Thursday, July 9, 2026
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दक्षिण कोलकाता तेरापंथ विंग के युवा परिषद ने आयोजित किए 35 से अधिक रक्तदान शिविर

विश्व के सबसे बड़े रक्तदान शिविर का आयोजन

कोलकाता । दक्षिण कोलकाता तेरापंथ विंग के युवा परिषद द्वारा “रक्तदान में इतिहास” बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए “मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव” (एमबीडीडी) अभियान के तहत पूरे महानगर में 36 रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया। इस रक्तदान शिविर का उद्घाटन जय तुलसी फाउंडेशन के मुख्य ट्रस्टी श्री तुलसी दुगड़ ने किया। इस स्वर्णिम कार्य में दक्षिण कोलकाता तेरापंथ युवा परिषद के अध्यक्ष रोहित दुगड़, कमल सेठिया, कमल कोचर, शैलेंद्र बोरार, प्रवीण सिरोहिया, मनोज दुगड़, संदीप सेठिया, सौरव श्यामसुखा 108 एसडीपी डोनर, मनीष सेठिया, मनोज नाहटा, नरेंद्र सिरोहिया, मोहित दुगड़, अमित पुगलिया, संदीप मनोत, आनंद मनोत, आनंद बर्दिया, अंकित दुगड़ , अनिल सिंघी, भूपेंद्र दुगड़, अजय कोचर के साथ समाज की कई अन्य प्रख्यात हस्तियां मौजूद थे।

दक्षिण कोलकाता तेरापंथ युवा परिषद की ओर से महानगर के इन स्थानों पर ने रक्तदान शिविर का आयोजन किया: सीईटीए, इजरा स्ट्रीट; आरोग्य मैटरनिटी होम, न्यू अलीपुर उद्यान, न्यू अलीपुर, टाटा मेडिकल सेंटर, बगुईहाटी सांस्कृतिक सेवा सदन, बाबोसा भक्त मंडल, इको पार्क, व्योम, तेरापंथ भवन, भवानीपुर तेरापंथ भवन, भवानीपुर में बीएनआई एपिक नीलकंठ, कैमक स्ट्रीट इलेक्ट्रो पावर, बारासात बालाजी ट्रेडर्स, मध्यमग्राम ईस्ट एंड गार्डन, मेफेयर रोड एक्वाटेरा, तेरापंथ भवन, भवानीपुर सिंधी औषधालय, मिर्जा गालिब स्ट्रीट, स्प्रिंग क्लब, हाइजीनिक पॉलिमर, दानकुनी, महावीर सेवा सदन, ग्रीनफील्ड सिटी, दादपुर मोटर्स, बालाजी रोटोमोल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, सिद्ध वेस्टन, आईसीए एडुस्किल्स, सेक्टर 5, फ्लोरा फाउंटेन, फ्लोरा फाउंटेन आरसीटीसी, रेसकोर्स आईसीएआई भवन, रसेल सेंट पीएस ग्रुप, ईएम बाईपास, हेल्थ प्वाइंट क्लिनिक, सोदपुर, कलकत्ता चैंबर ऑफ कॉमर्स, पार्क सेंट, रोवलैंड पैलेस, रोलैंड रोड, विक्टोरिया मेमोरियल, बीच टी एस्टेट, हासीमारा, कमांड अस्पताल अलीपुर, अपोलो अस्पताल, चितरंजन अस्पताल, मानिकतल्ला दादाबाड़ी में इस शिविर का आयोजन किया गया।

इस मौके पर दक्षिण कोलकाता तेरापंथ युवा परिषद के अध्यक्ष श्री रोहित दुगड़ ने कहा, महानगर के कई जगहों पर जिनमे दक्षिण कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल, सीए इंस्टीट्यूट रसेल स्ट्रीट, आरसीटीसी रेस कोर्स पद्दोपुकुर में तेरापंथ भवन और ऐसे कई स्थान में अलग से कई प्रतिष्ठित स्व-प्रेरित रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं,एल। हम अपने सभी सहयोगियों, दाताओं और विशेष रूप से साउथ सभा, महिला मंडल और टीपीएफ दक्षिण कोलकाता का इस महोत्सव के आयोजन का समर्थन के लिए बहुत आभारी हैं। हमारा उद्देश्य न केवल रक्तदान के माध्यम से रक्त एकत्र करना है, बल्कि एक डेटा-बैंक बनाना और इसे देश को समर्पित करना है, जिससे भविष्य में आपातकालीन स्थितियों में रक्तदाताओं को फिर से जोड़ा जा सके और रक्त की आवश्यकताओं को पूरी तरह से पूरा किया जा सके। रक्तदान जरूरतमंदों के लिए जीवनदान है।

