नयी दिल्ली। देश में बढ़ती मधुमेह, कैंसर, हृदय, किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियों जैसे- गैर संक्रामक रोगों को देखते हुए सरकार अगले 5 सालों में फार्मा और बायो‑टेक सेक्टर के विकास में 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए सरकार जांच और शुरुआती इलाज पर विशेष ध्यान देगी ताकि लोगों को इन बीमारियों से बचाने की क्षमता को मजबूत किया जा सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में अपने बजट भाषण में कहा कि देश में रोग‑भार लगातार बढ़ रहा है और अब यह ज्यादातर गैर‑संक्रामक रोग यानी डायबिटीज, कैंसर, हृदय संबंधी बीमारी, किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियों की तरफ झुक रहा है। इसी वजह से सरकार का पूरा ध्यान रोकथाम, जांच और शुरुआती इलाज पर रहेगा ताकि लोगों को इन बीमारियों से बचाने की क्षमता मजबूत हो सके। वित्त मंत्री कहा कि अगले पांच साल में 10 हजार करोड़ रुपये बायो‑फार्मा सेक्टर के विकास पर खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, टीका निर्माण और उन्नत उपचार पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। साथ ही औषधीय शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए तीन नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान(एनपीईआरएस) स्थापित किए जाएंगे, जिनसे गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास, अत्याधुनिक लैब सुविधाएं और वैश्विक प्रतिभा तैयार करने में मदद मिलेगी। सीतारमण ने कहा कि लगातार सुधारों और नीतियों के चलते देश ने 7 प्रतिशत की उच्च विकास दर हासिल की है। भारत अब विकसित भारत की दिशा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है और यह यात्रा लगातार जारी रहेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक सिद्धांत मानते हुए सरकार ने घरेलू विनिर्माण क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है। रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता, घरेलू क्रय शक्ति और सार्वभौमिक सेवाओं को बढ़ाने के लिए सुधार किए गए हैं। इन उपायों से गरीबी कम करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने में अहम प्रगति हुई है।
बजट 2026 : देश में खोले जायेंगे 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान
नयी दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी अहम घोषणाएं की हैं। जिसके तहत देश में 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोले जाएंगे। अभी इनकी जगह नहीं बताई गई है। इसके साथ बेहतर मानसिक स्वास्थ्य इलाज के उद्देश्य से वित्त मंत्री ने निमहंस 2.0 स्थापना की घोषणा की जो देश के लिए प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के तौर पर काम करेगा। इसके साथ ही उत्तर भारत में दो मानसिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की घोषणा की गई। निर्मला सीतारमण ने भारत को मेडिकल टूरिज्म हब के तौर पर बढ़ावा देने के लिए देश में 5 रीजनल हब स्थापित करने में मदद की योजना का प्रस्ताव रखा। इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी, प्रशिक्षण और शोध को मजबूती मिलेगी और मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके अलावा 5 साल में एक लाख विशेषज्ञ हेल्थकेयर प्रोफेशनल बनेंगे। 1.5 लाख केयर गिवर्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नॉन कॉम्यूनिकेबल डिजिज की दवाइयों की कीमत सस्ती की जाएगी। इसमें कैंसर की दवाओं पर जोर दिया गया है। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने केंद्रीय बजट में देशभर में तीन नए एआईआईए स्थान खोले जाने की घोषणा को लेकर कहा कि यह गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल को सशक्त बनाएगा।
बजट : अब 31 मार्च तक जमा कर सकेंगे संशोधित आईटीआर
नयी दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में अपने बजट भाषण में संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा को बढ़ाकर 31 दिसंबर से 31 मार्च करने का प्रस्ताव किया। आयकरदाता मामूली शुल्क के भुगतान के साथ इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। सीतारमण ने अपने बजट भाषण में इसके साथ ही उदारीकृत प्रेषण योजना के तहत शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के मामले में लगने वाले स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) की दर को पांच फीसदी से घटाकर दो फीसदी करने का भी प्रस्ताव किया है। इसके अलावा विदेश यात्रा पैकेज की बिक्री पर लगने वाले टीसीएस की दर को पांच फीसदी से घटाकर दो फीसदी करने की घोषणा की गई। यह दर पहले 20 फीसदी थी। