Thursday, July 9, 2026
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राज्य में उद्योगों की स्थिति बेहतर हुई है – डॉ. शशि पांजा

कोलकाता । राज्य की उद्योग, वाणिज्य और उद्यम मंत्री डॉ. शशि पांजा ने कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। उद्योग जगत को भी राज्य के गुलविल अम्बास्डर बनना चाहिए। एमसीसीआई द्वारा राज्य में औद्योगिक प्रगति को लेकर आयोजित एक परिचर्चा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य जलवायु, मौसम, उपभोक्ताओं समेत सभी दृष्टि से अच्छी स्थिति में है। देओचा पंचमी में कोयले की खान और ताजपुर में डीप सीपोर्ट का काम प्रगति पर है। डॉ. पांजा ने सृजनात्मक उद्योगों के तहत कला एवं हस्तशिल्प उद्योग एवं उनके माध्यम से रोजगार सृजन की बात की औऱ इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने इस धारणा को खारिज किया कि राज्य में कोई बड़ा निवेश नहीं है और कहा कि 2011 के बाद से औद्योगिक हड़ताल नहीं हुई,यह निरंतरता एक सकारात्मक संकेत है। एमसीसीआई के अध्यक्ष ऋषभ कोठारी ने अपने स्वागत भाषण में दक्षिण 24 परगना के नुंगी, महेशतला में एक थोक परिधान हब स्थापित करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की पहल की सराहना की। एमसीसीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ललित बेरीवाला ने डॉ. शशि पांजा से बिजली गहन उद्योगों, विशेष रूप से स्टील के टैरिफ मुद्दों पर ध्यान देने का अनुरोध किया। धन्यवाद ज्ञापन एमसीसीआई के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ललित बेरीवाल ने दिया।

 

अन्नपूर्णा स्वादिष्ट ने अपने एंकर निवेशकों से जुटाए 8.61 करोड़

कोलकाता । अन्नपूर्णा स्वादिष्ट ने अपने एंकर निवेशकों से 8.61 करोड़ रुपये जुटाए हैं। कम्पनी ने 12,30, 000 इक्विटी शेयर अपने तीन एंकर निवेशकों, राजस्थान ग्लोबल सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड, ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं नव कैपिटल वीसीसी – नव कैपिटल इमर्जिंग स्टार फंड को आवंटित किये। प्रति शेयर का इश्यू मूल्य 70 रुपये प्रति शेयर रहा। कम्पनी का आईपीओ 15 सितम्बर को खुला और 19 सितम्बर को बंद हो रहा है। कम्पनी का इश्यू एनएसई एसएमई इमर्ज के तहत सूचीबद्ध होगा।
गौरतलब है कि अन्नपूर्णा स्वादिष्ट अपने शेयरों की कीमत 68-70 रुपये प्रति शेयर निश्चित की है। कम्पनी ने बुक बाइंडिंग इश्यू के तहत 43.22 लाख इक्विटी शेयर जारी किये हैं। बाजार के दिग्गज शंकर शर्मा के नेतृत्व में मार्की निवेशकों ने कंपनी में प्री-आईपीओ राउंड ऑफ फंडिंग में निवेश किया है। इसके अलावा, जीएमओ सिंगापुर पीटीई के पूर्व पार्टनर अमित भरतिया ने भी अपनी व्यक्तिगत क्षमता में निवेश किया है। एनएवी कैपिटल इमर्जिंग स्टार फंड और राजस्थान ग्लोबल सिक्योरिटीज सहित प्रमुख संस्थागत निवेशकों ने भी कंपनी में प्री-आईपीओ हिस्सेदारी में निवेश किया है। इस इश्यू का प्रबंधन कॉरपोरेट कैपिटल वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। लिमिटेड, और स्काईलाइन फाइनेंशियल सर्विसेज प्रा। लिमिटेड इश्यू का रजिस्ट्रार है। निर्गम के बाद, कंपनी का पेड अप इक्विटी कैपिटल बढ़कर रु. 16.42 करोड़ रु. 12.10 करोड़ हो जाएगा।

 

 

 

