कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज में नए दाखिला लिए विद्यार्थियों को कॉलेज की विभिन्न गतिविधियों और कलेक्टिव्स के विषय में जानकारी दी गई। सीनियर विद्यार्थियों ने अपने जूनियर विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें अपने परिवार में शामिल किया गया। रेक्टर और डीन प्रोफेसर दिलीप शाह ने स्वागत वक्तव्य में कहा कि यहां कक्षा से इतर आप अपनी रुचि और प्रतिभा को पहचान दे सकते हैं।
इस वर्ष, भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज ने” ” में कदम रखा है जो विद्यार्थियों के लिए अद्वितीय सफलता और खोज का समय है। कॉलेज में अवसरों, दोस्ती, सीखने, विकास, चुनौतियों, यादों, विविधता, मनोरंजन, आत्म-खोज, अनुभव, रोमांच और व्यक्तिगत विकास की दुनिया का अन्वेषण करने का समय है।
पर्पल पैच से जुड़ें क्योंकि हम ऐसी यादें बनाते हैं जो जीवन भर याद रहेंगी।
अट्ठारह कलेक्टिव ही वे विषय हैं जो किसी विशिष्ट प्रतिभा संपन्न विद्यार्थी को उसके चयनित विषय को आगे बढ़ाने में सहायक बनते हैं। इस ओरिएंटेशन प्रोग्राम की थीम द पर्पल पैच ओरिएंटेशन 2024 रखा गया। सिर्फ कक्षा तक की शिक्षा पर्याप्त नहीं होती बल्कि समय की मांग के अनुसार कोर्सेज सीख सकते हैं। यही पर्पल पैचैज हैं, जो शिक्षा में कई विंडों खोल सकते हैं, आगे बढ़ने के प्रतीक हैं जिन्हें आप स्वयं प्राप्त कर सकते हैं।नये दाखिला लिए विद्यार्थियों के स्वागत में फ्लेम और क्रिसेंडो कलेक्टिव ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए और कॉलेज का भ्रमण करवाया गया। कॉलेज की परंपराओं से रूबरू करवाया गया। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने प्लेसमेंट के विषय में विस्तार से जानकारी दी। प्रो दर्शना त्रिवेदी ने विभिन्न कोर्सेज का परिचय दिया और क्यू आर से किस प्रकार अपने विषयों का चयन करना है ,विस्तार से बताया। सभी कलेक्टिव के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने कलेक्टिव के उद्देश्य और गतिविधियों को समझाया।
ग्रुप ए में आर्ट एंड मी, इनएक्ट, फ्लेम्स, क्रिसेंडो, फैशनिस्टा स्टार ग्रुप बी में इकोनॉमिक, स्टूडेंट शेयर स्किल, सेल्यूलाइड, एक्सप्रेशन, बीईएसटी, ग्रुप सी में सेतु, क्विजार्ड, बीईएससी ए ओ एन, वॉक्स पॉपुली, बुल्स आई, ग्रुप डी में एनएसएस,नेशनल सर्विस स्कीम, एनसीसी, नेशनल कैडेट कॉर्पस्, पावर आवर हैं। प्रत्येक ग्रुप से एक ही में रजिस्ट्रेशन हो सकता है। क्यू आर से अॉन-लाइन पर सभी विद्यार्थियों ने फार्म भरा और कॉलेज को ईमेल किया।
कैरियर कनेक्ट में 11 अल्प अवधि कोर्सेज है जिसमें ए सी सी ए( एसोसिएशन अॉफ चार्टर्ड सर्टिफाइड एसोसिएशंस), डायनामिक अॉफ कैपिटल मार्केट की 12 क्लासेस, डिजिटल मार्केटिंग 3 महीने, वर्किंग विद जीएसटी 15 क्लासेस, एमएस ऑफिस वर्कशॉप 15 क्लासेस, गूगल वर्क स्पेस 15 क्लासेस, टैली प्राइम 15 क्लासेस, पब्लिक स्पीकिंग 15 क्लासेस, फास्ट्रेक जीके बूस्टर 15 क्लासेस, क्वेस्ट फॉर क्वांट्स 15 क्लासेस, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन 3 महीने, कैम्पस में खेल के लिए एथलेटिक मीट बॉयज और गर्ल्स के साथ बैडमिंटन, बास्केटबॉल, बॉक्सिंग, चेस, क्रिकेट, जिमनास्टिक, हैंडबॉल, दोनों के लिए है। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने करियर कनेक्ट और प्लेसमेंट के विषय पर अपनी बात रखी।कक्षाओं में नियमित रूप से कक्षाएं होती हैं लेकिन कुछ अलग से करने के लिए एक पद्धति है जो कलेक्टिव में काम करती हैं।
डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज में ओरिएंटेशन 24 का कार्यक्रम चौदह चरणों में किया गया जिसमें बीए बीकॉम बीएससी के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। ओरिएंटेशन 24 कार्यक्रम विद्यार्थियों द्वारा आयोजित किया गया जिसमें संचालन, संयोजन, रिपोर्ट, फोटोग्राफी ,व्यवस्था, सभागार सज्जा आदि विभिन्न स्तरों की गतिविधियां शामिल रहीं।
