Sunday, July 5, 2026
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गलती से किसी और के बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर हो गए, अपनायें यह उपाय

एक बैंक से दूसरे बैंक अकाउंट में रकम ट्रांसफर करना असान हो गया है। फोनपे, गूगल पे, अमेजन पे और इंटनेट बैंकिग जैसे कई पेमेंट ऐप के होने से डिजिटल ट्रांजैक्शन में बढ़ोतरी हुई है। कई बार बैंक अकाउंट में मनी ट्रांसफर करते समय गलती से बैंक अकाउंट नंबर गलत इंटर हो जाने पर गलत अकाउंट में रकम ट्रांसफर हो जाती है। इसी को देखते हुए आज हम आपको कुछ नेटबैकिंग टिप दे रहे हैं कि अगर आपके साथ ऐसा हो जाए तो आपको क्या करना चाहिए। तो आइए जानते हैं….
सबसे पहले बैंक को इस बारे में जानकारी दें
अगर भूल से आपने दूसरे व्‍यक्ति के बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दिए हैं तो सबसे पहले अपने बैंक को इसकी सूचना फोन या ईमेल से दें। बेहतर यह रहेगा कि आप जल्‍द से जल्‍द ब्रांच मैनेजर से मिलें। इस बात को समझिए कि जिस बैंक के खाते में आपने पैसे ट्रांसफर किए हैं, सिर्फ वही बैंक इस मसले को सुलझा सकता है। अपने बैंक को भूल से हुए ट्रांजेक्शन के बारे में डिटेल्स में जानकारी दें। इसमें ट्रांजेक्शन की तारीख और समय, अपना अकाउंट नंबर और जिस अकाउंट नंबर में भूल से पैसे ट्रांसफर हुए हैं आदि शामिल हैं।

बैंक को जल्द से जल्द कदम उठाना होगा
गलती से अमाउंट ट्रांसफर वाले ज्यादातर मामलों में रिसीवर पैसे लौटाने को तैयार हो जाता है। लेकिन अगर वह पैसे लौटाने से मना कर दे तो आप उसके खिलाफ केस दर्ज कर सकते हैं। आप अपनी तरफ से भी ऐसे मामलों में लीगल एक्शन लेने का अधिकार रखते हैं। आप बैंक से शिकायत दर्ज करा कर लीगल एक्शन ले सकते हैं। RBI के गाइडलाइन के अनुसार अगर गलती से पैसे किसी दूसरे के खाते में जमा हो जाते हैं तो आपके बैंक को जल्द से जल्द कदम उठाना होगा। बैंक को गलत खाते से पैसे को सही खाते में लौटाने की व्यवस्था करनी होगी।

वापस पा सकते हैं रकम
अगर आपने जिस बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर किया है, वो अकाउंट नंबर ही गलत है या IFSC कोड गलत है, तो पैसा अपने आप ही आपके खाते में आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है तो अपने बैंक ब्रांच में जाकर ब्रांच मैनेजर से मिलें। उसे इस गलत ट्रांजेक्शन के बारे में बताएं। ये जानने की कोशिश करें कि पैसे किस बैंक के खाते में गए हैं। अगर किसी दूसरे बैंक के खाते में पैसे गलती से ट्रांसफर हुए हैं तो रकम वापसी में ज्यादा समय लग सकता है। कई बार तो बैंक इस तरह के मामलों के निपटारे में 2 महीने तक का समय भी लगा सकते हैं। आप अपने बैंक से यह पता कर सकते हैं कि किस शहर की किस ब्रांच के किस अकाउंट में पैसा ट्रांसफर हुआ है। उस ब्रांच में बात करके आप रकम वापस ले सकते हैं।

ऑनलाइन भुगतान करते समय इन बातों को जरूर रखें ध्यान

पैसे ट्रांसफर करते वक्त प्राप्तकर्ता का बैंक अकाउंट नंबर दोबारा चेक कर लें।
जल्दबाजी में बैंक अकाउंट नंबर डालते वक्त गलती से एक भी डिजिट इधर-उधर हो जाने पर आपका पैसा गलत अकाउंट में ट्रांसफर हो सकता है।
पैसे भेजने के पहले अकाउंट बेनीफिशियरी एड करें, ताकि आपको बार-बार ट्रांसफर करने में सहुलियत हो।
पहली दफा दूसरे के अकाउंट में पैसे भेजने की शुरूआत कम राशि से करें, ताकि अगर पैसे गलत अकाउंट में चल जाएं तो नुकसान कम से कम हो।

