कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई ने एचआईवी जागरूकता पर एक गहन अभियान का आयोजन किया जिसमें एक रैली और एक फ्लैशमॉब प्रदर्शन शामिल था, जिसका उद्देश्य एचआईवी/एड्स की रोकथाम, उपचार और कलंक उन्मूलन के विषय में समुदाय को संवेदनशील बनाना है। इस रैली में पोस्टर्स, बैनरों संदेश देने के लिए लिफलेट्स आदि से लैस रही। इस कार्यक्रम में गतिविधियों के उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक आउटरीच सह स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का गठन किया गया , जिसका उद्देश्य एचआईवी/एड्स पर सटीक जानकारी का प्रसार करना और बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति समावेशी और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण को बढ़ावा देना था।पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल राज्य एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण सोसायटी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागों का सहयोग प्राप्त हुआ।
यह आयोजन शनिवार, 1 नवंबर 2025 को दोपहर दो बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक आयोजित किया गया था।
इस कार्यक्रम रैली में 1 कार्यक्रम अधिकारी के साथ 50 एनएसएस स्वयंसेवकों और प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
एचआईवी/एड्स के कारणों, संचरण के तरीकों और निवारक उपायों के बारे में आम जनता में जागरूकता पैदा करना औरसार्वजनिक जागरूकता के माध्यम से एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों से जुड़ी गलत धारणाओं और सामाजिक कलंक को कम करना। के लिए रैली का आयोजन किया गया ।
साथ ही रचनात्मक और इंटरैक्टिव तरीकों के माध्यम से स्वास्थ्य-उन्मुख सामुदायिक आउटरीच पहल में युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना प्रमुख उद्देश्य था ।
कार्यक्रम की शुरुआत एक रैली से हुई जो भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज परिसर से शुरू हुई और आसपास की सड़कों से होते हुए फोरम मॉल तक पहुंची। स्वयंसेवकों ने जागरूकता पोस्टर और बैनर लिए और पैदल चलने वालों और यात्रियों को पत्रक वितरित किए जिनमें एचआईवी की रोकथाम, परीक्षण और उपलब्ध स्वास्थ्य देखभाल संसाधनों पर सत्यापित जानकारी थी। रैली का उद्देश्य जनता का ध्यान आकर्षित करना और जागरूकता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी के संदेश देना था।
रैली के बाद, फोरम मॉल के सामने एक फ्लैशमोब का प्रदर्शन किया गया, जो जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए एक अभिनव और आकर्षक मंच के रूप में अपनी उद्देश्य परक सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन किया। प्रदर्शन में विषयगत नाटक, नृत्य खंड और सुरक्षित स्वास्थ्य प्रथाओं, सहानुभूति और समावेशन पर जोर देने वाले प्रभावशाली नारे शामिल थे।
एचआईवी जागरूकता अभियान ने अपने इच्छित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसने एचआईवी/एड्स की गहरी सार्वजनिक समझ को बढ़ावा दिया और निवारक स्वास्थ्य व्यवहार को प्रोत्साहित किया और प्रचलित सामाजिक कलंक को कम करने में मदद की। स्वयंसेवकों के लिए यह कार्यक्रम एक मूल्यवान अनुभवात्मक शिक्षा रही और जिसने नागरिक भावना, सहानुभूति और सामुदायिक जुड़ाव को मजबूत किया। भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज की एन एस एस की प्रमुख प्रो गार्गी ने कार्यक्रम को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डाॅ वसुंधरा मिश्र ने जानकारी देते हुए बताया कि एनएसएस इकाई, संकाय सदस्यों और छात्रों के बीच इस प्रकार का सहयोग सामाजिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता के प्रति संस्थान की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
-डॉ वसुंधरा मिश्र, भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज, कोलकाता
डॉ कृष्ण बिहारी मिश्र ने अपनी संस्कृति, अपने मूल्यों को रचनाधर्मिता में परिणत किया है और उनका संरक्षण किया है। यही मनुष्य की पूर्णता है। डाॅ राधाकृष्णन ने कहा था कि प्रत्येक मनुष्य में एक ही आत्मा का वास होता है। आत्मा के सत्य को पाकर वह जीवन के सत्य को भी पा सकता है।
‘मकान उठ रहे हैं’ (पृष्ठ 55)के संदर्भ में ‘इक्कीसवीं सदी की अगुवानी में एक पाती’ जिसमें हजारीप्रसाद द्विवेदी जी की यह टिप्पणी बहुत ही महत्वपूर्ण है जिसमें वे मानते हैं कि यदि सभ्यताओं के प्रसार के साथ मानवीय चिन्मय मूल्यों का आधिकारिक सामाजिकीकरण होता है, तो समझना चाहिए कि सभ्यता का विकास सही रास्ते पर हो रहा है, लेकिन यदि चिन्मय मानवीय मूल्य अधिकाधिक संकुचित क्षेत्र में ही सिमटने लगे, ईमानदारी और सच्चाई ‘कम्पार्टमेंटल’ होती चली जाए और जड़ वस्तुओं का महत्व ही समाज में प्रतिष्ठित होता जाए तो समझना चाहिए कि सभ्यता गलत रास्ते पर जा रही है। ये पत्र कृष्ण बिहारी मिश्र जी अपने मित्र शंकर माहेश्वरी जी को लिखा था ।
आज मानवीय मूल्यों पर निर्मम तरीके से प्रहार हो रहा है और इक्कीसवीं सदी की अगुवाई करने वाला मनुष्य क्या मूल्यों से पूर्णतः रिक्त होगा? यह विश्वयुद्ध की विनाशलीला से कम भयावह नहीं है कि मनुष्य का मूल्य मर जाए! मूल्यबोध गंवाकर जीने का मूल्य क्या है?
