Sunday, March 22, 2026
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आ गया विधवा महिलाओं की तस्करी पर “सादा रोंगेर पृथिबी” फिल्म का ट्रेलर

कोलकाता । राजोश्री दे की नई टॉलीवुड फिल्म “सादा रोंगेर पृथिबी” इस देश में विधवा महिलाओं की तस्करी पर आधारित सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म है। इस थ्रिलर फिल्म में काशी में इससे जुड़ी घटनाओं को फिल्म प्रेमियों के सामने लाने की कोशिश की गई है। सच्ची घटना पर बनी फिल्म का ट्रेलर लॉन्च दक्षिण कोलकाता के साउथ सिटी मॉल में स्थित आईनॉक्स में आयोजित किया गया। यह फिल्म आगामी 23 फरवरी को रिलीज हो रही है। इस मौके पर डॉ. शशि पांजा (वाणिज्य और उद्यम तथा महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग की प्रभारी मंत्री, पश्चिम बंगाल सरकार), सोहिनी शास्त्री (भविष्य वक्ता और उपचारकर्ता), मधुजा बनर्जी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष, फिक्शन कलर्स हिंदी और वायाकॉम 18 मीडिया प्राइवेट लिमिटेड), अमित अग्रवाल (प्रख्यात फिल्म निर्माता), राजोश्री दे (निर्देशक) के साथ “सादा रोंगेर पृथिबी” की पूरी स्टार कास्ट इस मौके पर मौजूद थे। विधवा तस्करी पर बनी पूरे भारत में यह पहली ऐसी फिल्म है, जो अब तक किसी अन्य भाषा में नहीं बनी है।
इस फिल्म की कहानी वाराणसी में विधवाओं की बेरंग दुनिया को लेकर बनी है। इस फिल्म की कहानी में उन आपराधिक मास्टरमाइंडों की कुकृत्तियों को भी दर्शाया गया है, जो इन दुर्भाग्यपूर्ण जीवन जीनेवाली महिलाओं का शोषण करते हैं। इस फिल्म में ट्विस्ट तब आता है, जब एक युवा पुलिस अधिकारी इन विधवा महिलाओं के आश्रय स्थल की जांच करने के लिए आती हैं। जांच के लिए इन सब विधवा महिलाओं के बीच वह पुलिस अधिकारी रहना शुरू करती है, वह उन खतरों से अनजान रहती हैं, जो फिल्म में आगे उसका इंतजार कर रहे होते हैं। क्या वह समाज की इस अनदेखी बुराई से लड़ने के अपने प्रयास में राजनीतिक दबावों और अन्य खतरों के बीच सफल होगी? इस फिल्म में छिपा यह पूरा सस्पेंस फिल्म के रिलीज होने पर स्पष्ट होगा। आदर्श टेलीमीडिया और अमित अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत और सुशांत सेनगुप्ता, श्रावणी पाल, राजोश्री दे द्वारा निर्मित इस फिल्म में बंगाल के 19 शीर्ष कलाकारों ने अपनी अभिनय की प्रतिभा बिखेरी हैं। इस फिल्म की पूरी कहानी विधवाओं की दुर्दशा, उनके खिलाफ होने वाले अपराध और सदियों पुरानी रीति-रिवाजों को उजागर करेगी, जो उन्हें प्रतिबंधात्मक जीवन शैली में बांधकर रहने को मजबूर करती है। इस फिल्म में स्टार कास्ट और क्रू मेंबर्स में श्राबंती चटर्जी, सौरसेनी मैत्रा, अरिंदम सिल, रीतब्रत मुखर्जी, स्नेहा चटर्जी, मल्लिका बनर्जी, देवलीना कुमार, अनन्या बनर्जी, ऋचा शर्मा, सोही गुहा रॉय, देबोश्री गांगुली, ओइंड्रिला बोस, अरुणाव डेरी, ईशान मजूमदार, मोनालिशा बनर्जी, अनुराधा चौधरी के अलावा इस मौके पर शामिल प्रमुख अतिथियों में सुभ्रजीत मित्रा मौजूद थे। इस फिल्म की संगीत रचना आशु चक्रवर्ती द्वारा की गई है। यह फिल्म आगामी 23 फरवरी को रिलीज हो रही है।

काव्य-संध्या ने रसिक श्रोताओं का मन मोहा

कोलकाता । भारतीय भाषा परिषद और गोरखपुर की संस्था स्नेहिल काव्य धार द्वारा एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया। स्नेहिल काव्य धार की संस्थापिका सरोज अग्रवाल तथा रेखा ड्रोलिया ने कार्यक्रम का संचालन किया व अपनी कविताएं भी सुनायीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेश चौधरी ने की, जिसमें मुख्य अतिथि थीं कवयित्री विद्या भंडारी। दुर्गा व्यास, रमा केडिया, डॉ.अभिज्ञात, सविता पोद्दार, डॉ.गीता दुबे, नीता अनामिका, अर्पणा अंजन, राज्यवर्धन, सेराज खान बातिश चंदा प्रहलादका , शशि लोहाटी प्रसन्न चोपड़ा ने अपने गीतों, गजलों और मुक्तछंद की कविताओं से उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया। शम्भूनाथ जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की संयोजक विमला पोद्दार ने अपने उद्घाटन संबोधन में गोरखपुर से आई संस्था का स्वागत किया।

पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन की 59वीं वार्षिक साधारण सभा सम्पन्न

