लंबे संघर्ष के बाद दिल्ली तक का सफर तय किया है। मगर यहाँ हम मुरुगन की नहीं बल्कि उनके पिता की बात कर रहे हैं जिनकी सादगी इन दिनों चर्चा में है। केंद्रीय राज्यमंत्री एल मुरुगन के माता-पिता राजनीति की चकाचौंध से दूर तमिलनाडु के नामक्कल जिले के कोन्नूर गांव में मजदूरी करते हैं। मुरुगन के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद जब मीडिया उनके घर पहुंची तो उनके माता-पिता से दिल्ली से करीब 2500 किलोमीटर दूर नमाक्कल के कोन्नूर गांव में काम कर रहे थे। कड़ी धूप में 59 वर्षीय माँ एल वरुदम्मल एक खेत से खर-पतवार निकाल रही हैं। लाल साड़ी, चोली के ऊपर सफेद शर्ट पहने और सिर पर लाल गमछा लपेटे वरुदम्मल की सूरत गांव में रहने वाली किसी भी आम महिला जैसी है। पास के ही एक खेत में 68 साल के पिता लोगनाथन जमीन समतल करने में लगे हैं। दोनों को देखकर यह अंदाजा बिल्कुल नहीं होगा कि वे एक केंद्रीय मंत्री के माता-पिता हैं। मीडिया को इन दोनों से बात करने के लिए खेत के मालिक से इजाजत लेनी पड़ी।
बेटे पर नाज लेकिन खुद्दारी बरकरार
बेटा एल मुरुगन मोदी सरकार में राज्यमंत्री बना है, लेकिन मां-बाप अब भी खेतों में पसीना बहा रहे हैं। दरअसल, एल मुरुगन दलित हैं और वो अरुणथातियार समुदाय से आते हैं। गांव में उनका छोटा सा घर है। माता-पिता को जब भी काम मिलता है, वो कर लेते हैं। कभी खेतों में मजदूरी, तो भी बोझ ढोने का काम। जब पड़ोसियों से बेटे के मंत्री बनने की खबर मिली, तब भी दोनों खेत में काम कर रहे थे। बेटे के मंत्री बनने की खबर सुनने के बाद भी दोनों रुके नहीं लगातार काम करते रहे। मां-बाप को अपने बेटे की कामयाबी पर गर्व तो है, लेकिन दोनों को अपने बेटे से अलग जिंदगी पसंद है, पसीना बहाकर कमाई रोटी खाना अच्छा लगता है।
केंद्रीय मंत्री मुरुगन के पिता ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई में बहुत अच्छा था। शुरुआत में सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। फिर बाद में मुरुगन ने चेन्नई के आंबेडकर लॉ कालेज से कानून की पढ़ाई की। पिता को बेटे की पढ़ाई के लिए दोस्तों में पैसे उधार लेने पड़े थे।  मुरुगन ने भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष बनने के बाद चेन्नई में अपने माता-पिता को साथ रहने के लिए बुलाया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद वे लौट गए। मुरुगन की मां ने कहा, ”हमलोग कभी-कभी तीन-चार दिनों के लिए चेन्नई जाते थे, लेकिन उसकी व्यस्तता में हम फिर नहीं हो पाए। इस लिए हमलोग फिर से अपने गांव कोन्नूर आए।”
बताया जा रहा है कि एल मुरुगन ने मंत्री बनने के बाद अपने माता-पिता को फोन किया था। तब इन दोनों ने उनसे पूछा था कि क्या तमिलनाडु भाजपा इकाई के अध्यक्ष पद से उनका मौजूदा पद बड़ा है। मुरुगन के माता-पिता कहने हैं, ‘हमारा बेटा बड़े पद पर पहुँच गया है। माँ-बाप के तौर पर हमारे लिए ये बड़ी उपलब्धि है।
मुरुगन के पास दो-दो मंत्रालयों का है प्रभार
केंद्रीय मंत्री मुरुगन के पास केंद्र में मत्स्य पालन, पशुपालन और सूचना तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय है। उन्हें दोनों विभागों में राज्य मंत्री बनाया गया है। मुरुगन ने 7 जुलाई को बाकी नए सदस्यों संग शपथ ली थी। वह इस साल विधानसभा चुनाव लड़े थे मगर डीएमके उम्मीदवार से हार गए।

