Saturday, March 14, 2026
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डूबतो सुरुज के जे पूजे इहे बाटे हमर बिहार

– सुषमा त्रिपाठी
बिहार के आत्मा बसेला छठ महापर्व में और हम हईं बिहारी। हमनी के इंहा मैं न चलेला, हम चलेला। गौर करे वाला बात ई ह कि हम शब्द बिहार में अहंकार के परिचय ना देवला बल्कि समूह, घर – परिवार अउरी समाज के परिचय देवेला। जहवां -जहवां बिहारी गइले…आपन समाज आपन करेजा में रखले…दुनिया के नजर में..अउरी अपने ही देस में हमनी के मजदूर कहल जाता। एगो भाषा के लेके कहियों पर आपन भाषा बोलवाए खातिर लोग आपन अहंकार में गरीब बिहारी के पीट के अपना के बड़का सेर बुझता…मगर भासा परेम के चीज ह….थोपे के न। कवनो भाषा अपना साहित्य से बढ़ेले, ओकरा प्रति जागरूकता से बढ़ेले, दूसरा के महत्व समझ के विनम्र होके साथ चलला से बढ़ेले। हम मान तनी कि भोजपुरी में अश्लील गीत से बदनाम करे वाला कलाकार बाड़े अउरी ओकरा से हमनी के माथा लाज से गड़ जाला लेकिन भोजपुरी खाली ओतने त न ह। छठ के मौका बा…बोल दीं कि शारदा सिन्हा के गीत सुन के कि राउर अंखियन से लोर न आ जाला। आज पूरा संसार में जइसे भोजपुरी लोग सुनतरे, ओइसहीं छठ पूजा भी होखता…हमनी के कवनो भासा बा संस्कृति के अपमान न करेलींजा, उ बात अलग बा कि रउरा सबके नजर में बाप – दादा के जमाने से राउर अर्थव्यवस्था के रीढ़ रहे वाला बिहारी बहिरागत अउरी वोट बैंक ही रह गइल। कभी छठ पूजा में देखब…जे सुरूज देव….भर संसार के उजियार करेलन…हमनीं के ओनकर पूजा करेलींजा। परकति देवी के छठां अंश हईं छठी मइया…हमनी के ओनकर पूजा करेलीं जा। हमनी के बिहारी हईं…साल भर परदेस में खट लेब जा लेकिन बरिस में एक बार त घरे जाहिं के बा…छठ के बहाने परिवार से मिलल हो जाला, माई-बाबू के देख ले लीं जा…इ चार दिन के चैन भी बहुत जगहा खटकेला।
छठ पूजा परिवार के एक राखे के मंगलकामना के पूजा ह..कवनो ऊंच -नीच न। लोक साहित्य पढ़ब त जानब कि छठी मइया सुरुज देव के बहिन हईं। जब जीवन देवे वाला जल के साधन मानके हमनीं के ओनका से गोहार लगाइलें त परिवार के आगे बढ़ाए के आसीरबाद मिलेला। हमनीं के इहां मइया स्त्री अउरी ममता के प्रतीक हई। परिवार के सही मतलब तब बूझब रउरा, जब छठ के गीत गहराई से सुनब। छठ के गीत में कुल अउरी परिवार के बात बा, मजबूत सम्बन्ध – आपसी सहयोग के बात बा। परिवार के मतलब अहजा पति-पत्नी अउर बच्चा भर न ह बल्कि एकरा के आगे बढ़के बा। पूरा परिवार छठ के तैयारी में शामिल होला। आज के एकल परिवार में जब आगे -पीछे केहु नइखे। बच्चन से बूझे अउर बतिवाले वाला केहू नइखे…तब इहे परिवार खड़ा होला। छठ ए परिवार के भावना के मजबूत करेके नाम ह..अवसर ह…जहाँ बच्चन से लेकर जवान अउरी बुढ़वन तक, सब के सब छठी माई के पूजा में आपन-आपन भूमिका निभावेला। अइसन कवनो बाध्यता नइखे कि खाली महिला ही इ बरत करिहें, मरद लोग भी करेला। परसादी बनाए में, घाट सजाए में, पूजा के सामान जुटाए में सबके भूमिका रहेला। गेहूं सुखाते – सुखाते बतरस में कब दुःख सूख गइल पते न चलेला। इ समाज रेगिस्तान में चलेला…छठ नीहन परब..एकरा में पोखर नीहन बा..जे पियास बुझावेला…टूटत करेजा के सम्भार लेला। दादा-दादी, नाना-नानी, भाई- बहिन, भउजी, चाचा -चाची, मउसा- मउसी, मामा-मामी, फुआ -फूफा, बच्चा सबके लेके परिवार बनेला…। समस्या कहवां नइखे लेकिन…उ समस्या में राह देखावे खातिर सबसे पहिले इहे लोग खड़ा होएला। बच्चन के हमनी के इहां अकेले न छोड़ल जाला। बड़का बाबूजी,चाचा, मामा कब बाप बन जाएले..पतो न चलेला। फूआ-चाची,मउसी, मामी कब महतारी नीहन अंकवारी में सब ताप हर लेली, बुझियो न पाइब…एहे परिवार ह…इहे परिवार ह। जब नइकी दुलहिन बियाह कइके ससुरारी आवेली…तब इहे परिवार ओनका साथ रहेला..ननद कब भउजाई खातिर अपने परिवार के सामने खड़ा हो जाएली…पता न चलेला। काहे कि ए घर में ननद ही बहिन के जगहा पर बाड़ी । दुलहिन भी जब बरत करेली तब समूचा कुल-परिवार के आपन आराधना में शामिल करेली -लिहिएं अरग हे मईया/ दिहीं आशीष हजार । पहिले पहिल हम कईनी/छठी मईया व्रत तोहर । करिहा क्षमा छठी मईया/ भूल-चूक गलती हमार ।
