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रचनाकार: फणीश्वरनाथ रेणु |
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रचनाकार: फणीश्वरनाथ रेणु |
ओ मेरी प्यारी बिटिया
ओ मेरी सोन चिरैया
आज महिला दिवस पर
चारों ओर गूंज रहे हैं नारे
रोशनी और आनंद के फौव्वारे
पट गया हैबाजार कीमती उपहारों से
आह्लादित हैं महिलाएं इन कारबारों से
पर तुम न समझना इसे अपनी सफलता
मेरी रानी यह नहीं है वह रास्ता
जिस पर चलकर पाओगी अपनी मंजिल
इन चोंचलों से कुछ भी न होगा हासिल।
ओ मेरी नन्हीं परी
ओ मेरी प्यारी कली
यह सब तमाशा है
बस घड़ी दो घड़ी।
ध्यान सेदेखो मेरी बिटिया
कल जिन लड़कियों/ औरतों ने
रखा था व्रत शिवरात्रि का
अच्छा वर पाने की कामना से
परिवार कल्याण की भावना से
और सोलह श्रृंगार कर
खिंचवाकर तस्वीरें
आकर्षक भंगिमा में
अपने – अपने देवताओं के साथ
हुलसते हुए बांटा था
सोशल मीडिया में गर्व के साथ।
आज वे ही सारी स्त्रियां
निकल पड़ी हैं
हाथों में मशाल लेकर
सड़कों और चौराहों पर,
गरज रही हैं मंचों पर।
लादी जा रही हैं फूल मालाओं से
बहलाई जा रही हैं अभिनंदन पत्रों से।
गर्वित हैं आज जो अपने साफल्य पर
कल फिर से ढकेल दी जाएंगी
अपने अपने घरों में,
दहलीज की सीमा के अंदर
जहाँ अपनी अपनी खिड़कियों से
अपने हिस्से का आकाश निहारती
अपनी सिसकियों को हृदय में दबाती
सारे तीज त्योहार खुशी खुशी मनाती
पति ,बेटे और परिवार की मंगल कामना के गीत गाती
बेटियों को कोख में ही दफनाती
इंतजार करेंगी वास्तविक मुक्ति के दिन का।
ओ मेरी बिटिया
कभी इस छद्म मुक्ति के भुलावे में मत पड़ना,
अपनी आजादी उधार या सौगात में न मांगना।
उसे हासिल करना अपने दम खम से
अपनी ही शर्तों पर।
और अपनेसाथ साथ मुक्त करना
अपनी तमाम सखियों और सखाओं को
क्योंकि मुक्ति का सही आनंद और आस्वाद
अपनी नहीं सबकी मुक्ति में है।
जहाँ मुक्त विचार और उदार आचार हो,
हर एक के लिए विकास का आधार हो।
जहाँ अर्गलाएं तन की ही नहीं
मन की भी कटकर गिरें
जहाँ हर मनु और मानवी को
अपने सपनों का घर मिले।
निर्भया, नयना और सोनी को न्याय मिले,
सत्ता का सुख और पद का आनंद ही नहीं
असहमति के लिए जगह और निर्णय का अधिकार मिले।
(कवियत्री स्कॉटिश चर्च कॉलेज की हिन्दी विभागाध्यक्ष हैं)
कोलकाता – गणगौर राजस्थान का ऐसा पर्व है जिसे महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ मनाती हैं और कोलकाता में भी यही उल्लास दिखायी पड़ता है। हाल ही में पूर्व कोलकाता माहेश्वरी सभा की ओर से यह पर्व पूरी श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर संस्था द्वारा आयोजित समारोह में टॉलीवुड की अभिनेत्री सुचंद्रा वानिया और जस्टिस अमिताभ लाला ने शिरकत की। गणगौर गौरी की प्रसन्नता का प्रतीक है और विवाहित महिलाएं अपने पति की लम्बी आयु की कामना के साथ यह पर्व मनाती हैं। यह पर्व इस साल 8 से 10 अप्रैल तक गणगौर सीआईटी पार्क में अपने पूरे उमंग पर दिखा। पूर्व कोलकाता माहेश्वरी सभा के उपाध्यक्ष हेमंत मारदा ने इस अवसर पर बताया कि संस्था का उद्देश्य युवाओं को परम्परा से जोड़ना है।
