Thursday, July 9, 2026
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सूजी की कचौड़ी

सामग्री – 1 कप सूजी, 1/4 छोटी चम्मच अजवायन, 1 बड़े चम्मच तेल
स्टफिंग बनाने के लिए– 2 बड़े चम्मच तेल, 1/4 छोटी चम्मच जीरा,  1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, 1 छोटा चम्मच अदरक, 1 छोटा चम्मच हरी मिर्च,  1/2 कप मटर, 1/4 छोटी चम्मच हल्दी,  1/2 चुटकी हींग, 1/2 छोटा चम्मच नमक, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च, 1/4 छोटा चम्मच अमचूर,  2 उबले हुए आलू, 1 बड़ा चम्मच कसूरी मेथी
कटा हुआ
सूजी की कचौड़ी बनाने की विधि – सबसे पहले सूजी से आप आटा तैयार कर लें। इसके लिए पैन में 2 कप पानी, 1/2 छोटी चम्मच नमक, 1/4 छोटी चम्मच अजवाइन और 1 चम्मच तेल डालें। अब इसमें उबाल आने दें. अब इसमें धीरे धीरे चलाते हुए 1 कप बारीक वाली सूजी मिला लें. इसे आप लगातार चलाते हुए मिला लें। अब इसके लिए डो तैयार कर लें गैस बंद कर दें और सूजी को किसी बर्तन में फैलाकर ठंडा होने के लिए रखें। अब स्टफिंग तैयार कर लें। इसके लिए पैन में को 2 बड़े चम्मच तेल डालें और इसमें 1/4 छोटी चम्मच जीरा, 1 छोटी चम्मच धनिया पाउडर, 1 छोटी चम्मच कसी हुई अदरक और 1 छोटी चम्मच बारीक कटी हुई हरी मिर्च डाल दें।
इन सारी चीजों को हल्का भून लें. इसमें 1/2 कप फ्रोजन हरी मटर, 1/4 छोटी चम्मच हल्दी और 1/2 पिंच हींग डाल दें। सभी चीजों को अच्छी तरह से मिला लें और इसमें 1/2 छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/4 छोटी चम्मच अमचूर पाउडर और 1/2 छोटी चम्मच नमक डाल दें। इस मसाले में उबले हुए आलू डाल दें। तैयार स्टफिंग में कसूरी मेथी और हरा धनिया मिला लें। इस मिश्रण को ठंडा होने दें।

कचौरी बनाने का तरीका – सबसे पहले सूजी का गुंथा हुआ आटा लें और उसे अच्छी तरह गूंथ लें। अब लोई लेकर थोड़ा फैला लें और स्टफ्फिंग भर लें। चारों तरफ से बंद करके कचौड़ी को हल्का बेल लें।
अब कड़ाही में तेल डालकर तेज गर्म कर लें। अब कचौड़ी तेल में डाल दें और 3-4 मिनट तक इसे तेज आंच पर ही तल लों करें. आपको इन्हें सुनहरा होने तक तलना है। तैयार हैं सूजी की खस्ता कचौड़ी. आप इन्हें चटनी या सॉस के साथ खाएं।

बहनों के कारण खेल की दुनिया के सितारे बने ये 5 दिग्गज खिलाड़ी

आज पूरे देश में राखी का त्योहार मनाया जा रहा है। भारतीय खिलाड़ी भी इसे मनाने में पीछे नहीं रहते। आज हम आपको उन 5 क्रिकेटरों के बारे में बताएंगे जिनकी कामयाबी के पीछे उनकी बहनों का हाथ रहा और अगर बहनें ना होतीं तो शायद वो क्रिकेटर भी नहीं बन पाते।

