Thursday, July 9, 2026
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सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में क्राफ्टास्टिक 2022

कोलकाता । सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल के सोशल आन्ट्रोप्रेनियरशिप क्लब स्वाभिमान ने हाल ही में बांग्लानाटक डॉट कॉम के सहयोग से क्राफ्टास्टिक -2022 आयोजित किया गया। गत 28 और 29 जुलाई को आयोजित इस दो दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन विद्या मंदिर सोसायटी के महासचिव मेजर जनरल वी. एन. चतुर्वेदी ने किया। इस हस्तशिल्प प्रदर्शनी में ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित सबाई, डोकरा, कांथा, टोकरियाँ प्रदर्शित की गयीं। छात्राओं ने ग्राहकों से सम्पर्क करने में मदद की। छात्राओं को इस प्रदर्शनी में उद्यमिता, विपणन कौशल यानी मार्केटिंग के गुण सीखने का मौका मिला।

देशराग अमृत – स्वरचित देशभक्ति कविता

पीयूष साव, गारुलिया मिल्स हाई स्कूल

मेरी जान तिरंगा

मेरी जान तिरंगा, मेरी ज्ञान तिरंगा |

सरहद पर लड़ने वालों की पहचान तिरंगा |

खाकी वर्दी में गले जिंदगी बिताऊँ पर मरते समय तिरंगे को गले से लगाऊ यह आरजू मेरी पूरी हो; तमन्ना न अधूरी हो,

मैं न सिख हूँ न ही इसाई न हूँ जाट मराठा, अपने देश की रक्षा में गैं भारत माँ का बेटा।

नन्ही चिड़िया को चहकता छोड़ आया मैं,

मेरी माँ की आँसुओ को बहता छोड़ आया मैं, नये गजरे को महकता छोड़ आया मैं। देश के लिए,

मर मिटने का गन लाया गैं

इस सरहद पर जब तक हम खड़े रहेंगे; दुश्मनों पर कहरो के पहाड़ दहेंगे।

और जब

भारत माँ के गोद में सोने का हँसते समय आयेगा, हुए दुनिया को अलविदा कहेंगे।


 

हम भारतवासी

दुनिया वालो जान लो हमें,

आँखे खोलो और पहचान लो हमे

हम वह है हेम जो बजर से नदी की धार बहा दे, वह है, जो पहार को भी भगवान बता दे,

हम ही हैं, जो धर्म की पहली परिभाषा कहलाते है, और ढंग ही है जो ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ गाते है;

विश्वगुरु नाम से विख्यात,

देश में रहने वाले है हम |

और पूरी धरा मेरा परिवार है, ऐसा कहने वाले है हम | हमारे हार से कोई याचक निराश हो न जाते हैं, हमारे शौर्य की गाथा सदा पुराण गाते है।

कोई हो दुःखी ऐसी बात हम बोलते नहीं है, और कोई हमें बोल जाए ! तो उसे, छोड़ते नहीं है।