छठी मैया से संतान, स्वास्थ्य और परिवार की समृद्धि के कामना कइल जाला। प्रार्थना कवनो व्यक्ति विशेष खातिर ही न होवेला। परदेस जाकर काम करे वाला बबुआ खातिर महतारी पूजा करेलीं कि कइसहूं छठ पर बबुआ घरे आवस। छठ के गीत में बेटी के अउरी ओकर कल्याण के कामना कइल जाला — हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी, हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी ।। के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी, के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ।। हमरो जे बेटी तोहन बेटिया से उनके लागी, हमरो जे बेटी तोहन बेटिया से उनके लागी ।। से करेली छठ बरतिया से उनके लागी, से करेली छठ बरतिया से उनके लागी ।।
खाली बेटी न बल्कि पढ़ल-लिखल दामाद भी बरती के चाहीं। -‘रुनकी-झुनकी बेटी मांगिला, पढ़ल पंडितवा दामाद…हो छठी मईया, तोहर महिमा अपरमपार’।
छठ के गीतों में देवर के चर्चा बा -कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय बहंगी लचकत जाय होई ना देवर जी कहरिया, बहंगी घाटे पहुंचाय बहंगी घाटे पहुंचाय ऊंहवे जे बारि छठि मैया बहंगी के उनके के जाय बहंगी उनका के जाय। शारदा सिन्हा के हई गीत सुनीं -हमरो सुन लीं पुकार/ससुरा में अईनी कईनी बरतिया/हिवआ जुड़ाई दीहिं पिया के पीरीतिया/अचल सुहाग दीह मईया, कईनी बरत तोहार/गोदिया भराई दीहीं धियवा अऊर पुतवा/अंचरा में भरी दीहीं ममता दुलरवा/ सूपवा चढ़ाईब छठी मैया, देहब अरघ तोहार/ सास-ससुर के रोगवा मिटईह/उनकर कयवा के कंचन बनईह/कंचन बनईह लऊके अन्हार छठी मईया/कर दीहिं घर ऊजियार/देवरा-ननदिया के दीहीं वरदनवा/परजन पुजन पुराई सपनवा
छठ खातिर कवनो पंडित -पुरोहित न चाहीं। परिवार से लेके आस- पड़ोस, गांव -जवार, सब परिवार हो जाला। घाट पर अनजान भी परिवार हो जाला। छठ सामूहिक, आपन बना लेवे के परब ह। बिहार के मैथिली में एगो गीत बा – ‘डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै, उग हो सुरुज देव/ अरघ केर बेर, हो पुजन केर बेर। मालिन बेटी फूल नेने ठाढ़ छै, उग हो सुरुज देव।।’ गीतों में पेड़-पौधे, फूल-पत्ती की विस्तार से चर्चा बा, ओनकर महातम के चर्चा बा। मसलन- ‘कोन जल पटेब मालिन, बेली-चमेली/ मालिन कोन जल पटेब अड़हुल फूल।।’ अइजा परम्परा बा, प्रकृति बा, सरजनहार बाड़े। अब त दुःख – पीड़ा मिटाए के गोहार बा – दिन-रात खटी-खटी पैसा कमाइला, सब कमाई करजा में जाय; हे छठी मइया बिहारे में दे दीं रोजगार।
दुःख के बीच अगर जीयल सीखे के बा त बिहार आईं। कम में गुजार करके कइसे कमर्ठ होके संतोष से सुख से जीयल जाला, इ सीखे के बा त कवनो परदेसी बिहारी के पास जाईं। सब तरह के बेइज्जती के बीच कइसे श्रमदान से लेके …सीमा पर सैनिक जीवनदान करेलन…इ देखे खातिर बिहार आईं। बिहार के नाम पर मजाक आसान ह। राम जी के भी सीता मइया खातिर बिहार के मिथिला में ही आइके पड़ल रहे। बाल्मीकि…लिखलेह तबे रउरा राम जी के जानतनी। बाकी अउरी का कहीं…काहे कि कृतज्ञता बिहार के रोम-रोम में बसल बा -डूबतो सुरुज के जे पूजे इहे बाटे हमर बिहार इहे बाटे हमर बिहार।

