Sunday, March 22, 2026
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शुभजिता – दिसंबर एवं जनवरी संयुक्त अंक

मिशन सिलक्यारा से लेकर आपराधिक कानूनों के ऐतिहासिक परिवर्तन की यात्रा एवं अन्य स्तम्भ

अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में पहुंचे 29 लाख लोग, बिकीं 27 करोड़ की किताबें

कोलकाता में हर साल लगने वाले अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का समापन बुधवार 31 जनवरी को हो गया है। गुरुवार को आयोजकों में से एक अधिकारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में रिकॉर्ड 29 लाख लोगों ने दौरा किया। पुस्तक मेले में 27 करोड़ रुपये की किताबों की बिक्री दर्ज की गई, जो पिछले साल की बिक्री से अधिक है। अधिकारी ने दावा किया कि 25 करोड़ रुपये का आंकड़ा अब पुस्तक मेले के इतिहास में अब तक का उच्चतम आंकड़ा रहा था। अब यह रिकॉर्ड टूट गया है। पुस्तक मेले में दर्शकों की संख्या पिछली बार 25 लाख से बढ़कर इस वर्ष 29 लाख हो गई, जो एक और नया रिकॉर्ड है।
मेले के आयोजक पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड के महासचिव सुधांग्शु दे ने बताया कि पुस्तक मेला 18 से 31 जनवरी तक आयोजित किया गया। इसके बाद ही यह हिसाब लगाया गया है कि कितने लोग आए और कितने की किताबें बिक्री हुई हैं। किताबों के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने की एक पहल के रूप में, गिल्ड ने एक पाठक को सम्मानित किया जिसने तीन लाख 15 हजार रुपये की किताबें खरीदीं। उनका नाम देवब्रत चटर्जी है। देवब्रत एक निजी ट्यूटर हैं। गिल्ड के अध्यक्ष त्रिदीब चटर्जी ने बताया कि हम वरिष्ठ नागरिकों सहित इस राज्य के पुस्तक-प्रेमी लोगों को मेले में आने और इसके 48वें संस्करण में बेहतर और अधिक समावेशी तरीके से माहौल का आनंद लेने में मदद करने के लिए नई पहल करेंगे। पुस्तक मेले के डिजिटलीकरण को बढ़ाने के लिए, हमने मानचित्र और क्यूआर कोड प्रदान किए, जिससे उपस्थित लोगों के लिए आसान ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा हुई। चटर्जी ने बताया कि 48वां अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेला जनवरी 2025 में आयोजित किया जाएगा। अब पुस्तक मेले में हिन्दी पुस्तकों और लेखन से संबंधित गतिविधियों पर एक नजर –
कोलकाता पुस्तक मेला में कृत्रिम मेधा पर बहस
कोलकाता पुस्तक मेला के प्रेस कार्नर में वाणी प्रकाशन और भारतीय भाषा परिषद के लोकार्पण समारोह में कई पुस्तकों का लोकार्पण हुआ जिनमें शंभुनाथ  की ’इतिहास में अफवाह’, कुसुम खेमानी की ’मारवाड़ी राजबाड़ी’, सुनील कुमार शर्मा की  ’आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ तथा ’चैटजीपीटी’ प्रमुख थीं।
इस अवसर पर ’कृत्रिम मेधा, समाज और साहित्य’ पर एक परिचर्चा आयोजित थी। इसमें अतिथियों का स्वागत करते हुए अदिति माहेश्वरी ने कहा कि 61वें वर्ष में वाणी प्रकाशन ग्रुप समय की मांग और समाज के बदलाव को पुस्तकों में दर्ज कर रहा है। बोई मेला में इस वर्ष ‘वाणी बिजनेस’ उपक्रम के तहत सुनील कुमार शर्मा की दो पुस्तकें ‘चैट जीपीटी’ और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ का लोकार्पण सुखद है। भारत में पहली पंक्ति के आलोचक और पब्लिक इंटेलेक्चुअल डॉ. शम्भुनाथ की नई किताब ‘इतिहास में अफ़वाह’ को प्रकाशित करना गर्व का विषय है। वरिष्ठ लेखिका कुसुम खेमानी के उपन्यास का दूसरा संस्करण ‘मारवाड़ी राजबाड़ी’ की लोकप्रियता रेखांकित करता है। ये सभी पुस्तकें प्रश्न करने, उत्तर ढूंढने और संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई हैं। शंभुनाथ ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि कृत्रिम मेधा कितनी सभ्यता की उपलब्धि साबित होगी और कितना यह बेरोजगारी बढ़ाने वाला कारपोरेट अणु बम है, यह अभी स्पष्ट होना है। जो भी हो मेधारोबोट मनुष्य का विकल्प नहीं हो सकते। वे एंकरिंग कर सकते हैं, उद्योगों का प्रबंधन कर सकते हैं पर मनुष्य की तरह स्वप्न नहीं देख सकते! कई बार मनुष्य ऐसे भी निर्माण कर देता है जो उसके लिए विध्वंसकारी होता है, जैसे शिव ने भस्मासुर को बनाया था। लेखक और संस्कृति कर्मी मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि आर्टिफीसियल इंटेलीजेंसी एक व्यवसायिक उपकरण है। यह ऐसा काम कर सकता है, जो दोहराव से पूरा हो जाता है। यह रचनात्मकता का विकल्प नहीं है। इसलिए रचनात्मकता पर कोई संकट नहीं है। मनुष्य के रचनात्मकता से ही एआई लगातार समृद्ध होगी। प्रो. हितेंद्र पटेल ने कहा कि श्रम का आनंद और नियंत्रण की आकांक्षा 18वीं शताब्दी से ही विज्ञान और आधुनिकता के साथ मनुष्य के भीतर आ गई। इसके परिणाम के रूप में आया है कृत्रिम मेधा। समाज कृत्रिम मेधा और शारीरिक श्रम दोनों के बीच में किसको स्वीकार करेगा, यह समाज तय करेगा। हमको इन दोनों प्रश्नों पर विचार करना होगा।