नयी दिल्ली । वाहन कंपनी टाटा मोटर्स की अगस्त, 2022 में कुल बिक्री 36 प्रतिशत बढ़कर 78,843 इकाई हो गई। वाहन क्षेत्र प्रमुख कंपनी ने पिछले साल के इसी महीने में 57,995 इकाइयों की बिक्री की थी। अगस्त में टाटा मोटर्स की कुल घरेलू बिक्री 41 प्रतिशत बढ़कर 76,479 इकाई हो गई। कंपनी ने अगस्त, 2021 में 54,190 इकाइयां डीलरों को भेजी थी।
घरेलू बाजार में यात्री वाहनों की बिक्री पिछले महीने 68 प्रतिशत बढ़कर 47,166 इकाई पर पहुंच गई। एक साल पहले यह आकंड़ा 28,018 इकाई रहा था।
पिछले महीने घरेलू बाजार में कंपनी की वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 12 प्रतिशत बढ़कर 29,313 इकाई हो गई। पिछले साल इसी महीने में कंपनी 26,172 वाणिज्यिक वाहन बेचे थे।
टाटा मोटर्स की बिक्री में 36 प्रतिशत की वृद्धि, हुई 78,843 इकाई
प्रख्यात अर्थशास्त्री अभिजीत सेन का निधन
नयी दिल्ली । योजना आयोग के पूर्व सदस्य एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख विशेषज्ञों में से एक अभिजीत सेन का सोमवार रात निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे।
सेन के भाई डॉ. प्रणब सेन ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘अभिजीत सेन को रात करीब 11 बजे दिल का दौरा पड़ा। हम उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक उनका निधन हो चुका था।’’
सेन का कॅरियर चार दशक से अधिक लंबा रहा। वह कैम्ब्रिज के ऑक्सफोर्ड में तथा नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अर्थशास्त्र पढ़ा चुके हैं। कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं, जिसमें कृषि लागत और मूल्य आयोग का अध्यक्ष पद भी शामिल है।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान सेन 2004 से 2014 तक योजना आयोग के सदस्य रहे।
सेन को 2010 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। 2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सत्ता में आने पर, उसने सेन को ‘‘दीर्घकालिक अनाज नीति’’ बनाने के वास्ते एक उच्च स्तरीय कार्यबल के प्रमुख का पद सौंपा। सेन गेंहू और चावल के लिए सार्वभौमिक जन वितरण प्रणाली के घोर समर्थक थे।
उनका तर्क था कि खाद्य पदार्थों पर दी जाने वाली रियायतों से राजकोष पर पड़ने वाले बोझ को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जाता है, जबकि देश के पास न सिर्फ सार्वभौमिक जन वितरण प्रणाली को सहयोग देने के लिए बल्कि किसानों को उनके उत्पाद के उचित मूल्य की गारंटी देने के लिए भी पर्याप्त वित्तीय संभावनाएं हैं।
सेन संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), एशियाई विकास बैंक, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन, कृषि विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय कोष और ओईसीडी विकास केंद्र जैसे अनेक वैश्विक अनुसंधान एवं बहुपक्षीय संगठनों से भी जुड़े रहे।
उनके भाई प्रणब सेन ने बताया कि अभिजीत सेन पिछले कुछ वर्षों से श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे, जो कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान और बढ़ गई। उनके परिवार में पत्नी जयती घोष और बेटी जाह्नवी है। सेन की पत्नी भी जानी मानी अर्थशास्त्री हैं।
अंबानी ने पुत्री ईशा को बताया रिलायंस के खुदरा कारोबार का प्रमुख
मुंबई । रिलायंस समूह के प्रमुख मुकेश अंबानी द्वारा सोमवार को अपनी पुत्री ईशा का परिचय समूह के खुदरा कारोबार के मुखिया के तौर पर कराए जाने के साथ ही उत्तराधिकार योजना के पुख्ता संकेत मिल गए हैं।
अंबानी इसके पहले अपने बेटे आकाश को समूह की दूरसंचार इकाई रिलायंस जियो का चेयरमैन नामित कर चुके हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) की 45वीं सालाना आमसभा (एजीएम) में अंबानी ने ईशा का परिचय खुदरा कारोबार के अगुवा के तौर पर कराया। उन्होंने ईशा को खुदरा कारोबार के बारे में बोलने के लिए बुलाते समय इसका मुखिया बताया।