 

मशहूर अभिनेता सतीश शाह का निधन

मुम्बई। मशहूर हास्य अभिनेता सतीश शाह का शनिवार को निधन हो गया है। फिल्मकार अशोक पंडित ने इस बात की जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की। सतीश शाह ने करीब 4 दशकों तक हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम किया। इस दौरान उन्होंने कई हिट फिल्मों और टीवी सीरियल्स में अपनी अदाकारी से लोगों का दिल जीता। उनकी अदाकारी इतनी रियल होती थी कि उनके साथ काम करने वाले एक्टर शूटिंग करने की बजाय हंस-हंसकर लोटपोट हो जाया करते थे। ऐसा ही एक वाकया फिल्म ‘मैं हूं ना’ की शूटिंग के दौरान हुआ। दरअसल, एक सीन को फिल्माते समय उनकी एक्टिंग और कमाल की कॉमिक टाइमिंग देख शाहरुख खान की हंसी छूट गई थी, लेकिन सतीश शाह ने उसे शॉट खराब करने की कोशिश समझा और डायरेक्टर फराह खान से फिल्म छोड़ने की बात कह दी। मामला बिगड़ते देख शाहरुख खान आगे आए और उन्होंने सतीश शाह की गलतफहमी दूर की। यह किस्सा खुद उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में शेयर किया था। सतीश शाह ने बताया था कि फिल्म ‘मैं हूं ना’ के डायरेक्टर फराह खान ने उन्हें दो किरदार ऑफर किए थे। पहला था कॉलेज के प्रिंसिपल का और दूसरा था एक थूकने वाले प्रोफेसर का।
यह किरदार लेक्चर या बात करते समय थूक फेंकता था। सतीश को लगा कि ये रोल उनकी कॉमिक स्टाइल से मैच करेगा और वाकई ये उनके करियर का एक यादगार हिस्सा बन गया।
‘मैं हूं ना’ की शूटिंग शुरू हुई। सतीश ने मिरर के सामने उस लहजे में बोलने की प्रैक्टिस की, लेकिन सेट पर पहुंचे तो हालात उलट गए। पहले ही टेक में सतीश ने जब डायलॉग बोला, “क्लास, अटेंशन!” और ‘थूकने’ का ऐक्ट किया तो साथी कलाकार शाहरुख खान, सुष्मिता सेन समेत वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े।
सतीश को लगा कि उनसे शॉट गलत हो गया, लेकिन फराह खान ने कट न कहकर कहा- ‘परफेक्ट! फिर से।” दूसरे टेक में फिर वही—हंसी का दौर।
8 टेक तक ऐसे ही चलता रहा, कभी शाहरुख की आंखों में आंसू आ जाते, कभी सुष्मिता कंधे हिला-हिलाकर हंसतीं। यह देख सतीश का चेहरा लाल हो गया। वे इतने परेशान हो गए कि मन बना लिया कि अब वह यह फिल्म छोड़ देंगे, सब उनका मजाक उड़ा रहे हैं।
सतीश गुस्से में फराह खान के पास गए और बोले, “ये क्या हो रहा है? अगर ऐसे ही चलेगा तो मैं जा रहा हूं।” तभी शाहरुख ने बीच में कूदकर कहा, “सर, रुकिए! समस्या ये है कि आपकी एक्टिंग इतनी रियल है कि हम अपनी हंसी रोक नहीं पा रहे, लेकिन सीन तो पूरा करना है।”
फिर टीम ने इसे शूट करने का आइडिया निकाला। सतीश शाह के शॉट्स अलग से फिल्माए गए और बाकी कलाकारों के अलग। आखिरी में जब एडिटिंग हुई, तो सीन परफेक्ट लग रहा था। जब फिल्म रिलीज हुई, तो दर्शक ठहाकों से लोट-पोट हो गए। सतीश शाह के इस किरदार की आज भी लोग नकल करते दिखाई देते हैं।

जिन्दगी का स्वाद बता गये अबकी बार मोदी सरकार का नारा देने वाले पीयूष पांडे

मुम्बई । विज्ञापन जगत की सादगी भरी भाषा को आम जनमानस तक पहुंचाने वाले प्रसिद्ध एड गुरु पीयूष पांडे अब हमारे बीच नहीं रहे। 24 अक्तूबर को 70 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। चार दशकों से अधिक समय तक उन्होंने भारतीय विज्ञापन उद्योग को नई दिशा दी। उनके बनाए विज्ञापनों के साथ एक पूरी पीढ़ी बड़ी हुई। चाहे वह कैडबरी का भावनाओं से भरा विज्ञापन हो, फेविकोल का मजबूत जोड़ दिखाने वाला दृश्य या लूना मोपेड की यादें ताजा करने वाली झलक, हर एक रचना ने दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई पूरी करने के बाद पीयूष पांडे ने पेशेवर जीवन की शुरुआत एक चाय कंपनी में बतौर टी टेस्टर की थी, जहां उनके मित्र और क्रिकेटर अरुण लाल पहले से कार्यरत थे। वर्ष 1982 में उन्होंने ओगिल्वी नामक विज्ञापन एजेंसी में ग्राहक सेवा कार्यकारी के रूप में कदम रखा। रचनात्मकता और भाषा पर असाधारण पकड़ के दम पर वे धीरे-धीरे ऊंचाइयां छूते गए और अंततः कंपनी के मुख्य रचनात्मक अधिकारी और कार्यकारी अध्यक्ष बने। राजस्थान के जयपुर में जन्मे पीयूष पांडे ऐसे परिवार से थे जहां साहित्य जीवन का हिस्सा था। उनके माता-पिता दोनों ही हिंदी साहित्य के शिक्षक थे। घर का यही साहित्यिक वातावरण और शुद्ध हिंदी का अभ्यास उनके भीतर भाषा के प्रति गहरी समझ लेकर आया। बाद के वर्षों में यही भाषा उनके विज्ञापनों की आत्मा बनी।  उनकी लेखनी जितनी प्रभावशाली थी, उनकी आवाज भी उतनी ही सशक्त थी। उनकी बहन, जानी-मानी गायिका इला अरुण, जयपुर में विविध भारती के लिए रेडियो जिंगल्स बनाया करती थीं, जिनमें पीयूष अपनी आवाज दिया करते थे और उस वक्त उन्हें इसके बदले मात्र 50 रुपये मिलते थे। जब भारतीय विज्ञापन पश्चिमी शैली की नकल में उलझे हुए थे, तब पीयूष पांडे ने स्थानीयता और आम आदमी की भाषा को केंद्र में रखा। उन्होंने छोटे शहरों की संवेदनाओं, आम जन के हास्य और सरलता को विज्ञापनों में पिरोया। उनके बनाए कई विज्ञापन लोगों की जबान पर चढ़ गए, जैसे-

  • “कुछ खास है” (कैडबरी)
  • “मजबूत जोड़” (फेविकोल)
  • “हर घर कुछ कहता है” (एशियन पेंट्स)
  • “दो बूंद जिंदगी की” (पोलियो जागरूकता अभियान)

