भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज का स्नातक सम्मान समारोह 2024 संपन्न –
देश में फिर लौटी पास – फेल नीति
-5वीं और 8वीं कक्षा में फेल होने पर विद्यार्थी अगली क्लास में नहीं जा सकेंगे
नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमों में संशोधन किया है। नए नियम में अब ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को खत्म कर दिया है। इससे अब राज्यों को पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को परीक्षा में फेल होने पर भी अगली कक्षा में भेजने की बाध्यता से मुक्ति मिल गई है। संशोधित नियम के तहत 5वीं और 8वीं की वार्षिक परीक्षा में असफल हो जाने वाले विद्यार्थियों को दो महीने के दोबारा परीक्षा देनी होगी। यदि वे दोबारा भी सफल नहीं होते हैं तो उनको अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने कहा कि मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि पांचवीं और आठवीं कक्षा में सभी प्रयास करने के बाद यदि रोकने की आवश्यकता पड़े तो रोका जाए। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि आठवीं कक्षा तक किसी भी बच्चे को स्कूल से निष्कासित नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हम यह भी चाहते हैं कि बच्चों का लर्निंग आउट कम बेहतर हो। इसको प्रयास में लाने के लिए पढ़ाई में कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान भी दिया जा सकेगा। नियमों में किये गये बदलावों से यह संभव हो सकेगा।
संक्षिप्त नाम निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) नियम, 2024 – केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की है। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार, निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (2009 का 35) की धारा 38 की उपधारा (2) के खंड (च क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम 2010 का और संशोधन करने के लिए नियम बनाती है। इन नियमों का संक्षिप्त नाम निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) नियम, 2024 है। ये सरकारी राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख से लागू हो गए हैं।
क्या है नियम – संशोधित नियमों के अनुसार, राज्य प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के अंत में कक्षा 5 और 8 में नियमित परीक्षाएं आयोजित कर सकते हैं और यदि कोई छात्र असफल होता है तो उन्हें अतिरिक्त निर्देश दिया जाएगा और दो महीने बाद परीक्षा में फिर से बैठने का मौका दिया जाएगा। यदि कोई छात्र इस परीक्षा में पदोन्नति की आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहता है, तो उन्हें कक्षा 5 या कक्षा 8 में ही रोक दिया जाएगा। हालांकि, आरटीई अधिनियम इस बात पर जोर देता है कि किसी भी बच्चे को कक्षा 8 पूरी करने तक स्कूल से नहीं निकाला जाएगा। प्रधानाचार्यों को अनुत्तीर्ण बच्चों की सूची बनाए रखने, सीखने में अंतराल की पहचान करने और इन कक्षाओं में अनुत्तीर्ण बच्चों के लिए विशेष इनपुट के प्रावधानों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करनी होगी।
कोलकाता एयरपोर्ट पर खुला ‘उड़ान यात्री कैफे’
–सस्ती दरों पर चाय और अन्य चीजें उपलब्ध