सचिन तेन्दुलकर

क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले सचिन की जिंदगी बहन के प्यार के बगैर अधूरी है। उनकी बहन का नाम सविता है और वो सचिन के पिता रमेश तेंदुलकर की पहली पत्नी की बेटी हैं। सचिन ने कई बार अपनी सफलता का श्रेय उन्हें दिया है। सचिन ने जब 200 टेस्ट मैच खेलने के बाद क्रिकेट को अलविदा कहा तो उस समय उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा था कि उन्हें पहला कश्मीरी विलो क्रिकेट बैट उनकी बहन ने ही तोहफे में दिया था। इतना ही नहीं सचिन के हर मैच में बहन उपवास भी रखती थीं।

हरभजन सिंह

टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी हरभजन सिंह की गिनती भारत के ग्रेट स्पिनर्स में की जाती है। पंजाब के रहने वाले इस क्रिकेटर की 5 बहनें हैं, जिनमें चार उनसे बड़ी हैं और एक बहन छोटी है। भज्जी को 1998 में भारत के लिए डेब्यू करने का मौका मिल गया था, लेकिन जल्द ही वह टीम से बाहर हो गए थे।

बेहद कम लोग जानते हैं कि उसके कुछ दिन बाद वह क्रिकेट छोड़कर ट्रक ड्राइवर बनने चले गए थे। दरअसल, साल 2000 में उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद मां और पांच बहनों की जिम्मेदारी उन्हीं पर आ गई थी। ऐसे में उन्होंने यह ठान लिया था कि वह कनाडा जाकर ट्रक चलाएंगे और पैसे कमाएंगे, लेकिन बहनों की सलाह पर रुक गए और क्रिकेट खेलते रहे। साल 2000 की रणजी ट्रॉफी में उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर टीम इंडिया में जगह बनाई थी। फिर जो हुआ, वह इतिहास है। अगर बहनों ने नहीं रोका होता तो भारत को मैच विनर स्पिनर नहीं मिलता।

महेन्द्र सिंह धोनी

महेन्द्र सिंह धोनी टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तानों में से एक रहे हैं। धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं। माही की सफलता के पीछे बहन जयंती का बड़ा हाथ रहा है। जहां एक तरफ धोनी के पिता उन्हें क्रिकेटर नहीं बनाना चाहते थे। वहीं, धोनी की बहन जयंती हर मोड़ पर अपने भाई के साथ खड़ी रहीं। स्कूल टाइम में जब पिता टीम इंडिया के पूर्व कप्तान को पढ़ने पर ध्यान लगाने के लिए कहते थे, उस वक्त जयंती उनको खेलने देने की पैरवी करती थीं। बहन का निरंतर समर्थन पाकर ही धोनी मैदान पर बेधड़क छक्के उड़ाते रहे और टीम इंडिया के कैप्टन कूल बन सके। माही की बहन जयंती एक स्कूल शिक्षिका हैं।

विराट कोहली

विराट कोहली का अपनी बड़ी बहन भावना कोहली से भावनात्मक रिश्ता है। साल 2006 में जब विराट महज 18 साल के थे तो ब्रेन स्ट्रोक के चलते उनके पिता का निधन हो गया। इतनी छोटी उम्र में पिता को गंवाने के बाद विराट भीतर से सिहर गए थे। इसके बाद उनकी बहन ने हर तरह से उनका साथ दिया। इसका जिक्र कई बार कोहली पहले कर चुके हैं। पिता के जाने के बाद बहन और मां के साथ के कारण ही विराट क्रिकेटर बनने का सपना पूरा कर सके। भावना कोहली को लाइमलाइट बिल्‍कुल भी पसंद नहीं है। उन्‍हें परिवार और दोस्‍तों के साथ ही समय बिताना अच्छा लगता है। भावना को कैमरे से दूर रहना भाता है। भावना ने अपने छोटे भाई के बिजनेस को बुलंदियों तक पहुंचाया है। भावना विराट के फैशन लेबल का अहम हिस्‍सा हैं। कोहली तो क्रिकेट में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में उनकी बहन ने उनके बिजनेस की जिम्‍मेदारी संभाल रखी है।