सिर्फ विज्ञापन ही नहीं, फिल्मों में भी पीयूष पांडे ने अपनी छाप छोड़ी। वर्ष 2013 में रिलीज हुई सुजीत सरकार की फिल्म “मद्रास कैफे” में उन्होंने भारत सरकार के कैबिनेट सचिव की भूमिका निभाई थी। यह फिल्म 80 के दशक के अंत में श्रीलंका के गृहयुद्ध और राजीव गांधी की हत्या की पृष्ठभूमि पर आधारित थी।  इसके अलावा, उन्होंने अपने भाई प्रसून पांडे के साथ मिलकर “भोपाल एक्सप्रेस” की पटकथा भी लिखी थी। महेश मथाई निर्देशित यह फिल्म 1984 की भोपाल गैस त्रासदी पर आधारित थी, जिसमें नसीरुद्दीन शाह, के.के. मेनन, जीनत अमान, विजय राज और नेत्रा रघुरामन जैसे कलाकारों ने यादगार अभिनय किया।

किसान ने रोजाना 10 रुपये बचाए, दीपावली पर बेटी को दिलाई स्कूटी

रायपुर । छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के केसरापाठ गांव के छोटे किसान और अंडा-चना की दुकान चलाने वाले बजरंग राम भगत ने अपनी मेहनत और बचत से इस दीपावली पर अपने परिवार को खुशी से भर दिया। उनकी यह सादगी और समर्पण की कहानी अब सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रही है।दरअसल, बजरंग राम भगत ने पिछले छह से सात महीनों तक हर दिन 10 रुपए बचाकर रकम इकट्ठा की। जब सिक्कों में लगभग 40 हजार रुपए जमा हो गए, तो उन्होंने इसमें 60 हजार रुपए नकद जोड़कर दीपावली के दिन अपनी बेटी चम्पा भगत के साथ शहर के देवनारायण होंडा शोरूम पहुंचकर होंडा एक्टिवा स्कूटी (98 हजार 700 ऑन रोड) खरीदी। चम्पा ने बताया कि पिताजी रोज 10 रुपए बचाते थे ताकि घर के लिए कुछ बड़ा खरीद सकें। हमने मिलकर सोचा कि स्कूटी लेने से 18 किलोमीटर दूर शहर से सामान लाने-ले जाने में आसानी होगी और परिवार के सभी सदस्य इसका उपयोग कर सकेंगे।शोरूम मालिक आनंद गुप्ता ने बताया कि बजरंग राम की ईमानदार मेहनत और लगन देखकर स्टाफ ने पूरे सम्मान के साथ सिक्के गिने और उन्हें स्कूटी की चाबी सौंपी। कंपनी की स्कीम के तहत उन्हें लॉटरी स्क्रैच में मिक्सर ग्राइंडर भी उपहार में मिला। बजरंग राम ने कहा कि मुझे कर्ज लेना पसंद नहीं। मैं जो कमाता हूं, उसी में बचत करता हूं। यही सोचकर मैंने नकद में स्कूटी खरीदी। यह हमारे परिवार के लिए दीपावली का सबसे बड़ा तोहफा है। चम्पा ने बताया कि उनके परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि और महतारी वंदन योजना का लाभ मिला है। घर में पहले से बुआ द्वारा दी गई एक मोटरसाइकिल थी, लेकिन स्कूटी से उसकी पढ़ाई और घर-परिवार के कामकाज में अब काफी सुविधा होगी।

