Sunday, September 6, 2026
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बंगाल के स्कूली विद्यार्थियों को मिलेगी डिजिटल पहचान

 

– अपार आईडी से जुड़ेगा पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड
कोलकाता, नि.सं.। पश्चिम बंगाल के स्कूली विद्यार्थियों के लिए शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहचान को डिजिटल स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों के लिए अपार आईडी (ऑटोमेटेड परमानेंट अकादमिक अकाउंट रजिस्ट्री) तैयार की जाएगी, जिसके माध्यम से उनके पूरे शैक्षणिक जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड एक ही डिजिटल पहचान से जोड़े जा सकेंगे। व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक विद्यार्थी को 12 अंकों वाली एक विशिष्ट पहचान संख्या मिलने की बात कही जा रही है। अपार को विद्यार्थियों की स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान के रूप में विकसित किया जा रहा है। अपार आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों के अंकपत्र, प्रमाणपत्र, डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों से जुड़े दस्तावेज डिजिटल रूप से एक स्थान पर उपलब्ध कराए जा सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक दस्तावेजों को बार-बार भौतिक रूप में संभालने और विभिन्न संस्थानों में प्रस्तुत करने की आवश्यकता कम होने की उम्मीद है। इस डिजिटल व्यवस्था को डिजिलॉकर और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स जैसी प्रणालियों से जोड़ने की योजना है। इससे भविष्य में उच्च शिक्षा में प्रवेश, एक संस्थान से दूसरे संस्थान में स्थानांतरण तथा शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सकती है। अपार आईडी को केवल स्कूल स्तर तक सीमित नहीं रखा जाएगा। विद्यार्थियों के आगे की पढ़ाई से संबंधित रिकॉर्ड भी इस डिजिटल पहचान से जुड़े रह सकते हैं। उच्च शिक्षा में प्रवेश के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन से लेकर भविष्य में रोजगार से जुड़ी आवश्यकताओं तक इसका उपयोग होने की संभावना है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को प्रमाणपत्रों और अन्य दस्तावेजों की प्रतियां लेकर अलग-अलग संस्थानों के चक्कर लगाने की परेशानी कम हो सकती है। साथ ही शैक्षणिक रिकॉर्ड के व्यवस्थित डिजिटल संरक्षण से दस्तावेजों के रखरखाव और सत्यापन की प्रक्रिया भी आसान होने की उम्मीद है। नाबालिग विद्यार्थियों के लिए अपार आईडी तैयार करने से पहले अभिभावकों की सहमति आवश्यक होगी। यानी माता-पिता या अभिभावक की अनुमति के बिना नाबालिग विद्यार्थियों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान तैयार नहीं की जाएगी। इस व्यवस्था में विद्यार्थियों के व्यक्तिगत और शैक्षणिक आंकड़ों की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण माना गया है। पश्चिम बंगाल में डिजिटल शिक्षा व्यवस्था के विस्तार के साथ अपार आईडी को विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहचान के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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