कवि और तकनीकविद सुनील कुमार शर्मा ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग जरूरत के हिसाब से  होता है और यह औद्योगिक विकास में यह एक बड़ी क्रांति लाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग मानव क्षमताओं का विस्तार करते हुए मानव कल्याण और सभ्यता के विकास के लिए होना चाहिए। इसलिए आवश्यक है कि एआई का विकास जिम्मेदारी के साथ नैतिक निहितार्थ के साथ संरेखित करना होगा। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि एआई को लेकर सबसे बड़ी चिंता है कि समाज के आखिरी पंक्ति पर खड़े लोगों के हित को ध्यान में रखा जाए। एआई का इस्तेमाल अपनी मौलिकता को विस्थापित करने के लिए नहीं बल्कि अपनी मौलिकता को विस्तार देने के लिए होना चाहिए। इस अवसर पर रामनिवास द्विवेदी,घनश्याम सुगला,अभिज्ञात, मंजू श्रीवास्तव, उदय भान दुबे, संजय दास, डॉ. संजय राय, उत्तम कुमार,विकास जायसवाल, पूजा सिंह, रामाशीष साव,रेखा श्रीवास्तव सहित कोलकाता के सैकड़ों साहित्यप्रेमी और संस्कृतिप्रेमी मौजूद थे।
पुस्तक मेले में संस्कृति नाट्य मंच की ओर से स्वच्छता पर नुक्कड़ नाटक
सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से गणतंत्र दिवस के अवसर पर कोलकाता पुस्तक मेले में स्वच्छता पर केंद्रित नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया।संस्कृति नाट्य मंच की ओर से इस प्रस्तुति का मुख्य संदेश स्वच्छता को समावेशिकता से जोड़ना है।
सभी को मिलकर इसे मानव धर्म का सूत्र बनाना है।हमें स्वच्छता को आडंबर का नहीं आचरण का हिस्सा बनाना होगा।इस नाटक में डॉ इबरार खान,डॉ मधु सिंह,विशाल कुमार साव,राजेश सिंह, कोमल साव,सुशील सिंह, टीना परवीन,आशुतोष राऊत,सपना खरवार, नंदिनी साव,आदित्य तिवारी, आदित्य साव,संजय जायसवाल ने अभिनय किया।नाट्य प्रस्तुति में लिली शाह,सूर्यदेव राय,चंदन भगत, रूपेश कुमार यादव,ज्योति चौरसिया ने विशेष सहयोग दिया।इस अवसर पर शंभुनाथ, श्रीरामनिवास द्विवेदी, हितेंद्र पटेल, मंजु श्रीवास्तव,उमा डगमान, डॉ गीता दूबे,दीक्षा गुप्ता,अभिषेक साव,पूजा गुप्ता,डॉ अनीता राय,पूजा गौड़,मिथिलेश मिश्रा, डॉ सुमिता गुप्ता,शगुफ्ता इस्तखार, कंचन भगत, सुषमा कुमारी, विनोद यादव,संजय दास सहित सैकड़ों की संख्या में दर्शक मौजूद थे।
भक्ति काव्य में मानव मूल्य’ पुस्तक का लोकार्पण
आनंद प्रकाशन के स्टॉल पर सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ रेणु गुप्ता और डॉ मधु सिंह द्वारा संपादित ‘भक्ति काव्य में मानव मूल्य’ पुस्तक का लोकार्पण हुआ ।समीक्षक मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा यह पुस्तक भक्ति काव्य की रोशनी से वर्तमान समय के अंधकार से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है।इस अवसर पर आनंद प्रकाशन के संचालक दिनेश त्रिपाठी जी को पिछले 45 वर्षों से पुस्तक मेला में आनंद प्रकाशन के माध्यम से अपनी सेवा देने के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ . सुनील कुमार शर्मा, सेराज खान बातिश, राज्यवर्धन, रौनक अफ़रोज़, रचना सरन, सुरेश शॉ, रेखा शॉ, मृत्युंजय श्रीवास्तव, शिप्रा मिश्रा, अहमद कमाल हाशमी, अनिला राखेचा, शैलेश गुप्ता, श्वेतांक सिंह, इबरार खान, मधु सिंह, सिपाली गुप्ता, रेशमी सेन शर्मा, सुषमा कुमारी, टीना परवीन, शशांक गुप्ता, ऋतु सिंह और राहुल सिंह ने काव्य पाठ किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शंभुनाथ ने कहा पुस्तक मेला में हिंदी संस्कृति और साहित्य की निरंतरता बनी हुई है।हिंदी के युवा पाठकों की उपस्थिति हमें भरोसा देती है। धन्यवाद ज्ञापन देते हुए मिशन के संरक्षक रामनिवास द्विवेदी ने कहा कविताएं समाज को परिष्कृत करती हैं।कविता का जन्म सवालों के साथ होती है।कार्यक्रम का संचालन करते हुए मिशन के संयुक्त महासचिव संजय जायसवाल ने कहा पुस्तक मेला में कविता की ये आवाजें विभिन्न जगहों की आवाजें हैं, जो आपस में अपने आख्यान साझा करती हैं।
पुस्तक मेला में मरुतृण साहित्य-पत्रिका का लोकार्पण एवं काव्य पाठ
कुछ वर्षों से रुकी हुई मरुतृण साहित्य-पत्रिका के ताजा अंक का लोकार्पण साहित्यिक वातावरण में हुआ एवं लघु पत्रिका,  विनिर्माण ( बांग्ला) द्वारा कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राम नारायण झा ‘ देहाती ‘ तथा मंच संचालन कवि प्रदीप कुमार धानुक ने किया । इस अवसर पर मरुतृण साहित्य पत्रिका के संपादक सत्य प्रकाश भारतीय मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे । संपादक के अनुसार लघु पत्रिकाओं का बंद होना और फिर पुनः प्रकाशित होना संघर्ष और जीवटता को दर्शाता है; पत्रिकाएं भी बीमार पड़ती हैं फिर स्वस्थ्य भी होती हैं । विनिर्माण पत्रिका के संपादक पार्थ सारथि मौसम ने धन्यवाद ज्ञापन  किया । इस अवसर कई कवि – कवयित्रियों ने अपनी कविता से मंत्र मुग्ध कर दिया जिसमें मुख्य रूप से सरिता खोवाला, अनिल उपाध्याय,  कवि नवीन कुमार सिंह, पार्थ सारथी मौसम, मुरली चौधरी, डॉ शाहिद फ़ारोगी, सीता पॉल, सत्य कुमार राय, सत्यव्रत मित्रा, बीथी कर एवं सत्य प्रकाश भारतीय शामिल रहे ।

