Thursday, April 30, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 32

टेस्ला के एलन मस्क को मिलेगा 1 ट्रिलियन डॉलर वेतन

वॉशिंगटन । टेस्ला के सीईओ एलन मस्क एक बार फिर सुर्खियों में हैं। कंपनी के शेयरधारकों ने उनके अब तक के सबसे बड़े और रिकॉर्ड तोड़ वेतन पैकेज को मंजूरी दे दी है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यह पैकेज करीब 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक का हो सकता है, जो किसी भी कॉरपोरेट इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा वेतन समझौता माना जा रहा है।बता दें कि इस फैसले पर गुरुवार को हुए मतदान में लगभग 75 प्रतिशत शेयरधारकों ने मस्क के पक्ष में वोट दिया। कंपनी के बोर्ड ने यह प्रस्ताव पिछले साल सितंबर में पेश किया था ताकि मस्क की नेतृत्व क्षमता और उनके साथ कंपनी की दीर्घकालिक दिशा बरकरार रहे। यह पूरा वेतन पैकेज 12 हिस्सों में बंटा हुआ है, और मस्क को हर हिस्सा तभी मिलेगा जब टेस्ला आने वाले वर्षों में तय किए गए उत्पादन, लाभ और मार्केट कैप से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करेगी। गौरतलब है कि अगर टेस्ला इन सभी लक्ष्यों को प्राप्त कर लेती है, तो एलन मस्क की हिस्सेदारी कंपनी में 13 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। यानी उन्हें करीब 423 मिलियन नए शेयर मिलेंगे, जिनकी कीमत लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है, बशर्ते टेस्ला का मार्केट वैल्यू 8.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के बोर्ड का मानना है कि एलन मस्क की अगुवाई में टेस्ला न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों में बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और स्वचालित वाहनों के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयां छू सकती है। हालांकि कुछ प्रमुख सलाहकार फर्मों जैसे ग्लास लुईस और आईएसएस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। उनका कहना था कि यह वेतन पैकेज बहुत बड़ा और शासन की दृष्टि से असंतुलित है। जानकारी के मुताबिक, अगर यह प्रस्ताव खारिज हो जाता, तो मस्क ने संकेत दिया था कि वे टेस्ला के सीईओ पद से हट सकते हैं। वोटिंग के बाद एलन मस्क ने निवेशकों का आभार जताते हुए कहा, “मैं आप सभी का बेहद आभारी हूं।” सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अगर मस्क टेस्ला के सभी लक्ष्य हासिल कर लेते हैं, तो यह पैकेज उन्हें प्रतिदिन करीब 275 मिलियन डॉलर की कमाई दिला सकता है, जो किसी भी सीईओ के वेतन के मुकाबले अभूतपूर्व है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स के अनुसार, एलन मस्क की कुल संपत्ति इस समय करीब 473 अरब डॉलर है, जिसमें टेस्ला, स्पेसएक्स और एक्सएआई जैसी कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी शामिल है। तुलना करें तो, मस्क का संभावित वेतन दुनिया के अन्य शीर्ष सीईओ की तुलना में कई गुना अधिक है। उदाहरण के लिए, माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला ने 79.1 मिलियन डॉलर, एप्पल के टिम कुक ने 74.6 मिलियन डॉलर और एनविडिया के जेनसन हुआंग ने 49.9 मिलियन डॉलर कमाए हैं। यह साफ दिखाता है कि मस्क का यह वेतन पैकेज किसी भी मौजूदा कॉरपोरेट मानक से कहीं ऊपर है और इसे लेकर निवेशकों और विश्लेषकों के बीच चर्चा जारी है। एलन मस्क और टेस्ला दोनों ही अब एक नए युग की ओर बढ़ रहे हैं जहां केवल इलेक्ट्रिक कारें नहीं, बल्कि एआई और रोबोटिक्स भविष्य की दिशा तय करेंगे। यह फैसला उस विश्वास को मजबूत करता है कि मस्क की अगुवाई में टेस्ला तकनीकी नवाचार की सीमाओं को और आगे ले जाएगी हैं।

पश्चिम बंगाल में अब तक वितरित हुए तीन करोड़ से अधिक एन्यूमरेशन फॉर्म

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने उल्लेखनीय रफ्तार पकड़ी है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार रात 8:00 बजे तक राज्य भर में कुल 3.04 करोड़ से अधिक एन्यूमरेशन फॉर्म घर-घर जाकर वितरित किए जा चुके हैं। यह अभियान 04 नवम्बर से प्रारंभ हुआ था और महज़ चार दिनों में ही इसने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। आयोग के अनुसार, राज्य के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में तैनात लगभग 80 हजार 681 बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) मतदाताओं के घरों तक जाकर दो-दो प्रतियों में एन्यूमरेशन फॉर्म वितरित कर रहे हैं। इनमें से एक प्रति मतदाता के पास सुरक्षित रखी जा रही है, जबकि दूसरी प्रति निर्वाचन आयोग के अभिलेखों हेतु जमा की जाएगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में अभियान की रफ्तार में विशेष वृद्धि दर्ज हुई है। गुरुवार रात 8 बजे तक 2.01 करोड़ फॉर्म बांटे गए थे, जो शुक्रवार शाम तक बढ़कर 3.04 करोड़ से अधिक हो गए। आयोग का कहना है कि यह बढ़ोतरी बीएलओ नेटवर्क की सक्रियता और क्षेत्रीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। अधिकारियों ने बताया कि इस बार का एसआईआर अभियान विशेष रूप से व्यापक है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया 23 वर्षों बाद की जा रही है। वर्ष 2002 के बाद यह पहला मौका है जब मतदाता सूची के पूर्ण पुनरीक्षण के लिए राज्य स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर फॉर्म वितरण किया जा रहा है। प्रत्येक प्राप्त विवरण की गहन निगरानी और सत्यापन किया जा रहा है, ताकि मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटि-मुक्त बनाया जा सके।

