Saturday, October 31, 2026
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भारती एयरटेल में एक अरब डॉलर का निवेश करेगी गूगल

नयी दिल्ली । इंटरनेट के क्षेत्र की प्रमुख कंपनी गूगल दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल में एक अरब डॉलर का निवेश करेगी।
इसमें इक्विटी निवेश के साथ-साथ संभावित वाणिज्यिक समझौतों के लिए एक कोष शामिल है, जिसके तहत समझौतों को अगले पांच वर्षों के दौरान पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों पर मंजूरी दी जाएगी।
गूगल यह निवेश गूगल फॉर इंडिया डिजिटाइजेशन फंड के हिस्से के तौर पर कर रही है। एयरटेल ने एक बयान में कहा, ‘‘इसमें, 70 करोड़ डॉलर का इक्विटी निवेश भारती एयरटेल में 734 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर किया जाएगा।’’ इसमें बताया गया कि कुल निवेश में से 30 करोड़ डॉलर की राशि वाणिज्यिक समझौतों के क्रियान्वयन के लिए होगी।

महान हॉकी खिलाड़ी चरणजीत सिंह का निधन

नयी दिल्ली । भारत की 1964 तोक्यो ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हॉकी टीम के कप्तान रहे चरणजीत सिंह का हिमाचल प्रदेश के ऊना में उनके घर पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया । वह लंबे समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से भी जूझ रहे थे ।
चरणजीत अगले महीने अपना 91वां जन्मदिन मनाने वाले थे । उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी है । पांच साल पहले भी चरणजीत को स्ट्रोक हुआ था और तब से वह लकवाग्रस्त थे ।
उनके बेटे वी पी सिंह ने बताया ,‘‘ पांच साल पहले स्ट्रोक के बाद से वह लकवाग्रस्त थे । वह छड़ी से चलते थे लेकिन पिछले दो महीने से उनकी हालत और खराब हो गई ।’’


ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता टीम की कप्तानी के साथ वह 1960 रोम ओलंपिक की रजत पदक विजेता टीम में भी थे । इसके अलावा वह 1962 एशियाई खेलों की रजत पदक विजेता टीम के भी सदस्य थे ।
सिंह ने कहा ,‘‘ मेरी बहन के दिल्ली से आने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा ।’’ चरणजीत की पत्नी का 12 वर्ष पहले निधन हो गया था । उनका बड़ा बेटा कनाडा में डॉक्टर है और छोटा बेटा उनके साथ था । उनकी बेटी विवाह के बाद से दिल्ली में रहती है ।

86 फीसदी भारतीय चाहते हैं, भारत में मतदान अनिवार्य हो : सर्वेक्षण

नयी दिल्ली । भारत में 86 फीसदी लोग चाहते हैं कि मतदान को अनिवार्य बना दिया जाए। 25 जनवरी को 12वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर जारी एक नये सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है।
‘पब्लिक ऐप’ की ओर से देशभर में चार लाख से अधिक लोगों पर की गई रायशुमारी में 81 फीसदी प्रतिभागियों ने मौजूदा मतदान प्रणाली पर भरोसा जताया। इनमें 60 फीसदी प्रतिभागियों की उम्र 30 साल से कम थी।
भारत में 2011 से चुनाव आयोग के स्थापना दिवस को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका मकसद नए और युवा मतदाताओं के पंजीकरण को बढ़ावा देना है। चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी।
सर्वेक्षण में कहा गया है, ‘‘नागरिक कर्तव्य के रूप में मतदान नागरिकों द्वारा सामाजिक विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान है। यह पूछे जाने पर कि क्या देश में मतदान को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए, 86 प्रतिशत प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की। 81 फीसदी प्रतिभागियों ने मौजूदा मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बताया।’’
सर्वेक्षण मतदाताओं का रुख तय करने वाले अहम कारकों पर भी रोशनी डालता है। इससे पता चलता है कि वोटिंग के समय 34 फीसदी मतदाता पिछले कार्यकाल में उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर गौर फरमाते हैं। वहीं, 31 प्रतिशत वोटर चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों का तुलनात्मक अध्ययन कर फैसला लेते हैं।
सर्वेक्षण में यह भी देखा गया कि 4.96 प्रतिभागियों के लिए उम्मीदवारों की लोकप्रियता सबसे ज्यादा मायने रखती है। वहीं, 11.92 वोटर इस बात को ज्यादा अहमियत देते हैं कि प्रत्याशी किस पार्टी से ताल्लुक रखता है।
मतदान के लिए न जाने के सवाल पर 30.04 प्रतिभागियों ने कहा कि शहर से बाहर होना इसकी मुख्य वजह थी। हालांकि, सर्वेक्षण में शामिल 56.3 फीसदी प्रतिभागियों ने दावा किया कि उन्होंने मतदान का एक भी मौका नहीं गंवाया है। वहीं, 79.5 प्रतिशत प्रतिभागियों ने माना कि उन्होंने जीवन में कम से कम एक बार मतदान जरूर किया है।
सर्वेक्षण के मुताबिक 5.22 फीसदी प्रतिभागियों ने चुनाव की जानकारी न होने तो 7.19 प्रतिशत ने किसी भी दल का समर्थन न करने के चलते मतदान के लिए न जाने की बात कही। वहीं, 1.27 फीसदी प्रतिभागियों ने जवाब में ‘आलस्य/कोई फर्क नहीं पड़ता’ का विकल्प चुना।