कोरोना महामारी के ब से स्वैच्छिक रक्तदान करनेवाले लोगों की भारी कमी हो गई है, जिसके कारण ब्लड बैंकों में खून की कमी होना आम बात है। रक्त का कोई विकल्प नहीं है। भारत में लगभग 52 करोड़ स्वस्थ लोगों और योग्य रक्तदाताओं के साथ 135 करोड़ से अधिक की आबादी है। अगर वे स्वेच्छा से रक्तदान करते हैं, तो देश के ब्लड बैंकों में रक्त की कभी कमी नहीं होगी। भारत में रक्तदान नियमों के अनुसार, 18 से 65 वर्ष की आयु के बीच कोई भी स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में स्वेच्छा से रक्तदान कर सकता है। प्रत्येक मानव शरीर में नए रक्त निर्माण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है, अर्थात पुरानी रक्त कोशिकाएं लगभग 120 दिनों का अपना जीवन काल पूरा करने के बाद नए रक्त के लिए जगह बनाती हैं। हमारे शरीर की नसों में लगभग 5 से 6 लीटर खून हमेशा बहता रहता है। रक्तदान करना एक बड़ा पुण्य कार्य माना जाता है। हर मानव को बढ़-चढ़ कर इस पुण्य कार्य में आगे आना चाहिए |

सम्मानित किए गए बीएचएस के मेधावी छात्र

कोलकाता । बिड़ला हाई स्कूल ने एआईएसएससीई 2022 के विद्यार्थियों को सम्मानित किया। बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने जा रहे मेधावी विद्यार्थियों को विद्या मंदिर सोसायटी द्वारा सम्मानित किया गया। विजेताओं को 50 ग्राम चांदी से मढ़ा 5 ग्राम सोने से बना एल.एन. बिड़ला उत्कृष्टता पदक, प्रमाणपत्र एवं पुस्तकों के लिए कूपन प्रदान किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन बिड़ला हाई स्कूल की प्रिंसिपल लवलीन सैगल, बिड़ला हाई स्कूल की निदेशक मुक्ता नैन, विद्या मंदिर सोसायटी के महासचिव मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) वी. एन. चतुर्वेदी, विद्या मंदिर सोसायटी के उपमहासचिव टी. बेरा ने किया। स्कूल के जूनियर सेक्शन के छात्रों ने लघु मंत्र एवं रवीन्द्र संगीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) वी. एन. चतुर्वेदी ने कहा सफलता ही उत्कृष्टता नहीं है। उन्होंने विजेताओं एवं दर्शक दीर्घा में बैठे बारहवीं के विद्यार्थियों को बधाई दी।
समारोह में पुरस्कृत होने वाले छात्र
अंगद राएत – साइंस स्ट्रीम के छात्र अंगद ने एआईएसएससीई 2022 में 98.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। मैथेमेटिक्स एवं केमेस्ट्री में शत – प्रतिशत अंक प्राप्त किए। फिजिक्स एवं कम्प्यूटर साइंस में 99 अंक मिले। पश्चिम बंग ज्वाएंट एन्ट्रेंस की परीक्षा में 124 रैंक प्राप्त किया है।
अमन बगड़िया – कॉमर्स टॉपर अमन बगड़िया ने ने एआईएसएससीई 2022 परीक्षा में 98.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। उसने बिजनेस स्टडीज एवं ऑन्ट्रोप्रेनियरशिप में शत प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। मैथेमेटिक्स, अकाउंटेंसी, इकोनॉमिक्स में 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। घुटनों की सर्जरी के कारण अमन समारोह में उपस्थित नहीं हो सका था। उसके अभिभावकों ने उसकी जगह पुरस्कार ग्रहण किया।
भास्कर अग्रवाल – भास्कर अग्रवाल ने एआईएसएससीई 2022 में 98.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। वाद – विवाद में निपुण है और अशोक हाउस का कैप्टन रह चुका है। मैथेमेटिक्स एवं अकाउंटेंसी में उसे शत – प्रतिशत अंक मिले हैं जबकि बिजनेस स्टडीज एवं इकोनॉमिक्स में 99 अंक मिले हैं।
शौर्य सौरभ – 96.2 प्रतिशत अंक पाकर ह्यूमैनिटीज का टॉपर रहा है। पॉलिटिकल साइंस में शौर्य को शत -प्रतिशत, सोशियोलॉजी एवं फिजिकल एडुकेशन में 99 अंक मिले हैं। शौर्य को प्रतिष्ठित मनीष बैज मेमोरियल प्राइज भी मिला है जो किसी एक स्ट्रीम के टॉपर को दिया जाता है। वह यू ट्यूबर है और ब्लॉगिंग वेबसाइट का संस्थापक भी।
पुष्कर पांडेय – पुष्कर को एआईएसएससीई 2022 में 97.8 अंक मिले हैं। वाद – विवाद में निपुण और स्कूल के सम्पादकीय बोर्ड का सदस्य है। वह एल. एन. बिड़ला डिबेट की विजेता टीम का भी सदस्य था। मैथेमेटिक्स एवं बायोलॉजी में उसे शत प्रतिशत अंक और फिजिक्स एवं केमेस्ट्री में 99 अंक मिवे हैं। वह अखिल भारतीय स्तर पर 62वाँ स्थान पाकर केवीपीवाई फेलो बना और जादवपुर विश्वविद्यालय में इतिहास पढ़ रहा है।
नक्षत पांडेय – एआईएसएससीई 2022 में नक्षत को 97.6 प्रतिशत अंक मिले। वह एल.एन. बिड़ला मेमोरियल डिबेट 2021 एवं ऑल इंडिया प्लेटिनम जुबली डिबेट में सर्वश्रेष्ठ वक्ता चुना गया। फिजिक्स एवं कम्प्यूटर साइंस में उसे 99 अंक मिले। जेबीएनएसटीएस में देश भर में उसे 55वाँ, एनटीएसई 2019 में 175वाँ स्थान मिला। पश्चिम बंग ज्वाएंट एन्ट्रेंस की परीक्षा में नक्षत को 109वां स्थान मिला।
सभी विजेताओं को स्कूल की अल्यूमनी के सदस्य गौरव वसा द्वारा पुस्तक कूपन मिले।

