Friday, October 30, 2026
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ब्रह्मोस मिसाइल के आधुनिक संस्करण का सफल परीक्षण

नयी दिल्ली । भारत ने आधुनिक सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल के नये संस्करण का भारतीय नौसेना के गुप्त तरीके से निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोत से सफल परीक्षण-प्रक्षेपण किया। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने कहा कि मिसाइल ने सटीक तरीके से निर्धारित लक्ष्य पर निशाना साधा। डीआरडीओ ने ट्वीट किया, ‘‘ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के समुद्र से समुद्र में प्रहार करने वाले आधुनिक संस्करण का आज आईएनएस विशाखापत्तनम से परीक्षण किया गया। मिसाइल ने निर्धारित लक्ष्य पर सटीक तरीके से निशाना साधा।’’
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मिसाइल के सफल प्रक्षेपण से भारतीय नौसेना की ‘मिशन संबंधी तैयारियों’ की दृढ़ता स्पष्ट हुई है।
उन्होंने ट्वीट कर भारतीय नौसेना और डीआरडीओ को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। भारत-रूस का संयुक्त उपक्रम ‘ब्रह्मोस एयरोस्पेस’ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का उत्पादन करता है जिन्हें पनडुब्बियों, जलपोतों, विमान या भूतल पर स्थित प्लेटफॉर्मों से प्रक्षेपित किया जा सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल 2.8 मैक या ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना रफ्तार से प्रक्षेपित हो सकती हैं।

भारत के लिए चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सेवाओं में सम्भावना है : आर चंद्रशेखर

नयी दिल्ली । इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री आर चंद्रशेखर ने कहा कि भारत अगले 5-7 वर्षो में अपनी मुख्य क्षमता के अलावा अर्धचालक (सेमीकंडक्टर) डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवाओं जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों का दोहन कर सकता है।
माइक्रोसॉफ्ट के कार्यक्रम ‘फ्यूचर रेडी’ में मंत्री ने कहा कि कंप्यूटिंग प्रदर्शन की अगली लहर सॉफ्टवेयर महत्तम उपयोग (ऑप्टिमाइजेशन), सेमीकंडक्टर डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और नवीन खोजों से आने वाली है। उन्होंने कहा, ‘‘… हम सिर्फ सॉफ्टवेयर प्रदाता हुआ करते थे और अब हम अगले पांच से सात वर्षों में हार्डवेयर प्रदाता बन सकते हैं, हम सेमीकंडक्टर डिजाइन प्रदाता हो सकते हैं। हम ‘ई-आरएंडडी’ प्रदाता हो सकते हैं। हम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, डिजाइन प्रदाता हो सकते हैं और हम इलेक्ट्रॉनिक, विनिर्माण सेवा प्रदाता हो सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 15-20 वर्षों से हमारी जो मुख्य क्षमता रही है, उसके आगे भी अवसरों का एक नया क्षितिज है।’’ चंद्रशेखर ने कहा कि देश में 1,000 अरब डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था के निर्माण का लक्ष्य उद्योग, उद्यमियों और शिक्षाविदों के साथ साझेदारी में हासिल किया जाएगा।
बढ़ते डिजिटलीकरण के बीच उपयोगकर्ता डेटा सुरक्षा के बारे में बात करते हुए, चंद्रशेखर ने कहा कि भारत में इंटरनेट हमेशा खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह रहेगा।