शाहजहांपुर। वैसे तो आमतौर पर अधिकारी किसी भी जगह अव्यवस्था दिखाई देने पर जिम्मेदारों को निर्देश देकर आगे निकल जाते हैं। लेकिन शाहजहांपुर के डीएम ने इससे आगे जाते हुए एक ऐसा कदम उठाया जिसकी पूरे जिले में प्रशंसा हो रही है।
दरअसल डीएम विजय किरण जिला अस्पताल का निरिक्षण करने पहुंचे थे। जब वो अधिकारियों से बात कर रहे थे तभी वहां एक मरीज की बहन आई जिसे एबी नेगेटिव ब्लड ग्रुप की जरूरत थी। युवती ने डीएम से से जब अपनी परेशानी बताई तो डीएम ने ब्लड बैंक में जाकर बात की जहां उन्हें बताया गया कि बैंक में इस ग्रुप का ब्लड उपलब्ध नहीं है।
इसके बाद डीएम ने ऑन ड्यूटी रहते हुए महिला की मदद के लिए कदम बढ़ाया और तुरंत अपना रक्त दिया। डीएम का ब्लड ग्रुप एबी नेगेटिव होने की वजह से उस मरीज के काम आ गया। डीएम के इस कदम की अब चारों तरफ प्रशंसा हो रही है।
आपका अवचेतन आपकी इच्छानुसार तभी फल देता है, जब आप उस पर पूरी आस्था रखते हैं। इच्छाएं तो आपकी अनंत होती हैं। आपके मन में जो भी विचार चलते हैं, वे आपकी अनगढ़ इच्छाएं ही होती हैं। इनका कोई सिर-पैर नहीं होता। हमेशा मन में बेलगाम घोड़े दौड़ते रहते हैं। इस प्रकार की इच्छाएं कभी फलवती नहीं होतीं।
विचार हमेशा चेतन मन में चलते हैं। प्रत्येक विचार का मन में एक मेंटल फ्रेम अथवा चित्र बनता है। बिना चित्र कोई विचार नहीं चलता। आपका अवचेतन प्रत्येक विचार को सत्य समझता तो है लेकिन उसी हद तक, जिस हद तक आपका विश्वास होता है। व्यर्थ के सभी विचार विश्वास से परे होते हैं।
जिस किसी भी विचार पर आपकी आस्था होती है, पूरा विश्वास होता है, आपका अवचेतन मन उस विचार अथवा छवि को वास्तविकता में बदल सकता है। संसार में प्रचलित सब धार्मिक सिद्धांत इसी विश्वास पर काम करते हैं।
कोई भी व्यक्ति जब पूरी आस्था से कोई कामना करता है, ईश्वर, अल्लाह या गॉड से प्रार्थना करता है तो वह प्रार्थना पूरी होती है। आपकी प्रार्थना अवश्य सुनी जाती है। लेकिन सुनता कौन है? कौन आपकी याचना को पूरा करता है? दरअसल कोई भी व्यक्ति जब पूरी आस्था से कोई कामना करता है, तो उसे सुनने वाला उसका अवचेतन मन ही होता है और वही फल देता है।
सवाल शुद्धता का
आपका अवचेतन मन आपकी इच्छा को तभी पूरी करता है, जब वह शुद्ध होती है, किसी का अहित नहीं चाहती। अवचेतन मन की शुद्धता, चेतन मन की शुद्धता पर निर्भर करती है। विचार और उनका चित्रण चेतन मन की प्रक्रिया है।
हर विचार का अपना चित्रण होता है। जिस प्रकार के चित्र आपके चेतन मन में चलते हैं और बार-बार दोहराए जाते हैं, उनकी प्रोग्रामिंग होकर आपके अवचेतन की हार्ड-डिस्क में परमानेंटली रिकॉर्ड हो जाती हैं।
इनकी रिकॉर्डिंग चित्रों के रूप में ही होती है। आपने देखा होगा कि सीडी अथवा डीवीडी पर भी तरंगों के रूप में ही चित्रों तथा ध्वनि की रिकॉर्डिंग होती है। अवचेतन मन की हार्ड डिस्क में चित्रों व ध्वनि के साथ-साथ कर्म व संस्कारों की भी रिकॉर्डिंग होती है, जिससे सुख अथवा दु:ख की अनुभूति होती है।
ये संस्कार ही आपकी कार्मिक शक्ति होते हैं। तदनुसार मन को कर्म करने के लिए प्रेरित करते हैं। यदि आपका दृष्टिकोण सकारात्मक है, तो आप अच्छे फल की आशा कर सकते हैं।