प्रतिभा सिंह तीसरी बार बनीं वीरांगना प्रदेश कार्यकारिणी की अध्यक्ष

कोलकाता । अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फाउंडेशन पश्चिम बंगाल की समस्त इकाइयों की नयी कार्यकारिणी का गठन लिलुआ में आयोजित एक बैठक में सर्वसम्मति से किया गया। जिनमें से कुछ पदों पर मामूली हेरफेर हुआ और कुछ नये पदाधिकारी व सदस्य बनाये गये।  प्रदेश कार्यकारिणी में फिर से अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, उपाध्यक्ष रीता राजेश सिंह, महासचिव प्रतिमा सिंह, कोषाध्यक्ष पूजा सिंह, संयुक्त सचिव ममता सिंह, संगठन सचिव किरण सिंह व सुमन सिंह और जनसम्पर्क सचिव पूनम सिंह बनायी गयीं। प्रख्यात गायिका प्रतिभा सिंह तीसरी बार वीरांगना प्रदेश अध्यक्ष बनायी गयी हैं। कोलकाता महानगर इकाई की सरंक्षक गिरिजा दारोगा सिंह व गिरिजा दुर्गादत्त सिंह, अध्यक्ष मीनू सिंह, उपाध्यक्ष ललिता सिंह, महासचिव इंदु सिंह, कोषाध्यक्ष संचिता सिंह,  सचिव विद्या सिंह, संयुक्त सचिव सुनीता सिंह व सरोज सिंह, सदस्य रेखा सिंह, मीरा सिंह, पूनम सिंह बनायी गयीं। सोदपुर इकाई की अध्य़क्ष सुनीता सिंह, उपाध्यक्ष सुलेखा सिंह, महासचिव आशा सिंह, कोषाध्यक्ष रीता सिंह, सचिव मंजू सिंह, संयुक्त सचिव जयश्री सिंह, बालीगंज इकाई की अध्यक्ष रीता सिंह, उपाध्यक्ष मीरा देवी सिंह तथा महासचिव दीपमाला सिंह, सदस्य शैला सिंह और नारी शक्ति वीरांगना की सदस्य अनीता साव, अनिशा मुखर्जी, शकुंतला साव, काजल गुप्ता, मीनू तिवारी, सुनीता शर्मा, स्तुति शर्मा, बेबीश्री बनायी गयीं।

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का निधन

लंदन । महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का निधन हो गया।  .वह 96 साल की थीं और कुछ समय से चिकित्सा निगरानी में थीं। उन्होंने स्कॉटलैंड में अपने निवास बालमोराल कासल में अंतिम सांस ली। सबसे लंबे समय तक ब्रिटेन की गद्दी पर बैठने वाली महारानी की तबियत गत गुरुवार को खराब हो गयी। बकिंघम पैलेस के बयान में कहा गया है कि अब महारानी के उत्तराधिकारी प्रिंस चार्ल्स राजा हैं और उनकी पत्नी कैमिला पार्कर रानी हैं। वे अभी बालमोराल में ही हैं और सुबह लंदन लौटेंगे।