आज विश्व धर्म के प्रति अविश्वास और नैतिक मूल्यों के प्रति विद्रोह की भावना से सुलग रहा है ।विज्ञान और औद्योगिकी की जबर्दस्त और चामत्कारिक उपलब्धियों के बावजूद मनुष्य का मन एक गहरे शून्य से भर गया है। वह नहीं जानता कि इन शून्य को कैसे भरा जाए। हर चीज की छानबीन और पूछताछ की जाती है, सब कुछ वैज्ञानिक ढंग से, तार्किक ढंग से समझाना पड़ता है।
बौद्धिक और नैतिक दोनों दृष्टियों से क्या आश्वस्त किया जा सकता है? संभवतः यह बड़ा प्रश्न है। मनुष्य धर्म के विषय में कौन सा धर्म युक्तिसंगत धर्म है? हर व्यक्ति अपने धर्म को अभीष्ट मानता है। प्रश्न उठता है कि क्या धर्म का लक्ष्य तर्क और चेतना के मार्ग से प्राप्त किया जा सकता है?
जहाँ तक हमारे देश का संबंध है हम युक्तिमूलक धर्म ब्रह्म विद्या के विषय में जिज्ञासा कर सकते हैं। ‘ब्रह्म विद्यायां योगशास्त्रे श्री कृष्णार्जुन संवादे’ में युक्तिसंगत खोजबीन है ।हम सबसे पहले प्रश्न करते हैं कि दुनिया क्या है। यदि ब्रह्मविद्या को जान लिया जाए तो कई प्रश्नों का समाधान मिल जाता है। व्यवहारिक अनुशासन को जो बौद्धिक विचार को जीवन के विश्वास में परिणत कर देता है, उसे ही सरल रूप में ‘योगशास्त्र’ कह सकते हैं ।आत्मा और परमात्मा का मिलन कृष्णार्जुन संवाद है ।यही अंत है, यही लक्ष्य, यही पूर्णता है।
इसके लिए हमें तप की ओर जाना ही होगा तभी हम जान पाएंगे कि वह क्या है?
महान वैयाकरण पाणिनी कहते हैं कि किसी भी वस्तु को पहली बार देखने पर संतुष्ट न होने पर पुनर्विचार करना ही तपस्या है। ऐसा करने से एक के बाद एक मूल्यों का निरंतर उद्घाटन होता जाएगा। पदार्थ से जीवन, जीवन से मन और मन से बुद्धि का एक निश्चित क्रम है। इसके बाद ही आत्मशांति और परमानन्द की प्राप्ति होती है। इस तपस्या की अनुभूति किसी दूसरे के कहने से नहीं होती बल्कि अपनी आंखों से देखते हैं, हृदय से महसूस करते हैं। एक ऐसा दर्शन जो अपनी खोज करता है और अपने आप को अनुशासित करता है और धर्म का लक्ष्य प्राप्त करता है। यही ईश्वर का प्रत्यक्ष दर्शन है, यही वह धर्म है जो इसके बाद विश्व में प्रचलित होगा।
डॉ कृष्ण बिहारी मिश्र की बौद्धिक और नैतिक तपस्या ने लेखन के माध्यम से मनुष्य धर्म के गुणों को उभारने का महत् कार्य किया है।
भोजपुरी अंचल की राग चेतना और मूल्य चेतना और मूल्य चेतना के मणिकांचन योग हैं कृष्ण बिहारी मिश्र। यही ब्रह्म विद्या और परम आनंद चेतना से पूर्ण उनका संवाद है, बतकही है, बतरस है जो प्रकृति को, मनुष्य वृत्ति को, प्रेम को, लोकराग को मनुष्य की मूल चेतना से योग कराता है। रामकृष्ण परमहंस, माँ शारदा, विवेकानंद, रवीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्य भूमि बंगाल की माटी से उनका जुड़ाव अंत तक बना रहा।
एक ओर डाॅ मिश्र आस्थावान हैं, विनम्र हैं, आस्तिक हैं, आध्यात्मिक हैं, पर दुःखकातर हैं, दूसरे की विवशताओं को समझने वाले आत्मीय हैं तो दूसरी ओर मूल्य चेतना की अवहेलना करने वाले के प्रति कठोर भी हैं। किसी का आच
आचरण, विचार या सर्जना सामाजिक मूल्य, मानवीय गरिमा, भारतीय मनीषा की क्षति करने वालों से उन्हें परहेज है और ऐसे लोगों का वे व्यक्तिगत स्तर पर प्रतिकार करते हैं साथ ही सार्वजनिक रूप से भी उसकी बखिया उधेड़ने से भी नहीं चूकते।
हिंदी पत्रकारिता उनके अनुशीलन का महत्वपूर्ण विषय है जिसमें उन्होंने अपने को एक साधक की तरह तपाया है ।पत्रकारिता पर डॉ मिश्र के ग्रंथ हिंदी की धरोहर हैं। उनके ललित निबंधों में गहरी संवेदनशीलता है जो इन्हें भारतीय दर्शन और अध्यात्म के उच्चतम सोपान पर प्रतिष्ठित करता है। ‘नेह के नाते अनेक ‘, ‘आँगन की तलाश ‘, ‘बेहया का जंगल ‘, ‘मकान उठ रहे हैं ‘(1990),आदि ललित निबंध संग्रह हैं जिनके शीर्षक ही अपनी कहानी कहने में सक्षम है। उपभोक्ता संस्कृति के बढ़ते प्रकोप और आधुनिकता की आंँधी के कारण मानवीय गुणों का ह्रास होता चला जा रहा है ।
डॉ मिश्र की यही प्रमुख बैचैनी, उदासी थी जिससे वे सदैव चिंतित भी रहते थे। वे अपने को निरंतर जांचते और परखते रहते थे, उनके लिए भारतीयता के मूल्य, आदर्श और संस्कृति विरासत के लिए एक अलग दृष्टि थी।
उनकी सर्जनात्मक चिंताएं अपने पाठक को न्योता देती हुई दिखाई पडतीं हैं कि वह स्वयं अपनी समृद्धि, सांस्कृतिक विरासत को परखने और इसको पहचानने के लिए उत्सुक हों। यही रचनात्मक प्रक्रिया व्यष्टि से समष्टि की ऊंचाई तक पहुंचती है। यही तो धर्म की सर्वश्रेष्ठ सीढ़ी है जहांँ मूल्य और आदर्श की पराकाष्ठा दिखाई देती है। यही योग है। यही धर्म है।
बेहया का जंगल, निबंध संग्रह में 11 निबंधों का संकलन है इसकी भूमिका अज्ञेय जी ने लिखी है। ललित निबंध में जिसमें ललित निबंध के विषय में सारगर्भित निबंध है। डॉक्टर शिव प्रसाद सिंह ने पुरोवाक् लिखा है जो निबंधों पर प्रकाश डालता है। डॉक्टर मिश्र जी ने स्वयं स्वीकार किया है कि मूलतः वे ग्रामीण होने के कारण उनकी संवेदना देहाती चेहरे- चरित्रों और परिदृश्यों से जुड़ी हुई है। अपने गांव -जजार की व्यथा- कथा के माध्यम से पूरे भारत के गांवों की समस्या को देश के आधारभूता शक्ति को स्पर्श करने की इन निबंधों में कोशिश की है।
ये ललित निबंध सामाजिक समस्याओं पर भी प्रकाश डालते हैं। ललित निबंध पाठक के साथ घुलमिल जाता है और बातकही करता है। निबंधकार या ललित गद्य रचने वाला बहुश्रुत ,बहुपठित, शैलीकार तथा लोक चेतना से संपृक्त होता है। तभी वह श्रेष्ठ रचना देता है।