भवानीपुर कॉलेज में नए दाखिल विद्यार्थियों दि पर्पल पैच ओरिएंटेशन 2024 संपन्न
भगवान श्रीकृष्ण की ‘बेट द्वारका’ का होगा विश्वस्तरीय कायाकल्प
57 वर्षीय शख्स ने घर-बार बेचकर 500 अनाथ बच्चों को पढ़ाया
अब 183 बने वकील और इंजीनियर
नयी दिल्ली । 57 वर्षीय बलराम करण 500 अनाथ बच्चों के लिए माता-पिता की भूमिका निभा रहे हैं। पिछले 30 वर्षों से वे इन बच्चों की देखभाल कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी दुकान, घर और जमीन तक बेच दी। पैसे की कमी होने पर उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों से मदद भी मांगी। आज इनमें से 183 बच्चे आत्मनिर्भर हो चुके हैं। कुछ इंजीनियर बने हैं, कुछ वकील और कुछ नर्स हैं। बलराम करण की यह प्रेरणादायक कहानी 1995 से शुरू हुई, जब 27 साल की उम्र में उन्होंने पहला अनाथ बच्चा अपने घर लाया। 2004 में जर्मनी में रहने वाले प्रवासी बंगाली विमल राय ने अनाथ बच्चों के लिए अपनी मां, पिता और बहन के नाम पर 50 लाख रुपए की मदद दी और 3 इमारतें बनवाने के लिए कहा। अब 20 बीघा जमीन पर पूरा आश्रम है। यहां रहने वाले बच्चे अब आश्रम के लिए दान भी भेजते हैं। इसके अलावा बीरभूम और बर्दवान में भी उनके आश्रम स्थापित हैं। बलराम करण बताते हैं कि एक दिन जब वे कहीं जा रहे थे, उन्होंने देखा कि 2-3 साल का बच्चा कूड़ेदान से खाना निकालकर खा रहा था। यह देखकर वे बहुत प्रभावित हुए और उसे अपने घर ले आए। उनकी पहले से ही 3 बेटियां और एक बेटा था और गुजारा मुश्किल से होता था, फिर भी वे जहां भी अनाथ बच्चा देखते उसे अपने घर ले आते। बलराम ने तस्करी की शिकार गर्भवती युवती को भी अपनी बहू बनाया। वे बताते हैं कि उस युवती को अपने बच्चे के स्कूल में भर्ती करवाने के लिए पिता का नाम चाहिए था। इसलिए उन्होंने अपने बेटे के साथ 2020 में उसकी शादी करवा दी। आज उसका पोता छह साल का हो चुका है। बलराम ने आश्रम में पली 49 युवतियों का कन्यादान पिता की तरह किया है। यह आश्रम ही उनके लिए मायका बन गया है। बिहार की रहने वाली शीतल और राधी यादव, जो 4 और 3 साल की उम्र से यहां रह रही हैं, अब सफल हो चुकी हैं। शीतल की छोटी बहन कलकत्ता हाईकोर्ट में वकालत कर रही है, जबकि शीतल को कोलकाता के आरएन टैगोर अस्पताल में नौकरी मिली है।
युवा सपने..समाज और स्मार्ट फोन की आभासी दुनिया
साहित्य व संस्कृति के रंग से सजी मुंशी प्रेमचंद जयंती





कॉलेज के छात्रों गुनगुन गुप्ता, कुमकुम जायसवाल और संजिनी राय ने काव्य आवृत्ति एवं नृत्य प्रस्तुति की। कार्यकम का कुशल संचालन तमोघ्ना दत्त ने किया और धन्यवाद ज्ञापन गौतम दास ने किया। मंच पर उपस्थित थे आंतरिक गुणवत्ता और आश्वासन प्रकोष्ठ को-ऑर्डिनेटर प्रो. रमा दे नाग, एक्सटेंडेड कैंपस की प्रभारी प्रो. मर्सी हेंब्रम, अरुण कुमार बनिक, डॉ. अरूप बख्शी, कावेरी कर्मकार, पूजा मुखर्जी, सोनाली चक्रवर्ती आदि के साथ तृणमूल छात्र परिषद के भूषण प्रसाद सिंह, आनंद रजक, अमित सिंह, सुष्मिता सिंह आदि छात्र उपस्थित थे।
अपने अधिकारों के प्रति जागरुक हों महिलाएं-प्रतिभा सिंह
रक्षाबंधन पर बना लें यह मिठाइयां
इंद्र देव सहित इन भगवानों ने भी निभाया था राखी का रक्षा वचन
सावन माह की पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है। इस बार 19 अगस्त 2024 सोमवार के दिन यह त्योहार मनाया जाएगा। बहन अपने भाई की कलाई पर राखी यानी रक्षा सूत्र बांधती है जिससे भाई की रक्षा होती है और तब भाई भी बहन को रक्षा का वचन देता है। प्राचीन काल या पौराणिक काल में इस राखी के बंधन को भगवानों ने भी निभाया था, जानते हैं ऐसे ही किस्सें।
