Thursday, July 9, 2026
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5जी स्पेक्ट्रम नीलामी से रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपये मिले

बोली लगाने में जियो रही अव्वल
नयी दिल्ली । भारत में अबतक की सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी सोमवार को खत्म हो गई। सात दिन तक चली इस नीलामी में 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 5जी दूरसंचार स्पेक्ट्रम की रिकॉर्ड बिक्री हुई।
इस नीलामी में अरबपति कारोबारी मुकेश अंबानी की कंपनी जियो ने अपनी अग्रणी स्थिति को मजबूत करने के लिए सबसे अधिक बोली लगाई। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने कहा कि अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक कुल 1,50,173 करोड़ रुपये की बोलियां लगाई गईं।

अत्यधिक उच्च गति के मोबाइल इंटरनेट संपर्क की पेशकश करने में सक्षम 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की यह राशि पिछले साल बेचे गए 77,815 करोड़ रुपये के 4जी स्पेक्ट्रम से लगभग दोगुना है। यह राशि 2010 में 3जी नीलामी से मिले 50,968.37 करोड़ रुपये के मुकाबले तीन गुना है।

रिलायंस जियो ने 4जी की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक तेज गति से संपर्क की पेशकश करने वाले रेडियो तरंगों के लिए सबसे अधिक बोली लगाई।
इसके बाद भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया लिमिटेड का स्थान रहा। बताया जाता है कि अडाणी समूह ने निजी दूरसंचार नेटवर्क स्थापित करने के लिए 26 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम खरीदा है। सूत्रों ने कहा कि किस कंपनी ने कितना स्पेक्ट्रम खरीदा, इसका ब्योरा नीलामी के आंकड़ों के पूरी तरह आने के बाद ही पता चलेगा।
सरकार ने 10 बैंड में स्पेक्ट्रम की पेशकश की थी, लेकिन 600 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज और 2300 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम के लिए कोई बोली नहीं मिली।
लगभग दो-तिहाई बोलियां 5जी बैंड (3300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज) के लिए थीं, जबकि एक-चौथाई से अधिक मांग 700 मेगाहर्ट्ज बैंड में आई। यह बैंड पिछली दो नीलामियों (2016 और 2021) में बिना बिके रह गया था।
पिछले साल हुई नीलामी में रिलायंस जियो ने 57,122.65 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम लिया था। भारती एयरटेल ने लगभग 18,699 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी और वोडाफोन आइडिया ने 1,993.40 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम खरीदा था।
इस साल कम से कम 4.3 लाख करोड़ रुपये के कुल 72 गीगाहर्ट्ज रेडियो तरंगों को बोली के लिए रखा गया था।

संग्रहालय में तब्दील किया जाएगा त्रिपुरा महल

अगरतला । त्रिपुरा के एक तत्कालीन महाराजा द्वारा निर्मित एवं एक सदी पुराने पुष्पबंता पैलेस को राष्ट्रीय स्तर के संग्रहालय एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
राज्य की राजधानी में एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित इस महल का निर्माण 1917 में महाराजा बीरेंद्र किशोर माणिक्य द्वारा किया गया था। वह खुद एक चित्रकार थे और इस महल को एक स्टूडियो के रूप में इस्तेमाल करते थे।
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रवींद्रनाथ टैगोर का शाही परिवार से घनिष्ठ संबंध था। उन्होंने सात बार त्रिपुरा का दौरा किया था। वर्ष 1926 में राज्य के अपने अंतिम दौरे के दौरान, टैगोर पुष्पबंता पैलेस में रुके थे।
विशेषज्ञों ने कहा कि टैगोर का 80वां जन्मदिन यहां महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य द्वारा मई 1941 में एक कार्यक्रम के दौरान मनाया गया था।
टैगोर के पुष्पबंता पैलेस आगमन से संबंधित दस्तावेज और उनके काम के अंश प्रस्तावित संग्रहालय में प्रदर्शित किए जाएंगे।
वर्ष 1949 में रियासत के भारतीय संघ में विलय होने के बाद, 4.31 एकड़ में फैले महल को मुख्य आयुक्त के बंगले और फिर राजभवन में तब्दील कर दिया गया था। यहां 2018 तक राजभवन रहा, जिसे बाद में एक नये भवन में स्थानांतरित कर दिया गया।
राज्य के पर्यटन मंत्री प्रणजीत सिन्हा रॉय ने बताया कि महल को महाराजा बीरेंद्र किशोर माणिक्य संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 40.13 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यह सभी पूर्वोत्तर राज्यों की समृद्ध विरासत, दक्षिण-पूर्व एशियाई ललित कला और समकालीन फोटोग्राफी के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार को प्रदर्शित करेगा।

