Tuesday, March 24, 2026
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जयन्ती पर विशेष : अमर शहीद सरदार भगत सिंह

    शुभांगी उपाध्याय

“सम्पदि यस्य न हर्षो विपदि विषादो रणे न भीरुत्वम्।
तं भुवन त्रयतिलकं जनयति जननी सुतं विरलम्।।”
-हितोपदेश-सुभाषित-श्लोकाः- १.३४
अर्थात : जिसको सुख सम्पत्ति में प्रसन्नता न हो, संकट विपत्ति में दु:ख न हो, युद्ध में भय अथवा कायरता न हो, तीनों लोकों में महान् ऐसे किसी पुत्र को माता कभी-कभी ही जन्म देती है।
उक्त श्लोक को चरितार्थ करते हुए 28 सितंबर 1907, पंजाब के जिला लायलपुर, बंगा गांव (वर्तमान पाकिस्तान) में एक राष्ट्रभक्त सिख परिवार में उत्कृष्ट देशभक्त सरदार भगत सिंह के रूप में वीर बालक का जन्म हुआ। जिन्होंने न केवल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई अपितु मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर 23 मार्च 1931 को मात्र 23 वर्ष 6 माह की अल्पायु में ही शहीद होकर सदा सर्वदा के लिए अमर हो गए।
युवता के योग्यतम प्रतीक सरदार भगत सिंह के इस महान बलिदान और त्याग ने देश के जन मानस में आजादी की ऐसी तड़प पैदा कर दी, एक ऐसी क्रांति की अलख जगा दी कि परिणाम स्वरूप देश का हर व्यक्ति आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए, बलिदान होने के लिए स्वेच्छा से आगे आने लगा। भगत सिंह केवल एक नाम ही नहीं अपितु एक श्रेष्ठ विचारधारा हैं जिसने विभिन्नता वाले इस विशाल भारत देश को संगठित कर डाला। भारत माँ के इस सच्चे सपूत को ‘भारत रत्न’ पुरस्कार भले न मिला हो परन्तु वे अपने आप में ही किसी अनमोल रत्न से कम भी नहीं। उनकी क्रांति की ज्वाला की तपिश आज भी हर भारतवासी के हृदय में कायम है।
बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी भगत सिंह एक अप्रतिम लेखक, पत्रकार, वक्ता, दार्शनिक, कुशल रणनीतिकार और भारतीय क्रांति के दार्शनिक भी थे। ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’रूपी ऊर्जावान उद्घोष के जनक ने अपने एक पत्र में क्रांति के प्रति अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया था, “क्रांति का अर्थ अनिवार्य रूप से स्वतंत्र आंदोलन नहीं होता है, विद्रोह को क्रांति नहीं कहा जा सकता यद्यपि यह हो सकता है कि विद्रोह का अंतिम परिणाम क्रांति हो।”
22 अक्टूबर 1929 को बटुकेश्वर दत्त के साथ संयुक्त रूप से लाहौर के विद्यार्थियों के नाम लिखते हैं कि, “इस समय हम नौजवानों से यह नहीं कह सकते कि वे बम और पिस्तौल उठाएं। आज विद्यार्थियों के सामने सर्व-महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी राष्ट्र सेवा एवं समर्पण है, राष्ट्रीय त्याग के अंतिम क्षणों में नौजवानों को क्रांति का यह संदेश, देश के कोने-कोने में पहुंचाना है।”उनके इस पत्र के माध्यम से देश भर में चल रहे जन आंदोलनों के प्रति उनके विचार स्पष्ट हो जाते हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य था कि कल-कारखानों से लेकर झुग्गी-झोपड़ियों तक क्रांति की ज्वाला भड़क उठे जिससे अंग्रेज़ी हुकूमत की जड़ें हिल जाएं और कोई भी अंग्रेज किसी भी रूप में भारतीयों का शोषण ना कर पाए।
मनुष्य स्वयं ही अपना भाग्य निर्माता होता है –
“मानवः स्वयस्य भाग्यस्य विधाता स्वयमेव हि। तथ्यमेतद् विजानन्ति ये ते तु निज चिंतनम्।”
– प्रज्ञा पुराण २/४०
अर्थात : मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं ही होता है,जो इस तथ्य को समझते हैं,वे अपने चिंतन और प्रयास को श्रेष्ठ उद्देश्यों में ही नियोजित करते हैं।