इस बीच, कुछ जिलों से बीएलओ और राजनीतिक दलों के बूथ स्तर कार्यकर्ताओं पर हमलों की छिटपुट घटनाएं सामने आई हैं। निर्वाचन आयोग ने इन घटनाओं पर गंभीर संज्ञान लेते हुए संबंधित जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की बाधा या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक योग्य नागरिक तक प्रपत्र सुरक्षित रूप से पहुंचे।

आयोग के सूत्रों ने बताया कि अभियान के पहले चरण में अपेक्षित लक्ष्य हासिल करने के लिए अतिरिक्त पर्यवेक्षकों को भी तैनात किया जा रहा है। एसआईआर अभियान 09 दिसम्बर तक जारी रहेगा और इसके बाद प्राप्त आंकड़ों का सत्यापन कर अंतिम मतदाता सूची जनवरी 2026 में प्रकाशित की जाएगी।

राष्ट्रपति व पीएम से मिली विश्व विजेता भारतीय महिला क्रिकेट टीम

नयी दिल्ली। भारतीय महिला टीम ने विश्व चैंपियन बनने के बाद पीएम मोदी से दिल्ली स्थिति प्रधानमंत्री आवास पर मुलाकात की। इस दौरान भारतीय महिला टीम ने पीएम मोदी को साइन की हुई जर्सी गिफ्ट की। इसके बाद वर्ल्ड चैंपियन महिला टीम ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। गुरुवार को भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान टीम इंडिया की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने साइन की हुई जर्सी राष्ट्रपति को सौंपी। साथ ही ट्रॉफी के साथ पोज भी दिया। मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने भारतीय टीम की ऐतहासिक जीत की सराहना की। साथ ही करोड़ों लड़कियों की प्रेरणा बनने पर प्रोत्साहित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि इस जीत ने कई लड़कियों को प्रेरित किया है। वह युवा पीढ़ी के लिए आदर्श बन गई हैं। राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 की विजेता भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्यों ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने टीम को बधाई दी और कहा कि उन्होंने इतिहास रच दिया है और युवा पीढ़ी के लिए आदर्श बन गई हैं। उन्होंने कहा कि यह टीम भारत का प्रतिबिंब है। वे विभिन्न क्षेत्रों, विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमियों और विभिन्न परिस्थितियों का प्रतिनिधित्व करती हैं, लेकिन वे एक टीम हैं- भारत। गौरतलब हो कि भारतीय टीम ने 2 नवंबर को महिला वर्ल्ड कप के फाइनल में साउथ अफ्रीका को हराकर अपना पहला आईसीसी खिताब जीता। नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेल गए फाइनल मुकाबले में भारत ने साउथ अफ्रीका को 52 रन से हराया।

मल्टीप्लेक्स में महंगाई पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

कहा – कॉफी के 700 रुपये लेंगे तो कौन जाएगा सिनेमा हॉल
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मल्टीप्लेक्स थिएटर्स में टिकट के साथ बिकने वाले स्नैक्स और पेय पदार्थों की ऊंची कीमतों पर गहरी चिंता जाहिर की है। जस्टिस नाथ ने टिप्पणी की कि जब एक पानी की बोतल 100 रुपये और कॉफी 700 रुपये में बेची जा रही हो, तो दर्शक सिनेमा देखने क्यों आएंगे?
मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि ताज होटल में कॉफी 1,000 रुपये में मिलती है, क्या कोर्ट उसकी कीमत कंट्रोल कर सकता है? यह पूरी तरह ग्राहक की पसंद का मामला है। जवाब में जस्टिस नाथ ने कहा कि सिनेमा हॉल पहले से ही घटते जा रहे हैं। अगर कीमतें उचित नहीं रहीं, तो थिएटर सूने पड़ जाएंगे। मल्टीप्लेक्स को ऐसी दरें तय करनी चाहिए जो लोगों को सिनेमा की ओर आकर्षित करें। रोहतगी ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट की रोक का जिक्र किया। दरअसल, कर्नाटक सरकार ने नियम बनाकर फिल्म टिकट की अधिकतम कीमत 200 रुपये निर्धारित की थी, जिस पर कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स ने विरोध जताया। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 23 सितंबर को इस नियम के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। इसके बाद डिवीजन बेंच ने 30 सितंबर को सिंगल बेंच के आदेश को कायम रखा, हालांकि कुछ अतिरिक्त शर्तें जोड़ीं हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने इन शर्तों पर भी अंतरिम रोक लगा दी है। जब रोहतगी ने कहा कि महंगा लगे तो मल्टीप्लेक्स न जाएं, सामान्य सिनेमा हॉल चुन लें, तो जस्टिस नाथ ने पलटकर पूछा अब सामान्य सिनेमा हॉल बचे ही कहां हैं?

 