हम वीरता का चिन्ह और गौरव का अतीत है। युद्ध का घोष तो कहीं शांति का प्रतीक है,

हम ही शिव का ताण्डव और राम की विनय सुनाने वाले हैं,

आगे अब और क्या चाहिए! हम भारत के रहने वाले है।

जानिए अखण्ड भारत का अतीत और वर्तंमान

अखण्ड भारत एक स्वप्न है जो सत्य की धरातल पर खड़ा है। सम्भव है कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह परिकल्पना थोड़ी कठिन लग रही हो मगर भारत विश्व गुरु रहा है। स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव में यह जानना आवश्यक है कि हमारी सीमाएं कहाँ तक रहीं, यह भारत का गौरव है। आज की वर्तमान परिस्थितियों में हम इन देशों की सम्प्रभुता का सम्मान करते हुए अपने अतीत पर दृष्टि डालें, यह महत्वपूर्ण हैं। इतिहास हमारी जमीन है, वह हमें आधार देता है, आत्मविश्वास और आत्मव्यक्तित्व देता है। इतिहास इसलिए भी आवश्यक है कि हम अतीत के सद्गुण ग्रहण करें और अपनी गलतियों से सीखते हुए वर्तमान में प्रयास करें जिससे हमारे प्रिय भारतवर्ष का भविष्य सुदृढ़, सशक्त, समृद्ध और गौरवशाली बने।
इसी परिप्रेक्ष्य में वेब दुनिया पर प्रकाशित यह आलेख अनिरुद्ध जोशी की कलम से है जिसे हम साभार आप तक लाए हैं।
आप सभी को स्वाधीनता के गौरवशाली अमृत महोत्सव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।
जय भारत, वन्दे मातरम्, जयतू मातृभूमि
1. जम्बूद्वीप का एक खंड है भारतवर्ष : अखंड भारत शब्द तब प्रचलन में आया जबकि भारत खंड खंड हो गया। पुराणों के अनुसार धरती 7 द्वीपों की है- जम्बू, प्लक्ष, शाल्म, कुश, क्रौंच, शाक और पुष्कर। इसमें बीचोंबीच जम्बूद्वीप है जिसके नौ खंड है- नाभि, किम्पुरुष, हरिवर्ष, इलावृत, रम्य, हिरण्यमय, कुरु, भद्राश्व और केतुमाल। इन 9 खंडों में नाभिखंड को अजनाभखंडऔर बाद में भारतवर्ष बोला जाने लगा।
2. ऋषभ पुत्र चक्रवर्ती भरत के नाम पर भारतवर्ष : भारतवर्ष को जम्बूद्वीप का एक हिस्सा माना गया है। भारतवर्ष के अंतर्गत आर्यावर्त नामक एक स्थान है। राजा अग्नीध्र जम्बूद्वीप के राजा था। अग्नीध्र के पुत्र महाराज नाभि एवं महाराज नाभि के पुत्र ऋषभदेव थे जिनके पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा।
3. प्राचीन भारत की सीमा : चक्रवर्ती सम्राट भरत के भारतवर्ष की सीमा प्राचीन काल में भारत की सीमा ईरान, अफगानिस्तान के हिन्दूकुश से लेकर अरुणाचल तक और कश्मीर से लेकर श्रीलंका तक। कुछ विद्वान दूसरी ओर अरुणाचल से लेकर इंडोनेशिया, मलेशिया तक सीमा होने का दावा भी करते हैं। इस संपूर्ण क्षेत्र में 18 महाजनपदों के सम्राटों का राज था जिसके अंतर्गत सैंकड़ों जनपद और उपजनपद थे। मार्केन्डय पुराण के अनुसार संपूर्ण भारतवर्ष के पूर्व, पश्चिम और दक्षिण की ओर समुद्र है जो कि उत्तर में हिमालय के साथ धनुष ‘ज्या’ (प्रत्यंचा) की आकृति को धारण करता है।
4. चाणक्य के काल में भारत : युधिष्ठिर के शासन के बाद आचार्य चाणक्य के मार्गदर्शन में 321-22 ईसा पूर्व बिघरे हुए भारत को मिलाकर एक ‘अखंड भारत’ का निर्माण सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने किया था। इसके बाद उत्तर में सम्राट हर्षवर्धन और दक्षिण में पुलकेशिन द्वीतीय के शासन में भारत की सीमा संपूर्ण अखंड भारत का हिस्सा थी।
1. ईरान और अफगानिस्तान : कहते हैं कि ईरान पहले पारस्य देश था जो कि आर्यों की एक शाखा ने ही स्थापित किया था। प्राचीन गांधार और कंबोज के हिस्सों को ही आज अफगानिस्तान कहा जाता है। उक्त संपूर्ण क्षेत्र में हिन्दू साम्राज्य और पारसी राजवंश का ही शासन था। फिर 7वीं सदी के बाद यहां पर अरब और तुर्क के मुसलमानों ने आक्रमण करना शुरू किए और 870 ई. में अरब सेनापति याकूब एलेस ने अफगानिस्तान को अपने अधिकार में कर लिया था। ब्रिटिश काल में 1834 में अफगानिस्तान को एक बफर स्टेट बनाया और 18 अगस्त 1919 को इससे भारत से अलग कर दिया गया।
2. पाकिस्तान और बांग्लादेश: सिंध पर ईस्वी सन् 638 से 711 ई. तक के 74 वर्षों के काल में 9 खलीफाओं ने 15 बार आक्रमण किया और अंतत: हिन्दू राजा राजा दाहिर (679 ईस्वी) के कत्ल के बाद इसे इस्लामिक क्षेत्र बना दिया। इसी तरह बलूचिस्तान, मुल्तान, पंजाब और कश्मीर पर आक्रमण करके इसका भी इस्लामिकरण कर दिया गया। अतत: सन् 14 और 15 अगस्त 1947 को उक्त सभी हिस्सों को मिलाकर पाकिस्तान का गठन हुआ और एक नया देश अस्तित्व में आया। उस वक्त बंगाल के आधे हिस्से को भी पाकिस्तान में मिलाकर उसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाने लगा। 26 मार्च 1971 में पूर्वी पाकिस्तान को पश्‍चिमी पाकिस्तान से आजादी मिली और एक नया देश अस्तित्व में आया जिसका नाम बांग्लादेश रखा गया। इस तरह 1947 में अखंड भारत से अफगानिस्तान के बाद एक बहुत बड़ा भू-भाग अलग होकर पाकिस्तान और बांग्लादेश में बदल गया।
3. नेपाल : पौराणिक मान्यता के अनुसार नेपाल को कभी देवघर कहा जाता था। भगवान श्रीराम की पत्नी सीता का जन्म स्थल मिथिला नेपाल में है। यहां पर 1500 ईसा पूर्व से ही हिन्दू आर्य लोगों का शासन रहा है। 250 ईसा पूर्व यह मौर्यों के साम्राज्य का एक हिस्सा था। फिर चौथी शताब्दी में गुप्त वंश का एक जनपद रहा। 7वीं शताब्दी में इस पर तिब्बत का आधिपत्य हो गया था। 11वीं शताब्दी में नेपाल में ठाकुरी वंश के राजा राज्य करते थे। इसके बाद और भी कई राजवंश हुए। अंत में जा पृथ्वी नारायण शाह ने 1765 में नेपाल की एकता की मुहिम शुरू की और मध्य हिमालय के 46 से अधिक छोटे-बड़े राज्यों को संगठित कर 1768 तक इसमें सफल हो गए। यहीं से आधुनिक नेपाल का जन्म होता है। 1904 में नेपाल को एक आजाद देश का दर्जा मिला।
4. भूटान : भूटान भी कभी भारतीय महाजनपदों के अंतर्गत एक जनपद था। संभवत: यह विदेही जनपद का हिस्सा था। भूटान संस्कृत के भू-उत्थान से बना शब्द है। ब्रिटिश प्रभाव के तहत 1907 में वहां राजशाही की स्थापना हुई। 1947 में भारत आजाद हुआ और 1949 में भारत-भूटान समझौते के तहत भारत ने भूटान की वो सारी जमीन उसे लौटा दी, जो अंग्रेजों के अधीन थी।
5. म्यांमार : म्यांमार कभी ब्रह्मदेश हुआ करता था। इसे बर्मा भी कहते हैं, जो कि ब्रह्मा का अपभ्रंश है। शोक के काल में म्यांमार बौद्ध धर्म और संस्कृति का पूर्वी केंद्र बन गया था। 1886 ई. में पूरा देश ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य के अंतर्गत आ गया किंतु ब्रिटिशों ने 1935 ई. के भारतीय शासन विधान के अंतर्गत म्यांमार को भारत से अलग कर दिया।