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, डॉक्टर विद्या निवास मिश्र, डॉक्टर कुबेरनाथ राय के बाद डॉक्टर कृष्ण बिहारी मिश्र जी का नाम उभर कर आता है। इन निबंधों में पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति ,बिरहा ,चैता, फाग, कजली, रीति -रिवाज, पर्व -त्यौहार तो हैं ही साथ ही कलकत्ते के जनजीवन के सामंजस्य से उत्पन्न आधुनिकता भी झांकती है। लेखक का मन बार-बार अपने गांव की ओर भागता है।
‘बेहया का जंगल’ पहला निबंध है और ‘नयी-नयी घेरान’ के आधार पर ही पुस्तक का शीर्षक रखा गया है। यह ‘कल्पना’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। जब आदमी बेहया बन जाता है ,कोई भी बड़ा से बड़ा काम करते हुए भी संकोच नहीं करता तब उसमें ढीठ संस्कार का जन्म होता है। और वह जंगली कानून के राज्य में ले जाता है जहां कई प्रकार के अंधकार और संकीर्णताएं फलती फूलती हैं( पृष्ठ 8)। डॉ कृष्ण बिहारी की यही चिंता और उदासी का कारण रहा है। ये लेख आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी के निबंधों की भी याद दिलाते हैं जहां वे मानवीय वृत्तियां जैसे लोभ ,क्रोध आदि के उद्भव और उसके व्यैक्तिक, सामाजिक और वैश्विक दुष्प्रभावों पर भी चिंता करते हैं। डॉ मिश्र संसार में व्यक्ति के मूल्यों में ह्रास का प्रमुख कारण लालच- प्रलोभन ही बताते हैं। उनका मानना है कि गंवार गोपियों की तरह होना चाहिए जो प्रलोभनों से दूर रहीं और कृष्ण ही उनका प्राप्य रहा।
‘ निर्गुण कौन देश को वासी’ में समाज में बढ़ती अंध श्रद्धा के प्रति चिंतित हैं, दुखी हैं। जिनमें बौद्धिक साहस नहीं है, उन्हें बुद्धिजीवी या स्वार्थी लोगों को समाज सुधारक या ठाठ बाट वालों को राजनेता का दर्जा दिया जा रहा है। समाज में हो रही बौद्धिक ह्रास के प्रति उदासी है।
‘टूटती तस्वीर’ निबंध में कहते हैं -‘राजनीति जनता की छाती पर नारे धुनने लगी है। ‘लोकतंत्र की हिफाजत के प्रति लेखक चिंतित और बेचैन है।
लोक संस्कृति के बात ‘फगुआ की तलाश गोइंछा गमकत जाइ’ आदि निबंध है जिनमें मनुष्य के रस लोक की रक्षा में पर्व मनाए जाते हैं। आज ‘शहरी आत्मीयता के फंदे में गांव भी फंसता जा रहा है।वे कहते हैं कि सच यह है कि हम गांव के रूढ़ रिवाज जी रहे हैं। गांव का चरित्र नहीं जी रहे हैं ।(पृष्ठ 64, बेहया के जंगल )। अज्ञेय जी ने कहा है की मिश्र जी के निबंध कुम्हार के मिट्टी के बर्तन की तरह है जिन्हें ऊपर से चिकनी मिट्टी से होप देते हैं। गांव के सौंधें मुहावरे ओप देते हैं जिसे पकने पर चमक आ जाती है। निबंधों में वही तेज और चमक है जिससे मन अगरा उठता है ।
‘मकान उठ रहे हैं’- इस निबंध संग्रह में तेरह निबंध हैं जिसमें लेखक महानगर में रहते हुए भी उसके ‘बीते युग का आदमी ‘जिंदा है ।(पृष्ठ 21 )अपने राग और अपने भाग की चिंता से आज दुनिया परेशान है जो आधुनिक सभ्यता का सबसे बड़ा अभिशाप है। लेखक का सांस्कृतिक गंवई मन छटपटाता है लेकिन उदासी की गांठों को भी खोलता है।
इसका सबसे बड़ा समाधान लेखक बताते हैं कि वर्तमान समय में बतरस से बढ़कर शायद कोई दूसरा रस नहीं है।
अज्ञेय ,विद्या निवास मिश्र, राहुल सांकृत्यायन, प्रेमचंद, पंत आदि से लेखक ने अपने ग । गंवई मन को पूरी तरह खोलकर लिखा है।
‘बहुत दिन हुए घर से निकले’ निबंध में अपनी रचनात्मक विशिष्टता से गांव की नीम छांव, हरसिंगार की महमह वर्षा, हमराई की कोयल, खेती का समहुत , पड़ोसी गांव का खोंइछा आदि की याद लेखक को पागल बना भाव रस में डूबो देती है। ‘बनारस मर रहा है ‘निबंध उनके व्यक्तिगत रस की याद दिलाता है।बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र रहे डॉक्टर मिश्र ने बनारस के उसे रस को चखा है जहां जीवन दर्शन ,अध्यात्म, मस्ती और संवेदना के सूत्र मित्रों, शिक्षक, गुरुजनों को जोड़े रहते थे। आज की घोर व्यावसायिकता, फैशनेबल उपभोक्ता संस्कृति से लेखक दुखी है ।किसी भी देश की संस्कृति की मौत बहुत ही भयंकर होती है ।
‘धुआं और प्रसन्न हरीतिमा की संघर्ष भूमि’ निबंध में महानगर में बनने वाले कंक्रीट ,लोहे और सीमेंट के जंगल से निकलकर अपने आसपास से उठकर अपने आंचलिक राग की भूमि पर आता है और आम, जामुन, महुआ, कदंब ,सेमल की हरीतिमा से खुश है। लेखक को विश्वास है कि जहरीली धुएं को प्रसन्न हरीतिमा अवश्य ही निगल जाएगी(पृष्ठ 36) । यह दृढ़ विश्वास है। अपने अंदर के गंवई संवेदना को लेखक कभी नहीं भूला। वह महानगर के चकाचौंध से भयभीत है। लेखक अपने मित्रों, पड़ोसियों, सहधर्मियों को संबोधित करके ये निबंध लिखते हैं।
गंवई मन की पीड़ा के साक्षी हैं यह लंबे-लंबे पत्र।
पृष्ठ 41 पर लिखा है कि पापचार करने वाले जो छाती उतान कर घूमते हैं, फूल-अच्छत से अभिषेक करते हैं, जो समाज को कहां ले जाएगा , यह चिंता है लेकिन उम्मीद भी है कि यह एक दिन अवश्य सही राह पर आएगा। वे कहते हैं-‘ रास्ते से ठगों की भीड़ छटें और मुसाफिर को उसकी राह मिले ।’
वह युगीन विसंगतियों को देखकर दुखी है और वह देख रहा है कि गांव वालों का मन गांव से उचट रहा है। पुराने माटी के मकानों को, झोपड़ों को गिराया जा रहा है और गांव- जवार में धृतराष्ट्रों की अंधी पलटन खड़ी हो गई है। आज की स्थिति से लेखक को निराशा भी है क्योंकि उससे होने वाले विध्वंस से सशंकित है।