आज आप जो कुछ भी हैं, अपने कर्म-संस्कारों के कारण ही हैं। आपके संस्कार स्वयं ही आपके लिए ऐसी परिस्थिति उत्पन्ना कर देते हैं, जो आपकी इच्छाओं को पूर्ण करने का कारण बनते हैं। आपकी आशा आपके विश्वास को बल देती है। आशा और विश्वास ही आपके वास्तविक मित्र हैं। अपने विश्वास की शक्ति से आप मनचाहा प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र हैं। अत: आशावादी बनें। अपने विश्वास से अपनी इच्छाएं पूरी करें।
सब लोग अच्छा स्वास्थ्य, धन-दौलत, सुख और शांति की आकांक्षा रखते हैं। क्या यह सब कुछ हर व्यक्ति को उपलब्ध है? नहीं! ऐसा संभव भी नहीं। इच्छा करना, कामना करना और बात है, जबकि विश्वासपूर्वक याचना दूसरा ही पहलू है।
आपका अवचेतन मन तो अनादि काल से ही सर्वशक्तिमान, सर्वसामर्थ्यवान व सर्वदृष्टा रहा है। जब इस संसार में आज के धर्म व सम्प्रदाय नहीं थे, उस काल में भी मन इस आस्था से ही कार्य करता था।
आपका मन एक वाई-फाई की तरह कार्य करता है। वाई-फाई से काम लेने के लिए उससे कनेक्ट होना पड़ता है। कनेक्ट होने के लिए एक पासवर्ड की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार मन से कनेक्ट होने के लिए भी एक पासवर्ड चाहिए। मन के लिए तो एक ही पासवर्ड होता है और वह है ‘विश्वास।
कल समय की व्यस्तताओं से निकालूँगा समय कुछ
फिर भरुँगा खुद तुम्हारी माँग में सिन्दूर
मुझको माफ़ करना
आज तो इस वक्त काफी देर ऑफिस को हुई है
हाँ जरा सुनना वो मेरी पेंट है न
वो फटी है जो अकेले पाँयचों पर
तुम जरा उसमें लगाकर चन्द टाँके
शर्ट के टूटे बटन भी टाँक देना
इस तरह से, जो नई हर कोई आँके
कल थमे वातावरण से, मैं निकालूँगा प्रलय कुछ
ले चलूँगा फिर तुम्हें इस भीड़ से भी दूर
मुझको माफ करना
आज तो इस वक्त काफी देर, ग्यारह पर सुई है
क्या कहा, है आज पप्पू का जन्मदिन
तुम सुनो, ये बात पप्पू से न कहना
और दिन भर तुम उसी के पास रहना
यदि करे तुमको परेशां, मारना मत
और हाँ, तुम भी कहीं मन हारना मत
कल पराजय के जलधि से, मैं निकालूँगा विजय कुछ
फिर मनायेंगे जन्मदिन की खुशी भरपूर
मुझको माफ करना
आज तो ये जेब भी मेरी फटेपन ने छुई है
शीतल हवाएँ हैं
जो पिता के घर बहुत दिन तक नहीं रहतीं
ये तरल जल की परातें हैं
लाज़ की उज़ली कनातें हैं
है पिता का घर हृदय-जैसा
ये हृदय की स्वच्छ बातें हैं
बेटियाँ –
पवन-ऋचाएँ हैं
बात जो दिल की, कभी खुलकर नहीं कहतीं
हैं चपलता तरल पारे की
और दृढता ध्रुव-सितारे की
कुछ दिनों इस पार हैं लेकिन
नाव हैं ये उस किनारे की
बेटियाँ-
ऐसी घटाएँ हैं
जो छलकती हैं, नदी बनकर नहीं बहतीं
वो दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं में से एक हैं. आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक और सीईओ चंदा कोचर को पिछले तीन साल की तरह इस साल भी दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं में चुना गया है।
एक सफल कामकाजी महिला के तौर पर तो उन्हें हर कोई जानता है लेकिन उनकी निजी जिंदगी के बारे में कम ही लोगों को पता है. जहां वो एक मां, एक बेटी, एक पत्नी, एक बहू की भूमिका में होती हैं. आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि कामकाजी औरतें अपने बच्चों पर पूरा ध्यान नहीं दे पाती हैं लेकिन चंदा कोचर की ये चिट्ठी पढ़कर आपकी भी राय बदल जाएगी. ये चिट्ठी उन्होंने अपनी बेटी आरती के नाम लिखी है।
