Tuesday, September 22, 2026
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दो शिक्षण संस्थानों ने मनाया 75वां स्थापना दिवस

– बालिका शिक्षा सदन और मुरारी लाल मेहता विद्या मंदिर के 75 वर्ष पूरे

कोलकाता । बालिका शिक्षा सदन और मुरारी लाल मेहता विद्या मंदिर का 75 वर्ष होने पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन महाजाति सदन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर डाॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन डाॅ अनिबरन गांगुली ने अपने वक्तव्य में कहा कि जिस तरह से भारत विकास की ओर बढ़ रहा है ठीक उसी तरह यह विद्यालय भी अपनी प्रगति की ओर अग्रसर है। आज का रोजगार बाजार तेजी से बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमता, स्वचालन और नई तकनीकों ने कार्य स्थलों की प्रकृति बदल दी है। ऐसे समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। मौके पर उपस्थित संजय चट्टोपाध्याय ने कहा कि हमें गर्व है कि यह विद्यालय अपना 75 वाॅ वर्ष मना रहा है ।अधिक गौरवान्वित महसूस तब करूँगा जब यह विद्यालय 100 वर्ष पूर्ण करेगा। जो विद्यार्थी असफलता से सीखना जानते हैं, वे जीवन में अधिक मजबूत और सफल बनते हैं। इस अवसर पर विद्यार्थीयों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में बालिका शिक्षा सदन की प्रधानाध्यापिका मधुमिता दत्ता, मुरारी लाल मेहता विद्या मंदिर की प्रधानाध्यापिका दीपा दास गुप्ता, मंत्री अजय काजरिया, सभापति ओ पी कानोडिया, अखिलेश काजरिया का विशेष योगदान रहा।