वीवो की जगह टाटा समूह बना आईपीएल का प्रायोजक

नयी दिल्ली । भारत के सबसे बड़े व्यवसाय समूह में से एक टाटा समूह इस साल से चीनी मोबाइल निर्माता कंपनी वीवो की जगह आईपीएल का प्रायोजक होगा । आईपीएल की संचालन परिषद ने गत मंगलवार को हुई बैठक में यह फैसला किया । आईपीएल अध्यक्ष बृजेश पटेल ने बताया ,‘‘ हां , टाटा समूह अब आईपीएल का प्रायोजक होगा ।’’वीवो ने 2018 से 2022 तक आईपीएल के प्रायोजन अधिकार 2200 करोड़ रूपये में खरीदे थे लेकिन गलवान घाटी में 2020 में भारत और चीन के बीच सैन्य टकराव के बाद वीवो ने एक साल का ब्रेक लिया था । उसकी जगह ड्रीम 11 प्रायोजक था । वीवो 2021 में फिर प्रायोजक बना हालांकि अटकलें लगाई जा रही थी कि वे उचित बोली लगाने वाले को अधिकार का हस्तांतरण करना चाहते हैं और बीसीसीआई ने इसका समर्थन किया ।

बोपन्ना-रामकुमार ने जीता एडीलेड इंटरनेशनल का खिताब

एडीलेड । एटीपी टूर पर पहली बार जोड़ी बनाकर खेल रहे भारत के रोहन बोपन्ना और रामकुमार रामनाथन ने इवान डोडिग और मार्सेलो मेलो की शीर्ष वरीय जोड़ी को सीधे सेटों में हराकर उलटफेर करते हुए एडीलेड इंटरनेशनल टेनिस टूर्नामेंट का पुरुष युगल खिताब जीता।
भारत की गैरवरीय जोड़ी ने एक घंटे और 21 मिनट में 7-6 (6) 6-1 से जीत दर्ज की। भारतीय जोड़ी ने चारों ब्रेक प्वाइंट बचाए जबकि दो बार विरोधी जोड़ी की सर्विस तोड़ी। यह बोपन्ना का 20वां एटीपी युगल खिताब और रामकुमार के साथ पहला खिताब है। रामकुमार इस स्तर पर सिर्फ दूसरा फाइनल खेल रहे थे। वह 2018 में हॉल आफ फेम टेनिस चैंपियनशिप में उप विजेता रहे थे।
बोपन्ना ने कहा, ‘‘जब रामकुमार आपके साथ सर्विस कर रहा हो तो आप जल्दी अंक जीत सकते हो इसलिए यह फायदे की स्थिति है।’किसी अन्य हमवतन और बायें हाथ के खिलाड़ी दिविज शरण की तुलना में रामकुमार के साथ खेलना किस तरह अलग है, इस बारे में पूछने पर बोपन्ना ने कहा, ‘‘दिविज के साथ हमें अंक का मौका बनाना पड़ता है, सुनिश्चित करना होता है कि पहली वॉली पर मिलने वाले मौके को भुनाया जाए जबकि राम के साथ अंक जल्दी हासिल किया जा सकता है।’’
बोपन्ना और रामकुमार इस खिताबी जीत के लिए इनामी राशि के रूप में 18700 डॉलर बांटेंगे जबकि प्रत्येक को 250 रैंकिंग अंक मिले। ऑस्ट्रेलियाई ओपन क्वालीफायर से पहले इस जीत से रामकुमार का आत्मविश्वास बढ़ेगा। वह एक बार फिर ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के एकल वर्ग के मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने के लिए चुनौती पेश करेंगे।
बोपन्ना और रामकुमार ने शुरुआत में ही ब्रेक प्वाइंट बचाया और फिर बेहतर खेल दिखाया। सातवें गेम में मेलो 30-0 के स्कोर पर सर्विस कर रहे थे तब बोपन्ना ने डोडिग के दाईं ओर सर्विस रिटर्न के साथ अंक जुटाया और फोरहैंड विनर लगाकर स्कोर 30-30 किया। ब्राजील का खिलाड़ी हालांकि सर्विस बचाने में सफल रहा।
बोपन्ना ने अगले गेम में ब्रेक प्वाइंट बचाया और फिर सर्विस बचाकर स्कोर 4-4 किया। रामकुमार ने इसके बाद 5-6 के स्कोर पर अपनी सर्विस बचाकर पहले सेट को टाईब्रेक में खींचा। बोपन्ना ने 6-6 के स्कोर पर मेलो के सर्विस रिटर्न पर अंक बनाया और फिर ऐस के साथ पहला सेट जीता। दूसरे सेट में भारतीय टीम ने विरोधी जोड़ी को कोई मौका नहीं देते हुए जीत दर्ज की।