बुनियादी ढांचा क्षेत्र की 384 परियोजनाओं की लागत 4.66 लाख करोड़ रुपये बढ़ गयी – रिपोर्ट

नयी दिल्ली । बुनियादी ढांचागत क्षेत्र की 150 करोड़ रुपये या इससे अधिक के खर्च वाली 384 परियोजनाओं की लागत तय अनुमान से 4.66 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गई है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी और अन्य कारणों से इन परियोजनाओं की लागत बढ़ी है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय 150 करोड़ रुपये या इससे अधिक की लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी करता है। मंत्रालय की जून 2022 की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की 1,514 परियोजनाओं में से 384 की लागत बढ़ गई है जबकि 713 परियोजनाएं देरी से चल रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘इन 1,514 परियोजनाओं के क्रियान्वयन की मूल लागत 21,21,471.79 करोड़ रुपये थी लेकिन अब इसके बढ़कर 25,87,946.13 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है। इससे पता चलता है कि इन परियोजनाओं की लागत 21.99 प्रतिशत यानी 4,66,474.34 करोड़ रुपये बढ़ गई है।’’ रिपोर्ट के अनुसार, जून 2022 तक इन परियोजनाओं पर 13,30,885.21 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जो कुल अनुमानित लागत का 51.43 प्रतिशत है। हालांकि मंत्रालय ने कहा है कि यदि परियोजनाओं के पूरा होने की हालिया समयसीमा के हिसाब से देखें तो देरी से चल रही परियोजनाओं की संख्या कम होकर 552 पर आ जाएगी।
वैसे इस रिपोर्ट में 523 परियोजनाओं के चालू होने के साल के बारे में जानकारी नहीं दी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी से चल रही 713 परियोजनाओं में से 123 परियोजनाएं एक महीने से 12 महीने, 122 परियोजनाएं 13 से 24 महीने की, 339 परियोजनाएं 25 से 60 महीने की और 129 परियोजनाएं 61 महीने या अधिक की देरी से चल रही हैं।
इन 647 परियोजनाओं में हो रहे विलंब का औसत 42.13 महीने है। इन परियोजनाओं में देरी के कारणों में भूमि अधिग्रहण में विलंब, पर्यावरण और वन विभाग की मंजूरियां मिलने में देरी और बुनियादी संरचना की कमी प्रमुख है।
इनके अलावा परियोजना का वित्तपोषण, विस्तृत अभियांत्रिकी को मूर्त रूप दिये जाने में विलंब, परियोजना की संभावनाओं में बदलाव, निविदा प्रक्रिया में देरी, ठेके देने व उपकरण मंगाने में देरी, कानूनी व अन्य दिक्कतें, अप्रत्याशित भू-परिवर्तन आदि की वजह से भी इन परियोजनाओं में विलंब हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न राज्यों में कोविड-19 की वजह से लगाए गए लॉकडाउन से भी परियोजनाओं में विलंब हुआ है। रिपोर्ट कहती है कि परियोजना एजेंसियां कई परियोजनाओं के लिए संशोधित लागत और चालू होने के समय की जानकारी नहीं दे रही हैं। इससे पता चलता है कि लागत में बढ़ोतरी के आंकड़े को ‘कम’ दिखाया जा रहा है।