अर्चना संस्था द्वारा पावस ऋतु पर काव्य गोष्ठी 

कोलकाता । मानसूनी माहौल में कवियों के शब्दों की बौछारें मन को भिगोने लगते हैं। अर्चना संस्था के सदस्यों ने ऑनलाइन माध्यम जूम मीटिंग को चुना और रचनाकारों ने रचनाएं  प्रस्तुत की । चिराग चतुर्वेदी, मृदुला कोठारी, सुशीला चनानी, प्रसन्न चोपड़ा, बनेचन्द मालू, शशि कंकानी, संगीता चौधरी, सुशीला सुराना, मीना दूगड़, इंदू चांडक,हिम्मत चौरड़िया प्रज्ञा, डॉ वसुंधरा मिश्र आदि कवि रचनाकारों और श्रोता सदस्याओं की उपस्थिति रही।
अर्चना संस्था की गोष्ठी में बनेचन्द मालू ने समाज के बदलते स्वरूप का वर्णन किया और मनुष्यता के लिए छोटी-छोटी क्षणिकाओं से नसीहत दी – उनकी कविताएँ – बस्तियाँ हैं बस रही,/ पर आदमी उजड़ रहा,/आस्थाएँ धँस रही,/और मूल से उखड़ रहा। / …….कोई भी नसीहत /दरवाजे पर दस्तक की तरह, नरम लहजे में ही /अच्छी लगती है/ और ज्यादा असर करती है। क्योंकि / दस्तक का मकसद/दरवाज़ा खुलवाना होता है,/तोड़ना नहीं। – कैसा सर्प दंश, /यह है रावण का अंश। /एक सच्चा बखान है, /पंचतत्व में भी रावण विद्यमान है।
संगीता चौधरी ने माँ के निश्छल प्रेम और त्याग की बहुत सुन्दर प्रस्तुति देते हुए सुनाया – मां तुम कितना झूठ बोलती हो /तुम स्वयं तो अपने लिए /सुकुन के दो पल टटोलती हो/मां तुम कितना झूठ बोलती हो।
सुशीला चनानी ने वर्षा पर दोहे सुनाए जिसमें बचपन की शरारतें और पानी में छ्प छ्प करते बच्चे बारीश का आनंद है/रिमझिम बूंदें बरसाती मनभावन दे ताल /ओले चुनते हाथ से ,बचपन का वह रंग /छप छप करके छेड़ते ,बरखा का वह नीर और आज हमारी पहचान कागजों पर हो गई है चाहे डेथ सर्टिफिकेट ही क्यों न हो वे कहती हैं -सच कागज पर चाहिये !
आजकल जबानी तकरीर का कोई मोल नहीं,/जो कागज पर लिखा गया वही सही !
चिराग चतुर्वेदी ने गोष्ठी का शुभारंभ शिव के आह्वान से किया और देश के लिए शिव से दानवी शक्तियों के नाश करने की कामना की जिसमें वे कहते हैं – भगवान शिव जी की उपासना में/हे रामेश्वर करुणावतार/वंदित अभिनंदित निराकार /देश की दानवी प्रवृत्तियों का करो विनाश,/मिटे संत्रास,/फैले दिव्य प्रकाश।।
नदी और नारी उठाती रही हैं भार ।/रूकना नहीं,थकना नहीं चलता चला चल ।-शशि कंकानी ने अपनी रचनाओं से समाज और व्यक्ति को चलते रहने का संदेश दिया।
सप्त रंगों के पहने परिधान /जब तुम धरा पर उतरती हो किसी नवोढ़ा दुल्हन सी हमें लगती हो। / बूंद को धरती पर उगाता तू ही /बूंद को धरती पर उतार कर/धान रूप में सुखाता भी तू ही, गीत- बादल म्हारी और आज्या थोड़ी छांटलड्या बरसाज्या/चकमक चूरमो खिचड़लै थी गोठ करास्यां रे****मृदुला कोठारी के राजस्थानी भाषा में पिकनिक की परंपरा जिसे गोठ कहा जाता है उसका चित्रण किया और अन्य कविताएं भी सुनाई ।
कुण्डलिया छंद-1.कुदरत रखे सहेज कर, एक अनूठी चीज2.लगा इमोजी मत दिखा,अपना झूठा प्यार।
गीत-सागर जिसके पाँव पखारे, सुरपति करे बखान।
गूँज उठे धरती पर फिर से,जय-जय हिन्दुस्तान।।हिम्मत चौरड़िया प्रज्ञा ने देशभक्ति पर अपनी रचना सुनाकर अपने देश की प्रशंसा की है। कुंडलियां में इमोजी का प्रयोग कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।
मैं गरीबी और अभाव लिखती हूं ।/फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों के घाव लिखती हूं महलों की चमकने कभी आकर्षित नहीं किया।/ मैं भूखी आंखों के अनगिनत ख्वाब लिखती हूं ।–प्रसन्न चोपड़ा ने इन कविताओं में एक कवि विलासिता में जीवन नहीं यापन करता बल्कि समाज की सच्चाई बयान करता है ।
वसुंधरा मिश्र की ‘मैं औरत हूँ’ कविता की पंक्तियाँ हाँ! मैं औरत हूँ /वह भी औरत तुम भी /औरत! औरत! औरत! पसंद की गई जिसमें स्त्री के अस्तित्व को स्त्री ही पहचानती है और अपनी संस्कृति का भी संरक्षण करती है।दूसरी रचना महादेवी वर्मा की पावस ऋतु पर सुनाई। जिसमें पावस ऋतु पाहुन बन कर पलकों पर उतर आता है और हम तृप्ति का अनुभव करते हैं।
इंदू चांडक ने दोहे भूल गए कर्तव्य सब,माँग रहे अधिकार।
कैसे समझेंगे भला, क्या होता व्यवहार।।/मिले धरोहर रूप में, जो हमको संस्कार।/उनके ही अनुरूप हम करते जग व्यवहार।।/और गीत-काळी काळी बादली लोरां लेती आई रे /समदरियै मैं जी घबरावै,आभै मैं उड़ छाई रे। राजस्थानी गीत काली काली बदली और दोहे सुनाए जिनमें पावस ऋतु का सौन्दर्य और संदेश दिया। विविध रसों का संगम है पाकशाला /आरोग्य से परिपूर्ण है हर मसाला /स्वाद जो रसना से उतर दिलों दिमाग पर छाए /ऐसा रसोईघर है हर स्वाद की प्रयोगशाला.और बच्चों की किलकारी मानो एक फुलवारी-मीना दूगड़ ने अपनी रचनाएं सुनाई जिसमें पूरी पाकशाला और बच्चों का चित्रात्मक वर्णन किया।
सुशीला सुराना ने अपनी सशक्त रचना – आहट विध्वंस की सुनो, /जब भी हो सचेतन, साहस के बिगुल फूँक दो। /.. अनहद तक गूँजे सिंहनाद, /हमें हिंद पर नाज़, हमें हिंद पर नाज़ रहे। /व्योम, धरा, ये दिशा-दिगंत, /पावन भूमि अभिमान रहे। /पावन भूमि अभिमान रहे। और मैंने ‘शंकर को साधा है, /विष पीता हूँ हर बार सखे। सुनाई ।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने जानकारी देते हुए बताया कि इंदू चांडक के संयोजन और संचालन ने सभी रचनाकारों में अपनी संचालन कला से प्राणों में नई ऊर्जा का संचार किया और धन्यवाद दिया मृदुला कोठारी ने।

भवानीपुर कॉलेज ने मनाया 27 कारगिल विजय दिवस स्मरणोत्सव

कोलकाता ।  भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज द्वारा 26 जुलाई 2026 को, त्रि शक्ति एनसीसी कलेक्टिव, द भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के कैडेटों ने 1999 के कारगिल युद्ध के नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 27वां कारगिल विजय दिवस मनाया। समारोह में कमांडर मृण्मय घोष, कमांडिंग ऑफिसर, 2 बंगाल नेवल यूनिट एनसीसी, प्रोफेसर दिलीप शाह, 2 बंगाल नेवल यूनिट एनसीसी और 31 बंगाल नेवल यूनिट एनसीसी के पीआई स्टाफ द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई, इसके बाद राष्ट्रगान, कारगिल युद्ध पर एक जानकारीपूर्ण फिल्म और एक देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया गया। कैडेट.सैनिक छात्रवीर चक्र कैप्टन विजयंत थापर की द लास्ट लेटर की मार्मिक प्रस्तुति में भारतीय सैनिकों के बलिदान पर प्रकाश डाला गया। कमांडर मृणमय घोष ने अनुशासन, साहस और राष्ट्र सेवा पर प्रेरक भाषण देकर कैडेटों को प्रेरित किया। अधिकारियों के चाय नाश्ते के दौरान एक फायरिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था, और विजेता एसडब्ल्यू और एसडी कैडेटों को एनसीसी अधिकारी अरित्रिका दुबे और बीईएससी के खेल अधिकारी रूपेश गांधी द्वारा कारगिल के अनुभवी कैप्टन अखिलेश सक्सेना की पत्नी शिखा सक्सेना द्वारा लिखित नेशन फर्स्ट की प्रतियों के साथ सम्मानित किया गया था। डॉ वसुंधरा मिश्र ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम कैडेटों के बीच देशभक्ति, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को मजबूत करते हुए भारत के बहादुर सैनिकों को हार्दिक श्रद्धांजलि के रूप में संपन्न हुआ।