गरीब छात्राओं की पढ़ाई के लिए अपने खर्च से शिक्षकों ने चलायी ‘मोर नोनी’ योजना

 हर साल 3,700 से ज्यादा बेटियों को फाय़
दुर्ग । बिहार के गणितज्ञ आनंद कुमार की सुपर 30 की कहानी से तो सभी परिचित होंगे, लेकिन दुर्ग जिले में सुपर 30 की कुछ अलग ही कहानी है। यहां ऐसे कई प्रोफेसर हैं जो प्रदेश में एक मिसाल बने हैं। कोरोनाकाल में आर्थिक तंगी की वजह से कई बेटियों की पढ़ाई छूट गई थी। ऐसे बच्चियों की पढ़ाई का सारा जिम्मा वहां के प्रोफेसर उठा रहे हैं ताकि उनकी पढ़ाई जारी रहे। यहां के शासकीय वामन राव पाटणकर गर्ल्स कॉलेज में 30 टीचर्स मिलकर हर साल सुपर 30 छात्राओं की टीम तैयार करते हैं। इन शिक्षक -शिक्षिकाओं ने खुद साल 2020 में कॉलेज की छात्राओं के लिए ‘मोर नोनी’ योजना चलाई।
हर साल 3700 से ज्यादा बेटियों की होती है मदद
दुर्ग जिला मुख्यालय में संचालित शासकीय वामन राव पाटणकर गर्ल्स कॉलेज में हर साल 3700 से ज्यादा बेटियां अपना नाम दर्ज कराती हैं। इनमें शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों की गरीब घरों की बच्चियां आती हैं। महाविद्यालय में कई छात्राएं ऐसी भी हैं जो आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण पढ़ाई नहीं कर पाती। कई फीस न दे पाने के कारण कॉलेज के सेकेंड ईयर तक भी नहीं पहुंच पाती और बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं। कॉलेज के 30 प्रोफेसर ने मिलकर ऐसी एक-एक बेटी को अपनी बेटी की तरह पढ़ाने का बीड़ा उठाया है।
कोरोनाकाल के दौरान काफी बच्चियों ने छोड़ी पढ़ाई
गर्ल्स कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुशील चन्द्र तिवारी ने बताया कोरोना संक्रमण काल के दौरान जब लोगों के रोजगार के साधन बंद हो गए। पूरे देश में लॉक डाउन लगा। उस समय कई बच्चियों को अपनी पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी। यह देखकर कॉलेज के प्रोफेसर काफी चिंतित हुए। उन्होंने एक बैठक बुलाई और मंथन किया आखिर इतनी अधिक संख्या में बेटियां कॉलेज क्यों छोड़ रही हैं। उसमें निष्कर्ष सामने आया कि सामान्य वर्ग की बेटियां जो महाविद्यालय की फीस और अन्य खर्च नहीं उठा पा रही हैं, कॉलेज छोड़ने को मजबूर हो रही हैं। उनके अभिभावक उन्हें कॉलेज नहीं भेज रहे हैं। बस फिर क्या था प्रोफेसर ने तत्काल निर्णय लिया कि अब कोई भी बेटी शिक्षा से दूर नहीं होगी। उन्हें शिक्षित करने के लिए प्रोफेसर खुद एक योजना चलाएंगे।
सामान्य वर्ग की बच्चियों के लिए अधिक चुनौती
आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ने वाली बच्चियों में अधिकतर सामान्य वर्ग से होती हैं। इन बेटियों के लिए कॉलेज तक पहुंचना इसलिए मुश्किल होता है, क्योंकि उनके लिए ऐसी कोई छात्रवृत्ति योजना नहीं होती जिसका उन्हें फायदा मिल सके। ऐसी स्थिति में उनके सामने बीच में ही पढ़ाई छोड़ने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता है।
‘मोर नोनी’ योजना चलाकर उठाते हैं पढ़ाई का पूरा खर्च
प्रिंसिपल डॉ. सुशील चन्द्र तिवारी ने बताया कि महाविद्यालय के 30 प्रोफेसर ने मिलकर ऐसी जरूरतमंद बेटियों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है। सभी ने मिलकर महाविद्यालय स्तर पर एक योजना चलाई। इसका नाम रखा ‘मोर नोनी’ योजना ‘मोर नोनी’ का मतलब ‘मेरी बेटी’ है। मोर नोनी योजना के तहत हर प्रोफेसर कम से कम दो बेटियों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाते हैं। इतना ही नहीं अब इस योजना में प्रोफेसर के बच्चे भी सहयोग करने लगे हैं। कई ऐसे प्रोफेसर हैं जिनके बच्चे एक साथ 10-10, 20-20 बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। उनकी फीस भर रहे हैं।
एक बेटी पर एक साल में 3 हजार का खर्च
कॉलेज की प्रोफेसर ऋचा ठाकुर ने बताया कि जब भी महाविद्यालय में ऐसी जरूरतमंद छात्राओं के बारे में पता चलता है तो उनका ग्रुप उन बेटियों को बुलाकर उनसे संपर्क करता है। उनके परिजनों से बात करता है। जब परिजन उनकी पढ़ाई न बंद कराने के लिए राजी हो जाते हैं तो जो भी प्रोफेसर या सहायक प्राध्यापक बेटी की जिम्मेदारी लेता है वह उस बच्ची की फीस से लेकर स्टेशनरी तक की व्यवस्था कर देता है। एक बच्ची की पढ़ाई में साल भर में फीस सहित लगभग 3-4 हजार खर्च आता है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