यदि सरदार भगत सिंह चाह लेते तो कभी भी अंग्रेजों के हाथ न आते। परन्तु आजादी के मतवाले ने पूर्व नियोजित योजना के प्रतिकूल, राष्ट्रहित में स्वयं को उत्सर्ग करना ही श्रेयस्कर समझा। भारत को दासता की बेड़ियों से मुक्त करवाना ही उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य था। उन्होंने अंग्रेजों के अमानुषिक अत्याचार सहे, अनगिनत यंत्रणाएं झेली! किन्तु न धन का लोभ, न परिवार का मोह ही उन्हें कभी अपने लक्ष्य से डिगा पाया।
भारतवर्ष की आज़ादी का उनका दृढ़ संकल्प अटूट था और यही कारण था कि जिनका आधिपत्य दुनिया के बहुत बड़े हिस्से पर था, एक ऐसा साम्राज्य, जिसके बारे में कहा जाता था कि उनके शासन में सूर्य कभी अस्त नहीं होता, इतनी शक्तिशाली हुकूमत, मात्र एक 23 वर्ष के नौजवान से भयभीत हो गई थी। आज का आधुनिक युवा वर्ग जो छोटी से छोटी समस्याओं में भी हताश हो जाता है, मनोविकार से घिर जाता, जिसे थोड़े से संघर्ष से डिप्रेशन होने लगता है, उस युवा वर्ग को भगत सिंह के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने अपने एक पत्र में लिखा था, “जो नौजवान दुनिया में तरक्की करना चाहते हैं, उन्हें वर्तमान युग में महान और उच्च विचारों का अध्ययन करना चाहिए। (भगत सिंह के संपूर्ण दस्तावेज, अराजकतावाद-1)
साम्राज्यवाद का विरोध –
तत्कालीन भारतीय समाज तमाम अंध-विश्वास, कुरीतियों, छूत-अछूत, ऊँच-नीच जैसे संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित था। ऐसी सामाजिक व्यवस्था उत्पन्न हुई कि समाज में अकारण ही असमानता व्याप्त हो गई थी। धनिक वर्ग मासूमों का शोषण कर रहा था। अंग्रेजों के पश्चात इन काले अंग्रेजों से मुक्ति दिलवाना ही भगत सिंह का दूसरा मुख्य उद्देश्य था। उनके सिद्धांतों के अनुसार क्रान्ति का अर्थ अंततोगत्वा एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था की स्थापना से है, जिसमें सर्वहारा वर्ग का आधिपत्य सर्वमान्य होगा। जब तक मनुष्य द्वारा मनुष्य का तथा एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र का शोषण, जिसे साम्राज्यवाद कहते हैं, समाप्त नहीं कर दिया जाता, तब तक मानवता शर्मसार होती ही रहेगी। वे कहते थे कि, “क्रांति से हमारा अभिप्राय है अन्याय पर आधारित मौजूदा समाज-व्यवस्था में आमूल परिवर्तन है।”
63 दिनों का अनशन –
यह जेल के दौरान एक अभूतपूर्व घटना है। यद्यपि अनशन पर गांधीजी की सत्ता स्वीकारी जाती है तथापि भगत सिंह ने भी जेल में निरंतर 63 दिनों तक अनशन किया था। उन्हें असेंबली बम कांड में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई। इधर जतीन्द्रनाथ दास सहित कई और क्रांतिकारियों को भी हिरासत में लिया गया! जेल में उन्हें बहुत खराब (सड़ा) भोजन दिया जाता था। जेलों में राजनीतिक कैदियों के साथ बेहतर व्यवहार, साफ़ जगह, अच्छे भोजन, पढ़ने के लिए अखबार एवं किताबों के लिए यह भूख हड़ताल आरम्भ हुई। जेल के अधिकारियों ने सबके अनशन तुड़वाने के लिए तरह-तरह के पशुवत व्यवहार किए और अशोभनीय हथकंडे अपनाए।
क्रांतिकारी जतीन्द्रनाथ के शरीर में जबरन रबड़ की नली से दूध डालने का प्रयास किया गया, इस प्रयास में दूध उनके फेफड़ों में चला गया! वह पीड़ा से भर उठे! मगर उन्होंने हार नहीं मानी! अनशन के 63वें दिन वे शहीद हो गए और अंग्रेज़ी सरकार ने जन आक्रोश से बचने के लिए क्रान्तिकारी दल की सभी मांगे मान ली और इस घटना के पश्चात राजनीतिक कैदियों के साथ भविष्य में उचित व्यवहार किए गए। अपने व्यक्तिगत सुख की परवाह न कर साथियों के हित के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देने की तीव्र समर्पण भावना वास्तव में किसी महान नायक के व्यक्तित्व में ही समाहित हो सकती है।

