Sunday, March 22, 2026
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तपती लू में भवानीपुर कॉलेज की एनएसएस टीम ने  किया सेवाकार्य

   कॉलेज पथिकों को पिलाया जल और ग्लूकॉन डी 

कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की एनएसएस टीम के विद्यार्थियों ने सोमवार 29 अप्रैल से 3 मई तक सड़क पर पानी और ग्लूकॉन डी की व्यवस्था की है। कोलकाता का तापमान पिछले 10 दिनों से 40-43 डिग्री तक चल रहा है। भीषण गर्मी और लू को देखते हुए छात्र और छात्राओं ने पथिकों को जल और ग्लूकॉन डी देकर सेवा कार्य कर रहे हैं। अगले पांच दिनों तक यह जल सेवा कार्य करने के लिए विद्यार्थियों ने निश्चय किया है। कॉलेज की ओर से आयोजित इस कार्य सेवा में रेक्टर, डीन प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो चंदन झा, एनएसएस कोआर्डिनेटर प्रो गार्गी, दर्शना त्रिवेदी, प्रो समीक्षा खंडूरी आदि शिक्षकों ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। यह जल सेवा कार्य भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने यह कदम उठा कर अन्य कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए एक उत्प्रेरक पहल है।इसके लिए कॉलेज के कला विभाग, कॉमर्स विभाग के सभी शिक्षक और शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों ने धन दान देकर जल सेवा में अपना योगदान दिया । कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

शेयरस्किल कक्षाओं के युवा विद्यार्थी शिक्षकों का अभिनंदन

एक कहावत है कि किसी को सिखाने से आप बेहतर सीखते हैं। तो किसी मित्र को कोई कौशल सिखाने से बेहतर क्या है? ठीक उसी तरह, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने स्टूडेंट शेयरस्किल क्लासेस के एक और संस्करण का समापन किया और कौशल साझा करने की कला को स्वीकार करने के लिए यह तृतीय बार शेयर-स्किल 3.0 कक्षाओं के सम्मान की मेजबानी की। 24 अप्रैल को सुबह 10:30 बजे से जुबली हॉल में समारोह का आयोजन किया गया. से आगे। यह समारोह उन युवा छात्र शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए आयोजित किया गया था जिन्होंने एक्सेल, एंकरिंग, स्केटिंग, ग्राफिक डिजाइन और स्केचिंग जैसे विभिन्न कौशल सिखाने और सीखने में योगदान दिया था। समारोह की शुरुआत विद्यार्थियों को दिखाए गए एक वीडियो से हुई जिसमें शेयर स्किल कलेक्टिव में कक्षाओं के अंश शामिल थे और समग्र वातावरण में अपने साथियों से सीखने में छात्रों की उत्साही भागीदारी को दर्शाया गया था।
 रेक्टर और छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने विद्यार्थियों को संबोधित किया और शेयर-स्किल 3.0 पर अपने विचार साझा किए और बताया कि कैसे इसने उन सभी कौशलों को पेश किया जो एक ही समय में प्रासंगिक और ट्रेंडिंग थे। उन्होंने छात्रों को उनकी रुचि के अनुकूल नई गतिविधियाँ सीखते रहने के लिए प्रोत्साहित किया और इसके साथ ही प्रमाणपत्रों का वितरण भी शुरू हो गया। प्रत्येक प्रतिभागी को सीखने और उसके परिणामस्वरूप आगे बढ़ने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया गया।
प्रदर्शन के बीच में क्रिसेंडो  के सदस्यों द्वारा एक मधुर प्रस्तुति, शेयर स्किल 4.0 में स्वर सिखाने जा रही है। विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया. बाद में, छात्र शिक्षकों को अन्य सभी छात्रों को उनके उत्कृष्ट मार्गदर्शन और समर्थन के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। सभी प्रमाणपत्र सौंपे जाने के साथ, शेयर स्किल कक्षाओं के एक और संस्करण की घोषणा की गई जिसका नाम “शेयर-स्किल 4.0” रखा गया। गायन, घुड़सवारी, डूडलिंग, डीजे कक्षाएं, वीडियो-संपादन, शास्त्रीय नृत्य और शेयर बाजार की बिल्कुल नई कक्षाएं शुरू करना। अंत में सभी को बधाई दी गई, और सभी के चेहरों पर गर्व और कुछ सीखने का जज्बा रहा। रिपोर्ट पूजा डबराई और फोटोग्राफी अर्पिता बिस्वास ने किया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज 2024 का शिक्षा इंडियन ब्रांड एंड लीडरशिप कॉन्क्लेव अवार्ड से सम्मानित