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में वेबिनार

कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल ने हाल ही में काम और जीवन के सन्तुलन पर एक वेबिनार आयोजित किया। इस मौके पर वक्ता के रूप में उपस्थित मनोचिकित्सक सलाहकार तथा जीवन प्रशिक्षक यानी कन्सल्टेंट साइक्रिआर्टिस्ट लाइफ कोच डॉ. इरा दत्ता और ऑर्थियोपैडिक स्पाइन सर्जन शुमायू दत्ता ने महामारी के दौरान शिक्षकों के वर्क फ्रॉम होम के कारण होने वाली शारीरिक तथा भावनात्मक समस्याओं पर बात की। इस वेबिनार में कोलकाता के प्रख्यात स्कूलों, लक्ष्मीपत सिंघानिया अकादमी, श्री शिक्षायतन स्कूल, बिड़ला हाई स्कूल, सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल, बिड़ला हाई स्कूल, मुकुन्दपुर, इंडस वैली वर्ल्ड स्कूल, गोखले मेमोरियल गर्ल्स स्कूल ने भाग लिया। वेबिनार में काम और जीवन के बीच सन्तुलन बनाने के तरीके विद्यार्थियों ने सीखे।

 

हेरिटेज लॉ कॉलेज, कोलकाता में पहला मूट कोर्ट आयोजित

कोलकाता : हेरिटेज लॉ कॉलेज, कोलकाता ने पहला मूट कोर्ट कम्प्टीशन वर्चुअल माध्यम पर आयोजित किया। यह मूट कोर्ट देश के पूर्व अटार्नी जनरल पद्मविभूषण सोली जहाँगीर सोराबजी की स्मृति में आय़ोजित किया गया। प्रतियोगिता को क्रिमिनल और कॉरपोरेट लॉ के जानकार अधिवक्ता सब्यसाची बनर्जी ने सम्बोधित किया। प्रतियोगिता का विषय था ‘अग्रिम जमानत के मामले में और आपराधिक अभियोजन को रद्द करने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के तहत उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्ति से सम्बन्धित था। विद्यार्थियों को अदालतों की कार्यवाही से जुड़े व्यावहारिक मसलों की जानकारी मिली। प्रतियोगिता का समापन पुरस्कार वितरण के साथ हुआ। हेरिटेज लॉ कॉलेज, कोलकाता के प्रिंसिपल प्रो. डॉ. एस. एस, चटर्जी ने इस कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए सीखने वाला अनुभव बताया।

भारत जैन महामंडल लेडीज विंग कोलकाता का ‘सुरंगों सावन’

कोलकाता : भारत जैन महामडल लेडिज विंग कोलकाता ‘सुरंगों सावन’ जूम लहरिया थीम पर मनाया। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में डॉ. वसुन्धरा मिश्र उपस्थित थीं। सभी सदस्याओं ने शानदार प्रदर्शन किया। नाच ,गाना, कैटवाग, कविता आदि आदि। सभी सदस्याओं के सुन्दर प्रदर्शन ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में प्रथम स्थान अंजू सुराणा, दूसरा नीलम दूगड़ तीसरा सुनीता सेठिया का रहा। चेयरपर्सन सरोज भसाली (डूगरगढ) ने नवकार महामन्त्र से कार्यक्रम की शुरूआत की। वाइस चेयरपर्सन अंजू सेठिया (डूगरगढ़) ने कुशलतापूर्वक संचालन किया। भाग लेने वाली सदस्याओं में सज्जन भसाली, रेशम दूगड़, सुनीता सेठिया, कांता नाहटा,कंचन बैद, नीलम दूगड़, अंजू सुराणा, ममता पीचा, सुषमा छाजेड़,रूबी गोलछा आदि शामिल थीं।