कोलकाता । अब कोलकाता एयरपोर्ट पर सिर्फ दस रुपये में चाय उपलब्ध है। यह नई पहल यात्रियों के लिए खुशी की वजह बन गई है। जी हां, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु ने कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के शताब्दी समारोह के उद्घाटन के दौरान उड़ान यात्री कैफे का शुभारंभ किया। दरअसल, संसद के शीतकालीन सत्र में इस बार एयरपोर्ट पर खाने-पीने की चीजों के बढ़े हुए दामों का मुद्दा उठाया गया था जिसके पश्चात एयरपोर्ट्स पर ‘उड़ान यात्री कैफे’ की शुरुआत की गई है। इस कैफे में सस्ती दरों पर चाय और अन्य चीजें उपलब्ध हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए यह एक राहत भरी बात है। अब यात्रियों को सस्ते में चाय और पानी उपलब्ध होने से यात्रा का अनुभव और बेहतर हो जाएगा। ज्ञात हो, आम आदमी पार्टी (आआपा) के सांसद राघव चड्ढा ने संसद के शीतकालीन सत्र में एयरपोर्ट पर खाने-पीने की चीजों के बढ़े हुए दामों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने सवाल किया था कि क्यों एयरपोर्ट पर पानी की बोतल के लिए 100 रुपये और चाय के लिए 200-250 रुपये देने पड़ते हैं? यह दाम आम जनता की पहुंच से बाहर है। चड्ढा ने सुझाव दिया था कि एयरपोर्ट्स पर सस्ते कैफे या कैंटीन की सुविधा होनी चाहिए। इस मुद्दे को उठाने के कुछ ही दिनों बाद कोलकाता एयरपोर्ट पर ‘उड़ान यात्री कैफे’ शुरू किया गया है, जहां सस्ती दरों पर चाय और अन्य चीजें उपलब्ध हैं। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है।
इस पहल ने कोलकाता हवाई अड्डे की प्रगति और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 1566.3 एकड़ भूमि और 230,000 वर्ग मीटर के निर्मित क्षेत्र में फैला, एनएससीबीआई हवाई अड्डा सालाना 26 मिलियन यात्रियों की सेवा करने के लिए सुसज्जित है और लगभग 49 घरेलू और 15 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को सेवा प्रदान करता है। हवाई अड्डा आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देता है, मजबूत एयर-फ्रेट सेवाओं के माध्यम से व्यवसायों का समर्थन करता है, जिसमें एक अत्याधुनिक कार्गो टर्मिनल भी शामिल है जो पूर्वी भारत को दुनिया से जोड़ता है।
रतन टाटा, शारदा सिन्हा से जाकिर हुसैन से श्याम बेनेगल तक, 2024 में कहा अलविदा
साल 2024 को खत्म होने में बस कुछ दिन ही शेष रह गए हैं। नया साल नई ताजगी और नई शुरुआत के साथ दस्तक देने को तैयार है। हालांकि, कई गम हैं, जो कभी भर नहीं पाएंगे। इस साल मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने दुनिया को अलविदा कह दिया। इस सूची में जाकिर हुसैन से लेकर शारदा सिन्हा तक का नाम शामिल है, जिन्हें हमने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
रतन टाटा : रतन टाटा (28 दिसंबर 1937–9 अक्टूबर 2024) भारतीय उद्योगपति थे जो टाटा समूह और टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वे 1991 से 2012 तक टाटा समूह, के अध्यक्ष थे जो भारत की सबसे बड़ी व्यापारिक इकाई है।
जाकिर हुसैन: दुनिया को अलविदा कहने वाले सितारों की लिस्ट में तबला के महान कलाकार और ‘उस्ताद’ जाकिर हुसैन का नाम शामिल है। फेफड़े की खतरनाक बीमारी इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस से जंग लड़ रहे उस्ताद ने 73 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उस्ताद का 15 दिसंबर को निधन हो गया था। हुसैन का सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था।
शारदा सिन्हा: छठ गीतों को एक नया आयाम देने वाली अभिनेत्री शारदा सिन्हा ने 5 नवंबर को आखिरी सांस ली। मल्टीपल मायलोमा (एक प्रकार का ब्लड कैंसर) से जंग लड़ रही बिहार की स्वर कोकिला ने 72 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया था। सिन्हा का नई दिल्ली एम्स में इलाज चल रहा था।