इंडोनेशिया में मछुआरों ने खोजा 700 साल पुराना श्रीविजय का स्वर्ण द्वीप

सुमात्रा में हुई खोज, मिलीं प्रतिमाएँ एवं बहुमूल्य खजाना 

जकार्ता :  सदियों से दक्षिण पूर्वी एशिया का देश इंडोनेशिया भारतीय संस्कृति का विस्तार माना जाता रहा है। यहां के सुमात्रा द्वीप में सातवीं से 13 वीं शताब्दी तक श्रीविजय राजवंश का शासन रहा। पेलंगबांग को इस राजवंश का स्वर्ण द्वीप कहा जाता था। भारतीय चोल राजाओं ने यहां हमला कर बहुमूल्य खजाने को लूटा और श्रीविजय राजवंश के राजाओं को बंधक बना लिया। वापसी में ये खजाना गायब हो गया। खतरनाक मगरमच्छों से भरी पेलंगबांग की मुसी नदी में लोग इसकी खोज में लगे रहे। अब लगभग 700 साल बाद मछुआरों ने इस बहुमूल्य खजाने को खोज निकाला है। समुद्री खाेजकर्ता डॉ. शॉन किंगस्ले के अनुसार ये सुमात्रा के गायब स्वर्ण द्वीप की खोज है।

श्रीविजय राजवंश का था समुद्रों पर राज
इतिहासकारों के अनुसार सुमात्रा का श्रीविजय राजवंश 13 वीं शताब्दी तक दक्षिणपूर्वी एशिया के द्वीपों पर शासन था। समुद्री शक्ति होने के कारण इसका फैलाव भारत के पूर्वी तटाें और दक्षिण चीन महासागर था। यहां पूर्व में मिले भारतीय और चीनी सिक्के इस बात का प्रमाण है। अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्राें में श्रीविजय राजवंश का एकछत्र राज था। यहां बौद्ध और हिंदू धर्म की प्रतिमाएं भी मिली हैंं। बाद में ये राजवंश जावा के मलायु तक सिमट गया।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार : छिछोरे सर्वश्रेष्ठ फिल्म, कंगना रणौत सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, मनोज वाजपेयी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता

रजनीकांत को मिला दादासाहब फाल्के पुरस्कार

67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन विज्ञान भवन में किया गया। विजेताओं को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने स्वर्ण कमल एवं रजत कमल, शॉल और ईनाम की राशि देकर सम्मानित किया। मनोज बाजपेयी, कंगना रणौत और धनुष को बेहतरीन अभिनय के लिए सम्मानित किया गया। छिछोरे को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला। सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म छिछोरे के निर्देशक नितेश तिवारी को सम्मानित किया गया। 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा मार्च 2021 में की गई थी। कंगना अपने मां और पिता के साथ अवॉर्ड लेने पहुंचीं। सुपरस्टार रजनीकांत को 51वें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान विज्ञान भवन में मौजूद सभी लोगों ने उनके लिए खड़े होकर तालियां बजाईं।

सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – कंगना रणौत
अभिनेत्री कंगना रणौत को एक बार फिर से सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला है। उन्हें 25 जनवरी 2019 में रिलीज हुई  मणिकर्णिका और 24 जनवरी 2020 में आई पंगा के लिए सम्मानित किया गया।

सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – मनोज वाजपेयी
मनोज वाजपेयी को भोंसले के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड मिला है। देवाशीष मखीजा द्वारा लिखित और निर्देशित ड्रामा फिल्म में मनोज वाजपेयी की भूमिका को लेकर उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया है।

सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता – विजय सेतुपति
दक्षिण के अभिनेता विजय सेतुपति को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के तौर पर राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया है। उन्हें तमिल फिल्म ‘सुपर डीलक्स’ के लिए सम्मानित किया गया, जो 29 मार्च 2019 में रिलीज हुई थी। त्यागराजन कुमार राजा ने फिल्म को निर्देशित किया था।

सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री– पल्लवी जोशी
‘द ताशकंद फाइल्स’ में प्रभावशाली किरदार निभाने के लिए दक्षिण अभिनेत्री पल्लवी जोशी को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ा गया है। विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित यह फिल्म 12 अप्रैल 2019 में रिलीज हुई थी। 4 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म ने 20 करोड़ से ज्यादा का बॉक्स ऑफिस कमाई की।

सर्वश्रेष्ठ बॉयोग्राफिकल फिल्म – एलिफेंट डू रिमेम्बर
स्वाती पांडे द्वारा निर्देशित ‘एलिफेंट डू रिमेम्बर’ ने बेस्ट बॉयोग्राफिकल फिल्म के लिए पुरस्कार जीता है।

अन्य पुरस्कार –
सर्वश्रेष्ठ फिल्म फ्रेंडली स्टेट – सिक्किम
सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ किताब – संजय सूरी द्वारा रचित ‘अ गांधियन अफेयर: इंडियाज क्यूरियस पोरट्रायल ऑफ लव इन सिनेमा’
सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक – सोहिनी चट्टोपाध्याय

फीचर फिल्म्स
विशेष उल्लेखनीय – बिरयानी (मलयालम), जोनाकी पोरुआ (असमिया), लता भगवान कारे (मराठी), पिकासो (मराठी)
सर्वश्रेष्ठ तुलु फिल्म – पिंजारा
सर्वश्रेष्ठ पनिया फिल्म – केंजीरा
सर्वश्रेष्ठ मिशिंग फिल्म – अनु रुवाद
सर्वश्रेष्ठ खासी फिल्म – लेवदह
सर्वश्रेष्ठ हरियाणवी फिल्म – छोरियां छोरों से कम नहीं होती
सर्वश्रेष्ठ छत्तीसगढ़ी फिल्म – भुलान थे माजे
सर्वश्रेष्ठ तेलुगु फिल्म – जर्सी
सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म – असुरन
सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फिल्म – छिछोरे
सर्वश्रेष्ठ मराठी फिल्म – बार्दो
सर्वश्रेष्ठ बांग्ला फिल्म – गुमनामी
गैर फीचर फिल्म श्रेणी
सर्वश्रेष्ठ वाचन – वाइल्ड कर्नाटक, सर डेविड अटेन्बर्ग
सर्वश्रेष्ठ सम्पादन– शट अप सोना, अर्जुन गौरीसराई
सर्वश्रेष्ठ आत्मकथा – राधा, ऑल्विन रेगो और संजय मौर्या
सर्वश्रेष्ठ ऑन-लोकेशन साउंड रिकॉर्डिस्ट – रहस, सप्तर्षि सरकार
सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफी – सोनसी, सविता सिंह
सर्वश्रेष्ठ निर्देशन– नॉक नॉक नॉक, सुधांशु सरिया
पारिवारिक मूल्य – ओरू पाथिरा स्वपनम पोले (मलयालम)
सर्वश्रेष्ठ शार्ट फिक्शन फिल्म – कस्टडी
विशेष ज्यूरी पुरस्कार – स्मॉल स्केल सोसायटीज
सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म – राधा
सर्वश्रेष्ठ खोजी फिल्म – जक्कल
सर्वश्रेष्ठ एक्सप्लोरेशन फिल्म – वाइल्ड कर्णाटक
सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक फिल्म – एपल्स एंड ओरांजेस
सामाजिक मुद्दों पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म – होली राइट्स, लाडली
सर्वश्रेष्ठ एक्शन डायरेक्शन अवॉर्ड
स्टंट – अवाने श्रीमन्नारायण (कन्नड़)
सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी – महर्षि (तेलुगू)
सर्वश्रेष्ठ स्पेशल इफेक्ट्स – मरक्कर
सर्वश्रेष्ठ जूरी पुरस्कार – ओत्था सेरुप्पू साइज- 7 (तमिल)
सर्वश्रेष्ठ गीत  – कोलम्बी (मलयालम)
सर्वश्रेष्ठ पटकथा 
मौलिक पटकथा – ज्येष्ठोपुत्री
किसी रचना पर आधारित सर्वश्रेष्ठ पटकथा  – गुमनामी
सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखन  – द ताशकंत फाइल्स
सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफी – जल्लीकट्टू
सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका – बार्दो
सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक – बी प्राक, केसरी, तेरी मिट्टी