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भवानीपुर कॉलेज के एनसीसी ऑफिसर सम्मानित

कोलकाता । भवानीपुर गुजराती एडुकेशन सोसायटी एनसीसी के सीनियर अंडर ऑफिसर साहब शाहिद को राज्यपाल ने गत 27 जुलाई को आयोजित समारोह में सम्मानित किया । यह पश्चिम बंगाल व सिक्किम डायरेक्टरेट एनसीसी की आर्मी विंग से जुड़े हैं ।

उमेश चंद्र कॉलेेज में मनायी गयी प्रेमचंद जयंती

कोलकाता । हिंदी विभाग, उमेशचंद्र कॉलेज, कोलकाता, उमेशचंद्र कॉलेज पुस्तकालय तथा आंतरिक गुणवत्ता मूल्यांकन समिति (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को महाविद्यालय के पुस्तकालय कक्ष में सुप्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती साहित्यिक गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्रिंसिपल डॉ. मो. तुफ़ज्जल हक ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल अपने समय का दस्तावेज नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए भी समान रूप से प्रासंगिक है। प्रेमचंद के साहित्य में आज भी समाज को दिशा देने की शक्ति मौजूद है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ सामाजिक विषमताओं, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों को सशक्त स्वर प्रदान करती हैं तथा नई पीढ़ी की सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराती हैं। मुख्य वक्ता के रूप में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कमल कुमार ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके साहित्यिक अवदान का विश्लेषण किया। उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य के संदर्भ में हिंदी और बांग्ला साहित्य के अंतर्संबंधों की चर्चा करते हुए दोनों भाषाओं की साझा सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक परंपरा को रेखांकित किया।

मैनेजमेंट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र साव ने अपने संबोधन में कर्मभूमि उपन्यास के सन्दर्भमें कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मानवीय संवेदना, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत दस्तावेज़ है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रेमचंद के साहित्य का गंभीर अध्ययन करने का आह्वान किया। इस अवसर पर आयोजित ‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी निबंध प्रतियोगिता’ में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की संयोजिका और संचालक डॉ. काबेरी कर्मकार ने पुस्तकालय में प्रेमचंद के कृतियों की प्रदर्शनी का लोकार्पण करते हुए प्रेमचंद के योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम का समापन श्रीमती झिलम हाजुरा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। समारोह में महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षा-कर्मी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में मनोज पाठक, सौविक रॉय, अमित कुमार सिंह, रोहन रजक सहित अनेक सहयोगियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

ला मार्टिनियर फॉर बॉयज के छात्रों को “सीईआरएन मास्टरक्लास 2026” का अवसर

कोलकाताकोलकाता के प्रतिष्ठित ला मार्टिनियर फॉर बॉयज ने ‘बोस बीमलाइन चैलेंज फॉर स्कूल्स 2025’ जीता और प्रतिष्ठित ‘विजनरी अवार्ड’ हासिल किया, जो स्कूल और उसके छात्रों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। एस. एम. बनर्जी के मार्गदर्शन में राघव अग्रवाल, कबीर अग्रवाल, युवराज शाह, वरुण बजोरिया और सात्विक गुप्ता के एक रिसर्च पेपर की वजह से 12 छात्रों की टीम को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में “सीईआरएन मास्टरक्लास 2026” के लिए निमंत्रण मिला। इस टीम में कृषव अग्रवाल, आरव कपूर, युनव पोपट, आरश नेविल कोयिथारा, स्तवन जैन और विराज सरावगी भी शामिल थे।अपनी यात्रा के दौरान छात्रों ने सीईआरएन की मशहूर सुविधाओं को देखा जिनमें एंटीमैटर फैक्ट्री और एटलस, ऐलिस और एलएचसीबी प्रयोग शामिल हैं। उन्होंने जाने-माने वैज्ञानिकों की बातों को ध्यान से सुना और असली पार्टिकल फिजिक्स डेटा का विश्लेषण किया, जिससे उन्हें एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च के बारे में जानकारी मिली। छात्रों ने यूनाइटेड नेशंस हेडक्वार्टर, शैमोनिक्स और मोंट ब्लैंक का भी दौरा किया। यह अनुभव वैज्ञानिक उपलब्धि, खोज और वैश्विक स्तर पर सीखने का एक प्रेरणादायक उत्सव था। इस उपलब्धि पर कोलकाता के ला मार्टिनियर फॉर बॉयज के प्रिंसिपल सिडनी फ्रांसिस मेनेजेस ने कहा, हमें अपने छात्रों की इस शानदार उपलब्धि पर बहुत गर्व है। ऐसे अनुभव युवा दिमागों को एडवांस्ड रिसर्च और खोज की दुनिया का अनमोल अनुभव देते हैं, और हमें उम्मीद है कि यह यात्रा उन्हें खोज जारी रखने, सवाल पूछने और ज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी। यह उपलब्धि कोलकाता के ला मार्टिनियर फॉर बॉयज के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि इसके छात्रों को दुनिया की कुछ प्रमुख वैज्ञानिक अनुसंधान सुविधाओं का अनुभव करने और क्लासरूम से बाहर पार्टिकल फिजिक्स से जुड़ने का मौका मिला है।