कोलकाता । पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन इस राज्य में कोल्ड स्टोरेज का एकमात्र सक्रिय एसोसिएशन है। इस एसोसिएशन की ओर से सोमवार को कोलकाता के साल्टलेक में “द आलमंड” में 59वीं वार्षिक सभा का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि बेचराम मन्ना (माननीय एमआईसी, कृषि विपणन विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार), डॉ. प्रदीप कुमार मजूमदार (माननीय एमआईसी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार) ने किया। इसके अलावा इसमें शामिल होनेवाले अन्य गणमान्य अधिकारियों में अशोक कुमार दास (विशेष सचिव, कृषि विपणन विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार), पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश कुमार बंसल, पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष श्री सुनील कुमार राणा, डब्ल्यूबीसीएसए के पूर्व अध्यक्ष श्री पतित पबन दे के साथ समाज की कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां इस दौरान मौजूद थे। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार बंसल ने कहा, आलू उत्पादकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। चालू सीजन में लगभग 4.6 लाख हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती की गई है। उन्होंने चालू सीजन में लगभग 110 लाख टन आलू का उत्पादन होने का अनुमान लगाया।
पश्चिम बंगाल में घरेलू खपत 65 लाख टन है, शेष स्टॉक को अन्य राज्यों में सप्लाई करने पर विचार किया जा सकता है। बाजार में आलू की स्थिर कीमत और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने अधिकारियों से अनलोडिंग अवधि के दौरान हर महीने 12% की एक समान दर पर संग्रहीत स्टॉक को जारी करने के लिए एक प्रणाली तैयार करने का अनुरोध किया।  उन्होंने आलू उत्पादक राज्यों में कोल्ड स्टोरेज का किराया वह के यातायात किराए के बराबर बढ़ाने की मांग की। जहां वर्तमान दर 230/- रुपये से 270/- रुपये प्रति क्विंटल है। उन्होंने उल्लेख किया कि विशेषज्ञ समिति द्वारा दक्षिण और उत्तर बंगाल के लिए कोल्ड स्टोरेज किराया क्रमश: 190 रुपये और 194 रुपये करने की सिफारिश के बावजूद सरकार अब तक कोल्ड स्टोरेज किराया संशोधित नहीं कर सकी है। उन्होंने आशंका जताई कि आगामी सीज़न में कोल्ड स्टोरेज के संचालन में इससे बाधा आ सकती है, क्योंकि स्टोर मालिक वर्तमान किराया संरचना के साथ अपनी इकाइयों को संचालित करने के इच्छुक अब नहीं रह गए हैं। इसके अलावा, यह सुझाव दिया गया कि कोल्ड स्टोरेज किराए की गणना 100% भंडारण क्षमता के बजाय 85% भंडारण क्षमता पर आधारित होनी चाहिए क्योंकि 100% क्षमता का उपयोग शायद ही कभी किया जाता है। इस सभा के जरिए यह भी सुझाव दिया गया कि कोल्ड स्टोरेज अधिनियम 1966 की समीक्षा पर चर्चा में इन मुद्दों को शामिल होना चाहिए:
  भंडारण योग्य आलू की गुणवत्ता के प्रति इसे किराये पर लेने वालों का कर्तव्य।  भंडारण सत्र की समाप्ति के बाद भंडार इकाइयों में बचे आलू के स्टॉक के निपटारे के प्रति इसकी प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाएगा।  कोल्ड स्टोरेज लाइसेंस की वैधता पांच साल तक बढ़ाई जाए।  संयंत्र को चलाने के लिए कोल्ड स्टोरेज चैम्बर में न्यूनतम मात्रा में स्टॉक को उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने इस सभा के दौरान राज्य में उद्योग के अनुकूल कारोबारी माहौल और इससे जुड़े नियमों के सरलीकरण और विनियमों, समयबद्ध कार्यों, व्यवसाय के संचालन से संबंधित मुद्दों के निष्पक्ष और तार्किक निपटान पर विशेष जोर दिया।