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में छोटे करदाताओं के लिए नियम-आधारित स्वचालित प्रक्रिया का भी प्रस्ताव रखा। सीतारमण ने अपने बजट भाषण में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजा को कर से छूट देने के प्रस्ताव की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल से लागू होगा और इसके नियम एवं कर रिटर्न फॉर्म जल्दी ही अधिसूचित किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने लगातार 9वीं बार बजट पेश किया। उल्लेखनीय है कि 1 अप्रैल से आयकर अधिनियम, 2025 लागू हो जाएगा, जो छह दशक पुराने कर कानून का स्थान लेगा। 2026-27 के केंद्रीय बजट में कर कानूनों में किए गए बदलावों को नए कानून में शामिल किया जाएगा।
भवानीपुर कॉलेज द्वारा गणतंत्र दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम
कोलकाता । भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी और भवानीपुर कॉलेज के तत्वावधान में गणतंत्र दिवस का आयोजन किया गया जिसमें कॉलेज के अध्यक्ष रजनीकांत दानी ने सभी विद्यार्थियों शिक्षक शिक्षिकाओं और अतिथियों का स्वागत करते हुए 77 वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी अध्यक्ष रजनीकांत दानी के साथ रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह रेणुका भट्ट, नलिनी पारेख, बृजभूषण सिंह(भवानीपुर स्कूल के प्रिंसिपल), राजू भाई, उमेश भाई ठक्कर आदि मैनेजमेंट पदाधिकारीगण की उपस्थिति में झंडा फहराया गया। साथ में तीनों रंगों के गुब्बारे उड़ाए गए ।
कॉलेज के जल थल वायु एनसीसी कैडेट और भवानीपुर स्कूल के बच्चों ने मार्च पास्ट द्वारा झंडे को सलामी दी।
इस अवसर पर सीओ कमांडर मृण्मय घोष कमांडिंग ऑफिसर 2 बंगाल नेवल यूनिट एनसीसी ने कॉलेज के एनसीसी कैडेटों को सम्मानित किया और रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह को आईएनएस इंफाल शिप की प्रतिकृति उपहार में भेंटस्वरूप प्रदान की ।इस पावन अवसर पर कार्यक्रम के अनुरूप नाटक, नृत्य और गीत आदि विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने गणतंत्र दिवस से संबंधित प्रश्न भी पूछे। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
विमान हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का निधन
मुम्बई । महाराष्ट्र की राजनीति में ‘दादा’ के नाम से मशहूर और प्रभावशाली नेता अजीत अनंतराव पवार का 28 जनवरी, बुधवार को एक दु:खद विमान हादसे में निधन हो गया। मुंबई से बारामती जा रहा उनका चार्टर्ड विमान लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें अजीत पवार सहित विमान में सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। डीजीसीए ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। हादसा बारामती एयरपोर्ट के पास हुआ, जहां विमान रनवे से उतरकर क्रैश हो गया और आग लग गई। अजित अनंतराव पवार, महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली हस्ती थे। वे अपनी प्रशासनिक दक्षता, बेबाक बोलने की शैली और राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार देने में अपनी हालिया भूमिका के लिए जाने जाते थे। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री के पद पर थे—यह उनका छठा गैर-लगातार कार्यकाल था। 2024 में चुनाव आयोग ने उनके गुट को “असली” एनसीपी मान्यता दी थी और पार्टी का नाम और “घड़ी” चिन्ह सौंपा। वे वित्त, योजना जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे थे और राज्य के वित्तीय प्रबंधन में उन्होंने खासी कुशलता दिखाई। अजित पवार बारामती विधानसभा से 1991 से लगातार सात बार विधायक चुने गए, हर चुनाव में भारी अंतर से जीते। उनका आधार सहकारी क्षेत्र में मजबूत था—16 साल तक पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे, चीनी मिलों और दूध संघों पर गहरा प्रभाव। विभिन्न मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में जल संसाधन, बिजली, ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख विभाग संभाले। उनका राजनीतिक सफर साहसिक फैसलों से भरा रहा। नवंबर 2019 में फडणवीस के साथ मात्र 80 घंटे की सरकार बनाई, फिर चाचा शरद पवार के पास लौटे। जुलाई 2023 में एनसीपी में विभाजन कर शिंदे सरकार में शामिल हुए, जिसने शरद पवार के 25 साल के नेतृत्व को चुनौती दी। अजीत पवार सुबह 6.00 बजे ही अपना दिन शुरू करने और मौके पर ही फैसले लेने के लिए जाने जाते थे। उनकी पब्लिक इमेज एक ऐसे नेता की थी जो साफ़-साफ़ बात करते थे – अक्सर नागरिकों को गोलमोल वादे करने के बजाय तुरंत “हां” या “नहीं” बताते थे। हालांकि अजित पवार सालों से राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ बनाने में कामयाब रहे, लेकिन उनका करियर विवादों से भी घिरा रहा, जैसे 70,000 करोड़ का सिंचाई घोटाला और महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक मामले, लेकिन उन्होंने आरोपों से इनकार किया और कई क्लीन चिट मिलीं।
