Tuesday, March 31, 2026
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फूड बैंक बनाने की तैयारी में सरकार, अब बर्बाद नहीं होगा बचा खाना

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शादी समारोह आयोजन का खाना अब बर्बाद होने के बजाय जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा। सरकार विदेशों की तर्ज पर पहली बार फूड बैंक बनाने की तैयारी कर रही है,जहां बचा हुआ खाना जमा करके इसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की व्यवस्था रहेगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण इस बैंक की अवधारणा पर आम लोगों से भी सुझाव मांगेगा।

अथॉरिटी के सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि शादी, पार्टी या बड़े आयोजनों में बचा हुआ खाना अक्सर बर्बाद हो जाता है। लेकिन अब यह खाना जरूरतमंदों तक पहुंचाकर उनकी मदद की जा सकती है।
इस कार्य में एनजीओ भी मदद करेंगे। फिलहाल देश के कई शहरों में एनजीओ अपने स्तर पर  जरूरतमदों को पार्टियों का बचा हुआ खाना मुहैया करवाते हैं, लेकिन इस खाने की कोई जांच नहीं होती कि यह कितना सेहतमंद है।

लेकिन नई योजना के तहत सबसे पहले रेगुलेशन तैयार होगा, जिसमें पूरी गाइडलाइन बनेगी। इसे तैयार होने में दो से तीन महीने लगेंगे। इसी रेगुलेशन के तहत एनजीओ को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। खाना लेने के बाद उसकी जांच की होगी, तभी इसे जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा।

 

नौकरी छोड़ अपना काम शुरू करना चाहते हैं ज्यादातर भारतीय: अध्ययन

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नयी दिल्ली – एक अध्ययन के अनुसार भारतीय कामगारों में उद्यमिता महत्वाकांक्षा सबसे अधिक है और आधे से अधिक यानी 56 प्रतिशत लोग अपनी मौजूदा नौकरी छोड़कर खुद का काम शुरू करने की इच्छा रखते हैं।

रेंडस्टेड वर्कमोनिटर सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इसके अनुसार 83 प्रतिशत भारतीय कामगार उद्यमी बनने की इच्छा रखते हैं जबकि वैश्विक स्तर पर यह औसत 53 प्रतिशत है।

रेंडस्टेड इंडिया के प्रबंध निदेशक व सीईओ पॉल डुपिस ने कहा,स्थिर ​कारोबारी माहौल, एफडीआई सीमा बढ़ाने संबंधी बाजारोन्मुखी सुधारों, जीएसटी के कार्यान्वयन तथा मेक इन इंडिया व डिजिटल इंडिया जैसी पहलों से नयी आकांक्षा व महत्वाकांक्षा वाला भारतीय वर्ग पल्वित हो रहा है।

सर्वेक्षण के अनुसार 45-54 वर्ष आयुवर्ग में 37 प्रतिशत लोग ही अपना खुद का काम शुरू करना चाहते हैं जबकि 25-34 वर्ष आयु वर्ग में 72 प्रतिशत तथा 35-44 प्रतिशत आयुवर्ग में 61 प्रतिशत लोग अपना काम शुरू करना चाहते हैं।

सर्वेक्षण में शामिल लगभग 86 प्रतिशत ने संकेत दिया है कि भारत में स्टार्टअप शुरू करने के लिए अनुकूल माहौल है। वहीं 84 प्रतिशत का कहना है कि भारत सरकार देश में नये स्टार्टअप का समर्थन कर रही है।

 

नेपाल की संसद में नया कानून पारित, पीरियड्स के दौरान घर में रह सकेंगी महिलाएं

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नेपाल की संसद ने एक कानून पारित कर उस प्राचीन हिंदू परंपरा पर रोक लगा दी है जिसके तहत पीरियड्स के दौरान महिलाओं को घर से बाहर रखा जाता है। नए कानून के तहत महिलाओं को पीरियड्स के दौरान घर से बाहर रहने के लिए मजबूर करने की परंपरा को मानने के लिए बाध्य करने वालों को तीन महीने की सजा या तीन हजार नेपाली रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

नेपाल के कई इलाकों में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अपवित्र माना जाता है। देश के कई दूरस्थ इलाकों में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को घर के बाहर बनी झोपड़ी या कोठरी में रहने के लिए मजबूर भी किया जाता है। इसे चौपदी प्रथा कहते हैं। चौपदी प्रथा के तहत पीरियड्स से गुजर रही महिलाओं के साथ अछूतों की तरह बर्ताव किया जाता है और उन्हें घर के बाहर रहना पड़ता है।