ईशा ने व्हॉट्सएप का इस्तेमाल कर ऑनलाइन किराना ऑर्डर करने और ऑनलाइन भुगतान करने से संबंधित एक प्रस्तुति भी दी। 65 वर्षीय मुकेश अंबानी की तीन संतानें हैं। ईशा और आकाश दोनों जुड़वां भाई-बहन हैं जबकि सबसे छोटे अनंत हैं। ईशा की शादी पीरामल समूह के आनंद पीरामल से हुई है।
रिलायंस समूह के मुख्यतः तीन व्यवसाय हैं जो तेल शोधन एवं पेट्रो-रसायन, खुदरा कारोबार और डिजिटल कारोबार (दूरसंचार शामिल) हैं। इनमें से खुदरा और डिजिटल कारोबार पूर्ण-स्वामित्व वाली इकाइयों के अधीन हैं वहीं तेल-से-रसायन या ओ2सीकारोबार रिलायंस के तहत आता है। नवीन ऊर्जा कारोबार भी मूल कंपनी का ही हिस्सा है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि मुकेश अंबानी अपने छोटे बेटे अनंत को तेल एवं ऊर्जा कारोबार का जिम्मा सौंप सकते हैं।
स्वच्छ, किफायती पानी लाभ कमाने वाली निजी कंपनियों के हाथों में क्यों नहीं होना चाहिए : शोध
लंदन । इंग्लैंड की जल कंपनियां इस गर्मी में भारी आलोचना का शिकार हुई हैं। जुलाई में पड़ी भारी गर्मी के कारण कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति घोषित कर दी है, जबकि रिसाव के कारण हर दिन 3 अरब लीटर पानी बर्बाद हो जाता है।
यह कंपनियां उनके द्वारा किए जाने वाले प्रदूषण के कारण आलोचना के घेरे में आ गई हैं। इंग्लैंड की केवल 14% नदियाँ पारिस्थितिक स्थिति के लिहाज से‘‘अच्छी’’ होने के मानदंड को पूरा करती हैं। नदियों और समुद्रों में सीवेज का बढ़ना एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा है, पर्यावरण एजेंसी ने सबसे गंभीर घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों के लिए जेल की सजा का आह्वान किया है।
इस बीच इन कंपनियों के शेयरधारकों और निवेशकों को भरपूर लाभ हुआ है। 2021 से पहले के 12 वर्षों में, इंग्लैंड की नौ जल और सीवरेज कंपनियों ने लाभांश के रूप में प्रति वर्ष औसतन £1.6 अरब पाउंड का भुगतान किया। निदेशकों का वेतन भी बढ़ गया है। टेम्स वाटर की नयी सीईओ को 2020 में कंपनी में शामिल होने पर £31 लाख पाउंड का ‘‘गोल्डन हैलो’’ मिला।
हमारा नवीनतम शोध इस बात की जांच करता है कि निजी इक्विटी निवेशक इंग्लैंड की जल कंपनियों के स्वामित्व पर हावी हो गए हैं – और वे सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनियों की तुलना में काफी कम पारदर्शिता के साथ कैसे काम करते हैं और लाभ निकालने के लिए अधिक आक्रामक दृष्टिकोण रखते हैं।
लाभांश के ये उच्च स्तर, निदेशकों को वेतन (और ऋण वित्त, जो कुछ कंपनियों को ब्याज दरों में वृद्धि के रूप में तेजी से डांवाडोल कर सकता है) का भुगतान जल उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है। इनमें से कई ग्राहकों को भुगतान करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है और यह रकम उनके संकटपूर्ण जीवन यापन को और भी अधिक तनाव में डाल देती है।
कुल मिलाकर, इंग्लैंड की जल प्रणाली सामान्य घरों के माध्यम से काम करती है, जो उनके द्वारा की जाने वाली पानी की खपत के बदले में मिलने वाली राशि को बड़े पैमाने पर अज्ञात शेयरधारकों को जटिल कॉर्पोरेट संरचनाओं के माध्यम से उदार रिटर्न का वित्तपोषण करते हैं।
तो इस सब में विनियमन को क्या हो गया है? हमारे पेपर में, हम तर्क देते हैं कि नियामक प्रक्रिया – जिसमें इंग्लैंड में गुणवत्ता, पर्यावरणीय प्रभाव और कीमतों के लिए जिम्मेदार तीन अलग-अलग एजेंसियां – निवेशकों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण के हितों के बीच उचित संतुलन कायम करने में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करती हैं।