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज को 20 अप्रैल को गोवा में इंडियन ब्रांड एंड लीडरशिप कॉन्क्लेव 2024 प्रतिष्ठित शिक्षा श्रेणी पुरस्कार, द ब्रांड स्टोरी अवार्ड मिला है। यह अवार्ड शिक्षा में उत्कृष्टता के प्रति भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की अटूट प्रतिबद्धता और सीखने के माध्यम से एक उज्जवल भविष्य को आकार देने के प्रति समर्पण को रेखांकित करती है। भवानीपुर कॉलेज उच्चरोत्तर शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट रूप से पहचान बनाने के लिए कृतबद्ध है। गोवा में हुए कार्यक्रम में कॉलेज के डीन और रेक्टर प्रो दिलीप शाह को इंडियन ब्रांड एंड लीडरशिप कॉन्क्लेव अवार्ड प्रदान किया गया। मैनेजमेंट के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह ने विद्यार्थियों और शिक्षक शिक्षिकाओं को शुभकामनाएँ दीं ।जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

जयंती पर विशेष : राजनीति में साहित्यिक योद्धा : आचार्य विष्णुकांत शास्त्री


शुभांगी उपाध्याय
शोधार्थी, कलकत्ता विश्वविद्यालय
भारत में लोकतंत्र के महा पर्व का शुभारंभ हो चुका है। जल्द ही पश्चिम बंगाल में भी मतदान होने वाले हैं। देश भर में विभिन्न नेता ऐसे हैं जो साहित्य में रुचि रखते हैं और राजनीति में भी अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं। ऐसे में, 2 मई, 1929 को कलकत्ता के एक सारस्वत ब्राह्मण परिवार में, पंडित गांगेय नरोत्तम शास्त्री तथा रूपेश्वरी देवी के घर में जन्में आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री का स्मरण हो आता है जो साहित्य, संस्कृति और राजनीति के अद्भुत समन्वयक थे। इन्होंने भारतीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
एक बार उनसे किसी बंगाली प्रोफेसर ने प्रश्न किया कि, ‘आप कहाँ के रहने वाले हैं?’ इसपर आचार्य शास्त्री ने बड़ा ही रोचक उत्तर दिया, “मेरा मन बंगाली है, बंगाल में जन्मा, पला, बढ़ा, बांग्ला- साहित्य पढ़ा, बंगाल की भावुकता पायी, अतः मन से बंगाली हूँ। मेरे पिता, पितामह, प्रपितामह काशी में संस्कृत का अध्ययन-अध्यापन करते रहे। पारिवारिक संस्कार और आचार-विचार का विवेक भी काशी से ही प्राप्त हुआ है, अतः कह सकता हूँ कि बुद्धितत्त्व काशी का है। चित्त और चित्तेश्वरी दोनों जम्मू की देन हैं। पूर्वज जम्मू से आए थे। आन-बान, स्वाभिमान और दृढ़ता का डोगरा स्वभाव विरासत में मिला है। अहंकार सारे भारतवर्ष का है। अब आप ही बताइये कि मैं अपने को कहाँ का कहूँ ।”
आचार्य जी की शिक्षा कलकत्ता के सारस्वत क्षत्रिय विद्यालय, प्रेसीडेंसी कॉलेज (अब विश्वविद्यालय), विद्यासागर कॉलेज और फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से हुई। उन्होंने अपने छात्र जीवन की सभी परीक्षाएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। आगे चलकर आचार्य जी को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा मानद उपाधि, डी.लिट. तथा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा डी. लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। 1953 में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्राध्यापक नियुक्त हुए तत्पश्चात् विभागाध्यक्ष भी बने। आचार्य के पद से उन्होंने 31 मई, 1994 को अवकाश ग्रहण किया।
राजनैतिक योगदान
प्रखर राष्ट्रप्रेम और समाज के प्रति अपने कर्त्तव्यों का अनुभव करते हुए आचार्य जी 1944 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्त्ता बने। 1977 में नवगठित जनता पार्टी की ओर से वे कलकत्ता के जोड़ासाँको अंचल से विधान सभा प्रत्याशी बने और भारी मतों से विजयी घोषित हुए। 1977 से 1982 तक पश्चिम बंगाल विधान सभा के विधायक रहे। 1980 में नवगठित भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध होते हुए उन्हें बंगाल का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। 1988 से 1993 तक आचार्य जी भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे। 1992 से 1998 तक वे राज्यसभा सांसद भी निर्वाचित हुए। केन्द्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 2 दिसंबर 1999 को उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया। 23 नवंबर 2000 तक वे इस प्रदेश के संवैधानिक मुखिया रहे। तत्पश्चात् उन्हें देश के अत्यंत महत्त्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश स्थानांतरित कर दिया गया, जहाँ 24 नवंबर 2000 से 2 जुलाई 2004 तक उन्होंने राज्यपाल के रूप में कार्य करते हुए अपार लोकप्रियता अर्जित की। शास्त्रीजी ने कुछ दिनों तक पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक का अतिरिक्त कार्यभार भी सँभाला।