साहित्य संवाद के तहत काव्यपाठ आयोजित

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से साहित्य संवाद श्रृंखला के अंतर्गत काव्यपाठ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से कवियों ने हिस्सा लिया। चर्चित कवि विजयबहादुर सिंह ने कहा कि यह आयोजन नई प्रतिभाओं का मंच है। उन्होंने’ अर्द्धसत्य का संगीत’ कविता के जरिए सत्ता के त्रिशूल की बर्बरता का जिक्र किया। वे अपनी कविताओं में आदमियत और प्रतिरोध की बातें कहते हैं। मुम्बई से डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता ने ‘हुआ जो इश्क हमको वो यकीनन दफअतन होगा, तुम्हारे देश में कुछ तो मुहब्बत का चलन होगा’ का पाठ कर समां बांध दिया। राज्यवर्धन की कविताओं में धरती और लोकतंत्र को बचाने की बेचैनी दिखी। निर्मला तोदी ने अपनी कविताओं में जीवन के कई रूपों का कोलाज प्रस्तुत किया। शहंशाह आलम (पटना) ने ‘फफूंद’ और ‘भाषा’ कविता के माध्यम से तत्कालीन व्यवस्था पर प्रहार किया। राजकिशोर राजन (पटना) ने प्रेमचंद के गोदान की आयरनी पर अच्छी कविता का पाठ किया। शशि कुमार शर्मा (वर्द्धमान विश्वविद्यालय) ने पर्यावरण और स्त्री की अवस्था पर केंद्रित कविताओं का पाठ किया। कलावती कुमारी (आर. बी. सी. सांध्य कॉलेज) ने प्रेम, लोकतंत्र और स्त्री विमर्श की कविताओं को प्रस्तुत किया। नागेंद्र पंडित (आई. वो. सी. एल.) ने एक पिता के मन के आकाश को ऊंचाई दिया। अक्षत डिमरी  (आईआईटी खड़गपुर) ने ‘कोयल पर लगे बंधन, गीत कौवे गा रहे हैं’ की गीतात्मक प्रस्तुति दी। सूर्यदेव राय ने देश की वर्तमान स्थिति और प्रेम पर प्रभावी कविताएं सुनाई। पार्वती पंडित (काजी नजरुल विश्वविद्यालय) ने धर्म और राजनीति संबंधी कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि यदि हमारा कविता से लगाव है तो इसका अर्थ है कि हमारा लगाव जीवन से है। कविता हमें अहिंसक बनाती है। स्वागत वक्तव्य देते हुए प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि साहित्य संवाद का यह आयोजन सृजनात्मकता की पहल है। इस अवसर पर रामनिवास द्विवेदी, उदयभानु दुबे, अल्पना नायक, श्रीकांत द्विवेदी, जयराम पासवान, आदित्य गिरि,रामप्रवेश रजक,ज्योतिमय बाग सहित भारी संख्या में साहित्य और संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन राहुल गौड़ किया। तकनीकी सहयोग मधु सिंह,उत्तम ठाकुर और रूपेश यादव ने दिया।

