Tuesday, March 31, 2026
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दफ्तर में ‘वर्क लोड’ से हैं परेशान तो ऐसे दूर करें अपना तनाव

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नौकरी करने वाले किसी शख्स की नींद कोई हराम करता है और सपने में भी भूत बनकर पीछा करता है, तड़के नींद से उठाकर अपना सारा गुस्सा गर्म चाय की तरह उड़ेल देता है तो ऐसा करने वाला कोई और नहीं एक बॉस ही हो सकता है। बॉस अगर खडूस हुआ और कर्मचारियों से काम करने का तरीका नहीं आता तो वह उनका जीना हराम कर देता है। ऐसे में लक्ष्य पूरा करने का दबाव और बॉस की नाराजगी का ख्याल अगर आपकी भी रातों की नींद उड़ा रहा है तो ये उपाय आजमाकर आप अपनी मदद खुद कर सकते हैं।

क्या करना हैै..तालिका तैैयार  रहे
मान लीजिए एक प्रोजेक्ट दिया गया हैै और आप परेशान हैं कि शुरु कहाँ से किया जाए तो बुद्धि इसी में हैैं कि सूची बना लें। इस सूची में आपको कौन-कौन से काम निपटाने हैं, क्या जरूरी है और क्या कम जरूरी है, यह सब एक जगह लिखें। इससे आपको योजना तैयार करने में आसानी होगी और जरूरी काम छूटेगा नहीं।

काम जितना महत्वपूर्ण, उतना ही समय
स्कूल याद है तो इम्तिहान भी याद होंगे। महत्वपूर्ण प्रश्नों पर नजर जल्दी जाती थी तो यहाँ महत्वपूर्ण कामों को पहलेे पूरा करें। तय करें कि दिन में कौन से काम के लिए आपको कितना समय देना है। साथ ही, कौन सा प्रोजेक्ट कब पूरा करना है इसकी समय सीमा भी तय करें। न सिर्फ काम करने बल्कि कितनी देर का आप ब्रेक लेंगे दिन में इसका भी समय निर्धारित करें।

नहीं’ कहना सीखें
आप किसी जरूरी प्रोजेक्ट में लगे हैं और पहले ही काम के लोड की वजह से व्यस्त हैं तो किसी नए काम को हाथ में लेने के बजाय अपनी सीमाएं समझें और ‘न’ कहना सीखें। आप किसी काम को लेकर उसे समय पर पूरा न कर पाएं इससे बेहतर होगा कि आप विनम्रता से मना कर दें।

साथी हाथ बढ़ाना
सारा काम अपने ऊपर ओढ़ने के बजाय उसे अपने सहयोगियों के साथ बांटना ही प्रबंधन की कला है। आप अकेले ही हर काम को निपटा लेंगे, यह सोच ही बहुत गलत है। सही प्रबंधन करने से काम कम समय में सही तरीके से पूरा होता है।

नहीं रहीं भक्ति माँ, एक लाख महिलाओं की नि:शुल्क डिलीवरी करवाई

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मध्य प्रदेश स्थित इंदौर की डॉ. भक्ति यादव की चौदह अगस्त को 92 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई। डॉक्टर भक्ति ने अपने जीवनकाल में ‘यथा नाम तथा काम’ की आदर्श उक्ति को पूरी तरह चरितार्थ किया। उन्होंने अपने चिकित्सकीय सेवाकाल में एक लाख निर्धन महिलाओं की नि:शुल्क प्रसूति की थी। उन्होंने ऐसी स्त्रियों से किसी प्रकार का कोई शुल्क कभी नहीं लिया।

डॉक्टर भक्ति यादव भारत की समाजसेवी चिकित्सक थीं। वे एक स्त्री रोग विशेषज्ञ थीं। वे गरीब स्त्रियों की नि:शुल्क चिकित्सा करती थीं। 1952 में भक्ति यादव इंदौर की पहली महिला थीं, जो एमबीबीएस डॉक्टर बनीं। उनका जन्म 3 अप्रैल 1926 को उज्जैन के निकट स्थित महिदपुर में हुआ था। वे मूलत: महाराष्ट्र के एक प्रतिष्ठित परिवार से थीं। जिस समय भारतीय समाज में लड़कियों को पढ़ाना अनुचित समझा जाता था, तब भक्ति यादव ने शिक्षा हासिल की। उनके पिता ने उनकी पढ़ने की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें निकटवर्ती गरोठ कस्बे में पढ़ाई के लिए भेज दिया। वहां से उन्होंने सातवीं कक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उनके पिता इंदौर आ गए। भक्ति की पढ़ाई के प्रति अटूट लगन को देखते हुए पिता ने उन्हें अहिल्या आश्रम स्कूल में प्रवेश दिलवा दिया। उस समय इंदौर में वह एकमात्र विद्यालय था, जो बालिकाओं के लिए था और जहां छात्रवास की सुविधा भी थी। वहां से 11वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भक्ति ने 1948 में इंदौर के होल्कर साइंस कॉलेज में बीएससी प्रथम वर्ष में प्रवेश में लिया। वे बीएससी प्रथम वर्ष में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुईं। उस समय शहर के महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (एमजीएम) में ही एमबीबीएस का पाठ्यक्रम चल रहा था और उन्हें 11वीं कक्षा के अच्छे परिणाम के आधार पर उसमें प्रवेश मिल गया।

उस समय उस कॉलेज में एमबीबीएस के लिए चयनित कुल 40 छात्रों में से 39 लड़के थे और भक्ति ही अकेली लड़की थीं। वह एजीएम कॉलेज की एमबीबीएस के पहले बैच की पहली महिला छात्र थीं। वे मध्य भारत की भी पहली एमबीबीएस डॉक्टर थीं। सन् 1952 में भक्ति की तपस्या फलीभूत हुई और वे एमबीबीएस डॉक्टर बन गईं। उन्होंने एमजीएम मेडिकल कॉलेज से ही एमएस किया। 1957 में उन्होंने अपने साथ पढ़ने वाले चंद्र सिंह यादव से विवाह कर लिया। उनके पति भी जीवनभर रोगियों की सेवा में तन-मन-धन से समर्पित रहे। स्थानीय लोगों में डॉक्टर भक्ति का नाम काफी प्रसिद्ध था। वे संपन्न परिवार के रोगियों से भी नाममात्र का ही शुल्क लेती थीं और गरीब मरीजों का तो उन्होंने जीवनभर नि:शुल्क इलाज किया।