एलिजाबेथ भाग्यवश बनीं महारानी
एलिजाबेथ द्वितीय का जन्म 21 अप्रैल 1926 को यॉर्क के ड्यूक परिवार में हुआ था। जन्म के समय उनके राजगद्दी पर आने की कोई संभावना नहीं थी। एलिजाबेथ के जन्म के दस साल बाद उनके चाचा एडवर्ड ने राजगद्दी को प्यार के लिए ठुकरा दिया और एलिजाबेथ के पिता जॉर्ज ने गद्दी संभाली। इसके बाद उनकी बड़ी बेटी एलिजाबेथ क्राउन प्रिंसेस बनी।

भारत की आजादी के कुछ ही महीनों बाद 20 नवंबर 1947 को एलिजाबेथ ने ग्रीस के प्रिंस फिलिप से शादी की. एक साल बाद बेटे चार्ल्स का जन्म हुआ, अगस्त 1950 में बेटी ऐन का, 1960 में एंड्र्यू और 1964 में बेटे एडवर्ड का।

महारानी ने किया 16 प्रधानमंत्रियों के साथ काम
1952 में एलिजाबेथ कॉमनवेल्थ देशों की यात्रा पर थीं, जब उन्हें पिता किंग जॉर्ज VI के निधन की खबर मिली और 25 साल की उम्र में राजगद्दी की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. एक साल के शोक के बाद 2 जून 1953 को उनकी ताजपोशी हुई।
महारानी एलिजाबेथ यूनाइटेड किंगडम के अलावा ऑस्ट्रेलिया समेत 15 देशों की राष्ट्र प्रमुख थीं। संवैधानिक राजशाही में महारानी के रूप में उनकी जिम्मेदारी सांकेतिक थी। शुरू में अनुभवहीन महारानी अपनी शासन के शुरुआती दिनों से ही हर हफ्ते प्रधानमंत्री से मिलती और देश दुनिया की स्थिति पर चर्चा करतीं। 70 साल के कार्यकाल में उन्होंने 16 प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया जिनमें तीन महिला प्रधान मंत्री शामिल हैं।

पिछले साल ही हुआ था पति प्रिंस फिलिप का निधन
आम तौर पर महारानी को बहुत रिजर्व और कम संवेदनशील माना जाता था, लेकिन फिर भी वह जनता के बीच बहुत लोकप्रिय थी। संचार और लोगों से संपर्क के मामले में वह हमेशा समय के साथ रहीं और हाल में सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया। महारानी ने ग्रीस के कुमार प्रिंस फिलिप से शादी की। दोनों का साथ 73 साल तक रहा. 99 की उम्र में प्रिंस फिलिप का पिछले साल ही निधन हुआ था।

89.08 मीटर के थ्रो के साथ नीरज चोपड़ा ने जीती डायमंड लीग

खिताब जीतने वाले पहले भारतीय
ओलंपिक चैंपियन भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने शुक्रवार को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। नीरज चोपड़ा लुसाने डायमंड लीग 2022 जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। नीरज चोपड़ा ने 89.08 मीटर के अपने पहले थ्रो के साथ लुसाने डायमंड लीग जीती है।
हाल ही में नीरज ने भारत को वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक दिलाया था। अंजू बॉबी जॉर्ज (2003) के बाद वह ऐसा करने वाले सिर्फ दूसरे एथलीट बने। फाइनल में नीरज ने 88.13 मीटर दूर तक भाला फेंका था और रजत पदक अपने नाम किया था।
कॉमनवेल्थ गेम्स में नहीं हुए थे शामिल
वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जेवलिन फाइनल के दौरान नीरज चोपड़ा को चोट लगी थी। फाइनल में नीरज अपनी जांघ पर पट्टी लपेटते भी नजर आए थे। अब उसी चोट की वजह से नीरज कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे। 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम करने वाले नीरज चोट की वजह से 2022 में भाग नहीं ले पाए थे।
डायमंड लीग का ताज जीतने वाले पहले भारतीय
हरियाणा में पानीपत के पास खंडरा गांव का रहने वाले नीरज चोपड़ा डायमंड लीग का ताज जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। वहीं चोपड़ा से पहले, डिस्कस थ्रोअर विकास गौड़ा डायमंड लीग मीटिंग में शीर्ष तीन में रहने वाले एकमात्र भारतीय हैं। गौड़ा दो बार 2012 में न्यूयॉर्क में और 2014 में दोहा में दूसरे और 2015 में शंघाई और यूजीन दो मौकों पर तीसरे स्थान पर रहे थे। टोक्यो ओलंपिक के रजत पदक विजेता जैकब वाडलेज्च 85.88 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि यूएसए के कर्टिस थॉम्पसन 83.72 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
चोपड़ा ने 7 और 8 सितंबर को ज्यूरिख में डायमंड लीग फाइनल के लिए भी क्वालीफाई किया। वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय भी बने। उन्होंने बुडापेस्ट, हंगरी में 2023 विश्व चैंपियनशिप के लिए भी 85.20 मीटर क्वालीफाइंग मार्क को तोड़कर क्वालीफाई किया।

