Thursday, July 9, 2026
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पाकिस्तान को हराकर श्रीलंका ने जीता छठी बार एशिया कप

दुबई । राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता का सामना कर रहे श्रीलंका के लिये क्रिकेट के मैदान पर उसके 11 खिलाड़ी नायक बनकर उभरे जिन्होंने पाकिस्तान को 23 रन से हराकर छठी बार एशिया कप जीता और देशवासियों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी ।
यह जीत सिर्फ श्रीलंका के क्रिकेट के लिये ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और राजनीतिक तौर पर भी काफी मायने रखती है । एक समय पांच विकेट 58 रन पर गंवाने के बाद भानुका राजपक्षा के 45 गेंद पर नाबाद 71 रन की मदद से श्रीलंका ने छह विकेट पर 170 रन बनाये ।
जवाब में पाकिस्तानी टीम 147 रन पर आउट हो गई जबकि एक समय उसका स्कोर दो विकेट पर 93 रन था । तेज गेंदबाज प्रमोद मधुशान ने चार ओवर में 34 रन देकर चार और लेग स्पिनर वानिंदु हसरंगा ने चार ओवर में 27 रन देकर तीन विकेट लिये ।
हसरंगा ने 17वें ओवर में तीन विकेट लेकर पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फेर दिया । इससे पहले मधुशान ने बाबर आजम (पांच) और फखर जमां (0) को आउट करके श्रीलंका का शिकंजा कस दिया था । मोहम्मद रिजवान ने 49 गेंद में 55 रन बनाये जबकि इफ्तिखार अहमद ने 31 गेंद में 32 रन जोड़े ।
श्रीलंका ने क्षेत्ररक्षण में भी जबर्दस्त मुस्तैदी दिखाते हुए रन बचाये और अच्छे कैच लपके जबकि पाकिस्तानी क्षेत्ररक्षकों ने निराश किया । इससे पहले पाकिस्तानी तेज गेंदबाजों के दिये शुरूआती झटकों से टीम को निकालते हुए भानुका राजपक्षा ने नाबाद 71 रन बनाकर श्रीलंका को छह विकेट पर 170 रन तक पहुंचाया ।
पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया जो शुरूआत में सही साबित होता लग रहा था लेकिन राजपक्षा ने आखिरी चार ओवर में 50 रन बनाकर श्रीलंका को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया ।
नसीम शाह ने चार ओवर में 40 रन देकर एक विकेट लिया जबकि हारिस रऊफ ने चार ओवर में 29 रन देकर तीन विकेट चटकाये । दोनों ने पिच से मिल रही मदद का पूरा फायदा उठाकर पावरप्ले में श्रीलंकाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी लेकिन इसके बाद राजपक्षा ने संकटमोचन की भूमिका निभाते हुए अपने कैरियर का बेहतरीन अर्धशतक लगाया ।
स्पिनर शादाब खान ने चार ओवर में 28 रन देकर एक विकेट लिया । राजपक्षा ने 45 गेंद में छह चौकों और तीन छक्कों की मदद से नाबाद 71 और वानिंदु हसरंगा ने 21 गेंद में 36 रन बनाये । दोनों ने 58 रन की ताबड़तोड़ साझेदारी की जबकि एक समय पर श्रीलंका का स्कोर पांच विकेट पर 58 रन था ।
चामिका करूणारत्ने के साथ राजपक्षा ने 54 रन जोड़े और श्रीलंका को 160 के पार ले गए । पाकिस्तान के 19 वर्ष के तेज गेंदबाज शाह ने शानदार फॉर्म जारी रखते हुए कुसल मेंडिस को खाता खोले बिना ही पवेलियन भेज दिया । धनंजय डिसिल्वा (21 गेंद में 28 रन) ने जरूर कुछ अच्छे शॉट लगाये लेकिन ज्यादा देर टिक नहीं सके । पाथुम निसांका (आठ) को रऊफ ने पवेलियन भेजा जबकि धनुष्का गुणतिलका (एक) उनकी बेहतरीन आउटस्विंगर का शिकार हुए ।

उन्नति, अनुपमा जूनियर बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में करेंगी भारतीय चुनौती की अगुआई