रोहित बल: इस साल दुनिया को अलविदा कह देने वाले सितारों की सूची में फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर फैशन डिजाइनर रोहित बल का नाम शामिल है। बल ने 1 नवंबर को अंतिम सांस ली। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिस वजह से उनका निधन हो गया। उन्हें साउथ दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रोहित बल 63 वर्ष के थे।
बिजली रमेश: तमिल फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता बिजली रमेश का 26 अगस्त को निधन हो गया था। लीवर फेल होने की वजह से उन्होंने 46 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया।
उस्ताद राशिद खान: भारतीय शास्त्रीय गायक उस्ताद राशिद खान का 55 वर्ष की आयु में 9 जनवरी को निधन हो गया था। कैंसर से पीड़ित उस्ताद का कोलकाता के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
ऋतुराज सिंह: टीवी जगत के मशहूर अभिनेता ऋतुराज सिंह का 20 फरवरी को 59 साल की उम्र में निधन हो गया था। अभिनेता अपने मुंबई स्थित घर में थे, जहां देर रात उन्हें हार्ट अटैक आया और उन्हें बचाया नहीं जा सका।
गणेशन महादेवन: तमिल फिल्मों और टीवी शोज में बेहतरीन काम कर लोकप्रिय हुए अभिनेता का 9 नवंबर को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे अभिनेता का चेन्नई स्थित आवास पर इलाज चल रहा था।
पंकज उधास: मशहूर गजल गायक पंकज उधास का 72 साल की उम्र में 26 फरवरी को निधन हो गया। वह पैंक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित थे।
अतुल परचुरे: मनोरंजन जगत के लोकप्रिय अभिनेता और कॉमेडियन अतुल परचुरे का 57 वर्ष की आयु में 14 अक्टूबर को निधन हो गया। स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से अभिनेता मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती थे।
विकास सेठी: टीवी इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता विकास सेठी का 8 सितंबर को नासिक में 48 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। अभिनेता को दिल का दौरा पड़ा था।
सुहानी भटनागर: आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘दंगल’ में बबीता फोगाट का किरदार निभाकर लोकप्रिय हुईं अभिनेत्री सुहानी भटनागर का 19 वर्ष की आयु में 16 फरवरी को निधन हो गया। अभिनेत्री की डर्मेटोमायोसाइटिस से निधन हो गया। (डर्मेटोमायोसाइटिस एक रेयर बीमारी है, जिसमें मांसपेशियों में सूजन पड़ जाती है और त्वचा में चकत्ते पड़ जाते हैं)।
डॉली सोही: सर्वाइकल कैंसर से जंग लड़ रही टीवी इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री डॉली सोही का 8 मार्च को 48 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
श्याम बेनेगल : मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक श्याम बेनेगल का आज 23 दिसंबर को शाम 6.38 बजे निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे । श्याम बेनेगल कथित तौर पर किडनी संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित थे। दो दिन से वे काेमा में थे और सोमवार शाम इलाज के दौरान उन्होंने आखिरी सांस ली। श्याम बेनेगल को अंकुर, मंडी, मंथन आदि जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता था, जिनमें से अधिकांश 70 या 80 के दशक के मध्य में रिलीज हुई थीं। श्याम बेनेगल को भारत सरकार द्वारा 1976 में पद्मश्री और 1991 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनकी सफल फिल्मों में मंथन, जुबैदा और सरदारी बेगम शामिल हैं। अपने शानदार करियर में श्याम बेनेगल ने ‘भारत एक खोज’ और ‘संविधान’ सहित विभिन्न मुद्दों, डॉक्यूमेंट्री और टेलीविजन धारावाहिकों पर फिल्में बनाईं।