तब से डॉक्टर भक्ति चिकित्सा क्षेत्र में परोपकार में लीन रहीं। 2014 में 89 वर्ष की अवस्था में उनके पति डॉ. चंद्र सिंह यादव का निधन हो गया। डॉ. भक्ति को भी 2011 में अस्टियोपोरोसिस नामक खतरनाक बीमारी हो गई, जिस कारण उनका वजन लगातार घटते हुए 28 किलो रह गया। डॉक्टर भक्ति यादव को उनकी सेवाओं के लिए सात वर्ष पूर्व डॉ. मुखर्जी सम्मान प्रदान किया गया था। वर्ष 2017 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अधिक आयु होने के कारण वे पुरस्कार वितरण समारोह में सम्मिलित न हो सकीं। लिहाजा नियमानुसार इंदौर के कलेक्टर ने उन्हें उनके घर जाकर पुरस्कार प्रदान किया।

सही मायनों में चिकित्सा कर्म क्या होता है यह डॉ. भक्ति यादव ने अपने समर्पण से दिखा दिया। उन्होंने सोमवार 14 अगस्त 2017 को इंदौर स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली और हम सभी को आश्चर्य मिश्रित विषाद के साथ छोड़ गईं।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अंसवैधानिक करार दिया

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में मंगलवार को मुस्लिम समुदाय में प्रचलित एक बार में ‘तीन तलाक’ कह कर तलाक देने की 1400 साल पुरानी प्रथा खत्म करते हुये इसे पवित्र कुरान के सिद्धांतों के खिलाफ और इससे इस्लामिक शरिया कानून का उल्लंघन करने सहित अनेक आधारों पर निरस्त कर दिया।

पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने , 3:2 के बहुमत से जिसमें प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर अल्पमत में थे, ने एक पंक्ति के आदेश में कहा, ‘‘3:2 के बहुमत में रिकार्ड की गयी अलग अलग राय के मद्देनजर तलाक-ए-बिद्दत् (तीन तलाक) की प्रथा निरस्त की जाती है।’’ संविधान पीठ के 395 पेज के फैसले मे तीन अलग अलग निर्णय आये। इनमें से बहुमत के लिये लिखने वाले न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति एस ए नजीर के अल्पमत के इस दृष्टिकोण से सहमत नहीं थे कि ‘तीन तलाक’ धार्मिक प्रथा का हिस्सा है और सरकार को इसमें दखल देते हुये एक कानून बनाना चाहिए।

न्यायमूर्ति जोसेफ, न्यायमूर्ति नरीमन और न्यायमूर्ति उदय यू ललित ने इस मुद्दे पर प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति नजीर से स्पष्ट रूप से असहमति व्यक्त की कि क्या तीन तलाक इस्लाम का मूलभूत आधार है।

सरकार, राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं ने तत्काल ही इस निर्णय का स्वागत किया। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे ‘ऐतिहासिक’ बताते हुये कहा कि इसने मुस्लिम महिलाओं को बराबर का हक प्रदान किया है।

विधिवेत्ता सोली सोराबजी ने कहा, ‘‘यह प्रगतिशील फैसला है जिसने महिलाओं के अधिकारों को संरक्षण दिया है और अब कोई भी मुस्लिम व्यक्ति इस तरीके से अपनी पत्नी को तलाक नहीं दे सकेगा।’’ तीन तलाक की प्रथा निरस्त होने के बाद अब, सुन्नी मुस्लिम, जिनमे तीन तलाक की प्रथा प्रचलित थी, इस तरीके का इस्तेमाल नहीं कर सकेगे क्योंकि शुरू में ही यह गैरकानूनी होगा।

शीर्ष अदालत द्वारा तलाक ए बिद्दत या एकबारगी तीन तलाक कह कर तलाक देने की प्रथा निरस्त किये जाने के बाद अब इनके पास तलाक लेने के दो ही तरीके-तलाक हसन और तलाक अहसान ही उपलब्ध हैं।

 

तीन तलाक मामला : घटनाओं का कालक्रम

उच्चतम न्यायालय ने बहुमत के फैसले में कहा कि तीन तलाक अमान्य, गैरकानूनी और असंवैधानिक है। तीन तलाक की घटनाओं के कालक्रम इस प्रकार है : 16 अक्तूबर 2015 : उच्चतम न्यायालय की पीठ ने हिंदू उत्तराधिकार से संबधित एक मामले की सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश से उचित पीठ का गठन करने के लिए कहा ताकि यह पता लगाया जा सकें कि क्या तलाक के मामलों में मुस्लिम महिलाएं लैंगिक भेदभाव का सामना करती हैं।

पांच फरवरी 2016 : उच्चतम न्यायालय ने तत्कालीन अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से ‘तीन तलाक’, ‘निकाह हलाला’ और बहुविवाह की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीर्ष अदालत की मदद करने के लिए कहा।

28 मार्च : उच्चतम न्यायालय ने ‘महिलाओं और कानून : शादी, तलाक, संरक्षण, वारिस और उत्तराधिकार से संबंधित कानूनों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ पारिवारिक कानूनों के आकलन’ पर उच्च स्तरीय पैनल की रिपोर्ट दायर करने के लिए केंद्र से कहा।

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) समेत विभिन्न संगठनों को पक्षकार बनाया।

29 जून : उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मुस्लिम समाज में ‘तीन तलाक’ को ‘‘संवैधानिक रूपरेखा की कसौटी’’ पर परखा जाएगा।

सात अक्तूबर : भारत के संवैधानिक इतिहास में पहली बार केंद्र ने उच्चतम न्यायालय में इन प्रथाओं का विरोध किया और लैंगिक समानता तथा धर्मनिरपेक्षता जैसे आधार पर इस पर विचार करने का अनुरोध किया।

14 फरवरी 2017 : उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न याचिकाओं पर मुख्य मामले के साथ सुनवाई करने की अनुमति दी।

16 फरवरी : उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ‘तीन तलाक’, ‘निकाह हलाला’ और बहुविवाह को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पांच जजों की संविधान पीठ सुनवाई करेगी और फैसला देगी।