बीते महीने घर के बाहर बनी झोपड़ी में सो रही एक किशोरी की सांप के काटने से मौत हो गई थी। 2016 में भी चौपदी प्रथा का पालन करते हुए दो किशोरियों की मौत हुई थी। इनमें से एक ने ठंड से बचने के लिए आग जलाई थी जिसके धुएं से दम घुटकर उसकी मौत हो गई थी जबकि दूसरी महिला की मौत की वजह पता नहीं चल सकी थी।

इस परंपरा पर दस साल पहले ही देश के सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी, लेकिन इसके बावजूद कई इलाकों, विशेषकर पश्चिमी नेपाल के कई गांवों में ये अब भी जारी है। चौपदी प्रथा के जारी रहने की एक वजह ये भी थी कि ऐसा करने वालों को दंडित करने के लिए कोई कानून नहीं था। हालांकि नए कानून को लागू होने में भी एक साल तक का समय लग सकता है।

 

पीवी सिंधु ने आंध्रप्रदेश में डिप्टी कलेक्टर का पदभार संभाला

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2016 रियो ओलंपिक के बैडमिंटन में सिल्वर मेडल जीतने वाली स्टार भारतीय महिला शटलर पीवी सिंधु ने आंध्रप्रदेश में डिप्टी कलेक्टर का पद ग्रहण किया। भारत की शीर्ष खिलाड़ी सिंधु ने गोलापुडूी में राज्य सचिवालय में कार्यभार संभाला।

इस अवसर पर सिंधु के साथ उनके माता-पिता भी मौजूद थे। सिंधु को पिछले महीने ही राज्य सरकार ने ग्रेड-1 अधिकारी के रूप में नियुक्ति पत्र सौंपा था, मुख्यमंत्री एन। चंद्रबाबू नायडू ने स्वयं उन्हें यह पत्र सौंपा था। उन्हें 30 दिनों के अंदर पद ग्रहण करने को कहा गया था। सिंधु ने भूमि प्रशासन के मुख्य आयुक्त (सीसीएलए) के कार्यालय में पद ग्रहण किया। उन्होंने प्रमुख आयुक्त अनिलचंद्र पुनेथा को रिपोर्ट किया।
सिंधु ने कहा कि अभी उनका पूरा ध्यान बैडमिंटन पर ही टिका है और आने वाले समय में वो ट्रेनिंग लेकर अपने काम की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएंगी।
गौरतलब है कि सिंधू की नियुक्ति ग्रुप-1 में हुई है।  सिंधू ने इसके लिए सरकार का धन्यवाद दिया और कहा कि  उनका फोकस खेल पर ही रहेगा। पिछले साल रियो ओलंपिक में पदक जीतने के बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने सिंधू को तीन करोड़ रुपये का पुरस्कार, अमरावती में हजार वर्ग गज का प्लाट और ग्रुप-1 की नौकरी देने का प्रस्ताव पारित किया था। सिंधू की सीधी नियुक्ति के लिए राज्य सरकार ने बजट सत्र में नियमों में संशोधन भी किया था।

वार्डरोब में शामिल कीजिए और अपनाइए अपने देश की धरोहर

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भारत बहुत सारे क्राफ्ट और खूबसूरत परिधानों और कला से परिपूर्ण है। हमारा हर राज्य अपने आप में खास है, हर राज्य का परिधान, टेक्सटाइल और कला काफी खूबसूरत है। चमचमाते ब्रांडेड कपड़ों के बीच अनगिनत कारीगर अपनी मेहनत से हमारी धरोहरों को नया आयाम दे रहे हैं और सारी दुनिया इनको सराह भी रही है। तो आप क्यों पीछे रहें। देश में बनी चीजों को जिन्दगी में शामिल करने का मतलब अपने देश को आगे बढ़ाना भी है। इसकी शुरुआत खुद आप भी कर सकती हैं। अपनाइए अपने देश की धरोहर को, टेक्सटाइल के क्षेत्र में हम ऐसी ही कुछ प्रिंट्स, डिजाइन और फैब्रिक की जानकारी आपको दे रहे हैं जिनको अपनाकर आप भीड़ में अलग दिख सकती हैं क्योंकि आजादी एक दिन का मामला नहीं है –