श्राची ग्रुप और केवेंटर ने न्यूटाउन में शुरू की एक लक्जरी बंगलो की परियोजना

कोलकाता । रियल एस्टेट के दिग्गज श्राची ग्रुप और केवेंटर ग्रुप ने न्यूटाउन में अपने अभूतपूर्व संयुक्त उद्यम के लिए नमूना बंगलों का उद्घाटन किया है।  श्राची ने एक बार फिर न्यूटाउन विला के लिए केवेंटर के साथ हाथ मिलाया है। कार्यक्रम में श्राची ग्रुप के प्रबंध निदेशक राहुल टोडी और केवेंटर के प्रबंध निदेशक मयंक जालान उपस्थित थे। उद्योग जगत मैं यह पहली सहयोग परियोजना एक अद्वितीय जीवन अनुभव प्रदान करती है। ऐसा करके न्यू टाउन विला में कई नए युग की सुविधाओं के साथ सबसे सौंदर्यपूर्ण रूप से डिजाइन किए गए बंगले हैं जो सपनों के घर को एक अद्भुत वास्तविकता में बदलने में मदद करेंगे। श्राची ग्रुप के प्रबंध निदेशक राहुल टोडी ने कहा, “आज का कार्यक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि हम केवेंटर के साथ हमारे संयुक्त उद्यम के महान क्षण के गवाह हैं।  हम ऐसे घर बनाने में विश्वास करते हैं जो आधुनिक जीवन की आकांक्षाओं के अनुरूप हों और यह परियोजना उस वादे को साकार करती है।” केवेंटर के प्रबंध निदेशक मयंक जालान ने कहा न्यूटाउनविला पर श्राची ग्रुप के साथ सहयोग करना केवेंटर के लिए एक रोमांचक यात्रा है। हम ऐसे घर बनाने का दृष्टिकोण पेश करते हैं जो सुंदरता और कार्यक्षमता का एक आदर्श मिश्रण पेश करते हैं। नमूना बंगले हमारे भविष्य मैं निवासियों के लिए एक अद्वितीय और समृद्ध जीवन शैली हैं,” । इस कार्यक्रम में संभावित घर खरीदार, निवेशक और गणमान्य व्यक्ति भाग लेते हैं। पूरे क्षेत्र में सुंदर हरे परिदृश्य, प्रकृति से जुड़ा स्वस्थ वातावरण, छोटी सभाओं के लिए निजी उद्यान क्षेत्र, बच्चों के खेलने का क्षेत्र, इनडोर गेम क्षेत्र, शानदार स्विमिंग पूल, जिम, स्पा, 24/7 सुरक्षा और कई अन्य सुविधाएं भी शामिल हैं।