‘ भोजपुरी धरती और लोकराग ‘लंबा निबंध है जिसमें डेढ़ दर्जन भोजपुरी लोकगीतों के माध्यम से लोक रस, मनुष्य की स्वाभाविक जीवंतता को बताया है जहां लाग लपेट नहीं है।
शब्द बतियाना, अंखफोर, अगराकर, सोगहक, खोंइछा, अगवाह,ढाही,मरुआया ,जोहता, मुंह बिराते, मनसायन, सीवन- ज्वार आदि सैंकड़ों लोक शब्द हैं जिनसे लेखक की आत्मा जुड़ी हुई है।
वैचारिक संघात से सुसज्जित ये निबंध अपने आप में विशिष्ट हैं। भाषा ,शिल्प ,संवेदना आदि समस्त स्तरों पर ललित निबंध लेखन के संपूर्ण निज गुणों के साथ निखर कर आते हैं। बतकही —चलती रहती है।
उदासी संक्रामक रोग होता है। आज महानगर और गांव भी इसके शिकार होते जा रहे हैं। मिश्र जी की चिंता बढ़ती अमानवीयता के प्रति है। और वे एक वृहत्तर समाज को अपनी रचनाओं से जोड़ना चाहते हैं।
‘नेह के नाते अनेक’ निबंध ‘ में बहुत ही आत्मीय संस्मरण हैं। केवल ध्यान से काम नहीं चलता है ,ध्यान रस में मग्न होना पड़ता है। वे राम कृष्ण परमहंस के ध्यान में रहे और उससे प्राप्त लाभ को पूरी दुनिया के सामने रखा।
पत्रकारिता के लेखक ,साहित्यकार, ललित निबंधकार ऐसे ही नहीं बने हैं। पाषाण जी ने उनके लिए सही लिखा है (पृष्ठ 293 गांव की कलम में)-हिंदी के प्रति अक्षम प्रेम का ही परिणाम है कि साहित्य साधना के व्रती डॉक्टर कृष्ण बिहारी मिश्र सारस्वत यज्ञ कुंड की समिधा बार-बार बनते हैं और हर बार पहले से अधिक प्रदीप्त बनकर हमें मिलते हैं। पाषाण जी ने ताजा टीवी द्वारा दी गई उनकी उपाधि ‘फकीर’ को ही अपनी बात रखने के लिए आलंबन बनाया है – ‘ हिंदी के एक फकीर की अनुशीलन साधना’। यह साधना है, तप है, योग है ,प्रेम है ।अज्ञेय जी की पंक्तियां डॉक्टर कृष्ण बिहारी जी पर सटीक बैठती हैं-
‘मैंने विदग्ध हो जान लिया
अंतिम रहस्य पहचान लिया
मैंने आहुति बनकर देखा
यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है।’
लेखक सचेत है ,प्रज्ञा आर्षवाणी को समझना और जीवन भी स्थाई नहीं है ,इसे ही सत्य और सनातन माना जा सकता है ,आंगन की तलाश पृष्ठ 10 में लेखक ने मानुष का संधान किया है। लालन फकीर ,अंजना, राम बचन ब,टोरमल , युगल किशोर घोष जैसे चरित्रों में लेखक को संवेदना दिखाई देती है। ‘सबार ऊपरे मानुष सत्य’ की प्रतिष्ठा की है। उनका साहित्य और व्यक्तित्व दोनों एकमेक होकर ही ऐसा साहित्य संसार रचा है। यह ऐसा ही है जैसे रामकृष्ण परमहंस के आसपास जो उनके सहयोगी थे, जिन्होंने उनके कार्य को सफल और सत्य सनातन बनाने में सहयोगी वातावरण बनाया।पूरा वातावरण एक रहस्य की तरह मानो डॉ कृष्ण बिहारी मिश्र के इर्द-गिर्द बुना हुआ था और वे साहित्य तप की साधना के चरम उत्कर्ष पर पहुंचे हों ऐसा प्रतीत होता है।
कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज, के जुबली सभागार में आयोजित कार्यक्रम में ‘न्यूज़लेटर – कॉमर्स क्रॉनिकल’ – के प्रथम अंक का प्रसिद्ध लेखक और उपन्यासकार अमीश त्रिपाठी द्वारा लोकार्पण किया गया।
शिवानी शाह, पत्नी मिराज शाह; प्रोदिलीप शाह, रेक्टर; मीनाक्षी चतुर्वेदी, वाइस प्रिंसिपल (मॉर्निंग, कॉमर्स); सीए विवेक पटवारी, समन्वयक (सुबह); डॉ. (सीएस) मोहित शॉ, संपादक; और स्नेहा बसु मलिक, न्यूज़लैटर की प्रमुख डिजाइनर उपस्थित रहे। इस अवसर पर साक्षात्कार में अमीश त्रिपाठी ने अपनी नए उपन्यास ‘दी चोला टाइगर्स ‘पर अपने विचारों को व्यक्त किया।कोलकाता लिटरेरी फेस्टिवल की प्रमुख मालविका बनर्जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। यह जानकारी डॉ वसुंधरा मिश्र ने दी।
कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें केंद्र सरकार के नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत आवेदनकर्ताओं की रसीद को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने की मांग की गई थी। न्यायालय ने कहा कि यह मामला सामूहिक निर्देश देने योग्य नहीं है, क्योंकि प्रत्येक आवेदन का स्वरूप और आधार अलग-अलग है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति चैताली चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति को नागरिकता मिलेगी या नहीं, यह पहले केंद्र द्वारा तय किया जाएगा। हर आवेदक की परिस्थिति भिन्न है, इसलिए इस विषय में कोई सामान्य आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकता से संबंधित निर्णय केंद्र के अधिकार क्षेत्र में है, न कि निर्वाचन आयोग के। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अशोक चक्रवर्ती ने अदालत को बताया कि पश्चिम बंगाल से सीएए के नियमों के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने वालों के मामलों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय अगले 10 दिनों के भीतर विचार करेगा और निर्णय देगा। राज्य ने बताया कि आयोग (निर्वाचन आयोग) एसआईआर प्रक्रिया का कार्य स्वतंत्र रूप से कर रहा है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि देशभर में लगभग 50 हजार लोगों ने सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया है, लेकिन अब तक एक भी आवेदन का निस्तारण नहीं हुआ है। जबकि कानून के अनुसार प्रत्येक आवेदन पर अधिकतम 90 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए। इस पर अदालत में केंद्र ने आश्वासन दिया कि नियमों के अनुसार 10 दिनों में सभी लंबित आवेदनों की समीक्षा की जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग का इस प्रक्रिया में कोई दायित्व नहीं है, क्योंकि नागरिकता का निर्धारण पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन है। इसलिए जब तक केंद्र किसी व्यक्ति की नागरिकता की पुष्टि नहीं करता, तब तक एसआईआर प्रक्रिया में उसके दस्तावेज को स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय नहीं लिया जा सकता।