साई कोलकाता ने ‘संडे ऑन साइकिल’ के साथ फिटनेस की ओर बढ़ाया कदम
पापा के बाद

फौलादी बन जाती है बेटियांँ
पापा के बाद
माँ को बाँहों में समेटतीं
काँच से बुढ़ापे को
दरकने नहीं देती बेटियाँ
पापा के बाद
पाँवों में बाँधे चक्के
खानदानों को चुस्त रखतीं
खेलती सी रहती हैं बेटियाँ
पापा के बाद
चिलचिलाती धूप में
तेज बारिश में, सर्द हवाओं में
हर मौसम में
गुनगुनाती रहती हैं बेटियाँ
पापा के बाद
हमसफरों के साथ, पहरेदारों सी
नयी-नयी माँओं सी
जागती रहती है बेटियाँ
पापा के बाद।
सबसे कीमती उपहार हैं स्मृतियां जो सिर्फ साथ चाहती हैं, पैसा बाद की चीज है
दिसम्बर बस खत्म होने जा रहा है। एक सप्ताह और नया साल शुरू हो जाएगा। 2024 पीछे छूट रहा है और 2025 का स्वागत करने को हम तैयार खड़े हैं। देखा जाए तो साल बदलते जाते हैं मगर तारीखें बदलने से कहां कुछ बदलता है। सोचते हैं हम, कब ऐसी तारीख आएगी जब इस धरती पर खुशियां होंगी, कहीं कोई नफरत नहीं होगी..कहीं कोई द्वेष नहीं होगा। इस साल हमने कई ऐसे चेहरे खोए जो अपने साथ जैसे पूरा युग लेते गए । रतन टाटा, शारदा सिन्हा, जाकिर हुसैन…ये तमाम लोग अपने -आप में पूरा युग रहे। हम हर बार किसी को खुश करने के लिए कुछ न कुछ देते हैं और सोचते हैं कि भौतिक चीजों को पा लेने भर से ही खुशी मिल जाती है मगर ऐसा नहीं होता। मुझे लगता है कि आप अगर किसी को सबसे अधिक कुछ कीमती चीज दे सकते हैं तो वह आपका समय है। समय दीजिए और स्मृतियां बनाइए…आप इससे खूबसूरत उपहार किसी को नहीं दे सकते। दुनिया में हर चीज खरीदी जा सकती है मगर वक्त खरीदा नहीं जा सकता। आखिरकार हम जो पाते हैं या खोते हैं या किसी के साथ कैसा व्यवहार करते हैं..वह हमारी स्मृतियों में सुरक्षित हो जाता है। लोगों को लगता है कि पैसे कमाने की मशीन बनकर आप दुनिया खरीद सकते हैं और परिवार के लिए खुशियां खरीद सकते हैं मगर ऐसा नहीं है। पैसा जरूरी है, पैसा कमाना और इतना पैसा कमाना कि आप अपनी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर न रहें..बहुत ज्यादा जरूरी है मगर पैसा कमाने में और खुद पैसा कमाने की मशीन बना लेने में जमीन -आसमान का फर्क है । आज कोई भी रिश्ता पैसा और स्टेटस देखकर जोड़ा जा रहा है पर आप कुछ नहीं देख पा रहे हैं तो वह व्यवहार है, आचरण है, जिन्दगी को लेकर आपकी सोच है। आपका रहन -सहन और संस्कृति है। चार लोगों को खुश करने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं मगर यह नहीं सोच रहे हैं कि जिन्दगी जब हंसकर या रोकर दो लोगों को ही गुजारनी है तो फिर चार लोगों को खुश करने के लिए अपनी जीवन भर की कमाई स्वाहा करना कहां की बुद्धिमानी है। यह बात सिर्फ शादियों पर ही नहीं बल्कि हर तरह के रिश्ते पर लागू होती है..स्मृतियां साथ चाहती हैं, पैसा उसके बाद की चीज है। कमाइए, खूब कमाइए मगर यह मत भूलिए कि आपके रिश्तों को आपकी जरूरत ज्यादा है। बच्चों को लायक बनाएंगे, आत्मनिर्भर बना देंगे तो पैसे वह खुद ही कमा लेंगे मगर इस समय अगर आप उनको अपना साथ नहीं दे पा रहे तो आप उनसे शिकायत नहीं कर सकेंगे और करनी भी नहीं चाहिए । अपने दोस्तों को, परिवार को, समाज को..काम को उनके हिस्से का समय दीजिए… न ज्यादा और न कम। अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिए चाहे वह संवेदना हो, मेहनत हो या कुछ और..शत- प्रतिशत दीजिए मगर पूरी जिन्दगी नहीं..क्योंकि जिन्दगी में संतुलन जरूरी है…चार लोगों के लिए खुद पर अत्याचार करना बुद्धिमानी नहीं है क्योकि जिन्दगी की गाड़ी को भीड़ नहीं खींचती..उसे आप खींचते हैं बस आपके साथी…समय और स्थान के अनुसार बदल जाते हैं..नववर्ष की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं ।