ऋषभ पंत

ऋषभ पंत के पिता के निधन के बाद बहन साक्षी भाई के साथ साए की तरह बनी रहीं। जिस वक्त वह टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस समय साक्षी भाई के साथ हर घरेलू मैच के दौरान स्टेडियम जाती थीं। दर्शक दीर्घा में खड़े होकर भाई के लिए निरंतर तालियां बजाती थीं। वह सिलसिला आज पंत के इंडियन टीम के स्टार विकेटकीपर बैटर बनने के बाद भी बदस्तूर जारी है। आईपीएल और टीम इंडिया के मुकाबलों में पंत की बहन अक्सर दर्शक दीर्घा में भाई की हौसला अफजाई करते नजर आती हैं। सोशल मीडिया पर भी निरंतर वह भाई के समर्थन में पोस्ट करती रहती हैं। यहां तक कि कई बार टांग खिंचाई करने से भी नहीं चूकतीं। पंत बार-बार कह चुके हैं कि बहन का साथ उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

कोलकाता पहुँची आनंद एल राय की ‘रक्षाबंधन’ की टीम

कोलकाता । आनंद एल राय की नयी फिल्म ‘रक्षा बंधन’ की टीम रक्षा बंधन उत्सव के शुभ अवसर पर रिलीज होने से पहले देश भर के विभिन्न शहरों का दौरा कर रही है। फिल्म की टीम ने दुबई, पुणे, हैदराबाद, अहमदाबाद और इंदौर के बाद कोलकाता पहुंची।
इस दौरे में अक्षय कुमार, निर्देशक और निर्माता आनंद एल राय सहित सह कलाकार सादिया खतीब, स्मृति श्रीकांत, सहजमीन कौर और दीपिका खन्ना शामिल रहे। कोलकाता दौरे के दौरान टीम ने दिल्ली पब्लिक स्कूल का भी दौरा किया। आनंद एल राय द्वारा निर्देशित, ज़ी स्टूडियो, अलका हीरानंदानी और केप ऑफ गुड फिल्म्स के सहयोग से आनंद एल राय और हिमांशु शर्मा द्वारा निर्मित, हिमांशु शर्मा और कनिका ढिल्लों द्वारा लिखित, ‘रक्षा बंधन’ का संगीत हिमेश रेशमिया द्वारा तैयार किया गया है। गीत इरशाद कामिल के हैं।
भूमि पेडनेकर, अक्षय कुमार, नीरज सूद, सीमा पाहवा, सादिया खतीब, अभिलाष थपलियाल, दीपिका खन्ना, स्मृति श्रीकांत और सहजमीन कौर अभिनीत रक्षा बंधन 11 अगस्त 2022 को प्रदर्शित होगी।