अभिनेता रसिक दवे का 65 साल की उम्र में निधन

मुम्बई । हिंदी, गुजराती फिल्मों और टेलीविजन शो में नज़र आने वाले अभिनेता रसिक दवे का लंबी बीमारी के बाद गत 30 जुलाई को निधन हो गया। वह 65 वर्ष के थे।
दवे की सास और अभिनेत्री सरिता जोशी ने बताया कि पिछले चार साल से किडनी की बीमारी से जूझ रहे दवे ने शुक्रवार शाम को अंतिम सांस ली। जोशी ने “पीटीआई-भाषा” को बताया, “दवे कमज़ोरी महसूस कर रहे थे। उन्हें रक्तचाप और गुर्दे की समस्या थी। वह डायलिसिस पर थे और बीते 15-20 दिनों से अस्पताल में थे। उन्हें घर लाया गया था और मैं उनसे मिली और वह मुझे देखकर मुस्कुराए, लेकिन शुक्रवार शाम साढ़े सात बजे उनका निधन हो गया।”
दवे का अंतिम संस्कार शनिवार सुबह करीब सात बजे परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में किया गया। अभिनेता ने अपने करियर की शुरुआत 1982 में एक गुजराती फिल्म “पुत्र वधू” से की थी। हिंदी फिल्मों और टीवी शो में दवे निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म “झूठी”, “महाभारत”, “संस्कार-धरोहर अपनों की” के लिए प्रसिद्ध रहे।
रसिक दवे के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है।

2017 से अब तक विज्ञापनों पर 3,339.49 करोड़ रुपये खर्च : अनुराग ठाकुर

नयी दिल्ली । सरकार ने वर्ष 2017 से जुलाई 2022 के बीच प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक विज्ञापनों पर कुल 3,339.49 करोड़ रुपये खर्च किए है। हालांकि इस दौरान सरकार ने विदेशी मीडिया में विज्ञापन पर कोई खर्च नहीं किया है।
सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। सरकार द्वारा वर्ष 2017 से केंद्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी) के माध्यम से प्रिंट ओर इलेक्ट्रॉनिक विज्ञापनों पर किए गए व्यय का ब्योरा देते उन्होंने बताया कि 12 जुलाई 2022 तक प्रिंट मीडिया पर 1756.48 करोड़ रुपये और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया 1583.01 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
उनके मुताबिक सरकार ने वर्ष 2017-18 के दौरान प्रिंट मीडिया पर सबसे अधिक 636.09 करोड़ रुपये और 2018-19 के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर सबसे अधिक 514.28 करोड़ रुपये खर्च किए।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के किसी मंत्रालय या विभाग द्वारा सूचना और प्रसारण मंत्रालय के माध्यम से विदेशी मीडिया में विज्ञापन पर कोई व्यय नहीं किया गया है।’’