शास्त्रैरपि, शरैरपि गुण के धारक : 
प्रख्यात विद्याव्रती आचार्य विष्णुकांत शास्त्री शास्त्रैरपि, शरैरपि गुण के धारक भी थे। 1962 में भारत-चीन युद्ध में देश की पराजय का क्षोभ हर राष्ट्रप्रेमी के हृदय में व्याप्त था। आचार्य जी भी उसी दौरान एन.सी.सी. से जुड़े और 1964-65 में तीन कम्पनियों के कमाण्डर नियुक्त हुए। ‘मेरी रचना प्रक्रिया’ शीर्षक आलेख में वे लिखते हैं- “मेरे स्वभाव का एक पहलू यह भी है कि मैं समाज और देश के सामने आयी चुनौतियों से तटस्थ नहीं रह पाता। देश कठिन समय से गुजरता रहे और मैं पढ़ने-लिखने आदि में ही लगा रहूँ, यह मैं नहीं कर पाता।”
बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भूमिका :
1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) ने अपनी स्वाधीनता के लिए संघर्ष प्रारंभ किया, तो उस कालखण्ड में कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा गठित ‘बांग्लादेश सहायक समिति’ से  जुड़ गए और उसकी कार्यसमिति के सदस्य के रूप में सक्रिय रहे। डॉ० धर्मवीर भारती जी के साथ मिलकर वे मोर्चे पर गए साथ ही बांग्लादेश की तत्कालीन स्थिति को बयां करने वाले ऐतिहासिक रिपोर्ताज लिखे। साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ के संपादक डॉ० भारती ने उनकी महत्त्वपूर्ण रचनाओं को प्रमुखता से निरंतर प्रकाशित किया। आचार्य जी लिखते हैं, “कैसे अद्भुत थे वे दिन! उत्तेजना, विक्षोभ और उत्साह का जैसा अनुभव उन दिनों हुआ, वैसा कभी नहीं हुआ था। कहाँ विश्वविद्यालय का शान्तिपूर्ण प्राध्यापक जीवन और कहां युद्ध के मोर्चों पर अर्द्ध सैनिक वेश में गोलों के बीच मुक्ति योद्धाओं का साहचर्य। शरणार्थियों को दुर्दशा देखकर कलेजा मुँह को आता था, तो बांग्लादेश के नौजवान कार्यकर्त्ताओं की निष्ठा और लगन आश्वस्त करती थी कि स्थिति पलटकर रहेगी।”
श्रीराम के अनन्य भक्त :
आचार्य शास्त्री भक्ति काव्य के मर्मज्ञ विद्वान के रूप में समादृत रहे हैं। धर्म संस्कृति एवं अध्यात्म के गहन विश्लेषक, उपनिषद् एवं गीता के प्रवचनकार के रूप में भी उनकी पहचान बनी। भगवान श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति सुविदित थी। वे लिखते हैं कि, “मैं आस्तिक विद्वान परिवार में पैदा हुआ था। भजन, पूजन, कथाश्रवण, दान पुण्य, तीर्थाटन आदि हम लोगों के परिवार का सहज अंग था। विद्वान पंडितों, संतों, संन्यासियों के प्रवचन मैं बचपन से सुनता आ रहा हूँ। चढ़ती जवानी में ही मैंने रामकृष्ण, विवेकानंद के साहित्य के अधिकांश का पारायण कर लिया था। श्रीमद्भागवत गीता एवं रामचरित मानस मेरे नित्य पाठ के पूज्य ग्रंथ रहे हैं।”
वे अपनी उपलब्धियों को ‘रामजी की कृपा’ और असफलताओं को ‘रामजी की इच्छा’ मानते थे। भक्तिपरक रचनाओं में अपने आराध्य रामजी के प्रति उनका समर्पण बड़े ही भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त हुआ है। अपार भक्ती और विनम्रता का परिचय देते हुए वे लिखते हैं, “तुम्हीं काम देते हो स्वामी, तुम्हीं उन्हें पूरा करते हो, असफलता के दारुण क्षण में, अश्रु पोंछ पीड़ा हरते हो। कभी-कभी अचरज होता है, इतना अगुणी होने पर भी, कैसे, क्योंकर तुम मुझपर, यों कृपा मेघ जैसे झरते हो।”
निष्कर्षतः आचार्य विष्णुकांत शास्त्री का सम्पूर्ण जीवन शिक्षा, आध्यात्म, समाजसेवा, भक्ति और राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत था। उनका नाम एक कुशल वक्ता और अप्रतिम राजनेता में शुमार है। इसके इतर वे छात्र वत्सल प्राध्यापक भी थे। राजनीति में रहने के पश्चात भी उनकी साहित्य साधना कभी कम नहीं हुई। आज के दौर में बंगाल की राजनीति में ऐसे कुशल प्रभावशाली नेतृत्व की महती आवश्यकता है।