विजय आनंद : दर्शकों के दिलों पर छोड़ी छाप
हिंदी सिनेमा में कुछ नाम ऐसे हैं, जो केवल अपनी फिल्मों से ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी शैली से भी हमेशा याद रहते हैं। विजय आनंद, जिन्हें गोल्डी आनंद के नाम से भी जाना जाता था, ऐसे ही फिल्मकार थे। उन्होंने न केवल अपने निर्देशन और कहानी कहने के अंदाज से सिनेमा को नया रंग दिया, बल्कि वे अपने गानों में स्टाइलिश पिक्चराइजेशन के लिए भी हमेशा जाने जाते रहे। उनके गाने जैसे ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’, ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’, और ‘होंठों में ऐसी बात’ आज भी दर्शकों के दिलों में बसते हैं। उनका यह अंदाज उनकी फिल्मों के हर सीन में चमकता था और दर्शकों को एक अलग अनुभव देता था। विजय आनंद का जन्म 22 जनवरी 1934 को पंजाब के गुरदासपुर में हुआ था। उनके परिवार में पहले से ही फिल्मी माहौल था। उनके बड़े भाई चेतन आनंद एक प्रसिद्ध निर्देशक और प्रोड्यूसर थे, जबकि देव आनंद एक सुपरस्टार अभिनेता और निर्देशक के रूप में जाने जाते थे। ऐसे परिवार में पले-बढ़े विजय ने भी बचपन से ही कला और सिनेमा की ओर रुचि दिखाई। उनके पिता पिशोरी लाल आनंद एक सफल वकील थे। उनकी माता का बचपन में ही निधन हो गया था, इसलिए वे बड़े भाई और भाभी की छत्र-छाया में बड़े हुए।
विजय आनंद ने अपनी पढ़ाई मुंबई से की। कॉलेज के दिनों में उन्होंने अपनी भाभी उमा आनंद के साथ मिलकर एक स्क्रिप्ट लिखी, जो आगे चलकर फिल्म ‘टैक्सी ड्राइवर’ बनी। यह फिल्म 1954 में रिलीज हुई और इसे उनके बड़े भाई चेतन आनंद ने डायरेक्ट किया। इस फिल्म में देव आनंद मुख्य अभिनेता थे। इस अनुभव ने विजय आनंद को फिल्म इंडस्ट्री की बारीकियां समझने का मौका दिया।
विजय आनंद ने 23 साल की उम्र में अपनी पहली फिल्म ‘नौ दो ग्यारह’ डायरेक्ट की। उस समय कम उम्र में इतनी परिपक्वता देख सभी हैरान रह गए थे। उन्होंने केवल 40 दिनों में इस फिल्म की शूटिंग पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने ‘काला बाजार’, ‘तेरे घर के सामने’, और ‘गाइड’ जैसी फिल्में बनाईं। खासकर ‘गाइड’, जो आर.के. नारायण के उपन्यास पर आधारित थी, ने उन्हें और देव आनंद को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
उनकी फिल्मों की सबसे खास बात उनका गानों को दिखाने का अंदाज था। विजय आनंद हर गाने को एक कहानी की तरह पेश करते थे। चाहे वह रोमांटिक गाना हो या थ्रिलर सीन, उनका स्टाइलिश पिक्चराइजेशन हर बार दर्शकों को आकर्षित करता। ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’ में उनकी आधुनिकता और डांस की समझ साफ दिखाई देती है, जबकि ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ में भावनाओं और संगीत को पूरी तरह महसूस कराया गया। इसी तरह ‘होंठों में ऐसी बात’ में रोमांस और रहस्य का अद्भुत मिश्रण था, जो आज भी फिल्म प्रेमियों को याद है।
विजय आनंद ने केवल निर्देशक ही नहीं बल्कि अभिनेता, लेखक और संपादक के रूप में भी काम किया। उन्होंने ‘आगरा रोड’, ‘कोरा कागज’, ‘हकीकत’ और ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। 1990 के दशक में दूरदर्शन पर ‘तहकीकात’ नामक सीरियल में डिटेक्टिव सैम की भूमिका निभाकर उन्होंने टीवी दर्शकों के लिए भी अपने अभिनय का जादू दिखाया।
विजय आनंद को उनकी फिल्मों के लिए कई पुरस्कार मिले। ‘गाइड’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिला, वहीं ‘जॉनी मेरा नाम’ और ‘डबल क्रॉस’ जैसी फिल्मों के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संपादन और पटकथा के पुरस्कार भी मिले।
कामयाबी के बीच विजय आनंद ने अपने जीवन में कठिन दौर भी देखे। कई फिल्मों की असफलता और व्यक्तिगत परेशानियों के चलते वे डिप्रेशन का शिकार हो गए और कुछ समय के लिए ओशो के शरण में चले गए। आध्यात्मिक समय ने उन्हें मानसिक शांति दी, लेकिन 23 फरवरी 2004 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।
छात्राओं के लिए बनें अलग शौचालय : सुप्रीम कोर्ट
-करें मुफ्त सैनेटरी पैड की व्यवस्था
– राज्यों को जारी किया निर्देश