लाभ से प्रेरित जल कंपनियों को व्यापक सामाजिक हित में काम करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाने की आवश्यकता है। उन्हें ग्राहकों से जो राशि वसूल करने की इजाजत दी गई है वह भविष्य की लागतों के अनुमानों और पानी की गुणवत्ता, प्रदूषण की घटनाओं, रिसाव और खपत से संबंधित कुछ लक्ष्यों को प्राप्त करने पर आधारित हैं।
इसके परिणाम कुछ अजीब हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, सरकार चाहती है कि 2050 तक पानी की खपत लगभग 140 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन से गिरकर 110 लीटर हो जाए। अगर ऐसा होता है, तो पानी कंपनियां कीमतों में वृद्धि करने में सक्षम होंगी। मतलब यह कि हम अपने उपभोग में कमी करके उन्हें अधिक भुगतान भी करेंगे।
किसी अन्य देश ने इंग्लैंड के उदाहरण का अनुसरण नहीं किया है, और अन्य देशों में पानी बड़े पैमाने पर सार्वजनिक क्षेत्र में है। 25 साल के निजी नियंत्रण के बाद पेरिस ने 2010 में अपना पानी वापस सार्वजनिक स्वामित्व में ले लिया। एक साल बाद, सार्वजनिक प्रबंधन के कारण बचत के परिणामस्वरूप पानी की कीमत में 8% की कटौती की गई।
सार्वजनिक स्वामित्व पर स्विच करना आसान नहीं है, लेकिन एक हालिया अध्ययन से पता चलता है कि यह यूरोप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इससे न केवल पानी सस्ता होगा, बल्कि लंबे समय में, मुनाफे के पुनर्निवेश के साथ लागत में कमी की संभावना है, और सार्वजनिक स्वामित्व से अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए।
मौजूदा व्यवस्था काम नहीं कर रही है। सीधे शब्दों में कहें, तो पानी से जुड़े सार्वजनिक हित को पूरा करने के दौरान निजी कंपनियों को लाभ प्रोत्साहन देना असंभव है। चरम मौसम की घटनाओं का बढ़ना तय लग रहा है और ऐसे में पानी को सार्वजनिक स्वामित्व में होना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निजी मुनाफे पर सामाजिक और पर्यावरणीय परिणामों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
निजी क्षेत्र की दक्षता में एक वैचारिक विश्वास के साथ इंग्लैंड के पानी का निजीकरण किया गया था। लेकिन 33 वर्षों के बाद, निजी स्वामित्व प्रयोग विफल हो गया है।
अब स्कूलों में भी ‘वर्चुअल लैब’ से होगी पढ़ाई
नयी दिल्ली । राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के तहत अब स्कूलों में भी ‘वर्चुअल लैब’ से पढ़ाई की सुविधा होगी। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत देश के 750 स्कूलों में विज्ञान एवं गणित विषय से संबंधित ‘वर्चुअल लैब’ और 75 कौशल ई-लैब स्थापित किए जाएंगे।
शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘भाषा’ से कहा, ‘‘बच्चों में तर्कसंगत सोच की क्षमता विकसित करने एवं रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2022-23 के दौरान गणित एवं विज्ञान में 750 वर्चुअल लैब तथा अनुकरणीय पठन-पाठन का माहौल बनाने के उद्देश्य से 75 कौशल ई-लैब स्थापित करने की योजना बनाई गई है।’’
केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश मासिक रिपोर्ट के ताजा नोट के मुताबिक, इस कार्यक्रम के तहत अब तक 200 वर्चुअल लैब स्थापित हुए हैं।
इसके तहत कक्षा नौ से 12 तक के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित और जीवविज्ञान विषय में दीक्षा पोर्टल पर वर्चुअल लैब की रूपरेखा रखी गई है।
अधिकारी के अनुसार, वर्चुअल लैब कार्यक्रम से मध्य स्कूल स्तर और माध्यमिक स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षक प्रशिक्षकों को फायदा होगा। इससे देश में करीब 10 लाख शिक्षक और 10 करोड़ छात्रों के लाभान्वित होने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि अब तक विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में ही ‘वर्चुअल लैब’ स्थापित किए गए हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान समेत देश की कुछ शीर्ष शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से एक ऐसे आभासी संसार का सृजन किया गया है, जहां वर्चुअल लैब के जरिए छात्र विज्ञान संबंधी प्रयोग एवं नवाचार कर सकते हैं। मसलन, अगर किसी छात्र को वर्चुअल लैब के माध्यम से सर्किट तैयार करना हो तो इस वर्चुअल लैब में संबंधित विषय पर सभी उपकरण उपलब्ध हैं। उपयुक्त मात्रक वाले प्रतिरोध का उल्लेख कर छात्र सर्किट बना सकते हैं और वास्तविक आंकड़ा प्राप्त कर सकते हैं।