एचआईटीके पहुँचे भारत के सोलर मैन प्रो. एस.पी. गोन

कोलकाता । हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कोलकाता (एचआईटीके) ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियर्स (आईआईसीएचई) ने हाल ही में चेम्सपार्क -2022 आयोजित किया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय रिसेंट ट्रेंड्स इन सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी था। संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रो वीसी एवं केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. चिरंजीव भट्टाचार्य ने आभासी माध्यम से सम्बोधित किया। उन्होंने स्ठायी औऱ रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में हो रहे काम की जानकारी दी। इसके साथ ही विशिष्ट अतिथि के रूप में विशिष्ट अतिथि के रूप में एन बी इंस्टीट्यूट फॉर रूरल टेक्नोलॉजी भारत के सोलर मैन प्रो. एस.पी. गोन चौधरी भी उपस्थित थे। उद्धाटन भाषण में प्रो. एस. पी. गॉन चौधरी ने कहा कि आज के इंजीनियरों को नयी तकनीक का सृजन करना चाहिए जो स्थायी विकास में सहायक हों। सत्र में एचआईटीके के प्रिंसिपल प्रो. बासव चौधरी, आईआईसीएचई के कोलकाता केन्द्र के चेयरमैन अभिजीत मित्रा और एचआईटीके की केमिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. सुलग्ना चटर्जी उपस्थित थीं।

