कोलकाता । शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में शी की ओर से शिक्षकों को सम्मानित किया गया। गत 3 सितंबर को श्री शिक्षायतन परिसर में भुवलका हॉल में शिक्षायतन फाउंडेशन, मीनू साड़ी द्वारा संचालित और धनवंतरी द्वारा सह-संचालित इस कार्यक्रम में कई शैक्षणिक पेशेवरों, शिक्षकों, संस्थागत प्रमुखों, प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, उद्यमियों, फैशन जगत के लोगों ने भाग लिया। शी की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम का यह दूसरा वर्ष था।
शी की संस्थापक शगुफ्ता हनाफी ने कहा, “शिक्षक छात्रों के लिए मार्गदर्शक शक्ति हैं, जो उन्हें अच्छा मनुष्य एवं समाज के लिए मूल्यवान सदस्य बनाते हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय स्वर्गीय जुनैद आलम, रक्षिता जबीन और मीना खातून को देते हुए कहा कि टीचर्स एक्सीलेंस अवार्ड मेरे शिक्षकों और उन सभी शिक्षकों के लिए मेरी गुरु दक्षिणा है, जो अपने विद्यार्थियों में विश्वास करते हैं।
शिक्षायतन फाउंडेशन की महासचिव ब्रतती भट्टाचार्य ने कहा, ‘ कोविड के कारण शिक्षा में परिवर्तन आया है। शिक्षा और तकनीक का मेल समय की जरूरत है। शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करने के लिए द्वितीय शिक्षक उत्कृष्टता पुरस्कार’ इस दिशा में एक ऐसा ही कदम है। इसका उद्देश्य राज्य के कुछ सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के विशिष्ट योगदान को पहचानना और उनका सम्मान करना है। विजेताओं को कल पुरस्कार शाम को ज्ञान सेनानियों के रूप में याद किया गया है।
समारोह में प्राथमिक, मिडिल, सेकेंडरी, सीनियर सेकेंडरी स्तर के 16 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इनमें से 4 मानद पुरस्कार थे जबकि शेष शिक्षकों का चुनाव नामांकन के आधार पर किया गया। निर्णायकों में श्री शिक्षायतन फाउंडेशन की महासचिव ब्रतती भट्टाचार्य, बी डी मेमोरियल की निदेशक सुमन सूद, सेंट जेवियर्स स्कूल की वरिष्ठ शिक्षिका जयता बसु, बेस्ट फ्रेंड्ज की 2022-2023 की चेयरपर्सन पायल वर्मा एवं वैश्विक कलाकार ओंकार दर्दाकर।
सम्मानित होने वालों में प्रदीप चोपड़ा (आयरन मैन ऑफ द इयर), इमरान जाकी (आईकॉन एडुप्रेनियर), मामून अख्तर (एडुकेशन हीरो अवार्ढ), एस.के. सिंह (एक्सिलेंस इन स्कूल लीडरशिप), आरवीन अहमद (उर्दू के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड), सीमा बाहरी (विशेष जरूरतमंदों के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान), अपाला दत्ता (प्रिंसिपल ऑफ द इयर), यश अग्रवाल (फिट एंड वेलनेस कोच ऑफ द इयर), जोसफ चाको (बियॉन्ड इकोनॉमिक्स), राजकुमारी सहारिया (वेलबिंग कोच), वसीम अहमद खान (उत्कृष्ट संगीत शिक्षक), सुधा जायसवाल (पर्य़ावरण शिक्षा के क्षेत्र में इनोवेशन), सुतपा दत्ता दासगुप्ता (टीचर ऑफ द इयर), पत्राली बनर्जी (मेकअप प्रशिक्षण में उत्कृष्टता), नीशत तबस्सुम (उत्कृष्ट बेकिंग उद्यमी), गजाला यास्मीन (उत्कृष्ट मीडिया प्रबंधन)
समारोह में विशेष अतिथि के रूप में धन्वन्तरि के निदेशक राजेंद्र खंडेलवाल,अभिनेता सुप्रतिम रॉय, शिक्षाविद् इंद्राणी गांगुली, अभिनेत्री पापिया अधिकारी, टेक्नो इंडिया के निदेशक प्रो. डॉ सुजय विश्वास, ओडिशी नृत्यांगना संचिता भट्टाचार्य, साउथ सिटी इंटरनेशनल के प्रिंसिपल जॉन बगुल समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
शी ने प्रदान किये टीचर्स एक्सिलेंस अवार्ड्स
कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रो. कल्याणमल लोढ़ा शताब्दी व्याख्यान