एसआईआर के एन्यूमरेशन फॉर्म अब ऑनलाइन उपलब्ध

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत अब एन्यूमरेशन फॉर्म ऑनलाइन भी उपलब्ध होंगे। गुरुवार सुबह से मतदाता चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल एप के माध्यम से फॉर्म डाउनलोड हो रहे हैं और इसे भरा भी जा सकता है। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से सीधे फॉर्म प्राप्त करने में असमर्थ हैं, विशेषकर वे मतदाता जो नौकरी या अन्य कारणों से राज्य से बाहर रहते हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार, ऑनलाइन फॉर्म तक पहुंच मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पश्चिम बंगाल की वेबसाइट के जरिए संभव होगी। इसके अलावा, आयोग के मोबाइल एप ‘ईसीआइनेट’ पर भी यह सुविधा दी गई है। तकनीकी खामियों के कारण यह सुविधा मंगलवार से शुरू नहीं हो सकी थी, किन्तु आज गुरुवार से फॉर्म ऑनलाइन उपलब्ध हो गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फॉर्म डाउनलोड करने के बाद उसे ऑफलाइन की तरह ही भरना होगा और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप पोर्टल पर अपलोड करना होगा। अपलोड की विस्तृत गाइडलाइन पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। उधर, बीएलओ राज्य भर में घर-घर जाकर फॉर्म वितरित कर रहे हैं और मतदाताओं से आवश्यक जानकारियां इकट्ठा कर रहे हैं। आयोग द्वारा राज्य में 80 हजार से अधिक बीएलओ को इस अभियान में लगाया गया है। बुधवार रात आठ बजे तक कुल 1.10 करोड़ से अधिक एन्यूमेशन फॉर्म लोगों को दिए जा चुके हैं। बीएलओ के कार्य निरीक्षण और मतदाताओं की सुविधा के लिए राजनीतिक दलों ने अपने बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की नियुक्ति भी कर दी है।गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि देश के 11 अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी एक साथ जारी है। आयोग का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को पूर्ण, सटीक और अद्यतन बनाना है।

सुरेश रैना और शिखर धवन की 11.14 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्‍त

-ईडी ने अवैध सट्टेबाजी ऐप मामले में कार्रवाई
नयी दिल्‍ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित अवैध सट्टेबाजी ऐप के संचालन से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना और शिखर धवन की 11.14 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्‍त की हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने गुरुवार को बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शिखर धवन की 4.50 करोड़ रुपये की अचल-संपत्ति और सुरेश रैना के 6.64 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश को जब्‍त कर लिया गया है। ईडी को जांच में पता चला है कि दोनों पूर्व क्रिकेटरों ने विदेशी कंपनियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट कर अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म 1 एक्स बेट को प्रमोट किया। ईडी का दावा है कि रैना और धवन ने इस एप के जरिए सट्टेबाजी में शामिल होकर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की थी। ईडी ने ऑनलाइन सट्टेबाजी साइट ‘1एक्सबेट’ के मामले में अपनी जांच के तहत युवराज सिंह, सुरेश रैना, रॉबिन उथप्पा और शिखर धवन जैसे क्रिकेटरों और अभिनेता सोनू सूद, मिमी चक्रवर्ती (पूर्व तृणमूल सांसद) और अंकुश हाजरा (बांग्ला सिनेमा) से पूछताछ की थी। इसके अलावा कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से भी पूछताछ की गई थी और इनके बयान भी दर्ज किए थे। ईडी ने बताया कि इन दोनों खिलाड़ियों ने वनएक्सबेट और उससे जुड़े सरोगेट ब्रांड्स का जानबूझकर प्रचार किया, जिससे भारत में अवैध सट्टेबाजी को बढ़ावा मिला। इसके साथ ही खिलाड़ियों ने विदेशी कंपनियों के साथ प्रचार अनुबंध किए और उनका भुगतान विदेशी माध्यमों की मदद से लेयर ट्रांजैक्शन के जरिए कराया। अवैध फंड्स की असल पहचान भी छिपाई गई।ईडी ने 1 हजार करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले का खुलासा किया है। इसमें 6,000 से ज्यादा म्यूचुअल खाते और कई असत्यापित भुगतान गेटवे शामिल हैं। ईडी ने अब तक 4 करोड़ रुपए से ज्यादा की धनराशि और 60 बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। फिलहाल आगे की जांच जारी है।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार जीता विश्व कप

-52 साल बाद रचा इतिहास
नयी दिल्ली । भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने रविवार को फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर पहली बार वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया। यह जीत 52 साल के लंबे इंतजार के बाद मिली है। नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर अपना पहला आईसीसी महिला वनडे विश्व कप खिताब जीत लिया। भारत की इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और नेताओं ने टीम इंडिया को बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 के फाइनल में भारतीय टीम की शानदार जीत! फाइनल में उनका प्रदर्शन अद्भुत कौशल और आत्मविश्वास से भरा रहा। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में असाधारण टीम वर्क और दृढ़ता दिखाई। हमारी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई। यह ऐतिहासिक जीत भविष्य की चैंपियन खिलाड़ियों को खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित करेगी।” गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी बधाई संदेश में कहा, “विश्व विजेता टीम इंडिया को सलाम! यह राष्ट्र के लिए गर्व का क्षण है, जब हमारी बेटियों ने आईसीसी महिला विश्व कप 2025 अपने नाम किया है। देशभर में जश्न का माहौल है और यह ऐतिहासिक जीत अब आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी है।