स्वतंत्रता सेनानी जतींद्रनाथ मुखर्जी (बाघा जतिन) को दी गई श्रद्धांजलि

कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने स्वतंत्रता सेनानी बाघा जतिन यानी जतींद्रनाथ मुखर्जी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। “अमरा मोरबो, जगत जगबे – हम देश को जगाने के लिए मरेंगे।”जतीन्द्रनाथ मुखर्जी (‘बाघा जतिन’)ने इस नारे के साथ देश को स्वतंत्र करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। गणतंत्र दिवस पर भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज और स्कूल के विद्यार्थियों, प्रबंधन के सदस्यों , शिक्षक और शिक्षिकाओं की उपस्थिति में पारंपरिक वेशभूषा में कॉलेज के अध्यक्ष रजनीकांत दानी और उपाध्यक्ष मिराज डी शाह, रेक्टर प्रो दिलीप शाह ने ध्वजारोहण किया और राष्ट्रगीत गा कर झंडे का सम्मान किया। इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के एनसीसी की जल थल और वायु सेवा विंग और भवानीपुर आईएससी स्कूल के छात्रों ने बैंड के साथ मार्चपास्ट करते हुए राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी।
कॉलेज के अध्यक्ष श्री रजनीकांत दानी ने सभी अतिथियों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए 75वें गणतंत्र दिवस पर बधाई और शुभकामनाएँ दी । छात्र मामलों के रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह ने भारत के संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया जिसमें सभी उपस्थित लोग शामिल हुए। कॉलेज के महानिदेशक डॉ. सुमन के मुखर्जी ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने वक्तव्य रखते हुए रवीन्द्र नाथ टैगोर द्वारा लिखे राष्ट्रगान का महत्व बताया और देशभक्ति का संदेश दिया।
बाघा जतिन के जीवन पर कॉलेज के इन – एक्ट कलेक्टिव के एक साथी कलाकार ने उनके अपने जीवन को अभिनयात्मक रूप में दर्शाया जो बहुत ही प्रभावी रहा। इस प्रस्तुति में स्वतंत्रता सेनानी के जीवन के क्षण और उन्हें ‘बाघा’ जतिन की उपाधि कैसे मिली, इसकी कहानी शामिल रही। अंत में एक्ट टीम द्वारा सभी के साथ मिलकर प्रसिद्ध गीत “आरंभ है प्रचंड है” गीत को एक साथ गाया गया जिससे प्रत्येक भारतीय में राष्ट्रीयता के भाव प्रबल रूप से प्रकट हुए ।
राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस पर आईसीएसई और आईएससी स्कूल के छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम नृत्य, 80 और 90 के दशक के प्रसिद्ध जिंगल और नाट्य प्रस्तुतियां भी दीं गई जो बहुत पसंद की गईं। । बीईएससी की किकबॉक्सिंग टीम द्वारा आत्मरक्षा तकनीकों का प्रदर्शन किया गया । अन्य प्रदर्शनों के अलावा, भवानीपुर डिज़ाइन अकादमी के छात्र भी समारोह में शामिल हुए और देशभक्ति गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद क्रेस्केंडो कलेक्टिव द्वारा एक लाइव संगीत सत्र था जहां उन्होंने हमारे देश के रंगों के असंख्य गीतों की प्रस्तुति दी, फ्लेम्स कलेक्टिव फ्लेम ने पूर्वी और पश्चिमी नृत्य द्वारा एक पावर-पैक नृत्य का प्रदर्शन किया ।
गणतंत्र दिवस समारोह में सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा पहनने वाले छात्र की घोषणा की गई जो बीईएससी के छात्र देवांग नागर और सानिया फहीम को दिया गया। वहीं शिक्षकों में सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा के लिए शिक्षक का खिताब डॉ. सुचित्रा और डॉ वसुंधरा मिश्र को दिया गया। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने संविधान से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। कार्यक्रम के अंत में, प्रो दिलीप शाह ने उपस्थित सभी लोगों को धन्यवाद दिया और दर्शकों से जलपान के लिए वालिया हॉल में जाने का अनुरोध किया। रिपोर्टर अनिकेत दासगुप्ता और फ़ोटोग्राफ़र अंकित माझी, सौरीश कुमार देब, अर्का मुखर्जी, प्रियांशु चटर्जी रहे। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर बैडमिंटन चैम्पियनशिप 2024 सम्पन्न

कोलकाता । “शांत रहें और कड़ी मेहनत करें” – ये दो गुण उन खिलाड़ियों पर भारी पड़े जिन्होंने भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज द्वारा आयोजित भवानीपुर बैडमिंटन चैंपियनशिप (बीबीसी) के 2024 संस्करण में भाग लिया था। बैडमिंटन भारत में एक लोकप्रिय खेल है क्योंकि यह क्रिकेट के बाद भारत में दूसरा सबसे ज्यादा खेला जाने वाला खेल है। भारतीय बैडमिंटन संघ भारत में बैडमिंटन का प्रबंधन करता है, जिसके सदस्य साइना नेहवाल और पी.वी. सिंधु जैसे इस खेल के कई उल्लेखनीय खिलाड़ी हैं। ऐसे होनहार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए, कॉलेज ने 18 जनवरी से 20 जनवरी 2024 तक एक इंट्रा-कॉलेज बैडमिंटन चैंपियनशिप की मेजबानी की, जहां प्रतिभागियों ने पूरे भारत में कई अन्य लोगों की तरह खेल का आनंद लिया। चैंपियनशिप में सभी धाराओं और शैक्षणिक वर्षों से 150 से अधिक छात्रों की अच्छी भागीदारी देखी गई; एकल पुरुष वर्ग में 90 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, एकल महिला वर्ग में 16 प्रतिभागियों ने भाग लिया और एक पुरुष और एक महिला की 26 टीमों ने भाग लियायुगल श्रेणी.बीबीसी की शुरुआत 17 जनवरी 2024 को एकल पुरुष वर्ग के राउंड 1 और राउंड 2 के साथ हुई। राउंड 1 के अंत में, 42 खिलाड़ियों ने दूसरे राउंड में प्रवेश किया, जिसमें से 21 प्रतिभागियों ने खेल के फाइनल में जगह बनाई। चैंपियनशिप के सभी मैच नॉकआउट प्रारूप में थे। दूसरे दिन यानी 18 जनवरी 2024 को युगल वर्ग के अलग-अलग दौर के मैच हुए। युगल वर्ग के अंतिम राउंड समाप्त होने के बाद, एकल पुरुष वर्ग के फाइनल के लिए तीसरे राउंड और उसके बाद के अन्य राउंड शुरू हुए। 19 जनवरी 2024 को एकल महिला वर्ग के लिए सभी मैच निर्धारित थे। 16 प्रतिभागियों के साथ, दिन का खेल जल्दी समाप्त हो गया क्योंकि केवल 4 राउंड खेले जाने थे।
18 जनवरी 2024 को, एकल पुरुष वर्ग के विजेता ईशान आर्यन थे और सहाना अहमद प्रथम रनर-अप थे, और मेधांश मॉल दूसरे रनर-अप थे। उसी दिन, युगल वर्ग के विजेता यश वर्धन गुप्ता और मनस्वी जैन थे, प्रथम उपविजेता रिशांक सर्वेश गुप्ता और हस्ती धर्मेश टोलिया थे जबकि दूसरे उपविजेता अनीश मिश्रा और लाइबा खान थे। 19 जनवरी 2024 को, एकल महिला वर्ग के विजेताओं की घोषणा की गई, जहां शिरीन अहमद एकल महिला वर्ग की विजेता थीं, सानवी एस गणेशन प्रथम उपविजेता थीं, और पूजा सराफ इस श्रेणी में दूसरी उपविजेता थीं। .पदक वितरण 25 जनवरी 2024 को छात्र मामलों के रेक्टर और डीन, प्रो. दिलीप शाह और कॉमर्स मॉर्निंग विभाग की समन्वयक प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी द्वारा किया गया । जैसे ही पदक बांटे गए, विजेताओं के चेहरे पर खुशी की झलक वही थी जो एक खिलाड़ी को प्रेरणा के लिए चाहिए होती है!रिपोर्टर अनिकेत दासगुप्ता और फ़ोटोग्राफ़र – अग्रग घोष, अंकित माझी ने की। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज ने किया टाइम्स फ्रेश फेस सीजन पंद्रह ऑडिशन 