कोलकाता । कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में गत 2 सितम्बर को प्रो. कल्याणमल लोढ़ा शताब्दी व्याख्यान का आयोजन किया गया । इस अवसर पर लखनऊ से पधारे विशिष्ट विद्वान प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने यह शताब्दी व्याख्यान दिया ।उनके व्याख्यान का विषय था – “हिंदी का निजी काव्यशास्त्र” । कार्यक्रम का प्रारम्भ करते हुए विभागीय अध्यक्ष प्रो. राजश्री शुक्ला ने स्वागत भाषण करते हुए प्रो कल्याणमल लोढ़ा के अवदानों का उल्लेख किया । उन्होंने हिन्दी में सर्वप्रथम पी एच डी करने वाले डॉ.नलिनी मोहन सान्याल जी की चर्चा भी की ।28 सितम्बर 1921 में जन्में लोढ़ा जी छायावाद के विशेषज्ञ थे और कक्षा में कामायनी पढ़ाते थे । विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग की गरिमा को बढ़ाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था ।
प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने अपने वक्तव्य का प्रारम्भ करते हुए आचार्य ललिता प्रसाद सुकुल , आचार्य विष्णु कांत शास्त्री को नमन किया जिनसे वो अतीत में यहाँ जुड़े थे । हिन्दी के निजी काव्यशास्त्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दी के अपने काव्यशास्त्र को स्थापित करने की ज़रूरत है। हिन्दी भाषा के विकास की अपनी परिस्थिति और शैली के अनुरूप साहित्य शास्त्रीय विवेचन हिन्दी साहित्यकारों ने किया है । आचार्य रामचंद्र शुक्ल , जयशंकर प्रसाद जैसे साहित्यकारों ने इन विषयों पर मौलिक विचार व्यक्त किए हैं । उन्होंने कहा कि कविता रचना के लिए हृदय को सिंधु की तरह विस्तृत, अनंत, बुद्धि को ग्रहणशील होना होगा ।इसके बिना कविता रची नहीं जा सकती। शब्द से ही रस, छंद, करुणा, भाव आदि उत्पन्न होते हैं । प्रो दीक्षित ने कहा कि हिन्दी साहित्य के काल में काव्य हेतु ,काव्य प्रयोजन , काव्य लक्षण , काव्य के रूप इत्यादि सभी बदल गए हैं , अतः संस्कृत काव्यशास्त्र और पाश्चात्य काव्यशास्त्र के मानदंडों से इतर हिन्दी के निजी काव्यशास्त्र की चर्चा होनी चाहिए ।इस अवसर पर प्रो रामप्रवेश रजक , प्रो बिजय कुमार साव उपस्थित थे। बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं शोधार्थी इस व्याख्यान से लाभान्वित हुए ।अंत में प्रो बिजय कुमार साव ने विद्यार्थियों में मौलिक चिंतन को उत्पन्न करने वाले व्याख्यान के लिए प्रो सूर्य प्रसाद दीक्षित जी के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया ।
इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी का 50वां राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न
कोलकाता । इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी (आईसीएसआई) की तरफ से कोलकाता में कंपनी सचिवों के लिए 50वें राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर से 1100 से अधिक प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए, जबकि 4,500 सदस्य वर्चुअली इस सम्मेलन का हिस्सा बने। इस वर्ष के सम्मेलन का थीम ‘कंपनी सेक्रेटरी: ए विश्वगुरु इन गवर्नेंस एंड सस्टेनेबिलिटी’ रखा गया था। इसमें वातावरण की बदलती गतिशीलता के जवाब में कंपनी सचिवों (सीएस) की नई भूमिका और जिम्मेदारी के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी।
सम्मेलन के दूसरे सत्र का विषय था “सीएस: फोस्टरिंग गवर्नेंस एंड कॉरपोरेट एक्सीलेंस इन इंडिया इंक” आईसीएसआई की ओर से आयोजित 50वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन पैनलिस्ट में सीएस (डॉ.) ममता बिनानी (पूर्व अध्यक्ष आईसीएसआई), सीएस बी मुरली (जनरल काउंसल और कंपनी सचिव नेस्ले इंडिया लिमिटेड), सीएस एम ई वी सेल्वम (पूर्व कंपनी सचिव और अनुपालन अधिकारी ओएनजीसी लिमिटेड) की मौजूदगी में सत्र का संचालन किया गया। इस मौके पर सीएस विनीत के चौधरी (परिषद सदस्य, आईसीएसआई) और सीएस देवेंद्र देशपांडे (अध्यक्ष,आईसीएसआई) ने इस सत्र में गौरवमयी उपस्थिति दर्ज करायी।