भारत में कोविड रोधी टीकाकरण ने पार किया 100 करोड़ का आँकड़ा

नयी दिल्ली : भारत में कोविड-19 टीकों की अब तक दी गई खुराकों की संख्या 100 करोड़ के पार पहुँच गयी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने एक ट्वीट करके देश को यह उपलब्धि हासिल करने पर बधाई दी और कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सक्षम नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने लिखा, ‘‘बधाई हो भारत! यह दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थ नेतृत्व का प्रतिफल है।’’
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, देश में टीकाकरण के पात्र वयस्कों में से करीब 75 प्रतिशत लोगों को कम से कम एक खुराक लग चुकी है, जबकि करीब 31 प्रतिशत लोगों को टीके की दोनों खुराक लग चुकी हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में टीकाकरण मुहिम शुरू होने के 85 दिन बाद तक 10 करोड़ खुराक लगाई जा चुकी थीं, इसके 45 और दिन बाद भारत ने 20 करोड़ का आंकड़ा छुआ और उसके 29 दिन बाद यह संख्या 30 करोड़ पहुँच गयी।
देश को 30 करोड़ से 40 करोड़ तक पहुंचने में 24 दिन लगे और इसके 20 और दिन बाद छह अगस्त को देश में टीकों की दी गई खुराकों की संख्या बढ़कर 50 करोड़ पहुँच गयी। इसके बाद उसे 100 करोड़ के आंकड़े तक पहुँचने में 76 दिन लगे। देश में टीकों की सर्वाधिक खुराक देने वाले शीर्ष पाँच राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और मध्य प्रदेश शामिल हैं। टीकाकरण मुहिम की शुरुआत 16 जनवरी को हुई थी और इसके पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों को टीके लगाए गए थे। इसके बाद दो फरवरी से अग्रिम मोर्चे के कर्मियों का टीकाकरण आरंभ हुआ था। टीकाकरण मुहिम का अगला चरण एक मार्च से आरंभ हुआ, जिसमें 60 साल से अधिक आयु के सभी लोगों और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को टीके लगाने शुरू किए गए। देश में 45 साल से अधिक आयु के सभी लोगों का टीकाकरण एक अप्रैल से आरंभ हुआ था और 18 साल से अधिक आयु के सभी लोगों का टीकाकरण एक मई से शुरू हुआ।

 

तुलसी का पौधा लगाइए, होगी जमकर कमाई

अगर आप भी औषधीय पौधे की खेती कर कम पूंजी से अच्छी कमाई करना चाहते हैं तो आपको तुलसी की खेती करने पर ध्यान देना चाहिए। तुलसी की खेती शुरु करने के लिए आपको बहुत अधिक पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है। आप कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए भी इस खेती की शुरुआत कर सकते हैं। आपको तुलसी की खेती के लिए महज 15,000 रुपये खर्च करने की जरूरत है। बुआई के 3 महीने बाद ही तुलसी की फसल औसतन 3 लाख रुपये में बिक जाती है। दवा मार्केट में मौजूद कई आयुर्वेदिक कंपनियां जैसे डाबर, वैद्यनाथ, पतंजलि आदि तुलसी की कॉन्ट्रैक्ट पर भी खेती करा रही हैं।
केंद्र सरकार देती है बढ़ावा
केंद्र सरकार इस समय देशभर में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने अगले साल तक 75 लाख घरों पर औषधीय पौधों को पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, तुलसी भी उन्हीं पौधों में से एक है।
कैसे करें तुलसी की खेती?
एक एकड़ खेत में तुलसी की खेती करने के लिए अलग से 600 ग्राम बीज डालकर पौध तैयार की जाती है। तुलसी की पौध तैयार करने का सही समय अप्रैल माह का पहला सप्ताह है। करीब 15-20 दिन में पौध तैयार हो जाती है। मानसूनी तुलसी की पौध जून-जुलाई में तैयार की जाती है। पौध तैयार होने के बाद नर्सरी से निकालकर लाइनों में रोप दी जाती है।
तुलसी के पौधे की दूरी
तुलसी के पौध की रोपाई के समय यह ध्यान रखा जाता है कि पौधे से पौधे की दूरी 12-15 इंच व लाइन से लाइन की दूरी 15-18 इंच हो। तुलसी की फसल में महीने में दो से तीन सिंचाई पर्याप्त हैं। तुलसी की फसल में कोई बीमारी नहीं लगती या कीड़ों का प्रकोप भी नहीं होता। तुलसी के पौधे को बढ़ाने के लिए खाद के रूप में केवल गोबर की खाद का ही प्रयोग किया जाता है।
तुलसी की फसल तैयार
तुलसी की फसल पौध रोपने के बाद 65-70 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसके बाद तुलसी के पौधे को काटकर सुखा लिया जाता है। जब तुलसी की पत्तियां सूख जाती हैं तो इन्हें इकठ्ठा कर लिया जाता है। उपज के रूप में एक एकड़ खेत में पांच-छह क्विंटल सूखी पत्ती प्राप्त होती है। डाबर, पतंजलि, वैद्यनाथ व हमदर्द जैसी औषधि कंपनियां तुलसी की पत्तियां 7000 रुपये क्विंटल के हिसाब से खरीद लेती हैं। एक एकड़ तुलसी की फसल पैदा करने में 5000 रुपये का खर्च आता है। एक एकड़ तुलसी की फसल से 36,000 रुपये की बचत एक फसल में हो जाती है। जबकि साल में तुलसी की तीन फसल पैदा की जा सकती है।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