प्रखर लेखक और पत्रकार –
भगत सिंह हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत, पंजाबी, बांग्ला और आयरिश भाषा के मर्मज्ञ चिंतक और विचारक थे। उन्होंने ‘अकाली’ और ‘कीर्ति’ दो अखबारों का संपादन भी किया। अपने ज्वलंत विचारों को लेखनी के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया। उनके लिए पत्रकारिता एक मिशन थी, वे लेख लिखते थे, ताकि लोगों को जागृत किया जा सके, उन्हें यह बताया जा सके कि अंग्रेजों के खिलाफ यदि संगठित नहीं हुए तो ताउम्र कुचले जाते रहेंगे। भगत सिंह ने आखिरी सांस तक अपने अंदर के पत्रकार और लेखक को मरने नहीं दिया। जेल में बैठकर भी वे लगातार लिखते और पढ़ते रहे थे। शहीद-ए-आजम ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से आजादी की लड़ाई में भाग लिया। एक तरफ जहां वे क्रांतिकारी भावना से ओतप्रोत अपने भाषणों से नौजवानों की रगो में दौड़ रहे खून को खौलने पर विवश किया करते थे। वहीं दूसरी तरफ अलग-अलग नामों से लेख लिखकर अपनी बातों को क्षेत्रीय सीमाओं के बंधन से मुक्त रखते थे।
परतंत्रता के उस अत्यंत ही पीड़ादायक और घोर यातनाओं के दौर में, भगत सिंह के अलावा भी अनगिनत देशभक्तों ने अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए प्राणों की आहुति दे दी। उन पूज्य होतात्माओं के अथक परिश्रम, निरंतर प्रयास, त्याग, तपस्या और बलिदान का ही परिणाम है कि हम स्वतंत्र संवैधानिक राष्ट्र में स्वांस ले पा रहे हैं। परन्तु आज के आधुनिक दौर में हम कहीं न कहीं उनके महत्वपूर्ण बलिदानों का मोल समझ पाने में असमर्थ सिद्ध हो रहे हैं। आज जब हमारी वाणी और चेतना, सबकुछ स्वतंत्र है तो हम राष्ट्र को अधिक से अधिक देने की भावना से कोसों दूर बस ‘मैं और मेरा’के प्रपंच में उलझ कर, अपने मूल कर्त्तव्यों से विमुख होते चले जा रहे हैं।
आज का आधुनिक समाज परिवर्तनशील है। परिवर्तन की इस बेला में आज प्राचीन विचारों एवं आदर्शों के समन्वय की महती आवश्यकता है ताकि भारत का पुनरुत्थान हो सके। हमारे समाज को न सिर्फ एक शहीद भगत सिंह अपितु ऐसे अनेक ऐतिहासिक एवं प्रेरणात्मक व्यक्तित्व से शिक्षा ग्रहण कर, नवीन एवं प्राणवान प्रतिभाओं को एकत्र कर सर्वसामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए नए भारत के निर्माण की अत्यन्त आवश्यकता है। अंत में इस महान युवा क्रांतिकारी का संदेश आज के युवाओं के नाम,“किसी ने सच ही कहा है, सुधार वृद्ध नहीं कर सकते । वे तो बहुत ही बुद्धिमान और समझदार होते हैं,वे हमारा उचित मार्गदर्शन कर सकते हैं। सुधार तो होते हैं युवाओं के परिश्रम, साहस, बलिदान और निष्ठा से, जिनको भयभीत होना आता ही नहीं और जो विचार कम और अनुभव अधिक करते हैं।”
(लेखिका शुभांगी कलकत्ता  विश्वविद्यालय से पी.एच.डी शोधार्थी हैं।)

डॉ. एस. आनन्द को वर्ष 2023 का सृजन सारथी सम्मान

कोलकाता । शुभ सृजन नेटवर्क का सृजन सारथी सम्मान 2023 महानगर के वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. एस. आनन्द को दिया जाएगा। डॉ. एस. आनन्द पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 50 वर्षों से सक्रिय हैं। उनको साहित्य एवं पत्रकारिता का समन्वय करने के लिए जाना जाता है। महानगर के कई समाचार पत्रों में कार्य करते हुए नियमित स्तम्भ लेखन, विशेषकर व्यंग्य लेखन के लिए जाने जाते हैं। लस्टम– पस्टम पाठकों में बहुत लोकप्रिय रहा है। देश की चर्चित पत्रिकाओं में इनकी रचनाएं प्रकाशित होती रही हैं। शुभ सृजन नेटवर्क द्वारा प्रदत्त सृजन सारथी सम्मान की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी और प्रो. प्रेम शर्मा को यह सम्मान प्रदान किया गया था। शुभ सृजन नेटवर्क की प्रमुख सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया ने कहा कि सृजन सारथी सम्मान सृजनात्मक कार्यों में निरन्तर सक्रिय रहकर समाज में सकारात्मक योगदान देने वालों के प्रति कृतज्ञता बोध की अभिव्यक्ति है। यह उद्यम हिन्दी एवं भारतीय भाषाओं को रोजगारपरक बनाकर साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र से युवाओं को विगत 4 वर्षों से जोड़ता आ रहा है।