आयुर्वेदिक उत्पादों पर बढ़ रहा लोगों का भरोसा, अगले 5 साल में दोगुना हो जाएगा बाजार!

नयी दिल्ली । भारत में आयुर्वेद उत्पादों का बाजार लगातार तेजी से बढ़ रहा है। यह वित्त वर्ष 2028 तक बढ़कर 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो फिलहाल 57,450 करोड़ रुपये है। यह बात आयुर्वेद टेक स्टार्टअप निरोगस्ट्रीट ने अपने एक अध्ययन में कही है।
निरोगस्ट्रीट का कहना है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कुदरती और हर्बल उपचारों की मांग बढ़ रही है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों की तादाद में भी इजाफा हो रहा। इस क्षेत्र में युवा उद्यमी भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। साथ ही, सरकार भी आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा दे रही है।
15 प्रतिशत के सीएजीआर से बढ़ने की उम्मीद – निरोगस्ट्रीट सर्वे के मुताबिक, आयुर्वेद उत्पादों और सेवाओं का समग्र बाजार वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2028 तक 15 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ने की उम्मीद है। सर्वे में यह भी अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2022 में देश के आयुर्वेदिक मैन्युफैक्चरिंग की वैल्यू तकरीबन 89,750 करोड़ रुपये थी। निरोग स्ट्रीट सर्वे में 10 राज्यों- उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर और केरल- के करीब 7,500 निर्माताओं ने हिस्सा लिया।
10 वर्षों में 24 अरब डॉलर तक पहुंचा आयुष क्षेत्र- हाल ही में आयुष मंत्रालय ने भी जोर दिया कि वैश्विक बाजारों में आयुष उत्पादों की धाक जमाने के लिए इनोवेशन और बेहतर इकोसिस्टम बनाने की जरूरत है। मंत्रालय ने बताया कि आयुष क्षेत्र 10 वर्षों में 24 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
निरोग स्ट्रीट का कहना है कि आयुर्वेद उत्पादों का बाजार जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे जाहिर होता है कि इसमें देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है। पिछले कुछ में आयुर्वेदिक इलाज पद्धति पर लोगों का भरोसा भी काफी बढ़ा है, क्योंकि इसके ज्यादा साइड इफेक्ट नहीं होते।