39 महिला सेना अधिकारियों ने जीती कानूनी लड़ाई, मिला स्थायी कमीशन

नयी दिल्ली : 39 महिला सेना अधिकारियों ने कानूनी लड़ाई जीत ली है और उन्हें स्थायी कमीशन देने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह सात दिनों के भीतर 39 महिला सेना अधिकारियों को स्थायी कमिशन प्रदान करे। इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 39 स्थायी कमीशन देने की योग्यता रखती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस मामले में सात दिनों के भीतर आदेश पारित करे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने रक्षा मंत्रालय के प्रयास की सराहना की और कहा कि एक नवंबर तक इन 39 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर महिला अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें स्थायी कमीशन देने से मना किया गया था। उनका दावा है कि उन्होंने तमाम मापदंडों को पूरा किया है। उन्होंने 60 फीसदी कटऑफ पाए हैं और विजिलेंस क्लीयरेंस हुआ है और साथ ही मेडिकली फिट हैं और मार्च में दिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत उनके दावे को नकारा गया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि केंद्र से हलफनामा पेश करने को कहा था। साथ ही कहा था कि किसी महिला को इस दौरान रिलीव न किया जाए।

बिजली मंत्रालय के नये नियम कम करेंगे अंशधारकों पर वित्तीय दबाव

नयी दिल्ली : बिजली मंत्रालय ने क्षेत्र को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए गत शनिवार को कुछ नए नियमों की घोषणा की। इन नियमों का मकसद बिजली क्षेत्र के विभिन्न अंशधारकों से वित्तीय दबाव को कम करना और ऊर्जा उत्पादन की लागत को जल्द निकालना है।
एक बयान में कहा गया है कि मंत्रालय ने बिजली क्षेत्र में स्थिरता तथा स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहन के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं। इनके जरिये भारत जलवायु परिवर्तन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी पूरा कर सकेगा। बयान में कहा गया है कि बिजली क्षेत्र के निवेशक और अन्य अंशधारक कानून में बदलाव की वजह से लागत निकालने, नवीकरणीय ऊर्जा में कमी और इससे जुड़े अन्य मुद्दों की वजह से चिंतित हैं।
बयान में कहा गया है कि बिजली मंत्रालय ने बिजली अधिनियम, 2003 के तहत जो नियम अधिसूचित किए हैं वे उप़भोक्ताओं और अन्य अंशधारकों के हित में हैं। इन नियमों में बिजली (कानून में बदलाव की वजह से लागत की समय पर वसूली) नियम, 2021 शामिल है। दूसरा नियम बिजली (नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से उत्पादन को प्रोत्साहन) से संबंधित है। मंत्रालय ने कहा कि कानून में बदलाव की वजह से लागत की जल्द वसूली काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि समय पर भुगतान बिजली क्षेत्र के लिए जरूरी है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘दुनियाभर में ऊर्जा में बदलाव हो रहा है। भारत ने भी इस क्षेत्र में बदलाव की प्रतिबद्धता जताई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2022 तक 175 गीगावॉट और 2030 तक 450 गीगावॉट की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की प्रतिबद्धता जताई है।’’ मंत्रालय ने कहा कि इन नियमों से देश को नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। इससे उपभोक्ताओं को हरित और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी। इनके तहत जिन बिजली संयंत्रों का संचालन अनिवार्य है उनपर बिजली उत्पादन या आपूर्ति में कटौती का नियमन लागू नहीं होगा।