द बोधिचार्य स्कूल हावड़ा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का आयोजन

हावड़ा । गत 23 सितंबर 2023 को द बोधिचार्य स्कूल हावड़ा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी आयोजित की गयी । इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में हमारे हावड़ा नगर निगम के अध्यक्ष डॉक्टर सुजय चक्रवर्ती की और इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर प्रदीप चौधरी जी और अमरेश मन्ना फॉर्च्यून इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के निदेशक शामिल थे। विद्यालय की उप प्रधानाचार्या तापसी गोस्वामी ने तिलक लगाकर स्वागत किया और विद्यालय के प्रधानाचार्य संदीप दे ने पुष्पगुच्छ और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। विद्यालय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उद्घाटन इन्हीं मुख्य अतिथियों के हाथों से किया गया। इनके साथ-साथ ही साथ विद्यालय की हेडमिस्ट्रेस सुनीता मिश्रा, प्रभारी शिक्षक माला चटर्जी की  मुख्य भूमिका रही। इस योजना में विद्यार्थियों ने कई परियोजनाएं बनायीं और अपनी सारी परियोजनाओं का प्रदर्शन किया। यहां तक की चंद्रयान-3 का पर भी काम किया और यह चंद्रयान-3 सभी परियोजनाओं में सबसे महत्वपूर्ण परियोजना रही ।  हावड़ा नगर निगम के अध्यक्ष डॉ सुजय चक्रवर्ती जी का कहना है कि कि आज के दिन मैं यहां इस संस्थान में उपस्थित हूं यह मेरे लिए गर्व की बात है और आपका यह कार्यक्रम बहुत सारगर्भित रहा। सभी अतिथियों ने बहुत ही प्रशंसा की और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित भी किया । इस कार्यक्रम में सबसे बड़ी भूमिका विज्ञान विषय के शिक्षकों का रहा प्रदीप चटर्जी,सौरभ मिश्रा, तुषार प्रकाश बलोदी ,जया तिवारी एवं विद्यालय के सभी शिक्षक गणों और सभी विद्यार्थियों का बड़ा सहयोग रहा। इस कार्यक्रम का सफल संचालन राजेश बनर्जी  ने किया।