6. श्रीलंका : रावण का राज्य श्रीलंका भारतीय जनपद का एक हिस्सा था। एक मान्यता के अनुसार ईसा पूर्व 5076 साल पहले भगवान राम ने रावण का संहार कर श्रीलंका को भारतवर्ष का एक जनपद बना दिया था। इसके बाद अशोक के काल में श्रीलंका सनातन धर्म से बौद्धधर्मी बना। यहां कभी भारत के चोल और पांडय जनपद के अंतर्गत आता था। अंग्रेजों ने 1818 में इसे अपने पूर्ण अधिकार में ले लिया और द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 4 फरवरी 1948 को श्रीलंका को भारत से अलग करके एक आजाद देश बना दिया गया।
7. मलेशिया : वर्तमान के मुख्‍य 4 देश मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और कंबोडिया प्राचीन भारत के मलय प्रायद्वीप के जनपद हुआ करते थे। भारत आजाद हुआ तब अंग्रेजों में मलेशिया के हिस्सों को भारत का हिस्सा नहीं मानते हुए इसे अपने ही पास रखा और बाद में मलेशिया को अंग्रेजों ने 1957 में एक आजाद देश बना दिया।
8. सिंगापुर : सिंगापुर मलय महाद्वीप के दक्षिण सिरे के पास छोटा-सा द्वीप है। हालांकि यह मलेशिया का ही हिस्सा था। विवाद और संघर्ष के बाद 9 अगस्त 1965 को सिंगापुर एक स्वतंत्र गणतंत्र बन गया।
9. थाईलैंड: थाईलैंड का प्राचीन भारतीय नाम श्‍यामदेश है। सन् 1238 में सुखोथाई राज्य की स्थापना हुई जिसे पहला बौद्ध थाई राज्य माना जाता है। सन् 1782 में बैंकॉक में चक्री राजवंश की स्थापना हुई जिसे आधुनिक थाईलैँड का आरंभ माना जाता है। यूरोपीय शक्तियों के साथ हुई लड़ाई में स्याम को कुछ प्रदेश लौटाने पड़े, जो आज बर्मा और मलेशिया के अंश हैं। 1992 में हुए सत्तापलट में थाईलैंड एक नया संवैधानिक राजतंत्र घोषित कर दिया गया।
10. इंडोनेशिया : इंडोनेशिया में मुसलमानों की सबसे ज्यादा जनसंख्या बसती है। इंडोनेशिया का एक द्वीप है बाली, जहां के लोग अभी भी हिन्दू धर्म का पालन करते हैं। इंडोनेशिया में श्रीविजय राजवंश, शैलेन्द्र राजवंश, संजय राजवंश, माताराम राजवंश, केदिरि राजवंश, सिंहश्री, मजापहित साम्राज्य का शासन रहा। 7वीं, 8वीं सदी तक इंडोनेशिया में पूर्णतया हिन्दू वैदिक संस्कृति ही विद्यमान थी। इसके बाद यहां बौद्ध धर्म प्रचलन में रहा, जो कि 13वीं सदी तक विद्यमान था। फिर यहां अरब व्यापारियों के माध्यम से इस्लाम का विस्तार हुआ। 350 साल के डच उपनिवेशवाद के बाद 17 अगस्त 1945 को इंडोनेशिया को नीदरलैंड्स से आजादी मिली।
11. कंबोडिया : पौराणिक काल का कंबोज देश कल का कंपूचिया और आज का कंबोडिया। पहले भारत का ही एक उपनिवेश था। माना जाता है कि प्रथम शताब्दी में कौंडिन्य नामक एक ब्राह्मण ने हिन्द-चीन में हिन्दू राज्य की स्थापना की थी। इन्हीं के नाम पर कंबोडिया देश हुआ। हालांकि कंबोडिया की प्राचीन दंतकथाओं के अनुसार इस उपनिवेश की नींव ‘आर्यदेश’ के शिवभक्त राजा कम्बु स्वायम्भुव ने डाली थी। कंबोडिया पर ईशानवर्मन, भववर्मन द्वितीय, जयवर्मन प्रथम, जयवर्मन द्वितीय, सूर्यवर्मन प्रथम, जयवर्मन सप्तम आदि ने राज किया। राजवंशों के अंत के बाद इसके बाद राजा अंकडुओंग के शासनकाल में कंबोडिया पर फ्रांसीसियों का शासन हो गया। कंबोडिया को 1953 में फ्रांस से आजादी मिली।
12. वियतनाम : वियतनाम का पुराना नाम चम्पा था। चम्पा के लोग चाम कहलाते थे। वर्तमान समय में चाम लोग वियतनाम और कंबोडिया के सबसे बड़े अल्पसंख्यक हैं। आरंभ में चम्पा के लोग और राजा शैव थे लेकिन कुछ सौ साल पहले इस्लाम यहां फैलना शुरू हुआ। अब अधिक चाम लोग मुसलमान हैं, पर हिन्दू और बौद्ध चाम भी हैं। श्री भद्रवर्मन जिसका नाम चीनी इतिहास में फन-हु-ता (380-413 ई.) से मिलता है, चम्पा के प्रसिद्ध सम्राटों में से एक थे। 1825 में चम्पा के महान हिन्दू राज्य का अंत हुआ। 19वीं सदी के मध्य में फ्रांस द्वारा इसे अपना उपनिवेश बना लिया गया। 20वीं सदी के मध्य में फ्रांस के नेतृत्व का विरोध करने के चलते वियतानाम दो हिस्सों में बंट गया। एक फ्रांस के साथ था तो दूसरा कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रेरित था। 1955 से 1975 तक लगभग 20 सालों तक चले युद्ध में अमेरिका को पराजित हो पीछे हटना पड़ा।
13. तिब्बत : तिब्बत को प्राचीनकाल में त्रिविष्टप कहा जाता था जहां रिशिका और पूर्व तुशारा  नामक राज्य थे। यह देवलोक का एक हिस्सा था जहां पर जल प्रलय के दौरान राजा वैवस्वत और उनके कुल के लोग रहते थे। मान्यता है कि आर्य यहीं के मूल निवासी थे। तिब्बत में पहले हिन्दू फिर बाद में बौद्ध धर्म प्रचारित हुआ और यह बौद्धों का प्रमुख केंद्र बन गया। शाक्यवंशियों का शासनकाल 1207 ईस्वी में प्रांरभ हुआ। बाद में चीन के राजा का शासन रहा। फिर 19वीं शताब्दी तक तिब्बत ने अपनी स्वतंत्र सत्ता बनाए रखी। फिर चीन और ब्रिटिश इंडिया के बीच 1907 के लगभग बैठक हुई और इसे दो भागों में विभाजित कर दिया। पूर्वी भाग चीन के पास और दक्षिणी भाग लामा के पास रहा। 1951 की संधि के अनुसार यह साम्यवादी चीन के प्रशासन में एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया गया।
कई जानकारों का मानना है कि भारतवर्ष को खंड-खंड होने में सैंकड़ों साल लगे। उसी तरह इसके अंखड बनने में कई तरह की बाधाएं सामने हैं। पहली तो यह कि प्राचीन भारत जिसे अखंड भारत कहा जाता है वह अब एक बहुधर्मी और बहुसंकृति वाला देश बन चुका है, जिसमें करीब 12 से 13 देश अस्तित्व में हैं। इनमें से कुछ देश मुस्लिम तो कुछ बौद्ध हैं। मतभेद के चलते अखंड भारत का निर्माण एक सपना ही कहा जा रहा है। दूसरा यह कि नेपाल, श्रीलंका, भूटान, बर्मा, इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम और कंबोडिया जैसे देश भारत से अपने धार्मिक और सांस्कृति जुड़वा को तो स्वीकार करते हैं लेकिन वह यह नहीं स्वीकार करते हैं कि वे कभी प्राचीनकाल में भारत का हिस्सा थे। उनके देश का इतिहास उन्हें कुछ और ही बताता है। अखंड भारत को एक करने के पूर्व इस संपूर्ण क्षेत्र में रहने वालों लोगों को यह समझना होगा कि उनके पूर्वज कौन थे और वे आज क्यों और क्या है। भारत को अखंड करने में भारत के प्राचीन गौरव को समझना जरूरी होगा। हम परम सौभाग्यशाली हैं जो यह स्वर्णिम दिन देख रहे हैं। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के शब्दों में –