8 अप्रैल को पूर्ण सूर्य ग्रहण पर नजर रखेगा आदित्य एल 1

नयी दिल्‍ली । 8 अप्रैल को दुनिया के कई हिस्‍सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। सूर्य, चंद्रमा और पृथ्‍वी के एक सीधी रेखा में आने पर करीब चार मिनट के लिए अंधेरा छा जाएगा। इस दौरान आदित्‍य एल-1 भी सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को लैग्रेंज प्‍वाइंट-1 से को ऑब्‍जर्व करेगा, जो पृथ्‍वी और सूर्य की 15 लाख किलोमीटर दूरी पर है। आदित्य एल1 अंतरिक्ष यान ने 2023 में पृथ्वी छोड़ने के बाद इस साल की शुरुआत में लैग्रेंज प्वाइंट 1 पर अपनी हेलो कक्षा में प्रवेश कर गया था। अंतरिक्ष यान को एल1 पर अंतरिक्ष की ठंडक में कैलिब्रेट किया जा रहा है और इसने विज्ञान अवलोकन शुरू कर दिया है।
आदित्‍य एल-1 के 6 इंस्‍ट्रूमेंट्स सूर्य को ऑर्ब्‍जव करता हैं, लेकिन इसमें से दो इंस्‍ट्रूमेंट्स विसि‍बल एमिशन लाइन कोरानाग्राफ (वीईएलसी) और सोलर अल्‍ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्‍कोप (एसयूआईटी ) प्राथमिक रूप से सूर्य ग्रहण को ऑब्‍जर्व करेंगे। इनमें से कोरोनोग्राफ सूर्य की डिस्क को अवरुद्ध करता है और स्‍पेसक्राफ्ट पर एक कृत्रिम ग्रहण बनाकर सूर्य की बाहरी परत कोरोना का अध्ययन करता है। वहीं इस बीच, SUIT निकट पराबैंगनी में सौर प्रकाशमंडल और क्रोमोस्फीयर की तस्वीरें लेता है।
आदित्य एल-1 दुर्लभ ग्रहण के दौरान सूर्य को ऑब्‍जर्व करने वाला एकमात्र अंतरिक्ष यान नहीं होगा, 4 अप्रैल को सूर्य के सबसे करीब पहुंचे यूरोप के सोलर ऑर्बिटर के उपकरण भी ग्रहण को ऑब्‍जर्व करने के लिए सक्रिय हो जाएंगे।
ग्रहण के दौरान, सूर्य की बाहरी पर कोरोना दृश्‍य होती है, क्योंकि चंद्रमा सौर डिस्क को अवरुद्ध करता है और बाहरी चमकदार परतों को चमकता हुआ दिखाता है और इसे पृथ्वी से एक संक्षिप्त क्षण के लिए देखा जा सकता है। अन्य समय कोरोना पृथ्‍वी से दिखाई नहीं देता है।
आदित्य-एल1 पर लगे आदित्य पेलोड के लिए प्लाज्मा एनालाइज़र पैकेज ने फरवरी में कोरोनल मास इजेक्शन के पहले सौर पवन प्रभाव का पता लगाया। इस बीच, 6 मीटर लंबा मैग्नेटोमीटर बूम जनवरी में तैनात किया गया था। सौर ऑर्बिटर पृथ्वी पर हमारे परिप्रेक्ष्य की तुलना में सूर्य का अवलोकन करेगा। इसका मतलब यह है कि सूर्य के बाहरी वातावरण की संरचनाएं, जो हम पृथ्वी से सूर्य के दाहिनी ओर देखते हैं, उन्हें स्‍पेसक्राफ्ट द्वारा सीधे आमने-सामने देखा जाएगा।