रिपोर्ट – प्रीति साव

हरिओम स्माइल्स के रूबरू 2.0 में पहुँचीं आध्यात्म गुरु मोनिका सिंघल

कोलकाता । हरि ओम स्माइल्स” की ओर से कोलकाता के धनधान्य ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम रूबरू 2.0 में मोटिवेशनल लाइफ कोच और शशक्त आध्यात्मिक वक्ता सुश्री मोनिका सिंघल ने हजारों लोगों को मोटिवेट किया। इस आयोजन में रूबरू 2.0 की सदस्य अलका गुप्ता, सुमन अग्रवाल, संगीता केजरीवाल, शशि चौधरी के साथ समाज की कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हुईं। मोनिका जी ने “विकलांग मुक्त भारत” अभियान की शुरुआत की है। इसी कड़ी में शनिवार को कोलकाता के महावीर सेवा सदन में “हरि ओम स्माइल्स” के सौजन्य से कृत्रिम अंग शिविर का सफल आयोजन किया गया। अब “हरि ओम स्माइल्स” द्वारा देश के विभिन्न शहरों में ऐसे शिविर का आयोजन किया जाएगा। “हरि ओम स्माइल्स” बेहतर जीवन जीने की कला है। इसकी मुख्य संरक्षक और आध्यात्मिक गुरु श्रीमती मोनिका सिंघल ने छोटे समूह के रूप में इसकी शुरुआत की। अब यह समूह लोगों के लिए एक ऐसा प्रेरक उदाहरण बन गया है, जिसने हजारों लोगों के जीवन को सशक्त बनाया है। “हरि ओम स्माइल्स” हमेशा हमारे बेशकीमती रीति-रिवाजों के वैज्ञानिक महत्व को सिखाकर विज्ञान और आध्यात्मिकता के मिश्रण से हमारे दैनिक जीवन के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण रखता है। , मोटिवेशनल गुरु और एम्पावरिंग वक्ता मोनिका सिंघल ने कहा, कोलकाता में “हरि ओम स्माइल्स” की ओर से प्रस्तुत रूबरू 2.0 में शामिल होनेवाले सभी लोगों ने जीवन में आशा और ज्ञान की किरण के सरल मार्ग का अध्ययन किया है। हम हर पल जीवन में सभी आयु समूहों के लोगों के लिए निस्वार्थ सेवा और उपचार में विश्वास करते हैं। जिससे उन्हें अपनी भीतरी शक्ति के बारे में पता चल सके। हम नियमित रूप से ध्यान के साथ-साथ आध्यात्मिक वाणी सत्र का आयोजन करते रहते हैं। हमारा दृढ़ विश्वास है कि प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय होने के लिए बना है। कोई गलत नहीं है, बस हमसे थोड़ा अलग है। रविवार को कोलकाता के धनधान्य सभागार में आयोजित कार्यक्रम में 2000 से अधिक लोगों की भीड़ ने इस कार्यक्रम की सफलता को बयां किया। यहां आए लोगों ने देखा कि हम वास्तव में किस प्रकार से लोगों के जीवन को सकारात्मक जीवन और आंतरिक ज्ञान की ओर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। “हरि ओम स्माइल्स” की संस्थापक सुश्री मोनिका सिंघल प्रकाश की अग्रदूत होने के साथ पूरी दुनिया में अनगिनत चेहरों में मुस्कुराहट का कारण बनी हैं। वह एक आध्यात्मिक और प्रेरक वक्ता हैं जिन्होंने अपनी कार्यशालाओं के माध्यम से असंख्य लोगों के जीवन को बदल दिया है। वह अपने कैंप के जरिए अबतक हजारों लोगों को अपने भीतर प्रकाश की खोज करके जीवन में सफल होने में मदद कर चुकी हैं। यह संस्था विभिन्न कृत्रिम अंग शिविर भी आयोजित करती रहती हैं।

 

फिल्मकार गौरांग जालान बने काहिरा अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव की जूरी के सदस्य

  1. कोलकाता । राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता गौरांग जालान मिश्र के काहिरा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में भारत की तरफ से सिनेमा और थिएटर के लिए जूरी के सदस्य के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके साथ भारत के अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रीस, मिस्र, जॉर्डन, चीन, फिलिस्तीन, पोलैंड, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से जूरी सदस्य इसमें शामिल हैं। गौरांग जालान को सितंबर 2022 में उनकी नवीनतम फिल्म अविजात्रिक (द वांडरलस्ट ऑफ अपू) के लिए सर्वश्रेष्ठ बंगाली फिल्म के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह फिल्म कुल मिलाकर 27 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है।
    7वां अव्लादना इंटरनेशनल फोरम फॉर द आर्ट्स ऑफ द गिफ्टेड, जो एच.ई. के तत्वावधान में काम करती है। इसमें अरब गणराज्य मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, संस्कृति मंत्रालय, सामाजिक एकजुटता मंत्रालय, युवा और खेल मंत्रालय, पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय, राष्ट्रीय महिला परिषद आदि के सहयोग से 22 से 29 सितंबर, 2023 को मिश्र के काहिरा में इस वार्षिक फिल्म महोत्सव का आयोजन किया जा रहा हैं। कला, संगीत और फिल्मों के इस अनूठे अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव में 41 देश भाग ले रहे हैं। इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और फिल्म निर्माता गौरांग जालान ने कहा, भारत की ओर से काहिरा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के लिए जूरी के सदस्य के रूप में चुना जाना बहुत सम्मान की बात है। किसी अन्य देश में जाकर अपने देश का प्रतिनिधित्व करना बेहद गौरवान्वित महसूस कराता है। मिस्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में होने वाले इस विशेष फेस्टिवल फॉर द गिफ्टेड में 41 देशों ने अपनी फिल्में भेजी हैं। भारत से 4 फिल्में हैं. मिस्रवासियों को भारतीय फिल्में और भारती व्यंजन बहुत पसंद हैं। मुझे याद है कि 2015 में मेरी काहिरा की आखिरी यात्रा के दौरान शदी के महानायक बॉलीवूड के शहंशाह श्री अमिताभ बच्चन जो नील महोत्सव के लिए यहां आए थे, लोग उनकी एक झलक पाने के लिए उताहुल हो रहे थे। नए दौर के स्टार्स में उन्हें शाहरुख खान काफी पसंद हैं। प्राचीन सभ्यताएँ होने के कारण भारतीय और मिस्र की संस्कृति में बहुत सारी समानताएं देखी गयी हैं।
    फिल्मों के निर्माता के रूप में गौरांग अग्रवाल ने कई भारतीय भाषाओं (हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली, असमिया, उड़िया और भोजपुरी) फिल्में बॉलीवूड को दी हैं। जिनमें पुरस्कार विजेता फिल्मों का – फीचर, वृत्तचित्र और लघु का निर्माण किया गया है। गौरांग फिल्म्स ने 15 से अधिक बच्चों की फिल्में बनाई हैं। इस अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा और कला महोत्सव का उद्देश्य प्रतिभाशाली लोगों का समर्थन करना और एक सांस्कृतिक और कलात्मक मंच बनाना है जो स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके सामाजिक एकीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए उनकी रचनात्मकता, प्रतिभा, कला को व्यक्त करता है।
    काहिरा फिल्म महोत्सव 2023 में भारत की ओर से चुनी गई फिल्में हैं:
    1. सलाम वेंकी (हिंदी) – रेवती आशा द्वारा निर्देशित
    2. मोंटूर मोंटोह (असमिया) – रामेन बोराह द्वारा निर्देशित
    3. डीएचएच (हिंदी/गुजराती) – मनीष सैनी द्वारा निर्देशित
    4. गिद्ध -द स्केवेंजर (हिंदी) – मनीष सैनी द्वारा निर्देशित है।