भवानीपुर कॉलेज की वाणिज्य प्रयोगशाला में आठ दिवसीय व्यवहारिक पाठ्यक्रम संपन्न 

कोलकाता । सैद्धांतिक शिक्षा महत्वपूर्ण है लेकिन साथ ही वास्तविक जीवन परिदृश्यों में इसका अनुप्रयोग समान रूप से महत्वपूर्ण है। कॉर्पोरेट जगत के विशेष बिंदुओं की एक झलक दिखाने के लिए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के वाणिज्य विभाग ने इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया ( आईसीएसआई) के साथ मिलकर सात दिवसीय व्यावहारिक पाठ्यक्रम शुरू किया। इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ‘वाणिज्य प्रयोगशाला’ के बैनर तले कॉर्पोरेट क्षेत्र के कामकाज में व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्रदान करना है
दस अगस्त से शुरु हुए इस पाठ्यक्रम में आईसीएसआई के पूर्वी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष सीएस अनिल कुमार दुबे ने अपनी उपस्थिति से कॉलेज को गौरवान्वित किया। कार्यक्रम का उद्घाटन कॉलेज के छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने आज की दुनिया में व्यावहारिक ज्ञान के महत्व और भाग लेने वाले छात्रों के लिए यह पाठ्यक्रम कितना ज्ञानवर्धक होगा, इस पर जोर दिया।
आठ दिनों से अधिक समय तक, पाठ्यक्रम के पहले दिन चार कंपनी सचिवों को अपने अनुभव के साथ छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए आमंत्रित किया गया था। उनके द्वारा ब्रांड की सुरक्षा, निदेशकों की नियुक्ति और एलएलपी को शामिल करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। सीएस रवीना दुगड़ ने एमसीए के पहलुओं की व्याख्या की जिसमें मास्टर डेटा देखना, निदेशक का डेटा, शुल्कों का सूचकांक और सार्वजनिक दस्तावेज़ देखना शामिल है। सीएस चांँदनी माहेश्वरी ने एलएलपी को शामिल करने पर बात की। सीएस रजत अग्रवाल ने एक ब्रांड बनाने और उसकी रक्षा करने के बारे में भाषण दिया। सीएस स्नेहा खेतान ने एक कंपनी में निदेशक नियुक्त करने के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण पेश किया। समापन सत्र में प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को संबोधित किया ।
दूसरे दिन छात्रों को जीएसटी, सिक्स सिग्मा और एक व्यवसाय के प्रबंधन की अनिवार्यता के क्षेत्र में मार्गदर्शन किया गया। कार्यस्थल में पेशेवर शिष्टाचार और समझौतों के प्रारूपण पर चर्चा की गई। सीएस निखिल इसरानी ने जीएसटी- जीएसटीआर 3बी और जीएसटीआर 1 का परिचय प्रस्तुत किया। सीएस दविंदर कौर ने एक इकाई के संचालन और व्यवसाय विकास पर प्रकाश डाला। सीएस चित्रा थेकवानी ने कार्यस्थल पर पेशेवर शिष्टाचार की सलाह दी और एडवोकेट वर्षा अग्रवाल ने किराए के समझौते के प्रारूपण की व्याख्या की।
तीसरे दिन डिजिटल सिग्नेचर और निदेशकों की पहचान संख्या से संबंधित एक बहुत ही जानकारीपूर्ण सत्र आयोजित किया गया। इसके अलावा विभिन्न कॉर्पोरेट और साइबर अपराधों पर भी वास्तविक जीवन के केस स्टडीज के पूर्वव्यापीकरण की चर्चा की गई । सीएस अल्पना अग्रवाल  ने हमें मिनटों के प्रारूपण से परिचित कराया। सीएस विवेक मिश्रा ने कॉरपोरेट घोटालों और उनके प्रभावों पर प्रकाश डाला। सीएस कनक शर्मा ने डीएससी और डीआईएन पर बात की, जबकि सीएस प्रतीक कोहली ने कंपनी प्रशासन की महत्वपूर्ण अवधारणा पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी के चौथे दिन छात्रों को सीएसआर के क्षेत्र में कैरियर के अवसरों के संदर्भ में मार्गदर्शन किया गया। सीएसआर के प्रति भारत सरकार के दृष्टिकोण और सीएसआर के प्रभाव के साथ-साथ कर निर्धारण और टीडीएस की अवधारणाओं पर गहन चर्चा की गई। सीएस रूपांजना डे ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी में करियर की संभावनाओं पर चर्चा की। सीएस माधुरी पांडे ने कंपनी के निगमन के लिए नाम उपलब्धता की ओर इशारा किया। सीएस सुमित कुमार ने स्पष्ट किया कि आईटीआर फाइलिंग के बाद आईटी विभाग से नोटिस को कैसे संभालना है। सीए राजन गुप्ता ने टीडीएस अनुपालन और प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की।
पांचवें दिन सीएसआर परियोजनाओं को कैसे क्रियान्वित किया जाए, इस पर प्रकाश डाला गया और स्टॉक मार्केटिंग कार्यप्रणाली पर एक बहुत ही शिक्षाप्रद चर्चा हुई। सीएस पंकज खन्ना ने स्टॉक मार्केट केस स्टडी के बारे में विस्तार से बताया। सीएस राखी दासगुप्ता ने कंपनी कानून के तहत सीएसआर परियोजनाओं के व्यावहारिक निष्पादन की पुष्टि की। सीएस रौनक नाहटा ने हलफनामे के प्रारूप को स्पष्ट किया। सीएस आर्य शॉ ने एक निदेशक के इस्तीफे या हटाने की प्रक्रिया के बारे में बताया।
छठे दिन कंपनी अधिनियम की धारा 69 का सरलीकरण कर विद्यार्थियों को समझाया गया। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की साझेदारी और साझेदारी समझौते के तत्वों के बारे में बताया गया। सीएस अदिति झुनझुनवाला ने शेयरों के बाय बैक की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। सीएस आदित्य पुरोहित ने कॉर्पोरेट पुनर्गठन में व्यावहारिक अंतर्दृष्टि दी। एडवोकेट अनीता सारस्वत ने पार्टनरशिप एग्रीमेंट और एग्रीमेंट टू सेल का मसौदा तैयार किया और सीएस जयब्रत मुखर्जी ने त्वरित मुकदमेबाजी के लिए उचित याचिका के प्रारूपण से अवगत कराया।
आयोजन के सातवें दिन विद्यार्थियों को वार्षिक रिपोर्ट और कंपनी के भविष्य के दृष्टिकोण के महत्व के बारे में बहुत संक्षिप्त जानकारी दी। सीएस प्रियंका टिबरेवाल ने हमें वार्षिक रिटर्न (एमजीटी 7) के विषय में बताया , जबकि सीएस सुमित जायसवाल ने वार्षिक रिपोर्ट के महत्व और संभावनाओं को चित्रित किया। शिखा मालू ने आईबीसी में करियर के अवसरों पर बात की और सीएस खुशबू अग्रवाल ने पूरक एलएलपी समझौते के प्रारूपण की व्याख्या की।
आठवां और अंतिम दिन छात्रों को अपनी क्षमताओं का प्रभावी उपयोग करने और हार न मानने के लिए प्रेरित करने के बारे में था। दुनिया भर के सफल व्यवसायियों की प्रेरणादायक कहानियों के बारे में बात की गई। मॉक बोर्ड की बैठक भी हुई। सीएस नमिता जायसवाल ने व्यक्तित्व विकास के महत्व के बारे में बताया। सीएस राकेश शर्मा और सीएस आराधना नथानी ने बोर्ड बैठक के प्रावधानों और अधिनियमन का प्रस्ताव रखा। मॉक बोर्ड बैठक में प्रो. डालिया शर्मा और प्रो. नितिन चतुर्वेदी ने भी भाग लिया। विशाल ढोना ने मुनीमजी ईआरपी सॉफ्टवेयर के सफर को साझा किया। अंत में, सीएस हंसराज जरिया ने एमएसएमई को चर्चा में लाया और छात्रों को उसकी एक धारणा और दृष्टि प्रदान की।
कोर्स ‘कॉमर्स लैब’ ने आठ दिनों की छोटी अवधि में 35 सेअधिक पेशेवरों को सुनने का अवसर मिला । इस अत्यंत शिक्षाप्रद पाठ्यक्रम से सत्तर से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं, जो न केवल सैद्धांतिक ज्ञान के महत्व पर बल्कि व्यावहारिक दक्षता और आज की तेज गति से संपन्न दुनिया में इसके महत्व पर भी केंद्रित है। प्रत्येक व्यक्ति जो इस प्रयास का हिस्सा रहा है, ने छात्रों को उनकी विशेषज्ञता और मार्गदर्शन के साथ विधिवत सहायता की है।इस रिपोर्ट में अक्षिता सूरी, एसके एमडी जहिरूद्दीन का सहयोग रहा। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