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की घोषणा, यामी गौतम बनीं सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री

कार्तिक आर्यन और ममूटी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता

नयी दिल्ली, एजेंसी । सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने शनिवार को 72वें नेशनल फिल्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी। इसमें वर्ष 2024 में रिलीज हुई सर्वश्रेष्ठ फिल्मों के लिए कार्तिक आर्यन व ममूटी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान दिया गया जबकि धनुष की रायन को मिला बेस्ट फीचर फिल्म का सम्मान मिला।
नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म की श्रेणी की घोषणा करते हुए जूरी अध्यक्ष जयराज ने बताया कि साल 2024 के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान यामी गौतम को ‘आर्टिकल 370’ के लिए दिया जाएगा जबकि सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ के लिए और ममूटी को फिल्म ‘ब्रमायुगम’ के लिए दिया जाएगा। इसी के साथ स्वातंत्र्य वीर सावरकर फिल्म को सर्वश्रेष्ठ डेबू फिल्म का सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि साल 2024 के लिए इस श्रेणी में कुल 34 भाषाओं और बोलियों की 400 फिल्में प्राप्त हुईं। सभी फिल्में अपने आप में नायाब और अनोखी कहानियां सुनाती हैं। सभी फिल्में अपने आप में सर्वश्रेष्ठ हैं। ‘फिल्म श्रीकांत’ उद्योगपति श्रीकांत बोल्ला की असल जिंदगी की प्रेरणादायक कहानी पर आधारित है, जिन्होंने नेत्रहीन होने के बावजूद जीवन में बड़ी कामयाबी हासिल की।
अरविंद स्वामी और कार्ती स्टारर ‘मेइयाझगन’ को स्पेशल मेंशन सम्मान दिया जाएगा। धनुष की ‘कैप्टन मिलर’ को स्पेशल मेंशन सम्मान दिया जाएगा। इसी के साथ तेलगु भाषा की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म ‘इम्बु’ है। गढवाली भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का अवॉर्ड ‘ढोली’ को दिया जाएगा। इसे दिनेश पी भोंसले ने निर्देशित किया है। तेलुगू भाषा की बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड ‘कमिटी कुरोलु’ को मिला है। धनुष के निर्देशन में बनी ‘रायन’ को तमिल की बेस्ट फिल्म कैटेगरी में अवॉर्ड मिला है।
‘मैं निदा’ (हिंदी), बेस्ट नॉन-फीचर फिल्म प्रमोटिंग सोशल एंड एनवायरनमेंट वैल्यूज का अवॉर्ड ‘पिपलांतरी- ए टेल ऑफ इको फेमिनिज्म’ (हिंदी, राजस्थानी और इंग्लिश) को दिया जाएगा। बेस्ट एनिमेशन फिल्म का अवॉर्ड ‘टच्ड एज वाटर’ (साइलेंट) को दिया जाएगा।
नॉन फीचर फिल्म्स में बेस्ट डायरेक्शन का अवॉर्ड ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी-एकता का प्रतीक’ (हिंदी) के लिए डायरेक्टर आनंद एल राय को दिया जाएगा। बेस्ट क्रिटिक्स फॉर सिनेम का सम्मान संजीव श्रीवास्तव को दिया जाएगा।

 

भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 सफलतापूर्वक लॉन्च

-प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

नयी दिल्ली, एजेंसी। भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 शनिवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हो गया। इस लॉन्चिंग को ‘मिशन आगमन’ नाम दिया गया है।
पहले इस मिशन को सुबह 11:30 बजे लॉन्च किया जाना था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों के चलते इसे दोपहर 12.06 बजे प्रक्षेपित किया गया। हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा बनाया गया विक्रम-1 तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल से चलता है। विक्रम-1 के प्रक्षेपण के साथ ही भारत ने ग्लोबल प्राइवेट ऑर्बिटल लॉन्च मार्केट में कदम रख दिया है। यह भारत की कमर्शियल स्पेस क्षमताओं को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसके सफल प्रक्षेपण पर स्काईरूट एयरोस्पेस और उसके वैज्ञानिकों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कंपनी के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका से फोन पर बात कर कहा कि स्काईरूट ने आकाश में अपनी जड़ें गाड़ दी हैं और जमीन पर भी उन जड़ों को मजबूत किया है, जो देश के युवाओं को प्रेरणा देंगी।
प्रधानमंत्री ने कंपनी के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना से इसरो के दफ्तर में फोन से बात करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सफलता ने दिखा दिया है कि भारत निजी क्षेत्र की भागीदारी से भी अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में सक्षम है। स्काईरूट की युवा टीम ने प्रतिबद्धता और मेहनत से भारत मां की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। उन्होंने इसे ‘वंदे मातरम मिशन’ की तरह बताया और कहा कि यह नई पीढ़ी को तकनीक का लाभ देने और आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करने का काम करेगा। उन्होंने स्काईरूट टीम को जल्द मिलने का निमंत्रण भी दिया।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट विक्रम-1 की लॉन्चिंग का आईसीएमआर से सीधा प्रसारण देखा। उन्होंने इसके सफलतापूर्वक प्रक्षेपण को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। विक्रम-1 की खासियत- विक्रम-1 चार-स्टेज वाला ऑर्बिटल रॉकेट है, जो लगभग 20 मीटर ऊंचा और 1.7 मीटर व्यास वाला है। इसके पहले तीन स्टेज सॉलिड प्रोपल्शन पर काम करते हैं, जबकि चौथा स्टेज ऑर्बिट में पहुंचने और सटीक मूवमेंट के लिए लिक्विड इंजन का इस्तेमाल करता है। इसे पूरी तरह से कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर से बनाया गया है। विक्रम-1 में 3डी-प्रिंटेड इंजन और हाई-थ्रस्ट सॉलिड-फ्यूल बूस्टर लगे हैं। इसे 350 किलोग्राम तक वजन वाले छोटे सैटेलाइट को लो-अर्थ ऑर्बिट में ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