नयी दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया है कि देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाली लड़कियों को मुफ्त सैनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं। यह फैसला मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि छात्राओं का अधिकार है कि उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक माहौल मिले। कोर्ट ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे अलग-अलग जेंडर के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था करें और वहां पूरी प्राइवेसी सुनिश्चित करें। साथ ही, दिव्यांग छात्रों के अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाए। अदालत ने यह भी कहा है कि स्कूलों के टॉयलेट के अंदर मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड :उपलब्ध होने चाहिए। ये पैड मशीनों के माध्यम से या स्कूल परिसर में तय किए गए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा छात्राओं को दिए जाएं ताकि किसी तरह की झिझक या परेशानी न हो।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने सभी स्कूलों में ‘मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन कॉर्नर’ बनाने का निर्देश दिया है। इन कॉर्नर में मासिक धर्म से जुड़ी सभी जरूरी चीजें और जानकारी उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि छात्राएं खुद को सुरक्षित और जागरूक महसूस कर सकें।
अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे तीन महीने के भीतर रिपोर्ट दें और बताएं कि इस फैसले को जमीन पर कैसे लागू किया गया है। साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर एक नीति बनाने को भी कहा है ताकि देशभर में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।
यह याचिका मध्य प्रदेश की सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर ने दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को मुफ्त सैनेटरी पैड और अन्य मेंस्ट्रूअल प्रोडक्ट उपलब्ध कराए जाएं ताकि किसी भी छात्रा की पढ़ाई सिर्फ इस वजह से न रुके।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी कहा कि वे मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर अपने-अपने स्तर पर जो योजनाएं और फंड से चलने वाली नीतियां हैं, उनकी जानकारी केंद्र सरकार को दें।
यूजीसी की नयी नियमावली पर सुप्रीम रोक
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए रेगुलेशन पर फिलहाल रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर हमने इस मामले में दखल नहीं दिया, तो समाज में विभाजन होगा। इसके नतीजे खतरनाक होंगे। कोर्ट ने यूजीसी और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन में जो शब्द इस्तेमाल किए गए हैं, उनसे यह लगता है कि इस रेगुलेशन का दुरुपयोग किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक देश के रूप में हमने 75 साल बाद जातिविहीन समाज बनने की दिशा में जो कुछ भी हासिल किया है, क्या हम वापस उधर ही लौट रहे हैं। क्या हम एक प्रतिगामी समाज बनते जा रहे हैं। उच्चतम न्यायालय में राहुल दीवान और वकील विनीत जिंदल के अलावा भी कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं। विनीत जिंदल की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि ये नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण है, उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने वाले हैं। याचिका में उच्चतम न्यायालय से मांग की गई है कि यूजीसी रेगुलेशंस 2026 की नियमावली 3(सी) को लागू करने पर रोक लगाई जाए। 2026 के नियमों के अंतर्गत बनाई गई व्यवस्था सभी जाति के व्यक्तियों के लिए लागू हो। याचिका में कहा गया है कि इन नियमों की आड़ लेकर सामान्य वर्ग से आने वाले छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ झूठी और दुर्भाग्यपूर्ण शिकायत भी हो सकती है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने ‘एक्स’ पर लिखा, “यूजीसी पर गाली देने वाले सभी ज्ञानी, पिछले 2 दिनों से संसद जा रहा हूं। किसी राजनीतिक दल के किसी सदस्य ने इस पर चर्चा तक करना मुनासिब नहीं समझा? उल्टा जिस सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण देकर गरीब की सुध ली, उसी को गाली।” चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। चीफ जस्टिस ने कहा कि रेगुलेशन में इस्तेमाल किए गए शब्दों से यह संकेत मिलता है कि इसके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि अदालत समाज में एक निष्पक्ष और समावेशी माहौल बनाने पर विचार कर रही है।
भवानीपुर कॉलेज में 55 शिक्षकों शिक्षिकाओं को सरस्वती सम्मान
कोलकाता । भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज में 55 शिक्षकों शिक्षिकाओं को सरस्वती सम्मान प्रदान किया गया।