वाणी प्रवाह 2022 – सिद्धि जैन

सिद्धि जैन महादेवी बिड़ला शिशु विहार में कक्षा 8 की छात्रा हैं। यह कविता स्वरचित कविता है।

 

विश्व हिंदी दिवस एवं हिंदी विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर वेब संगोष्ठी

कोलकाता। विश्व हिंदी दिवस एवं हिंदी विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के अवसर पर एक वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर कोरोना प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में माननीय कुलपति प्रो. दामोदर मिश्र ने झंडोत्तोलन किया। स्वागत गीत अनुवाद विभाग की छात्रा सीमा प्रजापति ने प्रस्तुत किया। प्रथम सत्र में वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी में हिंदी विषय पर भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ शंभुनाथ ने कहा कि हिंदी वह भाषा है जिसने अपनी महान परंपराओं से संबंध बनाए रखा है। साथ ही हिंदी ने धार्मिक और सामाजिक संकीर्णताओं से संघर्ष किया और खुद को बनाए रखा।
आज हिंदी को विविध कलाओं और कौशलों से जोड़ते हुए एक उत्सव के रूप में मनाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि डॉ शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि हिंदी पूरे देश को जोड़ने वाली भाषा है। प्रथम सत्र का विषय प्रवर्तन करते हुए कुलसचिव डॉ सुकीर्ति घोषाल ने कहा कि हिंदी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी भाषा है। हिंदी का वैश्विक परिप्रेक्ष्य काफी व्यापक है।अध्यक्षता करते हुए हिंदी विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो.दामोदर मिश्र ने हिंदी के समावेशी रूप की चर्चा करते हुए भारतीय भाषाओं के साथ उसके महत्वपूर्ण संबंधों की चर्चा की। उन्होंने हिंदी के विकास में बंगाल की भूमिका को भी रेखांकित किया।उन्होंने अनुवाद के जरिए भारतीय भाषाओं के जातीय स्वरूप को एक दूसरे से संबद्ध माना। उन्होंने सभी वक्ताओं के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि हमें मिलजुलकर अंग्रेजी साम्राज्यवाद का विरोध करना चाहिए। दूसरे सत्र में शिक्षा के माध्यम-भाषा का प्रश्न और हिंदी विषय पर विषय प्रवर्तन करते हुए कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ सत्या उपाध्याय ने त्रिभाषा सूत्र के साथ नई शिक्षा नीति में भाषा की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। मुख्य अतिथि वक्ता प्रो. अमरनाथ शर्मा ने अंग्रेजी के बढ़ते वर्चस्व पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव से हिंदी एवं भारतीय भाषाओं पर संकट गहराता जा रहा है। मातृभाषा के साथ अंग्रेजी को बनाए रखना एक बड़ी साजिश है।हमें सजग होकर अपनी भाषा को बचाने की जरूरत है। विशिष्ट वक्ता डॉ प्रमोद कुमार प्रसाद ने कहा कि हिंदी का व्यापक प्रयोग होने से तथा अनुवाद कार्य को प्रोत्साहन देने से हम अपनी भाषाओं के बीच बेहतर संबंध स्थापित कर सकते हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में हिंदी विश्वविद्यालय के द्वय समन्वयक प्रतीक सिंह एवं मंटू दास का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ जे.के.भारती एवं डॉ अंजू सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ बिजेंद्र कुमार एवं डॉ श्रीनिवास सिंह यादव ने दिया।इस अवसर पर भारी संख्या में शिक्षक ,विद्यार्थी एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