ऑस्कर की दौड़ में शामिल हुई असमिया लघु फिल्म

दूर्बा घोष

गुवाहाटी । पंद्रह मिनट की असमिया लघु फिल्म ‘मुर घुरार दुरंतो गोटी’ (स्वर्ग का घोड़ा) ने ऑस्कर पुरस्कार की लघु फिल्म (कथा) श्रेणी में भारतीय प्रवृष्टि के रूप में शामिल होने की अर्हता प्राप्त कर ली है। लघु फिल्म के निर्देशक महर्षि तुहीन कश्यप ने यह जानकारी दी।
‘मुर घुरार दुरंतो गोटी’ एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बयां करती है, जिसे लगता है कि उसके पास दुनिया का सबसे तेज रफ्तार घोड़ा है और वह शहर में होने वाली हर दौड़ में जीतना चाहता है। लेकिन उस व्यक्ति के पास वास्तव में कोई घोड़ा नहीं, बल्कि एक गधा होता है।
सत्ताइस वर्षीय कश्यप ने कहा, “अब जबकि हम भारतीय प्रवष्टि के रूप में शामिल होने के लिए अर्हता प्राप्त करने में सफल हो गए हैं तो यह एक सपने के सच होने जैसा है।”
‘मुर घुरार दुरंतो गोटी’ का निर्माण कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) में एक छात्र प्रोजेक्ट के रूप में किया गया था। यह लघु फिल्म हाल ही में आयोजित बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय लघु फिल्म महोत्सव (बीआईएसएफएफ) में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का अवॉर्ड जीतने में कामयाब रही थी। बीआईएसएफएफ ऑस्कर पुरस्कार में भारतीय प्रवृष्टि के रूप में भेजी जाने वाली फिल्मों के चयन के लिए एक क्वालिफाइंग फिल्म महोत्सव है।
फीचर फिल्मों के विपरीत एक लघु फिल्म को ऑस्कर में भेजे जाने के लिए उसका ऑस्कर से जुड़े एक क्वालिफाइंग फिल्म महोत्सव में पुरस्कार जीतना जरूरी होता है। बीआईएसएफएफ भारत में एकमात्र ऐसा फिल्मोत्सव है, जो अंतरराष्ट्रीय और भारतीय स्पर्धा की अपनी विजेता फिल्मों को ऑस्कर की लघु फिल्म (फिक्शन) श्रेणी में नामांकन के लिए भेजने के पात्र है।
बीआईएसएफएफ के निदेशक आनंद वरदराज ने कहा, “हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि महर्षि कश्यप द्वारा निर्देशित ‘मुर घुरार दुरंतो गोटी’ बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय लघु फिल्म महोत्सव-2022 की भारतीय स्पर्धा श्रेणी की विजेता है और यह ऑस्कर की लघु फिल्म (फिक्शन) श्रेणी में प्रवृष्टि के लिए पात्र होगी।”
‘मुर घुरार दुरंतो गोटी’ के निर्माण दल में एसआरएफटीआई के अंतिम वर्ष के छात्र शामिल हैं। इस लघु फिल्म के ज्यादातर हिस्से एसआरएफटीआई परिसर और संस्थान के स्टूडियो में फिल्माए गए हैं, जबकि कुछ हिस्सों की शूटिंग कोलकाता के बाहरी इलाके में की गई है।
कश्यप ने बताया कि एक छात्र के रूप में वे उस लंबे सफर के बारे में ज्यादा नहीं जानते, जिससे कोई फिल्म गुजरती है और उन्हें विशेषज्ञों से मदद व मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।
कश्यप, जिन्होंने फिल्म की पटकथा भी लिखी है, उन्होंने अपनी कहानी सुनाने के लिए असम की कहानी बयां करने वाली 600 साल पुरानी कला ‘ओजापाली’ का सहारा लिया है। ‘ओजापाली’ कलाकार गानों, नृत्य, इशारों और दर्शकों के साथ मजेदार संवाद का इस्तेमाल कर पौराणिक कथाओं से जुड़ी कहानियां सुनाते हैं।
कश्यप कहते हैं, “मुझे लगा कि फिल्म में हमारी कहानी को बयां करने के लिए यह कला बहुत दिलचस्प हो सकती है। यह कहानी कहने की पारंपरिक कला ‘ओजापाली’ को सिनेमा में पेश करने का एक औपचारिक प्रयास है।”