भारत की जीत पर भावुक हो गयीं झूलन, मिताली व अंजुम

कोलकाता । भारत ने महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर पहला आईसीसी खिताब जीत लिया। हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली टीम इंडिया ने डीवाई पाटिल स्टेडियम में इतिहास रचते हुए महिला वनडे क्रिकेट की नई विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। 2005 और 2017 में फाइनल में हार झेल चुकी भारतीय टीम ने आखिरकार सपना पूरा कर दिखाया। इस जीत ने देशभर के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को भावुक कर दिया और महिला क्रिकेट में एक नए युग की शुरुआत की है। वर्ल्ड कप भले ही हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में आया है, लेकिन इसके पीछे दशकों का संघर्ष छिपा है। झूलन गोस्वामी, मिताली राज और अंजुम चोपड़ा जैसी दिग्गजों ने अपनी मेहनत से इसकी नींव रखी थी। रविवार को जब भारत चैंपियन बना, तो ये पूर्व खिलाड़ी खुशी के आंसुओं को रोक नहीं पाईं। ट्रॉफी प्रेजेंटेशन के बाद खिलाड़ियों ने मैदान का लैप ऑफ ऑनर लिया। इसी दौरान कमेंट्री बॉक्स में मौजूद झूलन गोस्वामी, मिताली राज और अंजुम चोपड़ा से भारतीय टीम मिली। जश्न में इन तीनों को शामिल किया गया और ट्रॉफी उठाने का सम्मान भी उन्हें सौंपा गया।कप्तान हरमनप्रीत कौर ने जब ट्रॉफी झूलन गोस्वामी को थमाई, तो वह भावुक हो गईं। झूलन की आंखों से आंसू छलक पड़े और वे लंबे समय तक हरमनप्रीत को गले लगाकर रोती रहीं। जीत के बाद झूलन ने एक्स पर लिखा, ‘यह मेरा सपना था, और तुमने इसे सच कर दिखाया। कप अब घर आ गया है।’ झूलन ने आगे खुलासा किया कि स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर ने उनसे खास वादा किया था। उन्होंने कहा, ‘वर्ल्ड कप से पहले स्मृति और हरमन ने मुझसे कहा था कि हम यह कप आपके लिए जीतेंगे। पिछले साल 2022 में हम सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच पाए थे, लेकिन इस बार जरूर जीतेंगे। आधी रात को वे मेरे कमरे में आईं और बोलीं, हमें नहीं पता अगली बार आप रहेंगी या नहीं, लेकिन हम आपके लिए ट्रॉफी लाएंगे। आज उन्होंने वादा निभाया, इसलिए मैं भावनाओं को काबू नहीं कर पाई।’

गुमनाम नायक हैं भारतीय महिलाओं को विश्व विजेता बनाने वाले अमोल मजुमदार

मुम्बई । महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर पहली बार खिताब अपने नाम किया। हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली टीम इंडिया ने लगातार तीन मैच हारने के बाद टूर्नामेंट में शानदार वापसी की और इतिहास रचते हुए महिला वनडे क्रिकेट की नई विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इस जीत का एक ‘साइलेंट हीरो’ भी है, जो पर्दे के पीछे से लगातार भारतीय महिला टीम को सपोर्ट कर रहा था और उन्हें इस काबिल बनाया कि वह इस बड़े टूर्नामेंट को जीत सकें। यह और कोई नहीं बल्कि टीम के हेड कोच अमोल मजूमदार हैं। मजूमदार भारत के उन चुनिंदा क्रिकेटरों में से एक हैं, जो बेहद टेलेंटेड होने के बावजूद भारत के लिए अभी नहीं खेल पाये। मजूमदार कहते हैं कि वे ‘गलत दौर’ में पैदा हुए थे, जब भारतीय टीम में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज मौजूद थे। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 11 हज़ार से अधिक रन बनाने के बावजूद उन्हें कभी भारतीय सीनियर टीम की जर्सी नहीं मिली। छोटे कद के दाएं हाथ के बल्लेबाज मजूमदार अपनी ताकत की बजाय बेहतरीन टाइमिंग के लिए मशहूर थे। अमोल की प्रतिभा बचपन से ही झलकती थी। शारदाश्रम इंग्लिश स्कूल की टीम में खेलते हुए, जब सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने 664 रनों की विश्व ऐतिहासिक साझेदारी की थी, तब अगले बल्लेबाज के रूप में पैड पहनकर पवेलियन में मजूमदार ही बैठे थे। उस दिन उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से सभी का दिल जीत लिया। 1993-94 सीजन में रणजी ट्रॉफी डेब्यू किया और हरियाणा के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल में नाबाद 260 रन ठोके। यह उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी साबित हुई। इसके बाद वे ‘बॉम्बे स्कूल ऑफ बैट्समैनशिप’ की अगली बड़ी उम्मीद बन गए। शुरुआती दिनों में उन्हें ‘भविष्य का तेंदुलकर’ तक कहा जाने लगा। 1994 में भारत अंडर-19 टीम के उप-कप्तान बने और सौरव गांगुली आर राहुल द्रविड़ के साथ इंडिया ए में शानदार प्रदर्शन किया। घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने के बावजूद सीनियर टीम में जगह नहीं मिली। 2006-07 सीजन में मुंबई टीम की कप्तानी मिली। खराब शुरुआत के बावजूद टीम को चैंपियन बनाया और सर्वाधिक रनों का अशोक मांकड़ का रिकॉर्ड तोड़ा। अगस्त 2009 में बुच्ची बाबू टूर्नामेंट के लिए चयन न होने पर मुंबई छोड़ दी और असम के लिए खेलने लगे। इसके बाद पांच साल तक असम और आंध्र प्रदेश के लिए प्रोफेशनल क्रिकेटर रहे। 2014 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास लिया। संन्यास के बाद कोचिंग में कदम रखा। भारत अंडर-19 और अंडर-23 टीमों के बल्लेबाजी कोच, नीदरलैंड्स क्रिकेट टीम के सलाहकार, आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के बल्लेबाजी कोच और दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रीय टीम (भारत दौरे पर) को कोचिंग दी। मुंबई टीम के मुख्य कोच भी बने। 2023 में भारतीय महिला राष्ट्रीय टीम के हेड कोच नियुक्त हुए। उनके नेतृत्व में फोकस रहा: सख्त फिटनेस रूटीन, माइंडसेट ट्रेनिंग, आक्रामक-आधुनिक रणनीति और घरेलू टैलेंट को निखारना। यही फॉर्मूला विश्व कप जीत की नींव बना। अमोल मजुमदार ने 171 फर्स्‍ट क्‍लास मैचों की 260 पारियों में 48.13 की बेहतरीन औसत से 11167 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने 60 अर्धशतक और 30 शतक ठोके। वहीं, लिस्‍ट ए में मजूमदार ने 113 मैचों की 106 पारियों में 38.20 की औसत से 3286 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने तीन शतक और 26 अर्धशतक लगाए हैं। टी20 क्रिकेट उन्होंने ज्यादा नहीं खेला। 14 टी20 मैचों की 13 पारियों में मजूमदार ने 19.33 की औसत से 174 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने एक अर्धशतक लगाया।