देसी ऑपरेटिंग सिस्टम लाने की तैयारी में सरकार

नयी दिल्ली। भारत में अब तक एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्म वाले स्मार्टफोन का इस्तेमाल किया जाता है स्मार्टफोन काफी लोकप्रिय हैं और लाखों में इनकी बिक्री होती है। हालांकि अब जल्दी ही भारतीयों को एक नए ऑपरेटिंग सिस्टम का तोहफा मिल सकता है। दरअसल यह नया ऑपरेटिंग सिस्टम पूरी तरह से भारत में बनाया जाएगा जो एंड्रॉयड और आईओएस ऑपरेटिंग सिस्टम को कड़ी टक्कर देगा। इस ऑपरेटिंग सिस्टम से लैस स्मार्टफोंस भी बेहद ही खास होंगे और इनमें फीचर्स की भरमार होगी जिससे यूजर्स को एक धमाकेदार स्मार्टफोन चलाने का एक्सपीरियंस मिलेगा। भारत सरकार इस ऑपरेटिंग सिस्टम को तैयार करने की योजना पर काम कर रही है जिससे इसे जल्द से जल्द लांच किया जा सके।
आपको बता दें कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने हाल ही में यह खुलासा किया है कि सरकार नए ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम कर रही है जो ऐसा इकोसिस्टम बनाने में मददगार साबित होगा जो शिक्षा और स्टार्टअप के क्षेत्र में काफी मददगार साबित हो सकता है।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मेड इन इंडिया ऑपरेटिंग सिस्टम आईओएस को टक्कर देगा जिस पर एप्पल के आईफोन काम करते हैं। आईफोन दुनिया के सबसे लोकप्रिय स्मार्टफोन से और इनका इस्तेमाल ज्यादातर यूजर्स करते हैं। भारत में भी यह एक ट्रेंडिंग स्मार्टफोन है जिनका मुकाबला एंड्रॉयड स्मार्टफोन से होता है। आपको बता दें कि एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित स्मार्टफोन आईफोन की तुलना में काफी सस्ते होते हैं और इनमें ज्यादा फीचर्स मिलते हैं इसके बावजूद आईओएस का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है जिसे देखते हुए अब भारत सरकार एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार कर रही है जो इन दोनों ही तकनीकों को कड़ी टक्कर देगा और एक नया मुकाम हासिल कर सकता है।
यह ऑपरेटिंग सिस्टम कब तक भारत में दस्तक देगा इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं है लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि सरकार इसे जल्द से जल्द भारत में लॉन्च करने की तैयारी में है।