 

कई संभावनाओं की भाषा है हिंदी! – डॉ. अर्चना पाण्डेय

कोलकाता । काशीपुर अंचल में स्थित तारा देवी हरख चंद कांकरिया जैन कालेज में हिंदी विभाग के द्वारा दिनांक 21 सितम्बर दिन बृहस्पतिवार को हिंदी दिवस समारोह मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में खिदिरपुर कालेज की सहायक प्रोफेसर डॉ. अर्चना पाण्डेय उपस्थित थीं। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रथम सत्र की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया। तत्पश्चात स्वागत गीत की प्रस्तुति की गई। प्राचार्या डॉ.मौसमी सिंह सेन गुप्ता ने सबको शुभकामनाएं देते हुए सभी विद्यार्थियों का उत्साह वर्धन किया।डॉ. किरण सिपानी ने उपस्थित अतिथि डॉ. अर्चना पाण्डेय को सम्मानित किया और विभागाध्यक्ष डॉ. बृजेश सिंह ने परिचय प्रस्तुत की। अदिति, निशा, तन्वी,ओरित्रो,गौरव ने काव्य पाठ कर कार्यक्रम को कवितामय बनाया। शमी तिवारी ने हिंदी दिवस के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किए। मो. कैफ़ अंसारी ने काव्य गीत की प्रस्तुति की। अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. अर्चना पाण्डेय ने हिंदी के समर्थ होने की बात कही साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी विभिन्न क्षेत्रों अनुवाद, पत्रकारिता, सिनेमा, सोशल मीडिया, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान, तकनीक इत्यादि में समृद्ध भाषा बनकर उभर रही है। अध्यक्षीय वक्तव्य में डाँ. किरण सिपानी ने कहा कि हिंदी को लेकर हमें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है और यह भी आवश्यक है कि हम हिंदी को शुद्ध रूप से पढ़ें, बोलें और लिखें। कार्यक्रम में बंगला, अंग्रेज़ी और अन्य विभागों के प्रोफ़ेसर और विद्यार्थी उपस्थित थे। सबको आभार जताते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रो स्वाति शर्मा ने किया।

गांधी एवं शांति अध्ययन के अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम में प्रवेश के अवसर