महिला विश्व कप : वो लड़कियां, जिन्होंने भारतीय महिलाओं के सपनों को आकाश दिया

आईसीसी महिला विश्व कप जीतकर भारत की बेटियों ने इतिहास रच दिया है। भारतीय कप्‍तान हरमनप्रीत कौर से लेकर शैफाली वर्मा तक, इन सभी विश्‍व विजेताओं ने जोश, जज्‍बे और जुनून के साथ देश का मान बढ़ाया है। भारतीय महिला टीम के पहली बार इस खिताब के जीतने पर महिला क्रिकेट को बढ़ावा मिलने की उम्‍मीद जताई जा रही है। लेकिन, क्‍या आप जानते हैं कि ये बेटियां कैसे घर की दहलीज, सामाजिक और आर्थिक तंगी समेत कितनी बाधाओं को पार कर यहां तक पहुंची हैं। आइये आज आपको इन 16 विश्‍व विजेतओं के सफर के दिलचस्‍प किस्‍से बताते हैं।

लड़कों के खिलाफ खेला करती थीं हरमनप्रीत कौर
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्‍तान हरमनप्रीत कौर को कपिल देव की तरह विश्‍व विजेता कप्‍तान के तौर जाना जाएगा। उन्‍हें 2017 विश्व कप सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 171* रनों की पारी के लिए भी याद किया जाता है। हालांकि, उनकी यही एक बड़ी पारी नहीं है। पंजाब के मोगा की इस खिलाड़ी ने हमेशा बड़े मौके अपना सर्वश्रेष्‍ठ दिया है। उनका पहला वनडे शतक 2013 में इंग्लैंड के खिलाफ आया था।
वह 2018 के टी20 विश्व कप में भी शतक लगा चुकी हैं। ये उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। उनके पिता हरमंदर भुल्लर चाहते थे कि उनके बच्चों में से कोई एक खेल में शामिल हो और जब हरमनप्रीत का जन्म हुआ तो उन्होंने एक टी-शर्ट खरीदी जिस पर ‘अच्छा बल्लेबाज’ लिखा था, जो भविष्यसूचक साबित हुई। हरमनप्रीत अपने पिता के साथ घर के सामने वाले स्टेडियम में स्थानीय लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थीं।
स्मृति मंधाना ने 9 साल की उम्र में किया राज्य स्तर पर डेब्‍यू
महाराष्ट्र के सांगली के एक क्रिकेट प्रेमी परिवार में जन्मी स्मृति मंधाना की इस खेल में रुचि तब जागी, जब उन्होंने अपने भाई श्रवण को अंडर-16 स्तर पर महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते देखा। बाएं हाथ की इस खिलाड़ी ने 9 साल की उम्र में राज्य स्तर पर डेब्‍यू किया और 16 की उम्र में अप्रैल 2013 में बांग्लादेश के खिलाफ भारत के लिए पहला मैच खेला। 2016 में मंधाना होबार्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला वनडे शतक लगाकर सीमित ओवर के फॉर्मेट में एक विश्वसनीय सलामी बल्लेबाज बन गईं।
उन्होंने अगले दशक में कई उपलब्धियां हासिल कीं, जिनमें वनडे में नंबर 1 बल्लेबाज का दर्जा भी शामिल है। जुलाई 2022 में उन्हें भारत की एकदिवसीय टीम की उप-कप्तान नियुक्त किया गया और इस अतिरिक्त ज़िम्मेदारी ने उन्हें एक खिलाड़ी के रूप में और भी बेहतर बना दिया है। स्मृति सर्वाधिक महिला वनडे में शतकों के मेग लैनिंग के रिकॉर्ड से केवल एक शतक (14) पीछे हैं।
महाराष्ट्र के लिए हॉकी भी खेल चुकी हैं जेमिमा रोड्रिग्स
2017-18 के बीसीसीआई पुरस्कारों में जूनियर घरेलू वर्ग में सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर चुने के बाद मुंबई की जेमिमा रोड्रिग्स पहली बार सुर्खियों में आईं। रोड्रिग्स ने 17 साल की उम्र में वडोदरा में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे में भारत के लिए डेब्‍यू किया था। बल्लेबाजी क्रम में ऊपर-नीचे होने के बावजूद 25 वर्षीय इस खिलाड़ी ने किसी भी क्रम पर ढलने की क्षमता दिखाई है। रोड्रिग्स की एक बड़ी खूबी यह है कि वह पहले या दूसरे क्रम की टीम पर अनावश्यक दबाव डाले बिना अपनी पारी की गति को नियंत्रित कर पाती हैं। एक बल्लेबाज के रूप में अपनी प्रसिद्ध प्रतिष्ठा के बावजूद उनके व्यक्तित्व का एक और पहलू उनकी जबरदस्त मानसिक शक्ति है। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ मैच में बाहर होने के बाद वापसी करते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में 134 गेंदों पर नाबाद 127 रन बनाकर भारत को फाइनल में पहुंचाया था। जेमिमा रोड्रिग्स ने अंडर-17 स्तर पर फील्ड हॉकी में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया था।
उत्तर प्रदेश के आगरा की ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा का सफर एक थ्रो से शुरू हुआ। वह बचपन में अपने भाई सुमित के साथ स्‍टेडियम में जाया करती थीं। एक बार दीप्ति ने अपनी ओर आती गेंद उठाई और उसे गोली की तरह वापस फेंक दिया। ये थ्रो पूर्व भारतीय खिलाड़ी हेमलता काला की नजर में आ गई और वह क्रिकेट की दुनिया में आ गईं। 17 साल की उम्र में उन्‍होंने भारत के लिए डेब्‍यू किया। उनके भाई सुमित ने एक दशक पहले दीप्ति को पूर्णकालिक प्रशिक्षण देने के लिए अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी थी। वह वनडे क्रिकेट में 150 विकेट पूरे कर चुकी हैं और भारतीयों में केवल झूलन गोस्वामी से पीछे हैं। अपने करियर के शुरुआती दिनों में शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी करने के बाद उन्होंने निचले क्रम में अपनी पहचान बनाई है। दीप्ति शर्मा का वनडे में सर्वोच्च स्कोर 188 है, जो किसी भारतीय महिला खिलाड़ी का सर्वश्रेष्ठ स्कोर है। यह स्कोर उन्होंने 2017 में आयरलैंड के खिलाफ बनाया था।ऋचा घोष को टेनिस प्‍लेयर बनाना चाहते थे पिता
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष के पिता मानबेंद्र घोष ने उन्‍हें हमेशा पावर हिटर बनने के लिए प्रेरित किया। जहां कोच उसकी बुनियादी बातों पर ध्यान केंद्रित करते थे, वहीं मानबेंद्र ने ऋचा को चौके-छक्के लगाने का प्रशिक्षण लेने के लिए प्रोत्साहित किया। भले ही इसके लिए उनके घर की कुछ खिड़कियां टूटी हुई थीं। पिता पहले चाहते थे कि ऋचा टेबल टेनिस खेले, लेकिन ऋचा ने क्रिकेट पर ज़ोर दिया और बाघाजतिन एथलेटिक क्लब में दाखिला लेने वाली पहली लड़की बनीं। जहां से कोलकाता सर्किट पर पुरुष क्रिकेटरों के साथ उनका सफ़र शुरू हुआ। ऋचा के सफ़र में मदद करने के लिए पिता ने सिलीगुड़ी में अपना व्यवसाय बंद कर दिया और कोलकाता की यात्राओं पर उनके साथ जाने लगे। डब्ल्यूपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु में शामिल होने के बाद से उनकी पावर-हिटिंग में एक-दो पायदान का सुधार हुआ है। ऋचा घोष ने 16 साल की उम्र में अपना टी20I डेब्यू किया था।