दीपावली पर देश में हुई 6.05 लाख करोड़ की रिकॉर्ड बिक्री

नयी दिल्ली । कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने अपनी रिसर्च शाखा ‘कैट रिसर्च एंड ट्रेड डेवलपमेंट सोसाइटी’ द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के आधार पर देशभर के 60 प्रमुख वितरण केंद्रों, जिनमें सभी राज्यों की राजधानियां एवं टियर-2 और टियर-3 शहर शामिल हैं, पर आधारित ‘विस्तृत दीपावली त्योहार बिक्री 2025’ पर रिसर्च रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष दीपावली पर देशभर में कुल बिक्री 6.05 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची है। इसमें 5.40 लाख करोड़ रुपये का वस्तु व्यापार और 65 हजार करोड़ रुपये का सेवा व्यापार शामिल है। ये अब तक का देश के व्यापार इतिहास का सबसे बड़ा त्योहारी कारोबार है। दिल्ली के चांदनी चौक के सांसद एवं कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि रिपोर्ट यह दर्शाती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीएसटी दरों में राहत और स्वदेशी अपनाने के ‘मजबूत ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को अभूतपूर्व रूप से प्रेरित किया है। प्रधानमंत्री मोदी का ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘स्वदेशी दीपावली’ का आह्वान जनता के बीच गहराई से गूंजा। 87% उपभोक्ताओं ने भारतीय वस्तुओं को विदेशी वस्तुओं के मुकाबले प्राथमिकता दी, जिससे चीनी उत्पादों की मांग में तेज गिरावट दर्ज की गई। व्यापारियों ने बताया कि भारतीय निर्मित वस्तुओं की बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में 25% बढ़ी है। खंडेलवाल के अनुसार, दीपावली 2025 के आंकड़े पिछले वर्ष (₹4.25 लाख करोड़) की तुलना में 25% की वृद्धि दर्शाते हैं। मुख्य रूप से गैर-कॉरपोरेट एवं पारंपरिक बाजारों ने कुल व्यापार में 85% योगदान दिया, जो भारतीय खुदरा बाजारों और छोटे व्यापारियों की शानदार वापसी को रेखांकित करता है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने बताया कि दीपावली की बिक्री में किराना एवं एफएमसीजी 12%, सोना–चाँदी 10%, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल्स 8%, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 7%, रेडीमेड परिधान 7%, गिफ्ट आइटम 7%, होम डेकोर 5%, फर्निशिंग एवं फर्नीचर 5%, मिठाई एवं नमकीन 5%, वस्त्र 4%, पूजन सामग्री 3%, फल एवं मेवे 3%, बेकरी एवं कन्फेक्शनरी 3%, फुटवियर 2%, तथा अन्य विविध वस्तुएं 19% शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सेवा क्षेत्र में भी भारी वृद्धि दर्ज हुई और इसमें ₹65,000 करोड़ का व्यापार हुआ। पैकेजिंग, हॉस्पिटैलिटी, टैक्सी सेवाएं, ट्रैवल, इवेंट मैनेजमेंट, टेंट एवं सजावट, मैनपावर और डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व गतिविधि रही, जिससे त्योहारी अर्थव्यवस्था के दायरे का विस्तार हुआ। खंडेलवाल ने कहा, जीएसटी दरों का तर्कसंगठन, उपभोक्ता मांग को बढ़ावा देने में बेहद प्रभावी सिद्ध हुआ है। सर्वे में शामिल 72% व्यापारियों ने माना कि उनके अधिक बिक्री का सीधा कारण जीएसटी दरों में कटौती रही है। उपभोक्ताओं ने भी मूल्य स्थिरता से संतुष्टि व्यक्त की, जिससे त्योहारी खर्च में निरंतरता बनी रही। दोनों नेताओं ने कहा कि व्यापारी और उपभोक्ता भावना पिछले एक दशक के उच्चतम स्तर पर हैं।ट्रेडर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (टीसीआई): 8.6/10 तथा कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (सीसीआई): 8.4/10 के स्तर पर है। उनका मानना है कि उपभोग में यह वृद्धि दीर्घकालिक रूप से स्थायी है, जो नियंत्रित मुद्रास्फीति, बढ़ती आय, और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर विश्वास से प्रेरित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह उत्साहपूर्ण स्थिति सर्दियों, विवाह सीजन और जनवरी के मध्य से शुरू होने वाले अगले त्योहारी दौर तक जारी रहेगी। रोजगार एवं आर्थिक प्रभाव पर बोलते हुए खंडेलवाल ने बताया कि गैर-कारपोरेट एवं गैर-कृषि क्षेत्र, जिसमें 9 करोड़ छोटे व्यापारी और लाखों विनिर्माण इकाइयाँ शामिल हैं, आज भी भारत की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन हैं। दिवाली 2025 के व्यापार से 50 लाख अस्थायी रोजगार सृजित हुए हैं। ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों ने कुल व्यापार में 28% योगदान दिया, जो महानगरों से परे आर्थिक सशक्तिकरण का प्रमाण है।
खंडेलवाल ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर सरकार को कई सुझाव दिए गए हैं, जिसमें छोटे व्यापारियों एवं निर्माताओं के लिए जीएसटी प्रक्रियाओं को सरल किया जाए। क्रेडिट तक पहुंच आसान की जाए। टियर 2 एवं टियर 3 शहरों में लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग हब विकसित किए जाएँ। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देकर बाजारों का डिजिटलीकरण किया जाए। इसके लिए बैंक कमीशन को समाप्त किया जाए। शहरी बाजारों में यातायात, पार्किंग और अतिक्रमण प्रबंधन को सुदृढ़ किया जाए। ‘स्वदेशी’ अभियान को सरकार और व्यापार जगत के संयुक्त प्रयास से निरंतर प्रोत्साहित किया जाए।

याद रहेंगे अंग्रेजों के जमाने के जेलर असरानी

-84 साल की उम्र में निधन
मुम्बई । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और निर्देशक असरानी का सोमवार शाम निधन हो गया। 84 वर्षीय असरानी का निधन मुंबई के आरोग्य निधि अस्पताल में हुआ। सांताक्रूज के शास्त्री नगर श्मशान घाट पर परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। यह खबर पूरे फिल्म उद्योग के लिए गहरा सदमा लेकर आई। असरानी ने निधन से कुछ ही घंटे पहले अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर दिवाली 2025 की शुभकामनाएं शेयर की थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने मौत से कुछ समय पहले अपनी पत्नी मंजू असरानी से कहा था कि उनकी मृत्यु पर कोई शोर-शराबा न किया जाए। इसी कारण परिवार ने बिना किसी औपचारिक घोषणा के चुपचाप उनका अंतिम संस्कार कर दिया। असरानी का फिल्मी सफर 1960 के दशक में शुरू हुआ था और उन्होंने अपने करियर में 350 से अधिक फिल्मों में काम किया। कॉमेडी और गंभीर दोनों ही भूमिकाओं में असरानी ने अपनी अलग छाप छोड़ी। 1970 के दशक में वे बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय चरित्र अभिनेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने ‘मेरे अपने’, ‘कोशिश’, ‘बावर्ची’, ‘परिचय’, ‘अभिमान’, ‘चुपके-चुपके’, ‘छोटी सी बात’, और ‘रफू चक्कर’ जैसी यादगार फिल्मों में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी ‘शोले’ में निभाई गई सनकी जेलर की भूमिका आज भी दर्शकों की यादों में ताजा है। इसके अलावा वे बाद के वर्षों में ‘भूल भुलैया’, ‘धमाल’, ‘ऑल द बेस्ट’, ‘वेलकम’, ‘आर… राजकुमार’ और ‘बंटी और बबली 2’ जैसी हिट फिल्मों में भी नजर आए। 1 जनवरी 1941 को जयपुर के एक सिंधी हिंदू परिवार में जन्मे असरानी ने अभिनय की शुरुआत थिएटर से की थी। उन्होंने 1960 से 1962 तक ललित कला भवन, ठक्कर से अभिनय की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वे मुंबई आ गए, जहां उनकी मुलाकात किशोर साहू और ऋषिकेश मुखर्जी जैसे फिल्मकारों से हुई। उनके सुझाव पर असरानी ने प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली और फिल्मों में कदम रखा। हिंदी फिल्मों के अलावा असरानी ने गुजराती सिनेमा में भी अपना योगदान दिया। वे न केवल एक बेहतरीन अभिनेता थे, बल्कि निर्देशन के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई।