27 मार्च : एआईएमपीएलबी ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि ये मुद्दे न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार के बाहर है इसलिए ये याचिकाएं विचार योग्य नहीं हैं।

30 मार्च : उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ये मुद्दे ‘‘बहुत महत्वपूर्ण’’ हैं और इनमें ‘‘भावनाएं’’ जुड़ी हुई है और संविधान पीठ 11 मई से इन पर सुनवाई शुरू करेगी।

11 मई : उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विचार करेगी कि क्या मुस्लिमों में तीन तलाक की प्रथा उनके धर्म का मूल सिद्धान्त है।

12 मई : उच्चतम न्यायालय ने कहा कि तीन तलाक की प्रथा मुस्लिमों में शादी तोड़ने का सबसे खराब और गैर जरुरी तरीका है।

15 मई : केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि अगर तीन तलाक खत्म हो जाता है तो वह मुस्लिम समुदाय में शादी और तलाक के लिए नया कानून लेकर आएगा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत यह देखेगा कि क्या तीन तलाक धर्म का मुख्य हिस्सा है।

16 मई : एआईएमपीएलबी ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि आस्था के मामले संवैधानिक नैतिकता के आधार पर नहीं परखे जा सकते। उसने कहा कि तीन तलाक पिछले 1,400 वर्षों से आस्था का मामला है।

तीन तलाक के मुद्दे को इस आस्था के बराबर बताया कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था।

17 मई : उच्चतम न्यायालय ने एआईएमपीएलबी से पूछा कि क्या एक महिला को ‘निकाहनामा’ के समय तीन तलाक को ‘ना’ कहने का विकल्प दिया जा सकता है।

केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि तीन तलाक ना तो इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा है और ना ही यह ‘‘अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक’’ का मामला है बल्कि यह मुस्लिम पुरुषों और वंचित महिलाओं के बीच ‘‘अंतर सामुदायिक संघर्ष’’ का मामला है।

18 मई : उच्चतम न्यायालय ने तीन तलाक पर फैसला सुरक्षित रखा।

22 मई : एआईएमपीएलबी ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर करते हुए कहा कि वह दूल्हों को यह बताने के लिए ‘‘काज़ियों’’ को एक परामर्श जारी करेगा कि वे अपनी शादी तोड़ने के लिए तीन तलाक का रास्ता ना अपनाए।

एआईएलपीएलबी ने उच्चतम न्यायालय में विवाहित दंपतियों के लिए दिशा निर्देश रखे। इनमें तीन तलाक देने वाले मुस्लिमों का ‘‘सामाजिक बहिष्कार’’ करना और वैवाहिक विवादों को हल करने के लिए एक मध्यस्थ नियुक्त करना भी शामिल था।

22 अगस्त : उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ दो के मुकाबले तीन के बहुमत से फैसला दिया कि तीन तलाक के जरिए तलाक देना अमान्य, गैरकानूनी और असंवैधानिक है और यह कुरान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है

 

महिलाओं ने कहा – जीने का हक मिला

दिल्ली से करीब 350 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के एक गांव में रहने वाली 26 साल की रजिया के लिए फौरी तीन तलाक पर उच्चतम न्यायालय का फैसला उस इंसाफ की तरफ एक अहम कदम है, जिसके लिए वह सालों से लड़ाई लड़ रही है । उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में फौरी तीन तलाक पर पाबंदी का फरमान सुनाया ।

रजिया ने पूछा, ‘‘तो क्या इसका मतलब यह हुआ कि अब आखिकार मेरे मामले पर सुनवाई होगी ? क्या इसका मतलब यह है कि जिन पुलिसकर्मियों ने मुझे थाने से भगाया था, उन पर कार्रवाई होगी ? क्या मुझे अब न्याय मिलेगा ?’’ करीब दो साल पहले रजिया की जिंदगी में उस वक्त भूचाल आ गया था, जब शादी के आठ साल बाद उसका पति उसे फौरी तलाक देकर कथित तौर पर सऊदी अरब चला गया । दो बेटियों, जिसमें एक दिव्यांग थी, के जन्म के मुद्दे पर रजिया के पति ने उसे तलाक दिया था।
रजिया ने कहा, ‘‘जब मैं स्थानीय पुलिस थाने गई थी तो मुझे भगा दिया गया । पुलिस ने कहा कि मेरा मामला मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़ा है । मुझे अदालत जाने को कहा गया ।’’ सलाह के मुताबिक रजिया अदालत गई, लेकिन यह धीमी प्रक्रिया थी । रजिया ने शाहजहांपुर से फोन पर बातचीत में पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘स्थानीय अदालत में कोई प्रगति नहीं हुई है ।’

उच्चतम न्यायालय में तीन तलाक के खिलाफ याचिकाकर्ताओं में शामिल ‘बेबाक कलेक्टिव’ की हसीना खान ने कहा कि अब चुनौती यह है कि इस बड़े फैसले पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है कि रजिया जैसी हजारों महिलाओं के मामलों को कैसे मजबूत किया जा सके ।

खान ने कहा, ‘‘पहली बार संविधान के चश्मे से इस मुद्दे को देखा गया है । इसे जमीनी स्तर पर उतारने में वक्त लगेगा । लेकिन न्यायिक प्रक्रिया के अलावा, समाज में गहरे पैठे पूर्वाग्रहों पर इसका गहरा असर पड़ेगा ।’’ लखनऊ की रहने वाली 24 साल की रुबीना भी तीन तलाक की पीड़ित रही हैं । उनका कहना है कि यह फैसला उनके लिए राहत लेकर आया है जिन्हें फौरी तलाक की धमकी दी जाती है और परेशान किया जाता है ।

तीन तलाक का मुद्दा पिछले साल फरवरी में उस वक्त सामने आया था जब फौरी तीन तलाक का शिकार हुई शायरा बानो ने उच्चतम न्यायालय में अर्जी दायर कर फौरी तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला पर पाबंदी की गुहार लगाई । निकाह हलाला वह प्रथा है जिसके तहत यदि कोई तलाकशुदा महिला अपने पूर्व पति से फिर शादी करना चाहती है तो उसे पहले किसी अन्य पुरूष से शादी करनी होगी । शायरा की अर्जी के बाद देश की हजारों मुस्लिम महिलाओं ने दबाव समूहों का गठन किया और हस्ताक्षर अभियान चलाकर तीन तलाक खत्म करने की मांग की । इस बीच, ओड़िशा में रहने वाली तीन तलाक की पीड़िताओं ने भी न्यायालय के फैसले की जमकर तारीफ की है ।