हरलीन देओल को चंडीगढ़ शिफ्ट होना पड़ा
हरलीन देओल ने हिमाचल प्रदेश में जूनियर क्रिकेट में एक कुशल बल्लेबाज और उपयोगी ऑफ-ब्रेक गेंदबाज के रूप में अपनी पहचान बनाई है। हालांकि, सुविधाओं की कमी और अविकसित क्रिकेट संस्कृति के कारण उन्हें चंडीगढ़ शिफ्ट होना पड़ा, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उन्होंने सबसे पहले महिला टी20 चैलेंज में अपने प्रदर्शन से सुर्खियां बटोरीं और इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें 2019 में इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला के लिए टीम में शामिल किया गया। उनके लिए यादगार पल 2021 में आया, जब उन्होंने अपनी फील्डिंग के लिए सुर्खियां बटोरीं।

नॉर्थम्प्टन में इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय मैच खेलते हुए उन्होंने लॉन्ग-ऑफ बाउंड्री पर एक बेहतरीन कैच लपका, जहां उन्होंने अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल करते हुए गेंद को समय पर बाउंड्री के अंदर पहुंचाया और फिर कैच लेने के लिए मैदान में वापस आ गईं। हाल ही में देओल को टीम में कुछ स्थिरता मिली और उन्होंने टूर्नामेंट की शुरुआत तीसरे नंबर के बल्लेबाज के रूप में की। इंग्लैंड में देओल के शानदार कैच को ईएसपीएन स्पोर्ट्स सेंटर पर दिखाया गया था और इंस्टाग्राम पर इस पोस्ट को 10 लाख से ज्‍यादा लाइक्स मिले।

प्रतिका रावल जिमखाना में प्रशिक्षण लेने वाली पहली लड़की
दिल्‍ली की सलामी बल्‍लेबाज प्रतिका रावल रोहतक रोड जिमखाना में प्रशिक्षण लेने वाली पहली लड़की हैं। जहां आज 30 लडकियां प्रशिक्षण ले रही हैं। उनके पिता प्रदीप रावल खुद क्रिकेट में रुचि रखते थे और बीसीसीआई-प्रमाणित अंपायर हैं। उन्‍होंने पहले ही तय कर लिया था कि वह अपनी पहली संतान को एथलीट बनाएंगे। प्रतिका मॉडर्न स्कूल में बास्केटबॉल में भी पारंगत थीं। लेकिन 9 साल की उम्र में उन्होंने तय कर लिया था कि क्रिकेट ही उनका रास्ता होगा। हालांकि लॉकडाउन के कारण भारतीय टीम में उनकी प्रगति में देरी हुई, लेकिन उन्होंने प्रदीप के साथ उनकी इमारत की छत पर अस्थायी नेट पर अभ्यास किया। प्रतिका एक मेधावी छात्रा भी रही हैं। उन्‍होंने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में 92 प्रतिशत से ज़्यादा अंक प्राप्त किए। वह मनोविज्ञान में स्नातक भी हैं। शैफाली वर्मा की जगह वनडे टीम में चुने जाने के बाद उन्होंने स्मृति मंधाना के साथ कम समय में ही शानदार ओपनिंग जोड़ी बनाई, हालांकि सेमीफाइनल से पहले चोट लगने के कारण उनका विश्व कप अभियान समाप्त हो गया। प्रतिका के नाम महिला वनडे में सबसे तेज़ 1,000 रन बनाने का रिकॉर्ड है।