इस अवसर पर सीएस डॉक्टर ममता बिनानी (पूर्व अध्यक्ष आईसीएसआई) ने कहा, शासन और स्थिरता किसी भी कॉर्पोरेट कल्चर के वास्तविक मूल्य को अनलॉक करने और इसका उजागर करने की मूल कुंजी होती है। यह समय दुनिया के बदलते कल्चर को देखने का है। द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया के 50वें राष्ट्रीय अधिवेशन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम के लिए मेरी ओर से संस्था के सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई और इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम के लिए कलकत्ता शहर को चुनने के लिए दिल से सभी का आभार प्रकट करती हूं।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुझे जीएसटी पर एक पुस्तक और वित्तीय संपत्तियों और प्रतिभूतियों के मूल्यांकन पर एक सर्टिफिकेट कोर्स का शुभारंभ करते हुए सम्मानित किया गया। इस सम्मेलन में एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। आईसीएसआई अपने सदस्यों से व्यावहारिक इनपुट के साथ-साथ अनुसंधान का एक पावर हाउस होने के कारण सफलतापूर्वक ऐसी सामग्री लॉन्च कर रहा है, जो इस संस्थान से जुड़े सभी सदस्यों के पढ़ने लायक है।
भारतीय भाषा परिषद ने शिक्षकों को दिया ‘शिक्षा सम्मान’
कोलकाता । पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जयंती और शिक्षक दिवस के अवसर पर भारतीय भाषा परिषद ने आज राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के चार, कालेजों के नौ और विद्यालयों के सात शिक्षक-शिक्षिकाओं को ‘हिंदी शिक्षा सम्मान से पुरस्कृत किया| इस अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और विद्वान डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा कि आज हाशिए पर आ चुके साहित्य को पुनर्जीवित किया जाए| साहित्य का प्रयोजन उद्दात्तीकरण है| इन्होंने साहित्य के उद्गम, प्रभाव और विस्तार पर चर्चा की| कहा कि साहित्य मनुष्यता की भलाई की बात करता है|
स्वागत भाषण देते हुए परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप चोपड़ा ने कहा कि हिंदी शिक्षा के क्षेत्र को विकसित तकनीक से जितना जल्दी जोड़ा, विद्यालयों का हित होगा|
साहित्य अकादेमी के पूर्वी क्षेत्र के प्रभारी और भारतीय भाषा परिषद के कार्यकारिणी सदस्य मिहिर साहू ने कहा परिषद की तरफ से आज का यह आयोजन एक छोटा सा प्रयास है| आगामी दिनों में केवल हिंदी ही नहीं अन्य विषयों और भाषाओं के शिक्षकों को भी सम्मानित किया जाएगा| आगे कहा कि एक शिक्षक को न केवल पढ़ाना चाहिए बल्कि नैतिक ज्ञान देना भी आवश्यक है|
डॉ. कुसुम खेमानी ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि हमारे शिक्षक देश के बौद्धिक निर्माता हैं| उनको सम्मानित करते हुए भारतीय भाषा परिषद गौरव का बोध कर रहा है|
संचालन करते हुए डॉ.राजश्री शुक्ला ने कहा कि सितंबर का महीना हिंदी साहित्य के लिए एक विशेष महत्व रखता है| इसी महीने में शिक्षक दिवस और हिंदी दिवस का आयोजन होता है| उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा परिषद ने एक शुभ शुरुआत की ही हिंदी शिक्षा सम्मान की|