10वीं, 12वीं कक्षा की टर्म-1 परीक्षा में लघु विषय होंगी क्षेत्रीय भाषाएँ : सीबीएसई

नयी दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्पष्ट किया कि 10वीं और 12वीं कक्षा की टर्म-1 परीक्षा के लघु विषयों की श्रेणी में सभी क्षेत्रीय विषयों को रखा गया है। सीबीएसई की ओर से यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मुख्य विषयों से पंजाबी को बाहर रखने पर आपत्ति व्यक्त की है ।
चन्नी ने ट्वीट किया था, ‘‘मैं पंजाबी को मुख्य विषयों से बाहर रखने के सीबीएसई के तानाशाही निर्णय का विरोध करता हूं । यह संविधान की संघीय भावना के खिलाफ है और पंजाबी युवकों को अपनी मातृभाषा में सीखने के अधिकार का उल्लंघन है। मैं पंजाबी को पक्षपातपूर्ण ढंग से बाहर रखने की निंदा करता हूं । ’’ पंजाब के मुख्यमंत्री की आपत्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘ यह सभी को पता है कि सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं कक्षा की टर्म-1 परीक्षा के तहत मुख्य विषयों की तिथियों की घोषणा की है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ यह स्पष्ट किया जाता है कि विषयों का वर्गीकरण प्रशासनिक आधार पर किया गया है जिसका मकसद विषयों में उपस्थित होने वाले उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर टर्म-1 परीक्षा का आयोजन करना है और यह किसी भी रूप में मुख्य या लघु विषयों के महत्व से इसका कोई लेनाा-देना नहीं है।’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘ अकादमिक दृष्टिकोण से सभी विषय समान रूप से महत्वपूर्ण है । पंजाबी क्षेत्रीय भाषा के तहत पेश की जाने वाली एक भाषा है। सभी क्षेत्रीय भाषाओं को लघु विषयों की श्रेणी के तहत प्रशासनिक सुविधा के उद्देश्य से रखा गया है जो परीक्षा आयोजित से जुड़ी व्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिये है। ’’

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने हाल ही में घोषणा की थी कि कक्षा 10वीं के लिए पहले टर्म की बोर्ड परीक्षा 30 नवंबर से शुरू होगी, जबकि 12वीं कक्षा की परीक्षा एक दिसंबर से शुरू होगी। इसके बाद, सीबीएसई ने कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के पहले टर्म के लघु (माइनर) विषयों के लिए तारीखों (डेटशीट) की घोषणा की।

दसवीं कक्षा के लिए लघु विषयों की परीक्षा 17 नवंबर से सात दिसंबर के बीच होगी जबकि 12वीं कक्षा के लिए 16 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच परीक्षा होगी। सीबीएसई ने घोषणा की थी कि कक्षा 10वीं के लिए पहले टर्म की बोर्ड परीक्षा 30 नवंबर से शुरू होगी, जबकि 12वीं कक्षा की परीक्षा एक दिसंबर से शुरू होगी।
शैक्षणिक सत्र को विभाजित करना, दो टर्म वाली परीक्षा आयोजित करना और पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत बनाना 2021-22 के लिए दसवीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए विशेष मूल्यांकन योजना का हिस्सा था, जिसे जुलाई में कोविड-19 महामारी के मद्देनजर घोषित किया गया था।