अलीपुर चिड़ियाघर में जन्मे एनाकोंडा के 9 बच्चे

बबीता माली

ग्रीन एनाकोंडा लाने की तैयारी में चिड़ियाघर प्रबन्धन

कोलकाता: कोलकाता में अलीपुर चिड़ियाघर बहुत ही प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। अगर कोई कोलकाता घूमने के लिए आते हैं तो वे एक बार इस चिड़ियाघर को देखने जरूर आते हैं। अलीपुर चिड़ियाघर कोलकाता के बीच में स्थित है और यहाँ पहुंचने के लिए किसी को भी कोई परेशानी नहीं होती है। अभी कोरोना महामारी चल रही हैं और उसके प्रकोप से अलीपुर चिड़ियाघर भी अछूता नहीं है।  कोरोना और लॉक डाउन के कारण मई महीने से ही फिर से अलीपुर चिड़ियाघर दर्शकों के लिए बंद है लेकिन इस लॉक डाउन में भी चिड़ियाघर में खुशियां आयी है। इस बार अलीपुर चिड़ियाघर में एनाकोंडा के 9 बच्चों ने जन्म लिया है। इन बच्चों के जन्म के साथ ही अलीपुर चिड़ियाघर में एनाकोंडा की संख्या 20 हो गई हैं। इसके कारण कोलकाता का अलीपुर चिड़ियाघर देश का दूसरा ऐसा चिड़ियाघर बन गया है जहाँ एक साथ इतने एनाकोंडा हैं।  ये सभी एनाकोंडा येलो एनाकोंडा हैं। इन बच्चों के जन्म से चिड़ियाघर प्रबंधन में ख़ुशी की लहर है।  शनिवार को इसकी खबर मीडिया को दी गई।  इसके बाद से ही अलीपुर चिड़ियाघर सुर्ख़ियों में आ गया है।

11 जुलाई को एनाकोंडा के दो जोड़े ने दिया बच्चों को जन्म 

इस मामले में अलीपुर चिड़ियाघर के निदेशक आशीष कुमार सामंत ने बताया , चिड़ियाघर में एनाकोंडा के 9 बच्चों ने जन्म लिया है जो बहुत ही ख़ुशी की बात है।  चिड़ियाघर में वर्ष 2019 में मद्रास के चिड़ियाघर से 4 एनाकोंडा मंगवाए गए थे।  पिछले वर्ष एनाकोंडा के 7 बच्चों ने जन्म लिया था।

इस बार मद्रास से लाये गए उन चार एनाकोंडा ने 11 जुलाई को 9 बच्चों को जन्म दिया। इन सभी बच्चों का वजन 100 – 150 ग्राम है (प्रति बच्चा) हैं।  इनकी लम्बाई करीब 8 फुट है।  चिड़ियाघर के निदेशक ने बताया , हमारे यहाँ एनाकोंडा के प्रजनन की सारी सुविधाएं हैं जिसके कारण ये एनाकोंडा तेजी से बच्चा पैदा कर पा रहे हैं।

सभी बच्चे स्वस्थ्य हैं। ये सभी येलो एनाकोंडा है।  येल्लो एनाकोंडा के इतने सारे बच्चों के इस चिड़ियाघर में होने से हमारा चिड़ियाघर दूसरे नंबर पर आ गया है।  उन्होंने बताया , मद्रास ज़ू में येलो एनाकोंडा की संख्या सबसे ज्यादा हैं।  अब हमारा चिड़ियाघर इस ज़ू के बाद देश का दूसरा चिड़ियाघर बन गया है जहाँ 20 येलो एनाकोंडा है।

उन्होंने बताया , इन बच्चों में कितने नर और मादा है , इसका पता नहीं चल पाया है।  इन्हें अभी छुआ नहीं गया हैं।  कुछ दिनों बाद बड़े होने पर इनकी जांच कर पता लगाया जायेगा कि इनमें कितने नर और कितना मादा एनाकोंडा हैं।  वहीं , अभी इन्हें बहार एनक्लोजर में नहीं रखा जायेगा।  लॉक डाउन हटने अपर जब चिड़ियाघर खुलेगा तब दर्शकों के लिए इन्हें बाहर एनक्लोजर में रखा जायेगा।

ग्रीन एनाकोंडा लाने की तैयारी में है अलीपुर चिड़ियाघर 

अलीपुर चिड़ियाघर के निदेशक आशीष कुमार सामंत ने बताया , जल्द ही हम ग्रीन एनाकोंडा लाने की योजना बना रहे हैं।  ग्रीन एनाकोंडा और येलो एनाकोंडा दोनों ही विदेशी प्राणी हैं।  ग्रीन एनाकोंडा , येलो एनाकोंडा की तुलना में ज्यादा एग्रेसिव होते हैं।

ग्रीन एनाकोंडा की लम्बाई 30 फुट होती हैं तो वहीं येलो एनाकोंडा की लम्बाई 20 – 22 फुट तक होती है। उन्होंने कहा , ग्रीन एनाकोंडा मैसूर और नंदन कानन में है।  अगर हम ग्रीन एनाकोंडा ले आते है तो हमारा चिड़ियाघर तीसरे नंबर पर होगा।