3 बजे उठकर योग, उबला खाना, ये हैं 126 साल के पद्मश्री शिवानंद बाबा

नयी दिल्ली। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कार प्राप्त करने वालों की सूची में एक नाम वाराणसी के शिवानंद बाबा का भी है। शिवानंद बाबा के बारे में दावा किया जाता है कि उनकी उम्र 126 साल है। वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। बाबा शिवानंद के बारे मेंं कहा जाता है कि वह चमक-दमक की दुनिया से दूर रहना चाहते हैं।
योग साधक बाबा शिवानंद, वैसे तो अपने जीवन के बारे में कोई चर्चा नहीं करते हैं लेकिन उनके पुराने साक्षात्कारों से कुछ जानकारी निकलकर जरूर सामने आई है। 8 अगस्त 1896 को जन्मे शिवानंद को योग और धर्म में काफी जानकारी प्राप्त है। उनकी दिनचर्चा के बारे में कहा जाता है कि बाबा शिवानंद रोज सुबह 3 बजे उठ जाते हैं। इसके बाद एक घंटा योग करते हैं, भगवद् गीता और मां चंडी के श्लोकों का पाठ करते हैं। बाबा शिवानंद केवल उबला हुआ भोजन करते हैं। वह कम नमक वाला खाना खाते हैं। इस उम्र में भी बाबा शिवानंद काफी स्वस्थ हैं।
बाबा शिवानंद के योगाभ्यास की ज्यादा चर्चा तब हुई थी, जब एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी ने ट्विटर पर उनका वीडियो शेयर किया था और उनकी सेहत के बारे में सभी को बताया था। इसी से प्रेरणा से लेकर एक्ट्रेस ने योग करना शुरू किया और खुद को फिट रखने के लिए खानपान में भी बदलाव किया।
बाबा की इस बेहद ज्यादा उम्र का प्रमाण भी उनके पास है। अपनी उम्र को लेकर वह अक्सर चर्चाओं में रहते हैं। उनके आधार कार्ड व पासपोर्ट पर उनकी जन्मतिथि 8 अगस्त 1896 दर्ज है। इस लिहाज से वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग शख्स कहे जा सकते हैं लेकिन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में यह रिकॉर्ड जापान के चित्तेसु वतनबे के नाम दर्ज है।
पद्म सम्मान मिलने की खबर के बाद से वह काफी प्रसन्न हैं। उन्होंने इसके लिए सरकार का आभार व्यक्त किया है। शिवानंद को काशी से बहुत लगाव है। वह कहते हैं कि यह तपोभूमि है और पवित्र भूमि है। यहां पर महादेव शंकर विराजते हैं, इसलिए यहां पर उनको काफी अच्छा लगता है। 1979 से बाबा शिवानंद काशी में रहते हैं।

कोरोना में बंद हुआ स्कूल तो शिक्षिका ने बनायी बैलगाड़ी पर मोबाइल लाइब्रेरी

बैतूल । कोरोना महामारी के चलते स्कूल बंद चल रहे हैं। बच्चे स्कूल नहीं आ पा रहे हैं, इसलिए उनको सरकारी किताबें मिलनी भी बंद हो गईं थीं। ऐसे में मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की एक शिक्षिका कमला दवन्डे ने देश के नौनिहालों तक किताबें पहुंचानें के लिए जुगाड़ लाइब्रेरी तैयार कर दी। उन्होंने गांव में ही बैलगाड़ी की व्यवस्था की। उसमें किताबें सजाकर उसे लाइब्रेरी की तरह बना डाला। अब यह बैलगाड़ी लाइब्रेरी घर-घर जाकर किताबें बांट रही है। बैलगाड़ी में टंगी किताबें और पीछे-पीछे चलते बच्चे। ये तस्वीर बैतूल के भैंसदेही विकासखंड के झल्लार संकुल की है। रामजी ढाना के प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका कमला दवन्डे का पढ़ाई को लेकर यह आइडिया सराहा जा रहा है। यह ‘बैलगाड़ी लाइब्रेरी’ ने बच्चों तक न सिर्फ किताबें पहुंचाईं, उनकी घर बैठे पढ़ाई में मदद भी की।