-फरीदाबाद के इमाम के घर से विस्फोटक बरामद फरीदाबाद । दिल्ली, हरियाणा एवं जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में सात आतंकवादियों को गिरफ्तार कर बड़े हमलों की साजिश को विफल कर दिया गया। पकड़े गए आतंकवादी अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय थे। पकड़े गए आतंकियों से अब तक 2900 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक सामग्री बरामद हो चुकी है। फरीदाबाद जिले के धौज गांव के रहने वाले इमाम से किराये पर कमरा लेकर आतंकी ने हथियारों तथा विस्फोटक का स्टोर बनाया था। पुलिस आयुक्त सत्येंद्र कुमार गुप्ता ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की शिनाख्त आरिफ निसार उर्फ साहिल निवासी नौगाम, श्रीनगर, यासिर-उल-अशरफ निवासी नौगाम श्रीनगर, मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद निवासी नौगाम श्रीनगर, मौलवी इरफान अहमद निवासी शोपियां, जमीर अहमद अहंगर उर्फ मुतलाशा, निवासी वाकुरा गांदरबल, डा. मुजम्मिल शकील गणाई उर्फ मुसैब निवासी कोइल पुलवामा, डा. आदिल अहमद, निवासी वानपोरा कुलगाम के रुप में हुई है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लखनऊ से भी एक महिला डॉक्टर शाहीन शाहिद को हिरासत में लिया है। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, आरोपित मुजामिल की पूछताछ व तकनीकी सहायता से फरीदाबाद व जम्मू कश्मीर पुलिस की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 8 नवम्बर को एक क्रिनकॉव असाल्ट राइफल, 3 मैग्जीन, 83 जिंदा कारतूस, एक पिस्टल, 8 जिंदा कारतूस व दो मैग्जीन बरामद किये। इसके बाद नौ नवंबर को गांव धौज से फतेहपुर तगा रोड पर बने एक कमरे से आईईडी बनाने के लिए विस्फोटक/ ज्वलनशील पदार्थ लगभग 358 किलोग्राम (अमोनिया+नाइट्रेट) व अन्य सामग्री कैमिकल, ज्वलनशील पदार्थ, बिजली के सर्किट, बैटरी, वायर, रिमोट कंट्रोल, टाइमर, मेटल सीट आदि बरामद किये। उन्होंने आगे बताया कि सोमवार को फरीदाबाद व जम्मू कश्मीर पुलिस की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए गांव फतेहपुर तगा स्थित डहर कॉलोनी से लगभग 2563 किलोग्राम विस्फोटक/ज्वलनशील पदार्थ बरामद किया है। इस प्रकार टीम द्वारा अब तक लगभग 2900 से अधिक किलोग्राम से अधिक विस्फोटक/ज्वलनशील पदार्थ बरामद किया गया है। बताया गया कि जिस घर से ये सामान बरामद हुआ है, वो घर हरियाणा के फरीदाबाद जिले के धौज गांव के ही रहने वाले इमाम का है। यह बरामदगी राठेर नाम के एक कश्मीरी डॉक्टर की ओर से दी गई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई, जिसे श्रीनगर में एक अन्य पाक-आधारित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर चिपकाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। राठेर पिछले साल तक जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में काम करता था। पुलिस ने बताया कि कॉलेज में उसके लॉकर से एक असॉल्ट राइफल बरामद हुई।
– गेट नम्बर एक के पास खड़ी कार में विस्फोट नयी दिल्ली । दिल्ली के लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार को अचानक हुए धमाके से इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी के मुताबिक गेट नंबर 1 के पास खड़ी एक कार में विस्फोट हुआ, जिसके बाद आसपास खड़ी दो अन्य गाड़ियां भी आग की चपेट में आ गईं। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास अफरा-तफरी मच गई और सड़क पर फैले मलबे से हालात भयावह हो गए. लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया। फिलहाल पुलिस विस्फोट के कारणों की जांच में जुटी है और इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। दिल्ली के लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास आज अचानक हुए धमाके से इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी के मुताबिक गेट नंबर 1 के पास खड़ी एक कार में विस्फोट हुआ, जिसके बाद आसपास खड़ी दो अन्य गाड़ियां भी आग की चपेट में आ गईं। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास अफरा-तफरी मच गई और सड़क पर फैले मलबे से हालात भयावह हो गए। लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया. फिलहाल पुलिस विस्फोट के कारणों की जांच में जुटी है और इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण धमाके में 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। धमाका गेट नंबर 1 के पास खड़ी एक इको वैन में हुआ, जिससे आसपास की तीन गाड़ियों में आग लग गई। विस्फोट के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और पूरे क्षेत्र को घेरकर पुलिस व एनएसजी की टीमें जांच में जुट गई हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम मौके पर जांच कर रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी जांच पड़ताल में जुटी है. बम निरोधक दस्ता वहां मौजूद चीजों की पड़ताल कर रहा है।