सम्मान समारोह के अध्यक्ष शिक्षाविद डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि शिक्षा का मुख्य साधन गुणी अध्यापक हैं| समाज को सिद्धावस्था के शिक्षकों की जगह साधनावस्था के शिक्षकों की जरूरत है जो खुद नए ज्ञान से अपने को लगातार संपन्न करते रहें| ‘सा विद्या विमुक्तये’ का अर्थ है कि विद्या व्यक्ति को अहंकार, अशालीनता और विद्वेष से मुक्त करके अंधकार से रोशनी में लाती है| पश्चिम बंगाल में हिंदी शिक्षा का सांस्कृतिक सेतु का काम करना है|
सम्मान समारोह का उद्बोधन केरल की नृत्यांगना डॉ. लक्ष्मी मोहन ने भरतनाट्यम की सुंदर प्रस्तुति से हुआ|
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि परिषद द्वारा हिंदी शिक्षा सम्मान का सिलसिला जारी रहेगा| परिषद द्वारा सम्मानित किए गए शिक्षकों में- प्रो. दामोदर मिश्र : कुलपति, हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा, प्रो. मनीषा झा : प्रोफेसर, हिंदी विभाग, नार्थ बंगाल यूनिवर्सिटी, सिलीगुड़ी, प्रो. तनूजा मजुमदार : प्रोफेसर, हिंदी विभाग, प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय, डॉ. सत्या उपाध्याय : प्रिंसिपल, कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज, कोलकाता, डॉ. गीता दूबे : एसोसिएट प्रोफेसर, स्काटिश चर्च कॉलेज, कोलकाता, डॉ. इतु सिंह : एसोसिएट प्रोफेसर, खिदिरपुर कॉलेज, कोलकाता, डॉ. कुलदीप कौर : एसोसिएट प्रोफेसर, गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज, कोलकाता, डॉ. कमलेश पांडेय : एसोसिएट प्रोफेसर, सेंट पॉल्स कॉलेज, कोलकाता, डॉ. आशुतोष कुमार : एसोसिएट प्रोफेसर, बंगवासी मॉर्निंग कॉलेज, कोलकाता, डॉ. रिंकू घोष : एसोसिएट प्रोफेसर, लेडी ब्रेबार्न कॉलेज, कोलकाता, डॉ. कृष्ण कुमार श्रीवास्तव : एसोसिएट प्रोफेसर, आसनसोल गर्ल्स कॉलेज, आसनसोल, डॉ. सुनीता साव : असिस्टेंट प्रोफेसर, सावित्री गर्ल्स कॉलेज, कोलकाता, डॉ. राजेंद्रनाथ त्रिपाठी : वरिष्ठ अध्यापक, सेंट जेवियर्स स्कूल, पार्क स्ट्रीट, कोलकाता, श्री सुरेश शॉ : वरिष्ठ अध्यापक, ग्रेस लिंग लियांग इंग्लिश स्कूल, कोलकाता, श्री सौमित्र जायसवाल : अध्यापक, द हेरिटेज स्कूल, कोलकाता, श्री उत्तम कुमार ठाकुर : अध्यापक, गवर्नमेंट हाई स्कूल, कलिंपोंग, डॉ. सोनम सिंह : अध्यापिका, हावड़ा शिक्षा सदन फॉर गर्ल्स, हावड़ा, श्री कपिल कुमार झा : अध्यापक, सेंट जोसेफ स्कूल, कोलकाता, डॉ. सुनीता प्रसाद : अध्यापिका, रामाशीष हिंदी हाई स्कूल, बर्दवान
अपने सारे सपने पूरे कर रही हैं आज की बुजुर्ग महिलाएं

आधुनिकता और मोबाइल युग में हमारे समाज की बुजुर्ग महिलाओं ने भी स्वयं को बहुत बदल लिया है। अब वह बुढ़ापे को बहुत ही अच्छे से बिता रही हैं। पूरे उत्साह और आनंद से अपना समय गुजार रही हैं। चाहे गृहिणी हो या रिटार्यड, अब वह बुढ़ापे का रोना नहीं रोती, बल्कि अपने सपने को पूरा करने का अच्छा समय समझ रही हैं। अच्छी जिंदगी जी रही हैं। इसमें इनको बच्चों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। कोलकाता के सॉल्टलेक, न्यूटाउन इलाके में आपको ऐसी बहुत बुजुर्ग महिलाएं दिख जायेंगी जो बहुत खुशी-खुशी अकेले रह रही हैं और अपनी जिंदगी के इस पड़ाव का आनंद ले रही है। उनके बच्चे अलग रहते हुए भी अपनी माँ का पूरा ख्याल रखते हैं। इनके बारे में सुनने और दूर से देखने पर बहुत अजीब सा लगता है। लेकिन जब आप इन महिलाओं से बातचीत करेंगे और उनके इस व्यवस्था में उनको खुश देखेंगे तो आपको यह व्यवस्था अच्छी लगेगी। इस बाबत मैंने बहुत सी बुजुर्ग महिलाओं से बातचीत कीं। उनकी खुशी देख मुझे भी बहुत खुशी हुई। जब मैं न्यूटाऊन में रह रही रीता सामंत से बातचीत की, तो वह बोली मैं खुद को अपनी स्थिति के अनुसार बदल लेती हूँ। एक समय था जब परिवार में बहुत सदस्य थे, घर की जिम्मेदारी थी। मैं पूरी तरह से उसमें रम गई थी। बेटी को पढ़ाने के लिए भी बहुत मेहनत की। लेकिन अब जब हमारे पति शिशिर सामंत नहीं रहे, और हमारी बेटी विदेश में अपनी जिंदगी जी रही है। तो मैं कोलकाता के फ्लैट में खुशी-खुशी रह रही हूँ। मुझे बचपन से पढ़ने, गाना गाने का बहुत शौक था, लेकिन परिवार की जिम्मेदारी के कारण मैं नहीं कर पा रही थी।