21 साल की नजमा बेगम ने कहा, ‘‘इस फैसले ने मुझे लड़ने की हिम्मत दी है । आठ महीने पहले जब मेरे पति ने सऊदी अरब से फोन पर मुझे तीन बार तलाक कहा तो मेरी जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई । चार साल के वैवाहिक जीवन के बाद एक झटके में मैं उनसे अलग हो गई । मेरे माता-पिता ने मौलानाओं के पास इस मामले को उठाया, लेकिन मुझे बताया गया कि मेरी शादी खत्म हो चुकी है ।’’ लाली बीवी और रिजवाना बेगम ने भी न्यायालय के फैसले की तारीफ की ।

राजनीतिक दलों ने तीन तलाक पर न्यायालय के फैसले का स्वागत किया

भाजपा और कांग्रेस ने तीन तलाक की प्रथा को असंवैधानिक ठहराने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह लैंगिक न्याय और समानता की दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक आधुनिक समाज की तरक्की में अवरोधक माने जाने वाले इस मुद्दे पर आए न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और केंद्र सरकार से इसपर जल्दी ही एक कानून लेकर आने को कहा।

चौहान ने ट्विटर पर कहा, ‘‘हम तीन तलाक के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं और केंद्र सरकार से अपील करते हैं कि वह जल्दी ही एक कानून लेकर आए। तीन तलाक जैसी परंपराएं हमारी बहन-बेटियों के लिए मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना जैसी हैं और आधुनिक भारतीय समाज की प्रगति में रोड़ा हैं।’’ कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ‘‘यह एक अच्छा फैसला है।’’ हालांकि उन्होंने यह कहा कि जितना अहम फैसला है, उतनी ही अहम उसके पीछे की तर्कशीलता भी है। किसी को भी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इस तर्कशीलता को देखना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी इसे ‘अच्छा फैसला’ बताते हुए कहा , ‘‘हम इसका स्वागत करते हैं। यह लैंगिक न्याय और लैंगिक समानता की दिशा में आगे की ओर बढ़ते हुए उठाया गया कदम है। यह महिलाओं के लिए अच्छा है।’’ जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार जल्दी ही इसपर एक कानून लाएगी, तो उन्होंने कहा कि सरकार इसपर कानून बनाने पर विचार करेगी।

भाजपा के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी इसका स्वागत करते हुए कहा कि इसने सुधार लाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

स्वामी ने ट्विटर पर कहा, ‘‘प्रधान न्यायाधीश ने एक समझदार फैसला दिया है। उन्होंने तीन तलाक पर छह माह के लिए रोक लगाई है और संसद से कहा है कि वह इसकी खामियों को हटाए और कानून लेकर आए।’’ स्वामी ने कहा कि इससे हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच नजदीकी आएगी और यह मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ा दिन है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम खुश हैं कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही महिलाएं सुधार के लिए एकसाथ खड़ी हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ा दिन है। उनके साहस और निर्भीकता को सलाम। वे असल सुधार के लिए खड़ी रही हैं और हमें उन्हें सलाम करना चाहिए और उनके साथ खड़े होना चाहिए।’’ भाजपा के प्रवक्ता और वरिष्ठ वकील अमन सिन्हा ने कहा कि इस फैसले ने नरेंद्र मोदी सरकार के रूख को दोषमुक्त कर दिया है।

सिन्हा ने कहा कि पांच जजों वाली संवैधानिक पीठ की ओर से मुस्लिमों के बीच तीन तलाक की प्रथा को ‘असंवैधानिक’ घोषित किए जाने से मुस्लिम महिलाओं को एक सम्मानित जीवन जीने का अधिकार मिलेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने भारत सरकार के इस रूख को बरकरार रखा है कि तीन तलाक असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण है।’’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण का हवाला देते हुए वरिष्ठ वकील ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने तीन तलाक की प्रतिगामी प्रथा के कारण महिलाओं की दुखदायी स्थिति के मुद्दे को उठाया था और आज इसे असंवैधानिक ठहरा दिया गया है।’’ सिन्हा ने कहा, ‘‘तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार का रूख दोषमुक्त हो गया है। यह मुस्लिम महिलाओं को सम्मान एवं गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देगा।’’ उच्चतम न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुस्लिमों में तीन तलाक की प्रथा को ‘अमान्य’, ‘अवैध’ और ‘असंवैधानिक’ घोषित कर दिया।

 

85 साल बाद रचा इतिहास, श्रीलंका पस्त, 3-0 से भारत सीरीज जीता, विराट ने लहराया तिरंगा

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श्रीलंका के दौरे पर गई भारतीय क्रिकेट टीम ने वहां कैंडी में भारत के स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया। टीम इंडिया ने यहां तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान गाया। इस खास मौके पर टीम के प्रमुख कोच रवि शास्त्री सहित भारतीय टीम के सभी खिलाड़ी और सपोर्टिंग स्टाफ मौजूद रहे। कप्तान विराट कोहली ने झंडोत्तोलन किया। दो साल पहले विराट कोहली की कप्तानी में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में भारत की हार से शुरुआत हुई थी।

12 से 15 अगस्त 2015 तक गॉल में खेले गए टेस्ट में श्रीलंका ने भारत को टेस्ट मैच के तीसरे ही दिन 63 रनों से हरा दिया था। लेकिन इस बार टीम इंडिया ने न सिर्फ बदला लिया, बल्कि सीरीज में उसका 3-0 से सफाया भी किया। इस कारण से वहां पर इस बार स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाना टीम इंडिया के लिए कुछ खास था।