भवानीपुर कॉलेज में शोध पत्र लेखन पद्धति पर दो दिवसीय सत्र संपन्न 

कोलकाता ।  भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने रिसर्च पेपर कैसे लिखें, इस पर दो दिवसीय इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया। शोध वह देखना है जो बाकी सभी ने देखा है और वह सोचना है जो किसी और ने नहीं सोचा है।अल्बर्ट सजेंट ग्योर्गी ने ठीक ही कहा है। दो दिवसीय यह सत्र 17 और 18 जनवरी, 2024 को सुबह 11.00 बजे से कॉलेज के सोसाइटी हॉल में आयोजित किया गया। सत्र का संचालन करने के लिए जिन दो अतिथि वक्ताओं को आमंत्रित किया गया था, वे इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया की एसोसिएट सदस्य अदिति झुनझुनवाला और डॉ.देबाश्री दे रहे जो ऑपरेशन रिसर्च में एमबीए, लेडी ब्रेबॉर्न कॉलेज, कोलकाता में राज्य सहायता प्राप्त संकाय सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को शोध पत्र लिखने के तरीके के बारे में उन्मुख करना और 2 अप्रैल 2024 को आयोजित होने वाले आगामी एओएन के छात्र सम्मेलन में भाग लेने के लिए उनमें रुचि जगाना है ।प्रथम दिन सत्र की शुरुआत रेक्टर और छात्र मामलों के डीन प्रो. दिलीप शाह द्वारा दिए गए परिचयात्मक भाषण से हुआ। प्रो. शाह ने दैनिक जीवन में अनुसंधान के महत्व पर विचार-विमर्श किया और बताया कि यह एक अत्यंत आकर्षक प्रक्रिया है, जो आपको अनुत्तरित नहीं छोड़ सकती। बी.कॉम (मॉर्निंग) की समन्वयक मीनाक्षी चतुर्वेदी ने अतिथियों का स्वागत किया जिनमें सुश्री अदिति झुनझुनवाला, इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया की एसोसिएट सदस्य और प्रैक्टिसिंग कंपनी सचिव हैं, जिनके पास प्रैक्टिस सहित कॉर्पोरेट कानून अभ्यास में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है। सुश्री अदिति ने एक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन द्वारा रोजमर्रा की जिंदगी में शोध के महत्व और एक ‘अवधारणा’ या ‘विचार’ कैसे विकसित किया जाए, इस पर विस्तार से बताया, जो एक शोध पत्र लिखने के लिए महत्वपूर्ण है। शोध के 4 डब्ल्यू की प्रासंगिकता के बारे में बताया, अर्थात्, विषय क्या है, इस पर कब कार्रवाई की गई, यह प्रासंगिक क्यों है, यह कहां तक ​​पहुंचा और इसकी वर्तमान स्थिति क्या है। उन्होंने वित्तीय उत्तोलन या किसी कंपनी के शुद्ध लाभ का उदाहरण देकर 4Ws अवधारणा को समझाया। उन्होंने बताया कि एक शोध पत्र को चार भागों में विभाजित किया जाता है – अनुसंधान की पृष्ठभूमि और परिचय, अनुसंधान का मुख्य भाग और तरीके, डेटा की व्याख्या और विश्लेषण और निष्कर्ष और साहित्य समीक्षा और अंत में, ग्रंथ सूची और संदर्भ जिन्हें शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही एक अकादमिक पेपर और स्वतंत्र शोध के बीच के अंतर को भी स्पष्ट करते हुए , उपस्थित लोगों को एक सार लिखना सिखाया। सार शोध पत्र का एक संक्षिप्त सारांश होता है जो शोध पत्र में सूचीबद्ध प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालता है। उन्होंने शोध को प्रामाणिक और विशिष्ट बनाने के लिए आवश्यक बिंदुओं के प्रति छात्रों को जागरूक किया। लक्षित दर्शकों को जानना और शोध डेटा को प्रश्न, सर्वेक्षण, तुलनात्मक अध्ययन के रूप में प्रस्तुत करना एक अच्छा शोध पत्र लिखने में मदद करता है।प्रश्नोत्तरी में विद्यार्थियों ने कई प्रश्न किए। अदिति झुनझुनवाला को प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी द्वारा सम्मानित किया गया कॉलेज की ओर से उन्हें धन्यवाद ज्ञापन दिया गया। यह सत्र दोपहर 1:00 बजे तक चला।
द्वितीय दिन सत्र का संचालन प्रबंधन (आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन), एमसीए और ऑपरेशन रिसर्च में एमबीए में डॉक्टरेट डॉ. देबासरी दे द्वारा किया गया, जो लेडी ब्रेबॉर्न कॉलेज, कोलकाता में राज्य सहायता प्राप्त संकाय सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। डॉ दे ने शोध पत्र के उद्देश्यों पर एक पावरपॉइंट प्रस्तुत करके एक इंटरैक्टिव सत्र की शुरुआत की। उन्होंने अनुसंधान को तीन प्रकार में वर्गीकृत किया- अनुप्रयोग आधारित अनुसंधान, वस्तुनिष्ठ अनुसंधान और पूछताछ नियोजित अनुसंधान। बताया कि कैसे अनुसंधान अध्ययन चार उद्देश्यों के साथ किया जा सकता है: वर्णनात्मक, सहसंबंधात्मक, व्याख्यात्मक और अन्वेषणात्मक रूप से लिखा जाता है । दिखाया कि एक शोध पत्र कैसे लिखा जाता है, एक शोध अध्ययन की योजना बनाने के लिए आवश्यक 5 चरणों के साथ: एक शोध पत्र तैयार करना, एक शोध डिजाइन की संकल्पना करना, डेटा संग्रह के लिए एक उपकरण का निर्माण करना, एक नमूना चुनना और एक शोध प्रस्ताव लिखना। एक शोध पत्र के आठ आवश्यक तत्वों के बारे में बताया जो उनके द्वारा सूचीबद्ध किए गए थे और वे थे: विषय, शीर्षक, परिचय, पद्धति और साहित्य समीक्षा, परिकल्पना और डेटा संग्रह, विश्लेषण और व्याख्या, निष्कर्ष और संदर्भ। सत्र के अंत में, छात्रों द्वारा कुछ प्रश्न उठाए गए और यह स्पष्ट था कि 2 दिवसीय सत्र ने छात्रों को 2 अप्रैल, 2024 को आयोजित होने वाले आगामी छात्र सम्मेलन के लिए तैयार होने में सक्षम बनाया। सत्र के अंत में छात्रों की प्रतिक्रिया ली गई और यह वास्तव में भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के छात्रों के लिए एक समृद्ध अनुभव था।
रिपोर्टर काशिश शॉ और फ़ोटोग्राफ़र अंकित माजी रहे। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