परिवार मिलन का 30वां मानस महोत्सव सम्पन्न

कोलकाता । परिवार मिलन ने 30वां मानस महोत्सव का आयोजन किया। इस आयोजन में रामचरितमानस के अरण्यकांड एवं किष्किंधाकांड पर आधारित अंतरविद्यालय अंत्याक्षरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में कोलकाता के 8 प्रतिष्ठित विद्यालयों सेठ सूरजमल जालान बलिका विद्यालय, श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी विद्यालय ब्वॉयज, मारवाड़ी बालिका विद्यालय, सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल, श्री शिक्षायतन स्कूल, श्री जैन विद्यालय, एम सी केजरीवाल विद्यापीठ, बी डी एम इंटरनेशनल स्कूल के तेरह समूहों के विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की। संस्कारोदय के इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ प्रेमशंकर त्रिपाठी ने आयोजन और आयोजकों की सराहना की और कहा कि रामचरितमानस का प्रत्येक छंद संस्कार की पाठशाला है।
कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या एवं रामचरित मानस की अध्येता डॉ सत्या उपाध्याय पर्यवेक्षण में सम्पन्न हुई प्रतियोगिता में मारवाड़ी बालिका विद्यालय ने प्रथम, एम सी केजरीवाल विद्यापीठ ने द्वितीय तथा बी डी एम इंटरनेशनल स्कूल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। अन्य सभी प्रतिभागी विद्यालयों के समूह को प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रशस्तिपत्र एवं उपहार भेंट किए गये।
स्वागत वक्तव्य देते हुए संस्था के पूर्व उपाध्यक्ष राजेंद्र कानूनगो ने कार्यक्रम की महत्ता बताते हुए प्रतिभागिता हेतु सबका अभिनन्दन किया।
अंत्याक्षरी का कुशल संचालन शुभा चूड़ीवाल ने तथा कार्यक्रम का संचालन संस्था की प्रधान सचिव विनीता मनोत ने किया। संस्था अध्यक्ष अरुण चूड़ीवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस आयोजन में महावीर जी मनकसिया, सुधा चूड़ीवाल, राजेश कन्दोई, सुनीता कन्दोई, मुक्ता नैन, करुणा गुप्ता, भँवर लाल गट्टानी, हरि मोहन मरदा, श्रीमोहन तिवारी, ज्योति कंदोई, विनोद कंदोई, ताराचंद मनोत के साथ विद्यालय के शिक्षक–शिक्षिकाओं, अभिभावकों, विद्यार्थियों तथा अन्य मानस प्रेमियों की उपस्थिति रही।

मोहम्मद अली पार्क यूथ एसोसिएशन ने की खूंटी पूजा

कोलकाता । मोहम्मद अली पार्क यूथ एसोसिएशन की ओर से बुधवार को पारंपरिक खूटी पूजा के साथ दुर्गापूजा समारोह के अपने 58वें वर्ष के आयोजन की शुभ शुरुआत की। इसके साथ ही उत्तर व मध्य कोलकाता की सबसे प्रतिष्ठित दुर्गा पूजाओं में से एक की तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू हो गईं। यह समारोह एमजी रोड मेट्रो स्टेशन के पास मोहम्मद अली पार्क दुर्गा पूजा मैदान में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कमेटी के सदस्यों के साथ विशिष्ट अतिथि एक सफल और भव्य उत्सव के लिए देवी दुर्गा का आशीर्वाद लेने एकत्रित हुए।