यह आर्यभूमि सचेत हो, फिर कार्यभूमि बने अहा! वह प्रीति, नीति बढ़े परस्पर भीति भाव भगाइए

किसके शरण होकर रहें, अब तुम बिना गति कौन है, हे, देव, वह अपनी दया फिर एक बार दिखाइए।।

अब एक जैसे होंगे मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिवाइस के चार्जर

देश में जल्द आरम्भ होगी नई तकनीक

नयी दिल्ली । केंद्र सरकार सभी यूनिवर्सल चार्जर अपनाने के लिए नए नियम बनाने जा रही है। जिसके अनुसार फोन लैपटॉप टेबलेट ब्लूटूथ इयरफोन और अन्य पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए एक जैसे चार्जर बनाने होंगे।
यूरोपीय संघ ने इस साल की शुरुआत में यूनिवर्सल चार्जर अनिवार्य कर दिया है। जिससे सभी कंपनियों को स्मार्टफोन और टैबलेट जैसे सभी उपकरणों में यूएसबी सी टाइप पोर्ट बनाना अनिवार्य है। नए नियम का मकसद एक ई कचरे को कम करना है रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार इसी तरह के नियमों को अपनाने की संभावना तलाश कर रही है।
सरकार ने स्मार्टफोन निर्माताओं और अन्य उद्योग संगठनों के साथ नियमों पर चर्चा के लिए 17 अगस्त को बैठक बुलाई है एक अधिकारी ने कहा अगर कंपनियां यूरोप और अमेरिका में यूनिवर्सिटी आंसर दे सकते हैं तो भारत में क्यों नहीं ऐसा कर सकती स्मार्टफोन स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में एक सामान चार्जर होना चाहिए।

महिला अग्निवीर के लिए आवेदन शुरू

नयी दिल्ली । भारतीय सेना में अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की भर्तियां की जा रही है। इसी कड़ी में महिला अग्निवीर भर्ती को लेकर आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में जो उम्मीदवार इस भर्ती के लिए आवेदन करना चाहती हैं वो ऑफिशियल वेबसाइट- joinindianarmy.nic.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
Join Indian Army की ओर से महिला अग्निवीर भर्ती को लेकर नोटिफिकेशन जारी की गई है। इसमें रैलियों के स्थान और तारीखों के बारे में जानकारी दी गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वेबसाइट पर पहले भर्ती का विवरण देख लें, तभी आवेदन फॉर्म भरें।
महिला अग्निवीर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 09 अगस्त 2022 से शुरू हो गई है। इसमें आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को 07 सितंबर 2022 तक का समय दिया गया है। महिला उम्मीदवार अपने राज्य के अनुसार, रैलियों का विवरण वेबसाइट पर देख सकते हैं।