अनहद कोलकाता सम्मान से विभूषित किये गये डॉ. अभिज्ञात 

कोलकाता। अनहद कोलकाता और मनीषा त्रिपाठी फाउडेंशन द्वारा स्थापित तृतीय मनीषा त्रिपाठी स्मृति सम्मान कवि, कहानीकार, अभिनेता, चित्रकार डॉ. अभिज्ञात को उर्दू के वरिष्ठ लेखक  फ़े सीन एजाज़  की अध्यक्षता में सम्पन्न हुए एक कार्यक्रम में दिया गया। डॉ अभिज्ञात को मानदेय, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और उत्तरीय प्रदान किया गया और उनकी रचनाओं पर चर्चा की गयी। अध्यक्षीय वक्तव्य में फ़े सीन एजाज़ ने कार्यक्रम की रूपरेखा की सराहना करते हुए अभिज्ञात को बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न रचनाकार कहा।  आयोजक डॉ. विमलेश त्रिपाठी ने मंचासीन वक्ताओं का परिचय देते हुए स्वागत वक्तव्य दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सम्मान नहीं है वरन एक कला साधक की रचनात्मकता को महत्व देना और उसके साथ खड़ा होना है। डॉ गीता दूबे ने अभिज्ञात के साहित्यिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की। शैलेंद्र शान्त ने मनीषा त्रिपाठी की स्मृति में आयोजित अनहद कोलकाता सम्मान की प्रशंसा करते हुए  इसे साहित्य, कला के लिए एक अच्छा प्रयास कहा। महाराष्ट्र से आये कवि-अनुवादक एवं साहित्याक्षर और हिंदी अनुसंधान केंद्र के प्रमुख डॉ.संजय बोरुडे ने अपनी हिन्दी कविताओं का पाठ करते हुए इस बात पर जोर दिया कि हमें हिन्दुस्तान की भिन्न-भिन्न भाषाओं के साथ मिलकर काम करना चाहिए। गया से आये कवि सुरेंद्र प्रजापति ने अपनी कविताओं का पाठ किया। वे पेशे से किसान हैं और गांव में रहकर महत्वपूर्ण कविताएँ लिख रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान संजय बोरुडे द्वारा विमलेश त्रिपाठी की चुनी हुई कविताओं के मराठी अनुवाद की पुस्तक  ‘कवितेपेक्षा दीर्घ उदासी’ का विमोचन भी मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। डॉ.अभिज्ञात ने अपने वक्तव्य में अनहद कोलकाता सम्मान 2023 से खुद को सम्मानित किये जाने पर आभार और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मेरे लिए गौरव के साथ जिम्मेदारी का भी क्षण है और अपनी एक प्रसिद्ध कविता ‘मेरी नाभि में बसो’ कविता का पाठ किया। कार्यक्रम में निलय उपाध्याय, नील कमल, सेराज खान बातिश, शैलेन्द्र शांत ने अपनी कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम में विनय मिश्र, दिनेश राय, प्रकाश त्रिपाठी, विनय भूषण, प्रभात मिश्र, रवि गिरि सहित कई रचनाकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन युगेश गुप्ता ने किया।

श्रीराम के आगमन पर 1100 दीये किए गए प्रज्ज्वलित

रामलला को अर्पित 101 किलो लड्डू का महाभोग
कोलकाता । अयोध्या में 22 जनवरी सोमवार को मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्रीराम के आगमन की खुशी में देश के विभिन्न राज्यों की तरह कोलकाता के बगुईहाटी के वीआईपी रोड में स्थित ‘एक्जीक्यूटिव पैलेस अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन’ में सोमवार को श्रीराम के आगमन की खुशी में भव्य पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस दिन 1100 दीये की रौशनी से अपार्टमेंट जगमगा उठा। इसके साथ प्रख्यात पंडितों के मंत्रोच्चारण से महायज्ञ का आयोजन भी संपन्न हुआ। रामलला को 101 किलो लड्डू से महाप्रसाद का भोग लगाया गया। इस मौके पर बागुईआटी के वीआईपी रोड में स्थित ‘एक्जीक्यूटिव पैलेस अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन’ के सचिव श्री अंकित अग्रवाल ने कहा कि इस स्वर्णिम पल में पूरे देशवासी प्रफुल्लित होकर जश्न मना रहे हैं। हम भी इस शुभ घड़ी में रामलला की भक्ति एवं उनके पूजन में लीन हुए हैं, उनके साथ इस अपार्टमेंट के लोग भी इस महान दिन में राममय हो गए हैं। पूरा अपार्टमेंट 1100 दीपों की रौशनी से नहाया हुआ है। श्रीराम प्रभु को 101 किलो लड्डू का महाप्रसाद भोग लगाया गया। आयोजन को सफल बनाने में अपार्टमेंट के एमपी अग्रवाल (कोषाध्यक्ष), अंकित अग्रवाल (सचिव), संजीव दुदानी (अध्यक्ष) के साथ राम अवतार अग्रवाल, मनोज बिनानी, कृष्ण अवतार अग्रवाल, आशीष टेकरीवाल, अरुण कुमार अग्रवाल, अभिषेक जैन, अभिनव बसु, अमित अग्रवाल, आशीष टेकरीवाल, अमन अग्रवाल , ललित डागा, शैंकी जैन, अशोक कुमार अग्रवाल, केशव बिनानी, बिनोद टेकरीवाल और शंकर प्रसाद दुदानी विशेष तौर पर सक्रिय रहे। अपार्टमेंट में पूजा व हवन कार्यक्रम में शामिल होकर भारी संख्या में राम भक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण किया।