सरकारों से यूजर की जानकारी की मांग बढ़ी, ट्विटर ने किया खुलासा

वाशिंगटन । ट्विटर ने खुलासा किया कि दुनियाभर की सरकारें कंपनी से यूजर अकाउंट्स से सामग्री हटाने या उनके निजी विवरणों की जासूसी करने को कह रही हैं। सोशल मीडिया कंपनी ने एक नयी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि उसने पिछले साल छह महीने की अवधि के दौरान स्थानीय, राज्य या राष्ट्रीय सरकारों की रिकॉर्ड 60,000 कानूनी मांगों पर कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार, ये सरकारें चाहती थीं कि ट्विटर अकाउंट से या तो सामग्री हटाई जाए या कंपनी यूजर की गोपनीय जानकारी यथा- प्रत्यक्ष संदेश या यूजर के स्थान, का खुलासा करे।
ट्विटर की सुरक्षा और अखंडता मामलों के प्रमुख योएल रोथ ने साइट पर प्रसारित बातचीत में कहा, ‘‘हम देख रहे हैं कि सरकारें हमारी सेवा का उपयोग करने वाले लोगों को बेनकाब करने के लिए कानूनी रणनीति का उपयोग करने, अकाउंट के मालिकों के बारे में जानकारी एकत्र करने और कानूनी मांगों का उपयोग करने की कोशिश करने और लोगों को चुप कराने के तरीके के रूप में अधिक आक्रामक हो जाती हैं।’’
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका से सबसे अधिक 20 प्रतिशत अनुरोध आए, जिसमें अकाउंट की जानकारी, उसकी सूचना मांगी गई थी, जबकि भारत इस मामले में काफी पीछे है। ट्विटर का कहना है कि उसने मांगी गई सूचना के हिसाब से लगभग 40 प्रतिशत यूजर के अकाउंट की जानकारी साझा की।
जापान की ओर से अकाउंट की जानकारी पाने का अनुरोध लगातार किया जाता है और वह अकाउंट से सामग्री हटाने के लिए ट्विटर से सबसे अधिक अनुरोध करता है। सामग्री को हटाने के लिए जापान ने सभी अनुरोधों का आधा 23,000 से अधिक अनुरोध किए। रूस भी इसमें पीछे नहीं रहा।
फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक मेटा ने भी इसी समय सीमा के दौरान सरकार द्वारा निजी यूजर डेटा की मांग में वृद्धि की सूचना दी।
ट्विटर ने 2021 की अंतिम छमाही के दौरान सत्यापित पत्रकारों और समाचार आउटलेट्स को निशाना बनाकर सरकारों के अनुरोधों में भारी वृद्धि की भी सूचना दी।
सरकारों ने पिछले साल जुलाई और दिसंबर के बीच दुनिया भर में सत्यापित पत्रकारों या समाचार आउटलेट्स की जानकारी पाने के लिए 349 अकाउंट के खिलाफ कानून का सहारा लिया, जो 103 प्रतिशत अधिक है।
ट्विटर ने इस बात का विवरण नहीं दिया कि किन देशों ने पत्रकारों के अकाउंट के लिए अनुरोध किए या उन्होंने कितने प्रश्नों का अनुपालन किया। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट के कार्यकारी निदेशक रॉब महोनी ने एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को एक ईमेल में दिए गए बयान में कहा कि सरकार आलोचकों और पत्रकारों को चुप कराने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों का इस्तेमाल कर रही है।

 

मिस्र में 4500 पुराना प्राचीन ‘सूर्य मंदिर’, चार खोए हुए मंदिरों में से हो सकता है एक