अब मेरे पास बहुत समय है, इसलिए मैं अपने सारे शौक को पूरा कर पा रही हूँ। बेटी विदेश में रहते हुए भी, मेरे लिए सारी व्यवस्था की हुई है। मैं अकेलेपन को बोझ नहीं समझती, बल्कि अपने समय का सदुपयोग कर रही हूँ। उन्होंने बताया कि वह अकेले सफर कर लेती हैं, और अभी कुछ दिन पहले ही वियतनाम में रह रही बेटी के यहाँ से लौटी हैं। वहीं बीएसएनएल से रिटार्यड हुई सीमा जी ने बताया कि उनका बेटा-बहू साल्टलेक में रहते हैं। पति अब इस दुनिया में नहीं है। वह कोलकाता के न्यूटाउन इलाके में एक छोटा सा फ्लैट खरीदकर अपने मनमुताबिक जिंदगी जी रही है। वह कभी-कभार बेटे के यहाँ चली जाती हैं और वो लोग भी माँ के पास आते रहते हैं। उन्होंने कहा कि हम चाहते तो साथ में भी रह सकते थे, लेकिन आपस में रहकर मनमुटाव हो सकता था, इसलिए हमलोगों ने मिलकर यह फैसला लिया और हमलोग अपने फैसले पर बहुत खुश है। वहीं 90 वर्षीय मासी माँ (सभी इसी नाम से पुकारते हैं) अपने पाँच-पाँच बच्चों को पढ़ा-लिखा कर अच्छी जिंदगी जीने के लायक बनाईं। सभी अच्छे पद पर कार्यरत हैं। मासी माँ और उनका छोटा बेटा एक कॉम्लेक्स में रहते हैं। बेटा-बहू एक फ्लैट में और मासी माँ अपने पति के साथ दूसरे फ्लैट में रहती हैं। कई साल पहले उनके पति का देहांत हो गया। अब वह अकेले ही रह रही है। बहू दोनों समय का खाना बना कर दे देती हैं। बेटा घर की व्यवस्था कर देता हैं। घर में काम करने के लिए और मासी माँ की देखभाल के लिए एक आया की भी व्यवस्था की गई है। मासी माँ दिन में अखबार-किताबें पढ़कर समय बिताती है। वह साहित्य, राजनीति में घंटों चर्चा कर सकती हैं, पर पिछले कई महीनों से उनका स्वास्थ्य बहुत अच्छा नहीं रह रहा है, लेकिन फिर भी अपनी दिनचर्या में बहुत व्यस्त रहती है और अपनी जिंदगी से पूरी तक संतुष्ट है। वहीं मुज्जफरपुर की रहने वाली ऋतु अग्रवाल जिसकी कोलकाता में शादी हुई है। वह अकेली संतान है। इसलिए वह अपनी माँ को कोलकाता ले आई है और उनके लिए यहाँ अपने पास ही एक अलग फ्लैट की व्यवस्था कर दी है। बेटी ऋतु अपने ससुराल, नौकरी के साथ-साथ माँ की भी देखभाल कर पा रही है और इस व्यवस्था से माँ-बेटी दोनों बहुत खुश हैं।
फिल्म समीक्षा : माई
एक दौर ऐसा था, जब अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरी और उनकी हेयर स्टाइल दोनों की काफी धूम थीं। उनकी फैन पद्मिनी कोल्हापुरी की तरह साइड में चोटी करती। उनके अभिनय का जादू सिर चढ़कर बोलता था। उनकी ‘वो सात दिन’, ‘प्रेम रोग’, ‘सौतन’, ‘प्यार झुकता नहीं, ‘प्यार के काबिल हो’ या फिर ‘स्वर्ग से सुंदर’ – इन सभी फिल्मों में पद्मिनी कोल्हापुरी का याद रखने लायक अभिनय है। बंबई में 01 नवंबर, 1965 को जन्मी पद्मिनी कोल्हापुरी महज सात साल की छोटी-सी उम्र में रूपहली दुनिया में आ चुकी थी। वह हर तरह के किरदार को खूबी जीती थी। उनकी ‘वो सात दिन’ अभी भी जेहन से नहीं उतरती। इस फिल्म में एक चुलबुली लड़की की भूमिका को पद्मिनी ने जीवंत बना दिया था। इसी तरह फिल्म ‘प्रेम रोग’ का किरदार आज भी नहीं भूलता। 