ऐसे कर सकते हैं आवेदन
महिला अग्निवीर भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले  आधिकारक वेबसाइट- joinindianarmy.nic.in पर जाना होगा।
वेबसाइट की होम पेज पर Latest Recruitment लिंक पर जाएं.
इसके बाद REGISTRATION OF WOMEN MILITARY POLICE RALLY WILL COMMENCE ON 09 AUG 2022 के लिंक पर जाएं।
अब अपनी विवरण भरकर रजिस्ट्रेशन कर लें।
रजिस्ट्रेशन के बाद आवेदन फॉर्म भर लें।
आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रिंट जरूर ले लें।

भारत के महान शतरंज खिलाड़ी आनंद बने फिडे उपाध्यक्ष 

चेन्नई । भारत के महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद को रविवार को खेल की वैश्विक संचालन संस्था फिडे का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया जबकि निवर्तमान अध्यक्ष आर्केडी वोर्कोविच को दूसरे कार्यकाल के लिए दोबारा अध्यक्ष चुन लिया गया। पांच बार के विश्व चैंपियन आनंद वोर्कोविच की टीम का हिस्सा थे।

वोर्कोविच को 157 मत मिले जबकि उनके विरोधी आंद्रेई बैरिशपोलेट्स के पक्ष में सिर्फ 16 मत पड़े। एक मत अवैध रहा जबकि पांच सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। चुनाव शतरंज की वैश्विक संस्था की फिडे कांग्रेस के दौरान हुए जिसका आयोजन यहां 44वें शतरंज ओलंपियाड के दौरान किया गया। अपने कॅरियर के दौरान ढेरों खिताब और सम्मान जीतने के बाद चेन्नई के आनंद ने हाल के समय में अपनी प्रतियोगिताओं की संख्या में कटौती की थी और कोचिंग पर अधिक ध्यान दे रहे थे।

आनंद ने अपनी किशोरावस्था में ही सुर्खियां बटोरना शुरू कर दिया था जब वह विश्व जूनियर खिताब जीतने के बाद भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बने। वह तब से शतरंज के वैश्विक मंच पर भारत की अगुआई कर रहे हैं। आनंद ने पांच विश्व खिताब जीते। उन्होंने अपना आखिरी विश्व खिताब 2017 में विश्व रेपिड खिताब के रूप में जीता।वह शतरंज ओलंपियाड में हिस्सा ले रही भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हैं लेकिन मेजबान देश की सभी टीम का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासक के रूप में खेल के लिए कुछ करने की इच्छा जताई है और पहले कार्यकाल में वोर्कोविच और उनकी टीम के काम की सराहना की। चुनावों से पहले वोर्कोविच ने आनंद को अपनी टीम में रखने की बात कही थी।वोर्कोविच ने कहा था, ‘‘मुझे वास्तव में गर्व है कि आनंद उपाध्यक्ष पद के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं। वह एक महान व्यक्ति हैं। वह लंबे समय से मेरे मित्र हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पहले से ही वह दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय है। इस देश में ही नहीं बल्कि मैं जहां भी जाता हूं उनके व्यक्तित्व और योगदान को फिडे इतिहास और फिडे भविष्य के रूप में स्वीकार और मान्यता प्राप्त है। हमारे पास वास्तव में एक अच्छी टीम है।’’

राष्ट्रमंडल खेल : भारत का पांचवा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, इंग्लैंड ने बनाया पदकों का रिकॉर्ड

बर्मिंघम । भारत ने गत 9 अगस्त को संपन्न हुए राष्ट्रमंडल खेलों में 22 स्वर्ण सहित 61 पदक जीतकर अपना पांचवा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया जबकि मेजबान इंग्लैंड पदकों का अपना नया रिकॉर्ड बनाने में सफल रहा।
भारत निशानेबाजी के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल नहीं होने के बावजूद 61 पदक जीतने में सफल रहा जिसमें 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य पदक शामिल है। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा के बाद भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2010 में नयी दिल्ली में किया था। तब उसने 38 स्वर्ण पदक सहित कुल 101 पदक जीते थे और वह पदक तालिका में दूसरे स्थान पर रहा था।
भारत ने मैनचेस्टर में 2002 में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में 30 स्वर्ण पदक सहित 69 पदक जीते थे जो हर चार साल में होने वाले इन खेलों में भारत का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत ने पिछली बार गोल्ड कोस्ट खेलों में 66 पदक जीते थे जिसमें 26 स्वर्ण पदक शामिल है।
मेलबर्न में 2006 में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत ने 22 स्वर्ण पदक जीते थे लेकिन तब उसके रजत पदकों की संख्या 17 थी। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को पुरुष खिलाड़ियों ने 13 स्वर्ण सहित 35 पदक जबकि महिला खिलाड़ियों ने आठ स्वर्ण सहित 23 पदक दिलाए। भारत में मिश्रित स्पर्धाओं में तीन पदक हासिल किए जिसमें एक स्वर्ण भी शामिल है।
भारत में कुश्ती में सर्वाधिक 12 पदक जीते जिसमें छह स्वर्ण पदक शामिल हैं। इसके अलावा उसने टेबल टेनिस में चार तथा भारोत्तोलन, मुक्केबाजी और बैडमिंटन में तीन तीन स्वर्ण पदक हासिल किए।

बर्मिंघम में कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में 28 जुलाई से 8 अगस्त तक लगभग 200 भारतीय एथलीटों ने 16 विभिन्न खेलों में पदक के लिए प्रतिस्पर्धा की।