कोलकाता । टाइम्स फ्रेश फेस के पंद्रहवें सीज़न के लिए ऑडिशन भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के जुबली हॉल में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के निर्णायकों में  रुमन गांगुली (कलकत्ता टाइम्स),  रेहान  बक्स (द टाइम्स ऑफ इंडिया) और कौस्तव सैकिया (कला और फैशन फोटोग्राफर) रहे । कार्यक्रम के मेजबान सम्राट बसु ने निर्णायकों का परिचय देकर कार्यक्रम की शुरुआत की और टाइम्स फ्रेश फेस नामक यह वार्षिक कॉलेज स्तरीय प्रतियोगिता देश भर के छात्रों को खुद को अभिव्यक्त करने, अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और अपने “फ्रेश फैक्टर” से निर्णायकों को प्रभावित करने का अवसर प्रदान करती है। कई प्रतिस्पर्धियों ने सफलता प्राप्त करने और वर्षों से प्रसिद्ध होने के लिए टाइम्स फ्रेश फेस को लॉन्चिंग पैड के रूप में उपयोग किया है।आपके पास जो प्रतिभा है उसका उपयोग करें; यदि सबसे अच्छा गाने वालों को छोड़कर कोई भी पक्षी वहां न गाए तो जंगल बहुत शांत हो जाएंगे ऐसा हेनरी वान डाइक ने कहा था । कौस्तव सैकिया ने अपने वक्तव्य में  दर्शकों को  टाइम्स फ्रेश फेस सीजन 15 और सभी प्रतिभागियों से उनकी अपेक्षाओं के विषय में बताया।  उनके सशक्त भाषण से प्रतिभागियों का आत्मविश्वास बढ़ा। पहली प्रतिभागी ऋषिका दमानी थीं और उन्होंने पहले अपना परिचय देकर अपना प्रदर्शन शुरू किया और फिर अपना गायन प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने ‘पहली दफा’ गाना गाकर अपनी सुरीली आवाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। फ्रीस्टाइल, हिप-हॉप, वैकिंग और सेमी-क्लासिकल जैसे विभिन्न नृत्य रूपों का प्रदर्शन करने वाले अन्य प्रतिभागियों में रेशमी दास, कथकली चटर्जी, रेशमी दास, कोंकोनिका भट्टाचार्य, चंद्रिमा रॉय, गौरी वैद्यनाथ और वंशिका भट्ट शामिल थीं। दूसरी ओर जूलिया इमैनुएल, एक प्रतिभागी थीं, जिन्होंने सेलीन डायोन का ‘पावर ऑफ लव’ गाया और उनकी शक्तिशाली और मधुर आवाज ने सभी का दिल जीत लिया। तुषार गुप्ता और आर्यन गुप्ता ने मोहित चौहान का गाना ‘तुम से ही’ गाया और दर्शकों ने उनके प्रदर्शन का आनंद लिया और मधुर धुनों पर तालियां बजाकर उनका साथ दिया।
अलसाबा खान ने अपने कॉलेज के बारे में लिखा हुआ एक रैप प्रस्तुत किया और मुहम्मद फरहान अहमद ने भारत में महिलाओं के शोषण पर एक ज़बरदस्त रैप गाया। अक्षित रे ने फ्रैंक सिनात्रा का ‘फ्लाई मी टू द मून’ नाम का दिल छू लेने वाला गाना गाया और 90 के दशक की धुनों को सभी के दिलों में फिर से ताजा कर दिया। श्रेयशी रॉय ने लता मंगेशकर का मशहूर गाना ‘लग जा गले’ गाया और जिनिया रॉय ने किशोर कुमार का ‘चलते-चलते’ गाना गाकर दर्शकों का मनोरंजन किया। गायन और नृत्य के अलावा, अन्य प्रतिभा पूल जो केंद्र में रहे, वे अभिनेता थे, जिनमें दीप कंदोई शामिल थे, जिन्होंने मानव स्वभाव के अंधेरे पक्ष को चित्रित करने वाला एक संवेदनशील और भावनात्मक मोनोएक्ट दिखाया और अंशिका गुप्ता, जिन्होंने फिल्म ‘दस्टूडेंट ऑफ द ईयर’का चरित्र ‘शनाया’ का संवाद प्रस्तुत किया।
सहील फैज़ ने बीटबॉक्सिंग की अपनी अनूठी प्रतिभा से दर्शकों के दिलों पर एक अमिट छाप छोड़ी और अपनी मौखिक तकनीकों की मदद से विविध वाद्ययंत्रों की विविध धुनें तैयार कीं। सभी प्रदर्शन समाप्त होने के बाद, न्यायाधीशों ने परिणामों की घोषणा की जहां अक्षित रे को ‘मिस्टर’ का खिताब दिया गया। यूनिकली यू’ और चंद्रिमा दास को ‘मिस्टर’ की उपाधि दी गई। विशिष्ट रूप से सेमीफाइनल के लिए चुने गए अन्य प्रतिभागियों में दीप कंदोई, आर्यन गुप्ता, ऋषिका दमानी, जूलिया इमैनुएल, कथकली चटर्जी, श्रेयांशी रॉय, आकांक्षा निकोल प्रधान, कोंकोनिका भट्टाचार्य, वंशिका भट्ट, अलसबा खान, जिनिया रॉय और आयुषी देब शामिल थे। अंत में दर्शकों और निर्णायकों के साथ एक ट्रेंडिंग डांस स्टेप पर एक मजेदार रील शूट की गई। इस आयोजन ने बहुमुखी प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान किया और इन प्रतिभाओं को निखारने वाले चमकते सितारों को पहचान दी। रिपोर्टर कासिस शॉ और फ़ोटोग्राफ़र आयुष झा ने की। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

