मिदनापुर । महान शिक्षाविद, समाज सुधारक और मानवतावादी विचारक पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की 207वीं जयंती विद्यासागर विश्वविद्यालय में गरिमा और सम्मान के साथ मनाई गई । इस अवसर पर ‘विद्यासागर रचना समग्र’ के चौथे खंड और ईश्वरचंद्र विद्यासागर द्वारा रचित ‘शकुंतला उपाख्यान ‘ का विद्यासागर विश्वविद्यालय की ओर से चार अलग-अलग भाषाओं ( हिंदी, अंग्रेजी, संताली एवं बांग्ला) में अनूदित ‘शकुंतला’ का भी विमोचन किया गया। यह विद्यासागर की साहित्यिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित और प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो दीपक कुमार कर ने अपने संबोधन में कहा विद्यासागर विश्वविद्यालय में विद्यासागर म्यूजियम एवं डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रीडर्स पार्क का उद्घाटन किया गया । ईश्वरचंद्र विद्यासागर राजा राममोहन राय के उत्तराधिकारी थे। उन्होंने स्त्री शिक्षा को सामाजिक बदलाव के लिए जरूरी माना। उच्च शिक्षामंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने उद्घाटन संबोधन में कहा कि नई पीढ़ी से आह्वान किया कि आने वाले समय में बंगाल की ऐतिहासिक उपलब्धि को पुनर्स्थापित करने की जरूरत है । नीति आयोग के सदस्य प्रो.गोवर्धन दास ने विद्यासागर मेमोरियल लेक्चर देते हुए कहा विद्यासागर सामाजिक सुधार के प्रेणता थे। विशेष व्याख्यान देते हुए डॉ सायन भट्टाचार्य ने कहा म्यूजियम के जरिए भी शिक्षा को विस्तार दिया जा सकता है । विद्यासागर म्यूजियम की स्थापना का अर्थ है आमलोगों तक विद्यासागर के विचारों को पहुंचाना। विद्यासागर का हिंदी के प्रसिद्ध लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र से गहरा संबंध था।
मिदनापुर के विधायक डॉ शंकर गुच्छाइत ने कहा कि मिदनापुर ज्ञान और स्वतंत्रता संग्राम की भूमि है। विद्यासागर विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा, ज्ञान और प्रगति का बड़ा केंद्र है। कार्यक्रम का संचालन प्रो.जयजीत घोष और सागरिका घोष ने एवं धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ जयंत किशोर नंदी ने दिया।