नयी दिल्ली । दुनिया की नंबर एक जूनियर खिलाड़ी अनुपमा उपाध्याय और ओडिशा ओपन सुपर 100 चैंपियन उन्नति हुड्डा 17 से 30 अक्टूबर तक स्पेन के सेंटेंडर में होने वाली बीडब्ल्यूएफ विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारत की चुनौती की अगुआई करेंगी।
कोविड-19 महामारी के कारण दो साल के अंतराल के बाद इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का आयोजन हो रहा है। प्रतियोगिता के लिए भारतीय टीम को विस्तृत चयन प्रक्रिया के बाद चुना गया है जिसमें दो अखिल भारतीय रैंकिंग टूर्नामेंट और रायपुर में चयन ट्रायल शामिल हैं।
उन्नति ने लड़कियों के एकल ट्रायल में शीर्ष स्थान हासिल किया था जिसमें एस रक्षिता श्री और अनुपमा क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहीं। गोवा और पंचकूला में दोनों अखिल भारतीय रैंकिंग खिताब जीतने वाले भरत राघव, पूर्व जूनियर विश्व नंबर एक शंकर मुथुसामी के अलावा आयुष शेट्टी लड़कों के एकल वर्ग में चुनौती पेश करेंगे।
भारत ने अब तक प्रतियोगिता में एक स्वर्ण, तीन रजत और पांच कांस्य पदक जीते हैं। राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता लक्ष्य सेन 2018 में कांस्य पदक के साथ इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले आखिरी भारतीय थे। भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) के सचिव संजय मिश्रा ने कहा, ‘‘जूनियर विश्व चैंपियनशिप लंबे अंतराल के बाद हो रही है और नए खिलाड़ियों के उभरने के साथ व्यापक चयन ट्रायल के बाद टीम का चयन किया गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि हम मिश्रित टीम चैंपियनशिप और व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पदक के लिए मजबूत चुनौती पेश करेंगे।’’ प्रतियोगिता की शुरुआत मिश्रित टीम स्पर्धा से होगी। भारत पुरुष और महिला युगल तथा मिश्रित युगल स्पर्धाओं में भी दो-दो जोड़ियां उतारेगा।
निकोलस नाथन राज और तुषार सुवीर के साथ अर्श मोहम्मद और अभिनव ठाकुर की नई जोड़ी पुरुष युगल में उतरेंगी। महिला युगल में गोवा में अखिल भारतीय रैंकिंग प्रतियोगिता विजेता इशरानी बरुआ और देविका सिहाग के साथ तमिलनाडु की श्रेया बालाजी और श्रीनिधि एन शामिल होंगी।
टीम इस प्रकार है:
लड़कों का एकल वर्ग: भरत राघव, शंकर मुथुसामी एस, आयुष शेट्टी।
लड़कियों का एकल वर्ग: उन्नति हुड्डा, एस रक्षिता श्री, अनुपमा उपाध्याय।
लड़कों का युगल वर्ग: अर्श मोहम्मद/अभिनव ठाकुर, निकोलस नाथन राज/तुषार सुवीर।
लड़कियों का युगल वर्ग: इशरानी बरुआ/देविका सिहाग, श्रेया बालाजी/श्रीनिधि एन।
मिश्रित युगल: समरवीर/राधिका शर्मा, विघ्नेश थथिनेनी/श्री साई श्रव्य लक्कमराजू।

एयर इंडिया अगले 15 महीनों में अपने बेड़े में 30 विमानों को शामिल करेगी

नयी दिल्ली । एयर इंडिया ने कहा कि वह इस साल दिसंबर से अपने बेड़े में 30 नए विमानों को शामिल करेगी, जिसमें चौड़ी बॉडी वाले पांच बोइंग विमान शामिल हैं। टाटा के स्वामित्व वाली एयरलाइन अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को बढ़ाना चाहती है, जिसके तहत यह विस्तार किया जा रहा है। एयरलाइन ने अगले 15 महीनों में चौड़ी बॉडी वाले पांच बोइंग विमान और पतली बॉडी वाले 25 एयरबस विमानों को शामिल करने के लिए पट्टों और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए हैं।
एयर इंडिया ने एक बयान में कहा, ‘इन नये विमानों से एयरलाइन के बेड़े में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होगी। ये विमान 2022 के अंत से परिचालन शुरू करेंगे। हाल के महीनों में परिचालन में वापस आने वाले संकरी बॉडी वाले 10 विमानों और चौड़ी बॉडी वाले छह विमानों को छोड़ दें तो ये नए विमान एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद पहले बड़े विस्तार का प्रतीक हैं।’
टाटा समूह ने इस साल इंडिया का अधिग्रहण किया था। पट्टे पर लिए जा रहे विमानों में 21 एयरबस ए320 नियो, चार एयरबस ए321 नियो और पांच बोइंग बी777-200एलआर शामिल हैं।