80 फीसदी प्रभावी पाई गयी मलेरिया रोधी टीके की बूस्टर खुराक : अध्ययन

लंदन । मलेरिया के टीके की तीन प्रारंभिक खुराक के एक साल बाद लगाई गई बूस्टर खुराक इस मच्छर जनित बीमारी के खिलाफ 70 से 80 फीसदी सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है। ‘द लांसेट इंफेक्शियस डिजीज’ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में यह जानकारी दी गई है।
ब्रिटेन स्थित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने मलेरिया रोधी टीके आर21/मैट्रिक्स-एम की बूस्टर खुराक लगाए जाने के बाद प्रतिभागियों पर किए गए 2-बी चरण के अनुसंधान के नतीजे साझा किए।
इस टीके का लाइसेंस सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के पास है। वर्ष 2021 में पूर्वी अफ्रीका के बच्चों पर किए गए अनुसंधान में यह टीका मलेरिया के खिलाफ 12 महीने तक 77 फीसदी सुरक्षा मुहैया कराने में प्रभावी मिला था।
ताजा अनुसंधान में अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि आर21/मैट्रिक्स-एम की तीनों प्रारंभिक खुराक के एक साल बाद लगाई गई बूस्टर खुराक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मलेरिया वैक्सीन टेक्नोलॉजी रोडमैप लक्ष्य पर खरी उतरती है, जिसके तहत टीके का कम से कम 75 फीसदी प्रभावी होना जरूरी है।
अनुसंधान में बुर्किना फासो के 450 बच्चे शामिल हुए, जिनकी उम्र पांच से 17 महीने के बीच है। इन्हें तीन समूहों में बांटा गया। पहले दो समूहों में शामिल 409 बच्चों को मलेरिया रोधी टीके की बूस्टर खुराक लगाई गई। वहीं, तीसरे समूह के बच्चों के रेबीज से बचाव में कारगर टीका दिया गया।
सभी टीके जून 2020 में लगाए गए। यह अवधि मलेरिया के प्रकोप के चरम पर होने से पहले की है। अनुसंधान में मलेरिया रोधी टीके की बूस्टर खुराक लगवाने वाले प्रतिभागियों में 12 महीने बाद इस मच्छर जनित बीमारी के खिलाफ 70 से 80 फीसदी प्रतिरोधक क्षमता पाई गई।
अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार, बू्स्टर खुराक लगाने के 28 दिन बाद प्रतिभागियों में ‘एंटीबॉडी’ का स्तर प्रारंभिक खुराक दिए जाने के स्तर जितना हो गया था। उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों में बूस्टर खुराक के बाद किसी भी तरह के गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखे गए।
मुख्य अनुसंधानकर्ता हलिदू टिंटो ने कहा, “टीके की महज एक बूस्टर खुराक से एक बार फिर ऐसी उच्च प्रतिरोधक क्षमता विकसित होते देखना शानदार है। हम मौजूदा समय में बहुत बड़े पैमाने पर तीसरे दौर का परीक्षण कर रहे हैं, ताकि अगले वर्ष तक इस टीके के व्यापक इस्तेमाल के लिए लाइसेंस जारी किया जा सके।”

इगा स्वियातेक बनी अमेरिकी ओपन की न मल्लिका

न्यूयॉर्क । जिस अमेरिकी ओपन टेनिस टूर्नामेंट में शुरू से लेकर आखिर तक सेरेना विलियम्स चर्चा में रही, उस फ्लशिंग मीडोज को इगा स्वियातेक के रूप में महिला एकल की नई चैंपियन मिली।
दो बार की फ्रेंच ओपन चैंपियन स्वियातेक ने फाइनल में ओंस जाबूर को सीधे सेटों में 6-2, 7-6 (5) से हराकर अपना तीसरा ग्रैंड स्लैम खिताब जीता। स्वियातेक अमेरिकी ओपन में इससे पहले कभी चौथे दौर से आगे नहीं बढ़ पाई थी। इस बार भी नंबर एक खिलाड़ी होने के बावजूद खिताब के दावेदारों में उनके कम ही चर्चे थे।
अमेरिकी ओपन में इस बार शुरू से ही सेरेना विलियम्स आकर्षण का केंद्र थी क्योंकि यह उनका आखिरी टूर्नामेंट हो सकता है। जहां तक स्वियातेक का सवाल है तो जुलाई में 37 मैच का विजय अभियान थमने के बाद वह 4-4 के रिकॉर्ड के साथ फ्लशिंग मीडोज में उतरी थी।
आर्थर ऐस स्टेडियम में विश्व में पांचवें नंबर की खिलाड़ी जाबूर को हराने के बाद स्वियातेक ने कहा, ‘‘मुझे इससे अधिक की उम्मीद नहीं थी विशेषकर इस टूर्नामेंट से पहले मुझे जिस तरह के चुनौतीपूर्ण समय से गुजरना पड़ा था।’’
उन्होंने कहा,‘‘ निश्चित तौर पर यह टूर्नामेंट चुनौतीपूर्ण था क्योंकि यह न्यूयॉर्क है। यहां काफी शोर होता है। मुझे वास्तव में खुद पर गर्व है कि मैं मानसिक रूप से इन चीजों से निपटने में सफल रही।’’
ट्यूनीशिया की खिलाड़ी जाबूर टाई ब्रेकर में एक समय 5-4 से आगे थी। स्वियातेक ने इसके बाद जबरदस्त वापसी की और आखिरी तीन अंक जीत कर चैंपियन बनी।
स्वियातेक को इस जीत पर चमचमाती ट्रॉफी और 26 लाख डॉलर का चैक मिला। इस पर स्वियातेक ने मजाकिया अंदाज में कहा,‘‘वास्तव में मुझे खुशी है कि यह नकद राशि नहीं है।’’
पोलैंड की 21 वर्षीय खिलाड़ी स्वियातेक ने इस साल जून में फ्रेंच ओपन का खिताब भी जीता था। वह 2016 में एंजेलिक कर्बर के बाद एक सत्र में दो ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी हैं।
जाबूर ने कहा, ‘‘मैंने वास्तव में अपनी तरफ से बहुत प्रयास किए लेकिन स्वियातेक ने इसे मेरे लिए आसान नहीं बनने दिया। वह वास्तव में आज जीत की दावेदार थी।’’ जाबूर भले ही फाइनल में हार गई लेकिन इससे यह 28 वर्षीय खिलाड़ी विश्व रैंकिंग में दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगी।