अर्चना ने मनाया हिन्दी दिवस

कोलकाता । हिंदी दिवस के अवसर पर अर्चना संस्था के सदस्यों ने हिंदी भाषा और उसके साथ अपनी मातृभाषा प्रेम और देशप्रेम के प्रति अपनी जिम्मेदारी को स्वरचित रचनाओं , गीत और गजल के द्वारा अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। उषा श्राफ ने मैने हिंदी को नहीं चुना, हिंदी ने मुझे चुना है।
राजस्थानी और हिंदी में मृदुला कोठारी ने लो फेरू आग्योहिंदी पखवारोअंग्रेजी की गोदी में बैठो जाने गांव रो गवारू छोरो और हिंदी हमारी साख है है,टहनियां, सांस प्राण धमनिया है और तुलसी पौधे पर एक गीत, प्रसन्न चोपड़ा ने सीने से लगाकर पाला, अपने से दूर किया थाजैसे कड़वा घूंट, मैंने कोई पिया था, हिम्मत चोरडिया प्रज्ञा ने कुण्डलिया-हिन्दी हिन्दुस्तान की, हमको है अभिमान।
जन-जन की भाषा बने, मिले इसे पहचान।।कुछ दोहे- सीधी सरल सुहावनी, माता हिन्दी बोल।गहन ज्ञान इसमें छिपा, आँखें अपनी खोल, मीना दूगड़ ने हिंद हिंदुस्तान भारत इंडिया,कहलाया जो सोने की चिड़िया
हर शब्द के पीछे छुपा राज गहरा,पग पग पर संस्कृति देती पहरा।, प्रसन्न चोपड़ा ने सीने से लगा के पाला ,अपने से दूर किया था। जैसे कड़वा घूंट, मैंने कोई पिया था। शीतल बयार सी आती ,तपन होती कुछ कम है। मन का दर्द समझती बेटी मानो जीवन है।संगीता चौधरी ने शीर्षक हिंदी और मैं कविता की प्रस्तुति दी। बड़े प्रेम से मेरे देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। सुशीला चनानी ने एक सूत्र में बांधे रखती हिन्दी जैसे अन्नपूर्णा सी माँ जोड़कर रखती परिवार लगा कर भाल पर बिन्दी,संस्कृत के गोमुख से निकली गंगा सी पावन हिन्दी, एक सूत्र मे बांधे रखती ऐसी है मन भावन हिन्दी, शिक्षक पर एक गीत -अंधियारी गलियों मे राह जो दिखाते हैं वो और नही कोई मेरे गुरुदेव ही हैं ,मेरे मन में दीप ज्ञान का जलाते हैं। इंदू चांडक ने प्यारी प्यारी मातृभाषा, हमारी है हिंदी, जन जन के होठों पर गूँजे, गर्व से हिंदी, कोई आसमां के पार से बुलाता है मुझे, हर पलअपने होने का आभास दे जाता है मुझे, डॉ वसुंधरा मिश्र ने हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली इतराती इठलाती कई भाषाओं की विविध रचनाओं को हिंदी भाषा के प्रति समर्पित किया गया।