अगले 20 सालों में दोगुने हो जाएंगे प्रोस्टेट कैंसर के मरीज

नयी दिल्ली ।  दुनिया भर में 2020 तथा 2040 के बीच प्रोस्टेट कैंसर के मामले दोगुने से अधिक होने और मौतों में 85 प्रतिशत की वृद्धि होने की आशंका है तथा इसका सर्वाधिक प्रभाव निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) पर पड़ सकता है। यह बात प्रोस्टेट कैंसर संबंधी लैंसेट आयोग ने कही। यह वैश्विक स्तर पर पुरुषों में होने वाला सबसे आम प्रकार का कैंसर है।
वृद्ध पुरुषों को ज्यादा खतरा – अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि कम निदान और एलएमआईसी में डेटा संग्रह संबंधी अवसर चूकने के कारण वास्तविक संख्या बहुत अधिक होने की संभावना है। अनुसंधान से जुड़े लोगों ने कहा कि वृद्ध पुरुषों में प्रोस्टेट (पौरुष ग्रन्थि) कैंसर के अधिक मामले सामने आएंगे और 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र जोखिम कारक होने के मद्देनजर जीवनशैली में बदलाव एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप आगामी वृद्धि को रोकने में सक्षम नहीं हो पाएंगे।
क्या होता है प्रोस्टेट कैंसर – अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में 2020 तथा 2040 के बीच प्रोस्टेट कैंसर के मामले दोगुने से अधिक होने और मौतों में 85 प्रतिशत की वृद्धि होने की आशंका है । प्रोस्टेट कैंसर जेनेटिक, मोटापे जैसे कारकों से संबंधित लोगों में अन्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। यह अखरोट के आकार की एक छोटी ग्रंथि होती है जो पुरुषों के ब्लैडर और प्राइवेट पार्ट के बीच में स्थित होती है। आमतौर पर प्रोस्टेट कैंसर तब शुरू होता है जब प्रोस्टेट ग्रंथि में कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर होने लगती हैं।
प्रोस्टेट कैंसर की जांच करवानी जरूरी – प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती स्टेज में कोई लक्षण नहीं दिखता है। अगर कैंसर ज्यादा बढ़ जाता है तो पुरुष के रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है, मूत्राशय और मलाशय पर उनका नियंत्रण हट जाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि 45-50 की उम्र के बाद हर पुरुष को प्रोस्टेट कैंसर की जांच करानी चाहिए ताकि शुरुआती स्टेज में ही इसका इलाज हो सके।

ईरान के बंदर अब्बास शहर में है भगवान विष्णु का मंदिर

ईरान के बंदर अब्बास शहर में एक मात्र हिंदू देवता भगवान विष्णु की मंदिर है। इसका इसका निर्माण 1892 ईस्वी में मोहम्मद हसन खान साद-ओल-मालेक के शासनकाल के दौरान किया गया था। ईरान में हिंदू धर्म एक छोटा धर्म है।
2015 तक ईरान में 39,200 हिंदू रहते थे। इस वजह से ईरान में अब तक केवल दो हिंदू मंदिर का निर्माण किया गया है, जिसको आर्य समाज द्वारा बनाए गया था। ईरान के बंदर अब्बास शहर में एक मात्र हिंदू देवता भगवान विष्णु की मंदिर है। इसका इसका निर्माण 1892 ईस्वी में मोहम्मद हसन खान साद-ओल-मालेक के शासनकाल के दौरान किया गया था। इसको बनाने में भारतीय व्यापारियों ने भी मदद की थी।
ईरान के बंदर अब्बास में हिंदू मंदिर एक उल्लेखनीय ऐतिहासिक स्मारकों में से एक माना जाता है, जो बाजार के सामने इमाम खुमैनी स्ट्रीट पर स्थित है। हिंदू देवता भगवान विष्णु की मंदिर मंदिर का भवन मुख्यतः एक केन्द्रीय वर्गाकार कक्ष है जिसके ऊपर एक गुम्बद है। इस स्मारक का डिज़ाइन पूरी तरह से भारतीय वास्तुकला से प्रेरित है।


बंदर अब्बास में भारतीयों के मंदिर की शानदार वास्तुकला शैली और इस मंदिर के निर्माण के लिए उपयोग की गई सामग्री इसे ईरान की अन्य इमारतों से अलग बनाती है। मुख्य भवन के गुंबद पर 72 बुर्ज हैं, जो इसे भारतीय वास्तुकला के करीब बनाते हैं। इस मंदिर का गुंबद ईरान के सबसे खूबसूरत गुंबदों में से एक है। इस मंदिर के अंदर और इसका आंतरिक भाग भी बेहद खूबसूरत और शानदार है। इसका मुख्य कमरा चतुर्भुज आकार का है और इसमें सुंदर फ्रेम लगे हैं।
मंदिर के चारों ओर 4 गलियारे हैं। अपरिभाषित अतीत में, भारतीय इन गलियारों से प्रार्थना करने के लिए यहां आते थे। ईरान में हिंदू मंदिर को 19वीं सदी के अंत तक भारतीय व्यापारियों द्वारा वित्त पोषित किया गया था। इसके बाद साल 1976 में आखिरी बार ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने तेहरान की यात्रा की थी।