केरल:सिकुड़ती जा रही है वेम्बनाड झील

(हरि एम पिल्लई)

तिरुवनंतपुरम । पश्चिम बंगाल में सुंदरबन के बाद भारत में दूसरी सबसे बड़ी आर्द्रभूमि (वेटलैंड) वेम्बनाड झील धीरे-धीरे सिकुड़ती जा रही है। लगभग 20 साल पहले इसे ‘रामसर’ स्थल के रूप में घोषित किया गया था और अब इसकी अनूठी जैव विविधता खतरे में है।
कुट्टनाड के किसानों और मछुआरों के समुदाय के लिए यह झील आजीविका का एक स्रोत है। इसके किनारों पर अनधिकृत निर्माण और प्रदूषण के कारण पारिस्थितिक तंत्र में बदलाव जारी हैं। विशेषज्ञों ने आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए ‘‘प्रतिबद्ध प्रयास’’ करने का आह्वान किया है।
इस झील का क्षेत्र धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है और यह लगभग दो हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली है तथा इसकी लंबाई लगभग 96 किलोमीटर है। यह झील केरल की सबसे बड़ी और देश की सबसे लंबी झीलों में से एक है। यह अलप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम तीन जिलों से घिरी है।
पारिस्थितिकी विशेषज्ञों और वर्षों से किए गए विभिन्न अध्ययनों के अनुसार बार-बार आने वाली बाढ़, बढ़ते प्रदूषण, जल प्रसार क्षेत्र में कमी और खरपतवार वृद्धि के कारण झील गंभीर पर्यावरणीय क्षरण का सामना कर रही है।
आर्द्रभूमि पर राष्ट्रीय समिति के सदस्य और जल संसाधन विकास और प्रबंधन केंद्र (सीडब्ल्यूआरडीएम) के एक पूर्व निदेशक ई. जे. जेम्स का मानना है कि राज्य सरकार जो कदम उठाने का दावा करती है, वे केवल कागजों तक ही सीमित रहते हैं और जमीनी स्तर पर इन्हें लागू नहीं किया जाता है।
हाल में जब सदन में इस मुद्दे को उठाया गया था, तब मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा था कि राजस्व, सर्वेक्षण और स्थानीय स्वशासन विभाग अतिक्रमणों का पता लगाने और उन्हें हटाने और झील की सीमाओं का सीमांकन करने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं।
विजयन ने कहा था कि झील के पुनरुद्धार में मछुआरों और किसानों सहित स्थानीय समुदायों की भागीदारी आवश्यक है। जेम्स उस विशेषज्ञ समिति का हिस्सा थे, जिसने वेम्बनाड को ‘रामसर’ स्थल घोषित करने पर जोर दिया था।
उन्होंने कहा कि झील के समक्ष आने वाले पारिस्थितिक क्षय के खतरे का समाधान उतना आसान नहीं है, जितना कि थन्नीरमुकोम बांध में गाद जमा होने से रोकने के लिए अतिक्रमण हटाना या बाहरी बांध बनाना था।
उन्होंने दावा किया, ‘‘इसे रामसर स्थल घोषित किए जाने के बाद, आर्द्रभूमि प्रणाली की रक्षा या वहां पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए शायद ही कुछ किया गया है।’’
अलप्पुझा से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सांसद ए. एम. आरिफ ने कहा कि झील को रामसर स्थल घोषित करने के बाद इसकी सुरक्षा या संरक्षण के लिए कुछ नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘सब कुछ राज्य सरकार पर छोड़ दिया गया है। राज्य सरकार कदम उठा रही है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। झील के संरक्षण के संबंध में कई परियोजनाओं की घोषणा की गई थी, लेकिन उन्हें अभी तक लागू नहीं किया गया है।’’ जेम्स ने कहा झील का प्रबंधन इस तरह से किया जाना चाहिए कि कृषि और मत्स्य पालन दोनों क्षेत्र एक दूसरे के पूरक हो सकें।