नेफ्रोकेयर इंडिया ने आयोजित किया वॉकथॉन
कोलकाता । नेफ्रोकेयर इंडिया, अपने समृद्धशाली अस्तित्व के तीन साल पूरे करने पर गर्व महसूस कर रहा है। संस्थान का कहना है कि, रिसर्च में पाया गया है कि, रोजाना नियमित 30 मिनट तेज चलने से हमारे शरीर में किडनी स्वस्थ रहती है, इसे ध्यान में रखते हुए हमने इस सुनहरे मौके पर ‘स्वास्थ्य के लिए चलें, अपनी किडनी के लिए चलें’ का संदेश लोगों तक पहुंचने के लिए हम वॉकथॉन का आयोजन कर रहे हैं। वॉकथॉन में लगभग 400 प्रतिभागियों के साथ समाज की कई मशहूर हस्तियां भी इसमें शामिल हुईं, जिन्होंने इस स्वस्थ अभ्यास के विचार को फैलाने के लिए उनके कदम मिलाए। यह वॉकथॉन नेफ्रोकेयर से शुरू हुई और होटल गोल्डन ट्यूलिप पर समाप्त हुई। इस कार्यक्रम में कंपनी के निदेशक डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता का संदेश प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में समाज की कई प्रतिष्ठित हस्तियों में डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता (नेफ्रो केयर के संस्थापक एवं निदेशक), राम कृष्ण जायसवाल (मालदीव के वाणिज्य राजदूत), अरिंदम सिल (अभिनेता एवं फिल्म निर्देशक), पियाली बसाक (पर्वतारोही), आशीष मित्तल (गोल्डन ट्यूलिप होटल के निदेशक) के साथ कई गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर मौजूद थे।नेफ्रो केयर के संस्थापक और निदेशक, नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, हम अपनी स्थापना की तीसरी वर्षगांठ मना रहे हैं, हमने किडनी रोग की रोकथाम और इसके उपचार की दिशा में काम करते हुए तीन सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं। भारत जैसे देश के लिए, जो संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, एसी स्थिति में नेफ्रोकेयर हमारे लिए सही मंत्र और एकमात्र गंतव्य स्थल बन गया है। नेफ्रोकेयर में हमारा दृढ़ विश्वास है कि हर रोज़ 30 मिनट तेज चलना हमारे शरीर में हमारी बहुत सी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान कर सकता है। इस साल गत 5 जुलाई को हम एसएमई आईपीओ में सूचीबद्ध हुए और 15 जुलाई से मध्यमग्राम में अपना नया मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (विवासिटी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल) शुरू किया। नेफ्रोकेयर विशेषज्ञों की एक टीम किडनी/संबंधित विकार से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को समग्र देखभाल प्रदान करता है।
साहित्यिकी द्वारा हिंदी के महान साहित्य सेवी डॉ श्यामसुंदर दास पर की गोष्ठी
कोलकाता । भारतीय भाषा परिषद के पुस्तकालय में साहित्यिकी संस्था द्वारा हिंदी शब्द सागर के महान इतिहासकार डॉ श्यामसुंदर दास पर चर्चा की। साहित्यिकी संस्था द्वारा आयोजित इस मासिक गोष्ठी में अतिथि वक्ता विद्वान डॉ ऋषिकेश राय रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता की स्कॉटिश चर्च कॉलेज की ऐसोसिएट प्रो साहित्यकार डॉ गीता दूबे ने किया। सदस्य वक्ता मीतू कानोड़िया और संचालन किया चंदा सिंह ने। आलोचक एवं प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ श्यामसुंदर दास पर डॉ ऋषिकेश राय का विद्वत्तापूर्ण प्रभावशाली वक्तव्य ज्ञानवर्धक तो था ही पुस्तकीय सूचनाओं से अलग मौलिक एवं विचारणीय रहा । डॉ ऋषिकेश राय ने कहा कि श्यामसुन्दर दास (१४ जुलाई 1875 – 1945 ई.) हिंदी के अनन्य साधक, विद्वान्, आलोचक और शिक्षाविद् थे। हिंदी साहित्य और बौद्धिकता के पथ-प्रदर्शकों में उनका नाम अविस्मरणीय है। हिंदी-क्षेत्र के साहित्यिक-सांस्कृतिक नवजागरण में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने और उनके साथियों ने मिल कर सन् 1893 में काशी नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना की थी ।