इस मौके पर विभिन्न प्रतिष्ठित हस्तियों में तापस रॉय, (माननीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री, पश्चिम बंगाल सरकार एवं मोहम्मद अली पार्क यूथ एसोसिएशन के चेयरमैन), विजय ओझा (विधायक), मीना देवी पुरोहित (पार्षद), तमघ्न घोष (जिला अध्यक्ष, भाजपा उत्तर कोलकाता), बिनय दुबे (सामाजिक कार्यकर्ता और मोहम्मद अली पार्क के यूथ एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन) के उपस्थित रहे ।  मोहम्मद अली पार्क के यूथ एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी सुरेंद्र कुमार शर्मा ने कहा, हम गर्व से अपने 58वें साल की शुरुआत शुभ खूटी पूजा के साथ कर रहे हैं, हम भक्तों के लिए यह यादगार पल, दुर्गापूजा का अनुभव कराते हुए अपनी समृद्ध परंपराओं को बनाए रखने के अपने वादे पर हम हर वर्ष खरा उतरने की पूरी कोशिश करते हैं। नई सरकार के आने और हमारे मोहम्मद अली पार्क यूथ एसोसिएशन परिवार के लगातार बढ़ने के साथ हमें पूरी उम्मीद है कि अब केएमसी की ओर से पार्क के नीचे मौजूद वॉटर रिजर्वर का रेनोवेशन कार्य जल्द से जल्द पूरा हो जाएगा। इसके साथ हीं पार्क की स्थिति में भी सुधार कर उसे ठीक किया जाएगा, जिससे हम अपने पुराने जगह पर एक बार फिर दुर्गा पूजा का आयोजन कर सकेंगे।

बार -बार लीक होते पेपर…क्या यह साजिश है?

क्या सरकार के पास देने के लिए नौकरी नहीं ? क्या पेपर लीक के पीछे कोचिंग सेंटर रैकेट का हाथ है? यह सवाल इसलिए क्योंकि देश में सरकारी नौकरियों के लिए और डॉक्टरी व इंजीनियिंग के तमाम संस्थानों में प्रवेश के ली जाने वाली परीक्षाओं के परचे लगातार लीक हो रहे हैं। पिछले ढाई दशकों से इस तरह की घटनाएं आम हो गयी हैं। सरकार यूपीए की हो या एनडीए की, लीकेज पर विराम नहीं लगा और कार्रवाई भी नहीं हुई। किंग पिन कौन था, पता नहीं चला । किसी मंत्री ने इस्तीफा भी नहीं दिया। सरकारें बदलीं, सूरत ए हाल नहीं बदला, ठगी गयी आम जनता और दोराहे पर खड़ी है युवा पीढ़ी । सबसे स्याह और चिंताजनक पहलू यह है कि परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सरकारी तंत्र की कार्रवाई केवल फाइलों तक सीमित है। इन 152 पेपर लीक की घटनाओं के कारण देश के 7.5 करोड़ से अधिक छात्र सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
एनडीए के 12 साल में 152 पेपर लीक हुए
कांग्रेस द्वारा जारी की गई ‘छात्रों की गूंज’ रिपोर्ट के अनुसार, साल 2014 से 2026 के बीच देश में 152 पेपर लीक के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनसे करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। इस राष्ट्रीय संकट में दिल्ली/केंद्रीय परीक्षाएं 38 मामलों के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि राज्यों में राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पेपर लीक सिंडिकेट के मुख्य गढ़ बने हुए हैं।
इस आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक से अधिक समय (2014 से 2026 तक) में देश के विभिन्न हिस्सों में कुल 152 पेपर लीक की पुष्टि हुई है. यह आंकड़ा केवल बड़ी और सुर्खियों में रहने वाली परीक्षाओं का नहीं है, बल्कि इसमें राज्यों के छोटे-छोटे विभागों की क्लर्क भर्ती से लेकर देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (नीट) तक शामिल हैं।
जब इन 152 मामलों की राज्यवार सघन समीक्षा की जाती है, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय एजेंसियां और कुछ विशिष्ट राज्य इस धांधली के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं।
दिल्ली और केंद्रीय परीक्षाएं (38 मामले)
देश की राजधानी और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का संचालन करने वाली केंद्रीय संस्थाएं इस सूची में सबसे ऊपर हैं। केंद्रीय परीक्षाओं में कुल 38 मामले लीक के दर्ज किए गए हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित नीट -यूजी, यूजीसी -नेट और पूर्व में कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी ) जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से राष्ट्रीय स्तर पर हाहाकार मचा है। इंटरनेट, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे सुरक्षित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके इन परीक्षाओं के कोड और प्रश्नपत्रों को परीक्षा से चंद घंटे पहले करोड़ों रुपयों में बेचा गया।
राजस्थान और गुजरात (11-11 मामले)
राज्यों की श्रेणी में राजस्थान और गुजरात संयुक्त रूप से शीर्ष पर हैं, जहां क्रमशः 11-11 बड़े पेपर लीक के मामले आधिकारिक तौर पर सामने आए हैं। राजस्थान में पिछले सालों में शिक्षक भर्ती (आरईईटी), पुलिस कॉन्स्टेबल, पटवारी और वनरक्षक जैसी परीक्षाओं के पेपर पूरी तरह लीक हुए, जिसके कारण लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत पर पानी फिर गया। गुजरात में भी अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (जीएसएसएसबी ) की विभिन्न क्लर्क परीक्षाओं और सरकारी बोर्ड परीक्षाओं के पेपर लगातार लीक होने के बाद सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड़ा है।
उत्तर प्रदेश (10 मामले)
उत्तर प्रदेश में पेपर लीक के 10 मामले दर्ज किए गए हैं। हाल ही में हुई यूपी पुलिससिपाही भर्ती परीक्षा और समीक्षा अधिकारी (आर ओ /एआ्ररओ) परीक्षा के पेपर लीक ने राज्य के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी। इसके अलावा पूर्व में यूपी-टीईटी (यूपी टीईटी , लेखपाल और जूनियर इंजीनियर जैसी परीक्षाओं के पेपर भी लीक माफियाओं के हत्थे चढ़ चुके हैं। उत्तर प्रदेश में इस रैकेट के तार अंतर-राज्यीय गिरोहों से जुड़े पाए गए हैं।
महाराष्ट्र (10 मामले)
भर्ती धांधली के मामले में महाराष्ट्र में भी 10 मामले उजागर हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की भर्ती परीक्षा, म्हाडा (एमएचएडीए ) भर्ती और टीईटी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर तकनीकी और भौतिक रूप से पेपर लीक होने की पुष्टि हुई थी, जिसमें कई बड़े अधिकारियों और निजी एजेंसियों को गिरफ्तार भी किया गया था।
मध्य प्रदेश (6 मामले) – मध्य प्रदेश का नाम आते ही ऐतिहासिक व्यापमं घोटाला याद आता है। हालांकि हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नए प्रारूपों में एमपी में 6 पुख्ता मामले दर्ज हैं, जिनमें नर्सिंग कॉलेज मान्यता घोटाला, पटवारी भर्ती परीक्षा में हुई धांधली और कृषि विस्तार अधिकारी परीक्षा के पेपर लीक प्रमुख हैं। मध्य प्रदेश में परीक्षा माफिया ने तकनीकी प्रणालियों में सेंध लगाने में महारत हासिल कर ली है।
साल 2026 में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा एक बार फिर बड़े पैमाने पर पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर संकट से घिरी है। यह विवाद 2024 के नीट घोटाले की याद दिलाता है, लेकिन इस बार सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को अभूतपूर्व कड़े कदम उठाने पड़े हैं।