कैंडी में टीम इंडिया के इस जश्न का वीडियो बीसीसीआई ने जारी किया है। बीसीसीआई ने जो वीडियो अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया है उसमें कप्तान विराट कोहली तिरंगा फहराते नजर आ रहे हैं। तिरंगा फहराने के साथ ही राष्ट्रगान भी गाया गया। इस मौके पर टीम के सभी खिलाड़ी वहां मौजूद थे। एक दिन पहले ही विराट ब्रिगेड ने 85 साल में पहली बार विदेश में व्हाइटवॉश का भारतवासियों को तोहफ दिया था।पल्लेकले टेस्ट के तीसरे ही दिन टीम इंडिया श्रीलंका पर पारी और 72 रनों से जीत के साथ ही सीरीज में 3-0 से व्हाइटवॉश का कारनामा कर चुकी है।

 

 

तिहाड़ जेल में कैदियों को मिलेगा कला का प्रशिक्षण

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भारत में कैदियों की हालत काफी बदतर है। जेलों में न जाने कितने ऐसे कैदी हैं जो समुचित पैसों के आभाव में जेलों में सड़ रहे हैं। देश की सर्वोच्च अदालत ने भी कई बार जेलों में कैदियों की संख्या कम करने और उनकी हालत सुधारने से संबंधित अपने आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा, लेकिन निराशाजनक बात है कि विचाराधीन कैदियों और दोषियों के बुनियादी हक और मानवाधिकारों पर ध्यान नहीं दिया जाता। हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में सबसे बड़ी जेल तिहाड़ में कैदियों के लिए एक अच्छी पहल शुरू हो रह है जहां कैदियों को कला की शिक्षा दी जाएगी।

तिहाड़ जेल में जल्द ही दो स्थायी आर्ट गैलरी शुरू हो रही हैं। ललित कला अकादमी और तिहाड़ प्रशासन मिलकर इन गैलरी को चलाएंगे। इसके अलावा तिहाड़ जेल में आर्ट स्कूल भी शुरू हो रहा है, जिसमें कैदियों के लिए सालभर ललित कला अकादमी की ओर से वर्कशॉप होती रहेंगी। अकादमी से जुड़े कलाकार जेल परिसर आकर कैदियों को पेंटिंग करना सिखाएंगे। तिहाड़ समेत देश की कई जेलों में विचाराधीन और दोषी दोनों कैदियों के मौलिक अधिकार और मानवाधिकार का ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में तिहाड़ जेल की यह पहल काफी सराहनीय है।

इस पहल के तहत जेल में कैदियों में छिपे आर्ट के हुनर को निखारा जाएगा। ललित कला अकादमी के एडमिनिस्ट्रेटर सी. एस. कृष्णा शेट्टीने कहा, ‘गुस्से, लालच, जलन जैसी बुराइयों की चपेट में लोग क्राइम कर बैठते हैं। मुझे लगता है कि उनमें से कई अफसोस और पछतावे में परेशान रहते हैं। यहां आर्ट काम आ सकती है।’ उन्होंने कहा कि इससे कई कैदी यकीनन हुनरमंद भी होंगे और एक आर्ट स्कूल उन्हें बेहतर इंसान बनाने में मदद करेगा। इसी मकसद से हम यहां वर्कशॉप्स का सिलसिला शुरू कर रहे हैं। कैदियों का आर्टवर्कइसके बाद जेल प्रशासन प्रदर्शनी में रखेगा और बेच भी सकेगा।

आर्ट गैलरी की शुरुआत 19 से 25 अगस्त के बीच जेल में एक एग्जिबिशन से हो रही है, जिसमें ललित कला अकादमी की ओर से 20 मशहूर आर्टिस्ट तिहाड़ में करीब 80 कैदियों की एक वर्कशॉप लगाएंगे। ये कैदी सिर्फ तिहाड़ ही नहीं देश की अलग-अलग जेलों के कैदी होंगे। खासतौर पर उन्हें पूरी सिक्योरिटी के बीच लाया जाएगा और जेल में ही इनके रहने का इंतजाम किया जाएगा। इसके बाद कैदियों का बनाया गया आर्टवर्क 25 अगस्त से 1 सितंबर तक ललित कला अकादमी, मंडी हाउस में एक एग्जिबिशन का हिस्सा बनेगा।

तिहाड़ जेल के अंदर दो परमानेंट गैलरी भी खोली जाएंगी। कृष्णा कहते हैं, यहां हर तीन-चार महीने में ललित कला अकादमी में लगने वाली एग्जिबिशन पहुंचेगी ताकि कैदी बाहर के कलाकारों के भावों से भरे आर्टवर्क को देख सकें। कैदियों के लिए आर्ट फिल्म की भी बीच-बीच में स्क्रीनिंग करवाई जाएगी। हमारे समाज में आम आदमी या साधारण अपराधी के लिए जेल का मतलब वह जगह होती है, जहां सजा के लिए शरीर को कष्ट भोगना पड़ता है। शायद इसीलिए अपराधी वहां जाना नहीं चाहता और आम इन्सान जाने के खयाल से भी डरता है, लेकिन मानव अधिकार के मुताबिक हर इंसान को जिंदगी के कुछ मूलभूत अधिकार तो मिलने ही चाहिए। ऐसे में तिहाड़ जेल का यह कदम काफी सकारात्मक है।

मुकुन्द बोले – मेरा काम देखो, त्वचा का रंग नहीं

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भारत में सांवलेपन या काला होने पर व्यक्ति को जीवन भर हीनभावना से गुजरना पड़ता है। ऐसे में आम आदमी की बात छोड़ ही दी जाए, सेलिब्रिटी और फिल्म स्टार से लेकर क्रिकेटरों और स्पोर्ट्समैन को इससे जूझना पड़ता है। अभी हाल ही में भारतीय क्रिकेट टेस्ट टीम में शामिल हुए तमिलनाडु के सलामी बल्लेबाज अभिनव मुकंद पर भी सांवलेपन को लेकर टिप्पणियां की गईं। इन टिप्पणियों से आहत होकर अभिनव ने ट्विटर पर उन लोगों को करारा जवाब दिया है जिनका दिमाग हमेशा सांवलेपन को लेकर असहज रहता है। देश में सांवलेपन को लेकर लोगों की मानसिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके चेहरे का निखार और खूबसूरती बढ़ाने का दावा करने वाली क्रीमों का बाजार कई हजार करोड़ रुपयों का है।