कॉर्पोरेट प्रोफाइल और बायोडाटा लेखन पर सेमिनार

कोलकाता । कॉर्पोरेट विशेषज्ञ अक्सर टिप्पणी करते हैं कि पहला प्रभाव छाप बेहद महत्वपूर्ण होता है और नौकरी की तलाश की दुनिया कोई अपवाद नहीं है। इच्छुक कर्मचारी अक्सर जो प्रोफाइल बनाते हैं, वह कंपनी में उनके द्वारा जोड़े जाने वाले मूल्य को निर्धारित करता है, जो सीवी (पाठ्यचर्या जीवन) निर्माण को महत्वपूर्ण रूप से मौलिक बनाता है। नियोक्ताओं को प्रभावित करने के तरीके को समझने में मदद करने के इरादे से, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने एसओ पर एक सेमिनार की मेजबानी की। एस ओ पी, सार और बायोडाटा लेखन टी.आई.एम.ई. (ट्रायम्फैंट इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एजुकेशन), कोलकाता के सहयोग से 19 जनवरी 2024 को कॉलेज परिसर के सोसाइटी हॉल में सुबह 10:00 बजे से यह आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता टी.आई.एम.ई., कोलकाता के केंद्र निदेशक सिद्धार्थ मलिक और थेइंदर चोपड़ा, सीनियर फैकल्टी और मेंटर, टी.आई.एम.ई., कोलकाता रहे । सेमिनार की शुरुआत वक्ताओं द्वारा सीवी के महत्व को बताते हुए की गई। बायोडेटा कर्मचारी और नियोक्ता के बीच संपर्क का पहला बिंदु है, और यह कर्मचारी की योग्यता को प्रतिबिंबित करता है और व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए उनकी पात्रता निर्धारित करता है। प्रत्येक प्रतिष्ठित कंपनी को नौकरी की भूमिका के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होते हैं, जिससे एचआर के काम में समय लगता है, इससे निपटने के लिए एचआर एक सीवी की समीक्षा करने में अपने समय का केवल 15-20 सेकंड खर्च करता है। इसलिए, एक कर्मचारी के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि वह अपने सीवी को इस तरह से प्रारूपित और प्रस्तुत करे कि नियोक्ता का ध्यान आकर्षित हो। इसे पर्याप्त रूप से व्यवस्थित करना चाहिए जिसके परिणामस्वरूप विवरण पर उम्मीदवार का ध्यान प्रतिबिंबित होगा। दर्शकों को एक मास्टर सीवी के महत्व के बारे में जानकारी दी गई, जो एक कर्मचारी द्वारा अपने शैक्षणिक और कार्य पथ के दौरान किए गए हर काम का भंडार है, जिसमें सत्यापन योग्य प्रत्येक भागीदारी और उपलब्धि का रिकॉर्ड शामिल होता है। इसके अलावा वक्ताओं और दर्शकों ने दो नमूना सीवी का विश्लेषण किया। प्रारूप और संरचना में प्रमुख खामियों की पहचान की और चर्चा की कि मूल सामग्री को बदले बिना इसे कैसे ठीक किया जा सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कैसे प्रत्येक उम्मीदवार को एक प्रोफ़ाइल बनानी चाहिए जो विभिन्न कंपनियों और उनकी नौकरी के आधार पर संशोधित हो साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सीवी पर अलग-अलग शीर्ष विपरीत कालक्रम में हों।
कर्मचारी की उपलब्धियों को मापना और अत्यधिक महत्व के वाक्यांशों को उजागर करना भी महत्वपूर्ण है जो नियोक्ता का ध्यान आकर्षित करेंगे। कर्मचारी अपने प्रासंगिक सोशल मीडिया प्रोफाइल में लिंक भी जोड़ सकते हैं जो प्रोफाइल में उनकी योग्यता को महत्व दे सकते हैं। सेमिनार के बाद के भाग में, वक्ताओं ने साझा किया कि कैसे उन्होंने शीर्ष बी-स्कूलों में अपनी जगह बनाई और इसमें कितना प्रयास किया गया। वक्ताओं द्वारा एसओपी और सार लेखन से जुड़ी कुछ गलतफहमियों और मिथकों का भंडाफोड़ किया गया जिससे छात्रों को अधिक प्रतिस्पर्धी प्रोफाइल बनाने के बारे में आशा जगी। उन्होंने परिप्रेक्ष्य के महत्व पर भी प्रकाश डाला कि कैसे न्यूनतम लेकिन कुशल कार्य अनुभव के साथ शब्दों के सही चयन के साथ भी सीवी को मजबूत बनाया जा सकता है। सत्र का समापन प्रश्नोत्तरी दौर के साथ हुआ, जिसके माध्यम से छात्रों ने सीवी बनाने या प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं को क्रैक करने के संबंध में अपने संदेह उठाए। सेमिनार ने वास्तव में छात्रों के व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास में मूल्य जोड़ा और उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में आत्मविश्वास से चलने के लिए प्रेरित किया। रिपोर्टर जिया तन्ना और फोटोग्राफ़र अग्रग घोष रहे ।कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