विश्व हिंदी दिवस पर काव्यपाठ का आयोजन

कोलकाता । विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा काव्यपाठ का आयोजन किया गया। मिशन के अध्यक्ष डॉ शम्भुनाथ ने कहा कि हिंदी की समृद्ध परंपरा का संबंध सृजन और चेतना से जुड़ा है। कविताएं मनुष्यता की आख्यान हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भाषाविद अवधेश प्रसाद सिंह ने कहा कि नौजवानों की पीढ़ी में कविता का संस्कार देखकर अच्छा लग रहा है। कवियों को कविता के लिए भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। सह्दयता के साथ शिल्प की समझ हमें काव्यात्मक रूप से समृद्ध करती है। इस अवसर पर राजेश मिश्र,सुरेश शॉ, जितेश चौबे, सपना कुमारी, राधा ठाकुर, निशा राजभर, स्वरागिनी अग्रहरि, प्रीति साव, कोमल साव, निखिता पाण्डेय, अभिषेक पाण्डेय, राजेश सिंह, सूर्यदेव रॉय, रेशमी सेन शर्मा, विशाल कु. साव, पंकज सिंह, इंद्रेश कुमार, आकाश गुप्ता, प्रकाश त्रिपाठी ने अपनी कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम का सफल संचालन रूपेश कु. यादव ने तथा धन्यवाद ज्ञापन देते हुए संरक्षक रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि नई पीढ़ी रचनात्मक संभावनाओं से भरी है।इस अवसर पर डॉ शुभ्रा उपाध्याय, डॉ रेणु गुप्ता, मृत्युंजय, मंजु श्रीवास्तव, प्रतीक सिंह सहित सैकड़ों साहित्य एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन मधु सिंह एवं राहुल गौड़ ने किया।