डी पी एस मेगासिटी में बच्चों के साथ ‘रक्षाबंधन’ लेकर पहुँचे अक्षय कुमार 

कोलकाता । डी.पी.एस. मेगासिटी के प्रांगण में देश के अति लोकप्रिय अभिनेता अक्षय कुमार पहुँचे। यह विद्यालय परिवार के लिए अत्यंत हर्ष का विषय रहा। प्रबंधन समिति के प्रमुख सदस्यों के साथ हमारी प्रधानाचार्य महोदया ने अभिनेता का हार्दिक अभिनंदन किया। बच्चों का उत्साह तो अभूतपूर्व रहा। अभिनेता अपने साथियों के साथ अपने आगामी फिल्म ‘रक्षाबंधन’ के प्रमोशन करने के लिए आए थे जो आगामी 11 अगस्त को रक्षाबंधन के पावन अवसर पर रिलीज होने वाली है । रक्षाबंधन प्रमुख भारतीय त्योहारों में से एक है जो देश के विभिन्न कोनों में अति उत्साह पूर्वक मनाया जाता है। अभिनेता अक्षय कुमार ने इस त्यौहार के महत्व को बच्चों के सम्मुख एक बार फिर से दोहराया। अक्षय कुमार जी की प्रेरणा से मंच पर आकर कुछ छात्राओं ने छात्रों को राखी बांधी तथा छात्रों ने उनके चरण स्पर्श कर उनके प्रति अपने सम्मान प्रकट किया। अभिनेता ने बच्चों को सिखाया कि बहनों के प्रति सम्मान की भावना ही राखी की पारंपरिक परंपरा का निर्वाह माना जा सकता है। आनंद के माहौल में अभिनेता ने अपनी बहन अलका को भी तहे दिल से याद किया और उनके प्रति अपना सम्मान प्रेषित किया, साथ ही विद्यार्थी जीवन में अनुशासन के महत्व को प्रतिपादित करते हुए अभिनेता ने बताया कि अनुशासन हमारे जीवन का प्रमुख अंग है। अनुशासन हीन व्यक्ति कभी प्रगति नहीं कर सकता । अभिनेता ने बच्चों को यह भी बताया कि सुबह – सुबह अभूतपूर्व ऊर्जा का संचार हमारे मन मस्तिष्क में होता है। हमारे अंदर अनेक प्रकार के रचनात्मक विचार एवं भाव आते हैं जिनका अनुसरण कर हम जीवन में सफलता प्राप्त कर पाते हैं। अति आकर्षक व्यक्तित्व के धनी अक्षय कुमार कुछ पल के लिए बच्चों के साथ घुलमिल से गए थे। उन्होंने बच्चों की अनेक शंकाओं का समाधान भी किया। बच्चे भी उन्हें अपने बीच पाकर आनंद मग्न थे । विद्यालय प्रांगण का माहौल अत्यंत खुशनुमा बना रहा। विनम्र अभिनेता ने विद्यालय परिवार एवं अपने स्वागताकांक्षी बच्चों का बार-बार धन्यवाद ज्ञापित किया। विद्यालय की ओर से प्रधानाचार्या इंद्राणी सान्याल, प्रधानाध्यापिका, प्रधानाध्यापक, प्रो-वाइस चेयरमैन विजय अग्रवाल, शशि अग्रवाल, अमित सर्राफ, चेतन कनोडिया तथा प्रबंधन समिति के अन्य सदस्यों ने भी अभिनेता के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।

डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में प्रैक्सिस बिजनेस स्कूल ने पूरे किए 16 वर्ष

कोलकाता । प्रैक्सिस बिजनेस स्कूल ने कोलकाता परिसर में शिक्षकों और छात्रों के साथ अपना 16वां स्थापना दिवस मनाया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रैक्सिस बिजनेस स्कूल फाउंडेशन के अध्यक्ष बोर्ड ऑफ गवर्नर्स कमलेश संजनानी के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा, “प्रैक्सिस की सफलता की कहानी इसके सभी वर्तमान और पूर्व शिक्षकों, कर्मचारियों और पूर्व छात्रों के अथक प्रयासों के बिना संभव नहीं होती, जो विभिन्न क्षमताओं में शामिल थे और इसे देश के सर्वश्रेष्ठ बिजनेस स्कूलों में से एक बनाने के लिए अथक प्रयास करते थे। . यहां से हम केवल और ही ऊपर जा सकते हैं।”
प्रैक्सिस की 15 साल की यात्रा के महत्वपूर्ण क्षणों को एक वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से दिखाया गया। प्रैक्सिस बिजनेस स्कूल के निदेशक डॉ. प्रो पृथ्वी मुखर्जी ने कहा कि “संस्थान ने गतिशील नेताओं को बनाने के लिए उत्प्रेरक के रूप में खुद के लिए एक जगह बनाई है। इसलिए, हमारे छात्र जीविकोपार्जन नहीं करते, वे जीवन बनाते हैं।” कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी हुईं।
प्रैक्सिस बिजनेस स्कूल फाउंडेशन के सह-संस्थापक और निदेशक प्रो. चरणप्रीत सिंह ने अपनी स्मृतियाँ साझा करते हुए भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। प्रैक्सिस स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में कला प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, और प्रस्तुत प्रविष्टियों का निर्णय प्रसिद्ध वर्षा बागची द्वारा किया गया था। दीर्घ समय तक संस्थान को अपनी सेवा देने वाले कर्मचारी सम्मानित किये गये। इस अवसर पर संस्थान के मासिक समाचार पत्र प्रैक्सिस प्रिज्म का लोकार्पण किया गया। ‘चेंज इनिशिएटिव’ के संस्थापक एवं प्रैक्सिस की सहयोगी संस्था झुम्पा घोष एवं सूर्यतीर्थ घोष ने विचार रखे। इस अवसर पर वृक्षारोपण भी किया गया।
संस्थान द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार 2007 में गठित प्रैक्सिस बिजनेस स्कूल, 2012 में डेटा साइंस में पूर्णकालिक स्नातकोत्तर कार्यक्रम की पेशकश करने वाला पहला बी-स्कूल था। हाल ही में एनालिटिक्स इंडिया मैगज़ीन रैंकिंग 2021 द्वारा देश में नंबर एक स्थान दिया गया था। प्रमुख पीजी डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (पीजीडीएम) पाठ्यक्रम अभी भी पूर्वी क्षेत्र में सबसे अधिक मांग वाला है, वर्तमान में कोलकाता में नंबर 2 और नंबर 4 पर है। पूर्वी भारत में।