ट्रैफिक में फंसे तो छोड़ दी कार, 3 किमी दौड़कर सर्जरी कर डॉक्टर ने बचाई मरीज की जान

बंगलुरु । कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक डॉक्टर ने समय पर अस्पताल पहुंचकर अपने मरीज की सर्जरी करने के लिए जो रास्ता अपनाया। वह देश के लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। उन्होंने रोजमर्रा के ट्रैफिक को अपने काम के आड़े नहीं आने दिया।
बेंगलुरु के सरजापुर के मणिपुर अस्पताल में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी सर्जन डॉक्टर गोविंद नंदकुमार 30 अगस्त की सुबह हमेशा की तरह अपने घर से अस्पताल के लिए निकले थे। उन्हें उस दिन सुबह 10 बजे एक महिला की इमरजेंसी लेप्रोस्कोपिक गॉलब्लैडर सर्जरी करनी थी लेकिन सरजापुर-माराथली स्ट्रैच पर वह भयंकर ट्रैफिक में फंस गए।
यह भांपकर कि ट्रैफिक से होने वाली देरी के चलते उनके मरीज की समय पर सर्जरी नहीं होने से खतरा हो सकता है। डॉ. नंदकुमार बिना सोचे-समझे अपनी कार को सड़क पर ही छोड़कर पैदल अस्पताल की ओर दौड़ने लगे। यह उनकी कर्तव्यनिष्ठा ही थी कि वह महिला की सर्जरी समय पर करने के लिए तीन किलोमीटर दौड़कर अस्पताल पहुंचे और समय पर सर्जरी कर महिला की जान बचा ली।
इस पूरे मामले पर डॉ. गोविंद का कहना है, मैं रोजाना सेंट्रल बेंगलुरु से सरजापुर (मणिपुर हॉस्पिटल) तक का सफ़र कार से तय करता हूँ। मैं सर्जरी के लिए समय पर घर से निकला था। अस्पताल में मेरी टीम ने भी सर्जरी की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन मैं इस भयावह ट्रैफिक में फंस गया. मैंने बिना देरी किए कार वहीं छोड़ दीं और बिना कुछ सोचे समझे पैदल ही अस्पताल की ओर भागने लगा।
उन्होंने कहा, इस दूरी को तय करने में आमतौर पर 10 मिनट का समय लगता है लेकिन ट्रैफिक इतना भयंकर था कि मैंने गूगल मैप में जाँच की। गूगल मैप से पता चला कि इस दूरी को पूरा करने में 45 मिनट लग सकते हैं। इसलिए मैंने कार छोड़कर पैदल दौड़कर ही अस्पताल जाने का फैसला किया। मेरे पास ड्राइवर था तो मैं गाड़ी में ड्राइवर को छोड़कर आश्वस्त होकर अस्पताल की ओर दौड़ने लगा।
उन्होने कहा, यह मेरे लिए आसान था क्योंकि मैं रोजाना जिम जाता हूँ। मैं अस्पताल पहुंचने के लिए तीन किलोमीटर दौड़ा और समय पर सर्जरी की।
हालांकि, यह कोई पहली घटना नहीं है कि उन्हें इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा है. वह कहते हैं, ‘मैं बेंगलुरु के अन्य इलाकों में पहले भी इसी तरह जा चुका हूँ। मैं चिंतित नहीं था क्योंकि हमारे मरीज की देखभाल के लिए अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ और संरचना है लेकिन छोटे अस्पतालों में यह स्थिति नहीं हो सकती।’
बता दें कि डॉ. गोविंद नंदकुमार सरजापुर के मणिपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी सर्जन है। महिला को तुरंत सर्जरी की जरूरत थी क्योंकि वह लंबे समय से गॉलब्लैडर की बीमारी से जूझ रही थी। सर्जरी में विलम्ब से उनका पेट दर्द बढ़ सकता था।