-कानूनी पचड़े में अटक न जाए नियुक्ति प्रक्रिया कोलकाता । पिछले लंबे इंतजार के बाद आखिरकार स्कूल सर्विस कमिशन (एसएससी) की 11वीं – 12वीं स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए हुई लिखित परीक्षा का रिजल्ट शुक्रवार की रात को घोषित किया गया। साल 2016 की नियुक्ति में हुए व्यापक भ्रष्टाचार के आरोपों से सबक लेते हुए नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता को बनाए रखने लिए एसएससी ने पहले ‘मॉडल आंसर की’ और बाद में लिखित परीक्षा के रिजल्ट के साथ ही ‘फाइनल आंसर की’ को भी जारी किया है। हालांकि जानकारों का मानना है कि फाइनल आंसर की के जारी होने से नियुक्ति प्रक्रिया में फिर से नई जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। क्यों? क्योंकि अभ्यर्थियों का आरोप है कि संस्कृत, एन्वार्यन्मेंट स्टडिज, इतिहास, केमिस्ट्री, कृषि, होम मैनेजमेंट और होम नर्सिंग जैसे शिक्षक नियुक्ति के अपने विषयों के मॉडल आंसर में बड़ी उलझन है। किसी में प्रश्नपत्र में दिए गए 4 विकल्पों में से सभी गलत हैं, किसी में एक प्रश्न के संभाव्य तीन उत्तरों में से सभी सही हो सकते हैं। मॉडल प्रश्न पत्र में ऐसे प्रश्नों का उत्तर भी दिया गया है जो गलत है। बताया जाता है भूगोल के फाइनल मॉडल आंसर में तीन प्रश्नों का गलत उत्तर दिया गया है। एसएससी के आंसर की में कहा गया है कि इस प्रकार के ‘गलती’ के किसी मामले में अगर कोई परीक्षार्थी संबंधित प्रश्न को अटेम्प्ट ही नहीं करता है तब भी उसे पूरा नंबर ही दिया जाएगा। किसी प्रश्न के मामले में यह भी कहा गया है कि अगर परीक्षार्थी ने अटेम्प्ट किया तो नंबर दी जाएगी। इस वजह से लगभग सवा दो लाख परीक्षार्थियों में भी बड़ी संख्या में परीक्षार्थी बिना अटेम्प्ट किए या गलत उत्तर देकर भी पूरा नंबर प्राप्त कर लिए हैं। अभ्यर्थियों के अलावा शिक्षा से जुड़े जानकारों का भी मानना है कि एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसी गलतियों की कोई गुंजाइश ही नहीं होती है। लिखित परीक्षा में प्रत्येक पद के लिए औसतन 18 आवेदक उपस्थित हुए हैं और 10 पदों के लिए 16 लोगों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। इसलिए जिन अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा, उनके अंकों में हेराफेरी की समस्या हो सकती है। बताया जाता है कि अभ्यर्थी फाइनल आंसर की को लेकर कल (सोमवार) को अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले हैं। साल 2016 की नियुक्ति प्रक्रिया में जहां इतने बड़े भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं, वहीं नियुक्ति की नई भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर यह गलती कैसे हुई? इस बारे में एसएससी के अध्यक्ष सिद्धार्थ मजुमदार का कहना है कि शिकायतें हो सकती हैं। लेकिन असली मुद्दा यह है कि मूल्यांकन सही था या नहीं। ओएमआर शीट का मूल्यांकन फाइनल मॉडल उत्तर के आधार पर किया गया था। इसलिए अभ्यर्थियों को उनके योग्य अंक मिले हैं। अंकों में भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह गलती या क्लिनीकल एरर कैसे हुई, इसकी जांच भी की जाएगी। वर्ष 2016 के ‘योग्य’ शिक्षक-शिक्षिका अधिकार मंच की ओर से महबूब मंडल का कहना है कि अंतिम मॉडल उत्तर में कुछ विषयों के कुछ उत्तर गलत दिए गए हैं। कई मामलों में टाइपिंग की गलतियां भी हुई हैं। एक अन्य ‘योग्य’ लेकिन बेरोजगार शिक्षक राकेश आलम ने शिकायत की है कि फाइनल उत्तर की में कई प्रश्नों के गलत विकल्प गलत ही रह गए हैं। एसएससी के एक अधिकारी ने बताया कि फाइनल आंसर की तैयार करने वाली विशेषज्ञ कमेटी के सभी सदस्य विषय-आधारित अध्यापक थे। लेकिन पूरी नियुक्ति प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी करनी थी। कई मौकों पर प्रूफरीडिंग का समय नहीं मिला। इसलिए कुछ गड़बड़ी जरूर रह गयी होगी। हालांकि अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर 60 अंकों की लिखित परीक्षा में प्रत्येक उम्मीदवार को कई विषयों में ‘गलत’ प्रश्नों या उत्तरों के लिए 5-6 अंक मिलते हैं, तो वास्तविक परीक्षा 54-55 अंकों की होगी। क्या इतनी बड़ी परीक्षा के लिए यह उचित है? मिली जानकारी के अनुसार कई अभ्यर्थी इस मुद्दे पर पहले से ही कानूनी सलाह ले रहे हैं ताकि यह तय किया जा सके कि वे अदालत का दरवाजा किस आधार पर खटखटा सकते हैं।
कोलकाता। त्योहारों का माहौल खत्म होते ही राज्य भर में डेंगू बढ़ने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर के आखिरी दो हफ्तों में राज्य में नए डेंगू मामलों की 1,632 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। केवल अक्टूबर में ही बंगाल में 3,200 लोग डेंगू से प्रभावित हुए।