एक सलामी उन वीरों को

– शुभम हिन्दुस्तानी,
गाजीपुर, उ.प्र.

एक सलामी उन वीरों को
सरहद के रणधीरों को।
जो लड़ते हमारी भलाई में
जो कुर्बां हुए हमारे लिए
कभी पुलवामा,
तो कभी कारगिल की लड़ाई में।
हंसकर कटा दिए गए उन शीशों को।
एक सलाम उन वीरों को
सरहद के रणधीरों को।।

जब भी दुश्मन ने आंख दिखाया
असहाय जान भारत को ललकारा।
मां के सपूतों (फ़ौज) ने,
हरदम अपना फर्ज निभाया
काट दिया दुश्मन के शीशों को।
एक सलाम उन वीरों को
सरहद के रणधीर ओं को।।

कभी प्रकृति ने ललकारा,
कभी -46 तो कभी 52 डिग्री पहुंचा पारा।
ऊपर से दुश्मन ने ललकारा
पर डिगा नहीं एक भी,फौजी हमारा
लांग गए प्रकृति के थपेड़ों को
मोड़ दिए दुश्मन के मंसूबों को
एक सलाम उन वीरों को ।
सरहद के रणधीरों को।।

आजादी का सन्दर्भ : ‘भारत – भारती’ और ‘पथिक’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज एवं खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज का साझा आयोजन