ज्योति फाउंडेशन की ओर से विद्यार्थियों को ज्योति मेधा छात्रवृत्ति

बैरकपुर। कांकिनाड़ा ज्योति फाउंडेशन द्वारा रवींद्र भवन, श्यामनगर में बैरकपुर एजेंडा फोरम के तहत हुए ‘ज्योति मेधा परीक्षा-2024’ का परिणाम घोषित किया गया। इस अवसर पर विगत महीने से चल रहे दीदी नं-1 और ड्रॉइंग कम्पटीशन के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। ज्योति मेधा परीक्षा में ग्रुप-A और ग्रुप-B से टॉप 100 विद्यार्थियों को क्रमशः ₹5000 और ₹3000 की छात्रवृत्ति प्रदान की गई और स्मृति चिह्न देकर पुरस्कृत किया गया तथा 2000 विद्यार्थियों को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। इस परीक्षा को सम्पन्न करवाने में जिन सम्मानीय शिक्षकों की भूमिका रही, उन्हें सम्मानित किया गया। बैरकपुर दीदी नं-1 का प्रथम पुरस्कार प्रियंका विश्वास को रेफ्रिजरेटर, द्वितीय पुरस्कार चोबीरानी दे को वाशिंग मशीन, तृतीय पुरस्कार रिंकू दास को एलईडी टेलीविजन, चतुर्थ पुरस्कार मालती मन्ना को डिनर सेट और पाँचवाँ पुरस्कार अनिता विश्वास को गैस ओवेन तथा 20 प्रतियोगियों को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। स्वागत वक्तव्य देते हुए संस्था के सचिव प्रियांगु पाण्डेय ने कहा कि किसी भी क्षेत्र को विकसित बनाना हो तो बेहतर शिक्षा एकमात्र विकल्प है। बैरकपुर शिल्पांचल में कई बच्चे आर्थिक अभाव में अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। ऐसे में हमारी ओर से एक छोटा-सा प्रयास है- ‘ज्योति मेधा छात्रवृत्ति’। हमारी संस्था का मूल उद्देश्य है- समाज में शिक्षा को बढ़ावा देना। इसी क्रम में यह छात्रवृत्ति दी जा रही है।