अधिकारी के मुताबिक, इसी प्रकार अब स्कूलों में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पाठ्यक्रम की बुनियादी जानकारी देने के बाद वर्चुअल लैब के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसमें कृत्रिम बुद्धिमता का उपयोग करके बच्चे आभासी वातावरण में अंतरिक्ष, पर्यावरण, गुरुत्वाकर्षण सहित भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान एवं गणित से जुड़े जटिल विषयों को समझ सकेंगे तथा वे रटने के स्थान पर सोच -समझकर लिखेंगे। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय ने स्थानीय कला को प्रोत्साहित करने एवं समर्थन देने के लिए देश के 750 स्कूलों में ‘कलाशाला’ कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना बनाई है।
अधिकारी ने बताया कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य स्कूली छात्रों को देश की विभिन्न लोक कलाओं के बारे जानकारी देना तथा उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जानकारी जुटाने में मदद करना है। उन्होंने कहा कि कलाशाला कार्यक्रम के तहत विभिन्न कलाकार स्कूलों में जाएंगे और लोक कलाओं के बारे में छात्रों को जानकारी देंगे।
शिक्षकों के मनोविज्ञान और उनकी मनोदशा को समझा जाए
सितम्बर का महीना शिक्षकों और हिन्दी के नाम रहता है। आज शिक्षक दिवस है और तरह – तरह के आयोजन हो रहे हैं। 5 सितम्बर ऐसा दिन है जब शिक्षकों की बात की जाती है, उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। कहने की जरूरत नहीं है कि विद्यार्थी इस दिन को बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं मगर सवाल यह भी है कि शिक्षकों को समझने की जरूरत तो बनी हुई है और शिक्षक समझें, यह भी जरूरी है। आज के शिक्षक नागार्जुन के शिक्षक की तरह नहीं हैं, वह शिक्षक जो भुखमरी का शिकार हो गया। ऐसा नहीं है कि यह स्थिति अभी तक मिट गयी है मगर यह तो सच है कि शिक्षकों की जीवन शैली में सुधार आया है। परिवर्तन की यह गंगा अभी जमीनी स्तर पर नहीं पहुँची और शिक्षण भी एक सुनिश्चित सेटल जीवन की आकांक्षा पूरा करने वाला कार्यक्षेत्र ही अधिक रह गया है। विषमता तो हर ओर है और सत्य यह है कि शहर के शिक्षक गांवों में पढ़ाना नहीं चाहते और गांव के शिक्षक गांव में रहना नहीं चाहते। जो उच्च शिक्षा प्राप्त शिक्षक हैं, उनको स्कूलों में पढ़ाना अपनी शिक्षा की बर्बादी लगता है और वह हीनता बोध से ग्रस्त हैं। वस्तुतः शिक्षकों पर बढ़ते कार्यभार के बीच विद्यार्थियों के प्रति उनकी सोच को समझने की जरूरत है। तकनीक और किताबों के बीच संतुलन साधने की जरूरत है। जरूरी है कि शिक्षकों के मनोविज्ञान और उनकी मनोदशा को समझा जाए और उसके अनुरूप ही नीतियाँ बनायी जाएं। इससे भी ज्यादा जरूरी है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था का आधार आंकड़ों पर नहीं जमीनी सच्चाई पर टिका हो तभी शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
जयशंकर प्रसाद केन्द्रित काव्य – आवृत्ति एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित
कोलकाता। श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय एवं सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के संयुक्त तत्वावधान में जयशंकर प्रसाद केंद्रित काव्य-आवृत्ति एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गयी। इस साहित्यिक प्रतियोगिताओं में कॉलेज एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। काव्य -आवृत्ति प्रतियोगिता में 35 से अधिक प्रतिभागियों ने जयशंकर प्रसाद की कविताओं की शानदार प्रस्तुति की। दूसरी तरफ प्रसाद साहित्य पर केन्द्रित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भी 17 कॉलेज और विश्वविद्यालय की टीमों ने भाग लिया। काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सेंट पॉल कैथेड्रल मिशन कॉलेज ने बाजी मारते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता में इस कॉलेज के विवेक तिवारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान पर कलकत्ता विश्वविद्यालय की कीर्तिका सुरोलिया एवं तृतीय स्थान पर सेठ आनन्दराम जयपुरिया कॉलेज मॉर्निंग की मुस्कान गिरि रही। सेठ सूरजमल जालान गर्ल्स कॉलेज की महिमा भगत एवं कांचरापाड़ा कॉलेज की शीतल कुमारी को प्रोत्साहन पुरस्कार मिला। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीम में विवेक तिवारी, पवन कुमार गोस्वामी एवं विवेक कुमार चौधरी थे। द्वितीय स्थान पर रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय की श्वेता यादव, प्रियंका प्रजापति एवं सरोज चौहान रहीं। तृतीय स्थान पर प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय की स्मृति सिंह, सौरभ कुमार सिंह एवं दीपक पासवान की टीम रही। प्रोत्साहन पुरस्कार ऋषि बंकिमचंद्र कॉलेज को मिला। इस टीम में सुताबी कोइरी, स्वप्ना कुमारी ठाकुर एवं राहुल साव रहे। काव्य-आवृत्ति के निर्णायकों में डॉ. सत्यप्रकाश तिवारी, डॉ. काजू कुमारी साव एवं डॉ. रीना कुमारी रहे। प्रश्नोत्तरी के निर्णायकों में डॉ. हृषिकेश कुमार सिंह, डॉ. अजीत तिवारी एवं डॉ. पीयूष द्विवेदी रहे।
समारोह की अध्यक्षता कुमारसभा पुस्तकालय के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि प्रो. लोढ़ा ने अपनी वाग्मिता से कलकत्ता के साहित्यिक क्षेत्र को नई दिशा दी थी, ऐसे प्रणम्य विभूति को याद करना अपनी परंपरा को प्रणाम करना है। विशिष्ट अतिथि मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश तिवारी ने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों में साहित्यिक चेतना का प्रसार करते है। कुमारसभा पुस्तकालय के अध्यक्ष महावीर बजाज ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को साहित्यकारों की रचनाओं से जोड़ने में सहायक होगा। जालान पुस्तकालय की मंत्री दुर्गा व्यास ने कहा कि काव्य आवृत्ति से व्यक्तित्व का विकास होता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मारवाड़ी विद्यालय की छात्राओं की प्रस्तुति अरुण यह मधुमय देश हमारा से हुआ।
दो सत्र में चले इस कार्यक्रम के प्रथम सत्र काव्य आवृत्ति का कुशल संयोजन एवं संचालन डॉ. कमल कुमार एवं दिव्या प्रसाद ने किया। द्वितीय सत्र प्रश्नोत्तरी का संचालन परमजीत कुमार, पूजा प्रसाद, मनीषा गुप्ता एवं अरविंद तिवारी ने किया।
धन्यवाद ज्ञापित करते हुए जालान पुस्तकालय के अध्यक्ष भरत कुमार जालान ने भविष्य में इस तरह के और आयोजन करने के प्रति प्रतिबद्धता जतायी।
इस समारोह में डॉ. वसुमति डागा, सागरमल गुप्त, अरुण मल्लावत, अनिल ओझा नीरद, रामपुकार सिंह, डॉ. रामप्रवेश रजक, डॉ श्रीपर्णा तरफदार, डॉ बृजेश सिंह, डॉ स्वाति शर्मा, दीक्षा गुप्ता, यवनिका तिवारी, रमाकांत सिंह, नेहा जायसवाल, कंचन रजक उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यक्रम के संयोजक श्रीमोहन तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
द हेरिटेज अकादमी में आयोजित हुआ कर्न्वजेंस 2022