बालों की हर समस्या का एक ही समाधान- गुड़हल का फूल

घने, लंबे और मजबूत बाल किसे नहीं चाहिए होते। आज की जीवनशैली में लड़के हो या लड़कियां, बालों की समस्या से हर कोई परेशान है। केमिकल और धूल-मिट्टी की वजह से बाल बेजान होते जा रहे हैं। बालों की समस्या को दूर करने के लिए आपको एक बार देसी नुस्खे भी आजमाने चाहिए। आज हम आपको बताने जा रहे हैं गुड़हल के फूल के वो फायदजो शायद ही आप जानते होंगे। यह एक ऐसा फूल है। जो आपके बालों की सेहत को सुधार सकता है। इसके इस्तेमाल से बालों की चमक वापस आती है। बाल झड़ना कम हो जाते हैं और उनकी मजबूती भी बनी रहती है. आइए जानते हैं इसके इस्तेमाल का तरीका…
गुड़हल के फूल से चमकदार होंगे बाल
अगर आपके बालों की चमक कम हो गई है या इसकी नमी खो गई है तो आप गुड़हल के फूल से इनमें जान डाल सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले गुड़हल के फूल की पंखुड़ियां लें और उसे अच्छी तरह से पीस लें। फिर इस पेस्ट को एलोवेरा जेल में अच्छी तरह से मिला लें। अब बालों की जड़ों से सिरे तक इसे लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें। करीब एक घंटे तक ऐसा रहने दें और फिर इसे धो लें। सप्ताह में दो बार ऐसा करने से बाल खूबसूरत और चमकदार बन जाते हैं।

शैंपू की बजाय गुड़हल से धोएं बाल
बाल टूट रहे या झड़ रहे हैं तो आप शैंपू की जगह अपने बालों को गुड़हल से धोएं। सबसे पहले गुड़हल के फूल को सुखा लें और उसका पाउडर बना लें। अब इस पाउडर में बेसन मिलाकर उसे बालों पर लगाएं और फिर बालों को धो लें। ऐसा करने से बेजान बालों में जान आ जाएगी और घने और मजबूत बाल बन जाएंगे।
डैंड्रफ से मिलेगा छुटकारा
अगर बालों में डैंड्रफ से परेशान हैं तो गुड़हल के फूल बड़े काम आ सकते हैं। आप गुड़हल के फूल को अच्छी तरह पीस कर इसमें मेहंदी का पाउडर और नींबू का रस अच्छी तरह मिला लें। अब इस पेस्ट को बालों में लगाएं और करीब एक घंटे तक रख दें। इसके बाद बालों को धो लें। सप्ताह में दो से तीन बार ऐसा करने से ड्रैंडफ की समस्या खत्म हो जाएगी।
लंबे बाल चाहिए तो गुड़हल का फूल लगाइए
अगर आपके बाल छोटे हैं और बढ़ नहीं रहे। आप चाहती हैं कि आपके बाल लंबे हो जाएं तो आप गुड़हल के फूल का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए आपको गुड़हल के फूल को आंवला पाउडर के साथ मिलाकर बालों में लगाना होगा। इससे बालों को पोषण मिलेगा और बाल बढ़ेंगे।

(साभार – एबीपी न्यूज)

अभियंता दिवस पर विशेष – महान अभियंता एम. विश्वेश्वरैया को जानिए

आज 15 सितंबर की तारीख को देश हर साल इंजीनियर्स डे के रूप में मनाता है। इस दिवस का आयोजन भारत के महान इजीनियर एम विश्वेश्वरैया के योगदान को सम्मान देने के लिए किया जाता है। भारत में हर साल लाखों की संख्या में छात्र इंजीनियर बनते हैं। आइए जानते हैं इस महान अभियंता को और जानते हैं इंजीनियर्स डे का इतिहास

भारत रत्न से सम्मानित थे एम विश्वेश्वरैया

इंजीनियर्स डे देश के महान इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को ही समर्पित है। आधुनिक भारत के बांधो, जलाशयों और जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण में उन्होंने काफी अहम योगदान दिया था। उनके इस योगदान के सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया था।

विभिन्न कार्यों में निभाई थी अहम भूमिका

भारत रत्न से सम्मानित एम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को मैसूर के कोलार जिले के एक तेलुगू परिवार में हुआ था। उनके पिता श्रीनिवास शास्त्री संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेद के डॉक्टर थे। उन्होंने 1883 में पूना के साइंस कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। एम विश्वेश्वरैया द्वारा मैसूर में किए गए आधुनिक विकास कार्यों के कारण उन्हें मॉर्डन मैसूर का पिता भी कहा जाता है। उन्होंने मांड्या जिले में बने कृष्णराज सागर बांध निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। साल 1962 में 102 साल की उम्र में डॉ. मोक्षगुंडम का निधन हुआ।
(साभार – अमर उजाला)
इंजीनियर्स डे पर प्रैक्सिस ने दी बधाई