अर्चना संस्था के रचनाकारों ने किया नये वर्ष का स्वागत

कोलकाता । अर्चना संस्था की ओर से रचनाकारों ने नए वर्ष का स्वागत किया और कोरोना जैसी भयंकर बिमारी से छुटकारा करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। गोष्ठी में सभी ने अपनी रचनात्मक ऊर्जा से भरी रचनाएंँ सुनाई । वरिष्ठ कवयित्री विद्या भंडारी के संचालन में दो घंटे तक ऑनलाइन पर हुई गोष्ठी का आरंभ इंदु चांडक के नव वर्ष गीत से हुआ – मंगलमय हो जिसका हर पल/वर्ष की शुरुआत सुखद हो। उसके पश्चात संगीता चौधरी -सर्दी की धूप गर्म दुशालों सी लगती है।,कोरोना पूर्ण विश्व से,छाया हर वृक्ष को। देबी चितलांगिया – मूक बधिर प्राण, लौटा लाते हैं, एक कविता :एक गान, मृदुला कोठारी – हे पृथ्वी किस शक्ति पर इतनी प्रबल होकर रहती हो खड़ी चिर युवा चिर सुंदरी, दूसरा गीत राजस्थानी तावड़ो चोखो लागे रे, इंदू चांडक – हाइकु- वाद विवाद /असफल संवाद/ युद्ध का नाद, हठ सतत/मन भेद प्रदत्त/महाभारत, भिक्षा का अन्न/ कर लूँगा ग्रहण/ना करूँ रण, भारती मेहता (अहमदाबाद) – पुरूष कप,प्लेट नारी/कप जहाँ- तहाँ टँगने के लिये /सुविधाजनक/प्लेट अपने निश्चित घेरे में फैली/गर्म को शीतल कर देने वाली !,वरिष्ठ कवयित्री प्रसन्न चोपड़ा ने विद्या भंडारी के लिए दो कविताएँ समर्पित की – मुझे नाज तुम पर है साथी प्रणय प्रीत के गीत हूं गाती,मैं मुस्कान अनूठी हूं जो तेरे होठों पर आती, सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गई धीरे-धीरे धूप भी हटती गई,छा हर वृक्ष की मिलती रही,आपदाएं स्वयं ही हटती गई। विद्या भंडारी – बाहर प्रदर्शन भीतर सुषुप्ति क्यों ।, यदि मैं होती खजूर का वृक्ष , रहती खङी तनी हुई/ किन्तु मैं हूँ कोमल – कोमलान्गिनी, झुकती चली गयी।/छोटा सा हमारा संसार विविधता का है सार/शुभकामनायें अपार। /लेखन में हो विस्तार। सुशीला चनानी – दोहे ,क्षणिका ,कविता/मन में दृढ संकल्प हो,सफल। ओर सब काज/प्रेम पर दो क्षणिका/ प्रेम करना है तो कर!/पहले गणित की किताब / संदूकची में धर!/ प्रेम के पहले पन्ने पर/मत नाच/आगे तो बांच!/घड़ी तो बेचते हो /समय बेच सकते हो क्या, एन एम भंडारी – जिन्दगी/देखना चाहता हूॅ/करीब से/पढना चाहता हूॅ/बारीकी से/मगर मेरी पकङ से /बाहर है/उसकी उङान।,शब्द। / बह्म है/परिचायक है/ ज्ञान का/ उद्बोध है/मानसिक चेतना का । हिम्मत चोरड़़िया – सासू से बोली बहुरानी- सरसी छंद आधारित जोगीरा सारा रा रा रा रा/सच्चा साथी तू ही तेरा- सरसी छंद आधारित गीत, दोहा-रंग बिखेरे नित नये, खोले अभिनव द्वार।/ प्यारी मेरी अर्चना, गूँज उठे संसार।, शशि कंकानी – आओ करें चिंतन मनन मंथन/खुशी बाँटे सभी में/ना दुःखी हो किसी का मन, और राजस्थानी रचना आ पत्ते री नहीं पते री बात है/कदे तक रह्यो कोई रो साथ है। वसुंधरा मिश्र – दिन में भी ख्वाब/जब भी बंद करती हूँ/आँखों को/ख्वाब चोरी हो जाते हैं/खुली आँखें सपने देख नहीं पातीं और हर पल नई सुबह /हर क्षण है परिवर्तित/हर पल बीत रहा है /जीवन तो चलने का नाम आदि रचनाएँ सुनाई। बने चंद मालू ने व्यंग्य रचनाएँ कुम्हार ने माटी के लौंदे से /चिलम बनाई/ बनाते बनाते मष्तिष्क में /एक चिनगारी उभर आई,/उसकी मति बदल गई,/और सुराही बनाने की मन में /आगई।, जो आदमी अपने को /सर्व विजयी महान मान बैठा था /कहता था मरने तक की फ़ुरसत / नहीं,/वह आज मरने के डर से/फ़ुरसत में बैठा है। सुनाई। श्रोताओं में मीना दूगड़, समृद्धि, गुलाब बैद, उषा श्राफ आदि सदस्याएँ उपस्थित रहीं । अंत में, धन्यवाद दिया इंदु चांडक ने।

कवि कल्प द्वारा नववर्ष पर काव्यांजलि

कोलकाता। नए वर्ष के शुभ अवसर पर कोलकाता की प्रतिष्ठित संस्था ‘बंगीय हिन्दी परिषद’ के तत्वावधान में गत 9 जनवरी को गूगल मीट के माध्यम से डॉ. गिरिधर राय की अध्यक्षता में कवि-कल्प की गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया, जिसमें नवोदित एवं वरिष्ठ कवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आरंभ परिषद के मंत्री और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी के स्वागत वक्तव्य से हुआ। गोष्ठी की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जिसे रामाकांत सिन्हा ने प्रस्तुत किया। वरिष्ठ एवं नवांगतुक कवियों ने मिलकर काव्य गोष्ठी को सफल बनाया और नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ-साथ कोरोना के वर्तमान परिदृश्य को अपनी रचनाओं के ज़रिए मुखरित किया।