1. सबसे पहले भगवान इंद्र अपना राज्य असुर वृत्रा के हाथों गंवाने के बाद उसके विरुद्ध जब युद्ध के लिए जाने लगे तो भगवान बृहस्पति के अनुरोध पर इंद्र देव की पत्नी सचि ने उन्हें रक्षासूत्र बांधकर संग्राम में विजय होने के साथ-साथ उनकी रक्षा की प्रार्थना की थी। इंद्र ने इस बंधन की लाज रखी और वृत्तासुर को हराकार घर लौटे।
2. येन बद्धो बलिः राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥ इस श्लोक का हिन्दी भावार्थ है- “जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बांधती हूं, तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न होना।”
दरअसल, भगवान वामन ने महाराज बलि को वचन के सूत्र में बांधकर उससे तीन पग भूमि मांगकर उन्हें पाताललोक का राजा बना दिया तब राजा बलि ने भी वर के रूप में भगवान से रात-दिन अपने सामने रहने का वचन भी ले लिया था। भगवान को वामनावतार के बाद पुन: लक्ष्मी के पास जाना था लेकिन भगवान ये वचन देकर फंस गए और वे वहीं रसातल में बलि के यहां रहने लगे। उधर, इस बात से माता लक्ष्मी चिंतित हो गई। ऐसे में नारदजी ने लक्ष्मीजी को एक उपाय बताया। तब लक्ष्मीजी ने राजा बलि को राखी बांधकर अपना भाई बनाया और अपने पति को अपने साथ ले आईं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। तभी से यह रक्षा बंधन का त्योहार प्रचलन में हैं।
3. एक और वृत्तांत के अनुसार यमराज की बहन यमुना ने राखी बांध कर उन्हें अजरता और अमरता के वरदान से संपूर्ण किया था।
4. शिशुपाल का वध करते समय सुदर्शन चक्र से भगवान श्रीकृष्ण की तर्जनी में चोट आ गई थी तो कहते हैं कि द्रौपदी ने लहू रोकने के लिए अपनी साड़ी फाड़कर उनकी अंगुली पर बांध दी थी। यह द्रोपदी का बंधन था। इसके बाद जब द्रौपदी का जब चीरहरण हो रहा था तब श्रीकृष्ण ने इस बंधन का फर्ज निभाया और द्रौपदी की लाज बचाई थी।
5. जब युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूं, तब कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिए राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी।
(साभार – वेबुदुनिया)
आरजीकर कांड : न्याय की मांग आधी रात सड़क पर उतरी नारी शक्ति
कोलकाता। कोलकाता के सरकारी आरजी कर अस्पताल की स्नातकोत्तर प्रशिक्षु महिला चिकित्सक के साथ दुष्कर्म व उसकी हत्या की घटना के खिलाफ कोलकाता व राज्य के जिलों में बुधवार आधी रात को महिलाएं-लड़कियां सड़कों पर उतरीं और उन्होंने न्याय की मांग की। इस विरोध प्रदर्शन में पुरुष भी शामिल थे। जिस अकेली युवती के आह्वान पर आधी रात को सड़कों पर महिलाएं उतरीं उनका नाम रिमझिम सिन्हा है। प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा व वर्तमान शोधार्थी महिला चिकित्सक से साथ दुष्कर्म व हत्या की घटना का इंसाफ चाहती हैं। पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बलात्कार-हत्या की घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने पीड़िता को श्रद्धांजलि भी दी। दरअसल 10 अगस्त की रात को उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट करके लड़कियों से आधी रात को सड़क पर उतरने का आह्वान किया था। इसका उन्हें लड़कियों की ओर से जबरदस्त समर्थन मिला। इस कार्यक्रम का नाम लड़कियां रात पर कब्जा करें दिया गया था। कार्यक्रम का नारा था स्वंतत्रता दिवस की आधी रात महिलाओं की आजादी के लिए। लड़कियों ने इस कार्यक्रम के लिए अनेक वाट्सएप ग्रुप बनाया था। कोलकाता में कॉलेज स्ट्रीट से लेकर बागुईआटी से लेकर न्यूटाउन से लेकर श्यामबाजार की सड़कों पर सैलाब उमड़ा। देश भर में इस आन्दोलन की गूंज सुनाई दी और महिलाओं का ऐतिहासिक विरोध भी दर्ज हुआ।