इस साल की शुरुआत से 31 अक्टूबर तक राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 12,503 है। कीट विज्ञानी कहते हैं कि त्योहारों के मौसम में आधी खुली मंडप और जलभराव ही संक्रमण बढ़ने का मुख्य कारण हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार डेंगू संक्रमण के मामले में उत्तर 24 परगना शीर्ष पर है। इस जिले में 2,326 लोग संक्रमित हुए हैं। दूसरे स्थान पर मुर्शिदाबाद है। यहां 2,304 लोग संक्रमित हुए। तीसरे और चौथे स्थान पर हुगली और कोलकाता हैं। दोनों जिलों में संक्रमण ने हजारों की संख्या को पार कर लिया है। मालदा में संक्रमित लगभग हजार के करीब हैं, और हावड़ा में संक्रमितों की संख्या 750 से बढ़ गई है। कुल मिलाकर इन छह जिलों में 8,700 से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। कीट विज्ञानी देवाशीष विश्वास का कहना है कि इस साल अक्टूबर में लगातार बारिश। उसके बाद कुछ दिन सूखा। फिर बारिश। इस मौसम ने डेंगू वाहक एडिस इजिप्टी मच्छर के प्रजनन के लिए आदर्श वातावरण तैयार कर दिया है। एक और कीट विज्ञानी गौतम चंद्र कहते हैं कि खड़े पानी में कुछ दिन रह जाने पर मच्छरों के लार्वा बढ़ जाते हैं और इस साल वही स्थिति बार-बार बन रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार साल की शुरुआत से सितंबर तक डेंगू नियंत्रण में रहने के कारण निगरानी में कमी हो गई। उसी अवसर का लाभ उठाकर अक्टूबर महीने में रोग का प्रकोप बढ़ गया है। साथ ही पूजा के समय मंडपों में जमा पानी और नियमित सफाई न किए गए स्थानों में मच्छरों का प्रजनन बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अगर नए सिरे से बारिश नहीं होती है, तो संक्रमण कुछ हद तक नियंत्रण में आ जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार नवान्न की ओर से राज्य के सभी जिलाधिकारियों को जानकारी दी गई है कि डेंगू नियंत्रण के काम को नवंबर के अंत तक जारी रखना होगा। क्योंकि तापमान 15 डिग्री के नीचे नहीं आने पर मच्छरों की प्रजनन दर कम नहीं होती। पानी जमा होने वाले हॉटस्पॉट्स की पहचान कर विशेष सफाई अभियान चलाना होगा। अनुत्पादित जमीन, कचरे के ढेर, बाजार—सब जगह निगरानी रखने की बात नवान्न से कही गई है। प्रशासन के अनुसार डेंगू से निपटने में रोग की पहचान बेहद महत्वपूर्ण है। यदि डेंगू जल्दी पहचान लिया जाए तो सही इलाज संभव है। इससे मृत्यु का खतरा भी कम होता है। यही कारण है कि डेंगू प्रभावितों के इलाज के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करना जरूरी है। ज़िला पर्यवेक्षक के नेतृत्व में सरकारी अस्पतालों में नियमित निरीक्षण कराने की बात कही गई है। कहीं भी बुनियादी संरचना में कमी होने पर तुरंत कदम उठाने की बात भी बताई गई है। दवा विशेषज्ञ दीपक दास कहते हैं कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है लेकिन एक और महीने तक सतर्क रहने की आवश्यकता है। दो दिन से अधिक बुखार होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। डेंगू अगर प्रारंभिक चरण में पकड़ में आ जाए तो जल्दी ठीक होना संभव है।
इस्लामाबाद । अब पाकिस्तान अपनी सेना को किराये पर देने की तैयारी में है। हर सैनिक के बदले 10,000 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 8.86 लाख रुपये की मांग की गई है। आरोप है कि गाज़ा में प्रस्तावित शांति रक्षक बल में सैनिक भेजने के लिए पाकिस्तान ने यह रकम मांगी है। वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार आसमा शिराज़ी ने यह दावा किया है। आसमा शिराज़ी का कहना है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने इज़रायल से हर सैनिक के लिए 10,000 डॉलर की मांग की थी। अगर यह आरोप सही है, तो 20,000 सैनिकों को भेजने के बदले पाकिस्तान ने कुल 200 मिलियन डॉलर (करीब 1,772 करोड़ रुपये) मांगे हैं। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक इज़रायल ने केवल 100 डॉलर (8,860 रुपये) प्रति सैनिक देने का प्रस्ताव दिया है। इस बात को लेकर पाकिस्तानी सेना अब विवादों के घेरे में है। इस्लामाबाद खुद को हमेशा “मुस्लिम दुनिया का रक्षक” बताता रहा है। लेकिन गाज़ा में शांति स्थापित करने के नाम पर जब वही सेना मोटी रकम की मांग करने लगे, तो सवाल उठना लाजिमी है। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान की सेना के लिए नैतिकता या मानवता नहीं, बल्कि पैसा ही सर्वोपरि है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय गाज़ा शांति योजना का एक अहम हिस्सा है — एक अस्थायी बहुराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल यानी आईएसएफ की स्थापना। ट्रंप के अनुसार, यह बल फिलिस्तीनी पुलिस को प्रशिक्षण देगा और उसके पुनर्गठन में मदद करेगा। पिछले साल पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ ने कहा था कि अगर गाज़ा में सेना भेजने का मौका मिले तो इस्लामाबाद “गर्व महसूस करेगा”। लेकिन अब सेना के इस आर्थिक सौदेबाजी वाले रवैये ने साबित कर दिया है कि ये बयान महज दिखावे के थे। फिलिस्तीन के प्रति एकजुटता जताने की बजाय आर्थिक लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है।
आसिम मुनीर बनेंगे तीनों सेनाओं के प्रमुख
