मिदनापुर । विद्यासागर विश्वविद्यालय शिक्षक समिति की ओर से बीएन शासमल सभागार में आयोजित शिक्षक व्याख्यान के अंतर्गत एंथ्रोपोलॉजी विभाग के प्रोफेसर कौशिक बोस ने भारत की जनजातीय आबादी के पोषण एवं हिंदी विभाग के डाॅ संजय जायसवाल ने हिंदी के विकास में बंगाल की भूमिका विषय पर व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन शिक्षक समिति के अध्यक्ष प्रो.केशव चंद्र मंडल ने किया।इस सत्र में आईक्यूएसी के निदेशक प्रो.मधु मंगल पाल, आरडी के निदेशक प्रो. अजय मिश्र, व्याख्यान के संयोजक प्रो. ब्रज गोपाल पाल उपस्थित थे।प्रो.कौशिक बोस ने अपने व्याख्यान में बंगाल एवं भारत के कुछ हिस्सों में रहने वाली जनजातियों के पोषण की स्थिति पर तथ्यात्मक जानकारी दी। उन्होंने पोषण की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अपने शोध पत्र में पोषणयुक्त भोजन को लेकर जनजातियों में जागरूकता बढ़ाने की बात कही। डॉ संजय जायसवाल ने कहा बंगाल ने हिंदी भाषा और साहित्य के विकास और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है।आज हमें बंगाल की नवजागरणकालीन समृद्ध परंपरा से नई पीढ़ी को अवगत कराने की आवश्यकता है। बंगाल ने हिंदी शिक्षा,रंगमंच, पत्रकारिता, कला और संस्कृति जगत को विस्तार देने के साथ समावेशी और संवादपरक बनाया। आज हमें उच्च शिक्षा संस्थानों में हिंदी एवं बांग्ला भाषा- साहित्य के बीच तुलनात्मक अध्ययन केंद्र खोलने की जरूरत है। विद्यासागर और भारतेंदु की तरह हमें पुल बनने की आवश्यकता है।आज राजा राममोहन राय, केशव चन्द्र सेन,भूदेव मुखर्जी, रवींद्रनाथ टैगोर, राज नारायण बसु, शारदाचरण मित्र जैसे बांग्ला भाषियों के प्रयासों का स्मरण एवं अनुकरण करना चाहिए।इस अवसर पर प्रो. अमल मंडल, डॉ तप्ति साहा, प्रो.प्रमोद कुमार प्रसाद, डॉ श्रीकांत द्विवेदी,प्रो. अमित किस्कू, डॉ अमृता गुप्ता, डॉ श्रीकांत द्विवेदी, मंटू दास, सुषमा कुमारी सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष,शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो.निवेदिता साहू ने किया।