हिन्दी दिवस पर विशेष : हिन्दी

बब्बन

प्रयागराज/इलाहाबाद

(१)
अपने भारत देश महान में,
उल्लिखित आठवीं अनुसूची जो संविधान में,
विराजमान 22 भाषाएं,
हम सम्मान पूर्वक इन्हें यूं बताएं

असमी,उड़िया, गुजराती, बँगाली,
कन्नड़ ,बोड़ो,संस्कृत, संथाली।
पंजाबी, मलयालम, मराठी, मैथिली,
तमिल, तेलगू, उर्दू ,नेपाली।
इसी कड़ी मे कोंकणी, मणिपुरी।
जुड़ी हुई डोगरी, कश्मीरी।
और सुशोभित सिन्धी है।
ऐ भाषाएँ भारत माँ के गहने हैं।
और सभी आपस मे बहनें हैं।
इन बहनों के माथे की जो बिन्दी है,
वह हमारी भाषा हिंदी है।
(२)
आजादी जब मिली वतन को,
तो राष्ट्रभाषा हिन्दी ही होगी,
सबने कसमें खाती थी।
यही वह भाषा है जिसमें,
क्रान्ति ने लिया अंगड़ाई थी।
आजादी के हर योद्धा ने,
हिंदी की महिमा गाई थी।
जन-जन की सम्पर्क कड़ी बन,
स्वतन्त्रता हिन्दी ने ही दिलायी थी।
हिन्दुस्तान की पहचान यह भाषा,
यहीं की मूल वसिन्दी है।
राजभाषा गद्दी की असली वारिस,
हिन्द की भाषा हिन्दी है।
(३)
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद देश में,
हिन्दी का हुआ न उचित सम्मान।
अंग्रेज़ यहां से चले गए,
पर उनकी भाषा रही विराजमान।
सिंहासन पर जिसको होना था,
होता रहा उसका अपमान।
राजनेताओं के कुचक्र से,
हिन्दी हुई बहुत परेशान।
घुट घुट कर रह मरने वाली,
अधमरी होकर भी ज़िन्दी है।
राष्ट्रभाषा की जायज अधिकारिणी,
मातृभाषा हमारी हिन्दी है।

(४)
यह ऐसी भाषा है,
जिससे होता अभिव्यक्ति और विकास।
भावों के प्रकटीकरण का,
यह करती है सफल प्रयास।
राष्ट्र भाषा बिन गूँगा मुल्क है,
इससे बड़ा नहीं संत्रास।
बिन भाषा सम्मान ,देश अवनति पथ पर,
देखो उठाकर तुम इतिहास।
अपनों से ही पाकर उपेक्षा,
यह दशकों से हुयी शर्मिन्दी है।
अधिकतम प्रतिष्ठा की प्रबल अधिकारिणी,
वह भाषा हमारी हिंदी है।
(५)
अपने पूरे प्रवाह को पाकर,
देगी यह जन जन को जोड़।
वोट के खातिर कुछ स्वार्थी नेता,
इसके महत्व को देते तोड़ मरोड़।
76 प्रतिशत जनता इसे समझती है,
बोलते हैं इसे लोग साठ करोड़।
प्रगति पथ पर इसे ले जाना है,
रखकर अपने मन में होड़।
22 भाषाओं की सरिता में,
सात लाख शब्दों की मल्लिका,
यह अविरल कालिन्दी है।
गंगोत्री की गंगा जल सी पवित्र,
यह मेरी भाषा हिंदी है।
(६)
राष्ट्रीय एकता सुदृढ़ होगी,
भारत देश बनेगा महान।
संसद से लेकर डगर डगर तक,
गर दोगे हिन्दी को सम्मान।
हिन्दी हमारी मातृभाषा है,
अंग्रेजी को मत समझो शान।
हिन्दी में सब कार्य करेंगे,
आज से लिजिए मन में ठान।
मातृभूमि की तरह हमारी,
मातृभाषा भी अभिनन्दी है।
भारतीय भाषाओं में जो सबसे सशक्त है,
वह भाषा केवल हिन्दी है।