मल्लेश्वरम के सरकारी स्कूल में बच्चे कोडिंग में निपुण, स्कूल बनेगा सैटेलाइट

बेंगलुरू : बेंगलुरू का मल्लेश्वरम सरकारी बॉयज हाई स्कूल एक मिसाल है, इसीलिए इसे 75 सैटेलाइट बनाने के लिए चुना गया है। ये सैटेलाइट अगले साल आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर लॉन्च होंगे। स्कूल प्रिसिंपल लीला जीपी इसकी सबसे बड़ी वजह यहाँ की हाईटेक अटल टिंकरिंग लैब को बताती हैं। कर्नाटक में इस तरह की लैब वाले सिर्फ तीन स्कूल हैं। लीला बताती हैं कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में यहां के छात्रों के कुछ प्रोजेक्ट शीर्ष-50 में चुने गए थे। इसी वजह से स्कूल को केंद्र सरकार और नीति आयोग की ओर से अटल टिंकरिंग लैब मिली थी। यह लैब सभी बच्चों के लिए है, चाहे वो बच्चा किसी दूसरे स्कूल का क्यों न हो। यहां लगातार प्रयोग चलते हैं। लॉकडाउन के दौरान कुछ परेशानियां हुई थीं, लेकिन अब बच्चे यहां आकर कई तरह के वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लेते हैं। सीखते हैं। जूनियर्स को सिखाते भी हैं। इसमें आईटी कंपनी डेल तकनीकी मदद कर रही है। सॉफ्टवेयर भी दे रही है। इंडियन टेक्नोलॉजिकल कांग्रेस एसोसिएशन और इसरो लगातार स्कूल के संपर्क में हैं। स्कूल के अच्छे प्रदर्शन में शिक्षणा फाउंडेशन और सीएन अश्वत्नारायण फाउंडेशन जैसे एनजीओ का भी अहम योगदान है। इन्होंने लॉकडाउन के दौरान स्कूल के 1000 गरीब बच्चों को उच्च क्षमता वाले टैब दिए। शिक्षणा फाउंडेशन के नवीन बताते हैं कि जल्द ही स्कूल के हर पांचवें छात्र को हाई एंड लैपटॉप दिया जाएगा। फाउंडेशन के चेतन जैसे सदस्य सीधे छात्रों से जुड़कर उनको गाइड करते हैं। लैब इंचार्ज मैत्रा एसपी वो शख्स हैं, जो इस प्रोजेक्ट के चलते सालभर व्यस्त रहने वाली हैं। वे कहती हैं लोग यहां आकर बच्चों की प्रतिभा देख सकते हैं। खासतौर पर कोडिंग के संदर्भ में। यहां बच्चों में कोडिंग की समझ इंजीनियरों जैसी है।
सैटेलाइट प्रोजेक्ट में शामिल 10वीं कक्षा का अमित झारखंड के बोकारो से है। अमित की मां घरों में काम करती हैं और पिता मजदूरी। लेकिन, अमित इसी सरकारी स्कूल में रहते हुए कोडिंग में पारंगत हो चुका है। बढ़िया अंग्रेजी बोलता है। इसी तरह छात्र शिव कुमार लगातार साइंस प्रोजेक्ट से जुड़ा है। ये बच्चे कंप्यूटर इंजीनियर बनने की तैयारी अभी से शुरू कर चुके हैं। लड़कों के इस स्कूल में लड़कियों को भी दाखिला दिया जा रहा है
बेहतरीन शिक्षा सभी का हक है, इसको ध्यान में रखते हुए लड़कों के इस स्कूल में अब लड़कियों को भी प्रवेश दिया जा रहा है। सैटेलाइट प्रोजेक्ट पर 8वीं से 10वीं के बच्चे काम करेंगे। प्रोजेक्ट में लड़कियों को भी शामिल किया जाएगा।