सुधा मेनन द्वारा लिखी किताब “लिगेसीः लेटर्स फ्रॉम एमिनैंट पैरेंट्स टू देयर डॉटर्स” में उनका ये खत प्रकाशित हुआ है जिसे पढ़कर आप भी भावुक हुए बिना नहीं रह पाएंगे।
प्यारी आरती,
आज तुम्हें जीवन के इस नए सफर के लिए तैयार और आत्मविश्वास से भरी हुई युवती के रूप में देखकर मुझे गर्व हो रहा है। आने वाले सालों में मैं तुम्हें तरक्की करते हुए देखना चाहती हूं। आज तुम्हें देखकर मेरी अपनी यादें जिंदा हो उठी हैं. यादों के साथ ही वो सारी बातें, वो सबक जो मैंने बचपन में सीखे थे।
उस वक्त के बारे में सोचती हूं तो पाती हूं कि ज्यादातर बातें और सबक तो मैंने अपने माता-पिता से ही सीखे थे। बचपन में जो मूल्य उन्होंने मुझे सिखाए और दिए, उन्हीं की नींव पर मैं आज खड़ी हूं।
हम तीनों भाई-बहनों में कभी भेदभाव नहीं किया गया। चाहे पढ़ाई की बात हो या भविष्य की योजनाओं की, कभी कोई फर्क नहीं किया गया। उन्होंने हमेशा यही कहा कि जिस चीज से हमें संतुष्टि मिलती है, हमें उसी दिशा में पूरी लगन से काम करना चाहिए। बचपन में सिखायी गई इन्हीं बातों ने हमें अपना फैसला खुद लेने के काबिल बनाया। इस एक सबक ने मुझे खुद की पहचान बनाने और खुद को तलाशने में मदद की।
मैं सिर्फ 13 साल की थी, जब हमारे पिता को अचानक दिल का दौरा पड़ा और वो हमें अकेला छोड़कर चले गए। उनके रहने तक हमने कभी भी चुनौतियों का सामना नहीं किया था पर उस रात के बाद, बिना किसी पूर्व सूचना के सबकुछ बदल गया। मेरी मां, जो अब तक एक गृहिणी थी, उसके ऊपर तीन बच्चों को अकेले बड़ा करने की जिम्मेदारी आ गई। तब हमें पता चला कि वो कितनी मजबूत थीं.
धीरे-धीरे उन्होंने टेक्सटाइल डिजाइनिंग के लिए खुद को तैयार किया और छोटी सी फर्म में नौकरी कर ली। कुछ ही दिनों में उन्होंने खुद को एक प्रासंगिक शख्स बना लिया. अकेले पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाना उनके लिए बहुत मुश्किल रहा होगा लेकिन उन्होंने हमें कभी भी इस बात का एहसास नहीं होने दिया.। उन्होंने तब तक कड़ी मेहनत की,जब तक हम सब कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर अपने पैरों पर खड़े नहीं हो गए। मुझे कभी नहीं पता था कि मेरी मां को खुद पर इतना भरोसा है।
अगर आप फुलटाइम जॉब करने वाली मां या पिता हैं तो आपके काम का असर आपके परिवार और रिश्ते पर नहीं पड़ना चाहिए. वो वक्त याद है, जब तुम अमेरिका में पढ़ रही थी और मेरे आईसीआईसीआई बैंक के एमडी और सीईओ बनने की खबरें सारे अखबारों में थीं? तुमने दो दिन बाद मुझे एक मेल किया जिसमें तुमने मुझे लिखा था, ‘आपने हमें कभी महसूस नहीं होने दिया कि आपका करियर इतना तनावभरा और इतना शानदार हो सकता है। घर पर आप सिर्फ हमारी मां थीं,’ तुम अपनी जिंदगी को वैसे ही जीना।