1990 से 1995 तक उनकी फिल्मों ने काफी धूम मचाया। उसके बाद वह पर्दे से गायब हो गई। लेकिन, यूट्यूब खंगालने पर पता चलता है सिनेमा को पद्मिनी ने कभी अलविदा नहीं कहा, बल्कि वह आज भी सक्रिय हैं। कई सालों के अंतराल पर फिल्मों में अभिनय करती रहीं, लेकिन हाँ, उनकी फिल्मों की चर्चा ज्यादा नहीं हुई और बाक्स ऑफिस पर शायद उतना छा भी नहीं पायी। उसी के बाद 2012 में बनी और 2013 में रिलीज हुई ‘माई’ फिल्म के वीडियो पर मेरी नजर पड़ी। उसके स्क्रीन पर पद्मिनी, रामकपूर और गायिका आशा भोंसले जी दिखीं। अब इस फिल्म को देखने की इच्छा प्रबल हो गयी। देखने के पीछे तीन मुख्य कारण थे। पहला आशा जी 79 की उम्र में अभिनय की दुनिया में प्रवेश कर रही हैं। दूसरा बड़ा कारण बड़े अच्छे लगते हैं के रामकपूर को देखना सही में बहुत अच्छा लगता है और तीसरा सबसे मुख्य कारण पद्दिमनी कोल्हापुरी की फिल्म देखना बेहद पसंद है। इसके लिए मोबाइल को स्टैंड पर लगा कर, कान में इयर फोन लगाकर बैठ गई फिल्म देखने। वैसे आजकल शार्ट फिल्म, वेब सीरिज के जमाने में दो-ढ़ाई घंटे की फिल्म को देखना बहुत बड़ा काम है। वैसे यह फिल्म केवल पौने दो घंटे की ही थी।
चलिए, अब बात करते हैं इस फिल्म के बारे में। इस फिल्म का पहला सीन बहुत ही ऊर्जावान था। पद्मिनी कोल्हापुरी रसोई संभालकर ऑफिस जाने की तैयारी कर रही है। एकदम फिट। चुस्त दुरुस्त। घर, परिवार के साथ-साथ कार्यालय में भी कर्मठ कर्मचारी के रूप में दिखीं। आजकल की लड़कियों को टक्कर देता पहनावा और वैसा ही व्यक्तित्व। कहीं से उम्र उनपर हावी नहीं दिखा। फिल्म में केंद्र की भूमिका में आशा भोंसले दिखीं, जो माई के रूप में है। उनका अभिनय जीवंत रहा। फिल्म में वह बहुत मेहनत कर अपने बच्चों को संभालती, पढ़ाती हैं। लेकिन अब वह बूढ़ी हो चुकी है। बीमार है। उन्हीं इसी समस्या को लेकर फिल्म की कहानी लिखी गई हैं। और पूरी फिल्म इन्हीं के इर्द-गिर्द है। पति, पिता, दामाद के साथ-साथ एक अच्छे पत्रकार के रूप में दिखें रामकपूर। उनके अभिनय की क्या बात। वह सांक्षी तंवर हो या पद्दिमनी सब के साथ फिट हो जाते हैं। उनका हैंडसम लुक की क्या बात करूँ। बड़े अच्छे लगते हैं, करके तू भी मुहब्बत से ही उनको पसंद किया जा रहा है।
ऐसे बेटा-बेटी जो आज बूढ़े या बीमार माँ या पिता को अपने जीवन से अलग कर देना चाहते हैं। अपनी कामयाबी के लिए अपने परिवार में उनको जगह नहीं दे पाते हैं। उन्हें लगता है कि वृद्धा आश्रम ही उनके लिए सही जगह है। ऐसे बच्चों को यह फिल्म एक बार जरूर देखनी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ एक माँ और बेटी के प्यारे रिश्ते को भी दिखाया गया है। 2012 में बनी इस फिल्म में चित्रहार और बुधवार का भी जिक्र होकर उस समय की याद दिला दी। 10 साल पहले बनी इस फिल्म में दिखाई गई समस्या समाज में आज भी बरकरार है। निसंदेह यह समस्या बढ़ी ही है, इसलिए इस फिल्म की जरूरत आज भी बहुत है। पर अफसोस है कि ऐसी फिल्म को आज का युवा समाज देखना नहीं चाहता, इसलिए यह बाक्स ऑफिस पर अपना परचम नहीं लहरा सकी। फिल्म के गाने बहुत ही अच्छे हैं। आशा जी की मधुर आवाज कानों को बहुत अच्छी लगी। इस फिल्म के गाने ने मुझे बचपन की यादें दिला दी। इस फिल्म के निर्देशन का कार्यभार महेश कोडियार ने बखूबी किया है। यह उनकी पहली निर्देशित फिल्म है। फिल्म के एक प्रथम दृश्य से लेकर अंतिम दृश्य तक मैं उठ भी नहीं पाई। संगीत नितिन शंकर का है। मैं इस फिल्म को देखकर बोर तो नहीं महसूस की, लेकिन हाँ कई जगहों पर भावुक तो जरूर हो गई।
गुंजन ने हिन्दी में किया मैकबेट्ट नाटक का अनुवाद