अभिनव ने कहा कि इस पोस्ट के लिखने के पीछे काफी कम उम्र से स्किन के रंग को लेकर उन पर किए गए कमेंट हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के कैप्टन विराट कोहली और आर अश्विन ने अभिनव मुकुंद के इस बात का समर्थन किया है। मुकुंद के मुताबिक रंग-रूप नहीं, इंसान के काम की अहमियत होती है। अभिनव ने कहा, ‘मैं दस साल की उम्र से क्रिकेट खेल रहा हूं। मैं आज जिस मुकाम पर हूं वहां धीरे-धीरे पहुंचा हूं। यह मेरे लिए एक सम्मान की बात है कि मुझे देश की टीम से खेलने का मौका मिला। मैं आज जो कुछ भी लिख रहा हूं, उसके पीछे का मकसद अपनी ओर ध्यान खींचना या सहानुभूति हासिल करना नहीं है। मैं इस उम्मीद से लिख रहा हूं क्योंकि मैं इसके बारे में बहुत शिद्दत से सोचता आया हूं। मैं इसलिए लिख रहा हूं ताकि लोगों की सोच में बदलाव आए।’

“मैं इस बात से बेपरवाह रहा कि ऐसा करने मेरी स्किन का रंग कुछ और बदल गया। मैंने यह सब खेल के प्रति प्यार की वजह से किया।”

उन्होंने कहा कि मैं अपने देश के भीतर और बाहर 15 साल की उम्र से ही कई सारी यात्राएं की हैं। इस दौरान मेरी स्किन का रंग देख लोगों की सनक मुझे हमेशा रहस्यमयी लगे। मैं दिन-रात एक करके सूरज की रोशनी में क्रिकेट खेला और ट्रेनिंग की। इस बात से बेपरवाह रहा कि ऐसा करने मेरी स्किन का रंग कुछ और बदल गया। मैंने यह सब खेल के प्रति प्यार की वजह से किया। क्रिकेट खेलने वाले इस बात को समझते हैं। मैं तमिलनाडू से आता हूं, जो देश का सबसे गर्म इलाकों में से एक है। मैं जो कुछ भी हासिल कर सका, वह इसलिए क्योंकि मैंने तपते दिनों में खुद को तैयार किया।

अभिनव कहते हैं कि, ‘मैने अपनी स्किन के रंग के बारे में एक से एक टिप्पणियां सुनीं और उसे नजरअंदाज किया क्योंकि मेरा ध्यान बड़े लक्ष्यों की तरफ था। चूंकि मैं अपने शुरुआती दिनों से ही रंगभेदी फब्तियों के चपेट में आया, इसलिए मैंने अपना मन मजबूत बनाए रखा। ऐसे कई मौके आए, जब मैंने अपने ऊपर की गई टिप्पणियों का जवाब नहीं दिया।’ अभिनव ने ट्विटर पर अपनी बात कहते हुए कहा कि, ‘आज मैं बोल रहा हूं, तो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि हमारे देश के उन तमाम लोगों की तरफ से भी जो अपनी स्किन के रंग की वजह से अपने ऊपर किए गए कमेंट से आहत होते हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में ऐसी टिप्पणियां गाली-गलौज तक पहुंच गई हैं। गोरा रंग ही केवल लवली या हैंडसम का पैमाना नहीं है। आप जिस रंग में हो, उसमें सच्चे रहो, अपने काम पर ध्यान रखो और सहज रहो।’

अब बस एक मिस्ड कॉल पर सुनिए दादी-नानी की कहानियां 

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दादी-नानी की कहानियां केवल कुछ किस्से और फंतासियां भर नहीं हैं, वो एक परंपरा हैं। एक ऐसी विरासत जो खेल-खेल में ही बच्चों में अच्छे संस्कारों और आदर्शों को प्रोजेक्ट करती है। जैसे-जैसे संयुक्त परिवार का ढांचा चरमरा रहा है, बच्चों के पास से ये सारे मौके भी छूटते जा रहे हैं। आज की पीढ़ी के बच्चों को खुद नहीं मालूम वो कितनी बड़ी चीज से हाथ धो बैठ रहे। आज के आधुनिक समाज में दादी-नानी की कहानियां और किस्से पूरी तरह से विलुप्त होते जा रहे हैं। अब न तो दादी-नानी की कहानियां रह गई हैं और न ही आज के बच्चों में कहानियां पढ़ने या सुनने की प्रवृत्ति है। ऐसे में बच्चों में बचपना कहीं खोता जा रहा है।

लोगों की चिंताएं जाहिर हैं। कुछ महीनों पहले राजस्थान सरकार ने इस बाबत एक योजना शुरू की थी जिसमें दादी-नानी की उम्र की महिलाओं को सरकारी स्कूल में आमंत्रित किया जा रहा है। ये महिलाएं हर शनिवार बच्चों को कहानियां सुनाती हैं। इसी कड़ी में एनजीओ प्रथम बुक्स ने हाइटेक होते हुए मिस्ड कॉल पर कहानियां सुनाने की अनोखी पहल शुरू की है। एनजीओ की ओर से जारी नंबर 8033094244 पर मिस्ड कॉल देकर मुफ्त में कहानी सुनी जा सकती है। इस प्रोजेक्ट को राजस्थान, मई में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और यूपी में शुरू किया जा रहा है। एनजीओ के पास 2000 कहानियों का भंडार है।

मिस्ड कॉल देने के दो मिनट के अंदर कॉलबैक आएगी। हिंदी के लिए 1 और अंग्रेजी के लिए 2 दबाकर संबंधित भाषा में कहानी सुनी जा सकेगी। एक कॉल पर दो कहानी और एक नंबर से 40 कहानी सुनी जा सकेंगी। इसके साथ ही कहानी सुनने के बाद मोबाइल पर एक मैसेज आएगा। जिसमें अगर आप कहानी को सेव करना चाहते हैं तो उसके लिए इंटरनेट का एक लिंक दिया होगा। उस लिंक पर क्लिक करते ही सुनी गई कहानी लिखित रूप में आ जाएगी। ये सभी कहानियां www.storyweaver.org.in पर मुफ्त में भी पढ़ी जा सकती हैं।