इस्लामाबाद । पाकिस्तानी संसद ने आर्मी चीफ आसिम मुनीर को तीनों सेनाओं का प्रमुख बनाने के लिए संविधान में बदलाव किया है। अब उन्हें देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) बनाया जाएगा। यह भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की तरह होगा। यह नया पद इसलिए बनाया गया है ताकि सेना, नौसेना और वायुसेना आपस में मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें और तीनों की कमान एक जगह से संभाली जा सके। इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस साल 20 मई को पाकिस्तानी सरकार ने आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा दिया था।मुनीर से पहले 1959 में सैन्य तानाशाह अयूब खान ने खुद को फील्ड मार्शल घोषित कर दिया था। फील्ड मार्शल पाकिस्तान सेना में सर्वोच्च सैन्य रैंक है, जो एक फाइव स्टार रैंक मानी जाती है। यह रैंक जनरल (फोर स्टार) से ऊपर है। पाकिस्तान में फील्ड मार्शल का पद सेना, नौसेना और वायुसेना में सबसे ऊंचा होता है।मुनीर को 6 महीने में 2 बड़ा प्रमोशन मिला है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक चीफ ऑफ फोर्सेस बनाने का फैसला मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई चार दिन की झड़प से मिली सीख के बाद लिया गया है।
कोलकाता । मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में विश्व कप विजेता ऋचा घोष के सम्मान में ईडन गार्डेन्स में क्रिकेट एसोसिशएन ऑफ बंगाल ने विशेष समारोह का आयोजन किया। इस मौके पर ऋचा घोष को विशेष पुरस्कार भी प्रदान किया गया। पश्चिम बंगाल सरकार ने ऋचा को ‘बंगभूषण’ उपाधि प्रदान किया। इसके साथ ही ऋचा घोष को राज्य पुलिस में डीएसपी के मानद पद पर नियुक्त भी किया गया है। गौरतलब है कि पिछली रविवार को ही आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप में कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने कमाल कर दिखाया। भारत की महिला क्रिकेट टीम ने दक्षिण अफ्रिका को हराकर अपना पहला विश्व कप जीता। इस जीत के बाद ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के तमाम बड़े नेताओं व पूरे देश की जनता ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम का तहे दिल से हार्दिक अभिनंदन किया था। अब बारी अपने घर में सम्मानित होने की थी। शनिवार को सीएबी की ओर आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अलावा राज्य के खेल मंत्री अरुप विश्वास, राज्य मंत्री मनोज तिवारी, सीएबी अध्यक्ष पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, पूर्व क्रिकेटर झूलन गोस्वामी समेत अन्य कई जानी-मानी हस्तियां भी शामिल हुई। इस मौके पर ऋचा घोष को CAB की तरफ से 34 लाख रुपए की पुरस्कार राशि और सोने का बैट उपहार में दिया गया। इसके साथ ही ऋचा को राज्य सरकार की ओर से सोने की एक चेन भी भेंट दी गयी। सौरभ गांगुली ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सम्मान करते हुए उन्हें फ्रीडम ट्रॉफी की रेप्लिका भेंट स्वरूप दी थी, जिसे मुख्यमंत्री ने ऋचा को उपहार में दे दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋचा जैसी प्रतिभा पाकर बंगाल गौरवांवित हो गया है।
हरमनप्रीत कौर को डीलिट. की मानद उपाधि देगा जेयू
पिछली रविवार को ही आईसीसी महिला विश्वकप जीप कर भारत की महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रचा था। हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार विश्व कप की ट्राफी पर अपना नाम लिखवाया है। अब जादवपुर यूनिवर्सिटी (जेयू) में हरमनप्रीत कौर को डीलिट. की मानद उपाधि से सम्मानित करने का प्रस्ताव दिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में जेयू में सभी फैकल्टी के डीन की एक बैठक हुई जिसमें अगले महीने होने वाले दीक्षांत समारोह में हरमतप्रीत कौर को डी.लिट की मानद उपाधि से सम्मानित करने का प्रस्ताव दिया गया है। इस बैठक में जेयू के उपाचार्य चिरंजीव भट्टाचार्य, कार्यवाहक रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। जेयू में आमतौर पर 24 दिसंबर को ही हर साल दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जाता है। मीडिया से इस बारे में बात करते हुए जेयू प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि जादवपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में हरमनप्रीत कौर को डीलिट की मानद उपाधि प्रदान करने का प्रस्ताव दिया गया है, जिनकी अगुवाई में भारत ने पहली बार आईसीसी महिला विश्व कप का खिताब अपने नाम किया है। बताया जाता है कि अब यह प्रस्ताव राज्य के राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के आचार्य सीवी आनंद बोस के पास उनकी सहमति के लिए भेजा जाएगा। अगर उन्होंने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जता दी तो इस प्रस्ताव को यूनिवर्सिटी की एग्जिक्यूटिव काउंसिल (ईसी) के सामने आधिकारिक तौर पर पेश किया जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बैठक में ही नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत विनायक बनर्जी, डीआरडीओ के चेयरमैन समीर वी. कामत और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के सीईओ शिव कुमार कल्याणरामन को इस साल मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने पर चर्चा की गयी है। हालांकि इन नामों को भी आचार्य के पास उनकी सहमति के लिए भेजा जाएगा। गौरतलब है कि इस साल जेयू का दीक्षांत समारोह बेहद खास होने वाला है, क्योंकि इस साल जेयू को लंबे समय बाद स्थायी उपाचार्य, चिरंजीव भट्टाचार्य मिले हैं। सूत्रों की मानें तो चिरंजीव भट्टाचार्य ने खुद आचार्य से इन प्रस्तावित नामों पर चर्चा के लिए समय की मांग की है।