इंजीनियर्स डे पर प्रैक्सिस बिजनेस स्कूल फाउंडेशन के सह संस्थापक एवं निदेशक प्रो. चरणप्रीत सिंह ने बधाई दी है। उन्होंने कहा कि अगर आप इसके बारे में सोचते हैं तो जब से आविष्कारों की परम्परा शुरू हुई और मनुष्य ने आग जलाना सीखा, तभी से मानव जाति तकनीक का उपयोग करती आ रही है। इंजीनियर तकनीक के इन छोटे – छोटे हिस्सों से हमारे जीवन को उन्नत करते हैं। इंजीनियर्स डे की शुभकामनाएं।
प्रैक्सिस बिजनेस स्कूल के निदेशक प्रो. डॉ. पृथ्वीश मुखर्जी ने कहा कि लिखित सिद्धांतों से लेकर व्यावहारिक बनाने तक, डिजाइन से लेकर विकसित करने तक, डेटा साइंस से डेटा इंजीनियरिंग तक प्रैक्सिस इंजीनियर्स डे पर शिक्षा के प्रति अपने दृष्टिकोण को दोहराराता रहा है।

 

भारत की पहली महिला इंजीनियर ए ललिता

ए ललिता देश की पहली महिला इंजीनियर मानी जाती हैं। उनका पूरा नाम अय्योलासोमायाजुला ललिता था। ए ललिता का का जन्म चेन्नई में 27 अगस्त, 1919 को हुआ था। पिता पप्पू सुब्बा राव खुद भी एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे। सात भाई-बहनों में ए ललिता पांचवी नंबर पर थीं। जिस वक्त उन्होंने पढ़ाई करने की सोची, उस समय लड़कियों को केवल बेसिक शिक्षा तक ही पढ़ाया जाता था। ए ललिता ने किसी तरह 12वीं तक की पढ़ाई की और फिर 15 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई।

कठिनाई, संघर्ष लेकिन हार नहीं मानी
शादी के वक्त ए ललिता की उम्र काफी कम थी। उन्होंने पढ़ाई की जिद की तब माता-पिता ने कहा कि शादी के बाद वे आगे की पढ़ाई कर सकती हैं। लेकिन जब ललिता 18 साल की हुई तब उनकी बेटी का जन्म हुआ। मां बनने के चार महीने में ही पति भी दुनिया छोड़कर चले गए। उस वक्त भारतीय समाज में किसी विधवा महिला के साथ का व्यवहार अच्छा नहीं ंहोता था। लेकिन ए ललिता ने अपना सफर खत्म न करते हुए खुद और बेटी दोनों के लिए बेहतर जीवन का दृढ़ निश्चय लिया।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई
इसके बाद ललिता ने इंजीनियरिंग कॉलेज, गिंडी, मद्रास विश्वविद्यालय में से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। चार साल के कोर्स में जब उन्होंने एडमिशन  लिया, तब टेक्निकल ट्रेनिंग सिर्फ पुरुषों के लिए ही मानी जाती थी। उस वक्त उनके पिता ने बेटी का साथ दिया और बेटी को दाखिला दिलाने में कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. केसी चाको से बात कर बेटी को आगे बढ़ाने का काम किया। कॉलेज से डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने बिहार के जमालपुर में रेलवे वर्कशॉप में बतौर अपरेंटिस काम शुरू किया और फिर केंद्रीय मानक संगठन, शिमला में बतौर सहायक इंजीनियर नौकरी की। करीब दो साल बाद आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते उन्हें कलकत्ता में एसोसिएटेड इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज में जाना पड़ा लेकिन तब तक उनकी पहचान एक बेहतर इंजीनियर के तौर पर बन चुकी थी।

ए ललिता का योगदान
ए ललिता जब कलकत्ता के एआईआईन में थीं, तब उन्होंने भाखड़ा नांगल बांध जैसी भारत के सबसे बड़े बांध की परियोजनाओं पर काम किया। ट्रांसमिशन लाइनों को डिजाइन करने और दूसरी बार प्रोटेक्टिव गियर, सबस्टेशन लेआउट और कॉन्ट्रेक्ट संभालने का काम ए ललिता करती थीं। इस काम की बदौलत उनकी छवि विश्वस्तर पर पहुंची और इंजीनियरिंग में उन्होंने अलग ही पहचान बनाई। 60 साल की उम्र में साल 1979 में उनका निधन हो गया।