गर्मियों में भेज रहे हैं बच्चे को स्कूल तो रखें ध्यान

गर्मियों की छुट्टियां खत्म होते ही माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी शुरू कर देते हैं। इस दौरान कई बार कुछ सामान्य गलतियां हो जाती हैं, जो बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। यहां गर्मियों में बच्चों को स्कूल भेजते समय होने वाली कुछ सामान्य गलतियों और उनसे बचने के उपाय दिए गए हैं –
1. बच्चों को पर्याप्त पानी न पिलाना – गर्मियों में डिहाइड्रेशन एक आम समस्या है, खासकर बच्चों में। स्कूल जाते समय बच्चों को पर्याप्त पानी पीना चाहिए ताकि वे डिहाइड्रेट न हों। माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल के लिए पानी की बोतलें देनी चाहिए और उन्हें नियमित अंतराल पर पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
2. बच्चों को हल्के रंग के कपड़े न पहनाना – गर्मियों में गहरे रंग के कपड़े गर्मी सोख लेते हैं, जिससे बच्चे असहज और पसीने से तर हो सकते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों को हल्के रंग के, ढीले-ढाले कपड़े पहनाने चाहिए जो हवा को प्रसारित होने दें और उन्हें ठंडा रखें।
3. बच्चों को सनस्क्रीन न लगाना – सनस्क्रीन त्वचा को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) किरणों से बचाने के लिए आवश्यक है। माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल जाने से पहले सनस्क्रीन लगानी चाहिए, भले ही दिन बादल क्यों न हो। सनस्क्रीन कम से कम एसपीएफ 30 होनी चाहिए और हर दो घंटे में दोबारा लगानी चाहिए।
4. बच्चों को टोपी या छाता न देना – टोपी और छाते सूर्य की गर्मी और यूवी किरणों से बच्चों की रक्षा करने में मदद करते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल जाते समय टोपी और छाता देना चाहिए, खासकर अगर उन्हें लंबे समय तक धूप में रहना पड़ता है।
5. बच्चों को आरामदायक जूते न पहनाना – गर्मियों में बच्चे अक्सर खुले जूते या सैंडल पहनते हैं, जो आरामदायक नहीं हो सकते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल जाते समय बंद जूते पहनाने चाहिए जो उनके पैरों को सहारा दें और उन्हें चोट से बचाएँ।
6. बच्चों को पौष्टिक भोजन न देना – गर्मियों में बच्चों को पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है ताकि वे सक्रिय और स्वस्थ रह सकें। माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल के लिए पौष्टिक भोजन पैक करना चाहिए, जैसे फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज और प्रोटीन।
7. बच्चों को पर्याप्त नींद न लेने देना- गर्मियों में बच्चे अक्सर देर तक जागते हैं और सुबह देर से उठते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों को पर्याप्त नींद लेने के लिए एक नियमित नींद का कार्यक्रम बनाए रखना चाहिए, भले ही वे गर्मियों की छुट्टियों पर हों।
8. बच्चों को बहुत अधिक स्क्रीन टाइम – गर्मियों में बच्चे अक्सर टीवी, वीडियो गेम और सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करना चाहिए और उन्हें अन्य गतिविधियों, जैसे पढ़ना, खेलना और बाहर समय बिताना, में शामिल करना चाहिए।
9. बच्चों की गतिविधियों की योजना न बनाना – गर्मियों की छुट्टियां बच्चों के लिए नई चीजें सीखने और नई गतिविधियों का अनुभव करने का एक शानदार समय है। माता-पिता को अपने बच्चों के लिए गतिविधियां, जैसे शिविर, कक्षाएं और कार्यक्रम, की योजना बनानी चाहिए ताकि वे व्यस्त और व्यस्त रहें।
10. बच्चों की सुरक्षा की उपेक्षा करना- गर्मियों में बच्चे अक्सर बाहर अधिक समय बिताते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। माता-पिता को अपने बच्चों को अजनबियों से बात न करने, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर सावधान रहने और हमेशा एक वयस्क की निगरानी में रहने के लिए शिक्षित करना चाहिए। गर्मियों में बच्चों को स्कूल भेजते समय इन सामान्य गलतियों से बचकर, माता-पिता अपने बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा को सुनिश्चित कर सकते हैं। कुछ सावधानियों और योजनाओं के साथ, बच्चे गर्मियों में स्कूल का आनंद ले सकते हैं और सीख सकते हैं।