बॉलीवुड सितारों की होगी आवाज

एनजीओ के सीईओ हिमांशु गिरी व रीजनल मैनेजर अभिषेक खन्ना के मुताबिक, ‘इन कहानियों को रेडियो मिर्ची ने हमें डब करवाकर दिया है। इसमें कुछ कहानियां बॉलिवुड की सिलेब्रिटीज की आवाज में भी हैं। इसमें तुषार कपूर, दिया मिर्जा समेत कई ऐक्टर शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य है कि बच्चों में पढ़ने और सुनने की संस्कृति को विकसित किया जाए।’

प्रथम बुक्स के मुताबिक, ‘राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा राज्यों में ये प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है। अब इसे यूपी में भी शुरू किया जा रहा है। चार राज्यों में इसे खूब पसंद किया गया।’ एनजीओ ने यूपी सरकार को इस पायलट प्रॉजेक्ट की रिपोर्ट के साथ प्रपोजल भी भेजा है ताकि स्थाई तौर पर एक ऐसा नंबर शुरू किया जाए जिसमें ज्यादा से ज्यादा बच्चों को यह सुविधा मिले।

पहली बार दिल्ली पुलिस के पोस्टर पर दिखेगी महिला कमांडो

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दिल्ली पुलिस अपनी प्रचारात्मक  गतिविधियों के लिए पोस्टर गर्ल तलाश ली है। ये एक महिला कमांडो हैं जिनका नाम है चिएवेलू थेले। एक बड़ी बात ये भी है कि वो नागालैंड की रहने वाली हैं। दरअसल, उत्तर पूर्व की रहने वाली 41 लड़कियां पहली बार दिल्ली पुलिस का हिस्सा बनीं हैं, जिन्हें स्पेशल कमांडो ट्रेनिंग दी जा रही है। ये महिला कमांडो 15 अगस्त पर दिल्ली की सुरक्षा के लिए तैयार हो रही हैं। इन्हीं कमांडो में से सर्वश्रेष्ठ कमांडो रही थेले को दिल्ली पुलिस ने अपनी पोस्टर गर्ल भी चुना है। अभी तक दिल्ली पुलिस के पोस्टरों में पारंपरिक तस्वीरें ही होती थी।

दिल्ली पुलिस ने एक साथ दो सरहानीय काम किए हैं, एक तो महिला कमांडो को अपने पोस्टर का प्रतिनिधि बनाकर दूसरा उत्तर-पूर्वी राज्य से आई एक कमांडो को दिल्ली पुलिस में इतना सम्मान देकर। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली की जनता को एक बड़ा संदेश दिया है कि किसी और राज्य से आए लोगों के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिल्ली राज्य में गाहे-बगाहे उत्तर-पूर्वी राज्य से आए लोगों के साथ बदसलूकी के केस आते रहते हैं। चलिए अब और विस्तार से जानते हैं इस जबर महिला कमांडो के बारे में…

‘स्पेशल 41’, ये उत्तर-पूर्वी राज्यों की लड़कियों का वो दस्ता है जो पहली बार दिल्ली पुलिस का हिस्सा बन स्पेशल कमांडो ट्रेनिंग ले रहा है। ये लड़कियां 15 अगस्त पर दिल्ली की सुरक्षा के लिए तैयार हैं। नागालैंड की रहने वाली सी थेले ने कभी सोचा भी नहीं था कि वो दिल्ली पुलिस का हिस्सा बनेंगी। अपने घर से हज़ारों मील दूर थेले न सिर्फ दिल्ली पुलिस में भर्ती हुई बल्कि उन्होंने अपनी सामान्य ट्रेनिंग के बाद खुद को विशेष कमांडों ट्रेनिंग के लिए तैयार किया। ट्रेनिंग के दौरान करतब करना उनके बाएं हाथ का खेल है।

दिल्ली में महिला फिदायीन के हमले के खतरे को देखते हुए भी इनकी तैयारी अहम है। अहम बात ये है कि इन लड़कियों को जो अधिकारी प्रशिक्षण दे रहे हैं, वो सारे ही उत्तर भारतीय हैं।

पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में ये वो हर जोखिम उठा रही हैं जो इन्हें एक विशेष कमांडो बनाता है। किसी खतरे की स्थिति में ऊंची इमारत से उतरना हो या चढ़ना, इसमें इन्हें महारत हो चुकी है। किसी बड़े गैंगस्टर से निपटना हो या किसी आतंकी से, इन कमांडोज को ऐसे तैयार किया गया है कि वो उन्हें सेकेंडों में धूल चटा दें। दिल्ली में महिला फिदायीन के हमले के खतरे को देखते हुए भी इनकी तैयारी अहम है।

थेले के मुताबिक, ‘हम यहां इसीलिए पुलिस में भर्ती हुए हैं कि हम दिल्ली वालों को सुरक्षा दे सकें। उन्हें ये बताएं कि हम भी आपकी तरह हैं आपके साथ हैं, कोई भेदभाव न हो।’ अहम बात ये है कि इन लड़कियों को जो ऑफिसर्स ट्रेनिंग दे रहे हैं, वो सारे ही उत्तर भारतीय हैं। इन महिला कमांडोज को हिंदी नहीं आती थी, दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिंदी सीखने में मदद की वहीं ट्रेनर्स ने भी इन महिलाओं की संस्कृति को समझाया है।

ये एक बहुत ही सुंदर उदाहरण है कि भारत के अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग बोली भाषा, संस्कृति होने के बावजूद हम सब कैसे एक साथ मिलजुल कर रह सकते हैं। इन महिला कमांडोज की दिल्ली में तैनाती से शायद वो समाज भी बने जहां उत्तर पूर्व के लोगों से भेदभाव की कोई जगह न हो। दिल्ली पुलिस अपनी इस पहल के लिए बहुत सारी तारीफ की हकदार है।

(साभार – योर स्टोरी)

 