हमारा घर, हमारा विद्यालय
शिक्षिका की ये लाइब्रेरी थी तो दो दिन के लिए , लेकिन इसने बच्चों और उनके अभिभावकों में उत्साह जगाया। बच्चों में बांटने के लिए यह किताबें पिछले शनिवार ही स्कूलों को बच्चों में वितरण के लिए मिली है। रामजी ढाना में 87 बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों तक एक साथ किताबें पहुंचाने कैसे होता। इसके लिए स्कूल के पास न तो कोई वाहन है न प्यून। टीचर कमला के मुताबिक स्कूल में दो शिक्षक हैं। वे अकेली ड्यूटी पर हैं, जबकि दूसरी कोरोना संक्रमण के चलते छुट्टी पर है। ऐसे में इतनी किताबें कैसे ढोई जातीं। तब उन्होंने स्कूल के पड़ोस से 50 रुपए रोज के किराये पर बैलगाड़ी लेकर इसे लाइब्रेरी की शक्ल देकर दो दिनों तक इसे चलाकर किताबें बांटीं।

थाली की ताल पर मोहल्ला क्लास
शिक्षिका की बैलगाड़ी लाइब्रेरी के अलावा उनकी मोहल्ला क्लास भी खास है। गांव में अलग अलग घरों में यह मोहल्ला क्लास लगती है। इसका आगाज बड़े अनोखे ढंग से होता है। जिस पालक के घर बच्चों की क्लास लगती है। वह घर की थाली और चम्मच को बजाता है। इस ताल के साथ मोहल्ला क्लास की शुरुआत होती है। इसमें कमला बच्चों को पढ़ाई करवाती हैं। कमला ने बताया कि वे हर दिन 5 या 6 मोहल्ला क्लास लगाती हैं। इसमें कक्षा एक से पांच के बच्चों को पढ़ाया जाता है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

 

घर में जब आएं अनजाने लोग, रखें ध्यान

ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड बीते कुछ सालों से जोरों पर है, जिसे कोविड के कारण और बढ़ावा मिला है। ज्यादातर मध्यमवर्गीय घरों में भी राशन तक की भी ऑनलाइन खरीदारी होने लगी है। इस सुविधा से जिंदगी आसान तो हुई है, लेकिन महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं। इसकी वजह ये है कि समय-समय पर सामान देने आए व्यक्ति के हाथों असामाजिक गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं। फैमिली काउंसलर शिवानी मिसरी साधू बता रही हैं, महिलाएं घर पर रहते हुए क्या सावधानी बरतें।
जब आप घर पर अकेली हों और डिलीवरी बॉय आए तो क्या करें?
दरवाजा खोलने के पहले जान लें कौन है – एंट्रेंस गेट पर अगर दो दरवाजे हैं, जिनमें से एक जाली है, तो जाली वाले दरवाजे को खोलने से पहले देख लें । अगर पेमेंट पहले ही कर दी गई है, तो डिलीवरी बॉय को सामान दरवाजे पर छोड़ जाने को कहें।
पार्सल लेने के लिए फोन लेकर जाएं – घर पर अकेले रहने के दौरान अगर आप कोई पार्सल रिसीव करने जा रही हैं, तो अपना फोन साथ लेकर जाएं। इसके अलावा कोशिश करें कि पार्सल लेने के दौरान आप घर के किसी सदस्य से दो मिनट के लिए कॉल पर जुड़ी रहें। जब तक डिलीवरी बॉय औपचारिकता पूरी कर रहा हो, तब तक फोन पर ऐसी बातें करें ‘अच्छा आ गए, नीचे हो, गाड़ी पार्क कर रहे हो, ठीक है आओ।’
ऐसा बर्ताव करें, जैसे घर के अंदर कोई है – जब भी पार्सल लेने बाहर आएं, सामने वाले को इस बात का एहसास करवाएं, जैसे घर के अंदर घर का कोई पुरुष सदस्य मौजूद है। दरवाजा खोलते हुए नाम लेकर पुकारें, ‘गैस बंद कर दो, नल बंद करना’ जैसी बातें कहकर सामान देने आए व्यक्ति को यह एहसास करवाए कि घर पर पुरुष मौजूद है।
घर पर कोई महिला है तो उसे बुला लें – जब दरवाजा खोलने जाएं और सामने एक अंजान शख्स खड़ा मिले, तो घर पर मौजूद महिला (मां, दीदी या भाभी) को आवाज देकर बुला लें। इससे व्यक्ति को यह मालूम रहेगा कि महिला घर पर अकेली नहीं है। वह कोई गलती नहीं करेगा।
सतर्क होकर फोन पर बात करें – किसी से फोन पर बात कर रही हों और तभी सामान देने वाला आ जाए, तो बात करते वक्त सावधानी बरतें। घर पर क्या है, कौन है और कौन नहीं, या अपनी कोई भी पर्सनल बात करने से बचें।
घर पर बच्चा अकेला है और तब पार्सल पहुंचे तो इन बातों का रखें ध्यान
आसपास जिन पर विश्वास करती हैं, उन्हें बता दें कि बच्चा अकेला है और कोई सामान देने आएगा।
बच्चे को समझा दें कि दरवाजे पर कोई आए तो, बिना पहचाने दरवाजा न खोलें।
हो सके तो बच्चे को डिलीवरी के चक्कर में न उलझा कर पड़ोसी को पार्सल ले लेने को कहें।
बच्चे को अगर नीचे डिलीवरी बॉय से सामान लेने भेज रही हैं, तो बॉलकनी से बच्चे पर नजर बनाए रहें।
घर में बच्चा अकेला है और सामान ले रहा है, तो उसे बताएं कि डिलीवरी बॉय से सामान बाहर रखकर जानें को कहे।