दुर्गोत्सव 2022 – हाजरा पार्क दुर्गोत्सव कमेटी की पूजा में थीम बना ‘तांडव’

कोलकाता । हाजरा पार्क दुर्गोत्सव कमेटी के सदस्य प्रत्येक वर्ष अपने मंडप में अलग-अनोखे थीम के जरिए नए विचारों को सामने लाकर दर्शकों को अचंभित करने की कोशिश करते हैं। दक्षिण कोलकाता की इस दुर्गापूजा कमेटी ने इस बार आकर्षक थीम ‘तांडव’ की रचना पर मंडप को गढ़ा है। हाजरा पार्क दुर्गोत्सव कमेटी इस वर्ष 80वें वर्ष में पदार्पण कर चुकी है। ‘तांडव थीम’ दुनिया के वर्तमान परिदृश्य से संबंधित विषय को रखकर बनाया गया है। इस थीम के जरिए मानव जीवन का कुछ अनोखे पल को दिखाने की कोशिश की गई है। यह पूजा मंडप हाजरा क्रॉसिंग (जतिन दास पार्क के भीतर) पर स्थित है।

ब्रह्माण्ड विज्ञान के अनुसार हिन्दू शास्त्रों में विज्ञान को ‘तांडव’ का वैज्ञानिक सत्य बताया गया है जो प्रतिदिन अनदेखे सृष्टि के रूप में लगातार घटित हो रहा है। ब्रह्मांड के विभिन्न स्तरों पर होने वाली अस्थिरता में विनाश और सृजन का दैनिक चक्र निर्मित होता है, जो संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, तांडव हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है, जो हमारी जानकारी के साथ या इससे परे होती है।
ड्रम की ध्वनि से निकलने वाले महान ऊर्जा तरंगों की धुन मानव शरीर में तरंगों के रूप में पहुंचती है। इस तरह से संपूर्ण ब्रह्मांड ऊर्जा का एक स्रोत बन जाता है। जिसके बाद फिर से एकल ऊर्जा रूपांतरित हो जाती है और ब्रह्मांड एकल ऊर्जा का भंडार बन जाता है, जिसके बाद वह बहुआयामी ऊर्जा में रूपांतरित हो जाता है। यही ‘तांडव’ की मूल बातें हैं।
यह केवल एक घटना नहीं है, जो किसी विशेष क्षण में घटित होती है, तांडव वास्तव में ब्रह्मांड की एक सतत प्रक्रिया है, जिसे हम आमतौर पर परमात्मा के दृष्टिकोण से जानते हैं। हाजरा पार्क में इस वर्ष की दुर्गा पूजा के लिए हमारा विषय इस प्रकार जीवन की इस शक्ति को प्रदर्शित करने का प्रयास करना है। हम दिखाते हैं कि कैसे यह मानव जीवन और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कलाकार के तांडव की छाप एक वास्तविक हिस्सा बन गया है।

हाजरा पार्क दुर्गोत्सव समिति के संयुक्त सचिव सायनदेव देब चटर्जी ने कहा कि, ‘इस वर्ष का विषय ब्रह्मांड की निरंतर प्रक्रिया के बारे में जानने की, इसे अनुभव जाने की कोशिश करना है। तांडव, वास्तव में मानव जीवन का एक भौतिक दस्तावेज है। यह मूल रूप से कोई विशिष्ट क्षण नहीं है, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। सृष्टि के सिद्धांत के अनुसार इस ब्रह्मांड में कहीं न कहीं प्रतिदिन हिंसा होती रहती है। ब्रह्मांड के विभिन्न स्तरों पर होने वाली अस्थिरता में विनाश और सृजन के भंडार बनते रहते हैं। भवानीपुर में कुछ वर्षों के लिए दुर्गापूजा आयोजित की गई थी। इसे 1945 में हाजरा पार्क में स्थानांतरित कर दिया गया। प्रारंभ से ही इस पूजा ने भेदभाव के खिलाफ बात की है।

इस थीम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि, मानव होने के नाते हम अतीत के अपने अनुभव के आधार पर बेहतर कल के निर्माण की आशा के साथ संघर्ष करते रहे। परिवर्तन जीवन का एक हिस्सा है, क्योंकि कुछ भी लंबे समय तक