साथ ही ही शब्द कोष शबदसागर की रचना की। हिन्दी के महान सेवक बाबू श्यामसुन्दर दास विश्वविद्यालयों में हिंदी की पढ़ाई के लिए यदि बाबू साहब ने पुस्तकें तैयार न की होतीं तो शायद हिंदी का अध्ययन-अध्यापन आज सबके लिए इस तरह सुलभ न होता। उनके द्वारा की गयी हिंदी साहित्य की पचास वर्षों तक निरंतर सेवा के कारण कोश, इतिहास, भाषा-विज्ञान, साहित्यालोचन, सम्पादित ग्रंथ, पाठ्य-सामग्री निर्माण आदि से हिंदी-जगत समृद्ध हुआ। उन्हीं के अविस्मरणीय कामों ने हिंदी को उच्चस्तर पर प्रतिष्ठित करते हुए विश्वविद्यालयों में गौरवपूर्वक स्थापित किया।
डॉ गीता ने अध्यक्षीय वक्तव्य में श्यामसुंदर दास की पुस्तक साहित्यलोचन पर चर्चा की जो उनके ज्ञान और अध्ययन का परिचायक था।डॉ गीता ने कहा कि आज फिर से हमें विद्यार्थियों को हिंदी के महान इतिहासकार डॉ श्यामसुंदर दास के विषय में जानकारी देने की आवश्यकता है।
छंदोबद्ध कविता लेखन में निपुण कवयित्री मीतू कानोड़िया ने बाबू श्यामसुन्दर दास जी के बहुमुखी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए हिन्दी भाषा, आलोचना, इतिहास, प्रबंध, जीवनी निर्माण, कोष विज्ञान के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है।वें आजीवन हिन्दी भाषा और साहित्य के आधारभूत विकास के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण से लगे रहे।मीतू कानोड़िया ने अपने सारगर्भित आलेख में श्यामसुंदर दास के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला।चंदा सिंह का संचालन बहुत सुंदर रहा।डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि इस कार्यक्रम में धन्यवाद संस्था की अध्यक्ष विद्या भंडारी ने दिया।
भौतिकी प्रयोगों पर नंदिनी राहा मेमोरियल कार्यशाला का आयोजन
कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज (बीईएस कॉलेज) के भौतिकी विभाग और इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स (आईएपीटी, आरसी-15) ने संयुक्त रूप से 3 दिसंबर से 7 दिसंबर तक भौतिकी प्रयोगों पर एक अल्पकालिक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम पर नंदिनी राहा मेमोरियल कार्यशाला का आयोजन किया। दिसंबर, 2024 मेंआईक्यूएसी और सेमिनार/एफडीपी/कार्यशाला समिति, विज्ञान अनुभाग, बीईएस कॉलेज, कोलकाता के साथ आयोजित किया । आई ए पी टी भौतिकी शिक्षकों का एक अखिल भारतीय निकाय है, जिसका घोषित लक्ष्य “सभी स्तरों पर भौतिकी शिक्षण-अध्ययन की बेहतरी” है, और इसी भावना को ध्यान में रखते हुए इसके 10000 से अधिक सदस्य आई ए पी टी के बैनर तले काम कर रहे हैं। बेहतर कामकाज के लिए, निकाय को विभिन्न क्षेत्रीय परिषदों (आरसी) के माध्यम से विकेंद्रीकृत किया गया है और पश्चिम बंगाल में आईएपीटी गतिविधियां आरसी-15 द्वारा संचालित की जाती हैं। आईएपीटी ने स्नातक छात्रों के लिए प्रयोगशाला कौशल पर विभिन्न कार्यशालाएं, सेमिनार और प्रशिक्षण आयोजित किए।