(साभार – दैनिक भास्कर)

कमाल के नडाल, मेदवेदेव को हराकर जीता 21वां ग्रैंड स्लैम खिताब

फेडरर और जोकोविच को छोड़ा पीछे
मेलबर्न । दुनिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी रफेल नडाल (Rafael Nadal) ने रविवार को यहां दो सेट से पिछड़ने के बाद जोरदार वापसी करते हुए दानिल मेदवेदेव (Daniil Medvedev) को हराकर ऑस्ट्रेलियन ओपन टेनिस टूर्नामेंट का खिताब जीता और 21 पुरुष एकल ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने। स्पेन के 35 साल के नडाल ने इसके साथ ही पुरुष एकल में सर्वाधिक 21 ग्रैंडस्लैम खिताब के साथ रिकॉर्ड अपने नाम किया। नडाल और मेदवेदेव के बीच फाइनल मुकाबला सोमवार को शुरुआती घंटों (ऑस्ट्रेलिया के समय के अनुसार) में खत्म हुआ।
छठे वरीय नडाल ने पहले दो सेट गंवाने के बाद रूस के दूसरे वरीय मेदवेदेव को पांच घंटे और 24 मिनट चले मुकाबले में 2-6, 6-7 (5), 6-4, 6-4, 7-5 से हराया। पांचवें और निर्णायक सेट में नडाल 5-4 के स्कोर पर जब चैंपियनशिप जीतने के लिए सर्विस कर रहे थे तो मेदवेदेव ने उनकी सर्विस तोड़ दी। उन्होंने हालांकि अपनी अगली सर्विस पर ऐसी कोई गलती नहीं की। यह ऑस्ट्रेलियन ओपन का दूसरा सबसे अधिक समय चला फाइनल है। इससे पहले 2012 में सर्बिया के नोवाक जोकोविच ने नडाल को पांच सेट चले मुकाबले में पांच घंटे और 53 मिनट में हराया था।
नडाल के नाम अब रोजर फेडरर और जोकोविच से एक अधिक ग्रैंडस्लैम खिताब दर्ज है। ऑस्ट्रेलियन ओपन से पहले इन तीनों के नाम समान रिकॉर्ड 20 ग्रैंडस्लैम खिताब थे। फाइनल के दौरान दूसरे सेट में कुछ देकर खेल रुका जब एक प्रदर्शनकारी कोर्ट पर उतर आया। नडाल इसके साथ ही चारों ग्रैंडस्लैम खिताब कम से कम दो बार जीतने वाले टेनिस इतिहास के सिर्फ चौथे पुरुष खिलाड़ी बने।
नडाल ने अपना पहला ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब 2009 में जीता था लेकिन मेलबर्न पार्क में उन्होंने चार फाइनल गंवाए। रविवार को स्पेन के इस खिलाड़ी ने अमेरिकी ओपन चैंपियन मेदवेदेव को हराकर अपना दूसरा ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीता। नडाल ने 29 मेजर फाइनल में 21वीं जीत दर्ज की। फेडरर और जोकोविच ने समान 31 बार ग्रैंडस्लैम फाइनल में खेलते हुए समान 20 खिताब जीते हैं। नडाल की यह जीत इसलिए भी शानदार है क्योंकि वह 2021 के दूसरे हाफ में सिर्फ दो मैच खेलकर ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे। स्पेन का यह खिलाड़ी पैर की पुरानी चोट के कारण 2021 के दूसरे हाफ में अधिकांश समय नहीं खेल पाया। उनकी चोट का उपचार किया जा सकता है लेकिन यह पूरी तरह ठीक नहीं होगी। वह कोविड-19 से भी संक्रमित हुए थे।
मेदवेदेव पहला ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने के बाद अगले की ग्रैंडस्लैम में खिताब जीतने वाला ओपन युग में पहला पुरुष खिलाड़ी बनने के लिए चुनौती पेश कर रहे थे। मेदवेदेव अब एंडी मरे के बाद सिर्फ दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने अपना पहला ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने के बाद अगला ही ग्रैंडस्लैम में फाइनल मुकाबला गंवा दिया। यह सिर्फ चौथा मौका है जब नडाल ने दो सेट से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए बेस्ट ऑफ फाइव सेट मुकाबला जीता है। उन्होंने पिछली बार यह कारनामा 2007 में विंबलडन के चौथे दौर में मिखाइल यूज्नी के खिलाफ किया था।