कोलकाता । द हेरिटेज अकादमी का इंडक्शन एवं ओरिएंटेशन प्रोग्राम कर्न्वजेंस 2022 हाल ही में आयोजित हुआ। गत 2 सितम्बर को आयोजित इस समारोह को मुख्य अतिथि रामकृष्ण मिशन रेसिडेंशियल कॉलेज के प्रिंसिपल स्वामी एकचित्तानंद एवं विशिष्ट अतिथि रीतम कम्यूनिकेशन की सीईओ रीता भिमानी ने सम्बोधित किया। उद्घाटन भाषण में रीता भिमानी ने सम्पर्क, संयोग और सृजन को विद्यार्थियों के लिए आवश्यक बताया। स्वामी एकचित्तानंद ने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को साथ रहने, मिलकर रहने, अनेकता में एकता और निःस्वार्थ रहने का महत्व समझाया और नकारात्मकता से दूर रहने को कहा। समारोह में द हेरिटेज अकादमी के प्रिंसिपल प्रो, गौर बनर्जी, मीडिया साइंस विभाग की डीन डॉ. मधुपा बक्सी, हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रिंसिपल प्रो. बासव चौधरी, हेरिटेज बिजनेस स्कूल के निदेशक प्रो. के. के. चौधरी समेत कई शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।
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द हेरिटेज कॉलेज,कोलकाता में कनेक्शंस 2022
कोलकाता । द हेरिटेज कॉलेज, कोलकाता का इंडक्शन एवं ओरिएंटेशन प्रोग्राम कनेक्शंस 2022 गत 31 अगस्त को आयोजित हुआ। इस अवसर पर आईसीएआई की पूर्वी भारत की क्षेत्रीय परिषद के पूर्व चेयरमैन एवं आईसीएआई की केन्द्रीय परिषद के सदस्य सीए रंजीत अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने मल्टीटास्किंग होने पर जोर दिया और कहा कि विद्यार्थियों में लगन और उद्देश्य के साथ दृढ़ता का होना जरूरी है।
उद्घाटन भाषण विशिष्ट अतिथि ब्रिटिश काउंसिल के निदेशक (पूर्व एवं उत्तर – पूर्व भारत) देवांजन चक्रवर्ती ने कहा कि एक अच्छा पेशेवर बनने के लिए जिज्ञासु, साझेदारी और करुणा का होना जरूरी है। कार्यक्रम में द हेरिटेज कॉलेज के टीचर इन्चार्ज अमिताभ घोष, इकोनॉमिक्स विभागाध्यक्ष देवाशीष मजुमदार, एचआईटीके के प्रिंसिपल प्रो, बासव चौधरी समेत अन्य अतिथि उपस्थित थे। हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ पी.के. अग्रवाल ने कहा कि कम समय में ही संस्थान ने अपनी उपस्थिति उत्कृष्ट संस्थानों में दर्ज करवा ली है और यह प्रसन्नता की बात है।
एमसीसीआई में भारत – चीन व्यापार पर चर्चा
कोलकाता । मर्चेन्ट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एमसीसीआई) द्वारा हाल ही में भारत एवं चीन के व्यापारिक सम्बन्धों पर एक परिचयात्मक सत्र आयोजित किया गया। चीन के इकोनॉमिक एवं कर्मशियल कौंसुल झांग होंग्जी इस अवसर पर उपस्थित थे। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि भारत – चीन का व्यापार 2021 में 125.6 बिलियन डॉलर का रहा और इसमें 42.3 प्रतिशत की वृद्धि रही। उन्होंने चीनी उत्पादों की गुणवत्ता को सराहते हुए वर्तमान समय को भारत के विकास का सर्वश्रेष्ठ दौर बताया। उन्होंने पड़ोसी देशों से व्यापारिक सम्बन्ध मजबूत करने का परामर्श दिया। एमसीसीआई के अध्यक्ष ऋषभ कोठारी ने अपने स्वागत भाषण में पश्चिम बंगाल में चीन की साझेदारी में चल रहे दुर्गापुर की एरोट्रोपिलस परियोजना की चर्चा की। धन्यवाद एमसीसीआई के उपाध्यक्ष नमित बाजोरिया ने दिया।
एमसीसीआई में स्टार्टअप और उद्यमिता के मनोविज्ञान पर परिचर्चा
कोलकाता । एमसीसीआई में स्टार्टअप और उद्यमिता के मनोविज्ञान पर परिचर्चा आयोजित की गयी। परिचर्चा को ओलम इंटरनेशनल लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक एवं सीएचआरओ जयदीप बोस ने कहा कि उद्यमी के पास दूरदृष्टि, प्रेरणा, रणनीतिक विचार और रणनीति का क्रियान्वयन होना चाहिए। काफी हद तक, उद्यमी के लिए मूल्य महत्वपूर्ण हैं और व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र के साथ मूल्यों पर विचार किया जाना चाहिए।
इंस्टीट्यूट ऑफ साइक्रेटरी के आरएमओ एवं क्लिनिकल ट्यूटर वरिष्ठ मनोचिकित्सक सुबीर हाजरा चौधरी ने कहा कि व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र में एक आदर्श बदलाव आया है। उद्यमिता को उद्यम पूंजी पारिस्थितिकी तंत्र में स्थानांतरित कर दिया गया है।