मां से मैंने एक बात और सीखी थी कि मुश्किलों से निपटकर आगे बढ़ते रहने की ताकत होना सबसे जरूरी है, फिर चाहे कुछ भी हो। मुझे आज भी याद है कि कितने धैर्य के साथ उन्होंने पापा के जाने के बाद सब संभाल लिया था। आपको सारी मुश्किलों का सामना कर, उनसे जीतना होता है, न कि उन्हें खुद पर हावी होने देना। मुझे याद है कि 2008 के आखिर में ग्लोबल इकनॉमिक मेल्टडाउन के दौरान आईसीआईसीआई बैंक को बचाए रखना कितना मुश्किल हो गया था। सारे बड़े मीडिया हाउस दूर से हमारी स्थिति को देखकर अंदाजे लगा रहे थे। हर जगह हमारे बारे में बहसें की जा रही थीं।
मैं काम पर लग गई, छोटे से छोटे पैसा जमा करने वाले से लेकर बड़े इनवेस्टर्स तक, सबसे बात की. रेगुलेटर्स से लेकर सरकार तक से बात की. बैंक परेशानी में नहीं था, पर मैं स्टेकहोल्डर्स की परेशानी भी समझती थी, क्योंकि कइयों को डर था कि उनका पैसा खतरे में है।
मैंने हर ब्रांच के स्टाफ को सलाह दी कि बैंक से पैसा निकालने आए हर इनवेस्टर की बात तसल्ली से सुनें। अगर कोई अपनी बारी का इंतजार कर रहा है, तो उन्हें बैठने को कुर्सी और पीने को पानी दें और हां, भले ही लोगों को बैंक से अपना पैसा निकालने की पूरी आजादी थी, पर हमारे स्टाफ ने उन्हें समझाया कि ऐसा करने से उन्हें कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि दरअसल क्राइसिस की कोई बात नहीं थी।
उन्हीं मुश्किल दिनों की बात है, जब एक दिन मैंने तुम्हारे भाई के स्क्वॉश टूर्नामेंट के लिए दो घंटे की छुट्टी ली थी. उस वक्त मुझे अंदाजा नहीं था, पर उस दिन मेरे वहां होने से बैंक के कस्टमर्स का हम पर भरोसा मजबूत हुआ था. कुछ मांओं ने मेरे पास आकर पूछा कि क्या मैं आईसीआईसीआई की चंदा कोचर हूं, और जब मैंने हां में जवाब दिया, तो उनका अगला सवाल था कि इतने क्राइसिस के दौरान खेल के लिए वक्त कैसे निकाला? उन्हें भरोसा हो गया था कि अगर मैं खेल के लिए वक्त निकाल रही हूं, तो बैंक सही हाथों में है और अपने पैसे को लेकर उन्हें डरने की जरूरत नहीं है।
मैंने अपनी मां से परिस्थितियों के हिसाब से ढलना भी सीखा. अपने करियर के लिए कड़ी मेहनत करते वक्त मैंने अपने परिवार की देखभाल भी की. जब भी मेरी मां और मेरे ससुराल वालों को मेरी जरूरत हुई, मैं उनके साथ थी। उन्होंने भी मेरा साथ दिया और मेरे करियर को आगे ले जाने में मेरी मदद की।
याद रखना, रिश्ते बेहद जरूरी हैं और हमें उनका खयाल रखना चाहिए. ये भी याद रखो कि रिश्ते एकतरफा नहीं होते, इसलिए जो आप अपने सामने वाले से उम्मीद रखते हो, वो उसे देने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
आज मेरा करियर जहां है, वहां कभी नहीं पहुंच पाता, अगर तुम्हारे पापा मेरे साथ न होते। उन्होंने घर से बाहर रहने पर मुझसे कभी भी शिकायत नहीं की. हम दोनों ही अपने करियर में व्यस्त थे लेकिन फिर भी हम दोनों ने अपने रिश्ते को कमजोर नहीं पड़ने दिया। मुझे भरोसा है कि वक्त आने पर तुम भी अपने पार्टनर के साथ वैसा ही करोगी।
अगर तुमने भी मेरे मेरे घर से काफी समय तक बाहर रहने को लेकर शिकायत की होती तो मैं कभी अपने लिए करियर बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती। मेरा सौभाग्य है कि मुझे इतना समझदार और साथ देने वाला परिवार मिला है। मुझे यकीन है कि जब तुम अपना परिवार बनाओगी, तुम भी इतनी ही भाग्यशाली रहोगी।
मुझे याद है, जब तुम्हारे बोर्ड एग्जाम शुरू होने वाले थे. मैंने छुट्टी ली थी ताकि मैं तुम्हें खुद एग्जाम दिलाने ले जा सकूं. तब तुमने मुझे बताया कि कितने साल तक तुम्हें अकेले एग्जाम देने जाना पड़ा था। ये सुनकर मुझे मुझे बहुत दुख हुआ था. पर मुझे ये भी लगा कि एक कामकाजी मां की बेटी होने की वजह से तुम बहुत जल्दी ही आत्मनिर्भर हो गई हो। तुम सिर्फ समझदार ही नहीं हुई, बल्कि तुमने अपने छोटे भाई का भी ध्यान रखा. तुमने उसे कभी मेरी कमी महसूस नहीं होने दी. मैंने भी तुम पर भरोसा करना, तुममें विश्वास रखना सीखा और अब तुम एक मजबूत, आत्मनिर्भर महिला बन गई हो. मैं अब वही सिद्धांत अपनी कंपनी में भी अपनाती हूं।
मैं भाग्य में भरोसा रखती हूं लेकिन इसके साथ ही इस बात को भी मानती हूं कि कड़ी मेहनत की हमारी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बड़े मायनों में देखें तो हम सब अपनी किस्मत खुद ही लिखते हैं। अपनी किस्मत को अपने हाथों में लो, जो पाना चाहते हो उसका ख्वाब देखो और इसे अपने मुताबिक लिखो।
आगे बढ़ते वक्त कई बार तुम्हें मुश्किल फैसले लेने होंगे. ऐसे फैसले जो शायद दूसरों को पसंद न आएं लेकिन तुममें इतनी हिम्मत होनी चाहिए कि तुम उसके लिए खड़ी हो सको जिसमें तुम्हारा विश्वास है। ध्यान रहे कि तुममें वो करने की हिम्मत होनी चाहिए, जो तुम्हें सही लगता है।
आरती, दृढ इच्छा शक्ति से कुछ भी पाया जा सकता है, इसकी सीमा नहीं, पर अपने लक्ष्य के पीछे जाते वक्त अपनी ईमानदारी और मूल्यों से समझौता मत करना. अपने आस-पास के लोगों की भावनाओं का सम्मान करना।
याद रखना कि अच्छा और बुरा, दोनों तरह का वक्त जिंदगी में बराबर आता है. तुम्हें इसे एक ही तरह से लेना सीखना होगा. जिंदगी जो अवसर दे, उसका पूरा फायदा उठाओ और हर अवसर, हर चुनौती से सीखती रहो.।
तुम्हारी प्यारी,
मम्मा
मुंबई।मौसम विभाग ने इस साल बेहतर मानसून के संकेत दिए हैं। इसके बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर मानसून की उम्मीद से बाजार में निवेश बढ़ेगा। अगर जुलाई से सितंबर तक मानसून बेहतर रहा तो सेंसेक्स में करीब 13 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा सरकार की मौद्रिक नीति भी निवेशकों को बाजार में निवेश करने के लिए प्रेरित करेगी।
अंग्रेजी अखबार द इकनॉमिक टाइम्स ने डच बैंक के मैनेजिंग डॉयरेक्टर अभय लाइजावाला के हवाले से कहा है कि मानसून बेहतर होता है तो इससे ग्रामीण भारत में विकास की गति और तेज करने में बढ़त मिलेगी।
पिछले दो सालों से कमजोर मानसून देखने के बाद मौसम विभाग ने पिछले हफ्ते बयान जारी कर कहा था कि इस साल पूरे देश में उम्मीद से बेहतर मानसून देखने को मिलेगा।
मौसम विभाग के इस अनुमान के बाद से ही शेयर बाजार में रौनक नजर आई और सेंसेक्स करीब 351 अंक तक उछलकर 27 हजार के पार हो गया। इसके अलावा विकास दर और निवेश की बेहतर संभावनाएं भी बाजार को मजबूत करने में अहम भूमिकाएं निभाएंगी।
मंदसौर। महिला सशक्तिकरण एवं बाल संरक्षण विभाग ने हाल ही में जिले में बाल विवाह की सूचना देने वालों को 100 रुपए का टॉकटाइम देने की योजना लागू की है।
शुरुआत में ही योजना के अच्छे परिणाम मिलने ले हैं। अभी तक जिले में 7 लोगों को 100-100 रुपए का टॉकटाइम दिया जा चुका है। जिले के बंजारों का खेड़ा गांव में बाल विवाह होने की सूचना के लिए तीन लोगों को टॉक टाइम दिया गया है।
विभाग के राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि यह योजना केवल आम लोगों के लिए ही है सरकारी, संविदा कर्मचारियों व जनप्रतिनिधियों पर लागू नहीं है।
हालात ये हैं कि एक बाल विवाह की शिकायत दो या तीन जगहोें से मिल रही है। बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2014-15 में कुल 42 बाल विवाह स्र्कवाए गए थे। इस वर्ष 16 अप्रैल तक ही 59 बाल विवाह स्र्कवाए जा चुके हैं
रांची (झारखंड)। राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से सम्मानित पहड़ा राजा सिमोन उरांव शनिवार को रांची लौटे। रेलवे स्टेशन पर अखिल भारतीय आदिवासी महासभा ने उनका शानदार स्वागत किया। उनके सम्मान में ढोल-नगाड़े और गाने-बाजे के साथ सैंकड़ों लोग मौजूद थे। सिमोन उरांव राजधानी एक्सप्रेस से नई दिल्ली से रांची आए। स्टेशन पर सबसे पहले उर्सलाइन स्कूल की स्टूडेंट्स ने सिमोन उरांव को बुके देकर स्वागत किया।
स्टेशन पर सिमोन उरांव को देखने भीड़ लगी हुई थी। यात्री और रेलवे कर्मचारी पद्मश्री से सम्मानित उरांव की फोटो मोबाइल में कैद करते दिखे।
सिमोन ने जब बांध बनाना शुरू किया था तो लोग उनका मजाक तक उड़ाते थे। बीते मंगलवार को इन्हें राष्ट्रपति ने पद्मश्री सम्मान से नवाजा।
स्टेशन से बाहर खुले जिप्सी में उरांव को सम्मान के साथ ले जाया गया। वे सबसे पहले रेलवे गेस्ट हाउस गए। वहां पर उनका जोरदार स्वागत हुआ।
सिमोन के स्वागत में युवा कई बाइकों पर सवार होकर आए थे। वे सिमोन के स्वागत में सड़क के दोनों ओर मौजूद रहे।
छोटी-छोटी नहरों को मिलाकर तीन बांध बना डाले
सिमोन ने छोटी-छोटी नहरों को मिलाकर तीन बांध बना दिया। आज इन्हीं बांधों से करीब 5000 फीट लंबी नहर निकालकर खेतों तक पानी पहुंचाया जा रहा।
सिमोन झारखंड के रहने वाले हैं। इनकी उम्र 83 है। ये पहड़ा राजा हैं।
हौसले पर उम्र को नहीं होने दिया हावी
सिमोन का कॉपी-किताब से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं रहा। न कोई तकनीक और न ही पैसे थे। इनके पास था तो सिर्फ जिद और कुछ कर गुजरने का जज्बा।
पहड़ा राजा सिमोन उरांव ने अपने हौसले पर उम्र को कभी हावी होने नहीं दिया।
बाबा के नाम से प्रसिद्ध सिमोन ने वह कारनामा कर दिखाया, जो सरकारी मशीनरियां करोड़ों खर्च करने के बाद भी नहीं कर पाईं।
साल में तीन फसलें उगाई जाती हैं
आज उनके बनाए बांधों से पांच गांवों की सूरत बदल गई है। एक ब्लॉक की यह कहानी पूरे झारखंड के लिए मिसाल बन गई।
सिंचाई सुविधा के अभाव में जहां एक फसल के लाले थे, वहां साल में तीन फसलें उगाई जाने लगीं।
पलायन यहां की सबसे बड़ी समस्या थी। सिमोन को यह कचोटता था। 1961 में वे कुदाल लेकर निकल पड़े।
बांध बनाना शुरू किया। लोग उनका मजाक उड़ाते थे। मगर हार नहीं मानी। धीरे-धीरे ग्रामीणों का साथ मिला और कारवां बनता गया।
ग्रामीणों की आर्थिक समस्याएं दूर करने के लिए फंड बनाया। बैंक में खाता खुलवाया।
अब ग्रामीणों को जरूरत के समय इसी फंड से 10-10 हजार रुपए की सहायता दी जाती है।