धोनी और हरमन को अपना आदर्श मानती हैं उमा छेत्री
असम के गोलाघाट की रहने वाली विकेटकीपर-बल्लेबाज उमा छेत्री बचपन से ही एमएस धोनी और हरमनप्रीत कौर को अपना आदर्श मानती हैं। छेत्री 2025 महिला विश्व कप टीम में भारत के पूर्वोत्तर से एकमात्र खिलाड़ी हैं और जहां तक देश के उस हिस्से में महिला खेल के भविष्य का सवाल है, वे पूरे क्षेत्र की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करती हैं। मूल रूप से रिजर्व के रूप में चुनी गईं छेत्री को यस्तिका भाटिया के चोटिल होने के बाद टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद भारतीय टीम में शामिल किया गया। दरअसल, पहली पसंद की विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष को लगी एक और चोट ने छेत्री के लिए इस विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे में पदार्पण का रास्ता साफ किया। छेत्री ने भारत के लिए जुलाई 2024 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय में पदार्पण किया था।

क्रांति गौड़ ने टेनिस-बॉल मैचों से बनाई पहचान
मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िला मुख्यालय से दो घंटे की ड्राइव पर स्थित घुवारा में क्रिकेट प्रशिक्षण की कोई सुविधा नहीं है। लेकिन, एक पूर्व पुलिस कांस्टेबल की बेटी क्रांति गौड़ वहां के एकमात्र मैदान में टेनिस-बॉल क्रिकेट खेलने वाले लड़कों की तरह बनना चाहती थी। क्रांति अनुसूचित जनजाति परिवार में छह भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उन्‍होंने पहले टेनिस-बॉल मैचों में छक्के जड़ने वाली बल्लेबाज के रूप में अपनी पहचान बनाई और फिर छतरपुर स्थित कोच राजीव बिल्थारे, जो इस क्षेत्र में महिला क्रिकेट को बढ़ावा देते हैं, उनके संरक्षण में आई। परिवार ने लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने वाली एक लड़की के बारे में अपमानजनक और पूर्वाग्रही टिप्पणियों को क्रांति के क्रिकेट के सपनों के आड़े नहीं आने दिया। जब परिवार पर मुश्किलें आईं तो उसकी मां ने अपने गहने गिरवी रख दिए। उन्‍होंने इस विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ प्लेयर-ऑफ-द-मैच का पुरस्कार अपने नाम किया।

स्नेह राणा डब्‍ल्‍यूपीएल ऑक्‍शन में रह गईं थी अनसोल्‍ड
उत्तराखंड के देहरादून रहने वाली स्नेह राणा का नाम लगभग वापसी का पर्याय बन गया है। उन्होंने 2014 में डेब्‍यू किया था और 2016 के आसपास उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था। वापसी करने में उन्हें पांच साल लग गए और 2021 में इंग्लैंड में एकमात्र टेस्ट के लिए उन्होंने सफ़ेद जर्सी पहनी। यह उनके पिता भगवान सिंह के निधन के कुछ समय बाद हुआ, जिन्होंने स्नेह के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बचपन में स्नेह बाहरी गतिविधियों में रुचि रखने वाली और लड़कों के साथ कई खेल खेलने वाली महिला खिलाड़ी थीं। 9 साल की उम्र में उनकी प्रतिभा को पहचानकर उनके पिता ने उन्हें एक क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाया। स्नेह भारतीय टीम में आती-जाती रहीं, इसलिए उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी विविधताओं पर काम किया और अपनी बल्लेबाजी को बेहतर बनाने के लिए पावर-हिटिंग पर भी ध्यान केंद्रित किया। महिला प्रीमियर लीग में गुजरात जायंट्स की कप्तानी करने के बाद उन्हें 2025 सीजन से पहले रिलीज कर दिया गया और नीलामी में भी उन्हें नहीं चुना गया। लेकिन बाद में उन्हें आरसीबी ने एक प्रतिस्थापन के रूप में चुना और उन्होंने बल्ले और गेंद से इतना प्रभावित किया कि उन्हें भारतीय टीम में भी वापस जगह मिल गई।

लड़कों की टीम में खेला करती थीं रेणुका सिंह ठाकुर
हिमाचल प्रदेश के शिमला की रहने वाली रेणुका जब केवल 3 साल की थीं, तब उनके पिता की मृत्यु के बाद उनकी मां सुनीता और उनके भाई विनोद ने उनके सफर को आकार दिया। 2021 में भारतीय टीम में शामिल होने के बाद रेणुका ने बताया था कि उनके पिता को क्रिकेट बहुत पसंद था। उन्होंने मेरे भाई का नाम अपने पसंदीदा क्रिकेटर विनोद कांबली के नाम पर रखा था। रेणुका के पिता सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में काम करते थे। रेणुका भाई विनोद के साथ गांव के मैदान पर जाती थीं और लड़कों की टीम में खेलती थीं। रेणुका के चाचा भूपिंदर सिंह ठाकुर ने उन्हें धर्मशाला स्थित एचपीसीए महिला आवासीय अकादमी में ट्रायल्स में शामिल होने की सलाह दी थी। वहां उन्होंने अपनी फिटनेस और नियंत्रण में सुधार किया। रेणुका 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में 11 विकेट लेकर सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाली खिलाड़ी थीं।