नहीं रहे प्रसिद्ध कवि चंद्रकांत देवताले

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साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध कवि चंद्रकांत देवताले का सोमवार देर रात निधन हो गया। उनका अंतिम संस्‍कार दोपहर ढाई बजे लोधी रोड शमशान घाट पर होगा। देवताले 81 वर्ष के थे. उनकी बेटी अनुप्रिया देवताले ने बताया कि वह एक माह से बीमार थे। उनका इलाज चल रहा था लेकिन उन्‍हें बचाया नहीं जा सका। देवताले को उनकी कविता-संग्रह ‘पत्थर फेंक रहा हूं’ के लिए साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार दिया गया था। देवताले की कविता की जड़ें गांव-कस्बों और निम्न मध्यवर्ग के जीवन में हैं। उनका जन्म 1936 में गांव जौलखेड़ा, जिला बैतूल, मध्य प्रदेश में हुआ था. उनकी शुरुआती शिक्षा इंदौर से हुई जबकि पीएचडी सागर यूनिवर्सिटी, सागर से की। साठोत्तरी हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर देवताले की प्रमुख कृतियों में हड्डियों में छिपा ज्वर, दीवारों पर खून से, लकड़बग्घा हंस रहा है, हर चीज आग में बताई गई थी, आदि प्रमुख हैं। देवताले को उनकी रचनाओं के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था. जिनमें माखन लाल चतुर्वेदी पुरस्कार, मध्य प्रदेश शासन का शिखर सम्मान आदि प्रमुख हैं।

जन्माष्टमी की मिठास और आजादी का स्वाद

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इमरती

 सामग्री – ढाई कप धुली हुई उड़द दाल, तीन कप चीनी, पौने दो कप पानी, एक बड़ा चम्मच केसरिया रंग/जलेबी कलर, आधा बड़ा चम्‍मच इलायची पाउडर, आधा किलो घी, आधा बड़ा चम्मच नींबू का रस

विधि –  सबसे पहले उड़द की दाल 5-6 घंटे तक पानी में भिगोकर रख दें। तय समय बाद दाल को एक-दो बार पानी डालकर अच्छी तरह हथेलियों से मसलकर धो लें। अब सिलबट्टे या फिर मिक्सर में डालकर महीन पीस लें। अगर मिक्सर में पीस रहे हैं तो इसमें आधा कप से थोड़ा कम पानी मिला लें। (ऐसा करने से दाल अच्छी तरह पिस जाएगी।  पिसी हुई दाल को एक बड़े बर्तन में निकाल लें और इसमें जलेबी कलर मिला लें।  इस दाल को तब तक फेंटे जब तक यह फूलकर नरम न हो जाए। दाल नरम है या नहीं इसे चेक करने के लिए इस पर एक बूंद पानी गिराएं। अगर पानी दाल पर ठहर जा रहा है तो समझिए मिश्रण इमरती के लिए तैयार है। अब इस दाल को 4-5 घंटे के लिए छोड़ दें ताकि इसमें खमीर उठ जाए। एक कड़ाही में चीनी और पानी डालकर मीडियम आंच पर चढ़ा दें। जब इसमें उबाल आ जाए तो नींबू का रस डाल दीजिए. इससे चाशनी की गंदगी ऊपर आ जाएगी। इस गंदगी को कड़छी की सहायता से निकाल दें। इसे 10-12 मिनट तक और पकने दें. कड़छी से थोड़ी चाशनी लेकर उंगली और अंगूठे के बीच रख चेक करें। अगर इसमें एक तार बन रही है तो समझिए चाशनी तैयार है। इस बात का खास ध्यान रखें कि चाशनी गाढ़ी नहीं होनी चाहिए। आंच बंद कर दें।  अब एक कड़ाही में घी डालकर मध्यम आंच पर गरम होने के लिए रखें. जब यह गरम हो जाए आंच धीमी कर दें। अब दाल में इलायची पाउडर डालकर एक बार फिर से अच्छे से फेंट लें। एक मोटे कपड़े के बीचोंबीच छोटा सा छेजद कर लें. इस पर कड़छी से दाल का मिश्रण भर लें. (आप चाहें तो सॉस बॉटल का इस्तेमाल कर सकती हैं। गरम घी में इमरती डालकर मध्यम आंच पर तल लें। इसे घी में 4-5 मिनट तक तलें ताकि यह अच्छी तरह से क्रिस्प हो जाए।  इसके इमरती को चाशनी में डालते जाएं।  इसी तरीके से दाल के मिश्रण से जलेबी तल लें.

 

माखन मिश्री

सामग्री – 1 किलो दही, 250 ग्राम मिश्री, एक बड़ा चम्मच बारीक कटे हुए पिस्ता,2-3 कप पानी

विधि – सबसे पहले एक बड़े बर्तन में दही डाल लें। अगर आपके पास मथनी है तो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. नहीं तो ब्लेंडर का उपयोग कर सकते हैं। दही को ब्लेंडर से फेंटते जाएं और इससे निकलने वाले मक्खन को एक कटोरी में रखते जाएँ। दही से मक्खन निकालते वक्त इसमें थोड़ा-थोड़ा करके पानी डालते जाएंगे तो मक्खन आसानी से निकल जाएगा।- जब दही से पर्याप्त मात्रा में मक्खन निकल मथने की प्रक्रिया बंद कर दें। अब निकाले गए मक्खन में मिश्री और पिस्ता डालकर मिला लें। लीजिए तैयार माखन मिश्री प्रसाद।

 

 

 

हरी मटर की बर्फी

 

सामग्री- 1 कप हरी मटर, 1/2 कप छिले बारीक कटे पिस्‍ते (पानी में गरम कर के उसे छील लें और महीन काट लें), 3 चम्‍मच घी, 2 कप मावा, 3/4 कप शक्‍कर, 3/4 चम्‍मच हरी इलायची पावडर

विधि – सबसे पहले एक मिक्‍सर जार में हरी मटर और थोड़ा सा पानी डाल कर उसे पीस लें। फिर नॉन स्‍टिक पैन में घी गरम करें, उसमें पिसी मटर डालें और लगातार चलाते हुए उसका पानी खतम कर लें। फिर पैन में मावा डाल कर अच्‍छी तरह से मिक्‍स करें। उसके बाद इसमें शक्‍कर मिलाएं और चलाएं। अब दूसरी ओर एक एल्‍युमीनियम की ट्रे पर घी लगाएं। फिर इसमें हरी इलायची और आधे पिस्‍ते डाल कर मिक्‍स करें। इस मिश्रण को ट्रे पर डालिये और फैलाइये। ऊपर से बाकी के बचे हुए पिस्‍ते डालिये और बर्फी को ठंडा होने के लिये रख दीजिये। जब बर्फी ठंडी हो जाए, तब उसे फ्रिज में रख दीजिये और बाद में उसे निकाल कर चाकू से काट कर परोसें।