दीपावली के साथ सादगी से भरा हो सौंदर्य

दीपावली का त्यौहार रंग, रोशनी और रॉयल लुक्स का संगम होता है, लेकिन अगर आप इस बार कुछ हल्का, सटल और क्लासी पहनना चाहती हैं, तो मिनिमल लुक आपके लिए परफेक्ट ऑप्शन है। मिनिमलिस्टिक फैशन का मतलब है, कम में भी ज्यादा निखरना। इसमें ओवरड्रेसिंग या हैवी ज्वेलरी की जरूरत नहीं होती, बल्कि सिंपल आउटफिट्स, न्यूट्रल मेकअप और हल्की एक्सेसरीज से आप बेहद ग्रेसफुल दिख सकती हैं।
मिनिमल लुक त्योहारों पर आजकल बहुत पसंद किया जा रहा है। अगर आप भी दिवाली पर हल्के लेकिन खूबसूरत अंदाज में तैयार होना चाहती हैं, तो नीचे बताए गए टिप्स को जरूर फॉलो करें। ये न सिर्फ आपको स्टाइलिश बनाएंगे बल्कि आपकी पर्सनालिटी को भी नया आयाम देंगे।
मिनिमल लुक के लिए सबसे जरूरी है रंगों का चयन। पेस्टल शेड्स जैसे बेबी पिंक, मिंट ग्रीन, लाइट लैवेंडर, या व्हाइट आपको क्लासी और शांति भरा लुक देंगे। ये रंग बहुत आकर्षक लगते हैं और त्योहार के मौके पर एलिगेंस बनाए रखते हैं।
भारी एंब्रॉयडरी की जगह चिकनकारी कुर्ता, हैंडब्लॉक प्रिंटेड सूट या साटन/सिल्क की प्लेन साड़ी चुनें। कपड़ा भले ही सादा हो, लेकिन अगर फिटिंग और स्टाइल सही हो, तो आप बिना ओवरड्रेस हुए भी बेहद स्टाइलिश दिखेंगी। ज्यादा हैवी कपड़े आपके मिनिमल लुक को खराब कर सकते हैं।
मिनिमल लुक के लिए भारी नेकलेस या फुल सेट की जगह सिर्फ एक स्टेटमेंट ईयररिंग या छोटा सा पेंडेंट काफी है। मोती, मीनाकारी या स्टोन ज्वेलरी इसमें बेस्ट रहती है। आप चाहें तो हल्का गोल्ड का सेट भी कैरी कर सकती हैं। बस ये ज्यादा ओवर न हो।
दिवाली पूजा के लिए मेकअप में लाइट फाउंडेशन, न्यूड लिपस्टिक, थोड़ा हाईलाइटर और काजल लगाकर ग्लोइंग और नेचुरल लुक पाएं। इस तरह का लुक चेहरे पर ताजगी और आत्मविश्वास लाता है।

दीपावली के आलोक में स्वाद का तड़का

बनारसी आलू दम

सामग्री – 1/2 किलो छोटे आलू , 4 कटे टमाटर,  2 टेबल स्पून क्रीम/मलाई , 4 खड़ी लाल मिर्च , 2 टेबल स्पून काजू,1 टी स्पून जीरा ,1 टी स्पून सौंफ , 1 टेबल स्पून कसूरी मेथी ,1/2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर, 1 इंच कटी अदरक , 1/2 टी स्पून गरम मसाला, 1 टेबल स्पून देसी घी, 4 हरी इलायची , 1 टेबल स्पून बारीक कटी हरी धनिया पत्ती , तलने के लिए तेल , नमक  स्वादानुसार

विधि –सबसे पहले आलू लें और उन्हें छीलकर साफ पानी में अच्छी तरह से धो लें। इसके बाद आलुओं को कांटे या टूथपिक की सहायता से चारों ओर से गोद दें। इसके बाद आलू को साफ कपड़े से पोछ लें। सारे आलू को गोदने के बाद उन्हें एक प्लेट में अलग रख दें। एक कड़ाही में तेल डालकर उसे मीडियम आंच पर गरम करने के लिए रख दें। जब तेल गरम हो जाए तो उसमें आलू डालकर गोल्डन ब्राउन होने तक तल लें और प्लेट में किचन पेपर पर निकाल लें। अब एक अन्य कड़ाही में थोड़ा सा तेल डालकर गरम करें। इसमें जीरा, सौंफ, खड़ी लाल मिर्च, बारीक कटे टमाटर और कटे काजू डालकर भूनें।  इस दौरान आंच को मीडियम पर ही रखें। इस मिश्रण को भुनने में लगभग 5 मिनट का वक्त लगेगा। अब गैस बंद कर टमाटर के मसाले को ठंडा होने दें। इसके बाद मिक्सी में टमाटर का मसाला डालकर पीस लें और उसकी प्यूरी तैयार कर लें। इसके लिए आवश्यकता होने पर थोड़ा सा पानी भी मिला सकते हैं। अब कड़ाही में घी डालकर उसे गरम करें। घी पिघलने के बाद उसमें हरी इलायची और कसूरी मेथी डालकर कुछ सैकंड तक भून लें। इसके बाद इसमें टमाटर की प्यूरी और स्वादानुसार नमक मिला दें। अब करछी के बीच-बीच में चलाते हुए ग्रेवी को पकने दें। कुछ देर बाद इसमें दो कप पानी मिलाएं और सामग्री को उबलने दें। ग्रेवी में उबाल आ जाए तो उसमें तले हुए आलू डालें और धीमी आंच पर कड़ाही को ढककर 15 मिनट पकने दें।  बीच-बीच में करछी की मदद से सब्जी को चलाते भी रहें। इसमें ताजी क्रीम और गरम मसाला भी डालकर मिला दें। एक उबाल आने के बाद गैस की आंच बंद कर दें।  अब बनारसी दम आलू बनकर तैयार है। इसे सर्व करने से पहले कटी हरी धनिया पत्ती से गार्निश करें। सब्जी को रोटी, नान या पराठे के साथ सर्व करें।