कोलकाता । रंगमंच पर किताबें लिखना आसान काम नहीं है और अनुवाद तो उससे भी कठिन है। वहीं महज 16 साल की उम्र में गुंजन द्वारा मैकबेट्ट नाटक का हिन्दी में किया गया अनुवाद अब पुस्तक के रूप में प्रकाशित हो गया है। गुंजन अब 21 साल की है। 1 सितम्बर 2001, कलकत्ता में जन्मी गुंजन मूलतः वाणिज्य विषय की विद्यार्थी है मगर उसे रंग-संस्कार और साहित्य की समझ विरासत में मिली है। अँग्रेज़ी साहित्य से गुंजन का विशेष लगाव है। अँग्रेज़ी में कविताएँ भी लिखती हैं। साथ ही घुड़सवारी का भी शौक रखती हैं। पाँच वर्ष पूर्व 16 वर्ष की आयु में ही गुंजन ने अपने पहले प्रयास में यूजीन आयनेस्को के एक कठिन नाटक को अनुवाद के लिए चुना है। आयनेस्को को लोग अधिकतर राइनासर्स से ही जोड़ते हैं। जबकि उन्होंने अनेक सशक्त नाटकों की रचना की है और उन्हीं में से एक है मैकबेट्ट जो स्वयं को शेक्सपियर की परंपरा से भी जोड़ता है और आधुनिक रंग-परंपरा का निर्माण भी करता है। मैकबेट्ट जैसे नाटक को हिन्दी में लाकर गुंजन ने हिन्दी नाट्य-संपदा को समृद्ध किया। निश्चित ही ये नाटक रंग प्रेमियों के लिए एक चुनौती है। उसके 21वें जन्मदिन पर प्रलेक प्रकाशन की ओर से किताब का कवर पेज रिलीज किया गया है। 20 सितम्बर को अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में लिटिल थेस्पियन के स्थापना दिवस के अवसर पर इस किताब का लोकार्पण है।
दोहरी डिग्री का विकल्प ग्लैमरस नहीं होना चाहिए – प्रो. तरणजीत सिंह
कोलकाता । प्रैक्सिस बिजनेस स्कूल के संस्थापक निदेशक प्रो, तरणजीत सिंह ने कहा कि दोहरी डिग्री का विकल्प अगर ग्लैमरस हो जाए तो यह काफी डरावना होगा। एक प्रमुख मीडिया हाउस द्वारा आयोजित “प्रौद्योगिकी और कौशल के माध्यम से शिक्षा” शिखर सम्मेलन “दोहरी डिग्री: लाभ और चुनौतियां” पर एक पैनल में भाग ले रहे थे। सम्मेलन में रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट की गवर्निंग काउंसिल की सदस्य रूपमंजरी घोष, एनआईआईटी विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो राजेश खन्ना और रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर श्री सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने भी विचार रखे।
हाल ही में, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रमों के लिए विदेशी और भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग के लिए नियमों की घोषणा की थी, जिसमें इसके लिए संकाय को प्रशिक्षण प्रदान करना भी शामिल था। एक दोहरे डिग्री कार्यक्रम में, छात्र एक ही समय में या यहां तक कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के साथ, असमान क्षेत्रों में भी, दो पाठ्यक्रमों का लाभ उठा सकता है और विशेष रूप से यूरोप में बहुत लोकप्रिय हैं।
इस विचार पर आगे विस्तार करते हुए प्रो. सिंह ने कहा, “यदि आप राष्ट्रीय शिक्षा नीति को देखें, तो यह समग्र शिक्षा पर इतना जोर देता है। आपको सिर्फ अकादमिक के साथ जीवन कौशल भी सीखने की जरूरत है। खेल और कला की भी जरूरत है। मेरी चिंता यह है कि आज एमबीए नया ग्रेजुएशन है और मुझे उम्मीद है कि ड्यूल डिग्री नई डिग्री नहीं बनेगी क्योंकि तब आप दो के जैक हैं लेकिन किसी के मास्टर नहीं हैं।
हमारे यहां वास्तव में एक सार्वभौमिक रूप से लागू सिद्धांत नहीं हो सकता है। इसके अलावा, अगर मैं परिणामों को देखता हूं, तो मान लें कि आपने एक एकीकृत प्रौद्योगिकी और प्रबंधन डिग्री अर्जित की है। इसकी अब बहुत स्पष्ट आवश्यकता है। चाहे आप बीटेक करें और फिर एमबीए करें या आप एक एकीकृत एक करें, जहां आप एक साल या कुछ और बचाएंगे, मुझे लगता है कि भर्तीकर्ता दोनों से खुश है इसलिए वहां कोई भ्रम नहीं है।
प्रैक्सिस छात्रों को जुलाई में कोलकाता में उनके प्रमुख पीजीडीएम पाठ्यक्रम और जनवरी और जुलाई में डेटा विज्ञान कार्यक्रम में उनके पीजीपी में कोलकाता और बैंगलोर में अपने परिसरों में प्रवेश देता है। डेटा साइंस के लिए एक और कैंपस अगले साल की शुरुआत में मुंबई में खुलेगा।