कोलकाता । कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज एवं खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज द्वारा पश्चिम बंग हिन्दी अकादमी एवं पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गयी। संगोष्ठी का विषय ‘आजादी का सन्दर्भ : ‘भारत – भारती’ और ‘पथिक’’ था।
समारोह का उद्घाटन कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या डा. सत्या उपाध्याय, विशिष्ट अतिथि एवं खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज की संचालन समिति के अध्यक्ष देवाशीष मल्लिक, खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के प्रिंसिपल सुबीर कुमार दत्त, कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की जीबी की सदस्य मैत्रेयी भट्टाचार्य ने किया एवं अपने विचार रखे। स्वागत भाषण कलकत्ता गर्ल्स की प्राचार्या डॉ. सत्या उपाध्याय ने दिया। उन्होंने आजादी के अमृत महोत्सव के सर्व भारतीय आयोजन में कलकत्ता गर्ल्स कालेज की अपनी भूमिका और अपने उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कॉलेज में इस कार्यक्रम की यह छठीं कड़ी है। आजादी के अमृत महोत्सव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय जनमानस के पुनरविवेचन और पुनरनिरीक्षण के लिए इसकी महती आवश्यकता है। महाविद्यालयी स्तर पर यह अपने ढंग का अनूठा और अकेला आयोजन है। बंगाल में किसी भी कॉलेज में इस तरह का कार्यक्रम नहीं आयोजित किया गया है।
संगोष्ठी में बीज वक्तव्य विश्वभारती, शांति निकेतन की प्रो. डॉक्टर मंजूरानी सिंह ने दिया। उन्होंने कहा कि देश और समाज के साथ खुद के लिए भी आजादी का महत्व समझना आवश्यक है। भारत – भारती में मैथिली शरण गुप्त ने अतीत में जाकर प्राचीन वेदो एवं पौराणिक साहित्य के माध्यम से भारत के अतीत का गौरव गान किया है। गुप्त जी भारतीय संस्कृति के सच्चे उपासक हैं। वहीं रामनरेश त्रिपाठी ‘पथिक’ लिखते हैं और यह गाँधी जी के उदित होने का समय है। इन दोनों कृतियों से यह स्पष्ट है कि युद्ध और हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।
उत्तर बंग विश्वविद्यालय के प्रो. सुनील कुमार द्विवेदी ने कहा कि रचनाकार भी इतिहासकार होता है जो वर्तमान की जमीन पर बैठकर लिखता है और भविष्य को दृष्टि देता है। गुप्त जी ने ईश वंदना के माध्यमसे देश की वंदना की है। ‘भारत – भारती’ और ‘पथिक’ एक दूसरे से जुड़ी हुई कृतियाँ हैं। अध्यक्षीय वक्तव्य में कलकत्ता विश्वविद्यालय की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राजश्री शुक्ला ने कहा कि ‘भारत – भारती’ ने हिन्दी के कवियों की भाषिक सोच एवं चिन्तन को आधार दिया। पथिक अपने समय की महत्वपूर्ण कृति है जो ‘भारत – भारती’ की चिन्तन धारा को आगे ले जाती है। ‘भारत – भारती’ एवं ‘पथिक’, दोनों ही कृतियाँ भौतिकता से आगे बढ़कर आध्यात्मिकता की बात करती हैं।
उद्घाटन सत्र का संचालन कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय साव एवं प्रथम अकादमिक सत्र का संचालन नवारुणा भट्टाचार्य ने किया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में गोविन्द यादव, प्रो. कमल कुमार, विक्रम साव, दिव्या प्रसाद, मधु सिंह, डॉ. पलाशी विश्वास, राहुल गौड़, नवारुणा भट्टाचार्य, डॉ. विजया शर्मा, पुष्पा मिश्रा ने शोध पत्र वाचन किया।
संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के प्रो. ऋषिभूषण चौबे ने ‘भारत – भारती’ और ‘पथिक’ के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भी वर्तमान परेशान करे तब पीछे जाकर संघर्ष को देखने की जरूरत है। इस परिप्रेक्ष्य में ये दोनों कृतियाँ महत्वपूर्ण है।
ऋषि बंकिम चन्द कॉलेज के प्रो. ऋषिकेश सिंह ने कहा कि वह बौद्धिकता किसी काम की नहीं जो स्वाधीनता न दिलाए। वहीं ‘पथिक’ में अभिव्यक्ति के अधिकार की बात की गयी है। ‘भारत – भारती’ एवं ‘पथिक’ दोनों ही युग बोध से परिपूर्ण कृतियाँ हैं।
इस अकादमिक सत्र की अध्यक्षता करते हुए रामनरेश त्रिपाठी संस्थान के प्रो. डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी ने ‘पथिक’ पर केन्द्रित अपने व्याख्यान में कहा कि मैथिली शऱण गुप्त की ‘भारत – भारती’ चिन्तन की पृष्ठभूमि देती है और ‘पथिक’ उस राह पर चल देते हैं। रामनरेश त्रिपाठी ‘पथिक’ के माध्यम से स्थितियों का अवगाहन कर आँखों देखा हाल बताते हैं। पथिक को गाँधी ने पढ़ा था, स्वीकार किया, यह स्वाधीनता सेनानियों एवं युवाओं के हाथ में रहती थी। इसके 90 संस्करण निकल चुके हैं जो इस कृति की लोकप्रियता का उदाहरण हैं। सत्र का संचालन मधु सिंह ने किया।
रेवेंसा विश्वविद्यालय की प्रो. अंजुमन आरा ने कहा कि मैथिली शरण गुप्त निराश मन में आशा का संचार करते हैं। उनमें जनजागरण की भावना, युगबोध विद्यमान है। विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रो. प्रमोद कुमार साव ने कहा कि हमें अपने रचनाकारों से प्रेरणा लेनी चाहिए। खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने पथिक की पँक्तियों का पाठ करते हुए कहा कि ‘पथिक’ हमारे पराधीन भारत की गीता है। भारत – भारती के साथ हम चिन्तन कर रहे हैं और पथिक के साथ यात्रा कर रहे हैं। कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय कुमार साव ने कहा कि इतिहास दृष्टि का अर्थ अतीत जीवी होना नहीं है। ‘भारत – भारती’ के माध्यम से गुप्त जी ने पराधीन ‘भारत – भारती’ की समीक्षा की है और इसके लिए इतिहास, पुराण एवं लोक की सहायता ली है। सत्र की अध्यक्षता डॉ. मंजूरानी सिंह ने की। इस अवसर पर प्रख्यात रंगकर्मी उमा झुनझुनवाला ने भारत – भारती एवं पथिक की पँक्तियों का पाठ किया। सत्र का संचालन राहुल गौड़ ने किया। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में युवा एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। संगोष्ठी का समापन सबके प्रति आत्मीय आभार के साथ डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने किया।