बांधनी  बांधनी टाई और डाई टेक्नीक है. ये राजस्थान का फेमस ट्रेंड है. साड़ी, दुपट्टे और कुर्ते में बांधनी प्रिंट बेहद खूबसूरत लगता है. प्लेन सूट के साथ बांधनी दुपट्टा परफेक्ट लगता है।

इकत  इकत आपको क्लासी और एलीगेंट लुक देगा। इसमें धागे को टाई करके डाई किया जाता है। ओडिशा का ऑड़ियन इकत इन दिनों रैंप पर भी खूब धूम मचा रहा है।

 

कांजीवरम  कांजीवरम साड़ियां तमिलनाडू के मंदिरों के शहर कांचीपुरम की देन हैं। ये अपने गोल्ड और सिल्वर ब्रोकेड, सिल्क एम्ब्रॉएडरी हैवी थ्रेड वर्क के लिए जानी जाती हैं। कांजीवरम साड़ियां काफी महंगी आती हैं और बाजार में ये आसानी से मिल जाती हैं. ये साड़ी बेहद लोकप्रिय हैं। आपकी मम्मी की वॉर्डरोब में भी एक ना एक कांजीवरम साड़ी तो होगी ही।

चिकनकारी – लखनऊ के सिर्फ टूंडे कबाब ही नहीं चिकनकारी वर्क भी बेहद फेमस है। कुर्ते से लेकर चिकनकारी साड़ी तक, आप कुछ भी कैरी कर सकती हैं। पहले ये एम्ब्रॉएडरी सफेद धागे से की जाती थी. लेकिन अब लाइट ब्लू, पिंक जैसे रंगों में भी उपलब्ध हैं।

कलमकारी – कलमकारी डिज़ाइन आपके लुक को और भी खास और खूबसूरत बना देता है। ये हैंड-प्रिंटेड या ब्लॉक-प्रिंटेड कॉटन टेक्सटाइल का एक टाइप है, जो इंडिया और ईरान में बनाया जाता है। इसके नाम ‘कलमकारी’ का मतलब है Pen (कलम) से ड्रॉइंग (कारी)।

(साभार फैशन 101)

दुनिया भर में 18 करोड़ लोगों ने देखा आईसीसी महिला विश्व कप

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दुनिया भर से करीब 18 करोड़ दर्शकों ने हाल में समाप्त हुए आईसीसी महिला विश्व कप टूर्नामेंट के मुकाबलों को देखा जिसमें मिताली राज की अगुवाई वाली भारतीय टीम फाइनल में इंग्लैंड से हारकर उप विजेता रही थी।

भारत में करीब 15.6 करोड़ लोगों ने टूर्नामेंट के मुकाबले देखे जिसमें से आठ करोड़ दर्शक ग्रामीण क्षेत्र से थे जबकि फाइनल देखने वाले लोगों की संख्या 12.6 करोड़ रही। भारत के शानदार प्रदर्शन से देश में महिला क्रिकेट मुकाबले देखने वाले लोगों में 500 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

आईसीसी मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार 2013 में पिछले चरण की तुलना में मैच देखने के घंटों में भी करीब 300 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई।

विज्ञप्ति के मुताबिक, ‘‘सभी क्षेत्रों में दर्शकों में काफी वृद्धि हुई है लेकिन 2013 की तुलना में दक्षिण अफ्रीका में मैचों के घंटे में आठ गुना इजाफा हुआ और भारत में इसमें काफी बढ़ोतरी हुई विशेषकर ग्रामीण इलाकों में। ’’ आईसीसी के मुख्य कार्यकारी डेविड रिचर्डसन ने कहा, ‘‘हम महिला विश्व कप के असर को देखकर काफी खुश हैं। हमें लगा कि महिला क्रिकेट के लिये यह समय सही था जिससे हम खेल के दर्शकों में बढ़ोतरी कर सकते हैं और ये संख्यायें इसकी पुष्टि करती हैं।

 

91 साल की उम्र में ग्रेजुएट हुईं ये ‘दादी’

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91 साल की पकी उम्र। बेटी की मौत का सदमा। और, जिंदगी भर का इंतजार। लेकिन वो कहते हैं कि मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। थाइलैंड की किमलान ने भी कुछ ऐसा ही करके दिखाया है। थाईलैंड की किमलान जिनाकुल ने 91 की उम्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। और, उनकी इस सफलता के पीछे छिपी है 10 सालों की लगातार मेहनत और अटूट इरादा।