एच.के.चौधरी को ‘टाइम्स फिलैंथ्रॉपी अवार्ड 2022’
कोलकाता । हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, कोलकाता के अध्यक्ष एच.के.चौधरी को टाइम्स फिलैंथ्रॉपी अवार्ड 2022 प्राप्त किया। गत 26 अगस्त को उनको समाज सेवा एवं शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण और मूल्यवान योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार आलापन बंद्योपाध्याय से पुरस्कार प्राप्त किया। हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ श्री पी.के.अग्रवाल ने कहा, “इस महान अवसर पर, मैं इस पल को देखकर गर्व महसूस कर रहा हूं। यह पूरे विरासत परिवार के लिए गर्व की बात है।”
एच.के.चौधरी विक्रम इंडिया और बीआरसीएम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, बहल, हरियाणा के अध्यक्ष भी हैं। वह फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल सोसाइटी और विभिन्न अन्य संगठनों के सक्रिय सदस्य भी हैं जो समाज और सामुदायिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। एच.के. चौधरी ने कहा, “मैं इस नेक पहल के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया को धन्यवाद देता हूं। यह पुरस्कार देश भर में परोपकारी लोगों को पहचानने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
नौकरी तलाशने वाले के अलावा नौकरी देने वाले भी बनें – एच.पी. बुधिया
कोलकाता । हेरिटेज बिजनेस स्कूल, कोलकाता ने गत 24 अगस्त को कॉन्ग्रेंस 2022 एवं एमबीए छात्रों के 20 वें बैच के इंडक्शन एंड ओरिएंटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया। समारोह को मुख्य अतिथि विश्व भारती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो सुजीत के बसु ने संबोधित किया। विशिष्ट अतिथि , चारनॉक अस्पताल प्रा. लिमिटेड के प्रबंध निदेशक थे। इस कार्यक्रम में हेरिटेज बिजनेस स्कूल, कोलकाता के चेयरमैन एच.पी.बुधिया भी मौजूद थे। उद्घाटन भाषण में प्रशांत शर्मा ने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में एक प्रबंधन छात्र के रूप में अपनी यात्रा और उसके बाद हार्वर्ड विश्वविद्यालय में आगे की पढ़ाई के बारे में बात की। “बी-स्कूलों में पीयर लर्निंग होता है। कोई व्याख्यान नहीं होगा। ये दो साल आप सभी के लिए पीसने और चमकाने वाले सत्र होंगे।” उन्होंने युवा उत्साही प्रबंधन उम्मीदवारों को अपने संबोधन के दौरान कहा। प्रो. सुजीत के बसु ने नवाचारों और जिस तरह से सांस्कृतिक पहलू के प्रबंधन शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव पर बात की। ” हेरिटेज बिजनेस स्कूल, कोलकाता के निदेशक प्रो. के.के.चौधुरी ने कहा, “लगभग 1700 छात्र पास आउट हो चुके हैं और वर्तमान में दुनिया भर में विभिन्न क्षमताओं में काम कर रहे हैं।” आईआईएम कलकत्ता के पूर्व डीन एवं हेरिटेज बिजनेस स्कूल के मुख्य संरक्षक डॉ. अनूप के सिन्हा ने भी विचार रखे। हेरिटेज बिजनेस स्कूल के अध्यक्ष एच.पी.बुधिया ने कहा, “नौकरी तलाशने वाले के अलावा नौकरी देने वाले भी बनें। इन दो वर्षों के दौरान, अपने समय का बुद्धिमानी से उपयोग करें क्योंकि आपको हेरिटेज बिजनेस स्कूल, कोलकाता में एमबीए करने का अवसर मिल रहा है।” वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड के संस्थापक और अध्यक्ष अनिल अग्रवाल, हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रिंसिपल प्रोफेसर बासब चौधरी एवं हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ प्रदीप अग्रवाल भी उपस्थित थे।