यूपीए सरकार के दौरान भी लीक होते रहे हैं पर्चे
आज राहुल गांधी पीएम आवास के बाहर धरने पर जरूर बैठे हैं मगर यह भी ध्यान रखना होगा कि जब यूपीए की सरकार थी, तब भी परचे लीक हो रहे थे। 2014 से पहले केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार (2004-2014) के कार्यकाल के दौरान हुए पेपर लीक हुए । 1. 2004 से 2014 के बीच हुए मुख्य पेपर लीक) इस कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय स्तर की कई बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे, जिनकी वजह से परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं या भारी विवाद हुआ:
कैट (कॉमन एडमिशन टेस्ट) – 2003/2004: यह लीक नवंबर 2003 के अंत में हुआ था (जब वाजपेयी सरकार जाने वाली थी), लेकिन इसका पूरा असर और जांच 2004 में कांग्रेस सरकार आने के बाद भी चलती रही। इसमें प्रसिद्ध ‘रंजीत डॉन’ का नाम सामने आया था।
एआईजेईई (ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एन्ट्रेंस एक्जामिनेशन) – 2011 : 1 मई 2011 को होने वाली इस देशव्यापी इंजीनियरिंग परीक्षा का पेपर लीक हो गया था। पेपर यूपी और अन्य राज्यों में ₹6 लाख तक में बेचा जा रहा था। इस कारण परीक्षा को उसी दिन कुछ घंटों के लिए टालना पड़ा और दोपहर बाद दूसरी पाली में बैकअप पेपर से परीक्षा कराई गई।
एआईपीएमटी (ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट) – 2012: इस परीक्षा के दौरान भी अनियमितताओं और पेपर लीक के प्रयास की खबरें आईं, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े सवाल उठे थे।
एम्स पीजी एन्ट्रेंस एक्जाम – 2012: एम्स की पोस्ट ग्रेजुएट प्रवेश परीक्षा में एक बड़ा लीक और हाई-टेक नकल का रैकेट पकड़ा गया था, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने केस दर्ज कर कई डॉक्टरों और बिचौलियों को गिरफ्तार किया था।
राष्ट्रीय परीक्षाओं के अलावा राज्यों की कांग्रेस सरकारों में भी कुछ बड़े लीक हुए। उदाहरण के लिए, राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार (2008-2013) के समय और हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के समय कुछ स्थानीय शिक्षक और पुलिस भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे।
उस दौर में ‘शिक्षा मंत्रालय’ को मानव संसाधन विकास मंत्रालय कहा जाता था। 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस सरकार में दो प्रमुख शिक्षा मंत्री रहे: 1. अर्जुन सिंह: मई 2004 से मई 2009 तक (यूपीए -1 में), 2. कपिल सिब्बल: मई 2009 से अक्टूबर 2012 तक (जब 2011 में एआईईईई का बड़ा पेपर लीक हुआ, तब कपिल सिब्बल ही देश के शिक्षा मंत्री थे)। 3. एम. एम. पल्लम राजू: अक्टूबर 2012 से मई 2014 तक।
क्या किसी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ था?
नहीं, इस दौरान पेपर लीक की वजह से किसी भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं हुआ था।
जब 2011 में एआईजेईई का पेपर लीक हुआ, तब शिक्षा मंत्री कपिल सिब्बल ने परीक्षा के सिस्टम को ऑनलाइन करने यानी कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) और सीबीएसई (सीबीएसई) के ढांचे में सुधार करने की बात कही थी, लेकिन नैतिक या राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा नहीं दिया गया था। भारतीय इतिहास में पेपर लीक को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का कोई उदाहरण नहीं मिलता है। मंत्रियों का हटना या बदलना आमतौर पर कैबिनेट या कार्यकाल खत्म होने पर ही हुआ।