किमलान जिनाकुल को उनकी शुरुआती पढ़ाई के दिनों में ही एक प्रतिभाशाली छात्रा के रूप में जाना जाता था। उनकी पढ़ाई भी उत्तरी थाइलैंड के लैंपेंग प्रांत के सबसे अच्छे स्कूल में हुई। लेकिन वह आगे की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी नहीं जा सकीं। उस दौर में यह मुमकिन नहीं था। परिवार के बैंकॉक पहुंचने के बाद उनकी शादी हो गई। इसके बाद उन्हें अपनी पढ़ाई का सपना छोड़ना पड़ा। किमलान कहती हैं, “मैं हमेशा से चाहती थी कि मेरे बच्चे पढ़ाई कर सकें, इसलिए जब वह यूनिवर्सिटी जाना चाहते थे तो मैंने उनका प्रोत्साहन किया।”

किमलान के पांच में से चार बच्चों के पास पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री है। यही नहीं, एक बच्चे ने तो अमरीका जाकर पीएचडी तक की पढ़ाई भी की है। किमलान ने अपने बच्चों के अनुभवों से प्रेरित होकर ही यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। और बीते बुधवार को अपनी डिग्री भी हासिल की।

किमलान की एक बेटी एक अस्पताल में काम कर रही थीं। किमलान की इस बेटी ने जब सुखोथाई थाम्माथिराट ओपन यूनिवर्सिटी में एक कोर्स ज्वॉइन किया तो किमलान ने भी दाखिला लेने का फैसला किया। पहली बार दाखिले के वक्त उनकी उम्र सिर्फ 72 साल थीं। लेकिन उनकी एक बेटी की मौत ने उन्हें कई सालों के लिए पढ़ाई से दूर कर दिया।
इसके बाद जब वह 85 साल की थीं तो उन्होंने ह्यूमन इकोलॉजी कोर्स में दाखिला लिया। उन्होंने कहा था कि ये कोर्स उन्हें एक अच्छी और खुशहाल जिंदगी जीने के बारे में बताएगा।
किमलान कहती हैं, “जब मैं सदमे से बाहर आई तो मैंने खुद पर इस कोर्स को पूरा करने का दबाव डाला। मैं आशा करती हूं कि मेरी बेटी की आत्मा ये देखकर खुश होगी।”


पढ़ाई के दौरान, किमलान हर रोज सुबह उठकर बौद्ध भिक्षुओं को दान करती हैं। इसके बाद मंदिर जाती हैं और फिर पढ़ने बैठती हैं। किमलान कहती हैं, “इसके लिए कभी भी लेट नहीं होते। मेरा दिमाग सीखने के लिए हमेशा जागा हुआ और तीक्ष्ण है। ये दुनिया कभी नहीं रुकती है। यहां हमेशा नई समस्याएं हैं और अगर नए विज्ञान सामने नहीं आए होते तो इस दुनिया ने समृद्ध होना बंद कर दिया होता।”
जब किमलान से पूछा गया कि उनकी सफलता का राज क्या है तो उन्होंने बताया कि दृढ़निश्चित्ता और महत्वाकांक्षा ने उन्हें इतना आगे आने में मदद की। “जब मैंने खुद से एक चैप्टर पूरा करने को कहा तो मैंने पूरी कोशिश की। मैंने मुख्य बिंदुओं को हाइलाइट किया जिन्हें मुझे याद करना था और इन्हीं चीजों ने स्टडी रिव्यू के दौरान मेरी मदद की।” किमलान बताती हैं, “जब मैं पास होती थी तो मैं खुश होती और जब फेल होती थी तो बुरा महसूस करती थीं। इसलिए मैं एग्जाम में भाग लेती रही जब तक मैं पास नहीं हो गई।”
किमलान कहती हैं कि अब अगर वो नौकरी की तलाश भी करें तो उन्हें नहीं लगता कि कोई भी उन्हें नौकरी देगा। ऐसे में वह अपने नाती-पोतों की देखभाल करना जारी रखेंगी।

क्रिकेटर सुषमा वर्मा बनीं डीएसपी, चेक भी मिला

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वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की हिस्सा रही क्रिकेटर सुषमा वर्मा पर हिमाचल सरकार आखिरकार मेहरबान हो ही गई। डीएसपी पद के साथ साथ सुषमा को पांच लाख का चैक दिया गया है। सीएम वीरभद्र सिंह ने खुद सुषमा को ये तोहफे दिए।