स्नातक भौतिकी पाठ्यक्रम में विभिन्न पेपरों में प्रयोगों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है। हालाँकि, यह कार्यशाला अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा डिज़ाइन किए गए नवीन प्रयोगों का पता लगाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करके पाठ्यक्रम से आगे निकल गई। स्वदेशी और इंटरैक्टिव तरीकों से तैयार किए गए इन प्रयोगों का उद्देश्य अंतर्निहित भौतिक नियमों को प्रमुखता से चित्रित करना था। यह ज्ञात है कि किसी भी अंतःक्रिया या गतिशील प्रणाली को प्रासंगिक भौतिक कानूनों का पालन करना चाहिए। हालाँकि, एक प्रयोग एक सावधानीपूर्वक डिज़ाइन की गई और व्यवस्थित प्रक्रिया है जो मापने योग्य मात्रा और प्रतिलिपि प्रस्तुत करने योग्य परिणाम उत्पन्न करती है। इस कार्यशाला ने छात्रों को यह जानने के लिए सशक्त बनाने का काम किया कि मापने योग्य मात्रा प्राप्त करने के लिए सरल व्यवस्था कैसे तैयार की जा सकती है।
इस कार्यशाला के माध्यम से, छात्रों ने सरल लेकिन प्रभावी प्रयोगों के माध्यम से जटिल अवधारणाओं की खोज करते हुए, भौतिक कानूनों के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया था। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को भौतिक विज्ञान में उनके भविष्य के प्रयासों के लिए प्रेरित करना और मार्गदर्शन करना है।
कार्यशाला में लेडी ब्रेबॉर्न कॉलेज, एस.ए. जयपुरिया कॉलेज, द हेरिटेज कॉलेज, बेथ्यून कॉलेज, आशुतोष कॉलेज सहित द बीईएस कॉलेज जैसे विभिन्न कॉलेजों से प्रथम सेमेस्टर के तीस (30) छात्रों ने भाग लिया था। इस कार्यशाला में बीईएस कॉलेज के पांचवें सेमेस्टर के छात्रों ने मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। इस कार्यशाला को आयोजित करने में बीईएस कॉलेज के भौतिकी विभाग के उनतीस (29) आईएपीटी विशेषज्ञों, शिक्षकों और प्रयोगशाला कर्मचारियों ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सभी प्रतिभागियों ने प्रायोगिक भौतिकी पर एक इंटरैक्टिव, रोमांचक और समृद्ध कार्यशाला में काम करने का अनुभव किया। स्मार्टफ़ोन के साथ प्रयोगों ने बुनियादी भौतिकी सीखने और सिखाने के लिए सबसे साधन संपन्न उपकरण की सराहना की। डॉ. सुरजीत चक्रवर्ती एवं डॉभूपति चक्रवर्ती, आईएपीटी के वर्तमान सदस्य और महाराजा मणींद्र चंद्र कॉलेज और सिटी कॉलेज, कोलकाता के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर क्रमशः इन नवीन प्रयोगों को आयोजित करने वाली कार्यशाला के व्यक्तित्व थे।
एक छात्र ने साझा किया, “शिक्षकों और छात्रों के साथ यह एक अद्भुत अनुभव था। मैंने भौतिकी प्रयोग करने की नई विधियों के बारे में बहुत ज्ञान प्राप्त किया है।” एक अन्य छात्र का विचार है कि “प्रयोग करने में यह अमूल्य ज्ञान और अनुभव था। हमें अद्भुत प्रयोगों के लिए नवीन, रचनात्मक और आधुनिक दृष्टिकोण सिखाया गया।”
आईएपीटी के संसाधन व्यक्तियों में से एक, प्रोनेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति मणिमाला दास ने अच्छे भाव के साथ एक नोट दिया, “भौतिकी विभाग, बीईएस कॉलेज में उत्कृष्ट बुनियादी ढांचा, शिक्षण और सहायक कर्मचारी हैं। छात्र प्रतिभागी उत्साहित हैं और उन्होंने तेजी से नए विचार सीखे, जो समग्र रूप से बहुत संतोषजनक हैं।’डॉ। चिन्मय घोष, पूर्व निदेशक, एनसीआईडीई, इग्नू ने टिप्पणी की, “मैं कॉलेज के बुनियादी ढांचे और विभाग के शिक्षकों की भागीदारी के विस्तार से बहुत प्रभावित हूं। मुझे यकीन है कि छात्र इसका लाभ उठा सकेंगे।” डॉ। ओएनजीसी, भारत में पूर्व डीजीएम (भूभौतिकी) अचिंत्य पाल ने टिप्पणी की, “… विशेष रूप से कॉलेज की उत्कृष्टता से आश्चर्यचकित हूं।”
छात्रों का मूल्यांकन किया गया और कार्यशाला के अंत में सभी को प्रमाणित किया गया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि 23 विभिन्न स्वदेशी प्रयोगों के साथ डिज़ाइन की गई यह कार्यशाला बहुत ही महत्वपूर्ण रही।




