Tuesday, September 29, 2026
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दुर्गोत्सव 2026 : कोलाज हैै बागुईहाटी रेल पुकुर यूनाइटेड क्लब की थीम

रीसायकल अखबारों से बन रहा है दुर्गापूजा मंडप

बागुईहाटी रेल पुकुर यूनाइटेड क्लब इस वर्ष अपने दुर्गापूजा का 73वां साल मना रहा है। इस मौके पर क्लब ने ‘कोलाज’ थीम पर आधारित एक शानदार आर्ट इंस्टॉलेशन पेश किया है, जो कला, समाज, यादों और बातचीत के बदलते तरीकों को एक साथ लाता है।
आर्टिस्ट सोमनाथ तामली के कॉन्सेप्ट पर आधारित इस पूरे आर्ट पैविलियन को हजारों किलो रीसायकल किए गए अखबारों से बनाया गया है। इसमें रोजमर्रा की वस्तुओं को कला के एक बेहतरीन कौशल में बदल दिया गया है। अखबार के पन्ने, शब्द, तस्वीरें और टेक्सचर को मिलाकर पूजा पंडाल को भव्य रूप दिया जा रहा हैं, जिससे यह काफी खूबसूरत और आकर्षक दिख रहा है.
‘कोलाज’ का कॉन्सेप्ट मां दुर्गा की पौराणिक कथाओं से भी गहराई से जुड़ा है। पारंपरिक कथाओं के अनुसार, अलग-अलग देवताओं ने अपनी दैवीय शक्तियों और हथियारों का योगदान देकर देवी दुर्गा का संपूर्ण रूप बनाया था। यह पैविलियन अलग-अलग तत्वों के इस मिलन को सामूहिक शक्ति की ताकत के प्रतीक के तौर पर दिखाने की कोशिश कर रहा है।
पारंपरिक कथा के अनुसार, मां दुर्गा का निर्माण देवताओं की सामूहिक दैवीय ऊर्जा से हुआ था, जिसमें अलग-अलग देवताओं ने अपनी शक्तियां और हथियार दिए थे। इनमें ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इंद्र, वरुण, वायु, अग्नि, यम, कुबेर और सूर्य जैसे देवता शामिल हैं।
हर दैवीय योगदान शक्ति के एक अलग हिस्से को दिखाता है। फिर भी, जब ये हिस्से एक साथ आते हैं, तो मां दुर्गा का संपूर्ण और शक्तिशाली रूप बनता है। अलग-अलग तत्वों को मिलाकर कुछ बड़ा बनाना ही ‘कोलाज’ की मुख्य व्याख्याओं में से एक है।
यही सोच इस इंस्टॉलेशन में भी दिखाई गई है, जो रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सत्यजीत रे, सत्येंद्र नाथ बोस, मातंगिनी हाजरा, ईश्वर चंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद जैसी प्रेरणादायक हस्तियों को श्रद्धांजलि भी देता है। उनके अलग-अलग योगदान मिलाकर बंगाल और भारत की सांस्कृतिक, बौद्धिक और सामाजिक विरासत का एक और ‘कोलाज’ बनाते हैं।
अखबार खुद इस इंस्टॉलेशन का एक ऐसा हिस्सा बन जाता है, जो पुरानी यादें ताजा करता है। मंडप की सजावट और कला में बड़ी मात्रा में अखबारों को लोड कर साइकिल पर उन्हें बांटने के दृश्यों के जरिए इस मंडप में पुराने जमाने के अखबारों वाले कल्चर की याद भी ताजा की जा रही है। साथ ही, यह भी पता चलता है कि कैसे डिजिटल मीडिया ने आज लोगों के जानकारी पाने और उसे शेयर करने के तरीके को बदल दिया है।
इस मौके पर बोलते हुए, बाग़ुईहाटी रेल पुकुर यूनाइटेड क्लब के सेक्रेटरी स्नेहाशीष देबनाथ ने कहा, इस साल हम अपनी थीम ‘कोलाज’ के जरिए हम समाज, संस्कृति, इतिहास और सामूहिक यादों के अलग-अलग हिस्सों को एक साथ लाकर एक बड़ी कहानी बनाना चाहते थे। जैसे अलग-अलग टुकड़े मिलकर एक अर्थपूर्ण कोलाज बनाते हैं, वैसे ही माँ दुर्गा की पौराणिक कथा में अलग-अलग देवी-देवताओं की दिव्य ऊर्जा और योगदान मिलकर एक शक्तिशाली और संपूर्ण रूप लेते हैं। हमने अपनी कलात्मक इंस्टॉलेशन के जरिए इसी सोच को आगे बढ़ाया है, जिसमें बंगाल और भारत को आकार देने वाले अखबारों, मशहूर हस्तियों और कहानियों को एक साथ लाया गया है। मंडप को हजारों किलो रीसायकल किए गए अखबारों का इस्तेमाल खबरें पढ़ने और शेयर करने के उस कल्चर को सम्मान देने जैसा आकर दिया गया है, जो अब समाज से खत्म हो रहा है। यह हमें उस समय की याद दिलाता है जब अखबार रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा हुआ करते थे। जब हम अपना 73वां साल मना रहे हैं, तो ‘कोलाज’ विविधता में एकता का जश्न मनाने और खुद को यह याद दिलाने का हमारा तरीका है कि हर व्यक्ति का योगदान, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, तब सार्थक हो जाता है जब वह दूसरों के साथ मिलकर कुछ बड़ा और स्थायी बनाता है।
‘कोलाज’ के जरिए बागुईहाटी रेल पुकुर यूनाइटेड क्लब कला, पौराणिक कथाओं, विरासत और समकालीन सोच को एक साथ लाने की पूरी कोशिश की गई है, जिससे आने वाले लोगों को दुर्गा पूजा पंडाल के दृश्य आकर्षण से कहीं बढ़कर एक अनुभव मिलता है।

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