द्वारका पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का आश्रम में निधन

नरसिंहपुर । ‘क्रांतिकारी साधु’ के रूप में मशहूर द्वारका पीठ के ‘जगतगुरु शंकराचार्य’ स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का रविवार को मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले स्थित उनके आश्रम झोतेश्वर में हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। वह 99 साल के थे।
वह धार्मिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर अमूमन बयान दिया करते थे और शिरडी के साई बाबा को भक्तों द्वारा भगवान कहे जाने पर सवाल उठाया करते थे। सूत्रों के अनुसार सोमवार अपराह्न करीब तीन से चार बजे उनके आश्रम परिसर में ही उन्हें भू समाधि दी जाएगी।
आश्रम की विज्ञप्ति के अनुसार वह गुजरात स्थित द्वारका-शारदा पीठ एवं उत्तराखंड स्थित ज्योतिश पीठ के शंकराचार्य थे और पिछले एक साल से अधिक समय से बीमार चल रहे थे।
इसमें कहा गया है, ‘‘शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज 99 वर्ष की आयु में हृदय गति के रुक जाने से ब्रह्मलीन हुए। उन्होंने अपनी तपोस्थली परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर में दोपहर 3.21 बजे अंतिम सांस ली।’’ विज्ञप्ति के अनुसार शंकराचार्य ने सनातन धर्म, देश और समाज के लिए अतुल्य योगदान किया। उनसे करोड़ों भक्तों की आस्था जुडी हुई है।
इसमें कहा गया है कि वह स्वतन्त्रता सेनानी, रामसेतु रक्षक, गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करवाने वाले तथा रामजन्मभूमि के लिए लम्बा संघर्ष करने वाले, गौरक्षा आंदोलन के प्रथम सत्याग्रही एवं रामराज्य परिषद् के प्रथम अध्यक्ष थे और पाखंडवाद के प्रबल विरोधी थे।
इसी बीच, आश्रम के सूत्रों ने बताया, ‘‘उन्हें नरसिंहपुर के गोटेगांव स्थित उनकी तपोस्थली परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर में कल अपराह्न करीब 3-4 बजे भू समाधि दी जाएगी।’’ उन्होंने कहा कि वह डायलिसिस पर थे और पिछले कुछ महीनों से आश्रम में अक्सर वेंटिलेटर पर रखे जाते थे, जहां उनके इलाज के लिए एक विशेष सुविधा बनाई गई थी। इसके अलावा, वह मधुमेह से पीड़ित थे और वृद्धावस्था संबंधी समस्याओं से भी जूझ रहे थे।
उनके शिष्य दण्डी स्वामी सदानंद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ज्योतिष एवं शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के दिघोरी गांव में हुआ था। उनके बचपन का नाम पोथीराम उपाध्याय था। उन्होंने बताया कि सरस्वती नौ साल की उम्र में अपना घर छोड़ कर धर्म यात्राएं प्रारंभ कर दी थी।
शंकराचार्य के एक करीबी व्यक्ति ने बताया कि अपनी धर्म यात्राओं के दौरान वह काशी पहुंचे और वहां उन्होंने ‘ब्रह्मलीन श्रीस्वामी’ करपात्री महाराज से वेद-वेदांग एवं शास्त्रों की शिक्षा ली। यह वह समय था जब भारत को अंग्रेजों से मुक्त करवाने की लड़ाई चल रही थी। जब 1942 में ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का नारा लगा तो वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और 19 साल की उम्र में वह ‘क्रांतिकारी साधु’ के रूप में प्रसिद्ध हुए।
उन्होंने कहा कि उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दो बार जेल में रखा गया था, जिनमें से एक बार उन्होंने नौ माह की सजा काटी, जबकि दूसरी बार छह महीने की सजा काटी। शंकराचार्य के अनुयायियों ने कहा कि वह 1981 में शंकराचार्य बने और हाल ही में शंकराचार्य का 99वां जन्मदिन मनाया गया।