पद्म सम्मान – सीडीएस रावत से कल्याण सिंह, नीरज चोपड़ा से सोनू निगम तक…कोई प्रचार से दूर कर रहा काम

नयी दिल्ली । अलग-अलग क्षेत्रों में शानदार काम करने वाले 128 लोगों को पद्म अवार्ड से सम्मानित किया जा रहा है। सीडीएस जनरल बिपिन रावत , गुलाम नबी आजाद, कल्याण सिंह और प्रभा अत्रे को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। गायक सोनू निगम को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। सीडीएस रावत को देश ने हेलिकॉप्टर क्रैश में खो दिया था। इसके अलावा बीजेपी नेता कल्याण सिंह को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है।
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, अभिनेता विक्टर बनर्जी पद्म भूषण से सम्मानित किए जाएंगे. वहीं, देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साइरस पूनावाला, भारत बायोटेक के कृष्णा इल्ला, सुचित्रा इल्ला, दिवंगत पंजाबी गायक गुरमीत सिंह बावा और पूर्व केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा 107 लोगों को पद्म श्री दिया जाएगा. इनमें ओलंपियन नीरज चोपड़ा, प्रमोद भगत, वंदना कटारिया और गायक सोनू निगम का भी नाम है। पश्चिम बंगाल से उद्योगपति पी.आर. अग्रवाल को पद्मश्री मिला है। गौरतलब है कि बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने यह सम्मान लेने से इनकार कर दिया है।
इसके अतिरिक्त वह लोग भी पुरस्कार पा रहे हैं जिन्होंने प्रचार से दूर रहकर उल्लेखनीय योगदान दिया है। इनमें दिवंगत स्वतंत्र सेनानी से लेकर सांप-बिच्छू के काटने का इलाज करने वाले डॉक्टर भी शामिल हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में कराटे किड के नाम से लोकप्रिय एक स्पोर्ट्स कोच और दुनिया में आईवीएफ के जरिए भैंस का बछड़ा पैदा कराने वाले डॉक्टर का नाम भी इस साल सरकार की पद्मश्री सूची में शामिल है।
1 आंध्र प्रदेश के गोसावीडू शेख हसन को मरणोपरांत पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। वे एक स्वतंत्रता सेनानी के साथ जाने-माने नादस्वरम वादक भी रह चुके थे। सात दशकों तक हसन ने भगवान श्रीराम की प्रार्थना में यह वाद्य यंत्र बजाया। हसन ने अपना जीवन ऐतिहासिक भद्रचालम के श्री सीतारामचंद्र स्वामी मंदिर को समर्पित कर दिया।
2. उत्तर प्रदेश के सेठ पाल सिंह को भी पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है। सेठ पाल को कृषि के क्षेत्र में योगदान के लिए पहचाना जाता है। उन्होंने सिंघाड़े की फसल को उगाने के लिए नियमित आवर्तन प्रक्रिया में महारत हासिल किया था। राज्य के एक बड़े क्षेत्र में उन्होंने किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ फल और सब्जियां उगाने के लिए भी प्रेरित किया है।
3. महाराष्ट्र के महाड के रहने वाले हिम्मतराव बावस्कर क्षेत्र के लिए लोकप्रिय नाम हैं, जिन्हें बिच्छू और सांप के काटने का इलाज करने के लिए जाना जाता है। हिम्मतराव ने संसाधनों की कमी के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में बिच्छू-सांप के काटने से पीड़ित गरीबों का इलाज शुरू किया। अपने इसी सफर में उन्होंने पाया कि प्रैजोसिन नाम की दवा इलाज में इस्तेमाल करने से बिच्छू-सांप के काटने का शिकार होने वालों की मौतों की दर 40 फीसदी से घटकर एक फीसदी तक आ जाती है।