काहिरा । भारत में कोणार्क सूर्य मंदिर के बारे में आपने सुना होगा। इसे 13वीं शताब्दी में बनवाया गया था। लेकिन अब मिस्र में एक प्राचीन मंदिर की खोज हुई है। ये मंदिर 4500 साल पुराना है। मिस्र के पुरातत्वविदों ने इसकी पुष्टि की है। कहा जा रहा है कि ये मिट्टी के ईंट से बनी इमारत मिस्र के पांचवें राजवंश के खोए हुए सूर्य मंदिरों में से एक है। मिस्र का पांचवां राजवंश 2465 से 2323 ईसा पूर्व तक था। मंदिर काहिरा के दक्षिण में अबुसीर में राजा नुसेरे के मंदिर के नीचे मिला है। मिस्र के पुरावशेष और पर्यटन मंत्रालय ने शनिवार को ट्वीट कर इस नई रोमांचक खोज के बारे में घोषणा की। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘अबू सर के उत्तर में अबू घोराब में राजा नुसेरे के मंदिर में काम कर रहे इटालिन और पोलिश पुरातात्विक मिशन को मंदिर के नीचे एक मिट्टी की ईंट से बनी इमारतों के अवशेष मिले हैं।’
मंत्रालय ने आगे कहा, ‘खोज से मिले संकेत बताते हैं कि ये पांचवें राजवंश के खोए हुए चार सूर्य मंदिरों में से एक का हो सकता है। इन मंदिरों के बारे में सिर्फ ऐतिहासिक स्रोतों से जाना जाता है, अभी तक वह मिले नहीं हैं।’ आगे कहा गया कि इमारत का एक हिस्सा पांचवें राजवंश के छठे शासक ने अपना मंदिर बनाने के लिए ध्वस्त कर दिया था।
खुदाई करने वाली टीम को जमीन के नीचे मिट्टी के बर्तन मिले हैं। ये आगे की रिसर्च में काम आएंगे। पांचवें राजवंश के राजाओं के नाम वाले कुछ स्टांप भी मिले हैं। मंत्रालय ने फोटो शेयर कर बताया कि ये साइट अभी भी काम कर रही है। 19वीं शताब्दी में पहला सूर्य मंदिर खोजा गया था, इसके बाद ऐसी खोज हुई जो बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कहा जाता है कि मिस्र में ऐसे है छह या सात मंदिर थे, जिनमें से अभी तक सिर्फ दो ही मिल सके हैं।

रूबी पार्क पब्लिक स्कूल में अर्न्तविद्यालय हिन्दी उत्सव ‘कौशल’ की छटा

कोलकाता । रूबी पार्क पब्लिक स्कूल में अर्न्तविद्यालय हिन्दी उत्सव ‘कौशल’ का आयोजन किया गया। मुंशी प्रेमचन्द जयंती पर आयोजित इस हिन्दी उत्सव में विद्यार्थियों ने अभिनय, काव्य आवृत्ति, विज्ञापन एवं कथा वाचन दृश्य के साथ जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लिया। अभिनय प्रतियोगिता में दूसरी से चौथी कक्षा के विद्यार्थियों ने अपने प्रिय चरित्रों की वेषभूषा में संवाद बोले। पाँचवीं – छठी कक्षा के लिए आयोजित काव्य आवृत्ति में बच्चों ने ओजमयी वाणी में कविता सुनायीं। विज्ञापन प्रतियोगिता के अर्न्तगत सातवीं एवं आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने पोस्टर बनाए और नौंवीं व दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने कथा वाचन दृश्य के साथ प्रतियोगिता में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन की सहायता से कहानी सुनाई। महानगर के प्रतिष्ठित स्कूलों ने इस हिन्दी उत्सव में भाग लिया। प्रतियोगिताओं के निर्णायकों में असीमा चक्रवर्ती, आशा सिंह एवं सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया शामिल थे। रूबी पार्क पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल जयता मजुमदार ने कौशल’ को सफल कार्यक्रम बताते हुए सभी प्रतिभागियों की सराहना की।

आर्टिटेक्चर के प्रति जागरुकता लाने के लिए आयोजित हुई प्रदर्शनी

ओम दयाल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट उलुबेड़िया के कॉलेज ऑफ आर्टिटेक्चर का आयोजन