बॉलीवुड फिल्म ‘जिंदगी कशमकश’ की विशेष स्क्रीनिंग

कोलकाता । बॉलीवुड फिल्म ‘जिंदगी कशमकश’ की विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन कोलकाता के एक्रोपॉलिस मॉल के सिनेपॉलिस सभागार में किया गया। इस कार्यक्रम में फिल्म के कलाकार शिव पंडित, तेजस्विनी कोल्हापुरे, पवलीन गुजराल के साथ नवोदित निर्देशक निर्निमेश दुबे मौजूद थे। और इस फिल्म के प्रति दर्शक बेहद उत्साहित दिखे। दरअसल, ‘जिंदगी कशमकश’ हमारे रिश्तों की जटिल पेचीदगियों को उजागर करती हुई कनिका, मोनिका और अंगद की जीवन यात्रा पर आधारित एक मनोरंजक कहानी है। एक सफल और काबिल वकील निर्निमेश दुबे ने बतौर इस फिल्म के निर्देशक एक ऐसी कहानी को चुना है , जो इन फिल्म के कलाकारों के अनसुलझे मुद्दों के गहरे प्रभाव की पड़ताल करती है। ‘जिंदगी कशमकश’ के गाने तथा इनका म्यूज़िक युवावों की नज़र से बेहद सम्मोहक है। इसका साउंडट्रैक न केवल कहानी का पूरक है, बल्कि दर्शकों की अमुभूतियों में बढ़ोतरी करते हुए जिससे यह भावनाओं की एक सिम्फनी बन जाता है। इस फिल्म के गीतों को स्वर दिया है प्रसिद्ध गायक अरिजीत सिंह, शान, पापोन, अंकित तिवारी, नीति मोहन, अदिति सिंह शर्मा, डोमिनिक सेरेजो, नीरज श्रीधर और तोची रैना ने।
फिल्म के अभिनेता शिव पंडित ने कहा, “जिंदगी कशमकश मेरे दोस्त और कलाकार निर्निमेश दुबे की इस क्षेत्र में पहली यात्रा है। इस फिल्म की कहानी इस बात पर केंद्रित है कि कैसे अनसुलझे मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे ढेर-सारों की जिंदगी को उबड़-खाबड़ कर तबाह कर सकते हैं. मेरे लिए यह फिल्म एक खूबसूरत कहानी की राह चलते हुए अभिनेताओं की प्रतिभा को आपके सामने प्रस्तुत करने की एक व्यक्ति के प्रयास की यात्रा है। वहीं फिल्म की अभिनेत्री तेजस्विनी कोल्हापुरे ने मुताबिक ‘जिंदगी कशमकश’ एक ऐसी फिल्म है, जो मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों की जटिलताओं का बयान करते हुए इंगित करती है कि हम परिवार से जुड़े रहें, अपनी चिंताओं को साझा करें। फिल्म की अभिनेत्री पवलीन गुजराल के मुताबिक ‘जिंदगी कशमकश’ तीन लोगों के बीच भावनाओं का एक रोलर कोस्टर है, जो अपने जीवन की कठिनाई और दुखी पल के साथ आत्म-खोज की यात्रा पर निकलते हैं। दिल्ली के मशहूर वकील निर्निमेश दुबे ने अपनी पहली फिल्म ‘जिंदगी कशमकश’ का निर्देशन करते हुए अदालत कक्ष से सिनेमा की दुनिया में कदम रखा है। फिल्म ने अयोध्या फिल्म फेस्टिवल 2023, पेंजेंस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, यूके में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और होहे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, जर्मनी में सर्वश्रेष्ठ डेब्यू डायरेक्टर (रनर अप) सहित प्रतिष्ठित पुरस्कार और प्रशंसा हासिल करते हुए व्यापक प्रशंसा बटोर चुकी है। ‘जिंदगी कशमकश’ जल्द ही ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली है।

भवानीपुर कॉलेज को राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन नैक टीम ने दिया ए ग्रेड