सीएम के निजी आवास पर सीएम से मिलने पहुंची सुषमा का यहां भी जोरदार स्वागत किया गया। उन्हें शॉल और टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। इसके बाद सीएम ने उन्हें डीएसपी के पद के साथ साथ पांच लाख का चैक भी भेंट किया।

सुषमा यह सम्मान पाकर काफी खुश दिखी। सुषमा ने बताया कि बचपन से ही उनका पुलिस में सेवा करने का सपना था, जो अब पूरा हुआ है। कहा कि वर्ल्ड कप फाइनल में हार का बदला वर्ष 2018 में टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर लेंगे।

कभी सुषमा ने हिमाचल पुलिस में भर्ती होने का सपना देखा था। कांस्टेबल भर्ती के लिए दौड़ भी लगाई लेकिन फिर इंटरव्यू में शामिल नहीं हो पाई थी। आज उन्हें इसी महकमे में बड़ा पद मिल गया। सुषमा ने इस सम्मान के लिए सीएम का आभार जताया। कहा कि इससे प्रदेश की अन्य महिला खिलाड़ी भी बेहतर करने को प्रेरित होंगी। इस दौरान सुषमा के पिता भोपाल वर्मा, डीजीपी सोमेश गोयल भी मौजूद रहे।

सुषमा शिमला सुन्‍नी तहसील के गढ़ेरी गांव की रहने वाली है। उसे बचपन से ही खेलों से लगाव था। समरहिल में हुए क्रिकेट ट्रायल ने एक वॉलीबॉल खिलाड़ी को ‌क्रिकेट खिलाड़ी बना दिया।

 

बालगोपाल को भाता है माखन मिश्री का भोग

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भगवान कृष्ण के जन्म दिवस को हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के पर्व के तौर पर मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी का उत्सव 14 और 15 अगस्त को है। हिन्दू तिथि  के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि श्रीकृष्ण का जन्म श्रावण मास के आठवें दिन यानि अष्टमी पर मध्यरात्रि में हुआ था। श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है जिन्होंने देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया और मथुरावासियों को निर्दयी राजा कंस के शासन से मुक्त कराया।

भले ही श्रीकृष्ण के माता-पिता देवकी और वासुदेव थे लेकिन बचपन से ही उनका पालन-पोषण यशोदा और नंद ने किया था। ऐसी भविष्यवाणी की गई थी कि देवकी और वासुदेव का आठवां पुत्र कंस की मृत्यु का कारण बनेगा। इस भविष्यवाणी को सच होने से रोकने के लिए राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और वासुदेव को बंदी बना लिया और कई सालों के लिए उन्हें कारागार में डाल दिया था। इतना ही नही इस दौरान देवकी ने जिन 6 संतानों को जन्म दिया कंस ने उनका भी वध कर दिया लेकिन श्रीकृष्ण के जन्म के समय वासुदेव बालकृष्ण को भगवान के निर्देशानुसार वृंदावन यशोदा और नंद को सौंप आए, जहां कृष्ण ने अपना बचपन बिताया और कुछ सालों बाद उन्होंने कंस का वध कर भविष्यवाणी को सही साबित किया।
वृंदावन में श्रीकृष्ण एक नटखट बालक थे, जिसे गांव में उनकी शरारतों के लिए जाना जाता था। श्रीकृष्ण को बचपन से ही मक्खन बेहद पंसद था। कहा जाता है कि मैया यशोदा हर रोज खुद अपने हाथों से माखन मिश्री बनाकर श्रीकृष्ण खिलाती थीं लेकिन श्रीकृष्ण को माखन इतना पंसद था कि वह पूरे गांव में मथा हुआ माखन चुराकर खाते थे। श्रीकृष्ण को माखन चुराने से रोकने के लिए एक बार उनकी मां ने उन्हें एक खंभे से बांध दिया था।
श्रीकृष्ण की इस शरारत के चलते उनका नाम माखन चोर पड़ा और जन्माष्टमी के पावन अवसर पर उनके भक्त मुख्य भोग के तौर पर उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाते हैं। इसके अलावा भगवान के लिए छप्पन भोग भी बनाया जाता है जिसमें 56 तरह की खाद्य सामग्री शामिल होती हैं। भगवान को भोग लगने के बाद इन सभी चीज़ों को भक्तों में बांटा जाता है और इस प्रसाद को ग्रहण करने बाद वे अपना व्रत तोड़ते हैं।
माना जाता है छप्पन भोग में श्रीकृष्ण के पंसदीदा व्यंजन होते हैं जिसमें अनाज, फल, ड्राई फ्रूट्स, मिठाई, पेय पदार्थ, नमकीन और आचार की श्रेणी में आने वाले आठ प्रकार की चीजें होती हैं। छप्पन भोग में सामान्य रूप से माखन मिश्री खीर और रसगुल्ला, जलेबी, रबड़ी, मठरी, मालपुआ, मोहनभोग, चटनी, मुरब्बा, साग, दही, चावल, दाल, कढ़ी, घेवर, चीला, पापड़, मूंग दाल का हलवा, पकोड़ा, खिचड़ी, बैंगन की सब्जी, लौकी की सब्जी, पूरी, बादाम का दूध, टिक्की, काजू, बादाम, पिस्ता जैसी चीजें शामिल होती हैं। अगर भक्त भगवान को छप्पन भोग प्रसाद में नहीं चढ़ा पाते हैं तो माखन मिश्री एक मुख्य भोग है जो आमतौर पर जन्माष्टमी के मौके पर श्रीकृष्ण को चढ़ाया जाता है।
माखन मिश्री बनाने में बेहद ही आसान है। इसे बनाने के लिए आपको सिर्फ बिना नमक वाली मलाई और मिश्री के दानों की जरूरत होती है। आप फुल क्रीम दूध से भी मलाई इकट्ठा कर सकते हैं।  कुछ दिनों तक आप दूध की मलाई को इकट्ठा करती रहें। जब आपके पास काफी सारी मलाई हो जाए तो इसे ठंडे पानी की मदद से मथे मलाई से मक्खन अलग होने लगेगा। मलाई को मथना जारी रखें जब तक मक्खन पूरी तरह अलग न हो जाए। मक्खन को इकट्ठा करके एक घंटे तक फ्रीज में ठंडा होने के लिए रख दें। कुछ मिश्री के दाने और ड्राई फ्रूट्स डालकर अब आप इसे भगवान को भोग लगा सकतेहैं।