गोल्ड कोस्ट 2018 में पिछले संस्करण में, भारतीय एथलीटों ने कुल 66 पदक जीते थे। जिसमें 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य पदक शामिल थे। इस तरह भारत मेजबान ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बाद तीसरे स्थान पर रहा था।

निशानेबाजी के खेल ने गोल्ड कोस्ट 2018 में 66 पदकों में से 16 पदक जीतने में मदद की। हालांकि, बर्मिंघम 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों के प्रोग्राम से इस खेल को हटा दिया गया था।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 से पहले हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के जीते गए कुल 503 पदकों में से 135 पदक निशानेबाजी में आए, जो किसी भी अन्य खेल में जीते गए पदकों की तुलना में सबसे अधिक रहे। इसमें 2010 में नई दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेल के दौरान जीते गए भारतीय निशानेबाजों के 30 पदक भी शामिल हैं। इसकी वजह से भारत ने इतिहास में अपने सबसे सफल कॉमनवेल्थ गेम्स का लुत्फ उठाया, जिसमें उन्होंने कुल 101 पदक जीते।

टोक्यो ओलंपिक भाला फेंक चैंपियन और विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता नीरज चोपड़ा की चोट के कारण CWG 2022 से बाहर होने से निश्चित रूप से भारत एक पदक से चूक गया।

निशानेबाजी खेल के शामिल नहीं होने और नीरज चोपड़ा की अनुपस्थिति में, भारतीय कुश्ती दल के ओलंपिक पदक विजेता रवि कुमार दहियाबजरंग पुनियासाक्षी मलिक और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु, विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता किदांबी श्रीकांत और लक्ष्य सेन की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में शानदार प्रदर्शन किया।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में, भारतीय एथलीटों ने कुल 61 पदक जीते। जिसमें 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य पदक शामिल रहे। संकेत सरगर बर्मिंघम में पदक जीतने वाले पहले भारतीय थे, जिन्होंने पुरुषों की 55 किग्रा भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीता था।

वहीं, मीराबाई चानू CWG 2022 में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय थीं, जबकि जेरेमी लालरिनुंगा बर्मिंघम में शीर्ष पोडियम हासिल करने वाले पहले भारतीय एथलीट थे।

इसके अलावा सुधीर ने सीडब्ल्यूजी 2022 में पैरा स्पोर्ट्स में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता। वह पैरा पावरलिफ्टिंग पुरुषों के हैवीवेट वर्ग में चैंपियन बने।