कोलकाता । पश्चिम बंगाल के विद्यार्थियों के लिए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के साल्ट लेक सेक्टर 3 में स्थित क्षेत्रीय केंद्र में इस वर्ष से विश्व स्तर पर संचालित अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम, गांधी और शांति अध्ययन में एम.ए. स्तर का अध्ययन अध्यापन आरंभ हो रहा है। गांधी एवं शांति अध्ययन सामाजिक विज्ञानों के अध्ययन के क्षेत्र में एक प्रभावशाली कदम है। यह विषय गांधी की अवधारणा और शांति से इसकी संबद्धता को व्यापक दायरे में समझने की एक दृष्टि देता है। अंतरानुशासनिक चरित्र का यह पाठ्यक्रम नैतिक-दष्टि, सुशासन, विकेन्द्रीकरण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एवं इसकी राजनीति के साथ-साथ भू-राजनीति एवं सतत विकास की शिक्षा को अपने में शामिल करता है। यह विषय विद्यार्थी को सतत विकास एवं शांति के साथ उसकी संबद्धता को शिक्षण, शोध एवं विस्तार के व्यापक कार्यक्रमों तक पहुँचाता है। गांधी एवं शांति के विभिन्न पहलुओं को व्यापक -दृष्टि से व्याख्यायित करने वाला यह पाठ्यक्रम न सिर्फ विद्यार्थियों के कौशल एवं क्षमता निर्माण में वृध्दि करता है, बल्कि उन्हें विकास एवं शांति के क्षेत्र में आनेवाली समस्याओं और चुनौतियों को समाधान के लिये प्रेरित भी करता है। गांधी के मूल्यों एवं सिध्दांतों के प्रति गंभीर अध्ययन व शोध के साथ-साथ मानवता के लिए प्रतिबध्दता पैदा करने के उद्देश्य से यह पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के मुख्यालय वर्धा में सन् 2002 से संचालित किया जा रहा है। जिसमें स्नातक,परास्नातक और समसामयिक विषयों में पीएचडी शोध कराए जा रहे हैं। अंतरानुशासनिक पध्दति से तैयार यह पाठ्यक्रम संपूर्ण मानविकी एवं समाज वैज्ञानिक अध्ययन का ऐसा सम्मिलित अध्ययन प्रस्तुत करता है, जो विभिन्न ज्ञानानुशासनों को देखने व समझने की नई दृष्टि देता है। इस पाठ्यक्रम के अध्ययन के बाद विद्यार्थी जीवन के सभी क्षेत्रों जैसे मीडिया,शोध,गैर सरकारी क्षेत्रों,मानव अधिकार संस्थानों,जैन बौद्ध गांधी और शांति अध्ययन के क्षेत्र में पारंगत होकर रोजगार के अवसर पा सकता है और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान कर सकता है। इस विभाग के अंतर्गत अध्ययन करने वाले अब तक अधिकतम विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हो चुका है और सभी अपने अपने क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रहे हैं। इस विषय में प्रवेश लेने के लिए किसी भी विषय में स्नातक होना अनिवार्य है। उत्तर आधुनिक विषय में नई नई संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए गांधी और शांति अध्ययन पाठ्यक्रम को आरंभ करने का निर्णय लिया गया है। इस पाठ्यक्रम में अधिकतम 40 सीटों पर दाखिला होना है। संबंधित विभाग द्वारा काउंसलिंग के बाद दस्तावेजों की जांच करने के पश्चात विद्यार्थी को प्रवेश शुल्क जमा करके प्रवेश लेने अनुमति दी जायेगी। प्रवेश लेने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2023 है।अधिक जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाईट www.hindivishwa.org पर क्लिक करें और प्रवेश लेने के लिए पंजीकरण लिंक – https://mgahvadm2023.samarth.edu.in/index.php/site/index पर क्लिक करें। प्रवेश संबंधी अन्य जानकारी के लिए 033-46039985 और +91 80906 13455 नंबर पर भी सीधे संपर्क किया जा सकता है।

जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन

कोलकाता । हिन्दी दिवस के अवसर पर जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘बदलते परिदृश्य में हिन्दी के समक्ष चुनौतियाँ एवं संभावनाएं’ विषय पर हुए इस आयोजन में कॉलेज के उप-प्राचार्य डॉ जयंत नाथ कुंडू, विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ संजय जायसवाल, इण्डियन आयल कॉरपोरेशन में कार्यरत वरिष्ठ हिन्दी अधिकारी नागेंद्र पंडित मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।कार्यक्रम की शुरुआत माननीय अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना से की गयी । कॉलेज के उप-प्रधानाचार्य सर ने विदेशों में हिन्दी के प्रचार प्रसार पर विस्तृत जानकारी दी । इस अवसर पर विभाग के छात्रों द्वारा स्वरचित नुक्कड़ नाटक ‘हिंदी की मनोव्यथा’ का सफल मंचन किया गया । बतौर मुख्य वक्ता के रूप में विद्यासागर विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक संजय जायसवाल ने पारिभाषिक शब्दावली के सहजीकरण पर बल दिया । वरिष्ठ हिन्दी अधिकारी नागेंद्र पंडित ने राजभाषा के रूप में हिन्दी का संक्षिप्त परिचय देते हुए सृजित होने वाले रोज़गार के विभिन्न क्षेत्रों से अवगत कराया। कार्यक्रम का संचालन विभाग की छात्रा सिमरन ख़ातून एवं धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एकता ने किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विभाग की अध्यापक प्रो. ममता त्रिवेदी, पिंकी मिश्रा, प्रियंका ठाकुर ने विशेष सहयोग किया। इस अवसर पर कॉलेज के विभिन्न विभागों के अध्यापक एवं छात्र उपस्थित रहे। जिनके सामूहिक प्रयास से यह हिन्दी दिवस का कार्यक्रम सफल रहा ।