नन्हे कान्हा की कहानी

क्या आपके घर में भी हैं लड्डू गोपाल

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देश-दुनिया में कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। घर-घर में तैयारी हो रही है कि इस बार क्या खास किया जाएगा। इस बीच, यदि आपके घर में भी लड्डू गोपाल हैं तो कुछ नियमों का पालन जरूर किया जाना चाहिए।

जन्माष्टमी तो भगवान कृष्ण का जन्मदिन है, लेकिन घर में जिस दिन लड्डू गोपाल का प्रवेश होता है और उनकी प्राण-प्रतिष्ठा होती है, हर साल उस दिन को भी भगवान कृष्ण के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए।

कहा जाता है कि लड्डू गोपाल महज एक मूर्ति नहीं, बल्कि घर के सदस्य होते हैं। यहां तक कहा जाता है कि जिस दिन घर में लड्डू गोपाल का प्रवेश हो जाता है, उस दिन से वह घर लड्डू गोपाल जी का हो जाता है।

यही कारण है कि उनके साथ परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार होना चाहिए। जिस तरह परिवार के सदस्य सुबह नाश्ता, दोपहर और फिर रात में भोजन करते हैं, वैसे ही लड्डू भगवान को भी समय-समय पर नाश्ता और भोजन कराया जाना चाहिए।

लड्डू गोपाल को रोज स्नान कराएं। उन्हें साफ-स्वच्छ कपड़े पहनाएं। स्नान करवाते वक्त गर्म या ठंडे पानी बंदोबस्त जरूर करें।

जैसे परिवार के सदस्य सर्दियों में गर्म पानी से नहाते हैं, वैसी ही व्यवस्था लड्डू भगवान के लिए की जाना चाहिए। लड्डू भगवान को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं।

घर में यदि कोई खाने की चीज आती है, तो उसमें से लड्डू भगवान का हिस्सा भी जरूर अलग करें और सबसे पहले उन्हें भोग लगाएं।

भगवान को खिलौने प्रिय हैं। उनके लिए खिलौने लाते रहें और उनके पास रखें। उनके साथ खेले भी।

लड्डू भगवान को कोई नाम दें। आप उनके साथ कोई रिश्ता भी बना सकते हैं। उन्हें पुत्र, पिता, गुरु मान सकते हैं। इस आधार पर नाम दें और सुबह प्रेमपूर्वक उठाएं। रात को भी ऐसा ही सुलाएं।