हिन्दी दिवस पर विशेष : हिंदी की रेल चली

– डॉ. वसुंधरा मिश्र

हिंदी की रेल चली, हिंदी की रेल चली
हिंदुस्तान की सिरमौर रेख्ता, रेख्ती खड़ी बोली
आज हिंदी बन विकास की उच्च सीढ़ियों पर चढ़ती चली
इतराती इठलाती कई भाषाओं की सखी सहेली
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली

देश विदेश की सरहदें पार कर दिलों में बसने लगी
अरबी-फ़ारसी उर्दू पुर्तगीज को गले लगा सबकी स्नेही बनी
पूर्व से पश्चिम उत्तर से मध्य भारत में हिंदी के रंग की बेल चढ़ती चली
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली

होली दिवाली तीज-त्यौहार हिंदी के रंग में रंगे
विभिन्नता में एकता को मजबूत करती हिंदी की लहर हवाओं में घुली।
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली

देश के पार विदेशों में हिंदी की सुरभि फलीफूली
मेरे और तुम्हारे बीच संपर्क सेतु बनी
हमजोली बनी हिंदी
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली

नागपुर से भोपाल मॉरिशस युगांडा से फिजी फिर त्रिनिदाद गुयाना
दिल्ली की शान बनी हिंदी, राजभाषा बनी
निज भाषा की शान लगी हिंदी
हर दिल की आवाज़ बनी हिंदी
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली

सरल सहज और गतिशील धारा में बहती रही
वेदों और संस्कृत से निःसृत गंगा सी फैलती रही
भारत की विशाल धरती पर
दूब बनी देवों के सिर पर चढ़ती रही
भागीरथी देव भाषा की प्रहरी बन
संस्कृति और संस्कार बन बहने लगी
हिंदी की रेल चली हिंदी की रेल चली

राज्य में उद्योगों की स्थिति बेहतर हुई है – डॉ. शशि पांजा

कोलकाता । राज्य की उद्योग, वाणिज्य और उद्यम मंत्री डॉ. शशि पांजा ने कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। उद्योग जगत को भी राज्य के गुलविल अम्बास्डर बनना चाहिए। एमसीसीआई द्वारा राज्य में औद्योगिक प्रगति को लेकर आयोजित एक परिचर्चा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य जलवायु, मौसम, उपभोक्ताओं समेत सभी दृष्टि से अच्छी स्थिति में है। देओचा पंचमी में कोयले की खान और ताजपुर में डीप सीपोर्ट का काम प्रगति पर है। डॉ. पांजा ने सृजनात्मक उद्योगों के तहत कला एवं हस्तशिल्प उद्योग एवं उनके माध्यम से रोजगार सृजन की बात की औऱ इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने इस धारणा को खारिज किया कि राज्य में कोई बड़ा निवेश नहीं है और कहा कि 2011 के बाद से औद्योगिक हड़ताल नहीं हुई,यह निरंतरता एक सकारात्मक संकेत है। एमसीसीआई के अध्यक्ष ऋषभ कोठारी ने अपने स्वागत भाषण में दक्षिण 24 परगना के नुंगी, महेशतला में एक थोक परिधान हब स्थापित करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की पहल की सराहना की। एमसीसीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ललित बेरीवाला ने डॉ. शशि पांजा से बिजली गहन उद्योगों, विशेष रूप से स्टील के टैरिफ मुद्दों पर ध्यान देने का अनुरोध किया। धन्यवाद ज्ञापन एमसीसीआई के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ललित बेरीवाल ने दिया।

  साहित्य अकादेमी में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर कार्यक्रम