बंगाल में मुश्किल हो रहा कोल्ड स्टोरेज का कुशलतापूर्वक संचालन 

कोलकाता । पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन जो पश्चिम बंगाल में एकमात्र सक्रिय कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन है। इस संगठन की ओर से किसानों, उपभोक्ताओं और आम जनता का ध्यान आलू के संरक्षण के लिए किराये से होने वाले नुकसान की ओर आकर्षित करने के लिए एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सुनील कुमार राणा, डब्ल्यूबीसीएसए के उपाध्यक्ष शुभजीत साहा, पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजेश कुमार बंसल के अलावा पतित पावन दे, तरूण कांति घोष, डब्ल्यूबीसीएसए के पूर्व अध्यक्ष गोविंद कजारिया,  दिलीप चटर्जी, श्री, कौशिक कुंडू के अलावा डब्ल्यूबीसीएसए की जिला समितियों के अध्यक्ष और कई अन्य सम्मनीय लोग मौजूद थे। कृषि उपज के संरक्षण के लिए कोल्ड स्टोरेज किराए के तौर पर मिलनेवाले रुपए से अपना कोल्ड स्टोरेज चलाते हैं, जहां किराया सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है। प्रथा के अनुसार कोल्ड स्टोरेज का किराया राज्य सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर लागू की जाती है, जो विभिन्न बाजारों और मार्केटों से इनपुट लेकर लागतों के लिए वृद्धि की दर पर विचार करने के बाद ऐसी सिफारिश करती है। किराए की बढ़ोत्तरी बिजली की लागत, अमोनिया, कार्यालय रखरखाव, मशीनरी/उपकरण की मरम्मत और रखरखाव, आलू की लोडिंग और अनलोडिंग के लिए लगे सभी प्रकार के श्रमिकों के लिए कर्मचारियों का वेतन शुल्क इन सभी बातों पर विषय कर किराए में बढ़ोतरी का अनुमोदन दिया जाता है। यह देखा गया है कि सरकार द्वारा अनुमोदित किराया हमेशा विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुशंसित राशि से कम होता है। इस प्रकार 2021 तक कोल्ड स्टोरेज 21.35 रुपये/क्विंटल की अत्यधिक राशि मिलने से वंचित रह जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में अनुशंसित राशि और स्वीकृत किराये के बीच का अंतर काफी ज्यादा हो गया है। जो वर्तमान में कोल्ड स्टोरेज के लिए अव्यवहार्य हो गया है। अंततः कोल्ड स्टोरेज को एक बीमार और नुकसान उद्योग बनने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सरकार ने 2021 के बाद कोल्ड स्टोरेज किराए में संशोधन नहीं किया है, हालांकि एसोसिएशन ने पर्याप्त औचित्य के साथ संशोधन के लिए सरकार से बार-बार अपील की है। सरकार द्वारा बनाई गई विशेषज्ञ समिति ने भी जनवरी 23 में दक्षिण बंगाल और उत्तर बंगाल के लिए भंडारण किराए को 190 रुपये प्रति क्विंटल और 194 रुपये प्रति क्विंटल करने की सिफारिश की है। 2021 से 2022 की अवधि में ही 9.95 रुपये/क्विंटल की अंडर-रिकवरी हुई है। 2023 में उद्योग के लिए इनपुट लागत फिर से बढ़ गई है। लेकिन सरकार की तरफ से इसके किराए में बढ़ोत्तरी का कोई फैसला नहीं लिया गया। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील कुमार राणा ने कहा, यह अफसोस की बात है कि यह जानने के बावजूद कि अन्य राज्यों में कोल्ड स्टोरेज का किराया 230 रुपये से 270 रुपये प्रति क्विंटल है, हम सरकार का ध्यान कई बार इस ओर आकर्षित कर चुके हैं, लेकिन सरकार का अबतक उदासीन रवैया हमे देखने को मिल रहा है। हमारी इकाइयों को 168 रुपये से 172 रुपये प्रति क्विंटल पर संचालित करने का आदेश दिया गया है। इस तरह 31.30 रुपये/क्विंटल की आर्थिक हानि स्वीकार कर व्यवसाय करना पड़ रहा है। पिछले दो वर्षों से इसी नुक्षण के साथ हमने काम किया। हमारी हार्दिक इच्छा के बावजूद हम अपने इकाइयों का आधुनिकीकरण नहीं कर सके। परिणामस्वरूप, किसान और किराये पर लेने वाले उपभोक्ता संरक्षण की आधुनिक तकनीकों से वंचित रह जा रहे हैं। इस विकट परिस्थिति में इसके कई सदस्य कर्ज के जाल में फंस रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न जिलों में कोल्ड स्टोरेज बंद हो रहे हैं या इकाइयां बैंकों के लिए एनपीए बन रही हैं। यदि समय रहते कोल्ड स्टोरेज उद्योग को होनेवाले आर्थिक नुकसान पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका भारी प्रभाव पड़ेगा। इसलिए, हम इस अवसर पर सभी संबंधित पक्षों को सूचित करना चाहते हैं कि, हम आगामी सीजन में वर्तमान किराया संरचना के साथ कोल्ड स्टोरेज के संचालन को सुनिश्चित करना संभव नहीं हैं।

यंग इंडियंस ने किया किड्स कार्निवल का आयोजन

कोलकाता । यंग इंडियन्स ने चित्रकूट बिल्डिंग के लॉन्स पर 400 गरीब बच्चों के लिए एक दिलचस्प कर्णवाली का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाली चेयरमैन मंजरी दमानी और को-चेयर मौलिश्री दमानी ने यह सुनिश्चित किया कि इस घड़ी को बच्चों के जीवन में आनंद और जागरूकता लाएं। आस्थाएँ एक विभिन्न प्रकार की प्रेरणादायक गतिविधियों के साथ खुली। ट्रैम्पोलाइन हंसी लाने वाला था, टंबल टॉसर उत्साह भरा था, और एक मोहक पप्पेट शो ने बच्चों को एक अद्भुत दुनिया में संवहनी किया। जुम्बा कक्षाएँ केवल ऊर्जा नहीं डालीं बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दिया। स्लाइड और “कैन द कैन” खेल की शामिली से आनंद में एक अतिरिक्त स्तर जोड़ा गया। आनंददायक क्षणों के पारे, इस कार्यक्रम का एक गहरा उद्देश्य था। युवा मस्तिष्कों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श, जलवायु परिवर्तन, सड़क सुरक्षा, और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति संवेदनशील किया गया। सावधानीपूर्वक अंगीकृत गतिविधियों के माध्यम से, कर्णवाली एक शिक्षा का मंच बन गई, जो मजेदार रूप में छुपी शिक्षा को प्रोत्साहित करने और उपस्थित लोगों के बीच जागरूकता और सशक्तीकरण को बढ़ावा देती है। बैभव अग्रवाल के नेतृत्व में, इस संगीत सोमवार की सुबह वाली कर्णवाली ने दया का दीपक बन गई, मूल्यवान सिखों को बोझलेस यादें बनाते हुए।