सब्जी बेचा करते थे राधा यादव के पिता
मुंबई में जन्मी राधा यादव घरेलू क्रिकेट में बड़ौदा के लिए खेलती हैं और भारतीय टीम में चुनी जाने वाली गुजरात टीम की पहली महिला क्रिकेटर हैं। निस्संदेह, टीम की सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षक, राधा लंबे समय तक टी20I विशेषज्ञ रहीं और 2018 से इस प्रारूप में खेल रही हैं। 2021 में अपना वनडे डेब्यू करने के बाद उन्होंने 2024 तक इस प्रारूप में दोबारा नहीं खेला। अगर नई स्पिनर शुचि उपाध्याय चोटिल न होतीं, तो राधा शायद इस गर्मी में इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में जगह नहीं बना पातीं। कोच प्रफुल नाइक ने 2012 में कांदिवली के एक परिसर में युवा राधा को क्रिकेट खेलते देखा और यह बात उनके ज़ेहन में बस गई कि कैसे वह एक लड़के की ओर दौड़ीं, जो आउट होने के बावजूद बल्ला पकड़े हुए था। उन्होंने उनके पिता, जो एक सब्जी विक्रेता थे, को उन्हें क्रिकेटर बनाने के लिए मनाने की पहल की। यादव परिवार एक छोटे से घर में रहता था और खेलों पर खर्च नहीं कर सकता था। नाइक के स्थानांतरित होने पर राधा बड़ौदा चली गईं। राधा ने एक बार लगातार 27 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कम से कम एक विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाया था।

विकेटकीपर बनना चाहती थीं अरुंधति रेड्डी
अरुंधति रेड्डी ने 2018 में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया, लेकिन उन्हें वनडे खेलने का मौका पाने के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ा। 2024 में बेंगलुरु में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्हें 50 ओवरों के मैच में खेलने का मौका मिला और एक साल बाद उन्होंने विश्व कप के लिए जगह बनाई। घरेलू क्रिकेट में हैदराबाद के साथ अपना सफर शुरू करने और अपनी स्वाभाविक एथलेटिक क्षमता से प्रभावित करने के बाद अरुंधति रेलवे में चली गईं। अरुंधति बचपन में एमएस धोनी को अपना आदर्श मानती थीं और विकेटकीपर बनना चाहती थीं, लेकिन उनके कोचों ने उन्हें तेज़ गेंदबाज़ी ऑलराउंडर बनने के लिए प्रेरित किया।

पिता ने बनाया था अमनजोत कौर का पहला बल्ला
बढ़ई भूपिंदर सिंह ने एक शाम देखा कि उनकी बेटी अमनजोत परेशान थी, क्योंकि उनके पड़ोस के लड़के बल्‍ला नहीं होने पर उन्‍हें खेलने नहीं दे रहे थे। वह अपनी दुकान पर गए और देर रात एक लकड़ी का बल्ला लेकर लौटे, जिसे उन्होंने खुद बनाया था। चंडीगढ़ की ये पेस-ऑलराउंडर अमनजोत का ये पहला बल्ला था। तानों के बावजूद भूपिंदर ने उसे खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। जब वह 14 साल की हुई तो वह अमनजोत को कोच नागेश गुप्ता के पास ले गए। शुरुआत में उसके लिए जगह न होने के बावजूद नागेश ने उसे अपने साथ ले लिया। अमनजोत अपने टी20I डेब्यू में प्लेयर ऑफ़ द मैच रहीं, लेकिन पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर और हाथ के लिगामेंट में चोट के कारण उन्हें 2024 का एक बड़ा हिस्सा मिस करना पड़ा। इस साल मुंबई इंडियंस के साथ WPL में अमनजोत ने अपनी वापसी के संकेत दिए। अमनजोत महिला विश्व कप में आठवें या उससे नीचे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 50+ का स्कोर बनाने वाली केवल दूसरी खिलाड़ी हैं, ये कमाल उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ किया था।

एमएसके प्रसाद ने पहचानी श्री चरणी की प्रतिभा
आंध्र प्रदेश के कडप्पा की रहने वाली श्री चरणी जब तीसरी कक्षा में थीं, तब चरणी ने अपने मामा किशोर रेड्डी के साथ उनके घर पर प्लास्टिक के बल्ले से खेलना शुरू किया। इसके बाद उन्‍होंने अपनी उम्र से कहीं बड़े खिलाड़ियों के साथ खेलना शुरू कर दिया। तब उन्‍हें क्रिकेट का सिर्फ शौक था, लेकिन यही चरणी के तेजी से आगे बढ़ने का आधार बना। स्कूल के शुरुआती दिनों से ही वह एथलेटिक्स के प्रति गंभीर थीं। जब वह दसवीं कक्षा में थीं तो उनके शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षक नरेश उन्हें गाचीबोवली स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षण केंद्र में चयन के लिए हैदराबाद ले आए। भारत के पूर्व चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने उनकी एथलेटिक क्षमता को देखा और उन्हें क्रिकेट में हाथ आजमाने का सुझाव दिया। डब्ल्यूपीएल में चरणी ने इतना प्रभावित किया कि उन्हें वनडे टीम में जगह मिल गई।

पिता ने 10 साल की उम्र में शैफाली का करया था बॉय कट
हरियाणा के रोहतक की रहने वाली शैफाली की कहानी भी कुछ कम दिलचस्‍प नहीं है। पिता संजीव वर्मा ने 10 साल की उम्र शैफाली के बाल बहुत छोटे करवा दिए, ताकि वह लड़कों की एक स्कूल टीम में खेल सके। शैफाली उस टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनी। शैफाली को भारतीय क्रिकेट का ध्यान अपनी ओर खींचने में ज़्यादा समय नहीं लगा। डब्ल्यूपीएल, महिला टी20 चैलेंज के पहले सीजन में 15 साल की उम्र में उनका ज़बरदस्त आक्रामक अंदाज महिलाओं के खेल में पहले कभी नहीं देखा गया था। वह सचिन तेंदुलकर की बहुत बड़ी फैन हैं। उन्होंने पहले अंडर-19 टी20 विश्व कप में महिलाओं के किसी भी आयोजन में भारत को अपना पहला आईसीसी खिताब भी जिताया था। प्रतिका रावल के चोटिल होने बाद उनका वनडे टीम में शानदार कमबैक हुआ है। शैफाली मिताली राज के बाद टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाली दूसरी भारतीय महिला हैं।