कोलकाता । साहित्य अकादेमी द्वारा अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर श्री शिक्षायतन कॉलेज, कोलकाता के संयुक्त तत्वावधान में कॉलेज परिसर में दो-दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रतिष्ठित अंग्रेजी लेखिका संयुक्ता दासगुप्त ने किया। इस अवसर पर कॉलेज की प्रधानाचार्या अदिति दे की अध्यक्षता में ‘भारतीय ‘भारतीय साहित्य’ पर केंद्रित एक कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। कार्यक्रम के आरंभ में स्वागत भाषण देते हुए अकादेमी के क्षेत्रीय सचिव देवेंद्र कुमार देवेश ने अकादेमी की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए भारतीय साहित्य की अवधारणा और साहित्य से आम जनता के सरोकार पर चर्चा की। इस अवसर पर मालिनी मुखर्जी ने परिचयात्मक वक्तव्य प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता संयुक्ता दासगुप्त ने विभिन्न राज्यों में भाषाओं की स्थिति और साहित्य पर विचार करते हुए इस बात को सामने रखा कि किस प्रकार एक समय भारत के किसी भी भाग की भाषा न होने के बावजूद आज अंग्रेजी संपूर्ण भारत में स्वीकृत और व्यवहृत भाषा बन गई है और विभिन्न भाषाओं के साहित्य का अंग्रेजी में अनुवाद अथवा भिन्न भाषी लेखकों द्वारा अंग्रेजी में लेखन के कारण अंग्रेजी भारतीय साहित्य को प्रस्तुत करने का माध्यम बन गई है। चित्रिता बनर्जी ने अठारहवीं सदी से अद्यतन विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्य पर तुलनात्मक विमर्श प्रस्तुत करते हुए भारतीय साहित्य के प्रतिनिधि स्वरूप और विशिष्टताओं को श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में कॉलेज की छात्राओं ने हिंदी, उर्दू, बांग्ला और अंग्रेजी के महत्वपूर्ण कवियों की कविताओं का कविता कोलाज प्रस्तुत किया तथा अंग्रेजी विभागाध्यक्ष देवलीना गुह ठाकुरता ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया।

विद्यासागर विश्वविद्यालय में हिन्दी दिवस समारोह

मिदनापुर। विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा के कुलपति प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि हिंदी का संबंध हमारी अस्मिता से है। हमारी अस्मिता का अर्थ भारतीय अस्मिता से है। बांग्ला का तत्सम रूप बहुत हद तक हिंदी का रूप ही है। हिंदी भाषा के विकास के इतिहास पर चर्चा करते हुए चारों अपभ्रंश शौरसेनी, प्राकृत, अर्द्धमागधी और मागधी का जिक्र जरूरी है। छः बहनों की मां एक ही है- मागधी- हिंदी, उड़िया, मैथिली, मगही, बांग्ला और असमिया। भाषा ने ही सर्वप्रथम ‘राष्ट्रीय’ अवधारणा को जन्म दिया है। भाषा से ही जातीय चेतना का निर्माण हुआ। पश्चिम बंग राज्य विश्वविद्यालय के प्रो. अरुण होता ने कहा कि संवैधानिक कारणों से 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाते हैं। परंतु हमारे लिए रोज हिंदी दिवस है। हिंदी की प्रगति में अहिंदी भाषियों की बड़ी भूमिका है। किसी भी भाषा के समृद्ध होने का आधार बौद्धिक जागरण से है। हिंदी विभाग, प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय की विभागाध्यक्ष प्रो. तनुजा मजूमदार ने हिंदी को इतिहास से जोड़कर स्वामी विवेकानन्द के संदर्भ में देखा। हिंदी में सरलता है। हिंदी के साथ बंकिम और विद्यासागर का भी जिक्र किया। भाषा की शक्ति का संबंध फोर्स से नहीं बल्कि साहित्य की समृद्धि की शक्ति से है। शांतिनिकेतन में रवींद्रनाथ,हजारी प्रसाद द्विवेदी और क्षितिमोहन सेन के त्रिभुज को वे हिंदी के बंगाल में व्यापकत्व का आधार मानते हैं।डॉ संजय जायसवाल ने कहा कि हिंदी को ज्ञान,तकनीकी, अध्ययन सामग्री और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता की भाषा बनाने की जरूरत है।हिंदी भारतीय भाषाओं के बीच एक पुल की तरह है जो अपनी स्वायत्तता के साथ तमाम भारतीय भाषाओं के साथ आगे बढ़ रही है।कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि हिंदी पूरे भारत में अपनी उदारता के कारण समादृत है।कहीं-कहीं उसे विरोध का सामना भी करना पड़ता है।पर यह विरोध जल्द मिट जाएगा।धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विभाग के अध्यक्ष डॉ प्रमोद प्रसाद ने सभी आमंत्रित विद्वानों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि हिंदी हमारे पहचान की भाषा है।