राष्ट्रमंडल खेल 2022 में भारतीय पदक विजेता

नम्बर एथलीट/टीम मेडल इवेंट खेल
1 संकेत सरगर रजत पुरुष, 55 किग्रा वेटलिफ्टिंग
2 गुरुराज पुजारी कांस्य मेंस 61 किग्रा वेटलिफ्टिंग
3 मीराबाई चानू स्वर्ण वूमेंस 49 किग्रा वेटलिफ्टिंग
4 बिंदियारानी देवी रजत वूमेंस 55 किग्रा वेटलिफ्टिंग
5 जेरेमी लालरिनुंगा स्वर्ण मेंस 67 किग्रा वेटलिफ्टिंग
6 अचिंता शेउली स्वर्ण मेंस 73 किग्रा वेटलिफ्टिंग
7 सुशीला देवी रजत वूमेंस 48 किग्रा जूडो
8 विजय कुमार यादव कांस्य मेंस 60 क्रिग्रा जूडो
9 हरजिंदर कौर कांस्य वूमेंस 71 किग्रा वेटलिफ्टिंग
10 भारतीय महिला टीम स्वर्ण वूमेंस फोर लॉन बाउल्स
11 भारतीय पुरुष टीम स्वर्ण मेंस इवेंट टेबल टेनिस
12 विकास ठाकुर रजत मेंस 96 क्रिग्रा वेटलिफ्टिंग
13 भारतीय मिक्स्ड टीम रजत मिक्स्ड टीम बैडमिंटन
14 लवप्रीत सिंह कांस्य मेंस 109 किग्रा वेटलिफ्टिंग
15 सौरव घोषाल कांस्य मेंस सिंगल्स स्क्वैश
16 तूलिका मान रजत वूमेंस +78किग्रा जूडो
17 गुरदीप सिंह कांस्य मेंस 109+ किग्रा वेटलिफ्टिंग
18 तेजस्विन शंकर कांस्य मेंस हाई जंप एथलेटिक्स
19 मुरली श्रीशंकर रजत मेंस लॉन्ग जंप एथलेटिक्स
20 सुधीर स्वर्ण मेंस हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग
21 अंशु मलिक रजत वूमेंस 57 किग्रा रेसलिंग
22 बजरंग पुनिया स्वर्ण मेंस 65 किग्रा फ्रीस्टाइल रेसलिंग
23 साक्षी मलिक स्वर्ण वूमेंस 62 किग्रा फ्रीस्टाइल रेसलिंग
24 दीपक पूनिया स्वर्ण मेंस 86 किग्रा फ्रीस्टाइल रेसलिंग
25 दिव्या काकरन कांस्य वूमेंस 68 किग्रा फ्रीस्टाइल रेसलिंग
26 मोहित ग्रेवाल कांस्य मेंस 125 किग्रा रेसलिंग
27 प्रियंका गोस्वामी रजत वूमेंस 10,000 मीटर रेस वॉक एथलेटिक्स
28 अविनाश साबले रजत मेंस 3000 मीटर स्टीपलचेज एथलेटिक्स
29 भारतीय पुरुष टीम रजत मेंस फोर लॉन बाउल्स
30 जैस्मीन लम्बोरिया कांस्य वूमेंस 60 किग्रा लाइटवेट बॉक्सिंग
31 पूजा गहलोत कांस्य वूमेंस 50 किग्रा फ्रीस्टाइल रेसलिंग
32 रवि कुमार दहिया स्वर्ण मेंस 57 किग्रा फ्रीस्टाइल रेसलिंग
33 विनेश फोगाट स्वर्ण वूमेंस 53 किग्रा फ्रीस्टाइल रेसलिंग
34 नवीन स्वर्ण मेंस 74 किग्रा फ्रीस्टाइल रेसलिंग
35 पूजा सिहाग कांस्य वूमेंस 76 किग्रा फ्रीस्टाइल रेसलिंग
36 दीपक नेहरा कांस्य मेंस 97 किग्रा फ्रीस्टाइल रेसलिंग
37 मोहम्मद हुसामुद्दीन कांस्य मेंस 57 किग्रा फेदरवेट बॉक्सिंग
38 रोहित टोकस कांस्य मेंस 67 किग्रा वेल्टरवेट बॉक्सिंग
39 भाविना पटेल स्वर्ण वूमेंस सिंगल्स क्लासेस 3-5 पैरा टेबल टेनिस
40 सोनलबेन पटेल कांस्य वूमेंस सिंगल्स क्लासेस 3-5 पैरा टेबल टेनिस
41 महिला हॉकी टीम कांस्य वूमेंस टीम हॉकी
42 नीतू घंगास स्वर्ण वूमेंस 48 किग्रा मिनिममवेट बॉक्सिंग
43 अमित पंघल स्वर्ण मेंस फ्लाईवेट 51 किग्रा बॉक्सिंग
44 एल्धोस पॉल स्वर्ण मेंस ट्रिपल जंप एथलेटिक्स
45 अब्दुल्ला अबूबकर रजत मेंस ट्रिपल जंप एथलेटिक्स
46 संदीप कुमार कांस्य मेंस 10000 मीटर रेस वॉक एथलेटिक्स
47 अन्नू रानी कांस्य वूमेंस जैवलिन थ्रो एथलेटिक्स
48 निकहत जरीन स्वर्ण वूमेंस 50 किग्रा लाइट फ्लाईवेट बॉक्सिंग
49 शरत कमल/जी साथियान रजत मेंस डबल्स टेबल टेनिस
50 दीपिका पल्लीकल / सौरव घोषाल कांस्य मिक्स्ड डबल्स स्क्वैश
51 किदांबी श्रीकांत कांस्य मेंस सिंगल्स बैडमिंटन
52 भारतीय महिला टीम रजत वूमेंस T20 क्रिकेट
53 शरत कमल/श्रीजा अकुला स्वर्ण मिक्स्ड डबल्स टेबल टेनिस
54 त्रिशा जॉली / पुलेला गायत्री गोपीचंद कांस्य वूमेंस डबल्स बैडमिंटन
55 सागर अहलावत रजत मेंस 92+ किग्रा सुपर हेवीवेट बॉक्सिंग
56 पीवी सिंधु स्वर्ण वूमेंस सिंगल्स बैडमिंटन
57 लक्ष्य सेन स्वर्ण मेंस सिंग्ल्स बैडमिंटन
58 साथियान गणानाशेखरन कांस्य मेंस सिंग्ल्स टेबल टेनिस
59 सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी / चिराग शेट्टी स्वर्ण मेंस डबल्स बैडमिंटन
60 शरत कमल स्वर्ण मेंस सिंग्ल्स टेबल टेनिस
61 भारतीय पुरुष हॉकी टीम रजत मेंस हॉकी हॉकी

मध्य प्रदेश की प्रियंका ने अंतरराष्ट्रीय वुशु टूर्नामेंट में जीता स्वर्ण

नयी दिल्ली । मध्य प्रदेश की प्रियंका केवट ने जॉर्जिया के बटुमी में आयोजित किये गये अंतरराष्ट्रीय वुशु टूर्नामेंट के अंडर-18 आयु वर्ग के 48 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। प्रियंका मध्य प्रदेश के सीधी जिले के मधिला गांव के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता स्थानीय नर्सिंग होम में कैशियर का काम करते हैं।
प्रियंका ने कहा, ‘‘ यह मेरी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता थी और भारत का ध्वज ऊंचा करके मैं गर्व महसूस कर रही हूं। मैं अपने प्रशिक्षकों, माता-पिता और एम3एम फाउंडेशन की आभारी हूं जिन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाने में पूरा सहयोग दिया।’’
उन्होंने कहा , ‘‘यह स्वर्ण पदक मुझे और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगा। मैं अब आगामी चैंपियनशिप में भाग लेने पर पूरा ध्यान दे रही हूं।’’ प्रियंका शुरू में अपने बचपन के कोच मनिंद शेर अली खान से प्रशिक्षण ले रही थी लेकिन अभी वह भोपाल में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के कोच रत्नेश ठाकुर, कल्याणी और सारिका गुप्ता से प्रशिक्षण ले रही हैं। वुशु चाइनीज मार्शल आर्ट है जो की पूरी तरह से संपर्क वाला खेल है। यह खेल एशियाई खेलों, दक्षिण पूर्व एशियाई खेलों और कई अन्य बड़ी खेल प्रतियोगिताओं का हिस्सा है।