कोलकाता । भवानीपुर कॉलेज का राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) के तीन विशेषज्ञों की एक टीम के रूप में गहन मूल्यांकन किया गया जिनमें डॉ एचपीएस चौहान, डॉ. देबल दासगुप्ता और डॉ. स्नेहल डोंडे थे जिन्होंने संस्थान का दौरा किया। इस सहकर्मी टीम को नैक की ओर से कॉलेज के मानकों और प्रदर्शन का ऑडिट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। गत 4और 5 जनवरी को दो दिवसीय दौरे के दौरान, सहकर्मी टीम ने कॉलेज के भौतिक बुनियादी ढांचे का सावधानीपूर्वक निरीक्षण किया। इसमें कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और अन्य सुविधाओं का मूल्यांकन शामिल था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे आवश्यक शैक्षिक मानकों को पूरा करते हैं। उनके एजेंडे में कॉलेज से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ बैठकों की एक श्रृंखला भी शामिल थी। उन्होंने छात्रों के शैक्षिक अनुभव और सीखने के माहौल के साथ संतुष्टि का आकलन करने के लिए उनके साथ बातचीत की। संकाय सदस्यों के साथ बातचीत से शैक्षणिक कठोरता और शिक्षण और अनुसंधान गतिविधियों के लिए प्रदान किए गए समर्थन के बारे में जानकारी मिली।
टीम ने कॉलेज की परिचालन प्रभावशीलता को समझने के लिए गैर-शिक्षण स्टाफ सदस्यों से भी मुलाकात की। माता-पिता से उनके बच्चों के विकास पर संस्थान के प्रभाव पर उनके दृष्टिकोण पर चर्चा करने के लिए परामर्श लिया गया। पूर्व छात्रों ने भवानीपुर कॉलेज में अपनी शिक्षा के दीर्घकालिक मूल्य पर विचार प्रस्तुत किए। अंत में, कॉलेज के प्रशासनिक निकायों के साथ बैठकों के माध्यम से प्रबंधन के दृष्टिकोण, नेतृत्व और शासन की समीक्षा की गई। नैक सहकर्मी टीम का दौरा मान्यता प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भवानीपुर कॉलेज में शैक्षिक मानक और प्रथाएं परिषद द्वारा निर्धारित गुणवत्ता और उत्कृष्टता की अपेक्षाओं के अनुरूप हों। भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज को राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (एनएएसी), यूजीसी, भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित मान्यता ‘ग्रेड ए’ प्राप्त हुआ।
प्रबंधन के सदस्यों, शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ, माता-पिता, पूर्व छात्र और हमारे छात्रों के लिए हार्दिक प्रशंसात्मक है। कालेज के मैनेजमेंट की ओर से अध्यक्ष रजनीकांत दानी,उपाध्यक्ष मिराज डी शाह और रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह, प्रदीप सेठ, राजू भाई,उमेद ठक्कर,शिवानी शाह,नलिनी पारेख, रेणुका भट्ट,प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी,डायरेक्टर डॉ सुमन मुखर्जी,टीआईसी डॉ शुभव्रत गंगोपाध्याय,सभी शिक्षकों,गैरशिक्षक स्टाफ,एनसीसी टीम,एन एस एस टीम, कालेज के कलेक्टिव, विद्यार्थियों आदि का पूर्ण सहयोग रहा। कालेज ने नैक टीम के प्रति कृतज्ञता और आभार व्यक्त किया। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

 

आईएमटी गाजियाबाद से शैक्षणिक सहयोग हेतु भवानीपुर कॉलेज का समझौता

कोलकाता । आईएमटी गाजियाबाद के निदेशक डॉ. तलवार और भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के रेक्टर प्रो. दिलीप शाह ने छात्रों और संकाय के आदान-प्रदान के प्रावधानों सहित शैक्षणिक सहयोग और साझेदारी के संबंध में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। सहयोगात्मक प्रयास के तहत भवानीपुर कॉलेज और आईएमटी गाजियाबाद की फैकल्टी और छात्र एक-दूसरे की कक्षाओं का लाभ उठा सकेंगे।रेक्टर प्रो दिलीप शाह के सद्प्रयास से कॉलेज में विद्यार्थियों को उच्चतम शिक्षा देने के लिए सदैव तत्परता से पूर्ण करता है। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने आईएमटी गाजियाबाद के निदेशक डॉ तलवार को बधाई दी।इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने लिया उत्कृष्ट साहित्यिक आनंद

कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने विक्टोरिया हॉल में आयोजित टाटा कोलकाता लिटरेरी मीट 24 में देश विदेश के विभिन्न प्रसिद्ध साहित्यकारों की रचनाधर्मिता को सुनने का अवसर मिला ।यह बहुत ही गौरव की बात रही कि भवानीपुर कॉलेज ने इस साहित्यिक कार्यक्रम में नोलेज पार्टनर के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई। 23 जनवरी को कोलकाता लिटरेरी मीट 24 के बारहवें सत्र का उद्घाटन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल माननीय डॉ सी वी आनंद बोस जी ने किया। यह लिटरेरी मीट 23 जनवरी से 27 जनवरी तक चला है जिसमें देश विदेश के कई साहित्यकारों का साक्षात्कार हुआ। प्रथम सत्र में सन – एट – ल्यूमियरे विक्टोरिया हॉल के प्रांगण में साहित्यकार अब्दुल रज्जाक गुरनाह से बातचीत करने के लिए नीलांजना एस राय रहीं। रज्जाक ने अपने वक्तव्य में अपने रचनात्मक कार्यों के विषय में विस्तार से जानकारी दी। वहीं दूसरे सत्र 23 जनवरी, विक्टोरिया मेमोरियल के हॉल सन-एट-लुमियरे में बहुभाषावाद का उपहार विषय पर सुधा मूर्ति ने बताया कि कैसे कन्नड़, अंग्रेजी और अन्य साहित्यिक परंपराओं ने उनके लेखन को आकार दिया है। मालविका बनर्जी से बातचीत के दौरान सुधा जी ने अपनी रचनात्मक यात्रा की रूपरेखा रखी। भवानीपुर कॉलेज की प्रमुख प्रतिनिधि शिवानी मिराज डी शाह ने सुधा मूर्ति जी के साथ कॉलेज मोमेंटो के साथ समूह फोटो खिंचवाई। इस अवसर पर शिक्षिकाओं में प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, डॉ वसुंधरा मिश्र,प्रो चंपा श्रीनिवासन और प्रो समीक्षा खंडूरी की उपस्थिति रही ।प्रसिद्ध कथाकार सुधा मूर्ति जी से बातचीत कर रहीं थीं मालविका बनर्जी। सुधा मूर्ति ने बच्चों और बड़ों से संबंधित व्यवहारिक रूप से जीवन को कैसे देखती हैं, इस विषय पर विस्तार से बताया। भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने उनसे प्रश्न भी पूछे। सुधा मूर्ति की कई पुस्तकें भी खरीदी। राज्यपाल माननीय सी वी आनंद बोस ने अपनी पुस्तक चेखव एंड हिज बॉयज़, सायलेंस साउंड्स गुड आदि कई पुस्तकें निःशुल्क रखी, जिसे विद्यार्थियों ने ली । 24 जनवरी को इरफान: तिग्मांशु धूलिया, तिलोत्तमा शोम और शुभ्रा गुप्ता ने इरफान के जादू और उनकी चिरस्थायी विरासत पर चर्चा की। शहाना चटर्जी से बातचीत के दौरान अपने विचार व्यक्त किए।
25 जनवरी को द बॉय इन द स्ट्राइप्ड पजामा: जॉन बॉयने बताते हैं कि बच्चों की यह पीढ़ी उपन्यास से कैसे जुड़ी है। यह बातचीत बिजल वछाराजानी (जेकेएलएम) के साथ रही। जर्नी टू इंडिया मॉडर्न विषय पर संदीप रॉय के साथ बातचीत में रहे तरुण ताहिलियानी। एक और तरह की आज़ादी विषय पर गुरुचरण दास ने माइली अश्वर्या के साथ अपने संस्मरणों पर चर्चा की। इन सभी साहित्य सत्रों के साहित्यकारों के महापर्व में भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के मैनेजमेंट ने नोलेज पार्टनर बनकर साहित्य के क्षेत्र में विद्यार्थियों को साहित्य के प्रति रुचि और लिखने के लिए प्रोत्साहित किया।इस कार्यक्रम का आयोजन और संयोजन किया उपाध्यक्ष मिराज डी शाह, रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो समीक्षा खंडूरी, प्रो चंपा श्रीनिवासन, प्रो विनीता शर्मा, डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।विद्यार्थियों में कशिश साह, उज्जवल करमचंदानी,अभिषेक शॉ , प्रियंका बरडिया, श्रेयांस कुमार, अनिकेत दासगुप्ता ,देवांग नागर, अर्पिता बिस्वास, मौलिंदु मिसरा, जुगल कैलोया, समृद्धि नंदी आदि विद्यार्थियों की उपस्थिति रही और साहित्य । जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