 

आलू-पनीर कुलचा

सामग्री – 3 कटोरी मैदा, 3 टी स्पून दही , 1 चुटकी सोडा ,2 टी स्पून तेल

भरावन के लिए – 4 उबले आलू , 1 कटोरी पनीर , 4 कटी हरी मिर्च ,2 कटे प्याज ,1/2 टी स्पून जीरा पाउडर, 1/2 टी स्पून गरम मसाला ,  2 टी स्पून खड़ा सूखा धनिया, 1 टी स्पून अनारदाना , 1/2 टी स्पून अमचूर,  8-10 पुदीना के पत्ते, नमक स्वादानुसार

विधि – सबसे पहले एक बर्तन में मैदा डालें और उसमें थो़ड़ा सा तेल, सोडा और चुटकीभर नमक डालकर आटा गूंथ लें। ध्यान रहे कि आटा नरम रहे। इसके बाद इसे ढककर 15 मिनट के लिए अलग रख दें। अब एक बड़ी मिक्सिंग बाउल लें और उसमें उबले आलू मैश कर डाल दें। फिर पनीर के टुकड़े, बारीक कटा प्याज, पुदीना और सूखे मसाले डालकर सभी को अच्छी तरह से मिक्स करते हुए भरावन तैयार कर लें। अब मैदे का आटा लें और उसे एक बार फिर गूंथ लें। इसकी एक बड़ी लोई लेकर उससे एक बड़ी और पतली रोटी बेल लें। अब रोटी पर तेल लगाएं और ऊपर से थोड़ा सा सूखा मैदा छिड़क दें। इसके बाद रोटी को रोल करें और लगभग आधा घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। तय समय के बाद रोल निकालें और उसकी लोइयां काट लें। अब इन्हें चपटा कर इनमें पनीर और आलू से तैयार भरावन भर दें और अच्छे से बंद कर उन्हें फैला दें। ऊपर से कुलचे पर थोड़ा सा पुदीना लगा दें। अब एक तवे को गरम करने के लिए गैस पर रख दें। इसके बाद कुलचे के एक तरफ पानी लगा दें और उसे तवे पर सेंकने के लिए डाल दें। जब कुलचे की एक साइड थोड़ी पक जाए तो उसे पलटते हुए गैस पर अच्छे से सेंक लें। कुलचा सुनहरा होने के बाद एक प्लेट में उतार लें। ऐसे ही अन्य कुलचे भी तैयार कर लें।

रागी खीर

सामग्री – 1 बड़ा चम्मच रागी का आटा, 1 बड़ा चम्मच कद्दूकस किया गुड़, ¼ बड़ा चम्मच इलायची पाउडर, 150-200 मिली दूध, 1 कप पानी, 1 बड़ा चम्मच कटे हुए सूखे मेवे।

 विधि – सबसे पहले रागी के आटे को सूखा भून लें। इसे तब तक भुनें जब तक इसका रंग बदलना शुरू न हो जाए और आपको इसकी खुशबू आने लगे। जब यह अच्छे से भुन जाए, तो ठंडा होने के लिए एक तरफ रख दें। ठंडा होने पर इसमें पहले थोड़ी मात्रा में पानी मिलाकर रागी का घोल बनाएं। ध्यान रखें कि सुनिश्चित करें कि इसमें कोई गांठ न रहे। फिर घोल में अतिरिक्त पानी डालें और मिलाएं। इसके बाद दूध को गरम करना शुरू करें और इसमें इलायची पाउडर और अपनी पसंद के कटे हुए सूखे मेवे डालें।  जब दूध उबलने लगे तो मिश्रण को लगातार चलाते हुए इसमें धीरे-धीरे रागी का घोल डालें। अब लगभग 2-3 मिनट उबालने में मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तो इसे लगातार चलाते रहे और मलाईदार होने तक चलाते रहें। अंत में इसमें कद्दूकस किया हुआ गुड़ मिलाएं और फिर से चलाएं। तैयार है रागी की स्वादिष्ट खीर। इसे गरमागरम परोसें और आनंद लें।