हावड़ा । ओम दयाल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट उलुबेड़िया के कॉलेज ऑफ आर्टिटेक्चर द्वारा विद्यार्थियों की गतिलिधियों को लेकर प्रदर्शनी आयोजित की गयी। गत 22 एवं 23 जुलाई को आयोजित इस प्रदर्शनी में प्रथम वर्ष से लेकर स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर को विद्यार्थियों का काम दर्शाया गया। हर साल ओडीसीए के विद्यार्थी अपना स्टडी प्रोजेक्ट प्रदर्शित करते हैं। गत 2016 से कोलकाता के आस -पास की ऐतिहासिक इमारतों के दस्तावेज संग्रहित करते आ रहे हैं और हर साल चित्रांकन, स्केच और मापने के लिए इमारतों का नया सेट तैयार करते हैं।
इस बार बांसबेड़िया राजबाड़ी, हंसेश्वरी मंदिर, बांसबेड़िया अनतंबासुदेव मंदिर, हुगली के चंदननगर की मंडल बाड़ी और श्रीरामपुर राजबाटी, शोभाबाजार बसु बाटी, हावड़ा की मुखर्जी बाड़ी. कोलकाता की बर्न एंड शेपर्ड बिल्डिंग को प्रोजेक्ट में शामिल किया गया जहाँ विद्यार्थियों ने आगंतुकों को अपने काम के बारे में समझाया। प्रदर्शनी में शिक्षाविद्, आर्टिटेक्ट, स्कूली विद्यार्थी और आर्टिटेक्चर के विद्यार्थी पहुँचे।
गत 23 जुलाई को शहरी प्रशासनिक व्यवस्था, शहरी अर्थशास्त्र पर एक सेमिनार आयोजित किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन ओम दयाल ग्रुप के बोर्ड ट्रस्टी आलोक टिबड़ेवाल एवं सागर अग्रवाल ने किया। सेमिनार में आईआईटी खड़गपुर के आर्टिटेक्चर एवं प्लानिंग विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर विप्लव कांति सेनगुप्ता, कलकत्ता विश्वविद्यालय के इकोनॉमिक्स विभाग के नगरीय अर्थशास्त्री प्रोफेसर महालया चटर्जी, आर्टिटेक्ट डॉ. सौम्येन्दु विश्वास, डेललपमेंट प्रोफेशनल रंजिनी सेन ने विचार रखे। इस अवसर पर क्विज एवं मॉ़डल मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गयी। इसमें साउथ प्वाइंट, रूबी पार्क पब्लिक स्कूल, एपीजे स्कूल, बिड़ला भारती, डीपीएस रूबी पार्क ने भाग लिया। साउथ प्वाइंट के द्विपायन नन्दी और प्रत्यय गांगुली विजेता रहे। रूबी पार्क पब्लिक स्कूल के अनीश बनर्जी और रणविजय राय रनर अप रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों में आर्टिटेक्चर के प्रति जागरुकता लाना था। इसे लेकर एक पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन भी किया गया।

जीएसटी के 5 वर्षों का एमसीसीआई ने किया आकलन

कोलकाता । मर्चेंट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने “जीएसटी के पांच वर्षों का आकलन करते हुए एक सत्र आयोजित किया। सत्र को , केंद्रीय जीएसटी और सीएक्स की प्रधान मुख्य आयुक्त वी रमा मैथ्यू ने सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि भुगतान प्रक्रिया में एमएसएमई क्षेत्रों को जीएसटी से काफी हद तक लाभ हुआ है। इस क्षेत्र में समस्या बड़े पैमाने पर अनधिकृत पंजीकरण को लेकर है।
राज्य सरकार के कर आयुक्त खालिद ऐजाज अनवर ने कर धोखाधड़ी, विवादास्पद मुद्दों, पोर्टल गड़बड़ियों और अनुपालन की कठिनाइयों के साथ राजस्व संग्रह में चुनौतियां भी।
सत्र में डॉलर इंडस्ट्रीज के प्रबन्ध निदेशक विनोद कुमार गुप्ता ने उद्योग जगत, रोड कार्गो मूवर्स प्रा. लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक और परिवहन क्षेत्र पर एमसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष संतोष सराफ ने परिवहन क्षेत्र पर, किंग केमिकल्स के प्रोपराइटर और एमसीसीआई एमएसएमई काउंसिल के चेयरमैन संजीब कोठारी ने एमएसएमई समेत अन्य सदस्यों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात रखी। अरुण कुमार अग्रवाल, जीएसटी के अध्यक्ष, एमसीसीआई के अप्रत्यक्ष और राज्य कर परिषद ने सत्र का संचालन किया।। चर्चा के बाद एक ओपन हाउस सत्र हुआ।