लिटिल थेस्पियन का 13वां राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव ‘जश्न ए अज़हर’ सम्पन्न

कोलकाता ।  हिंदी रंगमंच के विकास में पश्चिम बंगाल में लिटिल थेस्पियन का नाम सर्वोपरि है जो अत्यंत दृढ़ता के साथ गुणवत्तापूर्ण रंगमंच की मशाल लेकर आगे बढ़ता है। लिटिल थेस्पियन ने इस वर्ष अपना 13वां जश्न-ए-अजहर 19 से 24 जनवरी 2024 तक  ज्ञान मंच में आयोजित किया जो रंग संवाद और नाटकों का उत्सव रहा। यह ज़श्न ख़ास कर हमारे युवा पीढ़ी को समर्पित है जिसमें वह नाटक को समझने से लेकर नाटक करने, लिखने और पढ़ने की प्रक्रिया को समझ में सक्षम रहे। महोत्सव पिछले कुछ वर्षों में कोलकाता के प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक बन गया है, जिसमें देश भर के समकालीन रंगमंच का प्रदर्शन किया जाता है। महोत्सव का 13वां संस्करण महिलाओं को समर्पित है । इस महोत्सव को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त है और अज़हर आलम मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा समर्थित है।
यह महोत्सव 19 जनवरी 2024 को रंग संवाद के साथ शुरू हुआ जिसमें डॉ. शुभ्रा उपाध्याय (प्रिंसिपल, खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज), डॉ. मोहम्मद काज़िम (उर्दू विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय), डॉ. अलमास हुसैन (थिएटर निर्देशक) और नेहा मल्लिक (छात्रा, खिदिरपुर कॉलेज) मुश्ताक काक: एक शानदार फनकार विषय पर विचार रखे। सत्र का संचालन डॉ. संजय जायसवाल (हिंदी विभाग, विद्यासागर विश्वविद्यालय, मिदनापुर) ने किया। महोत्सव का उद्घाटन श्री श्रीधर एम देवगिरी (सी.सी.ई. (आर एंड डी) पूर्व, डी.आर.डी.ओ), डॉ. सोमा बंद्योपाध्याय (कुलपति, बी.एस.ए.ई.यू), डॉ. सत्या उपाध्याय तिवारी (प्रिंसिपल, कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज, कोलकाता), डॉ. देवेन्द्र कुमार देवेश (क्षेत्रीय सचिव, साहित्य अकादमी, कोलकाता), ऋषिकेष राय (प्रभारी सचिव एवं नोडल अधिकारी, टी-बोर्ड, कोलकाता), रवि शंकर सिंह (सह संपादक, बर्तमान पत्रिका हिंदी दैनिक, कोलकाता) एवं कौशल किशोर त्रिवेदी (संपादक, प्रभात खबर, कोलकाता) ने किया। ज़हीर अनवर (प्रसिद्ध उर्दू थिएटर निर्देशक और नाटककार, कोलकाता) को तीसरा अज़हर आलम मेमोरियल पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके बाद लिटिल थेस्पियन का नया प्रोडक्शन ‘भीगी औरतें’ का मंचन हुआ जिसका लेखन  और निर्देशन उमा झुनझुनवाला ने किया। 20 जनवरी 2024 को आयोजित  रंग संवाद में विजय पंडित (थिएटर डायरेक्टर, मुंबई), डॉ. विजया सिंह (रानी बिड़ला कॉलेज, कोलकाता), डॉ. रुकैया शाहीन (एम.एम.एम कॉलेज, दुर्गापुर) और आशुतोष कुमार राउथ (छात्र, कलकत्ता विश्वविद्यालय) “इक्कास्वी सदी के नाटकों में युगीन चेतना” पर अपने विचार रखे। रंग संवाद के इस सत्र का संचालन डॉ. इतु सिंह (हिंदी विभाग, खिद्दरपुर कॉलेज, कोलकाता) द्वारा किया गया। इसके बाद ती भारती जैनानी (वरिष्ठ पत्रकार, प्रभात खबर, कोलकाता) को सम्मानित किया गया । इसके बाद अनुष्ठान, मुम्बई के नाटक जोगिया राग का मंचन किया जाएगा, जिसके निर्देशक देवेन्द्र राज अंकुर‌ हैं।
21 जनवरी 2024 को रंग संवाद का विषय था “हिंदी रंगमंच और महिलाओं की भूमिका: संदर्भ त्रिपुरारी शर्मा” और इसमें डॉ. वसुन्धरा मिश्रा (हिंदी विभाग, भवानीपुर कॉलेज, कोलकाता), डॉ. कृष्णा  कुमार श्रीवास्तव (हिंदी विभाग, आसनसोल गर्ल्स कॉलेज, आसनसोल), सुदीपा बसु (प्रसिद्ध अभिनेत्री, कोलकाता) और मोहम्मद इरफ़ान अली (छात्र, खिद्दरपुर कॉलेज, कोलकाता) ने विचार रखे। रंग संवाद का संचालन डॉ. सूफिया यसमिन (हिंदी विभाग, विद्यासागर कॉलेज फॉर वुमन, कोलकाता) द्वारा किया गया। प्रसिद्ध थिएटर अभिनेता/निर्देशक स्वाति रॉय को सम्मानित किया गया, जिसके बाद यूनिकॉर्न एक्टर्स स्टूडियो, दिल्ली का नाटक रूप अरूप का मंचन हुआ जिसका लेखन और निर्देशन त्रिपुरारी शर्मा का है |
22 जनवरी 2024 को रंग संवाद में जहीर अनवर (नाटककार, कोलकाता), डॉ. विनय कुमार मिश्र (साहित्य समीक्षक, कोलकाता),  प्रेम कपूर (थिएटर समीक्षक, कोलकाता) और निधि सिंह (छात्रा, कलकत्ता विश्वविद्यालय) ने “नाट्य रूपान्तरण की अवश्यकता और चुनौतियाँ” विषय पर अपने विचार रखे। इस रंग संवाद का संचालन अल्पना नायक (हिन्दी विभाग, श्री शिक्षायतन कॉलेज, कोलकाता) द्वारा किया गया। इसके बाद  दिनेश वडेरा (रंगमंच निर्देशक, कोलकाता) का अभिनंदन किया गया और सेतु सांस्कृतिक केंद्र, वाराणसी के सलीम राजा द्वारा निर्देशित नाटक मोह (मन्नू भंडारी की कहानी मजबूरी पर आधारित) का मंचन हुआ।
23 जनवरी 2024 को रंग संवाद ‘जनप्रतिरोध में नुक्कड़ नाटकों की भूमिका’ पर हुआ। इस विषय पर महेश जयसवाल (थिएटर एक्टिविस्ट, कोलकाता), डॉ. नईम अनीस (एच. ओ. डी, उर्दू विभाग, कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज, कोलकाता),  अंशुमान भौमिक (थिएटर क्रिटिक, कोलकाता) और प्रीति सिंह (शोधार्थी , तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय) अपने विचार रखे। रंग संवाद का संचालन डॉ. गीता दूबे (हिन्दी विभाग, स्कॉटिश चर्च कॉलेज, कोलकाता) ने किया। थिएटर एक्टिविस्ट महेश जयसवाल को सम्मानित किया गया और इसके बाद अभिनव रंगमंडल, उज्जैन द्वारा शरद शर्मा द्वारा निर्देशित नाटक संभ्रांत वैश्य का मंचन किया गया।
24 जनवरी 2024 को, लिटिल थेस्पियन द्वारा आयोजित पहली ड्रामा प्रतियोगिता में से चुनी गई तीन सर्वश्रेष्ठ टीमों ने अपने नाटकों का मंचन किया जिनमें स्वांग ड्रामा क्लब (विद्यासागर कॉलेज फॉर वुमन, कोलकाता) का नाटक लाल इश्क, एस.एम. राशिद थिएटर ग्रुप, कोलकाता  का नाटक बदलते मौसम के दिन और राजेंद्र क्रिएटिव ग्रुप (खिद्दरपुर कॉलेज, कोलकाता) का नाटक अब नहीं सहेंगे शामिल थे।
इसके बाद नौशाद रज़ा (थिएटर अभिनेता/निर्देशक) का अभिनंदन किया गया और इसके बाद उमा झुनझुनवाला द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक परछाइयां (साहिर लुधियानवी की एक लंबी कविता) का मंचन किया गया। महोत्सव का समापन नाटक प्रतियोगिता और शोध आलेख लेखन के विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाणपत्र वितरण के साथ हुआ।