गोष्ठी में सम्मिलित कविगण डॉ. राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी, मनोज मिश्रा, धर्मनाथ दुबे, कृष्ण कुमार दूबे, स्वागता बसु, मौसमी प्रसाद, शीला संचेती. रामाकांत सिन्हा, रंजीत कुमार संकल्प, निखिता पाण्डेय, अंजू छारिया, हिमाद्रि मिश्रा, सुदामी यादव, गजेंद्र नाहटा, मनोरमा झा तथा सुषमा राय पटेल ने अपनी कविताओं से गोष्ठी को समृद्ध किया। सागर चौधरी की पटल पर प्रेषित कविता ने भी वाहवाही बटोरी। अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. गिरिधर राय ने नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए रचनाकारों की प्रस्तुति की समीक्षा की तथा कविता को समाज का आईना बतलाते हुए रचनाकारों को लिखने के लिए प्रेरित किए। साथ-साथ उन्होंने गुरु गोविंद सिंह जयंती पर अपनी एक ओजपूर्ण कविता द्वारा उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए । श्रोतागण के रूप में पुष्पा मिश्रा, भानु प्रताप पाण्डेय, सुदेशना चक्रवर्ती, ज़ोया अहमद और नेहा आदि जुड़े थे। परिषद की संयुक्त मंत्री सुषमा राय पटेल द्वार संचालन किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन परिषद की उप साहित्य मंत्री निखिता पाण्डेय ने किया।

एसेंसिव एडुकेयर लिमिटेड का लिस्टिंग समारोह संपन्न

कोलकाता । कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली और अखिल भारतीय उपस्थिति वाली कोलकाता आधारित कंपनी एसेंसिव एडुकेयर लिमिटेड ने 30 दिसंबर 2021 को आईपीओ जारी किया था। कंपनी ने 2.26 करोड़ की पूंजी जुटाने के लिए प्रति शेयर 26/- रुपये के प्रीमियम पर प्रत्येक 10 रुपये के 868000 इक्विटी शेयरों की पेशकश की थी। आईपीओ 2.5 गुना तक ओवरसब्सक्राइब हुआ था। कंपनी बीएसई एसएमई स्टार्टअप प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध हो चुकी है। लिस्टिंग समारोह के अवसर पर कन्फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील पोद्दार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में  संजीव जायसवाल, प्रबंधक – बीएसई क्षेत्रीय केंद्र कोलकाता,  अभिषेक विजय कुमार शर्मा, निदेशक – जीवाईआर कैपिटल एडवाइजर्स, अमित कुमार बनर्जी: एसोसिएट वीपी और हेड – कोलकाता ऑपरेशन, लिंक इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड। गणमान्य व्यक्तियों में सिमल सोरेन, उपाध्यक्ष, पश्चिम बंगाल आदिवासी विकास सहकारी निगम और तन्मय भट्टाचार्य, प्रसिद्ध पत्रकार और ट्रस्टी, आईएमएपी व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कौशल विकास उद्योग में एक जाना-माना नाम एसेंसिव एडुकेयर लिमिटेड ने वर्ष 2012 में पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के एक छोटे से शहर चंदननगर से अपनी यात्रा शुरू की थी। कुछ ही समय में एसेंसिव एडुकेयर ने शानदार प्रदर्शन के साथ 10 साल पूरे कर लिए हैं। एसेंसिव, जिसका अर्थ है “उठने की ओर बढ़ना।” इस 10 वर्षों के भीतर कंपनियों के एक समूह में विकसित हो गया है। कंपनी के संस्थापक अभिजीत चटर्जी ने सभी निवेशकों, अपनी टीम और अपने परिवार को धन्यवाद दिया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर हुई और कंपनी की एमडी श्रीमती सायनी चटर्जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ समाप्त हुई।