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बासव दासगुप्ता ने सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों नए उद्यम के लिए बहुत से सुविधाजनक व्यावसायिक समर्थन के साथ आए हैं। एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल, ई-कॉमर्स आदि जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने के बड़े अवसर हैं। नए उद्यमी को संरचनात्मक के अलावा असंरचित गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। व्यवसाय में मूल्य उद्यमी के लिए सफलता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
एमसीसीआई की स्टार्टअप एवं स्किल डेवलपमेंट काउंसिल के अध्यक्ष स्मरजीत मित्रा ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि एमसीसीआई स्टार्ट अप कम्युनिटी और भावी उद्यमियों को मेंटरिंग और हैंड होल्डिंग सेवाओं का विस्तार करने के लिए जल्द ही एमसीसीआई स्टार्ट अप हेल्प डेस्क के साथ आएगा।
शिक्षक दिवस पर विशेष : डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को प्रणाम
आज, 5 सितंबर 2022 को पूरा देश शिक्षक दिवस मना रहा है। हर साल पूरे भारत में शिक्षकों, शोधकर्ताओं और प्रोफेसरों सहित शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्यों को पहचानने और देश व समाज के विकास में उनके योगदान को उजागर करने के लिए हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। शिक्षक दिवस डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती है। 5 सितंबर, 1888 को जन्मे डॉ राधाकृष्णन भारत के पहले उपराष्ट्रपति और भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे। डॉ. राधाकृष्णन एक शिक्षक, दार्शनिक और विद्वान के रूप में अपने उल्लेखनीय कार्यों के लिए जाने जाते हैं। शिक्षा और छात्रों के प्रति डॉ राधाकृष्णन के उल्लेखनीय योगदान का सम्मान करने के लिए 1962 से, 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। आइए उनके जीवन से जुड़ी रोचक बाते जानतें हैं:-
- डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुत्तानी शहर में एक तेलुगु परिवार में हुआ था। इस परिवार की आर्थिक पृष्ठभूमि कमजोर थी। डॉ. राधाकृष्णन विरले छात्रों में से एक थे और उन्हें जीवन भर कई छात्रवृत्तियां प्राप्त कीं। उन्होंने तिरुपति के स्कूलों में पढ़ाई की और फिर वेल्लोर चले गए।
- डॉ. राधाकृष्णन को भारत के इतिहास में अब तक के सबसे महान दार्शनिकों में से एक माना जाता है। उनके कुछ उल्लेखनीय कार्यों में समकालीन दर्शन में धर्म का शासन, रवींद्रनाथ टैगोर का दर्शन, जीवन का हिंदू दृष्टिकोण, कल्कि या सभ्यता का भविष्य, जीवन का एक आदर्शवादी दृष्टिकोण, हमें जिस धर्म की आवश्यकता है, भारत और चीन और गौतम बुद्ध शामिल हैं।
- डॉ राधाकृष्णन क्रिश्चियन कॉलेज, मद्रास में दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया। उन्होंने अपनी डिग्री पूरी करने के बाद, वे मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर और बाद में मैसूर विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर बन गए। वे 1939 से 1948 तक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चांसलर भी रहे।
- डॉ राधाकृष्णन अपने छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय थे। जब उन्हें मैसूर विश्वविद्यालय भेजा रहा था, उस समय उनके एक छात्र ने व्यवस्था की और रेलवे स्टेशन पर एक फूलों से सजी गाड़ी उनके लिए भेजी।
- डॉ राधाकृष्णन ने 1952 से 1962 तक भारत के पहले उपराष्ट्रपति और 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। वह 1949 से 1952 तक सोवियत संघ में भारत के राजदूत भी रहे। डॉ राधाकृष्णन ने चौथे उप-राष्ट्रपति के रूप में भी कार्य किया। वर्ष 1984 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।