मित्रता पर दो कविताएं

पीयूष साव

अमूल्य संपत्ति वहीं है, जिसे लूट न कोई पाता है। एक रिश्ता धन ऐसा है, जो मित्रता कहलाता है?

अटूट विश्वास नींव इसकी है। अटल प्रेम पहचान जिसकी है

ऐसा जाता है यह जो सामान्य से परे है मित्र वही है जो संकट में साथ खड़े है:

मुख पर जो उत्तम – उत्तम कह जाते हैं,

पर पीछे निटक बड़े बनाते है;

सर्प से भी भयंकर चाल जो चल जाते हैं, वे कपटी मित्र कहाँ बन पाते है:

मित्रता रिश्ता ऐसा है,

जिसे हर जाते से जोड़ा जाता है,

और सबसे उत्तम मित्र, कृष्ण को माना जाता है;

एक दूजे का पूरक बन जाना स्वाभाव जिसका है, थोड़ा खट्टी – थोड़ी मीठी परिभाषा इसकी है।


 

मित्र किसे कहते हैं?

बिन बोले जो बात समझ लें,

मित्र उसे कहते हैं।

चेहरे की चमक में भी,

दिल का हाल समझ ले, मित्र उसे कहते है।

आपकी उत्सुकता को जो आपसे पहले जान ले ! नाराजगी को आपकी, देखते ही पहचान ले; मित्र उसे कहते है।

खुद पर आपका, और आप पर खुद का अधिकार बताएँ, मित्र उसे कहते हैं।

जो सुख में भी साथ निभाये : दुःख कठिनाइयों में हँसना सिखाये

कुछ कहने से न कतराए

मित्र उसे कहते हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट की ‘डिस्प्ले’ तस्वीर पर तिरंगा लगाया

नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट की ‘डिस्प्ले’ तस्वीर पर मंगलवार को ‘तिरंगा’ लगाया और लोगों से भी ऐसा करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा था कि ‘आजादी का अमृत महोत्वस’ जन आंदोलन में बदल रहा है और उन्होंने लोगों से दो अगस्त से 15 अगस्त के बीच अपने सोशल मीडिया खातों पर प्रोफाइल तस्वीर के रूप में ‘तिरंगा’ लगाने को कहा था।
मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘दो अगस्त का आज का दिन खास है। जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो ऐसे में हमारा देश तिरंगे का सम्मान करने की सामूहिक मुहिम के तहत ‘हर घर तिरंगा’ के लिए तैयार है। मैंने मेरे सोशल मीडिया पेज पर डीपी (डिस्प्ले तस्वीर) बदल दी है और मैं आप से भी ऐसा करने का आग्रह करता हूं।’’
मोदी ने तिरंगे का डिजाइन तैयार करने वाले पिंगली वेंकैया की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मोदी ने कहा, ‘‘ हमारा देश हमें तिरंगा देने के उनके प्रयासों के लिए हमेशा उनका ऋणी रहेगा। हमें अपने तिरंगे पर बहुत गर्व है। मैं कामना करता हूं कि तिरंगे से ताकत एवं प्रेरणा लेते हुए हम राष्ट्र की प्रगति के लिए काम करते रहें।’’

जुलाई में जीएसटी संग्रह 28 प्रतिशत बढ़कर 1.49 लाख करोड़ रुपये

नयी दिल्ली । आर्थिक सुधार और कर चोरी को रोकने के लिए किए गए उपायों के कारण जुलाई में जीएसटी संग्रह 28 प्रतिशत बढ़कर 1.49 लाख करोड़ रुपये हो गया। सरकार ने सोमवार को यह जानकारी दी।
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह जुलाई, 2021 में 1,16,393 करोड़ रुपये था।
वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि जुलाई, 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से यह दूसरा सबसे बड़ा मासिक संग्रह है।
इससे पहले अप्रैल, 2022 में संग्रह 1.68 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्चस्तर पर पहुंच गया था।
मंत्रालय ने कहा कि यह छठा मौका है और मार्च, 2022 से लगातार पांचवां महीना है, जब मासिक जीएसटी संग्रह 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है।
समीक्षाधीन अवधि में वस्तुओं के आयात से राजस्व में 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात सहित) से राजस्व पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक था।
जुलाई में जमा किए गए 1,48,995 करोड़ रुपये के जीएसटी में केंद्रीय जीएसटी 25,751 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी 32,807 करोड़ रुपये, एकीकृत जीएसटी 79,518 करोड़ रुपये (वस्तुओं के आयात पर एकत्रित 41,420 करोड़ रुपये सहित) और उपकर 10,920 करोड़ रुपये वस्तुओं के आयात पर एकत्र किए गए 995 करोड़ रुपये सहित) है।
सरकार ने आईजीएसटी से 32,365 करोड़ रुपये सीजीएसटी और 26,774 करोड़ रुपये एसजीएसटी की मद में तय किए हैं। नियमित निपटान के बाद जुलाई में केंद्र और राज्यों का कुल राजस्व क्रमश: 58,116 करोड़ रुपये और 59,581 करोड़ रुपये है।
जून, 2022 में 7.45 करोड़ ई-वे बिल सृजित हुए, जो मई 2022 के 7.36 करोड़ के मुकाबले मामूली अधिक हैं।
बयान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में जुलाई, 2022 तक जीएसटी राजस्व में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि बेहतर कर अनुपालन सुनिश्चित करने के चलते यह वृद्धि हुई है। जीएसटी के आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि संग्रह में एक स्वस्थ रुझान देखने को मिला है, जिसमें सालाना आधार पर 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘जुलाई 2022 में जीएसटी संग्रह इस साल के मासिक औसत अनुमान 1.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। हमें इसमें सीजीएसटी संग्रह के लिए वित्त वर्ष 2022-23 के बजट अनुमानों के मुकाबले बढ़ोतरी की उम्मीद है।’’
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर एम एस मणि ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में उच्च संग्रह उन राज्यों को कुछ राहत देगा जो गारंटीकृत मुआवजे की अवधि से बाहर आ गए हैं और अपनी राजस्व जुटाने की क्षमताओं के बारे में चिंतित हैं।