मुफ्त की सौगातें और कल्याणकारी योजनाएं भिन्न चीजें : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मुफ्त की सौगातें और सामाजिक कल्याणकारी योजनाएं दो अलग-अलग चीजें हैं तथा अर्थव्यवस्था को पैसे के नुकसान एवं कल्याणकारी कदमों के बीच संतुलन कायम करना होगा।
इसके साथ ही न्यायालय ने मुफ्त सौगात देने का वादा करने के लिए राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करने के अनुरोध वाली याचिका पर विचार करने की संभावना से भी इनकार किया। न्यायालय ने विभिन्न पक्षों को 17 अगस्त से पहले इस पहलू पर सुझाव देने को कहा है।
प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि चुनाव के दौरान तर्कहीन मुफ्त सौगात देने का वादा करने वाले राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करने का विचार ‘अलोकतांत्रिक’ है।
पीठ की ओर से प्रधान न्यायाधीश रमण ने कहा, “मैं किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने के विषय में नहीं जाना चाहता क्योंकि यह एक अलोकतांत्रिक विचार है… आखिरकार हमारे यहां लोकतंत्र है।”
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान तर्कहीन मुफ्त सौगात देने का वादा एक “गंभीर मुद्दा” है, लेकिन वह इस संबंध में वैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर भी विधायी क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं करेंगे।
पीठ ने कहा, “आप मुझे अनिच्छुक या परंपरावादी कह सकते हैं लेकिन मैं विधायी क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं करना चाहता… मैं रूढ़िवादी हूं। मैं विधायिका से जुड़े क्षेत्रों में अतिक्रमण नहीं करना चाहता। यह एक गंभीर विषय है। यह कोई आसान बात नहीं है। हमें दूसरों को भी सुनने दें।’’
प्रधान न्यायाधीश 26 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ वकीलों की ओर से कुछ सुझाव दिए गए हैं। उन्होंने शेष पक्षों से उनकी सेवानिवृत्ति से पहले आवश्यक कदम उठाने को कहा और मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख तय की।
उन्होंने कहा, ‘‘मुफ्त सौगात और समाज कल्याण योजना भिन्न हैं… अर्थव्यवस्था को पैसे का नुकसान और लोगों का कल्याण- दोनों के बीच संतुलन कायम करना होगा और इसीलिए यह बहस है। कोई एक तो ऐसा होना चाहिए जो अपनी दृष्टि और विचार सामने रख सके। कृपया मेरी सेवानिवृत्ति से पहले कुछ सुझाव सौंपे।’’
सर्वोच्च अदालत वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस याचिका में चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त सौगातों का वादा करने के चलन का विरोध किया गया है और निर्वाचन आयोग से उनके चुनाव चिह्नों पर रोक लगाने तथा उनका पंजीकरण रद्द करने के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग करने का अनुरोध किया गया है।
उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह की दलीलों पर गौर करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘यह एक गंभीर मुद्दा है और जिन्हें (मुफ्त सौगात मिल रही हैं) वे इसे चाहते हैं। हमारा एक कल्याणकारी राज्य है। कुछ लोग कह सकते हैं कि वे कर का भुगतान कर रहे हैं और इसका उपयोग विकास कार्यक्रमों के लिए किया जाना है … इसलिए समिति को दोनों पक्षों को सुनना चाहिए।’’
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “हाल में कुछ राजनीतिक दलों ने मुफ्त सौगातों के वितरण को एक कला के स्तर तक बढ़ा दिया है। चुनाव इसी आधार पर लड़े जाते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के चुनावी परिदृश्य में कुछ दल समझते हैं कि चीजों का मुफ्त वितरण ही समाज के लिए ‘कल्याणकारी उपायों’ का एकमात्र तरीका है। यह समझ पूरी तरह से अवैज्ञानिक है और इससे गंभीर आर्थिक संकट की स्थिति बनेगी।”
शीर्ष विधि अधिकारी ने ‘संकटग्रस्त’ बिजली क्षेत्र का उदाहरण दिया और कहा कि कई बिजली उत्पादन और वितरण कंपनियां पीएसयू (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) हैं और वे वित्तीय संकट में हैं।

विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा प्रेमचंद जयंती

मिदनापुर। विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा प्रेमचंद जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किविभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार प्रसाद ने कहा कि प्रेमचंद समग्रता के लेखक हैं। प्रेमचंद का साहित्य हमें सही अर्थों में आदमीयत सिखाता है। उन्होंने जैसा लिखा वैसा ही जीवन जिया। उनके यहां करनी और कथनी में अंतर नहीं है। विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि प्रेमचन्द का साहित्य लघु जीवन का महाख्यान है।वे हाशिए के समाज को केंद्र में लाते हैं।वे सामाजिक और मानवीय मूल्यों को अपनी रचना का केन्द्रीय विषय बनाते हैं। डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि प्रेमचंद के जीवन से हमें अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना सीखना चाहिए। प्रेमचंद ने समाज के प्रत्येक उपेक्षित वर्ग को अपनी रचनाओं का आधार बनाया। संजीत महतो,कोमल अहिरवाल, मुस्कान परवीन,पूजा मिश्रा,एम.अश्विनी कुमारी,डी.देवी ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर नंदिनी साव ने सरस्वती वंदना गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की, कोमल साव ने काव्य आवृत्ति, पी. बेबी, के स्वाति रेखा और अलिशा देवी ने भावनृत्य तथा रूपेश यादव, प्रियंका गोप, नीलोफर बेगम, फरहाना परवीन और ज्योति सिंह ने अपनी या गया। इस अवसर पर एम. ए. फाइनल सेमेस्टर के लिए विदाई समारोह का भी आयोजन हुआ।परिचर्चा में हिस्सा लेते हुए कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन मोनू यादव ने और धन्यवाद ज्ञापन तमन्ना खातून ने दिया।