29 लाख दीयों से झिलमिलायी अयोध्या, पुष्पक विमान से उतरे श्रीराम

अयोध्या । दीपों की अनगिनत पंक्तियों से सजी अयोध्या रविवार की शाम ऐसी दमक उठी, मानो स्वयं त्रेता युग धरती पर उतर आया हो। रामकथा पार्क में प्रभु श्रीराम और माता सीता के अवतरण और राज्याभिषेक का भव्य दृश्य लाखों श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया। जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभु श्रीराम के रथ को खींचना शुरु किया पूरा पार्क जय श्रीराम के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। नवें दीपोत्सव में संतों ने राम दरबार पर पुष्प वर्षा की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने संतों का वस्त्र एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया। इसके पहले पुष्पक विमान उतरते ही श्रद्धालु जय श्री राम का उदघोष करते नजर आए। पुष्पवर्षा और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच जब मुख्यमंत्री ने गुरु वशिष्ठ के साथ, भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न व हनुमान का पूजन और वंदन किया तो साक्षात त्रेता युग का आभास हुआ। स्वर्ण सिंहासन, रथ, अश्व और सुसज्जित राजसभा ने त्रेता कालीन रामराज्य को सजीव कर दिया। सीएम योगी ने सबसे पहले राम, लक्ष्मण, मां सीता और हनुमान जी को माला पहनाई। आगे आगे राम, उनके पीछे माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान रथ पर सवार हुए। मुख्यमंत्री योगी ने स्वयं रथ को खींचकर आगे बढ़ाया, संतों ने भी उनका सहयोग किया। इसके बाद श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान सीएम योगी के साथ साथ आगे बढ़े। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीराम की आरती की, फिर प्रतीकात्मक राज्याभिषेक कर उनका आशीर्वाद लिया।

इसके बाद कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जयवीर सिंह और राकेश सचान ने मंच पर पहुंचकर राम दरबार का पूजन और अर्चन किया। इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ संत, महंत, जनप्रतिनिधि और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे। रामकथा पार्क से लेकर राम की पैड़ी, धर्मपथ, लता चौक और हनुमानगढ़ी तक दीपों की पंक्तियां ऐसे झिलमिला उठीं कि पूरा नगर दिव्य आलोक में नहा गया। हर गली, हर घाट, हर भवन जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज रहा था। श्रद्धालु दीप जलाते, भक्ति गीत गाते और इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते दिखे। दीपोत्सव 2025 ने न केवल रिकॉर्ड बनाया बल्कि अयोध्या मॉडल के रूप में एक नया मानक भी स्थापित किया। यहां सुरक्षा, स्वच्छता और अनुशासन के बीच आस्था, संस्कृति और आधुनिकता का सुंदर समन्वय दिखाई दिया। दीपों से जब पूरा अयोध्या आलोकित हुई, तो लगा जैसे देवता स्वयं अयोध्या को सजाने उतर आए हों। रामकथा पार्क से लेकर सरयू तट तक फैला यह दृश्य वर्षों तक स्मृतियों में अंकित रहेगा। दीपोत्सव 2025 ने यह सिद्ध कर दिया कि अयोध्या केवल एक नगर नहीं, बल्कि जीवंत आस्था की ज्योति है, जो सदा मानवता के पथ को प्रकाशित करती रहेगी। कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक पल तब आया जब भरत मिलाप का मंचन हुआ। चरणों में गिरते ही श्रीराम ने भरत को गले लगा लिया। क्षण भर को सभी श्रद्धालु स्तब्ध रह गए और फिर जय श्रीराम के जयकारों से पूरा सरयू तट भक्ति से सराबोर हो गया। श्रद्धालु भावविह्वल होकर नयनों से आंसुओं की धार बहाते दिखे। ऐसा लगा मानो रामायण का दृश्य प्रत्यक्ष हो उठा हो।

आज अपनी आखिरी दिवाली मनाएगा कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज

– 117 साल पहले हुई थी शुरुआत
नयी दिल्ली । देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंजों में से एक कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (सीएसई) इस साल 20 अक्टूबर को अपनी आखिरी काली पूजा और दिवाली मना सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह एक कार्यशील एक्सचेंज के रूप में बंद होने की कगार पर है। लंबे कानूनी और नियामक संघर्ष के बाद एक्सचेंज स्टॉक एक्सचेंज के कारोबार से स्वेच्छा से बाहर निकलने की प्रक्रिया को पूरा करने के करीब है। इसकी शुरुआत 117 साल पहले 1908 में हुई थी। यह कभी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रतिद्वंद्वी था और कोलकाता के वित्तीय परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। लेकिन साल 2001 के केतन पारेख घोटाले के बाद एक्सचेंज को एक बड़ा झटका लगा। इस घोटाले के कारण भुगतान संकट पैदा हो गया था, जब कई ब्रोकर अपनी देनदारियों को पूरा नहीं कर पाए थे। इसने निवेशकों के भरोसे को हिला दिया और धीरे-धीरे एक्सचेंज को पतन की ओर धकेल दिया।अप्रैल 2013 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने नियामक मुद्दों के कारण कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग निलंबित कर दी थी। तब से एक्सचेंज ने वर्षों तक संचालन फिर से शुरू करने की कोशिश की और अदालतों में सेबी के फैसलों को चुनौती दी। हालांकि, कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के बोर्ड ने अंततः स्टॉक एक्सचेंज के कारोबार से हटने का फैसला किया। कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज यानी सीएसई के अध्यक्ष और जनहित निदेशक दीपांकर बोस के अनुसार, शेयरधारकों ने 25 अप्रैल, 2025 को एक असाधारण आम बैठक (ईजीएम) के दौरान निकास योजना को मंजूरी दी थी। इसके बाद एक्सचेंज ने इस साल 18 फरवरी को सेबी को अपनी औपचारिक निकास अर्जी सौंपी। सेबी ने अंतिम समीक्षा करने के लिए राजवंशी एंड एसोसिएट को मूल्यांकन एजेंसी के रूप में नियुक्त किया है, इससे पहले कि वह अपनी मंजूरी दे। जैसे ही सेबी अंतिम हरी झंडी देगा, सीएसई एक स्टॉक एक्सचेंज के रूप में काम करना बंद कर देगा।