पूर्व रेलवे ने हावड़ा स्टेशन पर लगाया डिजिटल यात्री आरक्षण चार्ट बोर्ड

कोलकाता : पूर्व रेलवे ने हावड़ा स्टेशन पर डिजिटल यात्री आरक्षण चार्ट बोर्ड लगाया है। रेल यात्रियों को उनके आरक्षित टिकट की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी देने के लिए नई सुविधा शुरू की गई है। पूर्व रेलवे के एक वरिष्ठ कर्मचारी के हाथों इसकी शुरुआत कराई गई। यह सुविधा उन लोगों के लिए मददगार साबित होगी, जिनका टिकट कंफर्म नहीं है और वे रेलवे स्टेशन पर उसे चेक करना चाहते हैं।
डिजिटल यात्री आरक्षण चार्ट बोर्ड के तहत आठ 50 इंच वाले एलईडी टीवी का सेट हैं। इनमें से चार स्क्रीन पर विज्ञापन प्रदर्शित होंगे और चार अन्य पर ट्रेन टिकट की आरक्षण की स्थिति दिखेगी। डिजिटल आरक्षण चार्ट बोर्ड का रखरखाव एक एजेंसी द्वारा किया जाएगा।
पूर्व रेलवे के सीपीआरओ कमल देव दास ने बताया कि इससे लाइसेंस शुल्क के रूप में प्रति वर्ष 50 लाख रुपये का गैर-किराया राजस्व प्राप्त होगा। डिजिटल आरक्षण चार्ट बोर्ड को धीरे-धीरे अन्य प्लेटफार्मों में भी लगाया जाएगा। यात्री अब स्पष्ट रूप से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे क्योंकि कई बार आरक्षण चार्ट पर मुद्रित विवरण समय के साथ धुंधले हो जाते हैं।
पूर्व रेलवे के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यात्री चार्ट प्रदर्शित करने के लिए डिजिटल चार्टिंग पर्यावरण के अनुकूल तरीका है। यह कागज की खपत को भी कम करेगा और रेलवे को पर्यावरण के अनुकूल संगठन के रूप में पेश करेगा। यह यात्रियों को मैन्युअल रूप से तैयार किए गए पेपर चार्ट की प्रतीक्षा करने के बजाय डिजिटल रूप से जानकारी प्राप्त करने में मदद करेगा, जो ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान से ठीक पहले ट्रेनों में चिपकाए जाते हैं।

 

एक साल बाद बंगाल में खुले सिनेमाघर, उमड़े दर्शक

बांग्ला फिल्मों ने किया शानदार कारोबार

कोलकाता : बंगाल में दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान रिलीज हुई कई बांग्ला फिल्मों ने अच्छा कारोबार किया। उद्योग से जुड़े के सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देव अभिनीत ‘गोलोंदाज’ अब तक हाउसफुल चल रही थी, जीत अभिनीत ‘बाजी’, कोयल मलिक और परमब्रत चटर्जी की मुख्य भूमिका वाली ‘बोनी’, अंकुश की ‘एफआइआर’ और शाश्वत चटर्जी की ‘शोरोरिपु टू जोतुगृहो’ ने भी 10 से 20 अक्टूबर की अवधि के दौरान अच्छा प्रदर्शन किया। ‘गोलोंदाज’ के निर्माताओं की एक प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया, ‘सिनेमाघरों में 50 प्रतिशत दर्शकों के साथ ‘गोलोंदाज’ गुरुवार लक्ष्मी पूजा और उसके अगले दिन तक बाक्स ऑफिस पर लगभग तीन करोड़ रुपये की कमाई करने वाली पूर्वी भारत की पहली फिल्म बन गई।’
उन्होंने दावा किया कि कोलकाता के अधिकांश सिनेमाघरों में पहले 4-5 दिनों तक लगातार एक के बाद एक हाउसफुल शो दिखे। वितरक एसएसआर सिनेमाज के सतदीप साहा और शहर में स्थानीय अजंता मल्टीप्लेक्स के मालिक ने कहा, ‘गोलोंदाज, बाजी, बोनी, सभी ने सिनेमाघरों में बहुत अच्छा कारोबार किया। एक के बाद एक हाउसफुल शो के कारण बाजी सिने प्रेमियों के बीच भी हिट रही।’

अभिनेता देव ने ‘कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि लोग सिनेमा देखने के लिए सिनेमाघरों में वापस आए। पिछले दो वर्षों से इस महामारी की स्थिति में लोगों को सिनेमा हॉल में वापस लाना बहुत मुश्किल था और हम एक टीम के रूप में दर्शकों को एक के बाद एक हाउसफुल शो, तालियों की गड़गड़ाहट और सीटी के साथ सिनेमाघरों में वापस लाने के लिए बहुत खुश हैं।’