फ्लिपकार्ट के द बिग बिलियन डेज का पेमेंट पार्टनर बना पेटीएम

कोलकाता । पेटीएम ने फ्लिपकार्ट के प्रमुख कार्यक्रम – द बिग बिलियन डेज़ (टीबीबीडी) के साथ अपनी साझेदारी की घोषणा की। इस साझेदारी के साथ, पेटीएम पेटीएम यूपीआई और पेटीएम वॉलेट के माध्यम से किए गए भुगतान पर रोमांचक कैशबैक की पेशकश कर रहा है।
द बिग बिलियन डेज़ के दौरान, फ्लिपकार्ट पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों को पेटीएम यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने पर ₹250 और उससे अधिक की खरीदारी पर ₹25 का तत्काल कैशबैक और पेटीएम वॉलेट के माध्यम से ₹500 और उससे अधिक के खर्च पर ₹50 का तत्काल कैशबैक प्राप्त होगा।
पेटीएम भारत में डिजिटल भुगतान का चैंपियन है। कंपनी अपने नवाचारों के साथ भारत की डिजिटल क्रांति में सबसे आगे रही है जो रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाती है। पेटीएम के मजबूत बहु-भुगतान ढांचे ने देश में वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाते हुए अधिक से अधिक अपनाने को सुनिश्चित किया है।
पेटीएम के प्रवक्ता ने कहा, ‘द बिग बिलियन डेज के लिए पेमेंट पार्टनर के रूप में फ्लिपकार्ट के साथ हमारा जुड़ाव भारत के छोटे शहरों और कस्बों के लाखों खरीदारों को सुरक्षित भुगतान का अनुभव प्रदान करेगा। डिजिटल भुगतान के अग्रणी के रूप में, यह पेटीएम यूपीआई और पेटीएम वॉलेट जैसे हमारे उपकरणों के साथ पहुंच बढ़ाने के हमारे दृष्टिकोण के अनुरूप है।
दो घरेलू ब्रांडों के बीच यह साझेदारी ग्राहकों को उत्सव के आयोजन में आराम से खरीदारी और भुगतान अनुभव का आश्वासन देगी। इसके साथ, द बिग बिलियन डेज के दौरान फ्लिपकार्ट पर खरीदारी करने वाले उपयोगकर्ताओं को पेटीएम के साथ तेज, परेशानी मुक्त और सुरक्षित चेकआउट का लाभ मिलेगा।

भवानीपुर कॉलेज में भारतीय समाज में लिंग विषयक जीवन कौशल दृष्टिकोण पर संगोष्ठी 

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति द्वारा तेरह सितंबर को कॉलेज के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के सहयोग से और उम्मीद द्वारा समर्थित “भारतीय समाज में लिंग कथा – जीवन कौशल दृष्टिकोण” पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में बीस छात्र और चौबीस संकाय और कर्मचारी प्रतिभागी थे। सत्र का संचालन उम्मीद परामर्श और परामर्श सेवाओं की संस्थापक निदेशक सुश्री सलोनी प्रिया ने किया। सत्र बहुत जानकारीपूर्ण था और प्रतिभागियों को लैंगिक मुद्दों के संदर्भ में संवेदनशील विषय पर अपने महत्वपूर्ण विचारों को व्यक्त । संगोष्ठी में प्रवचन और चर्चाओं ने भारतीय समाज में लिंग भूमिकाओं और पारस्परिक संबंधों को आकार देने में कथाओं के प्रभाव से संबंधित प्रश्न उठाए। इसने प्रतिभागियों को चुनौतीपूर्ण लिंग रूढ़ियों और लिंग भूमिकाओं की आवश्यकता पर प्रबुद्ध किया और उन्हें जीवन कौशल से लैस करने में मदद की, ताकि हम सभी बेहतर कल के लिए पथप्रदर्शक के रूप में विकसित हो सकें। अंतिम लेकिन कम से कम, संवादात्मक सत्र बहुत आकर्षक था, जहां कई प्रतिभागियों ने विचारोत्तेजक प्रश्न और अवलोकन उठाए जो उन्हें सामाजिक वातावरण में अच्छी तरह से व्यक्तियों को समायोजित और संतुलित रूप से विकसित करने में मदद करने के लिए सहायक होंगे।इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।