भारतीय भाषाओं के बीच सेतु है हिंदी

मिदनापुर । भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्रा. लिमिटेड की ओर से हिंदी पखवाड़ा का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर इस संस्थान के कर्मचारियों के बीच सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया । अंतरविभागीय नाट्यमंचन किया गया । हिंदी में अधिक से अधिक कामकाज पर बल देने की बात कही गई। मुख्य प्रबंधक शिवकुमार पवनि,महाप्रबंधक श्री के.एस.पी.मारन पांडियन, श्री के.आर .गुप्ता, पी.के. बिस्वाल, सहायक महाप्रबंधक एन.वी. राजगोपाल ने हिंदी दिवस के अवसर पर संबोधित किया । हिंदी को भेद की नहीं सदभाव की भाषा मानते हुए सांप्रदायिक सौहार्द पर आधारित प्रेमचंद की कहानी पर ‘हिंसा परमो धर्म:’का मंचन किया गया । इसमें इबरार खान,मधु सिंह, राहुल गौड़,विशाल साव,कोमल साव,सूर्य देव राय,राजेश सिंह, चंदन भगत,राज घोष,सुशील सिंह, सपना खरवार, आदित्य तिवारी, आदित्य साव,आशुतोष झा ने अभिनय किया । सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त महासचिव प्रो.संजय जायसवाल ने कहा कि नफरत और विभाजन के दौर में गंगा जमुनी तहजीब को बचाने के संस्कार का वृत्तांत है यह नाटक।हम सभी को धर्म,भाषा, जाति से ऊपर उठकर मानवधर्म का निर्वाह करना चाहिए । हिंदी हमें भारतीय भाषाओं से जोड़ती है।कला समीक्षक मृत्युंजय जी ने बताया कि धर्मयुद्ध नाटक बढ़ते सांप्रदायिक तनाव पर करारा व्यंग्य है।इस नाटक की मुख्य भूमिका में राजेश सिंह,सूरज,विकास मिश्रा, अभिषेक यादव,चंदन भगत,सपना खरवार, प्रज्ञा झा,संजना जायसवाल, राज घोष, जीतू राय,सायन दास,रोहित राम,सुशील सिंह, हाशिम थे।मेकअप और सहायक की भूमिका में लिली शाह और विकास कुमार थे।कार्यक्रम का सफल संचालन उप प्रबंधक, राजभाषा संजय कुमार चौधरी एवं धन्यवाद ज्ञापन राजभाषा सहायक रविकांत प्रसाद ने दिया।

हृदय स्वास्थ्य को लेकर डिसान हॉस्पिटल में खुला “द हार्ट क्लब

कोलकाता । 750 बिस्तरों की क्षमता वाले कोलकाता के डिसान हॉस्पिटल में द हार्ट क्लब खुला है । द हार्ट क्लब” परिवार के किन्हीं तीन सदस्यों के लिए दस निःशुल्क हृदय संबंधी परामर्श और परिवार के किन्हीं दो सदस्यों के लिए ₹10,000/- मूल्य की वार्षिक हृदय स्वास्थ्य परीक्षण आरम्भ हुआ । इसके अतिरिक्त, डिसान हॉस्पिटल, कोलकाता को पूर्वी भारत में आपातकालीन स्थिति में 192 स्लाइस कार्डियक सीटी से सुसज्जित एकमात्र अस्पताल भी बन गया है । डिसान हॉस्पिटल्स ग्रुप के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सजल दत्ता ने “द हार्ट क्लब” को लेकर कहा कि हमारा लक्ष्य परिवारों को उनके हृदय स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए सशक्त बनाना है, जिससे अंततः जीवन बचाया जा सके।”
डिसान हॉस्पिटल्स ग्रुप की निदेशक शाओली दत्ता ने कहा कि हम बेहतर हृदय स्वास्थ्य की दिशा में इस यात्रा को शुरू करने के लिए उत्साहित हैं। डॉ. संजीब पात्रा, निदेशक – इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, डिसान हॉस्पिटल, कोलकाता ने नियमित जांच के महत्व पर प्रकाश डाला । डॉ.सौम्या गुहा, कंसल्टेंट – कार्डिएक सर्जरी, डिसान हॉस्पिटल, कोलकाता, ने रोकथाम की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया ।