Wednesday, July 15, 2026
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संसदीय समिति ने उच्च न्यायालयों में हिन्दी, क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग की वकालत की

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उच्च न्यायालयों में हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग की वकालत करते हुए संसद की एक समिति ने कहा है कि संविधान में इस संबंध में केंद्र को पर्याप्त अधिकार दिये गए हैं और इसके लिए न्यायपालिका के सम्पर्क की जरूरत नहीं है।

अभी देश में उच्चतम न्यायालय और 24 उच्च न्यायालयों में अंग्रेजी में कार्यवाही होती है और आदेश भी अंग्रेजी में दिये जाते हैं।
केंद्र सरकार को कलकता, मद्रास, गुजरात, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक उच्च न्यायालयों में बंगाली, तमिल, गुजराती, हिन्दी और कन्नड़ के उपयोग के संबंध में प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
हालांकि इन सभी प्रस्तावों को 11 अक्तूबर 2012 को उच्चतम न्यायालय की पूर्ण पीठ ने खारिज कर दिया था।
विधि एवं कार्मिक विभाग पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि अंग्रेजी के अलावा अन्य अनुसूचित भाषा के उच्च न्यायालयों में उपयोग की अनुमति दी जा सकती है, अगर इस बारे में संबंधित राज्य सरकार मांग करती हैं।
संविधान के अनुच्छेद 348 का उल्लेख करते हुए समिति ने कहा कि न्यायपालिका के साथ विचार विमर्श की प्रक्रिया जरूरी नहीं है क्योंकि उच्च न्यायालयों में अनुसूचित भाषा के उपयोग के बारे में संवैधानिक प्रावधान में पूरी तरह से स्पष्ट हैं ।
समिति ने सरकार से इस बारे में जुलाई 2016 के मसौदा कैबिनेट नोट पर जल्द कोई निर्णय करने को कहा है जिसमें कहा गया है कि या तो 1965 में मंजूर कैबिनेट के विचार पर पुनर्विचार किया जाए या उसे जारी रखा जाए ।
21 मई 1965 को केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक विचार को मंजूर किया गया था जिसके बाद किसी उच्च नयायालय में भाषा में बदलाव के बारे में न्यायपालिका से विचार विमर्श किया जाता है।

वायु प्रदूषण से भारत, चीन में होती हैं 52 प्रतिशत असमय मौतें: अध्ययन

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भारत और चीन दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं लेकिन दुनिया भर में वायु प्रदूषण के कारण होने वाली असमय मौतों में से आधी इन दोनों देशों में होती हैं। एक हालिया रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है। ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2017’ की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि सूक्ष्म कणों के कारण होने वाली मौतों के मामले में भारत लगभग चीन के करीब पहुंच चुका है। इसमें साथ ही कहा गया है कि भारत समेत दस सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों, यूरोपीय संघ और बांग्लादेश में पीएम 2.5 का स्तर सर्वाधिक है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में ओजोन के कारण होने वाली मौतों में करीब 60 फीसदी का इजाफा हुआ है लेकिन भारत में यह आंकड़ा 67 फीसदी तक चला गया है। ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2017’ इस मुद्दे से जुड़ी इस साल की पहली वाषिर्क रिपोर्ट है। वाशिंगटन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैलुएशन :आईएचएमई: और ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के सहयोग से हेल्थ एफेक्ट इंस्टीट्यूट ने यह रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘वर्ष 2015 में पीएम 2.5 के कारण 42 लाख लोगों की मौत हुई और इसके कारण हुई मौतों में से करीब 52 फीसदी मौतें भारत और चीन में हुई।’’

 

मशहूर उपन्यासकार वेदप्रकाश शर्मा का निधन

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मशहूर उपन्यासकार वेदप्रकाश शर्मा का मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित आवास पर निधन हो गया। वह 62 साल के थे। वह लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उनके परिवार में पत्नी मधु, तीन विवाहित बेटियां, एक बेटा और बहू हैं।

शहर के सूरजकुंड स्थित शमशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। वेदप्रकाश शर्मा को मुखाग्नि उनके बेटे शगुन ने दी। शर्मा को अंतिम विदाई देने वालों में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

छह जून 1955 को बिहरा (बुलंदशहर) में पैदा हुए शर्मा ने एनएएस बीए और एलएलबी किया। वेदप्रकाश शर्मा ने कुल 176 उपन्यास लिखे थे.। उन्होंने करीब आधा दर्जन फिल्मों की पटकथा भी लिखी थी।

 

पाकिस्तानी सीनेट ने ऐतिहासिक हिन्दू विवाह विधेयक पारित किया

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पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं की शादियों के नियमन से जुड़े बहुप्रतीक्षित अहम विधेयक को सीनेट ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया है और अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक कानून में तब्दील हो जाएगा।

हिन्दू विवाह विधेयक 2017 को कल सीनेट ने पारित कर दिया। यह हिन्दू समुदाय का पहला विस्तारित पर्सनल लॉ है।
निचला सदन या नेशनल असेम्बली विधेयक को 15 सितंबर 2015 को पहले ही मंजूरी दे चुकी है और कानून का रूप लेने के लिए इसे केवल राष्ट्रपति के दस्तखत की दरकार है जोकि मात्र एक औपचारिकता है।
‘डॉन न्यूज’ ने खबर दी है कि पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू इस विधेयक को व्यापक तौर पर स्वीकार करते हैं क्योंकि यह शादी, शादी के पंजीकरण, अलग होने और पुनर्विवाह से संबंधित है। इसमें लड़के और लड़की दोनों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल तय की गई है।
इस विधेयक की मदद से हिन्दू महिलाएं अब अपने विवाह का दस्तावेजी सबूत हासिल कर सकेंगी।
यह पाकिस्तानी हिन्दुओं के लिए पहला पर्सनल लॉ होगा जो पंजाब, बलूचिस्तान और खबर पख्तूनख्वा प्रांतों में लागू होगा। सिंध प्रांत पहले ही अपना हिन्दू विवाह विधेयक तैयार कर चुका है।
विधेयक को सीनेट में कानून मंत्री ज़ाहिद हमीद ने पेश किया जिसका किसी ने विरोध नहीं किया। यह इसलिए हुआ क्योंकि प्रासंगिक स्थायी समितियों में सभी सियासी पार्टियों के सांसदों ने हमदर्दी वाला नजरिया जाहिर किया था।
‘सीनेट फंक्शनल कमेटी ऑन ह्यूमन राइट्स’ ने दो जनवरी को जर्बदस्त बहुमत के साथ विधेयक को मंजूरी दी थी।

 

दया नहीं, सम्मान से मिले महिलाओं को संसद में आरक्षण – सुमित्रा महाजन

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लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि संसद और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण पूरे सम्मान के साथ मिलना चाहिए। यह उनका हक है, जिसे पाने के लिए उन्हें किसी की दया की जरूरत नहीं है। वह हाल ही में अमरावती में भारतीय महिला संसद के अंतिम दिन उमड़ी करीब 10 हजार छात्राओं को संबोधित कर रही थीं।

गीता का उदाहरण देते हुए सुमित्रा महाजन ने कहा कि महिलाओं को भगवान कृष्ण की तरह सारथी बनकर परिवार और समाज को दिशा दिखानी चाहिए। गौरतलब है कि महिला आरक्षण का मामला अभी भी संसद में लटका हुआ है। राजनीतिक पार्टियाँ भी महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी करती रही हैं। ऐसी स्थिति में लोकसभाध्यक्ष का यह बयान काफी महत्व रखता है।

तहमीना जांजुआ पाकिस्तान की पहली महिला विदेश सचिव बनीं

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वरिष्ठ राजनयिक तहमीना जांजुआ को सोमवार को पाकिस्तान का विदेश सचिव नियुक्त किया गया। पाकिस्तान में इस महत्वपूर्ण पद पर आसीन होने वाली वह पहली महिला हैं। तहमीना निवर्तमान विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी का स्थान लेंगी। चौधरी अमेरिका में पाकिस्तान के नए राजदूत होंगे।

इससे पहले स्थानीय मीडिया में आई खबरों के मुताबिक भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित इस पद की दावेदारी में सबसे आगे चल रहे थे। तहमीना इस समय जिनिवा में संयुक्त राष्ट्र में स्थानीय प्रतिनिधि और राजदूत के तौर पर सेवा दे रही हैं।

विदेश विभाग ने कहा कि वह संजीदा राजनयिक हैं और उनके पास 32 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने इस्लामाबाद स्थित कायद-ए-आजम विश्वविद्यालय और न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री हासिल की है। तहमीना दिसंबर, 2011 से अक्तूबर, 2015 तक इटली में पाकिस्तान की राजदूत रहीं। साल 2011 में वह पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता भी रहीं।

 

ग्रैमी में भारत का प्रतिनिधित्व कर गर्वान्वित हुए संदीप दास

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विश्व संगीत श्रेणी में ग्रैमी पुरस्कार जीतने वाले भारतीय तबला वादक संदीप दास का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना गौरव का क्षण था।

विश्व संगीत श्रेणी में भारतीय तबलावादक संदीप दास और यो यो मा के एलबम ‘सिंग मी होम’ ने सर्वश्रेष्ठ एलबम का पुरस्कार जीता है ।
संदीप इस बात से दुखी हैं कि शास्त्रीय संगीत को देश में वह सम्मान नहीं मिलता जो उसे मिलना चाहिए, जबकि पश्चिम में उसकी लोकप्रियता बढ़ रही है।
पुरस्कार पाने के बाद लॉस एंजिलिस से संदीप ने फोन पर कहा, ‘‘यह तीसरी बार मेरे लिए सौभाग्यपूर्ण रहा। मैं जो हूं और जहां से आता हूं, उस पर गर्व है, फिर चाहे सांस्कृतिक रूप से हो या संगीत के क्षेत्र में। मुझे लगता है काश हमारे देश में भी संगीत की इतनी पहचान होती, जिसकी जड़ें इतनी गहरी हैं और जो हमारे खून में बसा हुआ है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह कोई शिकायत नहीं है, बस एक इच्छा है। काश पारंपरिक संगीत के संबंध में लोगों के बीच और जागरूकता होती। मुझे हार्वड विश्वविद्यालय से बुलावा आया, लेकिन मेरे अपने शिक्षण संस्थान बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ने अब तक मुझमें कुछ खास नहीं देखा।’’

 

एडेले के नाम हुए ग्रैमी के शीर्ष पुरस्कार, बेयोंसे ने मचाई धूम

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बेयोंसे ने जबरदस्त प्रस्तुति देकर धूम मचाई लेकिन वह रात ब्रिटेन की गायिका एडेले के नाम रही। सबसे महत्वपूर्ण पुरस्कार मसलन एल्बम ऑफ दी ईयर, रिकॉर्ड ऑफ दी ईयर और सॉन्ग ऑफ दी ईयर एडेले को मिले ।

एडेले को जिन पांच श्रेणियों में नामित किया गया था उन्हें उन सभी में जीत हासिल हुई, इसमें बेस्ट पॉप सोलो परफॉर्मेंस और बेस्ट वोकल एल्बम शामिल हैं। बेयोंसे के एल्बम ‘लेमोनेड’ का नामांकन नौ श्रेणियों में किया गया था लेकिन उन्हें केवल दो श्रेणियों- बेस्ट अर्बन कंटेंपररी एल्बम और बेस्ट म्यूजिक वीडियो से ही संतोष करना पड़ा।

28 वर्षीय एडेले को लगातार दूसरे साल समारोह में तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपने भाषण में क्वीन बे :बेयोंसे को उनके प्रशंसक इसी नाम से बुलाते हैं: का भी जिक्र किया। एडेले ने बेयोंसे से कहा, ‘‘हम सभी कलाकार आपके प्रशंसक हैं। आप हमारे लिए रौशनी हैं। मेरी क्वीन मेरी आदर्श, क्वीन बी। मैं आपका सम्मान करती हूं।’’ एल्बम ऑफ दि ईयर का पुरस्कार स्वीकार करते हुए ऐडेले ने कहा, ‘‘आपने जिस तरह मेरे दोस्तों को महसूस करवाया, मेरे अश्वेत दोस्तों को जो महसूस करवाया वह हौसला बढ़ाने वाला है।’’ 59वें एन्युअल ग्रैमी में गर्भवती बेयोंसे भले ही ऐडेले से पिछड़ गई हों लेकिन ‘लव ड्रॉट’’ और ‘‘सेंडकेटल्स’’ पर उनकी प्रस्तुति ने समारोह में जान डाल दी।

अभिनेताओं को ‘चरित्र अभिनेता’ कहना बंद करें : मानव कौल

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अभिनय प्रतिभा के दम पर मानव कौल ने अपनी पहचान व्यवसायिक और छोटी बजट वाली दोनों ही तरह की फिल्मों में स्थापित की है। अभिनेता का कहना है कि भारतीय सिनेमा एक रोमांचक दौर से गुजर रही है और अब यह समय आ गया है कि वह कुछ अभिनेताओं को ‘चरित्र अभिनेता’ कहना बंद करे।

‘जय गंगाजल’ के अभिनेता ने कहा कि फिल्म निर्माता अब अच्छे अभिनेताओं को मुख्य भूमिका देने में तवज्जो दे रहे हैं। यह एक बड़ा बदलाव है।
कौल ने बताया कि उन्हें ‘चरित्र अभिनेता’ शब्द पसंद नहीं है। उनका मानना है कि यह काफी खराब है। यह ऐसा है जैसे कि किसी को डिब्बे में बंद कर दिया गया हो और कहा जा रहा हो कि अच्छा आप तो चरित्र अभिनेता हैें। इस तरह की छवि से बाहर निकल पाना मुश्किल हो जाता है।

अपने बढ़ते बच्‍चे को दें एडल्‍ट एजुकेशन की जानकारी

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हम सभी यह स्वीकार करते हैं कि किशोरों को बहुत जल्दी सारा रहस्य पता चल जाता है और वे प्रयोग करना चाहते हैं, अत: इनमें से बहुत से बच्चे बहुत जल्दी यौन रूप से सक्रिय हो जाते हैं। यदि आप किसी किशोर बच्चे के माता पिता हैं तो आप अत्यंत चिंतित होंगे क्योंकि किशोर बहुत ही अप्रत्याशित तरीके से व्यवहार करते हैं और यह बात और अधिक बढ़ जाती हैं जब माता पिता थोड़े अधिक सतर्क होते हैं, सही हैं न? खैर क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें माता पिता को अपने बच्चे को ज़रूर सिखाना चाहिए, विशेष रूप से आजकल के समय में? जी हां, यह सेक्स एजुकेशन (यौन शिक्षा) है! हम सभी यह स्वीकार करते हैं कि किशोरों को बहुत जल्दी सारा रहस्य पता चल जाता है और वे प्रयोग करना चाहते हैं, अत: इनमें से बहुत से बच्चे बहुत जल्दी यौन रूप से सक्रिय हो जाते हैं। अत: यह ज़रूरी है कि हम अपने बच्चे को सही दिशा में जानकारी दें और उन्हें सुरक्षा संबंधी जानकारियाँ दें ताकि वे स्वस्थ रह सकें और अपना जीवन बिना किसी बाधा के जी सकें। आजकल किशोरों में गर्भावस्था और यौन संचारित रोगों की समस्या बहुत अधिक बढ़ रही है। तो भले ही ऐसा कहा जाता है कि स्कूलों में बच्चों को यौन शिक्षा दी जाती है परन्तु फिर भी माता पिता होने के नाते यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि बच्चा इस अवधारणा को अच्छे से समझे। अत: यहाँ कुछ सलाह दी जा रही हैं ताकि आप अपने बच्चे को प्रभावी रूप से सेक्स एजुकेशन (यौन शिक्षा) दे सकें।

जब आप अपने बच्चे से सेक्स विषय संबंधी बातें कर रही हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि आप इस प्रकार बात करें कि आपके बच्चे को शर्मिंदगी महसूस न हो। आदर्श रूप से इसे प्राइवेट में करें।

जब आप अपने बच्चे से सेक्स से संबंधित बातें करती हैं तो सीधे बात करें क्योंकि यदि आप बातों को घुमा फिराकर कहेंगी तो आप जो बात कहना चाहती हैं वह नहीं कह पायेंगी।

उपदेश न दें। खुले दिमाग से सोचें और अनुमान न लगायें। बच्चों से बात करते समय केवल अपने बच्चे के स्वास्थ्य और सुरक्षा का ख्याल अपने दिमाग में रखें।

उनसे सेक्स संबंधी बातें करना बहुत महत्वपूर्ण है और उन्हें किशोरावस्था में ही सेक्स संबंधी सुरक्षा की जानकारी दें ताकि वे जागरूक रहें और किसी दुर्घटना का शिकार न हों।

ध्यान रहे कि आप अपने बच्चे को असुरक्षित सेक्स करने के दुष्परिणामों के बारे में बतायें। उन्हें शांत तरीके से गर्भ निरोध के विभिन्न तरीकों के बारे में बतायें।

यदि आप अपने किशोर बच्चे से सेक्स शिक्षा संबंधी बातें करने में असुविधा महसूस कर रही हैं तो उन्हें प्रोफेशनल काउंसलर के पास ले जाएँ जो आपकी मदद कर सकते हैं।

इस विषय पर अपने बच्चे को उसके विचार और प्रश्न पूछने की अनुमति दें और इसे केवल एकतरफ़ा संवाद न बनायें!