4. करनाल के 82 वर्षीय विशेषज्ञ मदान ने इनविट्रो फर्टिलिटी (आईवीएफ) तकनीक से दुनिया का पहला भैंस का बछड़ा तैयार करने वाली टीम का नेतृत्व किया। उन्होंने करनाल में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के निदेशक के तौर पर लंबे समय तक काम किया। उन्होंने प्रजनन एंडोक्राइनोलॉजी, भ्रूण जैव प्रौद्योगिकी, आईवीएफ और क्लोनिंग में अनुसंधान को बढ़ावा दिया।
5. मरणोपरांत सम्मानित किए गए उत्तर प्रदेश के राधेश्याम खेमका पेशे से प्रकाशक थे। उन्होंने धार्मिक पत्रिका कल्याण का वर्षों तक संपादन किया। वह गीता प्रेस से जुड़े थे, जिसने गीता, महाभारत और रामायण जैसी प्राचीन साहित्यिक कृतियों को लोगों तक पहुंचाया।
6. जम्मू-कश्मीर के फैसल अली डार को कश्मीर के कराटे किड के तौर पर जाना जाता है। बांदिपोरा निवासी डार एक मार्शल आर्ट कोच हैं। उन्होंने एक खेल एकेडमी की स्थापना करके 4,000 छात्रों को कोचिंग दी है। उनका मकसद संवेदनशील, उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं को अवसरों और सपनों के साथ सशक्त बनाना है। डार की उपलब्धियां किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उनके ट्रेन्ड किए छात्रों के पदकों से ही झलकती है।
7. कर्नाटक में शिवमोग्गा के एक प्रसिद्ध गामाका गायक एचआर केशवमूर्ति हैं, जिन्होंने 100 से अधिक शास्त्रीय रागों को गामाका गायन की अपनी शैली में पेश किया है।
8. गुजरात की गामित रमीलाबेन रायसिंहभाई तापी की आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपने प्रयासों से नौ गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराया और 300 से अधिक सेनेटरी इकाइयां बनाईं।
9. मरणोपरांत सम्मानित झारखंड के गिरधारी राम घोंजू के नागपुरी साहित्यकार और शिक्षाविद हैं। रांची के घोंजू ने झारखंड की क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति के उत्थान के लिए काम किया और 25 से अधिक पुस्तकें तथा नाटक लिखे। विशेष रूप से स्थानीय विरासत और नागपुरी संस्कृति की पहचान को पांच दशकों से अधिक समय तक सहेज कर रखा।
10. ओडिशा के नरसिंह प्रसाद गुरु बलांगीर के एक कोशाली लेखक, गीतकार और कोशकार हैं, जिन्होंने दशकों तक कोशाली भाषा का समर्थन किया। उन्होंने कोशाली में 10 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं और आकाशवाणी द्वारा प्रसारित लगभग 500 गीतात्मक गायनों की रचना की है।
11. तमिलनाडु की आर मुथुकन्नमल विरालीमलाई की एक सदिर नर्तकी हैं। उन्होंने 70 से अधिक वर्षों में 1,000 से अधिक नृत्य और गायन शो में प्रदर्शन किया।
12. मोहाली के एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह ने अपने जीवन के तीन दशक से अधिक समय पंजाब में 1,000 से अधिक कुष्ठ रोगियों की सेवा में समर्पित किया।
13. मध्य प्रदेश में बुंदेलखंड निवासी राम सहाय पांडे एक अनुभवी राई लोक कलाकार है। वह 60 वर्षों से मृदंगम की धुनों के साथ मेल करके इस नृत्य को लोकप्रिय बना दिया।