परीक्षा का आयोजन और लीक का खुलासा
3 मई 2026 : देश भर में 22.7 लाख से अधिक चिकित्सा अभ्यर्थियों के लिए नीट -यूजी परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा संपन्न होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया, विशेषकर व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर एक तथाकथित ‘गेस पेपर’ वायरल हुआ। जांच एजेंसियों (जैसे राजस्थान एसओजी ) की शुरुआती पड़ताल में सामने आया कि इस वायरल पीडीएफ PDF के 180 में से 120 सवाल हूबहू मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खा रहे थे। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा से करीब 42 से 48 घंटे पहले ही लीक प्रश्नपत्र को सीकर (राजस्थान), नासिक (महाराष्ट्र) और अन्य कोचिंग नेटवर्क्स में 10 लाख से 50 लाख रुपये प्रति छात्र तक में बेचा गया था।

सजा का प्रावधान तो है
नीट और यूजीसी – नेट परीक्षाओं में कथित अनियमितता को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच केंद्र सरकार ने भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए एक नया और सख्त कानून लागू किया है। एंटी-पेपर लीक कानून यानी पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लागू हो गया है। इस कानून के तहत पेपर लीक करने पर 10 साल तक की कैद और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह कानून देश में शिक्षा प्रणाली की शुचिता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। फरवरी 2024 में संसद से यह कानून पारित हो गया था, जो 21 जून 2024 से लागू हो चुका है।

58 हजार करोड़ का कोचिंग कारोबार मगर जवाबदेही कहां है?
भारत के ट्यूशन रिपब्लिक ने पड़ोस के ट्यूटर्स के साथ-साथ, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कोचिंग क्लासेस ने डिजिटल दुनिया में अपना जाल फैला लिया है। दो साल की महामारी के बाद, यह उद्योग अब पहले से कहीं ज्यादा बड़ा हो गया है। दरअसल यह शहरी भारत में आगे बढ़ने एक जरूरत बन गई है। नेशनल सैंपल सर्वे द्वारा 2016 में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, 7.1 करोड़ छात्र ट्यूशन में नामांकित हैं । शिक्षा मंत्रालय (तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय) द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति के 2015 के अनुमान के अनुसार, कोचिंग संस्थानों का वार्षिक राजस्व 24,000 करोड़ रुपये था। पुणे स्थित कंसल्टेंसी फर्म इंफिनियम ग्लोबल रिसर्च की मानें तो मौजूदा समय में भारत के कोचिंग उद्योग का बाजार राजस्व 58,088 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इस इंडस्ट्री के 2028 तक 1,33,955 करोड़ रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है। हजारों करोड़ों का कारोबार है मगर जवाबदेही तय नहीं हुई। कोचिंग सेटरों के नियमन की व्यवस्था नहीं है। फर्जी विज्ञापनों के मामले में कई बार अदालत की फटकार पड़ी मगर कोई असर नहीं है । अव्यवस्था के कारण कई हादसे हो चुके हैं मगर किसी का कुछ नहीं बिगड़ा ।
नीट -यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी ने स्पेशल कोर्ट को बताया कि महाराष्ट्र के लातूर स्थित एक कोचिंग सेंटर के संचालक ने परीक्षा से पहले केमिस्ट्री के सवाल हासिल करने के लिए कथित तौर पर 5 लाख रुपये दिए थे । सीबीआई का दावा है कि यह पूरा मामला सुनियोजित साजिश का हिस्सा था और इसमें कई लोग शामिल थे। प्रयागराज में लेखपाल भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रतियोगी छात्रों के विरोध प्रदर्शन और कैंडल मार्च के बाद तीन बड़े कोचिंग संस्थानों पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है। आरोप है कि प्रयागराज के तीन कोचिंग संस्थानों, एग्जामपुर, सुपर क्लाइमैक्स एकेडमी और टारगेट ऑन कोचिंग ने इस आंदोलन का समर्थन किया था। इसके बाद 31 मई को प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने कार्रवाई करते हुए इन तीनों कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया ।

सरकारी साजिश का अंदेशा
सार्वजनिक क्षेत्र की सर्वाधिक रोजगारमूलक इकाई भारतीय रेल है। लीकेज के चलन के साथ –साथ आर.आर.बी. की तमाम इकाईयां लुप्त हो गयीं । बची-खुची सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती प्रक्रिया बंद हो गयी । लोग अनुबंध पर लिए जाने लगे । दिखावे के लिए परीक्षाएं जरूर ली गयीं लेकिन कोचिंग सेंटरों से हाथ मिलाकर अथवा आउटसोर्सिंग एजेंसियों को परीक्षा नियामक बनाकर लीकेज को बढ़ावा दिया गया । सरकारी बाबू खुश,नाम की परीक्षा भी हुई और पैसों का वारा – न्यारा भी हुआ और नौकरी मिली सिफर । इसे कुछ लोग सरकारी साजिश का ही अंग मान रहे हैं।