या कुदेंदु तुषार हार धवला मंत्रोच्चार और माँ सरस्वती की आरती से भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज का वालिया सभागार गूंज उठा । साथ में वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर शंखनाद प्रतियोगिता की गई जिसमें कई विद्यार्थियों और फेकल्टी ने भाग लिया। संस्कृत श्लोक, सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा में छात्र छात्राओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
माँ सरस्वती की पूजा अर्चना में कॉलेज के अध्यक्ष रजनीकांत दानी,उपाध्यक्ष श्री मिराज डी शाह, शिबानी डी शाह, रेणुका भट्ट, नलिनी पारेख, जीतू भाई, उमेश भाई ठक्कर आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और नृत्य प्रस्तुत द्वारा की गई। इस अवसर पर कॉलेज के पीएचडी पूर्ण करने वाली फेकल्टी को, शोध आलेख लिखने वाले एवं पुस्तक प्रकाशित होने पर फेकल्टी को शॉल धनराशि और उपहार प्रदान किए गए।वसंत पंचमी के पावन पर्व पर डाॅ वसुंधरा मिश्र ने सरोद वादन किया जिसका सभी श्रोताओं ने आनंद लिया ।
वाइस प्रिंसिपल प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी और रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह के संयोजन में सभी कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।सभी सदस्यों और विद्यार्थियों ने मॉं की पूजा-अर्चना कर महाप्रसाद भोग ग्रहण किया।भोग में फल और लड्डू और महाप्रसाद में खिचड़ी बैगुनी लेबरा आलू गोभी की सब्जी पूड़ी पापड़ कूल की मीठी चटनी और गुलाबजामुन था ।इस आयोजन में गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का विशेष योगदान रहता है। अंत में सभी विद्यार्थियों ने डीजे का आनंद भी उठाया। जानकारी दी भवानीपुर कॉलेज से डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
पंच सरोवर : भारत के पांच पवित्र जल तीर्थ
भारत की आध्यात्मिक परंपरा में जल को जीवन, शुद्धि और मोक्ष का माध्यम माना गया है। इसी आस्था से जुड़े हैं भारत के पांच पवित्र सरोवर, जिन्हें पंच सरोवर कहा जाता है। ये सरोवर सिर्फ पानी के स्रोत नहीं हैं, बल्कि हजारों साल पुरानी मान्यताओं, पुराणों और साधना की जीवंत मिसाल हैं। माना जाता है कि इन सरोवरों में स्नान करने से व्यक्ति के पाप कटते हैं, मन शुद्ध होता है और आत्मा को शांति मिलती है। राजस्थान के पुष्कर में स्थित पुष्कर सरोवर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में गिना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा के हाथ से यहां एक कमल का फूल गिरा था, जिससे इस सरोवर की उत्पत्ति हुई। कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। पुष्कर सरोवर के किनारे स्थित भगवान ब्रह्मा का एकमात्र मंदिर इस स्थान को और भी खास बना देता है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां मोक्ष की कामना लेकर आते हैं।
कैलाश पर्वत के पास स्थित मानसरोवर को भगवान शिव का धाम माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस सरोवर का निर्माण भगवान ब्रह्मा ने किया था और माता पार्वती यहां स्नान करती थीं। इसका जल अत्यंत शीतल और मीठा माना जाता है। केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म में भी मानसरोवर को बेहद पवित्र स्थान माना गया है। यहां तक पहुंचना कठिन जरूर है, लेकिन जो श्रद्धालु पहुंचते हैं, वे इसे जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव मानते हैं।
गुजरात के कच्छ जिले में स्थित नारायण सरोवर भगवान विष्णु से जुड़ा पवित्र तीर्थ है। मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान विष्णु ने स्नान किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कभी सरस्वती नदी का प्रवाह यहां तक आता था और इस सरोवर का जल उसी पवित्र धारा से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नारायण सरोवर में डुबकी लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गुजरात के पाटन जिले में स्थित बिंदु सरोवर को मातृ गया तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। यहां विशेष रूप से महिलाओं के लिए श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा है। मान्यता है कि इससे मातृ आत्मा को शांति मिलती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि कर्दम ने भगवान विष्णु के दर्शन के लिए यहीं हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी।
कर्नाटक में हंपी के पास स्थित पंपा सरोवर रामायण काल से जुड़ा हुआ है। यही वह स्थान माना जाता है जहां शबरी ने वर्षों तक भगवान राम की प्रतीक्षा की थी। यह क्षेत्र किष्किंधा से जुड़ा माना जाता है। शांत वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर पंपा सरोवर आज भी भक्तों को ध्यान और भक्ति की अनुभूति कराता है।




